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  • मोहन कैबिनेट के एजेंडे में 21 प्रस्ताव, गेहूं निपटान से लेकर सिंचाई परियोजनाओं और संविदा नियुक्तियों पर चर्चा

    मोहन कैबिनेट के एजेंडे में 21 प्रस्ताव, गेहूं निपटान से लेकर सिंचाई परियोजनाओं और संविदा नियुक्तियों पर चर्चा


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में होने वाली कैबिनेट बैठक में चमकविहीन गेहूं के पुराने मामले सहित कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा की जाएगी। बैठक के एजेंडे में कुल 21 विषय शामिल हैं। इनमें खाद्य विभाग से जुड़े गेहूं के निराकरण के प्रस्ताव के साथ सिंचाई परियोजनाओं की निरंतरता नए जिलों में शिक्षा अधिकारियों के कार्यालयों के गठन पेंशन और चिकित्सा देयकों से जुड़े मामले भी रखे गए हैं। इसके अलावा विभिन्न सरकारी योजनाओं को जारी रखने और सेवानिवृत्त अधिकारियों को संविदा नियुक्ति देने के प्रस्तावों पर भी विचार किया जाएगा।

    छह साल पुराने गेहूं के मामले पर नजर

    कैबिनेट बैठक के प्रमुख विषयों में वर्ष 2020-21 के दौरान खरीदे गए चमकविहीन गेहूं के निराकरण का मामला शामिल है। खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की ओर से 7 लाख मीट्रिक टन चमकविहीन गेहूं के टेंडर के जरिए निराकरण की प्रक्रिया पूरी करने और 5.80 लाख मीट्रिक टन गेहूं के निराकरण को कार्योत्तर मंजूरी देने का प्रस्ताव रखा गया है। इस प्रस्ताव पर सरकार विचार करेगी। कार्योत्तर मंजूरी का अर्थ किसी कार्य या प्रक्रिया के पूरा होने के बाद उसके लिए औपचारिक स्वीकृति लेने से है। हालांकि बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलेगी या नहीं इसका फैसला कैबिनेट के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगा।

    सिंचाई परियोजनाओं को जारी रखने पर चर्चा

    जल संसाधन विभाग की तीन प्रमुख सिंचाई परियोजनाओं से जुड़े प्रस्ताव भी बैठक में शामिल हैं। इनमें छिंदवाड़ा सिंचाई कॉम्प्लेक्स चेटरखेड़ा वृहद सिंचाई परियोजना और पचमनगर सिंचाई कॉम्प्लेक्स शामिल हैं। इन परियोजनाओं की निरंतरता को लेकर सरकार विचार करेगी। इसके साथ पांच वर्ष की अवधि वाली एक वृहद परियोजना को आगे जारी रखने का प्रस्ताव भी एजेंडे में रखा गया है। इन प्रस्तावों का संबंध सिंचाई व्यवस्था और परियोजनाओं के काम को निरंतर आगे बढ़ाने से है।

    वन विभाग की कैम्पा निधि के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 की वार्षिक कार्ययोजना पर भी चर्चा होगी। वहीं स्कूल शिक्षा विभाग ने नवगठित जिलों निवाड़ी मऊगंज पांढुर्णा और मैहर में जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय स्थापित करने के लिए नए पदों की स्वीकृति का प्रस्ताव रखा है। इससे इन जिलों में शिक्षा विभाग की प्रशासनिक व्यवस्था को व्यवस्थित करने की दिशा में कदम उठाया जा सकता है।

    पेंशन और चिकित्सा बिलों पर भी विचार

    कैबिनेट के एजेंडे में सेवानिवृत्त कर्मचारियों और अधिकारियों की पेंशन से जुड़े मामले भी शामिल हैं। किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग के प्रस्ताव में सेवानिवृत्त सहायक ग्रेड-2 मार्तंड सिंह परिहार की देय पेंशन वापस लेने का विषय रखा गया है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के तहत पूर्व सहायक यंत्रियों की पेंशन से जुड़े मामलों पर भी विचार होगा। इनमें बड़वानी जिले की जनपद पंचायत निवाली का मामला शामिल है।

    गृह विभाग के अंतर्गत पुलिस अधिकारी नीलकंठ बढ़ार की वेतनवृद्धि से जुड़े पुराने प्रकरण पर चर्चा की जाएगी। इसके अलावा छतरपुर में पदस्थ वैज्ञानिक अधिकारी रितेश चंद्र शुक्ल और दिवंगत आरक्षक 515 अभिषेक सिंह भदौरिया के निजी अस्पतालों में हुए उपचार के चिकित्सा देयकों की स्वीकृति के प्रस्ताव भी रखे गए हैं। जबलपुर के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के चिकित्सा देयकों के भुगतान का मामला भी बैठक में शामिल है।

