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  • भाजपा युवा मोर्चा ने बदले 19 जिलों के पदाधिकारी, भोपाल और इंदौर शहर में पुराने चेहरों पर भरोसा

    भाजपा युवा मोर्चा ने बदले 19 जिलों के पदाधिकारी, भोपाल और इंदौर शहर में पुराने चेहरों पर भरोसा


    भोपाल।  मध्य प्रदेश में भारतीय जनता युवा मोर्चा ने संगठनात्मक स्तर पर बड़ा बदलाव किया है। प्रदेश के 19 जिलों में जिला अध्यक्षों और जिला महामंत्रियों की नई नियुक्तियां घोषित की गई हैं। इन नियुक्तियों के जरिए संगठन ने कई जिलों में नए चेहरों को जिम्मेदारी सौंपी है। भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष श्याम टेलर ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की सहमति से नई नियुक्तियों की घोषणा की। इस बदलाव के बाद अब संबंधित जिलों में युवा मोर्चा की संगठनात्मक गतिविधियों की जिम्मेदारी नए पदाधिकारियों के हाथों में होगी।

    घोषित नियुक्तियों में जबलपुर नगर में रवींद्र तिवारी को जिला अध्यक्ष बनाया गया है। वहीं मऊगंज में अभिषेक मिश्रा और श्योपुर में ईश्वर जाट को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। सागर में जसवंत राठौर को जिला अध्यक्ष की कमान दी गई है। इसके अलावा निवाड़ी मैहर उमरिया डिंडौरी और मंडला सहित कई जिलों में भी नए अध्यक्षों की नियुक्ति की गई है। इन बदलावों के माध्यम से संगठन ने अलग-अलग क्षेत्रों में युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाने का प्रयास किया है।

    जिला अध्यक्षों के साथ जिला महामंत्रियों के नामों की भी घोषणा की गई है। बालाघाट इंदौर ग्रामीण धार नगर नीमच सिवनी छिंदवाड़ा नर्मदापुरम रायसेन अनूपपुर और मंदसौर में भी नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। इस तरह कुल 19 जिलों में संगठन के पदाधिकारियों के स्तर पर बदलाव किया गया है। हालांकि भोपाल और इंदौर शहर में जिला अध्यक्षों को लेकर कोई बदलाव नहीं किया गया है। इन दोनों शहरों में फिलहाल पहले से जिम्मेदारी संभाल रहे पदाधिकारियों पर ही भरोसा कायम रखा गया है।

    युवा मोर्चा में इन नियुक्तियों को प्रदेश भाजपा के संगठनात्मक विस्तार और युवा कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देने की प्रक्रिया से जोड़कर देखा जा रहा है। जिला स्तर पर अध्यक्ष और महामंत्री संगठन के महत्वपूर्ण पद होते हैं। इनके जरिए सदस्यता अभियान से लेकर युवा कार्यकर्ताओं के कार्यक्रमों और पार्टी की गतिविधियों के संचालन में भूमिका निभाई जाती है। नई टीम के सामने अपने-अपने जिलों में संगठन को सक्रिय रखने और कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय बनाने की जिम्मेदारी होगी।

    मध्य प्रदेश भाजपा में संगठनात्मक बदलाव का यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब पार्टी अपने प्रदेश संगठन को नए सिरे से व्यवस्थित करने की प्रक्रिया में जुटी है। इससे पहले भाजपा के केंद्रीय संगठन की ओर से चंद्रशेखर को मध्य प्रदेश का प्रदेश महामंत्री संगठन नियुक्त किया गया था। करीब आठ महीने बाद इस महत्वपूर्ण पद पर नियुक्ति हुई थी। अब युवा मोर्चा के 19 जिलों में नई नियुक्तियों के साथ जिला स्तर पर भी संगठनात्मक जिम्मेदारियों का पुनर्वितरण किया गया है।

    नई नियुक्तियों के बाद संबंधित जिलों में युवा मोर्चा की गतिविधियों को लेकर नए पदाधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। वहीं भोपाल और इंदौर शहर में बदलाव नहीं होने से इन दोनों इकाइयों में मौजूदा नेतृत्व ही संगठन का काम संभालता रहेगा। पार्टी की ओर से जारी सूची में जिला अध्यक्षों के साथ महामंत्रियों के नाम भी शामिल किए गए हैं।

  • मध्यप्रदेश की योजनाओं को रफ्तार देने की तैयारी, हर भाजपा सांसद बनेगा केंद्रीय मंत्रालय का कॉर्डिनेटर

    मध्यप्रदेश की योजनाओं को रफ्तार देने की तैयारी, हर भाजपा सांसद बनेगा केंद्रीय मंत्रालय का कॉर्डिनेटर


    भोपाल । मध्यप्रदेश में केंद्र और राज्य सरकार के बीच समन्वय को मजबूत बनाने के लिए भाजपा एक नई व्यवस्था शुरू करने की तैयारी कर रही है। इसके तहत प्रदेश के प्रत्येक भाजपा सांसद को केंद्र सरकार के एक मंत्रालय के साथ समन्वय की जिम्मेदारी देने का प्रस्ताव सामने आया है। इस व्यवस्था का उद्देश्य मध्यप्रदेश से जुड़ी केंद्रीय योजनाओं परियोजनाओं और लंबित स्वीकृतियों के मामलों को तेजी से आगे बढ़ाना है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने मुख्यमंत्री निवास पर आयोजित पार्टी की कोर ग्रुप बैठक में यह सुझाव रखा। प्रस्ताव के अनुसार सांसद अपने निर्धारित मंत्रालय से संबंधित प्रदेश के मामलों की निगरानी करेंगे और जरूरत पड़ने पर केंद्रीय स्तर पर उनकी पैरवी करेंगे।

