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  • लखनऊ: गोमती का जलस्तर बढ़ने से निवासियों की बढ़ी चिंता, प्रशासन से बचाव की तैयारियों की मांग

    लखनऊ: गोमती का जलस्तर बढ़ने से निवासियों की बढ़ी चिंता, प्रशासन से बचाव की तैयारियों की मांग

    लखनऊ। गोमती नदी का जलस्तर बढ़ने से एमार गोमती ग्रीन्स के निवासियों की चिंता बढ़ गई है। जलस्तर में और इजाफा होने पर सोसाइटी के आसपास जलभराव की आशंका है, ऐसे में आरडब्ल्यूए ने प्रशासन से समय रहते बचाव की तैयारियां करने और विद्युत सब-स्टेशन समेत अन्य उपकरणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।

    आरडब्ल्यूए ने जिला प्रशासन, आपदा प्रबंधन विभाग, नगर निगम और विद्युत विभाग से मौके का निरीक्षण कर संभावित स्थिति से निपटने के लिए जरूरी इंतजाम पहले से करने की अपील की है। आरडब्ल्यूए के मुताबिक, गोमती के जलस्तर पर लगातार निगरानी के साथ सोसाइटी के आसपास जलभराव की संभावित जगहों को भी चिह्नित किया जाना चाहिए।

    रात में बढ़ा जलस्तर तो मुश्किल बढ़ सकती है
    आरडब्ल्यूए अध्यक्ष राज किशोर राजेश ने कहा कि यदि रात के समय भी गोमती का जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो किसी आकस्मिक स्थिति में राहत और बचाव शुरू करने में समय लग सकता है। इसलिए प्रशासन और संबंधित विभागों के बीच तत्काल समन्वय जरूरी है, ताकि जरूरत पड़ते ही बिना देरी के राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया जा सके।

    उन्होंने कहा कि मौजूदा स्थिति को देखते हुए संभावित जलभराव वाले स्थानों पर पहले से पंप और जनरेटर की व्यवस्था की जानी चाहिए। साथ ही राहत एवं बचाव से जुड़े जरूरी उपकरण भी तैयार रखे जाएं।

    अफवाहों पर ध्यान न दें, आधिकारिक सूचना मानें
    आरडब्ल्यूए ने स्पष्ट किया कि प्रशासन से तैयारियां करने की मांग का उद्देश्य किसी तरह की दहशत फैलाना नहीं है। यह संभावित जोखिम को देखते हुए समय रहते संबंधित विभागों का ध्यान आकर्षित करने के लिए किया जा रहा है।

    निवासियों से भी अपील की गई है कि वे गोमती के बढ़ते जलस्तर को लेकर किसी भी तरह की अफवाह पर भरोसा न करें। प्रशासन, आपदा प्रबंधन विभाग और अन्य अधिकृत एजेंसियों की ओर से जारी सूचनाओं को ही सही मानें।

    सब-स्टेशन और बिजली उपकरणों की सुरक्षा पर जोर
    गोमती का जलस्तर बढ़ने पर सोसाइटी की विद्युत व्यवस्था भी प्रभावित होने की आशंका है। इसे देखते हुए आरडब्ल्यूए ने विद्युत विभाग से इलेक्ट्रिक सब-स्टेशन और अन्य विद्युत उपकरणों की सुरक्षा व्यवस्था की तत्काल समीक्षा करने की मांग की है।

    आरडब्ल्यूए ने यह भी कहा है कि जरूरत पड़ने पर बिजली आपूर्ति बनाए रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की तैयारी पहले से रखी जाए, ताकि जलभराव की स्थिति में सोसाइटी के निवासियों को अतिरिक्त परेशानी का सामना न करना पड़े।

    आरडब्ल्यूए ने सुझाए ये इंतजाम
    – गोमती नदी के जलस्तर की लगातार निगरानी की जाए।
    – सोसाइटी के आसपास जलभराव वाले संभावित स्थानों का निरीक्षण किया जाए।
    – जरूरत वाले स्थानों पर पंप और जनरेटर की व्यवस्था पहले से रखी जाए।
    – राहत एवं बचाव से जुड़े उपकरण तैयार रखे जाएं।
    – आपदा प्रबंधन टीम के संपर्क नंबर निवासियों को उपलब्ध कराए जाएं।
    – जरूरत पड़ने पर निकासी और बचाव की योजना तत्काल लागू करने की तैयारी रखी जाए।