    योजनाओं की निरंतरता और संविदा नियुक्तियां

    सामान्य प्रशासन विभाग के एजेंडे में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ यानी ईओडब्ल्यू के वेतन भत्ते प्रशासनिक भवन निर्माण और विभागीय परिसंपत्तियों के रखरखाव से जुड़ी योजना जारी रखने का प्रस्ताव है। विधि एवं विधायी कार्य विभाग की योजनाओं को 16वें केंद्रीय वित्त आयोग की अवधि यानी 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक जारी रखने पर भी विचार किया जाएगा। लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग तथा सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन विभाग की सात योजनाओं के स्वीकृत मदों को इसी अवधि तक जारी रखने का प्रस्ताव भी शामिल है।

    आनंद विभाग में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी ओमप्रकाश श्रीवास्तव को राज्य आनंद संस्थान के मुख्य कार्यपालन अधिकारी के पद पर संविदा नियुक्ति देने का प्रस्ताव रखा गया है। नर्मदा घाटी विकास विभाग में शिकायत निवारण प्राधिकरण के सदस्य न्यायिक पद पर नियुक्ति और संस्कृति विभाग में सेवानिवृत्त अनुभाग अधिकारी सुरेश कुमार पाठक को संविदा नियुक्ति देने के विषय पर भी चर्चा होगी। अब इन सभी प्रस्तावों पर कैबिनेट के फैसले का इंतजार रहेगा।

  • मध्य प्रदेश कैबिनेट के 24,500 करोड़ रुपये के प्रस्ताव मंजूर, सिंचाई परियोजनाओं से लेकर मेडिकल कॉलेजों तक बड़े फैसले

    मध्य प्रदेश कैबिनेट के 24,500 करोड़ रुपये के प्रस्ताव मंजूर, सिंचाई परियोजनाओं से लेकर मेडिकल कॉलेजों तक बड़े फैसले

    मध्य प्रदेश: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में 29 सितंबर को मंत्रालय में हुई मध्य प्रदेश कैबिनेट की बैठक में करीब 24,500 करोड़ रुपये के विकास प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक की शुरुआत राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के गायन के साथ हुई। इसमें स्कूली शिक्षा, सिंचाई, पर्यटन, स्वास्थ्य, न्यायिक सुविधाओं और मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा सहित विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रस्तावों पर विचार-विमर्श किया गया। स्वीकृत प्रस्तावों में पुनरीक्षित और संशोधित योजनाओं के साथ विभिन्न योजनाओं को निरंतर जारी रखने से संबंधित निर्णय भी शामिल हैं। कैबिनेट मंत्री चैतन्य काश्यप ने बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि विकास और जनकल्याण से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गई है।

    कैबिनेट ने प्रदेश में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के लिए चार बड़ी परियोजनाओं को मंजूरी दी। दतिया की मां रतनगढ़ सिंचाई परियोजना के लिए 1,608 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इसके माध्यम से 78,484 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना को वर्ष 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है। रामपुरा-मनासा सूक्ष्म उद्वहन सिंचाई परियोजना के लिए 524 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। इससे 65,400 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा विकसित की जाएगी। सागर सिंचाई परियोजना के लिए 1,052 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए हैं, जिसके माध्यम से 80,000 हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। उज्जैन की खान डायवर्सन योजना के तहत क्षिप्रा नदी को प्रदूषण मुक्त करने के उद्देश्य से 30 किलोमीटर लंबी टनल का निर्माण किया जा रहा है। इस परियोजना का 51 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। इसके अलावा दमोह-कटनी 105 किलोमीटर लंबे विंध्य विकास पथ के लिए 4,470 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं।

    स्वास्थ्य और न्यायिक सुविधाओं के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए भी कैबिनेट ने महत्वपूर्ण फैसले लिए। मेडिकल कॉलेजों से जुड़े प्रस्तावों में सिंगरौली मेडिकल कॉलेज में 150 एमबीबीएस सीटों के लिए 372 करोड़ रुपये के पुनरीक्षित प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। छिंदवाड़ा मेडिकल कॉलेज की लागत 768 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 953 करोड़ रुपये करने के प्रस्ताव को भी स्वीकृति प्रदान की गई। इसके साथ ही कोर्ट भवनों के निर्माण के लिए 651 करोड़ रुपये और स्वास्थ्य केंद्रों के लिए 3,113 करोड़ रुपये मंजूर किए गए। इन निर्णयों के माध्यम से प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं और न्यायिक सुविधाओं से जुड़े बुनियादी ढांचे के विस्तार का रास्ता तैयार किया गया है। सिंचाई परियोजनाओं से किसानों को लाभ पहुंचाने और कृषि क्षेत्र में पानी की उपलब्धता बढ़ाने का लक्ष्य भी रखा गया है।

