Tag: Madhya Pradesh Agriculture

  • MP के जम्बो सीताफल को मिला GI टैग सिवनी के किसानों के लिए खुलेंगे वैश्विक बाजार के दरवाजे

    MP के जम्बो सीताफल को मिला GI टैग सिवनी के किसानों के लिए खुलेंगे वैश्विक बाजार के दरवाजे


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। जिले के प्रसिद्ध जम्बो सीताफल को भौगोलिक संकेतक यानी जीआई टैग प्राप्त हो गया है। यह उपलब्धि न केवल सिवनी की कृषि पहचान को मजबूत करेगी बल्कि यहां के हजारों किसानों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में नई संभावनाएं भी उपलब्ध कराएगी। लंबे समय से अपने अनोखे स्वाद और विशाल आकार के लिए पहचाने जाने वाले इस फल को अब आधिकारिक रूप से विशिष्ट उत्पाद का दर्जा मिल गया है।

    जीआई टैग किसी उत्पाद की विशेष भौगोलिक पहचान और उसकी विशिष्ट गुणवत्ता को प्रमाणित करता है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि उस नाम का उपयोग केवल उसी क्षेत्र में उत्पादित वस्तु के लिए किया जा सके। सिवनी के जम्बो सीताफल को यह मान्यता मिलने के बाद इसकी विशिष्ट पहचान सुरक्षित हो जाएगी और अन्य क्षेत्रों में उत्पादित फल इसके नाम का उपयोग नहीं कर सकेंगे।

    सिवनी का जम्बो सीताफल अपने बड़े आकार और उत्कृष्ट गुणवत्ता के कारण देशभर में प्रसिद्ध है। सामान्य रूप से एक सीताफल का वजन 200 से 650 ग्राम तक होता है लेकिन जिले के भूतबंधानी क्षेत्र में उत्पादित कई सीताफल 800 ग्राम से लेकर एक किलोग्राम तक वजन के पाए जाते हैं। यही विशेषता इसे सामान्य सीताफलों से अलग बनाती है।

    इसके अलावा इस फल का स्वाद भी इसकी लोकप्रियता का बड़ा कारण है। इसमें बीज अपेक्षाकृत कम होते हैं जबकि सफेद और गाढ़ा गूदा अधिक मात्रा में पाया जाता है। प्राकृतिक रूप से बेहद मीठा स्वाद इसे उपभोक्ताओं की पहली पसंद बनाता है। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ समेत आसपास के राज्यों में इसकी काफी मांग रहती है।

    पोषण के लिहाज से भी यह फल बेहद लाभकारी माना जाता है। इसमें पोटैशियम मैग्नीशियम और विभिन्न आवश्यक विटामिन प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यह हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने और रक्तचाप को नियंत्रित करने में सहायक हो सकता है। इसी वजह से इसकी मांग लगातार बढ़ती जा रही है।

    जीआई टैग मिलने का सबसे बड़ा लाभ किसानों को मिलेगा। अब वे अपने उत्पाद को विशेष पहचान के साथ बाजार में बेच सकेंगे जिससे उन्हें बेहतर मूल्य प्राप्त होने की संभावना बढ़ जाएगी। साथ ही निर्यात के नए अवसर भी खुलेंगे और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सिवनी के जम्बो सीताफल की अलग पहचान बनेगी।

    कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि जिले की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देगी। इससे सीताफल उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और किसानों को गुणवत्ता आधारित खेती के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। कुल मिलाकर सिवनी के जम्बो सीताफल को मिला जीआई टैग जिले की कृषि विरासत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

  • MP का ‘बंगला पान’ बना इंटरनेशनल पसंद, बढ़ी मांग, अब सरकार किसानों को देगी ₹1 करोड़ की मदद

    MP का ‘बंगला पान’ बना इंटरनेशनल पसंद, बढ़ी मांग, अब सरकार किसानों को देगी ₹1 करोड़ की मदद