  • लखनऊ पुस्तक महोत्सव में CM योगी की युवाओं से अपील, पाठ्यक्रम के साथ अच्छी किताबें खरीदें

    लखनऊ पुस्तक महोत्सव में CM योगी की युवाओं से अपील, पाठ्यक्रम के साथ अच्छी किताबें खरीदें

    लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने युवाओं से पाठ्यक्रम की किताबों के साथ साहित्य, महापुरुषों की आत्मकथाएं, धार्मिक ग्रंथ और वैज्ञानिक शोध से जुड़ी पुस्तकें पढ़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि युवाओं को अपना ‘बुक बैंक’ बनाना चाहिए। किताबें व्यक्ति को नई दिशा देने के साथ जीवन की मुश्किल परिस्थितियों में मार्गदर्शन भी कर सकती हैं।

    मुख्यमंत्री शनिवार को लखनऊ विश्वविद्यालय में आयोजित 5वें गोमती पुस्तक महोत्सव-2026 के उद्घाटन समारोह में युवाओं को संबोधित कर रहे थे। इससे पहले उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में लगी पुस्तक प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने बच्चों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पुस्तक ‘एग्जाम वॉरियर्स’ वितरित की और इसे हर बच्चे के लिए पढ़ने योग्य बताया।

    योगी ने कहा कि ‘एग्जाम वॉरियर्स’ केवल स्कूली विद्यार्थियों के लिए उपयोगी नहीं है, बल्कि हर युवा और नागरिक के लिए मार्गदर्शक बन सकती है। जीवन में हर व्यक्ति को किसी न किसी परीक्षा से गुजरना पड़ता है। कभी डिग्री और सर्टिफिकेट के लिए तो कभी जीवन की अलग-अलग परिस्थितियों में। मुश्किल समय में जब हिम्मत जवाब देने लगती है, तब ऐसी किताबें संबल दे सकती हैं।

    ‘युवा किताब नहीं पढ़ता, यह कहना अन्याय’

    मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कहना सही नहीं है कि आज का युवा किताबों से दूर हो गया है या सोशल मीडिया पर अपना समय बर्बाद कर रहा है। उनके मुताबिक जरूरत युवाओं तक किताबें पहुंचाने की व्यवस्था करने की है।

    उन्होंने बताया कि लखनऊ में पुस्तक महोत्सव शुरू करने का प्रस्ताव आने पर उन्होंने तत्कालीन अपर मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी से चर्चा कर इसे प्रोत्साहित करने को कहा था। लखनऊ में आयोजन का अच्छा परिणाम मिलने के बाद उन्होंने गोरखपुर में भी पुस्तक महोत्सव कराने का सुझाव दिया। वहां लखनऊ से भी ज्यादा लोगों की भागीदारी हुई और अधिक पुस्तकों की बिक्री हुई। इससे यह धारणा गलत साबित हुई कि आज का युवा किताबें नहीं पढ़ता।

    ज्ञान को संकुचित दायरे में न बांधें

    योगी ने कहा कि समाज और राष्ट्र भी तब कमजोर होते हैं, जब वे अपनी क्षमता खोने लगते हैं और अपनी विरासत से दूर हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा को पहले सीमित दायरे में बांधने का प्रयास किया गया, जिसके दुष्परिणाम समाज और देश को भुगतने पड़े।

    उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश भारतीय ज्ञान परंपरा की महत्वपूर्ण भूमि रहा है। लखनऊ से करीब 70 किलोमीटर दूर नैमिषारण्य में ऋषियों ने चिंतन और ज्ञान की परंपरा को आगे बढ़ाया। काशी ज्ञान और संवाद की भूमि रही है। वहीं मुजफ्फरनगर स्थित शुक्रतीर्थ को करीब 5 हजार वर्ष पहले श्रीमद्भागवत महापुराण की पहली कथा के वाचन की परंपरा से जोड़ा जाता है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि ज्ञान के रास्ते खुले रखने चाहिए। केवल स्कूल, कॉलेज या विश्वविद्यालय में पाठ्यक्रम पढ़ लेना ही व्यक्ति को पूर्ण रूप से ज्ञानवान नहीं बनाता। समाज, देश और दुनिया को समझने के लिए अलग-अलग विषयों और विचारों से परिचित होना जरूरी है।

