Tag: Madhya Pradesh Assembly

  • एमपी विधानसभा बजट सत्र में पत्थरबाजी पर हंगामा, सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित

    एमपी विधानसभा बजट सत्र में पत्थरबाजी पर हंगामा, सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित


    भोपाल । मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र 2026 में आज एक बार फिर सियासी तापमान बढ़ गया जब सदन में पत्थरबाजी के मामले पर चर्चा की मांग को लेकर जोरदार हंगामा प्रदर्शन हुआ। मामला इतना गरमा गया कि विधानसभा की कार्यवाही को 10 मिनट के लिए स्थगित कर देना पड़ा। बजट सत्र के छठे दिन जब सदन पहुँच चुका था तब भाजपा विधायक डॉ. राजेंद्र पांडे ने अचानक ध्यान आकर्षण पेश करते हुए कहा कि भोपाल और इंदौर दोनों जगह भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच झड़पें हुई हैं जिसमें पत्थरबाजी भी शामिल रही और कुछ महिला कार्यकर्ता घायल भी हुई हैं। उन सभी घटनाओं पर चर्चा की आवश्यकता है।

    पांडे ने कहा कि “पहले से पत्थर इकट्ठा किए गए थे और यह सब न सिर्फ समाज में अशांति फैलाने का प्रयास है बल्कि मध्य प्रदेश में गुंडागर्दी की तरफ इशारा भी करता है। उन्होंने यह भी बताया कि शनिवार-शनिवार होने के कारण उन घटनाओं के बारे में पहले सूचना नहीं दी जा सकी। जब विपक्ष से चर्चा शुरू करने की अपील की गई तब कांग्रेस विधायक सचिन यादव ने पलटवार किया और कहा कि उनके कार्यालय पर हमला हुआ है और इसी मुद्दे पर चर्चा होनी चाहिए। वहीं कांग्रेस के सोहनलाल वाल्मीकि ने सवाल उठाया कि इंदौर के भागीरथपुरा में हुए विवाद और हिंसा पर क्यों चर्चा नहीं कराई जा रही है इसके बजाय सदन में अलग मुद्दों को उछाला जा रहा है।

    एक समय ऐसा आया कि विपक्ष और सदस्यों के बीच आवाजें मिलने लगीं और सदन में व्यवधान बढ़ता गया। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष को सदन को 10 मिनट के लिए स्थगित करने का निर्णय लेना पड़ा ताकि दोनों पक्ष संतुलित होकर फिर से चर्चा शुरू कर सकें। यह हंगामा ऐसे समय में हुआ है जब प्रदेश सरकार ने वित्त वर्ष 2026‑27 के बजट को पेश किया है जिसमें कई नई घोषणाएँ भी की गई हैं। विपक्ष का मानना है कि बजट पर बात करते हुए सुरक्षा कानून व्यवस्था और सामाजिक शांति जैसे मुद्दों पर तत्काल चर्चा होनी चाहिए जबकि सरकार इसे स्थानीय तनाव बताते हुए स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास कर रही है।

    मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र 2026 में आज एक बार फिर सियासी तापमान बढ़ गया जब सदन में पत्थरबाजी के मामले पर चर्चा की मांग को लेकर जोरदार हंगामा प्रदर्शन हुआ। मामला इतना गरमा गया कि विधानसभा की कार्यवाही को 10 मिनट के लिए स्थगित कर देना पड़ा। बजट सत्र के छठे दिन जब सदन पहुँच चुका था तब भाजपा विधायक डॉ. राजेंद्र पांडे ने अचानक ध्यान आकर्षण पेश करते हुए कहा कि भोपाल और इंदौर दोनों जगह भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच झड़पें हुई हैं जिसमें पत्थरबाजी भी शामिल रही और कुछ महिला कार्यकर्ता घायल भी हुई हैं। उन सभी घटनाओं पर चर्चा की आवश्यकता है।

