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  • साल 2026 का आखिरी चंद्र ग्रहण आज… जानिए किस राशि पर इसका क्या होगा प्रभाव?

    साल 2026 का आखिरी चंद्र ग्रहण आज… जानिए किस राशि पर इसका क्या होगा प्रभाव?


    नई दिल्ली।
    आज 28 अगस्त को साल का आखिरी व दूसरा चंद्र ग्रहण (Chandra Grahan 2026) लग चुका है. जिस चंद्र ग्रहण की हम बात कर रहे हैं, वह सामान्य या पूर्ण चंद्र ग्रहण नहीं है. यह उपच्छाया चंद्र ग्रहण (Penumbral Lunar Eclipse) है, जिसे मालिन्य चंद्र ग्रहण भी कहा जाता है. भारतीय समय के अनुसार, इसका समापन दोपहर 12 बजकर 31 मिनट पर होगा।

    ज्योतिषीय दृष्टि से यह उपछाया चंद्र ग्रहण कुंभ राशि और शतभिषा नक्षत्र में लगेगा. शतभिषा नक्षत्र के स्वामी राहु हैं, जबकि कुंभ राशि के स्वामी शनि हैं. ऐसे में ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस ग्रहण में शनि और राहु का प्रभाव भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


    मेष राशि

    मेष राशि वालों के लिए यह ग्रहण अनुकूल माना जा रहा है. करियर में बड़ा अवसर मिल सकता है और लंबे समय से सफलता के लिए प्रयास कर रहे लोगों को अच्छे परिणाम मिलने की संभावना है. स्थान परिवर्तन के योग भी बन सकते हैं और यह बदलाव आपके लिए लाभकारी साबित हो सकता है. हालांकि अगले 15 दिन से एक महीने के दौरान यात्राओं में सावधानी रखें. किसी भी यात्रा में लापरवाही न करें.

    उपाय: ग्रहण समाप्त होने के बाद शिव मंदिर जाकर भगवान शिव को जल अर्पित करें. ऐसा करना आपके लिए शुभ माना जाता है.


    वृषभ राशि

    वृषभ राशि के लोगों के रुके हुए काम इस दौरान पूरे होने की संभावना है. लंबे समय से चली आ रही समस्याओं का समाधान मिल सकता है. अगर कोई विवाद, झगड़ा या कानूनी मामला चल रहा है तो उसमें भी राहत मिलने की संभावना है. करियर के मामले में स्थिति सामान्य से बेहतर रह सकती है, लेकिन कोई बड़ा जोखिम लेने से बचें. अपने महत्वपूर्ण कार्यों को समय पर पूरा करने का प्रयास करें.

    उपाय: ग्रहण समाप्त होने के बाद भगवान शिव को एक लोटा जल अर्पित करें.

    मिथुन राशि
    मिथुन राशि के लोगों को अगले 15 दिन से एक महीने तक विशेष सावधानी बरतने की जरूरत हो सकती है. स्वास्थ्य का ध्यान रखें और बेवजह के विवाद या कानूनी मामलों से बचने का प्रयास करें. संतान को लेकर चिंता बढ़ सकती है. संतान के स्वास्थ्य या करियर को लेकर परेशानियां सामने आ सकती हैं. ऐसे में उनसे बातचीत करें और उनकी समस्याओं को समझने का प्रयास करें. यात्राओं में विशेष सावधानी रखें. अगर बहुत जरूरी न हो तो लंबी यात्राओं से बचना बेहतर होगा.

    उपाय: ग्रहण समाप्त होने के बाद किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दूध का दान करें.


    कर्क राशि

    कर्क राशि के लोगों के लिए यह समय थोड़ा चुनौतीपूर्ण रह सकता है. करियर में अधिक मेहनत करनी पड़ सकती है. नौकरी और व्यापार को लेकर सतर्क रहें और किसी तरह की लापरवाही न करें. स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें. चोट, दुर्घटना या अचानक स्वास्थ्य संबंधी परेशानी से बचने के लिए सावधानी जरूरी है. परिवार की महिलाओं, विशेष रूप से माता, पत्नी, बेटी या बहन के स्वास्थ्य पर भी ध्यान दें. अगले एक महीने तक काम का उतना ही दबाव लें, जितना आप आसानी से संभाल सकें.