    इस प्रस्ताव के तहत सांसदों की भूमिका केवल राजनीतिक प्रतिनिधित्व तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि उन्हें केंद्र और राज्य के बीच संपर्क की एक अतिरिक्त कड़ी के रूप में इस्तेमाल करने की योजना है। मध्यप्रदेश के अलग-अलग विभागों को केंद्र सरकार की योजनाओं के लिए वित्तीय मंजूरी परियोजनाओं की स्वीकृति और प्रशासनिक प्रक्रियाओं से जुड़े मामलों में संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों से लगातार संपर्क करना पड़ता है। कई बार इन मामलों में जानकारी जुटाने और निर्णय की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में समय लगता है। ऐसे में यदि प्रत्येक मंत्रालय के लिए एक सांसद की जिम्मेदारी तय होती है तो संबंधित विभागों को अपने मुद्दे उठाने के लिए एक निर्धारित माध्यम मिल सकता है।

    प्रस्ताव के मुताबिक संबंधित सांसद मुख्यमंत्री मुख्य सचिव और मध्यप्रदेश के संबंधित विभाग के अपर मुख्य सचिव या प्रमुख सचिव के साथ समन्वय करेंगे। प्रदेश में किसी योजना या परियोजना से जुड़ा मामला केंद्रीय मंत्रालय में लंबित होने पर सांसद उसकी स्थिति की जानकारी लेकर दिल्ली में संबंधित अधिकारियों के सामने विषय रख सकेंगे। इससे राज्य सरकार की प्राथमिकताओं को केंद्र तक पहुंचाने और आवश्यक मंजूरियों के लिए नियमित संपर्क बनाए रखने में मदद मिल सकती है। हालांकि इस व्यवस्था की वास्तविक प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करेगी कि जिम्मेदारियां किस तरह बांटी जाती हैं और मामलों की समीक्षा कितनी नियमित होती है।

    मध्यप्रदेश में लोकसभा की सभी 29 सीटों पर भाजपा के सांसद हैं। ऐसे में पार्टी के पास इस प्रस्ताव को लागू करने के लिए सांसदों का व्यापक समूह उपलब्ध है। सांसदों के अनुभव उनकी प्रशासनिक समझ और संबंधित क्षेत्रों से जुड़ी जानकारी का उपयोग प्रदेश की योजनाओं को आगे बढ़ाने में किया जा सकता है। केंद्र सरकार के अलग-अलग मंत्रालयों में सड़क परिवहन ग्रामीण विकास कृषि ऊर्जा आवास स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय होते हैं। इनसे संबंधित मध्यप्रदेश के प्रस्तावों पर समन्वय की जिम्मेदारी तय होने से विभागों को अपने मामलों की स्थिति पर नजर रखने में सुविधा मिल सकती है।

    इस व्यवस्था से लंबित परियोजनाओं की पैरवी और केंद्रीय योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी को व्यवस्थित करने की उम्मीद जताई जा रही है। यदि किसी परियोजना के लिए वित्तीय सहायता या प्रशासनिक मंजूरी जरूरी है तो संबंधित सांसद विभागीय अधिकारियों से जानकारी लेकर केंद्रीय मंत्रालय के साथ संपर्क कर सकेंगे। मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव के स्तर पर प्राथमिकता वाले मामलों की समीक्षा होने से राज्य सरकार की जरूरतों और केंद्र के निर्णयों के बीच तालमेल बेहतर करने का प्रयास किया जा सकता है।

    प्रस्तावित व्यवस्था का एक अहम पहलू जवाबदेही भी है। मंत्रालयवार जिम्मेदारी तय होने पर यह स्पष्ट किया जा सकेगा कि किस केंद्रीय मंत्रालय से जुड़े मामलों की पैरवी कौन-सा सांसद कर रहा है और उन पर कितनी प्रगति हुई है। इससे लंबित प्रस्तावों की स्थिति की समीक्षा करना आसान हो सकता है। साथ ही अधिकारियों को विभिन्न स्तरों पर अलग-अलग संपर्क करने के बजाय सांसद के माध्यम से समन्वय का एक अतिरिक्त रास्ता मिलेगा।

    फिलहाल यह व्यवस्था प्रस्ताव के स्तर पर है। इसे किस रूप में लागू किया जाएगा और सांसदों को कौन-कौन से मंत्रालय सौंपे जाएंगे इस बारे में विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है। यदि योजना को व्यवस्थित तरीके से लागू किया जाता है तो इससे मध्यप्रदेश की केंद्रीय योजनाओं और परियोजनाओं से जुड़े मामलों को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

  • MP BJP को मिला नया संगठन महामंत्री, 8 महीने बाद चंद्रशेखर की एंट्री, हितानंद शर्मा के हटने के बाद बदली तस्वीर

    MP BJP को मिला नया संगठन महामंत्री, 8 महीने बाद चंद्रशेखर की एंट्री, हितानंद शर्मा के हटने के बाद बदली तस्वीर


