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  • चैत्र नवरात्रि 2026: पहला और अष्टमी व्रत रखने वाले जान लें ये जरूरी नियम, तभी मिलेगा पूजा का पूरा फल

    चैत्र नवरात्रि 2026: पहला और अष्टमी व्रत रखने वाले जान लें ये जरूरी नियम, तभी मिलेगा पूजा का पूरा फल

    नई दिल्ली । आदिशक्ति दुर्गा को समर्पित चैत्र नवरात्रि का पर्व इस वर्ष 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च 2026 तक चलेगा। नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। कई श्रद्धालु पूरे नौ दिन व्रत रखते हैं, जबकि कुछ लोग केवल पहला दिन और अष्टमी का व्रत रखते हैं।धार्मिक मान्यता के अनुसार नवरात्र का पहला दिन संकल्प का प्रतीक होता है, जबकि अष्टमी पूर्णता का प्रतीक मानी जाती है। इन दोनों दिनों का व्रत नियम और श्रद्धा के साथ करने से पूजा का विशेष फल प्राप्त होता है।

    पहले दिन के व्रत का महत्व
    नवरात्र के पहले दिन सुबह स्नान कर साफ कपड़े पहनने के बाद कलश स्थापना के साथ व्रत की शुरुआत की जाती है। इस दिन भक्त मां दुर्गा की पूजा कर अपने संकल्प लेते हैं। घर में अखंड ज्योति जलाने और नियमित आरती करने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और यह पूरे नवरात्र की आध्यात्मिक यात्रा की नींव माना जाता है।

    अष्टमी व्रत का महत्व

    चैत्र नवरात्रि में अष्टमी को महाष्टमी कहा जाता है। इस दिन विशेष रूप से Mahagauri की पूजा की जाती है। अष्टमी के दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है, जिसमें छोटी कन्याओं को देवी का रूप मानकर भोजन कराया जाता है। मान्यता है कि इससे नवरात्रि का व्रत पूर्ण माना जाता है और घर में सुख-समृद्धि आती है।

    व्रत के दौरान रखें इन बातों का ध्यान

    नवरात्रि में व्रत रखने वाले भक्तों को सात्विक आहार का पालन करना चाहिए। फलाहार, साबूदाना, कुट्टू का आटा और फल ऊर्जा देने में सहायक होते हैं। व्रत के दौरान अधिक नमक और मसालों से बचने की सलाह दी जाती है ताकि मन शांत और स्थिर बना रहे। धार्मिक मान्यता है कि संयम, श्रद्धा और नियमों के साथ किया गया व्रत ही भक्तों को मां दुर्गा का आशीर्वाद दिलाता है और जीवन में सुख-शांति और समृद्धि लाता है।

  • नवरात्रि में मुख्य द्वार पर करें ये आसान वास्तु उपाय, घर में आएगी सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि

    नवरात्रि में मुख्य द्वार पर करें ये आसान वास्तु उपाय, घर में आएगी सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि


    नई दिल्‍ली । चैत्र नवरात्रि हिंदू धर्म में शक्ति साधना और मां दुर्गा की आराधना का विशेष पर्व माना जाता है। वर्ष 2026 में चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू हो रही है और नौ दिनों तक भक्त पूरे श्रद्धा भाव से देवी की पूजा अर्चना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह समय न केवल पूजा और व्रत का होता है बल्कि घर के वातावरण को शुद्ध और सकारात्मक बनाने का भी उत्तम अवसर माना जाता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार घर का मुख्य द्वार ऊर्जा के प्रवेश का सबसे महत्वपूर्ण स्थान होता है। यहीं से सकारात्मक और नकारात्मक दोनों प्रकार की ऊर्जा घर में प्रवेश करती हैं। इसलिए नवरात्रि के दौरान मुख्य द्वार को साफ सुथरा पवित्र और शुभ प्रतीकों से सजाना विशेष रूप से लाभकारी माना गया है।

    नवरात्रि के दिनों में घर के मुख्य द्वार पर आम या अशोक के पत्तों का तोरण लगाना बेहद शुभ माना जाता है। हिंदू परंपरा में तोरण को मंगल और समृद्धि का प्रतीक माना गया है। मान्यता है कि आम के पत्तों का तोरण लगाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश रुक जाता है। इसके साथ ही मुख्य द्वार को नियमित रूप से साफ रखना और उसे सजाकर रखना भी जरूरी माना जाता है क्योंकि स्वच्छता को भी शुभता का प्रतीक माना जाता है।