    उपाय: ग्रहण समाप्त होने के बाद किसी जरूरतमंद व्यक्ति को चीनी का दान करें.


    सिंह राशि

    सिंह राशि वालों को स्वास्थ्य को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है. पाचन और हड्डियों से संबंधित समस्याओं पर ध्यान दें. चोट या फ्रैक्चर जैसी स्थिति से बचने के लिए सावधानी रखें. करियर में किसी तरह का जोखिम न लें. नौकरीपेशा लोग विशेष रूप से अपने काम में लापरवाही से बचें. पारिवारिक और वैवाहिक जीवन में भी तनाव की स्थिति बन सकती है, इसलिए धैर्य से काम लें.

    उपाय: ग्रहण समाप्त होने के बाद किसी जरूरतमंद व्यक्ति को चावल का दान करें.


    कन्या राशि

    कन्या राशि वालों को स्वास्थ्य के मामले में सावधानी रखनी चाहिए. चोट या दुर्घटना से बचने के लिए सतर्क रहें. कान, नाक और गले से जुड़ी परेशानियों का ध्यान रखें. लिखापढ़ी, दस्तावेजों और पैसे के लेन-देन में विशेष सावधानी बरतें. किसी भी कागज पर बिना जांचे हस्ताक्षर न करें. पारिवारिक और सामाजिक रिश्तों में भी सोच-समझकर व्यवहार करें, क्योंकि छोटी गलतफहमी विवाद का कारण बन सकती है.

    उपाय: ग्रहण समाप्त होने के बाद किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दूध का दान करें.


    तुला राशि

    तुला राशि वालों को धन के मामले में सावधान रहने की जरूरत है. अचानक खर्च या आर्थिक नुकसान की स्थिति बन सकती है. पैसों के लेन-देन में जल्दबाजी न करें. स्वास्थ्य के मामले में भी सावधान रहें. पाचन और पेट से जुड़ी समस्याएं परेशान कर सकती हैं. चोट या दुर्घटना से बचने के लिए सतर्कता जरूरी है. करियर में कोई लापरवाही न करें और नौकरीपेशा लोग अपने काम को गंभीरता से लें.

    उपाय: ग्रहण समाप्त होने के बाद किसी जरूरतमंद व्यक्ति को चीनी का दान करें.


    वृश्चिक राशि

    वृश्चिक राशि के लोगों के पारिवारिक जीवन में कुछ परेशानियां आ सकती हैं. माता-पिता, पति-पत्नी या अन्य करीबी लोगों के साथ मतभेद हो सकते हैं. बेवजह का तनाव और विवाद बढ़ने की संभावना है. धन और संपत्ति के मामले में अगले एक महीने तक सावधानी रखें. प्रॉपर्टी खरीदने, बेचने या बड़ा निवेश करने में जल्दबाजी न करें. रिश्तों और मित्रता में भी धैर्य से काम लें.

    उपाय: ग्रहण समाप्त होने के बाद किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दूध का दान करें.


    धनु राशि

    धनु राशि वालों के लिए यह ग्रहण अनुकूल परिणाम दे सकता है. करियर में लंबे समय से चली आ रही रुकावटें दूर हो सकती हैं. रुका हुआ काम पूरा होने और करियर में सफलता मिलने की संभावना है. आर्थिक मामलों में भी सुधार देखने को मिल सकता है. फंसा हुआ या लंबे समय से रुका पैसा मिलने की संभावना है. हालांकि भाई-बहन के साथ संबंधों का ध्यान रखें और उनके स्वास्थ्य को लेकर भी सजग रहें.

    उपाय: ग्रहण समाप्त होने के बाद शिव मंदिर जाकर भगवान शिव को जल अर्पित करें.


    मकर राशि

    मकर राशि वालों को स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना चाहिए. आंख, कान, नाक और गले से जुड़ी परेशानियों से सावधान रहें. नौकरी या व्यापार जैसा चल रहा है, उसे फिलहाल स्थिरता से चलने दें. करियर में कोई बड़ा जोखिम न लें. नई नौकरी, स्थान परिवर्तन, प्रॉपर्टी खरीदने या अन्य बड़े फैसलों में जल्दबाजी से बचें.