    भोपाल। मध्य प्रदेश भाजपा में करीब आठ महीने से खाली चल रहे प्रदेश संगठन महामंत्री के पद पर अब नियुक्ति हो गई है। पार्टी ने चंद्रशेखर को मध्य प्रदेश का नया प्रदेश महामंत्री संगठन नियुक्त किया है। उनकी नियुक्ति के साथ ही प्रदेश भाजपा के संगठनात्मक ढांचे में लंबे समय से खाली चल रही महत्वपूर्ण जिम्मेदारी पूरी हो गई है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक चंद्रशेखर पहले राजस्थान और तेलंगाना भाजपा में संगठन महामंत्री की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।

    दरअसल जनवरी 2026 में तत्कालीन प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा की संघ में वापसी हुई थी। उन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मध्य क्षेत्र में सह बौद्धिक प्रमुख की जिम्मेदारी दी गई थी। इसके बाद मध्य प्रदेश भाजपा में प्रदेश संगठन महामंत्री का पद खाली हो गया था। नई नियुक्ति होने तक क्षेत्रीय संगठन मंत्री अजय जामवाल मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में संगठन से जुड़े काम देख रहे थे।


    अब चंद्रशेखर को यह जिम्मेदारी मिलने के बाद प्रदेश भाजपा के संगठनात्मक कामकाज में उनकी भूमिका अहम होगी। संगठन महामंत्री पार्टी के संगठन और कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय से जुड़े काम देखते हैं। प्रदेश से लेकर जिला और बूथ स्तर तक संगठनात्मक गतिविधियों को आगे बढ़ाने में भी इस पद की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।

    चंद्रशेखर की पृष्ठभूमि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ी रही है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार वह उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के रहने वाले हैं और संघ में विभाग प्रचारक के तौर पर काम कर चुके हैं। इसके बाद उन्होंने काशी क्षेत्र में संगठनात्मक जिम्मेदारी संभाली। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी उन्हें संगठन से जुड़ा दायित्व मिला।

    सितंबर 2017 में चंद्रशेखर को राजस्थान भाजपा का संगठन महामंत्री बनाया गया था। उन्होंने करीब छह साल तक राजस्थान में संगठन का काम संभाला। इसके बाद जनवरी 2024 में उन्हें तेलंगाना भाजपा का संगठन महामंत्री बनाया गया। अब मध्य प्रदेश में उन्हें नई जिम्मेदारी दी गई है।

    मध्य प्रदेश भाजपा में यह नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब पार्टी अपने संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने की प्रक्रिया में है। चंद्रशेखर के सामने प्रदेश संगठन के विभिन्न स्तरों के बीच समन्वय बनाए रखने के साथ कार्यकर्ताओं के साथ संवाद और संगठनात्मक गतिविधियों को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी।

    इससे पहले हितानंद शर्मा ने सितंबर 2020 में मध्य प्रदेश भाजपा में सह संगठन महामंत्री के तौर पर जिम्मेदारी संभाली थी। मार्च 2022 में सुहास भगत की संघ में वापसी के बाद हितानंद को प्रदेश संगठन महामंत्री बनाया गया था। जनवरी 2026 में उनकी संघ में वापसी के बाद से यह पद खाली था।

    अब चंद्रशेखर की नियुक्ति के साथ मध्य प्रदेश भाजपा को पूर्णकालिक प्रदेश संगठन महामंत्री मिल गया है। आने वाले समय में उनकी संगठनात्मक कार्यशैली और प्रदेश भाजपा के अलग-अलग स्तरों के साथ समन्वय पर पार्टी के भीतर नजर रहेगी।

  • BJP ने बदली राष्ट्रीय मीडिया टीम आशीष उषा अग्रवाल बने मीडिया सह-संयोजक MP में निभा चुके हैं अहम भूमिका

    BJP ने बदली राष्ट्रीय मीडिया टीम आशीष उषा अग्रवाल बने मीडिया सह-संयोजक MP में निभा चुके हैं अहम भूमिका


    भोपाल । भारतीय जनता पार्टी ने अगस्त 2026 में अपनी नई राष्ट्रीय संगठनात्मक टीम का ऐलान किया था जिसमें मीडिया विभाग में भी बदलाव किए गए। पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन के नेतृत्व में घोषित टीम में अनिल बलूनी को राष्ट्रीय मीडिया संयोजक बनाया गया जबकि मध्यप्रदेश के आशीष उषा अग्रवाल प्रदीप भंडारी और सिद्धार्थ यादव को राष्ट्रीय मीडिया सह-संयोजक की जिम्मेदारी दी गई। इससे मध्यप्रदेश BJP के मीडिया संगठन से जुड़े आशीष अग्रवाल की भूमिका प्रदेश स्तर से बढ़कर राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गई है।

    आशीष उषा अग्रवाल लंबे समय से BJP के मीडिया विभाग से जुड़े रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उन्होंने मध्यप्रदेश BJP में मीडिया पैनलिस्ट के तौर पर काम किया और इसके बाद प्रदेश प्रवक्ता तथा प्रदेश मीडिया प्रभारी की जिम्मेदारियां संभालीं। इस दौरान उनका काम पार्टी के राजनीतिक मुद्दों को मीडिया के सामने रखने और प्रदेश संगठन तथा मीडिया के बीच समन्वय से जुड़ा रहा। 2023 के मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान भी वे पार्टी की प्रदेश मीडिया व्यवस्था से जुड़े प्रमुख पद पर रहे।

