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  • मां की भक्ति तभी सार्थक जब महिलाओं का हो सम्मान, शिवराज ने रील शेयर कर देशवासियों से कही बड़ी बात

    मां की भक्ति तभी सार्थक जब महिलाओं का हो सम्मान, शिवराज ने रील शेयर कर देशवासियों से कही बड़ी बात


    भोपाल। शारदीय नवरात्रि के पहले दिन केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने देशवासियों को नवरात्रि की शुभकामनाएं देते हुए महिलाओं के सम्मान का संदेश दिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक रील साझा कर लोगों से अपील की कि मां दुर्गा की पूजा अर्चना और व्रत उपवास के साथ घर परिवार और समाज में बेटियों बहनों तथा माताओं का सम्मान करना भी अपनी जिम्मेदारी समझें। शिवराज ने कहा कि यदि हम अपनी बेटी बहन और मां का सम्मान नहीं करते हैं तो मां की उपासना का कोई लाभ नहीं है। उनका यह संदेश नवरात्रि के धार्मिक महत्व के साथ महिलाओं के प्रति सम्मान और सामाजिक जिम्मेदारी को भी रेखांकित करता है।
    शिवराज सिंह चौहान ने अपने संदेश में कहा कि नवरात्रि का पहला दिन मां शैलपुत्री की आराधना को समर्पित है। इस पावन अवसर पर श्रद्धालु मां की भक्ति में लीन रहते हैं और व्रत उपवास रखकर परिवार की सुख समृद्धि तथा खुशहाली की कामना करते हैं। उन्होंने कहा कि धार्मिक अनुष्ठानों के साथ हमें अपनी अंतरात्मा और हृदय से यह भी विचार करना चाहिए कि हम अपने आसपास की महिलाओं के साथ कैसा व्यवहार करते हैं। पूजा पाठ के वास्तविक अर्थ को जीवन में उतारना और दूसरों के प्रति सम्मान का भाव रखना भी जरूरी है।
    केंद्रीय मंत्री ने अपने संदेश में बहनों भाइयों और बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि सभी लोग नवरात्रि के दौरान व्रत रखें उपवास करें और मां की उपासना करें लेकिन इसके साथ ही अपनी बेटियों बहनों और माताओं को पूरा सम्मान भी दें। उन्होंने कहा कि बेटियां देवियों के समान हैं और बहनों तथा माताओं में भी देवी का स्वरूप देखा जाता है। ऐसे में हर व्यक्ति को अपने जीवन में महिलाओं के सम्मान को सर्वोपरि रखने का संकल्प लेना चाहिए।
    शिवराज सिंह चौहान की अपील का मुख्य संदेश यही रहा कि देवी आराधना केवल मंदिरों में पूजा करने या धार्मिक परंपराओं का पालन करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। इसका प्रभाव हमारे व्यवहार और विचारों में भी दिखाई देना चाहिए। परिवार में बेटियों को सम्मान देना उनकी बात सुनना और उन्हें आगे बढ़ने के अवसर देना सामाजिक जिम्मेदारी का हिस्सा है। इसी तरह बहनों और माताओं के प्रति आदर का भाव रखना भी आवश्यक है। महिलाओं की गरिमा और उनके अधिकारों का सम्मान करने से ही समाज में सकारात्मक वातावरण बन सकता है।
    नवरात्रि के दौरान देशभर में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। मंदिरों में विशेष अनुष्ठान होते हैं और श्रद्धालु भक्ति भाव से माता के दर्शन करते हैं। ऐसे अवसर पर शिवराज सिंह चौहान ने धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक मूल्यों को जोड़ते हुए लोगों से महिलाओं के सम्मान का संकल्प लेने की अपील की। उन्होंने अपने संदेश के अंत में मां शैलपुत्री से सभी पर कृपा और आशीर्वाद बनाए रखने की कामना की तथा देशवासियों को नवरात्रि की शुभकामनाएं देते हुए जय माता दी कहा।
    उनका संदेश इस बात पर जोर देता है कि त्योहारों की सार्थकता तभी बढ़ती है जब उनसे मिलने वाली सीख को रोजमर्रा के जीवन में अपनाया जाए। नवरात्रि में मां दुर्गा की आराधना के साथ बेटियों बहनों और माताओं को सम्मान देना तथा उनके प्रति संवेदनशील व्यवहार करना हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है।

  • मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा से खुलेगा सुख समृद्धि का मार्ग, जानिए नवरात्रि के पहले दिन क्या करें और किन बातों का रखें ध्यान

    मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा से खुलेगा सुख समृद्धि का मार्ग, जानिए नवरात्रि के पहले दिन क्या करें और किन बातों का रखें ध्यान


