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  • बिजली के तार के सहारे बचाई जान, लखनऊ हादसे के जीवित बचे युवक की दर्दनाक आपबीती

    बिजली के तार के सहारे बचाई जान, लखनऊ हादसे के जीवित बचे युवक की दर्दनाक आपबीती


    नई दिल्ली । लखनऊ के अलीगंज इलाके में एक कमर्शियल बिल्डिंग में लगी भीषण आग ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं। इस दर्दनाक हादसे में 15 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हो गए। आग की भयावहता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जान बचाने के लिए लोगों को बिजली के तारों के सहारे नीचे उतरना पड़ा। हादसे से जीवित बच निकले मोहम्मद आसिफ ने उस खौफनाक मंजर का वर्णन किया जिसे सुनकर किसी के भी रोंगटे खड़े हो सकते हैं।

    आसिफ ने बताया कि दोपहर के भोजन के बाद वे अपने साथियों के साथ काम पर लौटने की तैयारी कर रहे थे। तभी कुछ कर्मचारियों ने आकर बताया कि नीचे कहीं शॉर्ट सर्किट हुआ है और आग लग गई है। शुरुआत में किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही मिनटों में स्थिति इतनी भयावह हो जाएगी।

    उन्होंने बताया कि जब लोग बाहर निकलने के लिए स्टूडियो के मुख्य दरवाजे की ओर पहुंचे तो एक बड़ी समस्या सामने आ गई। प्रवेश और निकास के लिए लगाए गए बायोमेट्रिक सिस्टम ने काम करना बंद कर दिया था क्योंकि बिजली आपूर्ति बाधित हो चुकी थी। फिंगरप्रिंट मशीन काम नहीं कर रही थी और दरवाजा भी नहीं खुल रहा था। इससे कई लोग अंदर ही फंस गए।

    किसी तरह कुछ लोग दूसरे कमरे की ओर पहुंचे और वहां से बाहर निकलने का प्रयास किया, लेकिन तब तक सीढ़ियों में घना धुआं भर चुका था। हालात लगातार बिगड़ रहे थे। लोगों ने तौलियों और कपड़ों से अपना चेहरा ढककर सांस लेने की कोशिश की, लेकिन धुएं के कारण कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था।

    आसिफ के अनुसार जब उन्हें कोई सुरक्षित रास्ता नहीं मिला तो उन्होंने खिड़की के पास से गुजर रहे एक बिजली के तार को देखा। जान बचाने के लिए उन्होंने उसी तार का सहारा लिया और नीचे उतरने का जोखिम उठाया। उनके साथ चार से पांच अन्य लोग भी किसी तरह नीचे उतरने में सफल रहे। यह कदम बेहद खतरनाक था, लेकिन उस समय उनके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं था।

    उन्होंने बताया कि कई लोग दम घुटने से बचने के लिए वॉशरूम में छिप गए थे। उन्हें उम्मीद थी कि वहां धुआं कम होगा, लेकिन दुर्भाग्यवश वे बाहर नहीं निकल सके। हादसे में कई लोगों की मौत का कारण धुएं से दम घुटना बताया जा रहा है।

    आसिफ ने अपने साथी जयंत गुप्ता का जिक्र करते हुए बताया कि उन्होंने कांच तोड़कर बाहर निकलने की कोशिश की। हालांकि नीचे कूदते समय वे लोहे की रेलिंग पर गिर गए और गंभीर रूप से घायल हो गए। उनका कूल्हा टूट गया और वे लंबे समय तक सड़क पर मदद का इंतजार करते रहे।

    घटना की प्रत्यक्षदर्शी माला निगम ने भी हादसे की भयावहता को याद करते हुए बताया कि आग इतनी तेज थी कि किसी के लिए भी अंदर जाकर लोगों को बचाना लगभग असंभव हो गया था। उन्होंने कहा कि ग्राउंड फ्लोर पर मौजूद पालतू जानवरों की दुकान से लोगों ने जानवरों को बचाने की कोशिश की, लेकिन ऊपर फंसे कई लोगों तक मदद नहीं पहुंच सकी।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार छत का रास्ता भी बंद था, जिससे कई लोग सुरक्षित स्थान तक नहीं पहुंच पाए। घबराए बच्चे अपने परिजनों को फोन कर मदद मांग रहे थे, लेकिन आग और धुएं ने उन्हें कोई मौका नहीं दिया।