    उपाय: ग्रहण समाप्त होने के बाद किसी जरूरतमंद व्यक्ति को चावल का दान करें.

    कुंभ राशि

    यह ग्रहण कुंभ राशि में लग रहा है, इसलिए कुंभ राशि वालों को विशेष रूप से अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखने की जरूरत बताई जा रही है. स्वास्थ्य के मामले में लापरवाही न करें. रिश्तों और संबंधों में भी सतर्क रहें. गुस्से या विवाद की वजह से कोई करीबी रिश्ता प्रभावित न हो, इसका ध्यान रखें. महत्वपूर्ण कामों को टालने से बचें, क्योंकि देरी आपके लिए परेशानी का कारण बन सकती है.

    उपाय: ग्रहण समाप्त होने के बाद किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दूध का दान करें.


    मीन राशि

    मीन राशि वालों के मन पर इस ग्रहण का असर पड़ने की बात कही जा रही है. मानसिक तनाव, चिंता और बेचैनी बढ़ सकती है. बेवजह की बातों को लेकर ज्यादा सोचने से बचें. स्थान परिवर्तन के योग भी बन सकते हैं. ऐसे में जीवन या करियर से जुड़े बदलाव सामने आ सकते हैं. भावनात्मक रूप से खुद को मजबूत रखें और जल्दबाजी में कोई फैसला न लें. यात्रा और दुर्घटना के मामलों में भी सावधानी बरतें.

    उपाय: ग्रहण समाप्त होने के बाद किसी जरूरतमंद व्यक्ति को चीनी का दान करें.

  • चंद्र ग्रहण खत्म होने के बाद करें इन 5 चीजों का दान, जानिए क्‍या है वजह ?

    चंद्र ग्रहण खत्म होने के बाद करें इन 5 चीजों का दान, जानिए क्‍या है वजह ?


    नई दिल्ली। इस साल का दूसरा और अंतिम चंद्र ग्रहण (Lunar Eclipse) 28 अगस्त को सावन पूर्णिमा (Sawan Purnima) के दिन लगेगा। यह आंशिक चंद्र ग्रहण होगा, लेकिन भारत (India) में दिखाई नहीं देगा। ऐसे में यहां इसका सूतक काल (Sutak period) भी मान्य नहीं होगा। हालांकि, ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार ग्रहण के दौरान चंद्रमा पीड़ित अवस्था में माना जाता है। इससे मानसिक अशांति और नकारात्मकता बढ़ने की मान्यता है। इन्हीं को दूर करने के लिए ग्रहण समाप्त होने के बाद दान-पुण्य करने की परंपरा है।

    ग्रहण के बाद दान का क्या है महत्व?
    धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक ग्रहण के दौरान मंत्र जाप और ईश्वर का ध्यान करना शुभ माना जाता है। ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करके जरूरतमंदों को दान करने की परंपरा है। माना जाता है कि इससे नकारात्मकता दूर होती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। हालांकि, दान हमेशा श्रद्धा और बिना अहंकार के करने की सलाह दी जाती है।

    1. अन्न का करें दान
    ग्रहण समाप्त होने के बाद जरूरतमंदों को भोजन कराना या अन्न दान करना शुभ माना जाता है। गेहूं, चावल और दाल जैसी खाद्य सामग्री का दान किया जा सकता है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार इससे चंद्र दोष के नकारात्मक प्रभाव को कम करने में मदद मिल सकती है।

    2. जरूरतमंदों को धन दें
    ग्रहण के बाद अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंद व्यक्ति को धन का दान किया जा सकता है। धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है और कुंडली में चंद्रमा की स्थिति मजबूत होती है। इससे धन संबंधी परेशानियां कम होने की मान्यता है।

    3. दीप दान करें
    चंद्र ग्रहण के बाद दीप दान को भी विशेष शुभ माना जाता है। परंपरा के अनुसार पवित्र नदी के किनारे मिट्टी का दीपक जलाकर प्रवाहित किया जाता है। यदि नदी के किनारे जाना संभव न हो तो घर में भी शाम के समय चंद्रमा का स्मरण करते हुए दीपक जला सकते हैं। मान्यता है कि इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।