    शिक्षा और सामाजिक कल्याण से जुड़े प्रस्तावों में शासकीय स्कूलों के कक्षा 1 से 8 तक के 58 लाख विद्यार्थियों को गणवेश के लिए प्रति विद्यार्थी 600 रुपये देने का फैसला किया गया। यह राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण यानी डीबीटी के माध्यम से विद्यार्थियों को उपलब्ध कराई जाएगी। इस योजना के तहत राज्य सरकार कुल 348 करोड़ रुपये प्रदान करेगी। स्कूल शिक्षा विभाग ने विशेष अभियान चलाकर वर्षों से लंबित 900 से अधिक पदों पर अनुकंपा नियुक्तियां भी की हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने लंबित अनुकंपा नियुक्तियों के संबंध में अन्य विभागों को भी आवश्यक निर्देश दिए हैं। इसके अलावा विमुक्त, घुमंतू एवं अर्ध घुमंतू वर्गों के छात्रावासों, कल्याण आश्रमों और संबंधित संस्थानों को अब एक रुपये प्रति किलो की दर से अनाज उपलब्ध कराया जाएगा। पहले इन संस्थानों को 12 किलो अनाज पांच रुपये प्रति किलो की दर से दिया जाता था, जबकि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य वर्गों के छात्रावासों को एक रुपये प्रति किलो की दर से अनाज मिलता था।

    बैठक में पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत के विकास पर भी चर्चा हुई। मंत्री चैतन्य काश्यप ने बताया कि यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट में भारत के 78 स्थलों में मध्य प्रदेश के 19 स्थल शामिल हैं। इनमें बाग गुफाओं की चित्रकारी, गिन्नौरगढ़ किला, चंबल घाटी के मंदिर समूह और उदयगिरि की गुफाएं शामिल हैं। प्रदेश में पर्यटन सुविधाओं और टाइगर रिजर्व तथा वन्यजीव अभयारण्यों के विकास पर लगातार काम किया जा रहा है। पर्यटन को रोजगार और स्थानीय विकास के अवसरों से जोड़ने पर भी जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने हिंदी फिल्मों के अभिनेता मुश्ताक खान को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने लगभग 500 फिल्मों में अभिनय किया था। उनका जन्म, बचपन और शिक्षा-दीक्षा बालाघाट में हुई थी। बैठक में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा का भी उल्लेख किया गया, जिसका शुभारंभ 25 सितंबर को भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने किया था। इसी अवसर पर भोपाल का लंबित मास्टर प्लान जारी किया गया और जनता से सुझाव मांगे गए।

  • भोपाल मेट्रो पर बढ़ा खर्च, कैबिनेट ने दी 10,033 करोड़ की संशोधित मंजूरी; मंडी शुल्क में भी बड़ा बदलाव

    भोपाल मेट्रो पर बढ़ा खर्च, कैबिनेट ने दी 10,033 करोड़ की संशोधित मंजूरी; मंडी शुल्क में भी बड़ा बदलाव

    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश सरकार ने राज्य की महत्वाकांक्षी भोपाल मेट्रो रेल परियोजना को लेकर बड़ा फैसला किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में परियोजना की संशोधित लागत को मंजूरी प्रदान कर दी गई। लागत में करीब 4 हजार करोड़ रुपए की वृद्धि के बाद अब भोपाल मेट्रो परियोजना की कुल लागत 10,033 करोड़ रुपए पहुंच गई है। इसके साथ ही सरकार ने कृषि क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले लेते हुए मंडी शुल्क व्यवस्था में भी बदलाव किया है।

    कैबिनेट बैठक के बाद एमएसएमई मंत्री चैतन्य काश्यप ने बताया कि भोपाल मेट्रो परियोजना का प्रारंभिक स्वरूप वर्ष 2016 में तैयार किया गया था। उस समय इसकी अनुमानित लागत लगभग 6,241 करोड़ रुपए आंकी गई थी। हालांकि समय के साथ निर्माण सामग्री की कीमतों, तकनीकी आवश्यकताओं और अन्य कारणों से परियोजना की लागत में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। अब संशोधित लागत 10,033 करोड़ रुपए निर्धारित की गई है, जिसे कैबिनेट ने स्वीकृति प्रदान कर दी है।