    भोपाल। मध्य प्रदेश का प्रसिद्ध ‘बंगला पान’ अब देश ही नहीं, विदेशों में भी अपनी खास पहचान बना रहा है। अपनी सुगंध, कोमल बनावट और बेहतरीन स्वाद के कारण छतरपुर का बंगला पान अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। इसकी बढ़ती मांग को देखते हुए राज्य सरकार ने पान उत्पादक किसानों के लिए 1.03 करोड़ रुपये की विशेष सहायता योजना लागू की है।

    विदेशों तक पहुंचा एमपी का पान
    छतरपुर जिले में उगाया जाने वाला बंगला पान अपनी पतली बनावट, हल्की मिठास और लंबे समय तक ताजगी बनाए रखने की क्षमता के लिए जाना जाता है। यही वजह है कि इसकी मांग भारत के साथ-साथ पाकिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे देशों में भी लगातार बढ़ रही है।

    किसानों के लिए सरकार की खास योजना
    पान उत्पादन को बढ़ावा देने और किसानों की आय में वृद्धि के उद्देश्य से राज्य सरकार ने 10 प्रमुख जिलों को शामिल करते हुए विशेष कार्ययोजना तैयार की है। इसके लिए 1 करोड़ 3 लाख रुपये का वित्तीय प्रावधान किया गया है। योजना के तहत किसानों को आधुनिक खेती तकनीकों की जानकारी, उन्नत किस्म की पौध सामग्री, विशेष प्रशिक्षण, और ‘बरोज’ निर्माण के लिए आर्थिक व तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

    इन जिलों में होती है प्रमुख खेती
    मध्य प्रदेश के छतरपुर, रीवा, मंदसौर, नरसिंहपुर और टीकमगढ़ जिले पान उत्पादन के प्रमुख केंद्र हैं। यहां वर्षों से पान की खेती किसानों की आय का महत्वपूर्ण स्रोत बनी हुई है।

    रीवा का पान भी खूब लोकप्रिय
    रीवा जिले के महसांव क्षेत्र के दो गांवों में उत्पादित पान की भी अलग पहचान है। यहां तैयार होने वाला पान उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों वाराणसी, प्रयागराज और लखनऊ तक भेजा जाता है। इन बाजारों में मध्य प्रदेश के पान की विशेष मांग बनी रहती है।

    क्या है ‘बरोज’ मॉडल?
    पान की खेती के लिए विशेष प्रकार का संरक्षित ढांचा तैयार किया जाता है, जिसे ‘बरोज’ कहा जाता है। इसमें तापमान और नमी को नियंत्रित रखा जाता है, जिससे पान की नाजुक बेलों का बेहतर विकास हो सके। मध्य प्रदेश में यह परंपरागत खेती मुख्य रूप से चौरसिया समाज द्वारा की जाती है, जो पीढ़ियों से इस व्यवसाय से जुड़ा हुआ है। बरोज प्रणाली की वजह से उच्च गुणवत्ता वाला पान तैयार होता है और यही मॉडल अब देशभर में चर्चा का विषय बन रहा है।

    चुनौतियों के बावजूद बनी हुई है मांग
    पारंपरिक पान व्यवसाय को पान मसाला और गुटखा जैसे उत्पादों से चुनौती मिल रही है। बदलती जीवनशैली और युवाओं की पसंद के कारण पान की खपत पर असर पड़ा है, जिससे किसानों की आय भी प्रभावित हुई है। इसके बावजूद भारतीय संस्कृति और परंपराओं में पान का महत्व आज भी बरकरार है। पूजा-पाठ, विवाह समारोह, मांगलिक आयोजनों और अतिथि सत्कार में पान का विशेष स्थान होने के कारण इसकी बाजार मांग स्थिर बनी हुई है।

