Tag: LTCG

  • एलटीसीजी टैक्स में बदलाव पर निर्मला सीतारमण ने कहा- अभी कुछ कहना जल्दबाजी, वित्त वर्ष 2027-28 के बजट की तैयारी शुरू

    एलटीसीजी टैक्स में बदलाव पर निर्मला सीतारमण ने कहा- अभी कुछ कहना जल्दबाजी, वित्त वर्ष 2027-28 के बजट की तैयारी शुरू


    नई दिल्ली । 
    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार, 13 अक्टूबर को लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (एलटीसीजी) टैक्स व्यवस्था में संभावित बदलाव को लेकर कहा कि फिलहाल इस बारे में कुछ कहना जल्दबाजी होगी। उन्होंने बताया कि अगले केंद्रीय बजट की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं और अभी यह तय करने का समय नहीं है कि सरकार किन मुद्दों पर विचार करेगी। वित्त मंत्री की टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब निवेशक पूंजीगत लाभ पर लगने वाले कर और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं में संभावित बदलाव को लेकर अपनी राय सामने रख रहे हैं।

    एक कार्यक्रम में बोलते हुए निर्मला सीतारमण ने स्वीकार किया कि भारत और विदेशों के निवेशक एलटीसीजी टैक्स को लेकर अपने विचार रख रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार इन मुद्दों पर मिलने वाले सुझावों और विचारों को गंभीरता से सुनेगी। वित्त मंत्री ने यह भी संकेत दिया कि इस चर्चा में सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) का विषय भी जुड़ा हुआ है। बाजार से जुड़े प्रतिभागियों ने यह सवाल उठाया है कि क्या अलग-अलग परिसंपत्ति वर्गों के साथ कर व्यवस्था में समान व्यवहार किया जाना चाहिए।

    सरकार वित्त वर्ष 2027-28 के केंद्रीय बजट की तैयारी कर रही है। इसे 1 फरवरी 2027 को पेश किया जाना है। एलटीसीजी टैक्स में संभावित बदलाव को लेकर अभी कोई अंतिम निर्णय घोषित नहीं किया गया है। वित्त मंत्री के बयान से स्पष्ट है कि बजट से पहले इस विषय पर निवेशकों और बाजार के अन्य प्रतिभागियों की राय सामने आ रही है, लेकिन सरकार की ओर से किसी प्रस्तावित बदलाव की पुष्टि नहीं की गई है।

    मौजूदा नियमों के अनुसार, एक साल से अधिक समय तक रखे गए सूचीबद्ध इक्विटी शेयरों और इक्विटी म्यूचुअल फंड से होने वाले दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ पर 12.5 प्रतिशत कर लगता है। हालांकि, एक वित्त वर्ष में ऐसे लाभ के 1.25 लाख रुपये तक के हिस्से पर कर छूट उपलब्ध है। इस व्यवस्था में जुलाई 2024 के केंद्रीय बजट के दौरान बदलाव किया गया था। उस समय एलटीसीजी टैक्स की दर 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 12.5 प्रतिशत कर दी गई थी। साथ ही, कर छूट की सीमा एक लाख रुपये से बढ़ाकर 1.25 लाख रुपये कर दी गई थी।

    बजट 2026 के दौरान बाजार के कुछ वर्गों को उम्मीद थी कि पूंजीगत लाभ कर की दर घटाई जा सकती है या कर छूट की सीमा बढ़ाई जा सकती है। हालांकि, उस बजट में मौजूदा पूंजीगत लाभ कर व्यवस्था को बरकरार रखा गया था। दूसरी ओर, फ्यूचर्स और ऑप्शंस यानी एफएंडओ कारोबार पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स में बढ़ोतरी की गई थी। इस कारण पूंजीगत लाभ कर और प्रतिभूति लेनदेन कर से जुड़े मुद्दे बाजार की चर्चाओं में बने हुए हैं।

    उद्योग संगठनों और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने कई बार यह दलील दी है कि भारत की पूंजीगत लाभ कर व्यवस्था घरेलू शेयर बाजारों की प्रतिस्पर्धात्मकता को प्रभावित कर सकती है और निवेश के प्रवाह पर असर डाल सकती है। इसी बीच, इस वर्ष विदेशी निवेशक लंबे समय तक भारतीय इक्विटी बाजारों में शुद्ध बिकवाल बने रहे हैं। इन परिस्थितियों में कर व्यवस्था से जुड़े संभावित बदलावों पर निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है।

    वित्त मंत्री की टिप्पणियों के बाद मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में तेजी दर्ज की गई। कारोबार के अंत में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांक एक प्रतिशत से अधिक की बढ़त के साथ बंद हुए। हालांकि, एलटीसीजी टैक्स में बदलाव को लेकर सरकार की ओर से अभी कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है। आगामी बजट प्रक्रिया के दौरान इस विषय पर मिलने वाले सुझावों और सरकार के रुख पर नजर रहेगी।