    यह हादसा एक बार फिर भवन सुरक्षा, अग्नि सुरक्षा उपकरणों की कार्यक्षमता और आपातकालीन निकास व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे हादसों से बचने के लिए भवनों में सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन और नियमित निरीक्षण बेहद जरूरी है।

  • लखनऊ अग्निकांड: 1200 झोपड़ियां राख, 6 बच्चे अब भी लापता, CM योगी ने दिए जांच और राहत के निर्देश

    लखनऊ अग्निकांड: 1200 झोपड़ियां राख, 6 बच्चे अब भी लापता, CM योगी ने दिए जांच और राहत के निर्देश

    लखनऊ। विकासनगर सेक्टर-12 में रिंग रोड किनारे स्थित अवैध बस्ती में बुधवार शाम भीषण आग लग गई। कुछ ही समय में आग ने विकराल रूप लेते हुए करीब 1200 झोपड़ियों को अपनी चपेट में ले लिया। झोपड़ियों में रखे लगभग 100 गैस सिलिंडर फटने से पूरे इलाके में जोरदार धमाके हुए और भगदड़ मच गई।

    घटना के बाद 22 दमकल गाड़ियों ने देर रात तक आग बुझाने का प्रयास किया। इस दौरान आग की तीव्रता इतनी अधिक थी कि इलाके में दहशत फैल गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार लगभग 50 मवेशियों के जलने की आशंका जताई जा रही है, हालांकि प्रशासन ने इसकी पुष्टि नहीं की है।

    सूचना में देरी का आरोप, आग ने मिनटों में लिया विकराल रूप
    स्थानीय लोगों का आरोप है कि आग लगने के बाद समय पर पुलिस और दमकल विभाग को सूचना दी गई, लेकिन मदद देर से पहुंची। इस बीच आग तेजी से फैलती गई और एक के बाद एक झोपड़ियां जलने लगीं। बताया गया कि आग एक झोपड़ी से शुरू हुई और कुछ ही देर में पूरी बस्ती को अपनी चपेट में ले लिया। लोगों ने पुलिस कंट्रोल रूम पर कॉल लगाने में भी देरी और तकनीकी दिक्कतों की बात कही है।

    भगदड़ में 6 बच्चे लापता, सर्च ऑपरेशन जारी
    भीषण हादसे के दौरान मची अफरा-तफरी में दो परिवारों के छह बच्चे लापता हो गए हैं, जिनमें एक परिवार के चार और दूसरे के दो बच्चे शामिल हैं। पुलिस और प्रशासन की टीमें देर रात तक बच्चों की तलाश में जुटी रहीं और आसपास के इलाकों में सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है।

    पथराव और हंगामा, प्लॉट मालिक पर आग लगाने के आरोप
    घटना के बाद गुस्साए लोगों ने प्लॉट मालिक के घर का घेराव कर हंगामा किया और उस पर आग लगवाने का आरोप लगाया। इस दौरान कुछ लोगों ने पथराव भी किया, जिसे रोकने के लिए पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। आरोप है कि प्लॉट मालिक कुछ दिन से झोपड़ियां हटाने के लिए दबाव बना रहा था।

    वीडियो बनाने और ट्रैफिक जाम से बिगड़े हालात
    घटना स्थल पर भीड़ द्वारा वीडियो बनाने और रास्ता बाधित करने से राहत कार्य प्रभावित हुआ। दमकल की गाड़ियां भी जाम में फंस गईं, जिसके बाद पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। इसी दौरान कुछ लोगों ने पुलिस पर पथराव किया, जिसमें सिविल डिफेंस के वार्डन समेत कई लोग घायल हो गए। इसके कारण इलाके में करीब दो किलोमीटर लंबा जाम लग गया और यातायात पूरी तरह बाधित हो गया।

    आग पर काबू, राहत और पुनर्वास की तैयारी
    दमकल विभाग ने रात करीब 10 बजे तक आग पर आंशिक नियंत्रण पा लिया। प्रशासन ने आसपास के लगभग 30 घरों को खाली कराया और कई सिलिंडर सुरक्षित बाहर निकाले। घटना की गंभीरता को देखते हुए उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए गए हैं। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और पीड़ितों के लिए भोजन व आवास की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।