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  • भोपाल में प्रशासनिक फेरबदल, पीसी पांडे कलेक्टर कार्यालय में अटैच, दीपक पांडे को कोलार का अतिरिक्त प्रभार

    भोपाल में प्रशासनिक फेरबदल, पीसी पांडे कलेक्टर कार्यालय में अटैच, दीपक पांडे को कोलार का अतिरिक्त प्रभार


    भोपाल। भोपाल में प्रशासनिक कामकाज को सुचारू बनाने के लिए राजस्व विभाग के अधिकारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव किया गया है। कलेक्टर कार्यालय से 27 अक्टूबर 2026 को जारी आदेश के अनुसार कोलार के अनुविभागीय अधिकारी एवं दंडाधिकारी पीसी पांडे को कलेक्टर कार्यालय भोपाल में कार्य करने के लिए आदेशित किया गया है। वहीं टीटी नगर के अनुविभागीय अधिकारी एवं दंडाधिकारी दीपक पांडे को उनके वर्तमान कार्य के साथ कोलार का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।

    कलेक्टर कार्यालय की ओर से जारी आदेश में प्रशासनिक कार्यों और सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए यह व्यवस्था की गई है। आदेश पर जिला कलेक्टर के हस्ताक्षर हैं और इसमें दोनों अधिकारियों की नई जिम्मेदारियों का स्पष्ट उल्लेख किया गया है। इसके तहत पीसी पांडे को कोलार में एसडीएम एवं दंडाधिकारी के दायित्व से हटाकर कलेक्टर कार्यालय में कार्य करने के लिए निर्देशित किया गया है। दूसरी ओर दीपक पांडे टीटी नगर में अपनी मौजूदा जिम्मेदारियों का निर्वहन करते रहेंगे और इसके साथ ही कोलार क्षेत्र का अतिरिक्त प्रभार भी संभालेंगे।

    प्रशासनिक व्यवस्था में इस बदलाव के बाद कोलार क्षेत्र में राजस्व संबंधी कामकाज की जिम्मेदारी दीपक पांडे के पास आ जाएगी। उन्हें अपने वर्तमान कार्यों के साथ अतिरिक्त प्रभार की जिम्मेदारी भी निभानी होगी। ऐसे में क्षेत्र में राजस्व मामलों के निपटारे और प्रशासनिक गतिविधियों के संचालन को लेकर उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी। हालांकि आदेश में इस बदलाव के पीछे किसी विशेष प्रकरण या शिकायत का उल्लेख नहीं किया गया है। आदेश में प्रशासनिक कार्य सुविधा को ही बदलाव का आधार बताया गया है।

    पीसी पांडे को कलेक्टर कार्यालय में कार्य करने के लिए निर्देशित किए जाने के बाद उनकी नई जिम्मेदारियों को लेकर भी प्रशासनिक स्तर पर व्यवस्था की जाएगी। कलेक्टर कार्यालय में अधिकारियों की तैनाती का उद्देश्य विभिन्न विभागीय कार्यों के समन्वय और प्रशासनिक जरूरतों के अनुसार जिम्मेदारियों का निर्धारण करना होता है। इस आदेश के जरिए जिला प्रशासन ने अधिकारियों के कार्यक्षेत्र में बदलाव करते हुए नई व्यवस्था लागू की है।

    आदेश की प्रतिलिपि मध्य प्रदेश शासन के सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव सहित भोपाल संभाग के आयुक्त और संबंधित राजस्व अधिकारियों को आवश्यक सूचना और कार्रवाई के लिए भेजी गई है। इसके अलावा जिला कोषालय अधिकारी को वेतन संबंधी प्रक्रिया के लिए जानकारी दी गई है। संबंधित अधिकारियों को आदेश का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

    भोपाल जिला प्रशासन में समय-समय पर प्रशासनिक जरूरतों के मुताबिक अधिकारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव किया जाता है। इस बार किए गए फेरबदल में कोलार और टीटी नगर से जुड़े राजस्व प्रशासन की जिम्मेदारियां प्रभावित हुई हैं। आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होने के कारण नई व्यवस्था के तहत संबंधित अधिकारियों को अपने दायित्व संभालने होंगे। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अतिरिक्त प्रभार के साथ कोलार क्षेत्र में राजस्व संबंधी कार्यों का संचालन किस तरह आगे बढ़ता है।