  • एलटीसीजी टैक्स हटाने पर चर्चा से शेयर बाजार में तेजी, सेंसेक्स 1,109 अंक उछला और निफ्टी 22,721 के पार पहुंचा

    एलटीसीजी टैक्स हटाने पर चर्चा से शेयर बाजार में तेजी, सेंसेक्स 1,109 अंक उछला और निफ्टी 22,721 के पार पहुंचा

    नई दिल्ली ।भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को जोरदार तेजी दर्ज की गई। कारोबार के दौरान प्रमुख सूचकांकों में मजबूत बढ़त देखने को मिली। सेंसेक्स 1,109.10 अंक यानी 1.54 प्रतिशत चढ़कर 73,033.78 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 358.60 अंक यानी 1.60 प्रतिशत की तेजी के साथ 22,721.95 पर बंद हुआ। बाजार में खरीदारी का प्रमुख केंद्र आईटी शेयर रहे। इसके साथ ही अन्य क्षेत्रों के शेयरों में भी मजबूती देखने को मिली।

    बाजार के प्रदर्शन में आईटी क्षेत्र सबसे आगे रहा। निफ्टी आईटी सूचकांक 5.22 प्रतिशत की बढ़त के साथ दिन का सबसे बड़ा लाभ दर्ज करने वाला क्षेत्रीय सूचकांक बना। इसके अलावा निफ्टी रियल्टी, निफ्टी सर्विसेज, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी इंडिया डिफेंस, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी ऑटो और निफ्टी मेटल में भी तेजी दर्ज की गई। ज्यादातर क्षेत्रीय सूचकांक हरे निशान में रहे, जबकि निफ्टी फार्मा लगभग बिना बदलाव के बंद हुआ।

    बड़ी कंपनियों के शेयरों के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप श्रेणियों में भी खरीदारी देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप 100 सूचकांक 624.65 अंक यानी 1.06 प्रतिशत बढ़कर 59,459.20 पर पहुंच गया। वहीं, निफ्टी स्मॉलकैप 100 सूचकांक 21.60 अंक यानी 0.11 प्रतिशत की मामूली तेजी के साथ 19,447.40 पर बंद हुआ। इन आंकड़ों से बाजार की विभिन्न श्रेणियों में सकारात्मक रुख दिखाई दिया, हालांकि स्मॉलकैप शेयरों में बढ़त तुलनात्मक रूप से सीमित रही।

    सेंसेक्स में शामिल कंपनियों में एचसीएल टेक, टीसीएस, टेक महिंद्रा और इन्फोसिस समेत कई प्रमुख शेयरों में तेजी रही। हिंदुस्तान यूनिलीवर, ट्रेंट, बजाज फिनसर्व, बजाज फाइनेंस, टाइटन, बीईएल, महिंद्रा एंड महिंद्रा, भारती एयरटेल, एसबीआई, अल्ट्राटेक सीमेंट, एचडीएफसी बैंक, टाटा स्टील, आईटीसी, आईसीआईसीआई बैंक, एशियन पेंट्स, एक्सिस बैंक और अदाणी पोर्ट्स भी बढ़त के साथ बंद हुए। दूसरी ओर, कोटक महिंद्रा बैंक, मारुति सुजुकी और इटरनल के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई।

    बाजार में तेजी की एक प्रमुख वजह लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स यानी एलटीसीजी टैक्स को लेकर सामने आई चर्चा रही। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि बजट से संबंधित बातचीत के दौरान सरकार एलटीसीजी टैक्स हटाने को लेकर लोगों की राय जानना चाहती है। इक्विटी निवेश पर लगने वाले कर को लेकर निवेशकों की ओर से लगातार सवाल उठाए जाने के बीच इस बयान को बाजार की धारणा से जोड़कर देखा गया। हालांकि, टैक्स हटाने के किसी अंतिम फैसले की जानकारी नहीं दी गई।

    इसके अतिरिक्त, प्रौद्योगिकी कंपनियों की उम्मीद से बेहतर कमाई ने कॉर्पोरेट मुनाफे में बढ़ोतरी को लेकर निवेशकों का भरोसा मजबूत किया। इससे बड़ी कंपनियों के शेयरों में खरीदारी को समर्थन मिला। रुपये में स्थिरता और बॉन्ड यील्ड में गिरावट ने भी बाजार के माहौल को बेहतर बनाने में भूमिका निभाई। इन परिस्थितियों के बीच वित्तीय क्षेत्र के शेयरों पर भी निवेशकों का ध्यान बढ़ा।