    अब राष्ट्रीय मीडिया टीम में सह-संयोजक की जिम्मेदारी मिलने के बाद उनका कार्यक्षेत्र मध्यप्रदेश से आगे बढ़कर पार्टी के राष्ट्रीय संगठन तक हो गया है। BJP की घोषित राष्ट्रीय टीम में मीडिया विभाग की कमान अनिल बलूनी को दी गई है जबकि आशीष अग्रवाल के साथ प्रदीप भंडारी और सिद्धार्थ यादव को सह-संयोजक बनाया गया है।

    राष्ट्रीय मीडिया टीम में बदलाव ऐसे समय हुआ है जब BJP ने अपने संगठन में कई स्तरों पर नई जिम्मेदारियां तय की हैं। पार्टी ने मीडिया के साथ सोशल मीडिया संगठन में भी नियुक्तियां की हैं। दीपक म्हस्के को सोशल मीडिया संयोजक बनाया गया जबकि प्रीति गांधी शिवानंद द्विवेदी आलोक भट्ट और अरुण यादव को सोशल मीडिया सह-संयोजक की जिम्मेदारी दी गई। इस तरह पार्टी के पारंपरिक मीडिया और डिजिटल संचार दोनों क्षेत्रों के लिए नई टीम सामने आई है।

    आशीष अग्रवाल के राजनीतिक और संगठनात्मक सफर की शुरुआत ग्वालियर से जुड़ी रही है। उपलब्ध प्रोफाइल के अनुसार वे छात्र जीवन से सामाजिक धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़े रहे। इसके बाद BJP की संगठनात्मक गतिविधियों में उनकी सक्रियता बढ़ी और धीरे धीरे मीडिया विभाग में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण होती गई। पार्टी के प्रदेश मीडिया संगठन में विभिन्न जिम्मेदारियां संभालने के बाद अब उन्हें राष्ट्रीय टीम में स्थान मिला है।

    राजनीति में सक्रिय होने से पहले उनका पेशेवर अनुभव कॉरपोरेट क्षेत्र में भी रहा। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक उन्होंने ICICI Bank और उसके समूह में काम किया। उन्होंने Great Lakes Institute of Management Chennai से MBA की पढ़ाई की है जबकि Jiwaji University Gwalior से MA और B.Com की डिग्री हासिल की है।

    BJP की नई राष्ट्रीय मीडिया टीम में आशीष अग्रवाल की नियुक्ति के साथ मध्यप्रदेश के एक और पार्टी पदाधिकारी को राष्ट्रीय संगठन में भूमिका मिली है। अगस्त में घोषित टीम के अनुसार अनिल बलूनी राष्ट्रीय मीडिया संयोजक हैं और आशीष अग्रवाल प्रदीप भंडारी तथा सिद्धार्थ यादव उनके साथ मीडिया सह-संयोजक के रूप में काम करेंगे।

    इस नियुक्ति के बाद आशीष अग्रवाल की जिम्मेदारी अब केवल मध्यप्रदेश तक सीमित नहीं रहेगी। राष्ट्रीय मीडिया विभाग में उनकी भूमिका पार्टी के राष्ट्रीय स्तर के मीडिया समन्वय और संगठनात्मक संचार से जुड़े कामों में होगी। वहीं अलग अलग राज्यों और क्षेत्रों में पार्टी की मीडिया गतिविधियों को राष्ट्रीय संगठन से जोड़ना नई टीम की जिम्मेदारियों का हिस्सा रहेगा।

  • 17 सितंबर से MP में भाजपा का सेवा संकल्प अभियान CM मोहन यादव और हेमंत खंडेलवाल ने बताया पूरा प्लान बूथ से आंगनवाड़ी तक होंगे कार्यक्रम

    17 सितंबर से MP में भाजपा का सेवा संकल्प अभियान CM मोहन यादव और हेमंत खंडेलवाल ने बताया पूरा प्लान बूथ से आंगनवाड़ी तक होंगे कार्यक्रम


    भोपाल। मध्य प्रदेश में भाजपा 17 सितंबर से सेवा संकल्प अभियान की शुरुआत करने जा रही है। यह अभियान 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलेगा और इसके तहत प्रदेशभर में अलग अलग स्तर पर सेवा और जनसंपर्क से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने प्रदेश भाजपा कार्यालय में संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अभियान की रूपरेखा साझा की। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि अभियान का मुख्य उद्देश्य सेवा गतिविधियों के जरिए समाज के अलग अलग वर्गों तक पहुंचना है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्ष के सार्वजनिक जीवन और उनके कार्यकाल में देश तथा मध्य प्रदेश में हुए बदलावों की जानकारी भी लोगों तक पहुंचाई जाएगी।

    अभियान की शुरुआत 17 सितंबर को शाम 7 बजे से होगी। इस दिन प्रदेश के करीब 18 हजार बूथों पर लाभार्थियों के घरों में आशीर्वाद का दीप जलाया जाएगा। इसके साथ ही सामाजिक धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व वाले प्रमुख स्थानों पर दीपोत्सव का आयोजन किया जाएगा। भाजपा का प्रयास है कि इस कार्यक्रम के जरिए लाभार्थियों और कार्यकर्ताओं के बीच संवाद को मजबूत किया जाए और सरकार की योजनाओं से जुड़े लोगों तक संगठन की पहुंच बढ़ाई जाए।