  • स्कूल में छात्र बनकर पहुंचे कमिश्नर धनंजय सिंह, पढ़ाई में मिली लापरवाही, कई अधिकारियों पर कार्रवाई के निर्देश

    स्कूल में छात्र बनकर पहुंचे कमिश्नर धनंजय सिंह, पढ़ाई में मिली लापरवाही, कई अधिकारियों पर कार्रवाई के निर्देश


    जबलपुर । मध्यप्रदेश के जबलपुर में प्रशासनिक व्यवस्था की हकीकत जानने के लिए संभागायुक्त धनंजय सिंह ने शुक्रवार को अचानक मझौली तहसील का दौरा किया। मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान के तहत किए गए इस निरीक्षण में उन्होंने स्कूल से लेकर स्वास्थ्य केंद्र और आंगनवाड़ी तक विभिन्न सरकारी संस्थाओं की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। सबसे ज्यादा चर्चा पौंडा गांव के शासकीय स्कूल के निरीक्षण की रही जहां कमिश्नर खुद छात्र बनकर बेंच पर बैठ गए और शिक्षकों से पढ़ाई की स्थिति जानी। जब उन्हें अध्यापन का स्तर अपेक्षा के अनुरूप नहीं मिला तो उन्होंने शिक्षकों को फटकार लगाई और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान कई अन्य व्यवस्थाओं में भी सुधार की जरूरत सामने आई।
    पौंडा गांव के शासकीय स्कूल में संभागायुक्त ने विद्यार्थियों से बातचीत कर उनकी पढ़ाई और रोजाना होने वाली शैक्षणिक गतिविधियों के बारे में जानकारी ली। उन्होंने यह भी पूछा कि बच्चों को कक्षा में किस तरह पढ़ाया जाता है और उनके भविष्य को लेकर करियर काउंसलिंग की क्या व्यवस्था है। निरीक्षण के दौरान अध्यापन कार्य संतोषजनक नहीं मिलने पर उन्होंने शिक्षकों को अपनी कार्यशैली सुधारने के निर्देश दिए। साथ ही संबंधित विकासखंड शिक्षा अधिकारी यानी बीईओ और विकासखंड स्रोत समन्वयक यानी बीआरसी के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के लिए कहा। इस निरीक्षण का उद्देश्य स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता और अधिकारियों की निगरानी व्यवस्था को परखना था।
    इसके बाद संभागायुक्त ने पौंडा स्थित सहकारी संस्था का निरीक्षण किया और खाद वितरण की व्यवस्था के बारे में जानकारी ली। उन्होंने किसानों को खाद की उपलब्धता और वितरण प्रक्रिया की स्थिति जानने के साथ संयुक्त आयुक्त सहकारिता को वितरण का सत्यापन करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसानों से जुड़ी व्यवस्थाओं में पारदर्शिता और जिम्मेदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए। खाद वितरण में किसी भी तरह की अनियमितता सामने आने पर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करने को कहा गया।
    स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति जानने के लिए धनंजय सिंह ने आयुष्मान आरोग्य मंदिर का भी निरीक्षण किया। यहां उन्होंने चिकित्सकीय स्टाफ और मरीजों से बातचीत कर उपचार की गुणवत्ता और उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली। उन्होंने आवश्यक दवाओं की उपलब्धता एएनसी पंजीयन और मरीजों के स्वास्थ्य परीक्षण की स्थिति की समीक्षा की। इसके अलावा ओपीडी पंजी का निरीक्षण कर टीकाकरण जननी सुरक्षा योजना और प्रसूति सहायता योजना से जुड़े मामलों की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने क्षेत्रीय संचालक स्वास्थ्य सेवाओं को निर्देश दिए कि मरीजों को गुणवत्तापूर्ण उपचार मिले और जरूरी दवाओं की उपलब्धता लगातार बनी रहे। गर्भवती महिलाओं के पंजीयन और स्वास्थ्य सेवाओं की नियमित निगरानी पर भी जोर दिया गया।
    संभागायुक्त ने आंगनवाड़ी केंद्र पहुंचकर बच्चों के पोषण वजन खेलकूद और शैक्षणिक गतिविधियों का जायजा लिया। केंद्र के संचालन की पर्याप्त निगरानी नहीं होने पर उन्होंने संबंधित बाल विकास परियोजना अधिकारी यानी सीडीपीओ के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद उन्होंने गौशाला का निरीक्षण कर संचालकों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए। जल जीवन मिशन के तहत गांव में चल रही एकल नलजल योजना की भी समीक्षा की गई। काम समयसीमा में पूरा नहीं होने और उचित मॉनिटरिंग की कमी के मामले में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सहायक यंत्री के विरुद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
    दौरे के दौरान संभागायुक्त ने ग्रामीणों से सीधे संवाद कर पेयजल खाद और राशन की उपलब्धता के बारे में भी जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को जनहित से जुड़ी योजनाओं का लाभ समय पर पहुंचाने और सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने के निर्देश दिए। इस निरीक्षण के जरिए प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया कि सरकारी संस्थाओं में लापरवाही और निगरानी की कमी को गंभीरता से लिया जाएगा। अब संबंधित विभागों की जिम्मेदारी होगी कि वे कमियों को दूर करें और शिक्षा स्वास्थ्य पोषण तथा पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाएं।
  • मुख्यमंत्री मोहन यादव का बड़ा प्रशासनिक फैसला 20 आईएएस अफसरों का ट्रांसफर 6 जिलों में नए कलेक्टर तैनात