    9 दिन तक चलेगा पुस्तक महोत्सव

    योगी ने कहा कि पुस्तक महोत्सव युवाओं, छात्रों, लेखकों और प्रकाशकों को एक मंच देता है। यहां ज्ञानवर्धक, मनोरंजक और रोचक पुस्तकों से परिचित होने का अवसर मिलता है। गोमती पुस्तक महोत्सव-2026 अगले 9 दिनों तक चलेगा। इस दौरान पुस्तकों के विमोचन के साथ लेखकों से संवाद और उनकी रचनात्मक यात्रा को समझने का अवसर भी मिलेगा।

    उन्होंने कहा कि आत्मकथाओं के जरिए महापुरुषों के संघर्ष को जाना जा सकता है और वैज्ञानिकों के शोध व उनकी यात्राओं को पुस्तकों के माध्यम से समझा जा सकता है। किताबें रचनात्मकता को आगे बढ़ाने और जीवन को नई दिशा देने का माध्यम बन सकती हैं।

    57,600 ग्राम पंचायतों में पुस्तकालय की व्यवस्था

    मुख्यमंत्री ने डिजिटल युग का जिक्र करते हुए कहा कि तकनीक ने गांव और शहर के बीच की दूरी कम की है। ग्राम सचिवालयों में केवल प्रधान और ग्राम पंचायत अधिकारी के बैठने की व्यवस्था नहीं की गई, बल्कि ग्रामीणों के लिए कॉन्फ्रेंस रूम और डिजिटल लाइब्रेरी भी बनाई गई हैं।

    उन्होंने बताया कि प्रदेश की 57,600 ग्राम पंचायतों में पुस्तकालय की व्यवस्था की गई है और इनमें नेशनल बुक ट्रस्ट की पुस्तकें उपलब्ध कराई गई हैं। उनके मुताबिक सुविधा मिलने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों के युवा अपनी प्रतिभा का बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।

    स्कूलों की तस्वीर बदली, स्मार्ट क्लास की सुविधा

    योगी ने बेसिक और माध्यमिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों की पुरानी स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले कई स्कूलों के भवन और व्यवस्थाएं जर्जर थीं। ऑपरेशन कायाकल्प के जरिए स्कूलों की स्थिति में बदलाव किया गया। भवनों का निर्माण हुआ और स्मार्ट क्लास जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं।

    चित्रकूट का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि एक साल के अंतराल में स्कूल की स्थिति में ऐसा बदलाव आया कि तीसरी कक्षा की एक छात्रा ने डिजिटल लाइब्रेरी संचालित करके दिखाई और पाठ्यक्रम से जुड़ी सामग्री भी प्रदर्शित की। उनके मुताबिक पहले सुविधाओं के अभाव में बच्चों को अपनी क्षमता दिखाने का अवसर नहीं मिलता था।

    किताब खरीदें और अपना ‘बुक बैंक’ तैयार करें

    मुख्यमंत्री ने युवाओं से कहा कि जब भी किताब खरीदने का अवसर मिले तो पाठ्यक्रम की पुस्तकों के साथ ऐसी किताबों को भी प्राथमिकता दें, जो रचनात्मकता और सकारात्मक सोच विकसित करें। अच्छी साहित्यिक कृति, धार्मिक ग्रंथ, महापुरुष की आत्मकथा या वैज्ञानिक शोध पर आधारित पुस्तक जीवनभर प्रेरणा दे सकती है।

    उन्होंने युवाओं से खाली समय में किताब पढ़ने की आदत विकसित करने और अपना ‘बुक बैंक’ तैयार करने की अपील की। साथ ही कहा कि युवाओं को अपनी राह खुद तैयार करनी है और पुस्तक मेले इसमें महत्वपूर्ण मंच साबित हो सकते हैं।

    ‘नेशनल बुक ट्रस्ट की किताबों का सबसे बड़ा खरीदार यूपी’

    योगी ने गोमती पुस्तक महोत्सव के आयोजकों, नेशनल बुक ट्रस्ट और सहयोगी संस्थाओं का आभार जताते हुए कहा कि इसे केवल लखनऊ तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। पुस्तक मेले को प्रदेश के दूसरे हिस्सों तक ले जाने की जरूरत है और उत्तर प्रदेश सरकार इसमें पूरा सहयोग करेगी।

    उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार नेशनल बुक ट्रस्ट की पुस्तकों की सबसे बड़ी खरीदार है। गांवों, स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में पुस्तकालय उपलब्ध कराने का काम किया जा रहा है। यह समय की जरूरत है और ज्ञान की इस परंपरा को और व्यापक बनाने की आवश्यकता है।