    4. चांदी या मोती का दान
    ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार चंद्रमा का संबंध चांदी और मोती से माना जाता है। ऐसे में ग्रहण समाप्त होने के बाद अपनी सामर्थ्य के अनुसार चांदी या मोती का दान किया जा सकता है। माना जाता है कि इससे मानसिक तनाव कम करने और कुंडली में चंद्रमा से जुड़े नकारात्मक प्रभावों को शांत करने में मदद मिल सकती है।

    5. सफेद चीजों का दान
    सफेद रंग का संबंध भी चंद्रमा से माना जाता है। इसलिए ग्रहण के बाद जरूरतमंदों को दूध, चीनी, चावल, सफेद मिठाई या सफेद वस्त्र जैसी चीजें दान करने की परंपरा है। ज्योतिष के अनुसार इससे मन को शांति मिलने और सकारात्मकता बढ़ने की मान्यता है।

    ध्यान रखें: ये उपाय पारंपरिक धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं। इनके प्रभाव और परिणाम व्यक्ति की आस्था, परिस्थितियों, स्थान और अन्य कारकों के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। इन्हें सामान्य धार्मिक जानकारी के तौर पर ही लिया जाना चाहिए, किसी निश्चित लाभ की गारंटी के रूप में नहीं।

  • MP: चंद्रगहण के दौरान दतिया के इस प्रसिद्ध मंदिर के पट नहीं हुए बंद, जानिए इसकी वजह?

    MP: चंद्रगहण के दौरान दतिया के इस प्रसिद्ध मंदिर के पट नहीं हुए बंद, जानिए इसकी वजह?


    दतिया।
    सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse) या चंद्र ग्रहण (Lunar Eclipse) के दौरान एक तरफ जहां देशभर के अधिकांश मंदिरों के पट श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिए जाते हैं वहीं मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के दतिया स्थित श्री पीताम्बरा मंदिर (Shri Pitambara Temple) में परंपरा अलग है। यहां ग्रहणकाल में भी मंदिर के पट बंद नहीं होते और मां बगुलामुखी स्वरूपा पीताम्बरा माई (Mother Bagulamukhi Swarupa Pitambara Mai) अपने भक्तों को प्रतिदिन की तरह दर्शन देती हैं।

    आमतौर पर ग्रहण को शास्त्रों में विशेष काल माना गया है। इस दौरान मंदिरों में पूजा-पाठ रोक दिया जाता है और ग्रहण समाप्ति के बाद शुद्धिकरण की प्रक्रिया के उपरांत ही दर्शन शुरू होते हैं। लेकिन दतिया की पीताम्बरा पीठ में वर्षों से चली आ रही परंपरा के अनुसार ग्रहणकाल को साधना और मंत्र-जाप के लिए अत्यंत सिद्ध समय माना जाता है। मंदिर से जुड़े संतों और श्रद्धालुओं के अनुसार यह परंपरा श्री स्वामीजी महाराज के समय से चली आ रही है। उसी कालखंड से ग्रहण के दौरान मंदिर में अनवरत जाप और साधना की परंपरा स्थापित हुई जो आज भी निरंतर जारी है।


    चंद्रगहण पर क्यों बंद नहीं होता पीतांबरा पीठ में दर्शन

    ग्रहण शुरू होते ही मंदिर परिसर में विशेष मंत्रोच्चार प्रारंभ हो जाता है और ग्रहण समाप्ति तक बिना रुके जाप चलता रहता है मां बगुलामुखी, जिन्हें दशमहाविद्याओं में से एक माना जाता है तंत्र-साधना की अधिष्ठात्री देवी मानी जाती हैं। ऐसी मान्यता है कि ग्रहणकाल में किया गया जाप और साधना कई गुना अधिक फलदायी होता है। यही कारण है कि देशभर से साधक और भक्त ग्रहण के समय विशेष रूप से दतिया पहुंचते हैं और मां के दरबार में साधना करते हैं। ग्रहण के दौरान मंदिर में अनुशासन और व्यवस्था बनाए रखने के लिए विशेष प्रबंध किए जाते हैं। श्रद्धालु शांतिपूर्वक मां के दर्शन करते हैं और साधना में लीन रहते हैं। जैसे ही ग्रहण समाप्त होता है वैदिक विधि विधान के साथ विशेष पूजा-अर्चना संपन्न की जाती है।