    मुख्यमंत्री मोहन यादव का बड़ा प्रशासनिक फैसला 20 आईएएस अफसरों का ट्रांसफर 6 जिलों में नए कलेक्टर तैनात


    भोपाल । मध्य प्रदेश सरकार ने मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल की नियुक्ति के 24 घंटे के भीतर बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 20 भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारियों के तबादले कर दिए हैं। इस व्यापक प्रशासनिक सर्जरी में छह जिलों के कलेक्टर बदले गए हैं, वहीं मुख्यमंत्री सचिवालय और कई महत्वपूर्ण विभागों में भी नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। सरकार का यह कदम आगामी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (GIS-2027) और प्रशासनिक कार्यों को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

    सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा को प्रशासन अकादमी का महानिदेशक (DG) नियुक्त किया गया है। वहीं इंदौर संभाग के आयुक्त डॉ. सुदाम पी. खाड़े को मुख्यमंत्री सचिवालय में सचिव बनाया गया है। उनकी जगह भास्कर लक्षकार को नया इंदौर संभागायुक्त नियुक्त किया गया है।

    मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई को जनवरी 2027 में भोपाल में प्रस्तावित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (GIS-2027) की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके साथ ही उन्हें उद्योग एवं एमएसएमई विभाग का प्रभार भी दिया गया है। यह विभाग अब तक प्रमुख सचिव राघवेंद्र सिंह के पास था।

    सरकार ने छह जिलों में नए कलेक्टरों की नियुक्ति की है। अजय कटेसरिया को रतलाम, मिशा सिंह को शहडोल, रत्नाकर झा को अनूपपुर, गुरु प्रसाद को खरगोन, दिव्यांक सिंह को मंदसौर और डॉ. शेर सिंह मीना को आगर मालवा का नया कलेक्टर बनाया गया है। वहीं शहडोल के पूर्व कलेक्टर केदार सिंह को लोक निर्माण विभाग में अपर सचिव के रूप में पदस्थ किया गया है।

    मंदसौर की कलेक्टर अदिति गर्ग को खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग में ओएसडी सह आयुक्त बनाया गया है, जबकि आगर मालवा की कलेक्टर प्रीति यादव को औद्योगिक विकास निगम, इंदौर का कार्यकारी संचालक नियुक्त किया गया है। खरगोन की कलेक्टर भव्या मित्तल दो वर्ष की अध्ययन अवकाश (स्टडी लीव) पर चली गई हैं, जिसके चलते वहां गुरु प्रसाद को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

    रतलाम के नए कलेक्टर अजय कटेसरिया की नियुक्ति विशेष चर्चा में है। सामान्य प्रशासन विभाग में रहते हुए उन्होंने पदोन्नति नियम-2025 तैयार करने और सरकार की प्राथमिकता वाले समान नागरिक संहिता (UCC) के प्रारूप को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। पहली बार उन्हें किसी जिले की कलेक्टरी का दायित्व सौंपा गया है।