  • लखनऊ में कार के अंदर मिला फाइनेंस कर्मी का शव, दुर्गंध आने पर लोगों को हुई जानकारी

    लखनऊ में कार के अंदर मिला फाइनेंस कर्मी का शव, दुर्गंध आने पर लोगों को हुई जानकारी


    लखनऊ।
    आशियाना थाना क्षेत्र में शुक्रवार को सड़क किनारे खड़ी एक कार से युवक का शव मिलने से हड़कंप मच गया। कार से दुर्गंध आने पर आसपास के लोगों को इसकी जानकारी हुई, जिसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

    मृतक की पहचान रायबरेली जिले के बरहा, थाना कोतवाली निवासी ज्ञानेंद्र सिंह (36) के रूप में हुई है। वह पिछले कुछ दिनों से लखनऊ के आशियाना स्थित बंगला बाजार इलाके में पत्नी प्रियंका और साढ़े तीन साल की बेटी के साथ रह रहे थे।

    निजी कंपनी में करते थे लोन फाइनेंस का काम
    परिजनों के मुताबिक, ज्ञानेंद्र सिंह निजी क्षेत्र में लोन फाइनेंस का काम करते थे। शुक्रवार को उनका शव सड़क किनारे खड़ी कार के अंदर मिला। कार से दुर्गंध आने के बाद लोगों ने पुलिस को सूचना दी। जानकारी मिलते ही पुलिस टीम के साथ फोरेंसिक टीम भी मौके पर पहुंची और घटनास्थल से जरूरी साक्ष्य जुटाए। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

    मौत की वजह जानने के लिए पोस्टमार्टम
    पुलिस के अनुसार, फिलहाल मौत के कारणों की स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। प्रारंभिक जांच में पुलिस सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर मामले की पड़ताल कर रही है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और घटनास्थल से मिले साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • अलीगंज अग्निकांड में बड़ा एक्शन, LDA के वर्तमान और पूर्व अधिकारियों से होगी पूछताछ

    अलीगंज अग्निकांड में बड़ा एक्शन, LDA के वर्तमान और पूर्व अधिकारियों से होगी पूछताछ


    लखनऊ। अलीगंज स्थित कोचिंग सेंटर में हुए भीषण अग्निकांड की जांच अब नए चरण में पहुंच गई है। इस मामले में गठित विशेष जांच दल (SIT) ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के 100 से अधिक वर्तमान और पूर्व अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल शुरू कर दी है। वर्ष 2014 से 2026 तक इस भवन से जुड़े अधिकारियों का रिकॉर्ड जुटाया जा रहा है और सूची तैयार कर एसआईटी को सौंपी जाएगी। इसके बाद संबंधित अधिकारियों के बयान भी दर्ज किए जाएंगे।

    22 जून को अलीगंज के सेक्टर-डी स्थित चार मंजिला कोचिंग कॉम्प्लेक्स में लगी भीषण आग में 15 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी। हादसे के बाद एलडीए ने पांच सदस्यीय जांच समिति गठित की थी, जिसने अपनी रिपोर्ट प्राधिकरण के उपाध्यक्ष को सौंप दी है।

    रिपोर्ट में सामने आईं कई गंभीर खामियां
    जांच समिति की रिपोर्ट के अनुसार भवन में निर्धारित मानकों से अधिक निर्माण किया गया था। इसके अलावा आने-जाने का रास्ता बेहद संकरा था, जबकि आग लगने की स्थिति में सुरक्षित निकासी और बचाव के पर्याप्त इंतजाम भी नहीं थे। प्रारंभिक जांच में इन्हीं कमियों को हादसे की प्रमुख वजह माना गया है।

    अब एसआईटी यह जांच करेगी कि भवन निर्माण की स्वीकृति, निरीक्षण और मानकों के पालन में किन अधिकारियों की क्या भूमिका रही और कहीं प्रशासनिक लापरवाही तो नहीं हुई।