    किसानों के लिए नई उम्मीद
    सरकार की नई योजना और बढ़ती निर्यात मांग के चलते पान उत्पादक किसानों को बेहतर आय की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आधुनिक तकनीकों और बरोज मॉडल को व्यापक स्तर पर अपनाया जाए, तो मध्य प्रदेश का बंगला पान वैश्विक बाजार में और मजबूत पहचान बना सकता है।

  • किसान कल्याण योजना की 14वीं किस्त टली, 85 लाख किसानों को अब मई का इंतजार

    किसान कल्याण योजना की 14वीं किस्त टली, 85 लाख किसानों को अब मई का इंतजार


    मध्य प्रदेश के लाखों किसानों के लिए किसान कल्याण योजना की अगली किस्त का इंतजार और लंबा हो गया है। राज्य के करीब 85 लाख किसान इस योजना के तहत मिलने वाली 14वीं किस्त का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे, लेकिन अब यह साफ होता दिख रहा है कि भुगतान की तारीख आगे खिसक गई है।

    पहले उम्मीद की जा रही थी कि किसानों के खातों में यह राशि अप्रैल महीने में किसी विशेष अवसर या त्योहार के आसपास पहुंच जाएगी। लेकिन महीने के अंत तक भी कोई आधिकारिक संकेत न मिलने से किसानों की उम्मीदों को झटका लगा है। अब माना जा रहा है कि यह भुगतान मई महीने में किया जा सकता है।

    इस देरी के पीछे मुख्य कारण प्रशासनिक प्रक्रियाओं और डेटा सत्यापन को बताया जा रहा है। लाभार्थियों की सूची को अंतिम रूप देने और बैंकिंग प्रक्रिया को पूरा करने में अपेक्षा से अधिक समय लग रहा है। इसी वजह से किस्त जारी करने की प्रक्रिया फिलहाल स्थगित हो गई है और इसे अगले महीने तक आगे बढ़ा दिया गया है।

    किसानों के बीच अब यह भी चर्चा तेज हो गई है कि क्या इस बार दो किस्तों की राशि एक साथ जारी की जा सकती है। अगर सरकार ऐसा निर्णय लेती है, तो किसानों को 2000 रुपये की बजाय 4000 रुपये तक की राशि एक साथ मिल सकती है। खेती के महत्वपूर्ण सीजन को देखते हुए यह राशि किसानों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है, क्योंकि इस समय बीज, खाद और अन्य कृषि खर्चों में तेजी से बढ़ोतरी होती है।

    इस योजना के तहत किसानों को हर साल कुल 6000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है, जो तीन बराबर किस्तों में उनके बैंक खातों में सीधे भेजी जाती है। यह सहायता केंद्र की किसान सम्मान निधि योजना के अतिरिक्त होती है, जिससे किसानों को कुल मिलाकर एक निश्चित आर्थिक सहारा मिलता है।

    हालांकि इस बार की देरी ने किसानों की चिंता जरूर बढ़ा दी है, लेकिन अधिकारियों का मानना है कि प्रक्रिया पूरी होते ही भुगतान जल्द जारी कर दिया जाएगा। किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे अपने बैंक खाते की जानकारी अपडेट रखें, ताकि किसी भी तकनीकी समस्या की वजह से भुगतान अटक न जाए।

    विशेष रूप से यह भी जरूरी बताया जा रहा है कि आधार लिंकिंग और डीबीटी सुविधा सक्रिय हो, क्योंकि इन्हीं तकनीकी प्रक्रियाओं के जरिए राशि सीधे लाभार्थियों के खाते में भेजी जाती है। कई बार मामूली गलतियों के कारण भी भुगतान में देरी हो जाती है।

    फिलहाल किसानों की नजर अब मई महीने पर टिकी हुई है, जब इस किस्त के जारी होने की उम्मीद जताई जा रही है। यह इंतजार भले ही थोड़ा लंबा हो गया हो, लेकिन किसानों को उम्मीद है कि जल्द ही उन्हें उनकी लंबित राशि प्राप्त हो जाएगी और खेती के कामों में उन्हें राहत मिलेगी।

  • समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन के लिए 20 हजार से अधिक किसानों ने कराया पंजीयन, मंत्री राजपूत ने 7 मार्च तक अपील की

    समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन के लिए 20 हजार से अधिक किसानों ने कराया पंजीयन, मंत्री राजपूत ने 7 मार्च तक अपील की


    इंदौर से शुक्रवार 13 फरवरी 2026 को बड़ी खबर सामने आई है। रबी विपणन वर्ष 2026-27 में समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन के लिए अब तक 20 हजार 98 किसानों ने पंजीयन कर लिया है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने किसानों से अपील की है कि निर्धारित समय 7 मार्च तक पंजीयन अवश्य कराएं। उन्होंने बताया कि पंजीयन की प्रक्रिया किसानों के लिए सहज और सुगम बनाई गई है।

    मंत्री राजपूत ने पंजीयन के आंकड़े साझा करते हुए कहा कि इंदौर संभाग में 4084 किसान, उज्जैन में 9524, ग्वालियर में 476, चम्बल में 123, जबलपुर में 788, नर्मदापुरम में 900, भोपाल में 3602, रीवा में 68, शहडोल में 83 और सागर में 450 किसानों ने पंजीयन कर लिया है। उन्होंने किसानों को बताया कि कुल 3186 पंजीयन केंद्र पूरे प्रदेश में बनाए गए हैं, जिससे किसान आसानी से अपनी फसल का पंजीयन करा सकते हैं।

    केंद्र सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए गेहूँ का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2585 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 160 रुपये अधिक है। यह बढ़ोतरी किसानों की आय को स्थिर रखने और फसल के उचित मूल्य सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    पंजीयन की व्यवस्था दो तरह से की गई है। नि:शुल्क पंजीयन ग्राम पंचायत और जनपद पंचायत कार्यालयों में स्थापित सुविधा केंद्रों, तहसील कार्यालयों में उपलब्ध सुविधा केंद्रों तथा सहकारी समितियों और सहकारी विपणन संस्थाओं द्वारा संचालित केंद्रों पर किया जा सकता है। वहीं सशुल्क पंजीयन एमपी ऑनलाइन कियोस्क, कॉमन सर्विस सेंटर कियोस्क, लोक सेवा केंद्र और निजी साइबर कैफे पर किया जा सकता है।

    मंत्री राजपूत ने किसानों की सुविधा के लिए कहा कि पिछले वर्ष रबी और खरीफ के पंजीयन में जिन किसानों के मोबाइल नंबर उपलब्ध हैं, उन्हें एसएमएस के माध्यम से पंजीयन की जानकारी भेजी जाएगी। इसके अलावा गांव में डोंडी पिटवाकर ग्राम पंचायतों के सूचना पटल पर पंजीयन संबंधी सूचना प्रदर्शित कराई जाएगी और समिति तथा मंडी स्तर पर बैनर लगवाने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।

    राज्य सरकार की यह पहल किसानों की फसल की बिक्री और आय सुनिश्चित करने के लिए अहम कदम माना जा रहा है। मंत्री राजपूत ने दोहराया कि समय पर पंजीयन कराने से किसान अपने गेहूँ को समर्थन मूल्य पर बेच सकेंगे और फसल का सही मूल्य प्राप्त कर पाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार पूरी तैयारी के साथ किसानों के हितों की रक्षा कर रही है।

    कुल मिलाकर रबी विपणन वर्ष 2026-27 में किसानों के लिए पंजीयन प्रक्रिया सुगम, पारदर्शी और व्यापक स्तर पर उपलब्ध है। अब किसानों की जिम्मेदारी है कि वह 7 मार्च तक अपने पंजीयन को पूरा करें ताकि समर्थन मूल्य का लाभ उन्हें समय पर मिल सके।