    खंडवा में दादाजी धूनीवाले मंदिर के कपाट भी बंद नहीं

    चंद्रगहण के दौरान खंडवा स्थित दादाजी धूनीवाले का मंदिर भी श्रद्धालुओं के लिए खुला रहा। सूर्यग्रहण हो या चंद्रग्रहण यहां मंदिर बंद करने की परंपरा कभी नहीं रही। मंदिर की ट्रस्टी मदन ठाकरे के अनुसार, यह स्थल अवधूत संत दादाजी धूनीवाले की पावन समाधि है। मान्यता है कि इस समाधि स्थल पर किसी भी ग्रह और नक्षत्र का प्रभाव नहीं पड़ता। यही कारण है कि मंदिर के पट दिन-रात खुले रहते हैं। आधी रात को भी श्रद्धालु यहां पहुंचकर दर्शन कर सकते हैं। ग्रहण काल में भी मंदिर में नियमित आरती, पूजन और समाधि सेवा का क्रम जारी रहा।

  • उज्जैन में चंद्र ग्रहण के कारण मंदिरों के पट बंद, श्रद्धालु करेंगे बाहर से पूजा; महाकाल मंदिर में रहेगी विशेष व्यवस्था!

    उज्जैन में चंद्र ग्रहण के कारण मंदिरों के पट बंद, श्रद्धालु करेंगे बाहर से पूजा; महाकाल मंदिर में रहेगी विशेष व्यवस्था!

     उज्जैनउज्जैन में मंगलवार को चंद्र ग्रहण के चलते शहर के कई प्रमुख मंदिरों के पट बंद कर दिए गए। सुबह 6:47 बजे शुरू हुए सूतक काल के दौरान महाकालेश्वर मंदिर के अलावा अन्य मंदिरों में दर्शन वर्जित रहे। सूतक शाम 6:47 बजे तक रहेगा, जिसके बाद मंदिरों में शुद्धिकरण और संध्या आरती के बाद दर्शन फिर से शुरू होंगे।

    महाकाल मंदिर के पट खुले रहने के बावजूद गर्भगृह में पुजारियों ने मंत्रोच्चार किया। श्रद्धालु मंदिर परिसर के बाहर से ही भगवान के दर्शन कर रहे थे। इस दौरान मंदिर में केवल मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठान चल रहे थे। शहर के अन्य प्रमुख मंदिर जैसे सांदीपनि आश्रम, मंगलनाथ मंदिर, अंगारेश्वर मंदिर और गोपाल मंदिर में सुबह 5 बजे तक नियमित पूजा हुई, उसके बाद सूतक लगते ही पट बंद कर दिए गए।

    सूतक के दौरान भक्तों ने मंदिर के बाहर ही भगवान के दर्शन किए। मंगलनाथ मंदिर में भी पट बंद रहने के बावजूद बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। अंगारेश्वर, गोपाल, चिंताहरण हनुमान और सिद्धेश्वर मंदिर सहित हजारों मंदिरों में दर्शन रोक दिए गए थे। मंदिर प्रशासन ने कहा कि शाम को सूतक समाप्त होने के बाद सभी मंदिरों की सफाई और शुद्धिकरण के बाद भगवान का स्नान, श्रृंगार और संध्या आरती की जाएगी।

    ज्योतिषाचारियों के अनुसार सूतक काल में पूजा, भोग और मूर्ति के स्पर्श वर्जित होते हैं। यही कारण है कि अधिकांश मंदिरों में यह व्यवस्था लागू की गई। हालांकि महाकाल मंदिर में भक्त दर्शन कर सकते हैं, लेकिन गर्भगृह में पुजारियों ने ही मंत्रोच्चार और अनुष्ठान जारी रखा।

    सूतक से पहले होली का उत्सव भी मंदिरों में पारंपरिक रूप से मनाया गया। भक्तों ने भगवान श्रीकृष्ण के साथ हर्बल गुलाल और फूलों से होली खेली। इसके बाद विधि-विधान से मंदिरों के पट बंद कर दिए गए और दर्शन वर्जित कर दिए गए।