    हादसे का घटनाक्रम
    22 जून को दोपहर करीब 2:15 बजे अलीगंज के सेक्टर-डी स्थित चार मंजिला इमारत में आग लग गई। स्थानीय लोगों ने शुरुआती स्तर पर आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन आग तेजी से फैलने लगी। दोपहर 2:30 बजे फायर ब्रिगेड को सूचना दी गई। करीब 3:10 बजे पहली दमकल मौके पर पहुंची और आग की गंभीरता को देखते हुए कुल 13 दमकल गाड़ियों को बुलाया गया। कई घंटे की मशक्कत के बाद शाम लगभग 6:30 बजे आग पर काबू पाया गया। इस दर्दनाक हादसे में 15 युवाओं की मौत हो गई।

    कोचिंग संस्थानों पर भी कार्रवाई
    हादसे के बाद प्रशासन ने शहर के प्रमुख कोचिंग हब काकादेव में बड़े पैमाने पर अभियान चलाया। जांच के दौरान भवन और अग्नि सुरक्षा मानकों के उल्लंघन पाए जाने पर फिजिक्स वाला समेत 22 कोचिंग संस्थानों को सील कर दिया गया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वाले अन्य संस्थानों के खिलाफ भी कार्रवाई जारी रहेगी।

    अब सभी की नजर एसआईटी जांच पर है, जिससे यह स्पष्ट होगा कि इस हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।

  • अखिलेश यादव का बीजेपी पर हमला, बोले- संवेदनहीनता का चेहरा सामने आया, जनता सब समझ चुकी है

    अखिलेश यादव का बीजेपी पर हमला, बोले- संवेदनहीनता का चेहरा सामने आया, जनता सब समझ चुकी है


    लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि प्रदेश और देश की जनता अब भाजपा नेताओं के भाषण सुनने के मूड में नहीं है, बल्कि जवाब चाहती है। अपने बयान में उन्होंने एक कथित वायरल वीडियो का जिक्र करते हुए कहा कि उससे भाजपा नेताओं की वास्तविक कार्यशैली और व्यवहार लोगों के सामने आ गया है।

    अखिलेश यादव ने कहा कि अहंकार इंसान का विवेक छीन लेता है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन लोगों ने किसी नेता को ईमानदारी, सादगी और जनसेवा का प्रतीक मान रखा था, उनका भ्रम अब टूट चुका है। उनके अनुसार हाल ही में सामने आए एक कथित वीडियो ने उस बनाई गई छवि को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है।

    सपा प्रमुख ने कहा कि किसी परिवार पर दुख का पहाड़ टूटने के समय संवेदना और सहानुभूति दिखाने के बजाय यदि कोई सार्वजनिक रूप से कठोर भाषा और व्यवहार अपनाता है, तो यह उसकी संवेदनहीनता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि इस घटना के बाद लोगों के सामने उस नेता का वास्तविक चेहरा उजागर हो गया है और कथित नायकत्व का मायाजाल बिखर गया है।

    अखिलेश यादव ने दावा किया कि इस घटना से सबसे अधिक निराश वे समर्थक हुए हैं, जो अब तक संबंधित नेता की छवि का प्रचार करते रहे थे। उन्होंने कहा कि लोग अब यह सोचने को मजबूर हैं कि यदि ऐसी घटना उनके अपने परिवार के साथ होती, तो उनकी प्रतिक्रिया क्या होती। उनके अनुसार इस घटना ने समाज में व्यापक चर्चा को जन्म दिया है।

    उन्होंने यह भी कहा कि यह पहली बार नहीं है जब इस तरह के व्यवहार पर सवाल उठे हैं। अखिलेश ने आरोप लगाया कि इससे पहले भी पत्रकारों और अधिकारियों के साथ कथित रूप से अभद्र व्यवहार के मामले सामने आ चुके हैं। उनका कहना था कि जिसके सार्वजनिक व्यवहार में संयम नहीं होता, उसके नेतृत्व पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।

    सपा अध्यक्ष ने व्यंग्य करते हुए कहा कि अब यह भी कहा जा सकता है कि वायरल वीडियो कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई से बनाया गया है, लेकिन जनता सब समझती है। उन्होंने दावा किया कि लोग वास्तविकता और दिखावे के बीच का अंतर पहचान चुके हैं।

    अपने बयान के अंत में अखिलेश यादव ने कहा कि महिलाओं के सम्मान से जुड़ी किसी भी घटना को समाज गंभीरता से लेता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रकरण से भाजपा की छवि को नुकसान पहुंचा है और महिलाओं के बीच इसका व्यापक असर देखने को मिलेगा।