    प्रशासनिक फेरबदल के तहत प्रमुख सचिव संदीप यादव को जल संसाधन विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। अब केन-बेतवा और पार्वती-कालीसिंध जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं की निगरानी भी वही करेंगे। नर्मदा घाटी विकास (NVD) विभाग का प्रभार प्रमुख सचिव ई. रमेश कुमार को सौंपा गया है। वहीं मनीष सिंह को ऊर्जा विभाग का अतिरिक्त प्रभार और सचिन सिन्हा को लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग का अपर मुख्य सचिव बनाया गया है। राघवेंद्र सिंह को वन विभाग का प्रमुख सचिव नियुक्त करते हुए आनंद विभाग का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है।

    इस फेरबदल का असर महिला कलेक्टरों की संख्या पर भी पड़ा है। एक माह पहले प्रदेश के 55 जिलों में 17 महिला कलेक्टर कार्यरत थीं, लेकिन अब यह संख्या घटकर 15 रह गई है। हालांकि मिशा सिंह की शहडोल में नियुक्ति से आंशिक संतुलन बना है। माना जा रहा है कि यह प्रशासनिक बदलाव सरकार की आगामी विकास योजनाओं और निवेश आधारित परियोजनाओं को गति देने की रणनीति का हिस्सा है।

  • MP : 190 तहसीलदार और प्रभारी डिप्टी कलेक्टर पदोन्नत, बने डिप्टी कलेक्टर, आदेश जारी

    MP : 190 तहसीलदार और प्रभारी डिप्टी कलेक्टर पदोन्नत, बने डिप्टी कलेक्टर, आदेश जारी

    भोपाल। मध्यप्रदेश शासन के सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) ने मंगलवार को बड़ा प्रशासनिक आदेश जारी करते हुए प्रदेश के 190 तहसीलदार एवं प्रभारी डिप्टी कलेक्टरों को नियमित रूप से डिप्टी कलेक्टर पद पर पदोन्नत कर दिया है। इस संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा आदेश जारी कर सभी अधिकारियों की पदोन्नति को तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।

    आदेश के अनुसार, पदोन्नत किए गए अधिकारी पूर्व से प्रभारी डिप्टी कलेक्टर अथवा तहसीलदार के रूप में कार्यरत थे। अब इन्हें मध्यप्रदेश राज्य प्रशासनिक सेवा के डिप्टी कलेक्टर (वरिष्ठ श्रेणी) के पद पर नियमित पदोन्नति प्रदान की गई है। पदोन्नति के साथ ही इन अधिकारियों को नियमित डिप्टी कलेक्टर का दर्जा मिल गया है।

    सामान्य प्रशासन विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह पदोन्नति मध्यप्रदेश लोक सेवा (पदोन्नति) नियमों तथा विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की अनुशंसा के आधार पर की गई है। आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि पदोन्नति शासन द्वारा निर्धारित नियमों एवं शर्तों के अधीन प्रभावी रहेगी।

    विभाग ने सभी संबंधित विभागाध्यक्षों, संभागायुक्तों, कलेक्टरों तथा अन्य अधिकारियों को आदेश की प्रति भेजते हुए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही पदोन्नत अधिकारियों की सूची भी आदेश के साथ संलग्न की गई है, जिसमें सभी 190 अधिकारियों के नाम एवं वर्तमान पदस्थापना का उल्लेख है।

    इस निर्णय से प्रदेश के प्रशासनिक ढांचे को मजबूती मिलने के साथ-साथ जिलों एवं उपखंड स्तर पर नियमित डिप्टी कलेक्टरों की उपलब्धता बढ़ेगी, जिससे राजस्व एवं प्रशासनिक कार्यों के संचालन में गति आने की उम्मीद है।

  • एमपी के सबसे अमीर IAS अफसर का खुलासा: 19.5 करोड़ संपत्ति के साथ मनु श्रीवास्तव टॉप पर, 100 अफसरों के पास न मकान न प्लॉट