    नई दिल्ली । शारदीय नवरात्रि का पर्व मां दुर्गा की उपासना और शक्ति की आराधना का विशेष अवसर माना जाता है। नवरात्रि के नौ दिनों में देवी के नौ स्वरूपों की विधि विधान से पूजा की जाती है। इस पावन पर्व के पहले दिन मां शैलपुत्री की आराधना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां शैलपुत्री पर्वतराज हिमालय की पुत्री हैं और उन्हें मां दुर्गा का प्रथम स्वरूप माना जाता है। नवरात्रि की शुरुआत में भक्त मां शैलपुत्री से सुख शांति साहस और समृद्धि की कामना करते हैं। मंदिरों और घरों में पूजा की तैयारियां की जाती हैं और घटस्थापना के साथ देवी उपासना का शुभारंभ होता है। मान्यता है कि श्रद्धा और सच्चे मन से मां शैलपुत्री की पूजा करने से भक्तों को मानसिक शक्ति और सकारात्मकता प्राप्त होती है।
    मां शैलपुत्री का स्वरूप अत्यंत दिव्य और कल्याणकारी माना जाता है। धार्मिक चित्रों में उन्हें वृषभ यानी बैल पर विराजमान दिखाया जाता है। उनके एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे हाथ में कमल का फूल होता है। मां शैलपुत्री को प्रकृति और शक्ति का प्रतीक माना जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार वे पूर्व जन्म में राजा दक्ष की पुत्री सती थीं और भगवान शिव से उनका विवाह हुआ था। अगले जन्म में उन्होंने हिमालय के घर पुत्री के रूप में जन्म लिया और शैलपुत्री कहलायीं। इसी कारण नवरात्रि के पहले दिन उनकी पूजा का विशेष महत्व बताया जाता है। भक्त मां के इस स्वरूप की आराधना करके जीवन में स्थिरता और दृढ़ संकल्प की कामना करते हैं।
    नवरात्रि के पहले दिन पूजा की शुरुआत सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनने से की जाती है। इसके बाद पूजा स्थल की साफ सफाई करके चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाया जाता है और मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित की जाती है। परंपरा के अनुसार सबसे पहले शुभ मुहूर्त में घटस्थापना की जाती है। इसके लिए मिट्टी के पात्र में जौ बोए जाते हैं और विधि के अनुसार जल से भरा कलश स्थापित किया जाता है। इसके बाद दीपक जलाकर मां शैलपुत्री का ध्यान किया जाता है। उन्हें फूल अक्षत चंदन धूप दीप और फल अर्पित किए जाते हैं। पूजा के दौरान मां शैलपुत्री के मंत्र का जाप किया जा सकता है। उनका प्रचलित मंत्र है ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः। भक्त अपनी श्रद्धा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार आरती करके पूजा संपन्न करते हैं।
    मां शैलपुत्री की पूजा में सफेद रंग का विशेष महत्व बताया जाता है। कई धार्मिक परंपराओं में उन्हें सफेद फूल और सफेद रंग से जुड़ी पूजन सामग्री अर्पित की जाती है। भोग में शुद्ध घी अर्पित करने की मान्यता भी प्रचलित है। श्रद्धालु पूजा के समय परिवार की सुख समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना करते हैं। हालांकि पूजा सामग्री और भोग की परंपराएं अलग-अलग क्षेत्रों में भिन्न हो सकती हैं। घटस्थापना का शुभ समय भी स्थान और पंचांग के अनुसार अलग होता है इसलिए पूजा से पहले स्थानीय पंचांग में मुहूर्त की पुष्टि करना उचित है।
    नवरात्रि के पहले दिन कई भक्त उपवास भी रखते हैं। कुछ लोग पूरे नौ दिनों तक व्रत करते हैं जबकि कुछ पहले और अंतिम दिन उपवास रखते हैं। व्रत के दौरान फलाहार और सात्विक भोजन का सेवन किया जाता है। स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर अपनी क्षमता के अनुसार भोजन करना चाहिए और लंबे समय तक भूखे रहने से बचना चाहिए। मां शैलपुत्री की आराधना के साथ नवरात्रि का शुभारंभ भक्तों को श्रद्धा अनुशासन और सकारात्मक सोच का संदेश देता है। नौ दिनों तक चलने वाली यह उपासना मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों के प्रति भक्ति प्रकट करने का अवसर है।
  • मां दुर्गा की भक्ति में डूबेगा देश, नौ दिनों तक होगी शक्ति की उपासना, घटस्थापना से कन्या पूजन तक जानिए नवरात्रि की पूरी परंपरा