    अभियान के दौरान सरकारी और निजी स्कूलों में मेरे सपनों का भारत कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा। इसमें विद्यार्थियों के लिए चित्रकला ड्राइंग और भाषण प्रतियोगिताएं होंगी। विकसित भारत की संकल्पना को लेकर स्कूल स्तर से लेकर ब्लॉक और जिला स्तर तक विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इसमें विद्यार्थियों को भविष्य के भारत को लेकर अपने विचार रखने का अवसर मिलेगा।

    इसके अलावा नमो सेवा अनकही कहानी नाम से भी कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्ष के सार्वजनिक जीवन और उनके कार्यों पर आधारित 10 से 15 मिनट की नाट्य प्रस्तुतियां तैयार की जाएंगी। इनका मंचन चौक चौराहों और विभिन्न संस्थानों में किया जाएगा। अभियान के दौरान 2 अक्टूबर को भी विशेष कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी है।

    महिलाओं और बच्चों तक पहुंच बनाने के लिए आंगन मिलन कार्यक्रम भी अभियान का अहम हिस्सा रहेगा। प्रदेश की 97 हजार से ज्यादा आंगनवाड़ियों में तीन दिन तक कार्यक्रम होंगे। इस दौरान आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं का सम्मान किया जाएगा। बच्चों और माताओं के साथ पोषण स्वास्थ्य तथा महिलाओं से जुड़ी सरकारी योजनाओं की जानकारी साझा की जाएगी। इसके जरिए सरकार की योजनाओं और समाज के अंतिम वर्ग के बीच संवाद को मजबूत करने पर जोर रहेगा।

    भाजपा प्रदेश के करीब 11 हजार 400 शक्ति केंद्रों पर सेवा की कहानी कार्यक्रम भी आयोजित करेगी। इन कार्यक्रमों में छोटी झांकियों और प्रस्तुतियों के जरिए देश में हुए बदलावों की जानकारी लोगों तक पहुंचाई जाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्ष के सार्वजनिक जीवन के साथ केंद्र सरकार के 12 वर्ष के कार्यकाल में हुए बदलावों को भी इन कार्यक्रमों के माध्यम से जनता के सामने रखा जाएगा।

    भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि सेवा संकल्प अभियान शासन और समाज के मिलकर काम करने की भावना पर आधारित है। पार्टी का फोकस सेवा गतिविधियों के साथ सरकार की योजनाओं और उनके प्रभाव को जनता तक पहुंचाने पर रहेगा। एक महीने तक चलने वाले इस अभियान में बूथ से लेकर आंगनवाड़ी और शक्ति केंद्र तक अलग अलग स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। ऐसे में सितंबर और अक्टूबर के दौरान मध्य प्रदेश में भाजपा का यह अभियान संगठनात्मक गतिविधियों के साथ व्यापक जनसंपर्क अभियान के रूप में भी नजर आएगा।

  • भाजपा युवा मोर्चा में संगठन विस्तार की रफ्तार तेज, 12 जिलाध्यक्षों का ऐलान; अभी भी कई जिलों में नियुक्तियां बाकी

    भाजपा युवा मोर्चा में संगठन विस्तार की रफ्तार तेज, 12 जिलाध्यक्षों का ऐलान; अभी भी कई जिलों में नियुक्तियां बाकी


    भोपाल। मध्यप्रदेश में भाजपा युवा मोर्चा के संगठनात्मक विस्तार की प्रक्रिया लगातार आगे बढ़ रही है। पार्टी ने युवा मोर्चा के 12 और जिलाध्यक्षों की घोषणा कर दी है। इसके साथ ही अब तक प्रदेश के 27 जिलों में युवा मोर्चा के जिलाध्यक्षों की नियुक्ति हो चुकी है। हालांकि प्रदेश के बाकी जिलों में अभी नियुक्तियों का इंतजार बना हुआ है। नई नियुक्तियों के साथ संगठन ने कई जिलों में युवा नेतृत्व को जिम्मेदारी सौंपते हुए जिला स्तर पर अपनी टीम को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। खास बात यह है कि नई सूची में 9 जिलों के जिला महामंत्रियों के नाम भी घोषित किए गए हैं।

    भाजपा युवा मोर्चा की ओर से जारी नई नियुक्तियों में भोपाल ग्रामीण ग्वालियर ग्रामीण मऊगंज सतना कटनी पांढुर्णा धार ग्रामीण बुरहानपुर देवास विदिशा उज्जैन ग्रामीण और शाजापुर शामिल हैं। इससे पहले जुलाई में 15 जिलाध्यक्षों की घोषणा की गई थी। इस तरह करीब एक महीने के अंतराल में पार्टी ने 12 और जिलों में अध्यक्षों की नियुक्ति की है। लगातार हो रही इन नियुक्तियों को संगठन में नई टीम को सक्रिय करने की प्रक्रिया के तौर पर देखा जा रहा है।

    भोपाल ग्रामीण में वीरेंद्र सिंह राजपूत को जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। उनकी पत्नी रूमा राजपूत भोपाल शहर के वार्ड 85 की पार्षद हैं। वहीं ग्वालियर ग्रामीण में शिवराज यादव को जिलाध्यक्ष और मनोज गुर्जर को जिला महामंत्री बनाया गया है। मऊगंज में प्रवीण सिंह को जिलाध्यक्ष तथा विवेक तिवारी को महामंत्री की जिम्मेदारी मिली है। सतना में यश यादव जिलाध्यक्ष और शुभम परिहार महामंत्री बनाए गए हैं।