  • लखनऊ में खुलेआम गुंडई, युवक पर बीच सड़क हमला CCTV वीडियो से हड़कंप

    लखनऊ में खुलेआम गुंडई, युवक पर बीच सड़क हमला CCTV वीडियो से हड़कंप

    लखनऊ । उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से कानून-व्यवस्था को झकझोर देने वाली एक घटना सामने आई है, जहां चौक थाना क्षेत्र में स्थित केजीएमयू के बाहर बीच सड़क एक युवक के साथ दबंगों द्वारा बेरहमी से मारपीट की गई। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद इलाके में दहशत का माहौल बन गया है।

    वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि कुछ युवक मिलकर एक व्यक्ति को घेरकर बेल्ट और डंडों से लगातार पीट रहे हैं। मारपीट इतनी बेरहमी से की जा रही है कि वहां से गुजरने वाले लोग भी कुछ देर के लिए ठहर जाते हैं, लेकिन किसी ने बीच-बचाव करने की कोशिश नहीं की। यह घटना शनिवार की बताई जा रही है और केजीएमयू परिसर के बाहर हुई थी।

    फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इस हमले के पीछे क्या कारण था। न ही अब तक यह जानकारी सामने आई है कि पीड़ित युवक की ओर से किसी तरह की शिकायत पुलिस को दी गई है या नहीं। घटना के कारणों को लेकर अभी स्थिति पूरी तरह साफ नहीं है और पुलिस जांच का इंतजार किया जा रहा है।

    घटना का वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश है। लोगों का कहना है कि इस तरह की सार्वजनिक हिंसा बेहद चिंताजनक है और पुलिस को स्वतः संज्ञान लेकर तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। नागरिकों ने मांग की है कि वीडियो में दिख रहे सभी आरोपियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लग सके।

    स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि सार्वजनिक स्थान पर इस तरह की खुलेआम गुंडई से आम लोगों में असुरक्षा की भावना बढ़ रही है। फिलहाल पुलिस की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन जांच की उम्मीद जताई जा रही है।

  • ढाई करोड़ की कार से 45 रुपये का गमला चोरी! सीएम योगी ने सुनाया लखनऊ का दिलचस्प किस्सा

    ढाई करोड़ की कार से 45 रुपये का गमला चोरी! सीएम योगी ने सुनाया लखनऊ का दिलचस्प किस्सा



    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने मंगलवार को लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों पर तीखा कटाक्ष किया। उन्होंने एक मजेदार लेकिन गंभीर उदाहरण देते हुए बताया कि लोग महंगी कारों में घूमते हैं, लेकिन नगर निगम द्वारा लगाए गए 45 रुपये के गमले तक चोरी कर ले जाते हैं। सीएम योगी की यह टिप्पणी सुनकर कार्यक्रम में मौजूद लोग भी मुस्कुरा उठे।

    दरअसल, मुख्यमंत्री लखनऊ नगर निगम के “स्वच्छ-सुंदर-समर्थ लखनऊ” अभियान के तहत आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने 413 करोड़ रुपये की विभिन्न जनकल्याणकारी परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास भी किया। अपने संबोधन में उन्होंने साफ-सफाई और शहर की सुंदरता बनाए रखने में नागरिकों की जिम्मेदारी पर विशेष जोर दिया।

    सीएम योगी ने कहा कि शहर को साफ और सुंदर बनाए रखना सिर्फ नगर निगम, महापौर, पार्षद या सफाई कर्मचारियों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें आम नागरिकों की भागीदारी भी जरूरी है। उन्होंने लोगों से अपील की कि घर का कूड़ा कूड़ेदान में डालें, प्लास्टिक का इस्तेमाल कम करें, नालियों में कचरा न फेंकें और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान न पहुंचाएं।

    इसी दौरान मुख्यमंत्री ने एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि नगर निगम द्वारा लगाए गए गमलों को लोग चोरी कर ले जाते हैं। उन्होंने बताया, “हमने देखा कि एक बहुत महंगी कार आई और उसमें बैठे लोग 45 रुपये का गमला उठाकर ले गए। सीसीटीवी कैमरों में सब रिकॉर्ड हो गया। जितना पैसा उस कार में तेल भराने में लग रहा होगा, उतने में कई नए गमले आ जाते।”

    मुख्यमंत्री ने हंसते हुए कहा कि एक समय उनके मन में आया कि गमला चोरी करने वालों की तस्वीर चौराहे पर लगवा दी जाए, ताकि लोगों को समझ में आए कि छोटी लालच की वजह से शहर की सुंदरता को नुकसान पहुंचाना ठीक नहीं है।