    पांडे ने कहा कि पहले से पत्थर इकट्ठा किए गए थे और यह सब न सिर्फ समाज में अशांति फैलाने का प्रयास है बल्कि मध्य प्रदेश में गुंडागर्दी की तरफ इशारा भी करता है। उन्होंने यह भी बताया कि शनिवार-शनिवार होने के कारण उन घटनाओं के बारे में पहले सूचना नहीं दी जा सकी। जब विपक्ष से चर्चा शुरू करने की अपील की गई तब कांग्रेस विधायक सचिन यादव ने पलटवार किया और कहा कि उनके कार्यालय पर हमला हुआ है और इसी मुद्दे पर चर्चा होनी चाहिए। वहीं कांग्रेस के सोहनलाल वाल्मीकि ने सवाल उठाया कि इंदौर के भागीरथपुरा में हुए विवाद और हिंसा पर क्यों चर्चा नहीं कराई जा रही है इसके बजाय सदन में अलग मुद्दों को उछाला जा रहा है।

    एक समय ऐसा आया कि विपक्ष और सदस्यों के बीच आवाजें मिलने लगीं और सदन में व्यवधान बढ़ता गया। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष को सदन को 10 मिनट के लिए स्थगित करने का निर्णय लेना पड़ा ताकि दोनों पक्ष संतुलित होकर फिर से चर्चा शुरू कर सकें।  यह हंगामा ऐसे समय में हुआ है जब प्रदेश सरकार ने वित्त वर्ष 2026‑27 के बजट को पेश किया है जिसमें कई नई घोषणाएँ भी की गई हैं। विपक्ष का मानना है कि बजट पर बात करते हुए सुरक्षा कानून व्यवस्था और सामाजिक शांति जैसे मुद्दों पर तत्काल चर्चा होनी चाहिए जबकि सरकार इसे स्थानीय तनाव बताते हुए स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास कर रही है।

  • हेमंत कटारे का इस्तीफा : मैं पद से नहीं, जनता के विश्वास से ताकत लेता हूं, कांग्रेस में सियासी हलचल

    हेमंत कटारे का इस्तीफा : मैं पद से नहीं, जनता के विश्वास से ताकत लेता हूं, कांग्रेस में सियासी हलचल


    भिंड। हेमंत कटारे, भिंड जिले की अटेर सीट से कांग्रेस विधायक और मध्य प्रदेश विधानसभा में उप नेता प्रतिपक्ष, के इस्तीफे ने सियासत में हलचल मचा दी है। एक दिन पहले उन्होंने उप नेता प्रतिपक्ष पद से इस्तीफा दिया था। इस विवाद के बीच कटारे ने सोशल मीडिया पर लंबा पोस्ट कर अपनी स्थिति स्पष्ट की और कहा कि उनकी ताकत किसी पद से नहीं, बल्कि जनता के विश्वास से आती है।

    कटारे ने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा कि कांग्रेस उनके स्वर्गीय पिता की विरासत है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि शादी की सालगिरह पर परिवार के साथ समय बिताना उनका अधिकार है और इसे लेकर किसी साजिश की बात नहीं है। उन्होंने विपक्षी दल पर निशाना साधते हुए कहा कि सोमवार से वे सदन में पूरी तैयारी और दस्तावेजों के साथ उपस्थित रहेंगे और सरकार के भ्रष्टाचार, गोमांस मुद्दा, इंदौर के भागीरथपुरा, शंकराचार्य के अपमान और जहरीली हवा-पानी जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर आवाज उठाएंगे। अंत में उन्होंने कहा, “मैं पद से नहीं, जनता के विश्वास से ताकत लेता हूं, वही मेरी सबसे बड़ी शक्ति है।”

    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि कटारे ने अपने ट्वीट और पोस्ट में सारी बातें साफ कर दी हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनप्रतिनिधि जनता के विश्वास से ही काम करता है और कटारे ने जो कहना था, सार्वजनिक रूप से कह दिया है।