    कटनी में पारस जैन को जिलाध्यक्ष और देवांश श्रीवास्तव को जिला महामंत्री नियुक्त किया गया है। पांढुर्णा में विवेक रामचाकले को जिलाध्यक्ष तथा पंकज बंजारी को महामंत्री बनाया गया है। धार ग्रामीण में उज्ज्वल सोलंकी को जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है। बुरहानपुर में भरत रावल जिलाध्यक्ष और अमित वास्कले जिला महामंत्री बने हैं।

    इसी तरह देवास में रजत पाल सिंह को जिलाध्यक्ष तथा मोहित जाट को जिला महामंत्री बनाया गया है। विदिशा में अनुज मित्तल को जिलाध्यक्ष और शिवेन्द्र सिंह राजपूत को महामंत्री की जिम्मेदारी मिली है। उज्जैन ग्रामीण में हरजीत सिंह जिलाध्यक्ष और राहुल धाकड़ जिला महामंत्री बनाए गए हैं। शाजापुर में हर्षवर्धन मंडलोई को जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

    नई नियुक्तियों के बाद युवा मोर्चा के संगठनात्मक ढांचे को लेकर गतिविधियां और तेज होने की उम्मीद है। जिलाध्यक्षों की जिम्मेदारी केवल संगठन विस्तार तक सीमित नहीं होगी बल्कि युवाओं को पार्टी से जोड़ने संगठनात्मक कार्यक्रमों को गति देने और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ाने में भी उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी। हालांकि अभी भी कई जिलों में जिलाध्यक्षों की नियुक्ति बाकी है। ऐसे में आने वाले दिनों में भाजपा की ओर से शेष जिलों को लेकर भी फैसले सामने आने की संभावना है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि पार्टी बाकी जिलों में किन नए चेहरों पर भरोसा जताती है और युवा मोर्चा की पूरी टीम कब तक आकार लेती है।

  • BJP युवा मोर्चा की नई टीम तैयार, ग्वालियर से भोपाल और उज्जैन तक बदली कमान; जानें किसे मिली कौन सी जिम्मेदारी

    BJP युवा मोर्चा की नई टीम तैयार, ग्वालियर से भोपाल और उज्जैन तक बदली कमान; जानें किसे मिली कौन सी जिम्मेदारी


    भोपाल । मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी ने युवा मोर्चा के संगठन को और मजबूत करने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की सहमति के बाद भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष श्याम टेलर ने 12 जिलों में नए जिलाध्यक्षों की घोषणा की है। इसके साथ ही 9 जिलों में जिला महामंत्रियों की नियुक्ति भी की गई है। नई जिम्मेदारियां ग्वालियर ग्रामीण मऊगंज सतना कटनी पांढुर्णा भोपाल ग्रामीण धार ग्रामीण बुरहानपुर देवास विदिशा उज्जैन ग्रामीण और शाजापुर में दी गई हैं। इससे पहले जुलाई में भी युवा मोर्चा ने 15 जिलों में अध्यक्षों की नियुक्ति की थी। उस सूची में ग्वालियर नगर समेत कई जिलों को नई कमान मिली थी। (peptechtime.com)

    ताजा नियुक्तियों में ग्वालियर ग्रामीण की जिम्मेदारी शिवराज यादव को दी गई है जबकि मनोज गुर्जर को जिला महामंत्री बनाया गया है। मऊगंज में प्रवीण सिंह जिलाध्यक्ष और विवेक तिवारी महामंत्री होंगे। सतना में यश यादव को जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली है और शुभम परिहार जिला महामंत्री बनाए गए हैं। कटनी में पारस जैन को जिलाध्यक्ष तथा देवांश श्रीवास्तव को महामंत्री नियुक्त किया गया है। इन नियुक्तियों के जरिए पार्टी ने ग्रामीण और संगठनात्मक क्षेत्रों में युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाने का संकेत दिया है।

    पांढुर्णा में विवेक रामचाकले को जिलाध्यक्ष बनाया गया है जबकि पंकज बंजारी को जिला महामंत्री की जिम्मेदारी मिली है। भोपाल ग्रामीण में वीरेंद्र सिंह राजपूत को युवा मोर्चा का जिलाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। धार ग्रामीण में उज्ज्वल सोलंकी को जिलाध्यक्ष बनाया गया है। इन दोनों जिलों में फिलहाल जिला महामंत्री के नाम की घोषणा नहीं की गई है।

    बुरहानपुर में भरत रावल को जिलाध्यक्ष और अमित वास्कले को जिला महामंत्री बनाया गया है। देवास में रजत पाल सिंह को अध्यक्ष तथा मोहित जाट को महामंत्री की जिम्मेदारी दी गई है। विदिशा में अनुज मित्तल जिलाध्यक्ष होंगे जबकि शिवेंद्र सिंह राजपूत को जिला महामंत्री बनाया गया है। उज्जैन ग्रामीण में हरजीत सिंह को जिलाध्यक्ष और राहुल धाकड़ को जिला महामंत्री की जिम्मेदारी मिली है। शाजापुर में हर्षवर्धन मंडलोई को जिलाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। यहां भी महामंत्री का नाम फिलहाल घोषित नहीं किया गया है।

    बीजेपी युवा मोर्चा में लगातार हो रही इन नियुक्तियों को संगठन विस्तार की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। जुलाई में प्रदेश के 15 जिलों में अध्यक्षों की पहली बड़ी सूची जारी हुई थी जिसमें सागर ग्रामीण हरदा सीधी टीकमगढ़ खरगोन जबलपुर ग्रामीण बैतूल झाबुआ उज्जैन नगर ग्वालियर नगर रतलाम बड़वानी शहडोल सीहोर और खंडवा शामिल थे। उस सूची में छह जिलों के महामंत्रियों की भी घोषणा की गई थी। (starsamachar.com)