    उन्होंने यह भी कहा कि सरकार जो पैसा विकास कार्यों पर खर्च करती है, वह किसी व्यक्ति विशेष का नहीं बल्कि जनता का पैसा होता है। इसलिए उसकी रक्षा करना और सही उपयोग सुनिश्चित करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के विजन के अनुसार जनता का पैसा जनता के हित में खर्च किया जा रहा है और इसी वजह से प्रदेश में विकास साफ दिखाई दे रहा है।

    सीएम योगी का यह बयान सोशल मीडिया पर भी तेजी से चर्चा में आ गया, जहां लोग इसे मजेदार अंदाज में साझा कर रहे हैं, लेकिन साथ ही सरकारी संपत्ति की सुरक्षा और नागरिक जिम्मेदारी पर गंभीर संदेश भी बता रहे हैं।

  • लखनऊ पहुंचे RSS प्रमुख मोहन भागवत, तीन दिवसीय दौरे में संगठन और सरकार के कामकाज की होगी समीक्षा

    लखनऊ पहुंचे RSS प्रमुख मोहन भागवत, तीन दिवसीय दौरे में संगठन और सरकार के कामकाज की होगी समीक्षा

    नई दिल्ली। मोहन भागवत रविवार को तीन दिवसीय दौरे पर लखनऊ पहुंचे, जहां वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की कई अहम बैठकों में हिस्सा लेंगे। इस दौरान संघ के संगठनात्मक कामकाज, अभियान और आगामी रणनीति पर विस्तृत मंथन किया जाएगा।

    सूत्रों के मुताबिक, भागवत का यह दौरा उत्तर प्रदेश की राजनीतिक और संगठनात्मक तैयारियों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। माना जा रहा है कि वे आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए संघ की तैयारियों की समीक्षा करेंगे और जमीनी स्तर पर काम कर रहे प्रचारकों से सीधा फीडबैक लेंगे।

    लखनऊ प्रवास के दौरान संघ प्रमुख विभिन्न आयामों से जुड़े पदाधिकारियों और प्रचारकों के साथ अलग-अलग बैठकें करेंगे। इन बैठकों में संगठन के विस्तार, सामाजिक अभियानों और कार्यकर्ताओं की सक्रियता पर चर्चा होगी। साथ ही प्रदेश में चल रही गतिविधियों और उनके प्रभाव का भी आकलन किया जाएगा।

    जानकारी के अनुसार, इस दौरे में सरकार और संगठन के बीच समन्वय को लेकर भी चर्चा हो सकती है। संघ नेतृत्व प्रदेश सरकार के कामकाज और संगठन की सक्रियता को लेकर फीडबैक जुटाएगा, ताकि आगे की रणनीति को और मजबूत बनाया जा सके।

    संघ के प्रचारकों से मिलने वाले सुझावों और अनुभवों के आधार पर आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की जाएगी। संगठन की कोशिश जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ और प्रभाव को और मजबूत करने की है।

    गौरतलब है कि मोहन भागवत इससे पहले फरवरी में भी लखनऊ आए थे। उस दौरान भी उन्होंने कई संगठनात्मक बैठकों में हिस्सा लिया था। मौजूदा दौरे को उसी सिलसिले का विस्तार माना जा रहा है, जिसमें संघ लगातार अपने नेटवर्क और रणनीति की समीक्षा कर रहा है।

  • लखनऊ मेयर विवाद: हाई कोर्ट के आदेश के बाद सपा पार्षद ललित किशोर तिवारी को दिलाई गई शपथ, मेयर के अधिकार पहले ही सीज

    लखनऊ मेयर विवाद: हाई कोर्ट के आदेश के बाद सपा पार्षद ललित किशोर तिवारी को दिलाई गई शपथ, मेयर के अधिकार पहले ही सीज




    नई दिल्ली(New Delhi)।
    लखनऊ नगर निगम में लंबे समय से चल रहे राजनीतिक विवाद के बीच आखिरकार सपा पार्षद ललित किशोर तिवारी को शपथ दिला दी गई। यह शपथ मेयर सुषमा खर्कवाल द्वारा हाई कोर्ट के आदेश के बाद कराई गई, क्योंकि अदालत ने समय सीमा तय करते हुए शपथ न दिलाने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी थी।