    मंगलवार के कारोबार में आईटी शेयरों की अगुवाई, एलटीसीजी टैक्स पर चर्चा और कंपनियों की कमाई से जुड़ी उम्मीदों ने बाजार को सहारा दिया। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में एक प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की गई। अब निवेशकों की नजर एलटीसीजी टैक्स को लेकर आगे होने वाली चर्चाओं और कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन से जुड़े संकेतों पर बनी रहेगी।

  • शेयर बाजार से हुई बड़ी कमाई पर सही निवेश रणनीति अपनाने से टैक्स बोझ काफी कम या शून्य तक किया जा सकता है।

    शेयर बाजार से हुई बड़ी कमाई पर सही निवेश रणनीति अपनाने से टैक्स बोझ काफी कम या शून्य तक किया जा सकता है।

    नई दिल्ली। शेयर बाजार में लंबी अवधि तक धैर्य और समझदारी के साथ किया गया निवेश कई लोगों को बड़ी आर्थिक सफलता दिलाता है। वर्षों तक निवेश बनाए रखने के बाद जब निवेशक अपने शेयर बेचकर करोड़ों रुपये का लाभ कमाते हैं, तब उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती टैक्स की होती है। आमतौर पर बड़ी कमाई के साथ भारी टैक्स देनदारी भी जुड़ जाती है, लेकिन आयकर नियमों में ऐसे प्रावधान मौजूद हैं जिनका सही तरीके से उपयोग करके इस टैक्स बोझ को काफी कम किया जा सकता है। यही वजह है कि अब बड़ी संख्या में निवेशक टैक्स प्लानिंग के कानूनी विकल्पों की ओर ध्यान दे रहे हैं।

    हाल के समय में एक ऐसी व्यवस्था चर्चा का विषय बनी हुई है जिसके तहत शेयर बाजार से हुई लंबी अवधि की कमाई पर लगने वाले टैक्स को कम करने या कुछ परिस्थितियों में शून्य तक लाने का अवसर मिल सकता है। यह व्यवस्था खास तौर पर उन निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है जिन्होंने लंबे समय तक शेयरों या इक्विटी आधारित निवेश को होल्ड करने के बाद बड़ा लाभ अर्जित किया है। हालांकि इस लाभ का फायदा सभी लोगों को स्वतः नहीं मिलता, बल्कि इसके लिए कुछ निर्धारित शर्तों का पालन करना जरूरी होता है।

    नियमों के अनुसार यदि कोई निवेशक अपनी शेयर बिक्री से प्राप्त राशि को निर्धारित समय सीमा के भीतर एक रिहायशी संपत्ति में निवेश करता है, तो उसे टैक्स में राहत मिलने की संभावना बनती है। इस व्यवस्था का उद्देश्य निवेशकों को केवल टैक्स छूट देना नहीं बल्कि पूंजी को उत्पादक और दीर्घकालिक परिसंपत्तियों की ओर बढ़ावा देना भी माना जाता है। यही कारण है कि निवेश और संपत्ति निर्माण को एक साथ जोड़कर देखने की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है।

    हालांकि यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना भी जरूरी है कि केवल करोड़ों रुपये की कमाई होने भर से टैक्स स्वतः समाप्त नहीं हो जाता। इसके लिए निवेशक को समय सीमा, निवेश राशि और पात्रता से जुड़े नियमों का पूरी तरह पालन करना पड़ता है। यदि कोई व्यक्ति निर्धारित शर्तों को पूरा नहीं करता या प्रक्रिया में चूक करता है, तो उसे टैक्स राहत का लाभ नहीं मिल सकता। कुछ मामलों में छूट वापस भी ली जा सकती है और अतिरिक्त देनदारी का सामना करना पड़ सकता है।

    विशेषज्ञ मानते हैं कि बड़े निवेश निर्णय केवल लाभ कमाने तक सीमित नहीं होने चाहिए, बल्कि टैक्स प्रबंधन को भी निवेश रणनीति का हिस्सा बनाना चाहिए। कई निवेशक केवल रिटर्न पर ध्यान देते हैं और टैक्स प्रभावों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिसके कारण अंतिम लाभ उम्मीद से काफी कम हो सकता है। इसलिए निवेश के साथ कानूनी और वित्तीय प्रावधानों की जानकारी रखना भी उतना ही आवश्यक माना जाता है।

    बदलते निवेश माहौल में अब केवल पैसा कमाना ही पर्याप्त नहीं रह गया है, बल्कि उसे समझदारी से संरक्षित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण हो गया है। सही योजना, समय पर निर्णय और नियमों की स्पष्ट जानकारी के साथ निवेशक अपनी मेहनत की कमाई को अधिक सुरक्षित और प्रभावी तरीके से बढ़ा सकते हैं। यही कारण है कि अब निवेश जगत में टैक्स प्लानिंग को आर्थिक सफलता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।