    पार्टी के युवा संगठन में जिला अध्यक्षों की भूमिका अहम मानी जाती है। इन पदाधिकारियों के जरिए बूथ स्तर तक युवा कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और संगठन की गतिविधियों को गति देने की जिम्मेदारी रहती है। आने वाले समय में प्रदेश के बाकी जिलों में भी नियुक्तियां होने की संभावना है। इससे युवा मोर्चा का संगठनात्मक ढांचा और मजबूत होने के साथ आगामी राजनीतिक गतिविधियों में युवाओं की भूमिका बढ़ सकती है।

    इधर बीजेपी महिला मोर्चा ने भी प्रदेश में संगठनात्मक नियुक्तियों का ऐलान किया है। महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष अर्चना परांजपे राजगढ़े की ओर से जारी सूची में अलग अलग संभागों के लिए प्रभारियों की नियुक्ति की गई है। चंबल की जिम्मेदारी ज्योति तोमर को जबकि ग्वालियर की जिम्मेदारी क्रांति जोशी को दी गई है। सागर में शालिनी खरबानी रीवा में आशा गुप्ता शहडोल में डॉ. स्वप्ना वर्मा और जबलपुर में डॉ. सारिका उपाध्याय को जिम्मेदारी मिली है। इसके अलावा छिंदवाड़ा नर्मदापुरम भोपाल इंदौर निमाड़ उज्जैन और मंदसौर संभाग में भी महिला पदाधिकारियों को जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

    बीजेपी के दोनों मोर्चों में एक साथ संगठनात्मक गतिविधियां तेज होने से साफ है कि पार्टी जिला स्तर पर अपनी टीम को सक्रिय करने पर जोर दे रही है। युवा और महिला कार्यकर्ताओं को नई जिम्मेदारियां देकर संगठन बूथ और जमीनी स्तर पर अपनी मौजूदगी मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

  • राज्यसभा सांसद महेश केवट का दावा- मतदान होता तो कांग्रेस में टूट तय थी, हाईकोर्ट में भी नहीं टिकेगी चुनौती

    राज्यसभा सांसद महेश केवट का दावा- मतदान होता तो कांग्रेस में टूट तय थी, हाईकोर्ट में भी नहीं टिकेगी चुनौती


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश की तीसरी राज्यसभा सीट पर निर्विरोध निर्वाचित हुए भाजपा के नेता और नवनिर्वाचित सांसद Mahesh Kewat ने अपनी जीत को पार्टी नेतृत्व और संगठन के भरोसे की जीत बताया है। दैनिक भास्कर को दिए एक विशेष साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि भाजपा के पास पहले से ही पर्याप्त समर्थन मौजूद था और यदि मतदान की स्थिति बनती, तब भी पार्टी तीसरी सीट जीतने में सफल रहती।

    राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और तेलंगाना प्रभारी Meenakshi Natarajan का नामांकन खारिज होने के बाद महेश केवट निर्विरोध राज्यसभा सदस्य चुने गए। कांग्रेस ने इस फैसले को चुनौती देते हुए चुनाव आयोग और बाद में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन राहत नहीं मिली। अब कांग्रेस की ओर से हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दायर करने की तैयारी की जा रही है।

    इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए महेश केवट ने दावा किया कि कांग्रेस की ओर से प्रस्तुत दस्तावेजों और शपथ पत्र को लेकर जो विवाद सामने आया, उसमें जांच और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान भाजपा का पक्ष मजबूत साबित हुआ। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी कांग्रेस परिणाम स्वीकार करने को तैयार नहीं है, जबकि लोकतांत्रिक व्यवस्था में न्यायालयों के निर्णयों का सम्मान किया जाना चाहिए।

    महेश केवट ने कहा कि यदि चुनाव मतदान तक पहुंचता तो भाजपा को और अधिक समर्थन मिलता। उनका दावा था कि कई विधायक विकास और प्रदेश हित के मुद्दों को प्राथमिकता देते हैं तथा मुख्यमंत्री Mohan Yadav के नेतृत्व में चल रहे विकास कार्यों के कारण भाजपा को अतिरिक्त समर्थन हासिल होता। हालांकि यह उनका राजनीतिक दावा है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

    साक्षात्कार के दौरान उन्होंने अपने राजनीतिक सफर पर भी बात की। उन्होंने कहा कि वे लंबे समय से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा की विचारधारा से जुड़े रहे हैं तथा पार्टी द्वारा दिए गए विभिन्न दायित्वों का निर्वहन करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा संगठन कार्यकर्ताओं की क्षमता और योगदान को ध्यान में रखकर जिम्मेदारियां देता है। हाल ही में उन्हें मछुआ कल्याण बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया था और उसके बाद राज्यसभा के लिए उम्मीदवार घोषित किया गया।

    महेश केवट ने यह भी कहा कि निषाद और केवट समाज से राज्यसभा पहुंचने का अवसर मिलना उनके लिए गर्व की बात है। उन्होंने इसे भाजपा नेतृत्व द्वारा समाज के विभिन्न वर्गों को प्रतिनिधित्व देने की नीति का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि इससे समाज के लोगों में उत्साह का माहौल है और वे इसे सम्मान के रूप में देख रहे हैं।