    वास्तु शास्त्र के अनुसार नवरात्रि के दौरान स्नान के बाद मुख्य द्वार के दोनों ओर कुमकुम या हल्दी से स्वास्तिक का चिन्ह बनाना भी अत्यंत शुभ होता है। स्वास्तिक को सनातन परंपरा में मंगल सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इसके साथ ही एक ओर शुभ और दूसरी ओर लाभ लिखने की परंपरा भी है। मान्यता है कि ऐसा करने से घर में मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है और परिवार में सुख समृद्धि का वातावरण बनता है।

    नवरात्रि के नौ दिनों में मुख्य द्वार के अंदर की ओर आते हुए माता लक्ष्मी के छोटे छोटे चरण चिह्न बनाना भी शुभ माना जाता है। यह प्रतीकात्मक रूप से इस बात का संकेत देता है कि घर में धन सौभाग्य और समृद्धि का आगमन हो रहा है। कई लोग चावल के आटे कुमकुम या रंगोली से ये चरण चिह्न बनाते हैं जिससे घर का वातावरण और भी पवित्र और आकर्षक बन जाता है।

    इसके अलावा वास्तु शास्त्र में एक और सरल उपाय बताया गया है। एक तांबे के बर्तन में साफ पानी भरकर उसमें गुलाब की पंखुड़ियां डालकर मुख्य द्वार के पास रखना शुभ माना जाता है। गुलाब की सुगंध और जल दोनों मिलकर वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं और घर में शांति तथा सुख का भाव बढ़ाते हैं।

    नवरात्रि के दौरान सूर्यास्त के बाद मुख्य द्वार के पास घी का दीपक जलाने की परंपरा भी बहुत शुभ मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दीपक का प्रकाश नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है और घर में दिव्यता तथा सकारात्मकता का वातावरण बनाता है। कहा जाता है कि जब घर का मुख्य द्वार शुभ प्रतीकों दीपक की रोशनी और स्वच्छता से सुसज्जित रहता है तो वहां मां दुर्गा और मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है और परिवार में सुख शांति तथा समृद्धि का वास होता है।

  • Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि कब शुरू होगी, घटस्थापना मुहूर्त और 9 दिन का कैलेंडर

    Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि कब शुरू होगी, घटस्थापना मुहूर्त और 9 दिन का कैलेंडर


    नई दिल्‍ली । चैत्र नवरात्रि हिंदू धर्म का सबसे पवित्र पर्व है, जिसमें मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। इस साल चैत्र नवरात्रि 19 मार्च 2026 गुरुवार से शुरू होकर 27 मार्च 2026 शुक्रवार को रामनवमी के साथ समाप्त होगी।

    चैत्र नवरात्रि 2026 की शुरुआत और समापन प्रारंभ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा: 19 मार्च 2026 सुबह 6:52 बजे से

    समाप्ति: 27 मार्च 2026 रामनवमी

    नवरात्रि की अवधि: 9 दिन

    घटस्थापना मुहूर्त 2026

    इस साल घटस्थापना के लिए दो शुभ मुहूर्त हैं:

    सुबह 6:52 बजे से 7:43 बजे तक

    दोपहर 12:05 बजे से 12:53 बजे तक

    पहले दिन बनने वाले शुभ योग 19 मार्च 2026

    सर्वार्थ सिद्धि योग: 20 मार्च सुबह 04:05 से 06:25

    शुक्ल योग: प्रातःकाल से रात 01:17 तक

    ब्रह्म योग: शुक्ल योग के बाद

    इन योगों के कारण कलश स्थापना और पूजा का फल बढ़ जाता है।
    राहुकाल 19 मार्च 2026
    राहुकाल: दोपहर 2:00 बजे से 3:30 बजे तक
    इस समय कोई शुभ कार्य या पूजा न करें। घटस्थापना राहुकाल से पहले या बाद में करें।

    चैत्र नवरात्रि 2026 – 9 दिन का कैलेंडर

    दिन तारीख वार तिथि पूजा
    दिन 1 19 मार्च गुरुवार प्रतिपदा घटस्थापना, शैलपुत्री पूजा
    दिन 2 20 मार्च शुक्रवार द्वितीया ब्रह्मचारिणी पूजा
    दिन 3 21 मार्च शनिवार तृतीया चंद्रघंटा पूजा
    दिन 4 22 मार्च रविवार चतुर्थी कूष्मांडा पूजा
    दिन 5 23 मार्च सोमवार पंचमी स्कंदमाता पूजा
    दिन 6 24 मार्च मंगलवार षष्ठी कात्यायनी पूजा
    दिन 7 25 मार्च बुधवार सप्तमी कालरात्रि पूजा, महासप्तमी
    दिन 8 26 मार्च गुरुवार अष्टमी महागौरी पूजा, दुर्गा अष्टमी
    दिन 9 27 मार्च शुक्रवार नवमी नवरात्रि पारण, रामनवमी