    मंदिर प्रशासन ने भक्तों से अपील की कि वे सूतक के दौरान मंदिर परिसर में प्रवेश न करें और बाहर से ही पूजा करें। संध्या में पट खुलने के बाद सभी मंदिरों में धार्मिक गतिविधियां सामान्य रूप से शुरू हो जाएंगी।

    इस तरह, चंद्र ग्रहण के दौरान उज्जैन के मंदिरों में श्रद्धालुओं की सुरक्षा और धार्मिक परंपरा दोनों का ध्यान रखा गया। भक्तों ने मंदिरों के बाहर भी पूजा कर अपनी आस्था व्यक्त की। सूतक समाप्ति के बाद मंदिरों में संपूर्ण शुद्धिकरण और भव्य संध्या आरती के साथ दर्शन शुरू होंगे, जिससे शहर में धार्मिक माहौल पूरी तरह लौट आएगा।

  • उज्जैन महाकाल में भव्य होली 2026: हर्बल गुलाल, पंचामृत भस्मारती और चंद्र ग्रहण के बीच खुले पट, श्रद्धालुओं ने किया अनोखा अनुभव

    उज्जैन महाकाल में भव्य होली 2026: हर्बल गुलाल, पंचामृत भस्मारती और चंद्र ग्रहण के बीच खुले पट, श्रद्धालुओं ने किया अनोखा अनुभव


    उज्जैन। उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में मंगलवार को होली का पर्व भव्य और अनोखे अंदाज में मनाया गया। सुबह 4 बजे भस्मारती के समय पुजारी-पुरोहितों ने बाबा महाकाल के साथ हर्बल गुलाल से रंग खेला। इस अवसर पर भगवान शिव के परिवार माता पार्वती, भगवान गणेश और कार्तिकेय को भी गुलाल अर्पित किया गया। भगवान महाकाल का हरि ओम जल से अभिषेक किया गया, उसके बाद दूध, दही, घी, शकर, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से पूजा संपन्न हुई। नंदी जी का स्नान, ध्यान और पूजा भी विधिपूर्वक किया गया। भगवान महाकाल ने शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुंडमाला, रुद्राक्ष की माला और सुगंधित पुष्पों की माला धारण की।

    इस साल 3 मार्च को 14 मिनट का खग्रास चंद्र ग्रहण सुबह 6:32 से शाम 6:46 तक रहेगा। ग्रहण के कारण मंदिर में सुबह की दद्योदक और भोग आरती में भगवान महाकाल को केवल शक्कर का भोग अर्पित किया गया। इस दौरान श्रद्धालु और पुजारी भगवान को स्पर्श नहीं करेंगे। ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिर का शुद्धिकरण होगा, उसके बाद भगवान का जलाभिषेक और संध्या आरती के साथ भोग अर्पित किया जाएगा।

    महाकाल मंदिर में साल में दो बार भगवान की दिनचर्या बदलती है। कार्तिक कृष्ण प्रतिपदा से ठंड के अनुसार और चैत्र कृष्ण प्रतिपदा से गर्मी के अनुसार आरती का समय तय होता है। इस साल 4 मार्च से चैत्र कृष्ण प्रतिपदा शुरू होने से भगवान महाकाल को ठंडे जल से स्नान कराया जाएगा। इस अवधि में प्रतिदिन होने वाली पांच आरतियों में से तीन में समय का बदलाव किया जाएगा।

    मंदिर के पुजारी महेश शर्मा के अनुसार, भगवान महाकाल कालों के काल हैं और दक्षिण की ओर मुख करके बैठे हैं। इसलिए ग्रहण या किसी भी नक्षत्र का उन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। ग्रहण के दौरान मंदिर की व्यवस्थाएं सामान्य रहेंगी, पुजारी मंत्रोच्चार करेंगे और भक्त सुरक्षित दर्शन कर सकेंगे।