    कांग्रेस में जारी चर्चाओं पर प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने इसे पार्टी का आंतरिक मामला बताया। चौधरी ने कहा कि कटारे की नियुक्ति अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) ने की थी और राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने उन्हें पद दिया था। इसलिए इस्तीफा स्वीकार करने का अधिकार भी राष्ट्रीय अध्यक्ष के पास ही है। उन्होंने बताया कि दिल्ली में हुई बैठक में इस मुद्दे पर पार्टी के भीतर प्रक्रिया जारी है।

    चौधरी ने यह भी कहा कि पार्टी की आंतरिक प्रक्रिया को हर बार सार्वजनिक करना संभव नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि कटारे ने इस्तीफा किन परिस्थितियों में दिया, इसकी जानकारी पार्टी नेतृत्व को दे दी गई है और जो संदेह थे, उनका जवाब उन्होंने ट्वीट के माध्यम से दे दिया।

    प्रदेश प्रभारी ने दोहराया कि कांग्रेस में संवाद की परंपरा कायम है और हर कार्यकर्ता से बातचीत जारी रहती है। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में भी संवाद जारी है और अंतिम निर्णय राष्ट्रीय नेतृत्व ही करेगा।

  • उप नेता प्रतिपक्ष पद से हेमंत कटारे का इस्तीफा, परिवार और क्षेत्र को समय देने की कही बात

    उप नेता प्रतिपक्ष पद से हेमंत कटारे का इस्तीफा, परिवार और क्षेत्र को समय देने की कही बात


    नई दिल्ली। हेमंत कटारे ने मध्य प्रदेश की सियासत में बड़ा संदेश देते हुए विधानसभा में उप नेता प्रतिपक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। भिंड जिले की अटेर विधानसभा सीट से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के विधायक कटारे ने अपने त्यागपत्र में साफ लिखा है कि वे परिवार और क्षेत्र की जनता को पर्याप्त समय नहीं दे पा रहे थे, इसलिए उन्होंने जिम्मेदारी छोड़ने का फैसला किया। उनके इस कदम को व्यक्तिगत और संगठनात्मक संतुलन साधने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

    कटारे लंबे समय से पार्टी संगठन और विधानसभा की सक्रिय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे। उप नेता प्रतिपक्ष के रूप में वे सरकार को घेरने और विपक्ष की रणनीति तय करने में प्रमुख चेहरा थे। हालांकि, इस्तीफे के बाद भी उन्होंने विधायक पद और पार्टी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।

    कांग्रेस की ओर से भी स्पष्ट कर दिया गया है कि यह निर्णय व्यक्तिगत कारणों से लिया गया है और हेमंत कटारे पार्टी में पूरी तरह सक्रिय रहेंगे। पार्टी सूत्रों का कहना है कि वे संगठन और क्षेत्रीय राजनीति में पहले की तरह सक्रिय भूमिका निभाते रहेंगे।

    राजनीतिक गलियारों में इस इस्तीफे को लेकर चर्चा तेज है, लेकिन फिलहाल इसे किसी अंदरूनी खींचतान से जोड़कर नहीं देखा जा रहा। माना जा रहा है कि आने वाले समय में मध्य प्रदेश कांग्रेस संगठन में नई जिम्मेदारियों का बंटवारा भी देखने को मिल सकता है।

  • MP बजट सत्र: इंदौर भागीरथपुरा कांड पर विपक्ष का हंगामा, डिप्टी सीएम और मंत्री विजयवर्गीय के इस्तीफे की मांग

    MP बजट सत्र: इंदौर भागीरथपुरा कांड पर विपक्ष का हंगामा, डिप्टी सीएम और मंत्री विजयवर्गीय के इस्तीफे की मांग