    एमपी के सबसे अमीर IAS अफसर का खुलासा: 19.5 करोड़ संपत्ति के साथ मनु श्रीवास्तव टॉप पर, 100 अफसरों के पास न मकान न प्लॉट

    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारियों की संपत्ति से जुड़ा एक दिलचस्प आंकड़ा सामने आया है, जिसमें कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। केंद्र सरकार को दी गई जानकारी के अनुसार राज्य के कई वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के पास करोड़ों की संपत्ति है, जबकि करीब 100 अधिकारी ऐसे भी हैं जिनके पास न खुद का मकान है और न ही कोई प्लॉट। इस सूची में सबसे ज्यादा संपत्ति रखने वाले अधिकारी के रूप में मनु श्रीवास्तव का नाम सामने आया है।

    केंद्रीय कार्मिक और प्रशिक्षण मंत्रालय को दी गई संपत्ति की जानकारी के अनुसार अपर मुख्य सचिव मनु श्रीवास्तव के पास करीब 19.5 करोड़ रुपये की संपत्ति दर्ज है, जो मध्यप्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारियों में सबसे अधिक है। वहीं कलेक्टर स्तर के अधिकारियों में विवेक श्रोत्रिय सबसे आगे हैं। उनकी घोषित संपत्ति करीब 6.2 करोड़ रुपये बताई गई है।

    दरअसल केंद्र सरकार के निर्देश पर सभी आईएएस अधिकारियों को हर वर्ष अपनी चल और अचल संपत्तियों का विवरण देना होता है। इसी क्रम में मध्यप्रदेश कैडर के अधिकारियों ने 31 दिसंबर 2024 तक की स्थिति में अपनी संपत्ति का विवरण केंद्र को सौंपा है। इस सूची में कुल 388 आईएएस अधिकारियों ने अपनी प्रॉपर्टी की जानकारी दी है, जिनमें से चार अधिकारी अब रिटायर हो चुके हैं।

    रिपोर्ट के अनुसार राज्य के 231 आईएएस अधिकारियों के पास खेती की जमीन भी है। हालांकि इस सूची का एक दिलचस्प पहलू यह भी है कि करीब 100 अधिकारी ऐसे हैं जिनके पास न खुद का मकान है और न ही कोई प्लॉट दर्ज है। यह आंकड़ा इसलिए भी ध्यान खींचता है क्योंकि आमतौर पर यह माना जाता है कि वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के पास पर्याप्त संपत्ति होती है।

    संपत्ति के मामले में दूसरे स्थान पर टी प्रतीक राव का नाम सामने आया है, जिनके पास घोषित संपत्ति करीब 10.5 करोड़ रुपये बताई गई है। वहीं प्रताप नारायण यादव लगभग 10.2 करोड़ रुपये की संपत्ति के साथ सूची में तीसरे स्थान पर हैं।इसके अलावा अनिरुद्ध मुखर्जी के पास करीब 8.71 करोड़ रुपये की संपत्ति दर्ज है। वहीं अंजलि रमेश के पास लगभग 7.35 करोड़ रुपये और ज्ञानेश्वर पाटिल के पास करीब 7.10 करोड़ रुपये की संपत्ति बताई गई है।

    इसके अलावा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों में अनुराग जैन की घोषित संपत्ति लगभग 4.14 करोड़ रुपये है, जबकि नीरज मंडलोई के पास करीब 4.97 करोड़ रुपये की संपत्ति दर्ज की गई है। वहीं राजेश राजोरा की संपत्ति करीब 1.73 करोड़ रुपये बताई गई है। सरकारी नियमों के तहत आईएएस अधिकारियों को अपनी संपत्ति का विवरण पारदर्शिता बनाए रखने के लिए हर साल देना अनिवार्य होता है। यह प्रक्रिया प्रशासनिक व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की जाती है।

    मध्यप्रदेश के आईएएस अधिकारियों की संपत्ति से जुड़ा यह डाटा सामने आने के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। यह आंकड़े एक ओर जहां अधिकारियों की आर्थिक स्थिति की झलक देते हैं, वहीं यह भी बताते हैं कि कई अधिकारी अभी भी व्यक्तिगत संपत्ति के मामले में अपेक्षाकृत सीमित संसाधनों के साथ सेवा दे रहे हैं।