    भक्तों और स्थानीय लोगों के लिए यह आयोजन अत्यंत दर्शनीय रहा। पारंपरिक विधियों, भस्मारती और हर्बल गुलाल के संगम ने होली को भव्य बना दिया। इस अवसर पर धार्मिक अनुशासन और ग्रहण के नियमों का पालन करते हुए भगवान महाकाल की भव्य पूजा-अर्चना संपन्न हुई, जो श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक आनंद और भक्ति का अनुभव लेकर आई।

  • होलाष्टक आज से शुरू: विवाह और मांगलिक कार्यों का मुहूर्त निषिद्ध, होलिका दहन पर लगेगा चंद्र ग्रहण

    होलाष्टक आज से शुरू: विवाह और मांगलिक कार्यों का मुहूर्त निषिद्ध, होलिका दहन पर लगेगा चंद्र ग्रहण


    नई दिल्ली । आज 24 फरवरी से होलाष्टक शुरू हो रहा है। होली से पहले के आठ दिन यानी फाल्गुन कृष्ण पक्ष की अष्टमी से होलाष्टक माना जाता है। इन आठ दिनों में विवाह, जनेऊ, गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण जैसे मांगलिक कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त नहीं रहते। ज्योतिषियों के अनुसार इस दौरान ग्रहों की स्थिति उग्र होती है, इसलिए मांगलिक कार्यों के लिए शुभ योग नहीं बनते। होलाष्टक का समापन होलिका दहन के साथ होता है।

    इस साल होलिका दहन यानी फाल्गुन पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण भी होगा। ग्रहण के समय और सूतक में शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं। 3 मार्च को सुबह 6.21 बजे से ग्रहण का सूतक शुरू होगा और दोपहर 3.21 बजे से ग्रहण आरंभ होकर शाम 6.47 बजे तक रहेगा। ग्रहण के दौरान रंग-गुलाल खेलना उचित नहीं माना गया है। ज्योतिषियों की सलाह है कि इस समय मानसिक रूप से मंत्र जप, दान-पुण्य और पूजा-पाठ करना चाहिए। इसके चलते इस साल धुलंडी होली 4 मार्च को मनाने की सलाह दी जा रही है, हालांकि कुछ पंचांगों में 3 मार्च को भी होली खेलने का उल्लेख है।

    होलाष्टक की कथा

    होलाष्टक से जुड़ी कथा भक्त प्रह्लाद से संबंधित है। असुरराज हिरण्यकश्यपु ने अपने पुत्र प्रह्लाद को भगवान विष्णु की भक्ति के कारण अनेक यातनाएं दीं। फाल्गुन कृष्ण अष्टमी से पूर्णिमा तक होलिका ने प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठने की कोशिश की, लेकिन भगवान विष्णु की कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित बच गए और होलिका अग्नि में भस्म हो गई। तभी से होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है।

    होलाष्टक में किए जाने वाले शुभ कार्य

    ध्यान, जप और पूजा का विशेष महत्व। शिवलिंग पर जल और दूध अर्पित करें, बिल्वपत्र चढ़ाएं और ॐ नमः शिवाय मंत्र का जप करें। हनुमान जी के सामने दीपक जलाकर हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करें। भगवान विष्णु और महालक्ष्मी की पूजा करें, ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करें दान-पुण्य, हवन, अभिषेक, ध्यान और तीर्थ यात्रा करना शुभ फलदायी माना गया है। इस प्रकार होलाष्टक का समय आध्यात्मिक उन्नति और भक्ति के लिए सर्वोत्तम माना जाता है, जबकि मांगलिक कार्यों के लिए यह निषिद्ध अवधि है। होलिका दहन पर चंद्र ग्रहण के कारण इस वर्ष रंगों की होली 4 मार्च को खेलने की सलाह दी जा रही है।

  • ग्रहण और होली का अद्वितीय संगम: चंद्र ग्रहण के दिन पानी से होली खेलने पर प्रतिबंध

    ग्रहण और होली का अद्वितीय संगम: चंद्र ग्रहण के दिन पानी से होली खेलने पर प्रतिबंध