    बुंदेलखंड क्षेत्र से आने वाले महेश केवट ने कहा कि राज्यसभा में पहुंचने के बाद उनकी प्राथमिकता क्षेत्रीय विकास, जल, रोजगार और आधारभूत सुविधाओं से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की रहेगी। उन्होंने प्रधानमंत्री Narendra Modi के विकसित भारत 2047 के विजन और राज्य सरकार के विकसित मध्य प्रदेश के लक्ष्य को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता भी जताई।

    दूसरी ओर, कांग्रेस लगातार यह आरोप लगाती रही है कि राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया में अनियमितताएं हुई हैं और वह कानूनी लड़ाई जारी रखेगी। अब इस मामले पर सभी की नजरें संभावित हाईकोर्ट याचिका और उसके परिणाम पर टिकी हैं।

  • ‘सप्लीमेंट्री की कभी गुंजाइश नहीं रही’: राज्यसभा सांसद रजनीश अग्रवाल बोले- संगठन ने जो जिम्मेदारी दी, उसे परिणाम देकर साबित किया

    ‘सप्लीमेंट्री की कभी गुंजाइश नहीं रही’: राज्यसभा सांसद रजनीश अग्रवाल बोले- संगठन ने जो जिम्मेदारी दी, उसे परिणाम देकर साबित किया


    मध्‍य प्रदेश । मध्य प्रदेश से राज्यसभा की तीनों सीटों पर भारतीय जनता पार्टी की निर्विरोध जीत के बाद राजधानी भोपाल में भाजपा प्रदेश कार्यालय में जश्न का माहौल देखने को मिला। इस अवसर पर मुख्यमंत्री Mohan Yadav, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष Hemant Khandelwal सहित पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने नवनिर्वाचित राज्यसभा सांसदों को शुभकामनाएं दीं। इस दौरान राज्यसभा सदस्य चुने गए Rajneesh Agrawal ने अपने राजनीतिक सफर, संगठन के भरोसे और भविष्य की प्राथमिकताओं पर विस्तार से बात की।

    राजनीतिक जीवन और राज्यसभा में अपनी भूमिका को लेकर रजनीश अग्रवाल ने कहा कि देश के सामने प्रधानमंत्री Narendra Modi ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत का जो लक्ष्य रखा है, वही उनका भी विजन है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत और विकसित मध्य प्रदेश के निर्माण में जो भी जिम्मेदारी उन्हें मिलेगी, उसे पूरी प्रतिबद्धता के साथ निभाने का प्रयास करेंगे।

    अपने छात्र जीवन से लेकर वर्तमान तक के सफर पर उन्होंने कहा कि जीवन में जो भी जिम्मेदारी मिली, उसे उन्होंने पूरी निष्ठा और आनंद के साथ निभाया। उनके अनुसार व्यक्ति को नियति द्वारा सौंपे गए कार्य को पूरी प्रतिबद्धता से करना चाहिए और परिणाम देने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अब तक के जीवन में उन्हें जो अवसर मिले, उनमें उन्होंने अपनी पूरी क्षमता से काम किया।

    राज्यसभा और लोकसभा के पिछले चुनावों में नाम चर्चा में आने के बावजूद अवसर नहीं मिलने के सवाल पर अग्रवाल ने कहा कि पार्टी नेतृत्व का निर्णय सर्वोपरि होता है। उनके मुताबिक नेतृत्व परिस्थितियों और संगठन की जरूरतों के आधार पर निर्णय लेता है और एक कार्यकर्ता के रूप में उनका दायित्व उन निर्णयों का सम्मान करना है।

    बुंदेलखंड क्षेत्र से जुड़े होने के कारण क्षेत्रीय अपेक्षाओं के सवाल पर उन्होंने कहा कि उनकी मातृभूमि, गांव और क्षेत्र के प्रति उनकी जिम्मेदारी हमेशा बनी रहेगी। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि केवल आश्वासन देने के बजाय परिणामों के आधार पर काम को परखा जाना चाहिए। जहां भी उनकी भूमिका होगी, वे अपनी जिम्मेदारी निभाने का पूरा प्रयास करेंगे।

    अपने जीवन की चुनौतियों और दिव्यांगता से जुड़े प्रश्न पर रजनीश अग्रवाल ने कहा कि संगठन और नेतृत्व ने उन पर हमेशा भरोसा जताया और कठिन से कठिन जिम्मेदारियां सौंपीं। उन्होंने कहा कि उन जिम्मेदारियों में असफलता की कोई गुंजाइश नहीं थी और उन्होंने हर बार परिणाम देकर उस भरोसे को साबित किया।

    उन्होंने कहा, “एक कार्यकर्ता से संगठन सौ प्रतिशत योगदान की अपेक्षा करता है। मेरा प्रयास हमेशा रहेगा कि मैं सौ प्रतिशत से भी अधिक देने की कोशिश करूं।” उनके अनुसार राज्यसभा सदस्य के रूप में मिली नई जिम्मेदारी भी संगठन के विश्वास का प्रतीक है और वे इस भरोसे पर खरा उतरने का प्रयास करेंगे।

    राज्यसभा में प्रवेश के साथ अब रजनीश अग्रवाल की भूमिका राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संगठनात्मक अनुभव और लंबे सार्वजनिक जीवन का लाभ उन्हें संसद में प्रभावी भूमिका निभाने में मदद करेगा।