    भोपाल । मध्य प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र गुरुवार को चौथे दिन भी हंगामेदार रहा। कार्यवाही शुरू होने से पहले कांग्रेस विधायकों ने थाली बजाकर विरोध प्रदर्शन किया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने बजट को आम जनता के लिए “ख्याली पुलाव” बताया और सदन में जोरदार हंगामा किया।

    सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने इंदौर भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से हुई मौतों को लेकर आक्रोश जताया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इसे हादसा नहीं बल्कि हत्या बताया और संबंधित मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला, इंदौर सांसद शंकर लालवानी और महापौर पुष्यमित्र भार्गव के इस्तीफे की मांग की। इसके बाद सदन में शोर-शराबा बढ़ गया और कार्यवाही पांच मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी।

    डिप्टी सीएम व स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने बताया कि 21 से 29 दिसंबर के बीच डायरिया फैलने के बाद स्थिति गंभीर हुई थी और 22 मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपए की राहत दी गई। इसके बावजूद विपक्ष ने मृतकों की संख्या 35 बताते हुए सभी परिवारों को मुआवजा देने और मंत्रियों की जिम्मेदारी तय करने की मांग की। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सरकार की गंभीर कार्रवाई का उल्लेख किया और आईएएस अधिकारी के निलंबन की जानकारी दी।

    सदन में अन्य मुद्दों पर भी हंगामा हुआ। अनूपपुर में फीस के दुरुपयोग का मामला उठाया गया। विपक्ष के विरोध के बीच डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा ने सरकार का पक्ष रखा।

    बजट सत्र के पहले तीन दिन भी विवादों और हंगामेदार घटनाओं से भरे रहे। पहले दिन राज्यपाल मंगु भाई पटेल का अभिभाषण और वंदे मातरम् के दौरान विपक्ष ने हंगामा किया। दूसरे दिन वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने तीसरा अनुपूरक बजट पेश किया, जिसकी चर्चा 23 फरवरी को होगी। तीसरे दिन 4 लाख 38 हजार 317 करोड़ रुपए के बजट पर भाषण हुआ, जिसमें 8वीं तक टेट्रा पैक दूध फ्री और 15,000 शिक्षकों की भर्ती जैसे ऐलान शामिल थे।

    बजट सत्र 16 फरवरी से 6 मार्च तक चलेगा। इस दौरान कुल 3,478 प्रश्न, 236 ध्यानाकर्षण, 10 स्थगन प्रस्ताव, 41 अशासकीय संकल्प और शून्य काल में 83 सवाल विधानसभा में रखे जाएंगे।

  • मध्य प्रदेश विधानसभा होगी पेपरलेस: दिल्ली से आए विशेषज्ञ विधायकों को देंगे ऑनलाइन कार्यवाही की ट्रेनिंग

    मध्य प्रदेश विधानसभा होगी पेपरलेस: दिल्ली से आए विशेषज्ञ विधायकों को देंगे ऑनलाइन कार्यवाही की ट्रेनिंग


    मध्य प्रदेश। विधानसभा को आधुनिक और तकनीक-आधारित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। राज्य में विधानसभा की कार्यवाही को पूरी तरह डिजिटल और पेपरलेस बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। इसी क्रम में मंगलवार को भोपाल में विधायकों के लिए एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है, जिसमें उन्हें ऑनलाइन और डिजिटल माध्यम से विधानसभा कार्यवाही संचालित करने की जानकारी दी जाएगी। यह प्रशिक्षण राष्ट्रीय ई-विधान एप्लिकेशन NeVA परियोजना के तहत आयोजित किया जा रहा है। विधानसभा सचिवालय से मिली जानकारी के अनुसार, यह सत्र मंगलवार को सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक विधानसभा परिसर स्थित मानसरोवर सभागार में होगा। इसमें प्रदेश के विधायक भाग लेंगे और उन्हें डिजिटल प्लेटफॉर्म के उपयोग से जुड़े विभिन्न संसदीय कार्यों की प्रक्रिया समझाई जाएगी।