    नई दिल्ली। इस वर्ष, फाल्गुन पूर्णिमा और चंद्र ग्रहण एक ही दिन पड़ रहे हैं। 3 मार्च को एक ग्रस्त उदित चंद्र ग्रहण रहेगा, जो दोपहर 3:19 बजे से शाम 6:47 बजे तक होगा। इस ग्रहण का प्रभाव विशेष रूप से 6:47 बजे तक रहेगा, जब धुलेंडी (होली) का पर्व मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, ग्रहण का सूतक काल प्रातः 6:47 बजे से शुरू होगा, जो ग्रहण के समाप्त होने तक असर दिखाएगा।

    पानी से होली खेलने की मनाही
    चंद्रमा को जल का कारक माना जाता है, इसलिए इस वर्ष ग्रहण के दौरान पानी से होली खेलना वर्जित है। ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि जल का उपयोग करने से मानसिक अशांति और नकारात्मक प्रभाव हो सकते हैं। अत: इस बार गुलाल से ही होली खेलना शुभ रहेगा, जबकि पानी से होली खेलना टालना चाहिए।

    गैर निकाले जा सकेंगे, लेकिन…
    ग्रहण के दिन गैर (पारंपरिक लोकनृत्य) निकालने की परंपरा भी जारी रहेगी, लेकिन यह सिर्फ सूखा और गुलाल का ही इस्तेमाल करके किया जाएगा। उज्जैन और राज्य के अन्य हिस्सों में यह परंपरा बनाये रखने की मान्यता है। ज्योतिषाचार्य पं. अमर डिब्बेवाला के अनुसार, परंपरागत गैर निकाले जाने से कोई दोष नहीं लगता, बशर्ते यह एक प्रहर (लगभग तीन घंटे) के भीतर किया जाए।

    भद्राकाल में होगा होलिका दहन
    2 मार्च की रात को होलिका दहन होगा, लेकिन इस बार भद्राकाल (शाम 5:55 से रात 4:28 तक) के प्रभाव में यह किया जाएगा। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि प्रदोष काल में होलिका पूजन सबसे श्रेष्ठ होगा, साथ ही इस समय दान-पुण्य भी किए जा सकते हैं, जो इस दिन की महिमा को बढ़ाते हैं।

    ग्रहण और सूतक काल का समय
    सूतक काल: ग्रहण से 12 घंटे पहले शुरू होता है, यानी सुबह 6:47 बजे से।

    ग्रहण का समय: 3:19 बजे से 6:47 बजे तक।

    इस दौरान कोई भी शुभ कार्य वर्जित माना जाता है और मंदिरों के पट बंद रखे जाते हैं।

    राशियों पर ग्रहण का प्रभाव
    ग्रहण का राशियों पर भी खास असर होगा:

    मेष: अनुकूल रहेगा, मित्रों से सहायता मिलेगी।

    वृषभ: प्रयास बढ़ाने होंगे, विशेष ध्यान दें।

    मिथुन: वाणी और क्रोध पर संयम जरूरी।

    कर्क: जलीय राशि होने के कारण लाभ की संभावना।

    सिंह: कानूनी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर से पहले सावधानी बरतें।

    कन्या: नई नौकरी और व्यापार में अवसर मिल सकते हैं।

    तुला: विशेष व्यक्ति से सहयोग मिलेगा।

    वृश्चिक: भूमि भवन से जुड़ा कोई काम हो सकता है।

    धनु: नए कार्यों की शुरुआत संभव।

    मकर और कुम्भ: न्यायिक दृष्टि से अनुकूल समय।

    मीन: धार्मिक कार्यों में सफलता मिलेगी।

    सूतक काल में क्या करें और क्या न करें?
    भोजन: 6:30 बजे से 9:30 बजे तक बुजुर्ग और मरीज भोजन कर सकते हैं।

    पूजा-अर्चना: ग्रहण के दौरान संयम रखकर भजन-पूजन करें। विशेष रूप से ग्रहण के समय और सूतक काल में ध्यान रखें कि कोई भी शुभ कार्य न करें।

    इस वर्ष के ग्रहण और होली का समय परंपरा और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार बहुत ही विशेष है। जल से होली न खेलने का कारण यह भी है कि इस दिन चंद्रमा को जल का कारक माना जाता है, और इससे कुछ नकारात्मक असर हो सकता है। इस बार सिर्फ गुलाल से होली खेलना ही शुभ रहेगा।