    मां दुर्गा की भक्ति में डूबेगा देश, नौ दिनों तक होगी शक्ति की उपासना, घटस्थापना से कन्या पूजन तक जानिए नवरात्रि की पूरी परंपरा


    नई दिल्ली । देशभर में शारदीय नवरात्रि के आगमन के साथ ही मां दुर्गा की भक्ति और आराधना का विशेष पर्व शुरू हो रहा है। नौ दिनों तक चलने वाले इस पावन उत्सव को लेकर भक्तों में उत्साह और श्रद्धा का माहौल है। घरों से लेकर मंदिरों तक पूजा की तैयारियां की जा रही हैं और देवी के स्वागत के लिए पूजा स्थल सजाए जा रहे हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा करने पर सुख समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है। इस वर्ष शारदीय नवरात्रि का समापन 19 अक्टूबर को होगा जबकि 20 अक्टूबर को विजयादशमी और दशहरा मनाया जाएगा। इन नौ दिनों में भक्त पूजा पाठ व्रत और सेवा के माध्यम से मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करेंगे।
    नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना का विशेष महत्व माना जाता है। इसे कलश स्थापना भी कहा जाता है और इसी के साथ देवी उपासना की शुरुआत होती है। घटस्थापना से पहले घर के पूजा स्थल की अच्छी तरह साफ सफाई करनी चाहिए। इसके बाद चौकी पर लाल या स्वच्छ कपड़ा बिछाकर मां दुर्गा की प्रतिमा अथवा तस्वीर स्थापित की जाती है। परंपरा के अनुसार मिट्टी के पात्र में जौ बोए जाते हैं और निर्धारित विधि से कलश की स्थापना की जाती है। कलश को शुभता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इसके बाद दीपक जलाकर मां दुर्गा का ध्यान किया जाता है और उन्हें फूल अक्षत फल तथा अन्य पूजन सामग्री अर्पित की जाती है। घटस्थापना का शुभ मुहूर्त स्थान और पंचांग के अनुसार अलग हो सकता है इसलिए पूजा से पहले स्थानीय पंचांग में दिए गए समय की पुष्टि करना उचित है।
    नवरात्रि के प्रत्येक दिन मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूप की पूजा की जाती है। पहले दिन मां शैलपुत्री दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी तीसरे दिन मां चंद्रघंटा चौथे दिन मां कूष्मांडा पांचवें दिन मां स्कंदमाता छठे दिन मां कात्यायनी और सातवें दिन मां कालरात्रि की आराधना होती है। आठवें दिन मां महागौरी और नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। भक्त अपनी पारिवारिक परंपराओं और श्रद्धा के अनुसार नौ दिनों तक व्रत रखते हैं। कुछ श्रद्धालु पूरे नौ दिन उपवास करते हैं जबकि कुछ पहले और अंतिम दिन व्रत रखकर देवी की उपासना करते हैं। व्रत के दौरान फलाहार और सात्विक भोजन को प्राथमिकता दी जाती है।
    धार्मिक मान्यताओं के साथ नवरात्रि का सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व भी है। देश के अलग-अलग हिस्सों में यह पर्व अलग-अलग परंपराओं के साथ मनाया जाता है। कहीं दुर्गा पूजा के भव्य पंडाल सजाए जाते हैं तो कहीं गरबा और डांडिया के आयोजन भक्तों को आकर्षित करते हैं। मंदिरों में विशेष आरती भजन और कीर्तन होते हैं। अष्टमी और नवमी के अवसर पर कई परिवार कन्या पूजन करते हैं और छोटी कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर भोजन कराते हैं। जरूरतमंदों की सहायता और दान पुण्य को भी इस पर्व का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
    नवरात्रि के दौरान पूजा स्थल की स्वच्छता बनाए रखना श्रद्धापूर्वक पूजा करना और अपनी क्षमता के अनुसार व्रत रखना जरूरी है। स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर लंबे समय तक भूखे रहने से बचना चाहिए और जरूरत के अनुसार पौष्टिक आहार लेना चाहिए। नवरात्रि केवल उपवास और धार्मिक अनुष्ठानों का पर्व नहीं बल्कि आत्मसंयम सकारात्मकता और बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश भी देता है। इन नौ दिनों में भक्त मां दुर्गा से परिवार की खुशहाली सुख शांति और जीवन में सफलता की कामना करते हैं। विजयादशमी के साथ इस पर्व का समापन होगा और श्रद्धालु धर्म की विजय तथा अधर्म के अंत का संदेश लेकर आगे बढ़ेंगे।