    दिल्ली से आई विशेषज्ञों की टीम

    इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए संसदीय कार्य मंत्रालय, नई दिल्ली से विशेषज्ञों की एक टीम भोपाल पहुंची है। ये विशेषज्ञ विधायकों को बताएंगे कि किस प्रकार मोबाइल टैबलेट, लैपटॉप या अन्य डिजिटल उपकरणों के माध्यम से विधानसभा की कार्यवाही में भाग लिया जा सकता है। प्रशिक्षण के दौरान लाइव डेमो के जरिए डिजिटल सिस्टम का उपयोग भी दिखाया जाएगा, ताकि विधायकों को व्यवहारिक अनुभव मिल सके।विशेषज्ञों द्वारा विधायकों को यह सिखाया जाएगा कि वे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रश्न कैसे दर्ज करें, विधेयकों का अध्ययन कैसे करें और सदन की कार्यसूची, रिपोर्ट एवं अन्य दस्तावेजों तक तुरंत कैसे पहुंचें।

    कागज से मिलेगी छुटकारा

    NeVA परियोजना के लागू होने के बाद विधानसभा की कार्यवाही में कागजों का इस्तेमाल लगभग समाप्त हो जाएगा। प्रश्नोत्तर काल, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव, विधेयकों की प्रतियां, कार्यसूची, मतदान प्रक्रिया और उपस्थिति से संबंधित सभी जानकारियां डिजिटल रूप में उपलब्ध रहेंगी। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि दस्तावेजों के रखरखाव और रिकॉर्ड प्रबंधन में भी आसानी होगी।विधानसभा सचिवालय का मानना है कि डिजिटल कार्यप्रणाली से सदन की पारदर्शिता बढ़ेगी और कार्यवाही अधिक सुचारू रूप से संचालित हो सकेगी।

    क्या है NeVA प्लेटफॉर्म

    NeVA यानी नेशनल ई-विधान एप्लिकेशन एक ऐसा डिजिटल सिस्टम है, जिसके माध्यम से विधानसभा की पूरी कार्यवाही रियल-टाइम में दर्ज की जाती है। इस प्लेटफॉर्म पर विधायकों को व्यक्तिगत लॉगिन उपलब्ध कराया जाता है, जिससे वे सदन से जुड़े सभी दस्तावेज, प्रस्ताव और रिपोर्ट तुरंत देख सकते हैं।यह परियोजना वन नेशन, वन एप्लिकेशन की अवधारणा पर आधारित है, जिसका उद्देश्य देश की संसद और सभी राज्य विधानसभाओं को एक समान डिजिटल प्रणाली से जोड़ना है।

    चरणबद्ध तरीके से होगा लागू
    विधानसभा सचिवालय के अधिकारियों के अनुसार, प्रशिक्षण के बाद चरणबद्ध तरीके से पेपरलेस कार्यप्रणाली को पूरी तरह लागू किया जाएगा। शुरुआती चरण में तकनीकी सहायता टीम भी तैनात रहेगी, ताकि विधायकों को किसी भी तरह की तकनीकी परेशानी न हो।अधिकारियों का कहना है कि विधायकों की सुविधा और कार्यकुशलता को ध्यान में रखते हुए डिजिटल सिस्टम को धीरे-धीरे पूरी तरह लागू किया जाएगा।

    क्यों अहम है यह कदम

    विशेषज्ञों और विश्लेषकों का मानना है कि यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि इससे विधानसभा की कार्यक्षमता, पारदर्शिता और जवाबदेही भी बढ़ेगी। कागजों की खपत कम होने से लागत में भी कमी आएगी।मध्य प्रदेश विधानसभा का यह डिजिटल बदलाव आने वाले समय में अन्य राज्यों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है और देश की विधायी प्रक्रिया को आधुनिक स्वरूप देने में सहायक होगा।