    दरअसल, पार्षद निर्वाचित होने के करीब 5 महीने बाद भी ललित किशोर तिवारी को शपथ नहीं दिलाई गई थी। मामला लगातार हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जिसके बाद इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने सख्त रुख अपनाते हुए आदेश जारी किया था कि 29 मई तक हर हाल में शपथ दिलाई जाए, अन्यथा मेयर को कोर्ट में पेश होना पड़ेगा और व्यक्तिगत हलफनामा देना होगा।

    कोर्ट ने इस मामले में मेयर सुषमा खर्कवाल के अधिकार भी सीज कर दिए थे, जिससे प्रशासनिक स्तर पर दबाव और बढ़ गया था। गुरुवार को आए आदेश के बाद मामला और तेज हो गया और रविवार को मेयर ने स्वयं सपा पार्षद को शपथ दिलाई।

    जानकारी के अनुसार, मेयर ने पहले अपनी तबीयत खराब होने और अस्पताल में भर्ती होने की जानकारी दी थी, लेकिन शनिवार को डिस्चार्ज होने के बाद उन्होंने शपथ प्रक्रिया पूरी करने की पुष्टि की।

    यह पूरा विवाद 2023 के नगर निकाय चुनाव से जुड़ा है। वार्ड संख्या-73 फैजुल्लागंज-3 में भाजपा प्रत्याशी प्रदीप कुमार शुक्ला ने सपा प्रत्याशी ललित किशोर तिवारी को हराया था। बाद में सपा प्रत्याशी ने भाजपा उम्मीदवार पर शपथ पत्र में गलत जानकारी देने का आरोप लगाते हुए याचिका दायर की थी।

    सुनवाई के बाद कोर्ट ने भाजपा प्रत्याशी का नामांकन रद्द करते हुए ललित किशोर तिवारी को विजेता घोषित किया था। इसके बावजूद शपथ न दिलाए जाने को लेकर मामला लगातार विवादों में रहा, जो अब जाकर कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद समाप्त हुआ।

  • हरिद्वार में होगा प्रतीक यादव का अस्थि विसर्जन, अपर्णा यादव परिवार संग होंगी रवाना; यादव परिवार में पसरा मातम

    हरिद्वार में होगा प्रतीक यादव का अस्थि विसर्जन, अपर्णा यादव परिवार संग होंगी रवाना; यादव परिवार में पसरा मातम



    नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी संस्थापक मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव के निधन के बाद अब परिवार हरिद्वार में अस्थि विसर्जन की तैयारी में जुट गया है। जानकारी के मुताबिक, उनकी पत्नी अपर्णा यादव जल्द ही पूरे परिवार के साथ हरिद्वार रवाना होंगी, जहां गंगा घाट पर विधि-विधान के साथ अस्थियों का विसर्जन किया जाएगा।

    प्रतीक यादव का बुधवार तड़के निधन हो गया था। उन्हें गंभीर हालत में लखनऊ के सिविल अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। गुरुवार को लखनऊ के भैंसाकुंड धाम में उनका अंतिम संस्कार किया गया। हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार शुक्रवार को फूल चुनने की रस्म पूरी की गई, जिसके बाद अब परिवार हरिद्वार जाकर गंगा में अस्थि विसर्जन करेगा।

    सूत्रों के मुताबिक, प्रतीक यादव लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। उन्हें फेफड़ों से जुड़ी दिक्कत बताई जा रही थी और कुछ समय पहले उनका इलाज मेदांता अस्पताल में भी चला था। वहीं, पोस्टमॉर्टम से पहले उनके शरीर पर चोट के निशान मिलने की चर्चा भी सामने आई, जिसके बाद मामले को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि परिवार की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

    बताया जा रहा है कि घटना के समय अपर्णा यादव लखनऊ में मौजूद नहीं थीं। वह असम के मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने गई थीं। पति के निधन की सूचना मिलते ही वह तुरंत लखनऊ लौट आईं।

    प्रतीक और अपर्णा यादव की शादी साल 2011 में हुई थी। दोनों एक-दूसरे को स्कूल के दिनों से जानते थे और बाद में यह दोस्ती रिश्ते में बदल गई। परिवार के करीबी लोगों के मुताबिक, दोनों के बीच गहरी समझ और मजबूत रिश्ता था। अब प्रतीक यादव के निधन से परिवार और समर्थकों में शोक का माहौल है।