    सरकार का मानना है कि संशोधित बजट से परियोजना के निर्माण कार्य में तेजी आएगी और आगामी दो वर्षों में मेट्रो परियोजना का स्वरूप अधिक स्पष्ट रूप से सामने दिखाई देगा। भोपाल मेट्रो को राजधानी के सार्वजनिक परिवहन ढांचे को मजबूत करने वाली प्रमुख परियोजना माना जा रहा है, जिससे यातायात व्यवस्था को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

    बैठक में किसानों से जुड़ा एक अहम निर्णय भी लिया गया। सरकार ने कपास उत्पादक किसानों को राहत देते हुए कपास पर लगने वाले मंडी शुल्क को घटाकर 0.50 प्रतिशत कर दिया है। मंत्री काश्यप ने बताया कि पहले अधिक मंडी शुल्क के कारण किसानों और व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ता था। महाराष्ट्र में भी कपास पर इसी दर से शुल्क लिया जाता है, इसलिए प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है।

    इसके विपरीत सरकार ने अन्य कृषि उपज पर मंडी शुल्क बढ़ाने का फैसला किया है। कुछ वर्ष पहले इसे डेढ़ प्रतिशत से घटाकर एक प्रतिशत किया गया था, लेकिन अब फिर से इसे बढ़ाकर 1.5 प्रतिशत कर दिया गया है। सरकार का अनुमान है कि इस निर्णय से राज्य को लगभग 800 करोड़ रुपए का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा। यह राशि सड़क विकास, ग्रामीण बुनियादी ढांचे के विस्तार और गौ-संवर्धन जैसी योजनाओं पर खर्च की जाएगी।

    कृषि क्षेत्र को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में भी पहल की गई है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में कार्यशालाओं का आयोजन कर किसानों को प्राकृतिक खेती की तकनीकों और उसके लाभों के बारे में जागरूक किया जाएगा। सरकार को उम्मीद है कि इससे कृषि लागत में कमी आएगी और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।

    कैबिनेट बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन और शासन के 12 वर्ष पूर्ण होने पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसे देश के विकास का महत्वपूर्ण पड़ाव बताते हुए 5 जून से 21 जून तक प्रदेशभर में जनकल्याण और विकास कार्यों से जुड़े विशेष कार्यक्रम आयोजित करने की जानकारी दी।

    इसके अलावा राज्य के लगभग एक लाख संविदा कर्मचारी-अधिकारियों को 4.5 प्रतिशत वार्षिक वेतन वृद्धि दिए जाने के फैसले का भी स्वागत किया गया। कुल मिलाकर कैबिनेट बैठक में लिए गए निर्णयों को राज्य के बुनियादी ढांचे, कृषि क्षेत्र और कर्मचारी हितों से जुड़ा महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

  • एमपी कैबिनेट का बड़ा फैसला: व्यापारी कल्याण बोर्ड बनेगा, 38 हजार करोड़ के विकास कार्यों को मंजूरी

    एमपी कैबिनेट का बड़ा फैसला: व्यापारी कल्याण बोर्ड बनेगा, 38 हजार करोड़ के विकास कार्यों को मंजूरी


    नई दिल्ली। मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में मध्य प्रदेश के व्यापार, उद्योग और बुनियादी विकास को लेकर कई बड़े फैसले लिए गए। सबसे अहम फैसला राज्य में व्यापारी कल्याण बोर्ड के गठन का रहा, जो राष्ट्रीय स्तर की तर्ज पर काम करेगा और जिसके अध्यक्ष स्वयं मुख्यमंत्री होंगे।

    कैबिनेट के फैसले के मुताबिक इस बोर्ड में 8 प्रमुख विभागों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ गैर-सरकारी सदस्य भी शामिल किए जाएंगे। इतना ही नहीं, जिला स्तर पर भी इसी तरह की समितियां बनाई जाएंगी, जिनमें व्यापारियों के साथ सामाजिक और राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधियों को जगह दी जाएगी। सरकार का उद्देश्य व्यापारियों की समस्याओं का समाधान और राज्य में व्यापारिक माहौल को मजबूत करना है।

    बैठक के बाद मंत्री चेतन कश्यप ने जानकारी दी कि राज्य में दलहन उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 2442 करोड़ रुपए के “आत्मनिर्भरता मिशन” को मंजूरी दी गई है। इसके अलावा विभिन्न विभागों के विकास कार्यों के लिए 38,555 करोड़ रुपए के बड़े बजट को भी स्वीकृति मिली है। सरकार भोपाल के पास एक बड़ा इलेक्ट्रॉनिक क्लस्टर विकसित करने की दिशा में भी तेजी से काम कर रही है, जिससे निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

    कैबिनेट ने 16वें वित्त आयोग (2026-2031) के तहत सड़क निर्माण, ग्रामीण मार्गों के उन्नयन और शासकीय भवनों के रखरखाव के लिए 32,405 करोड़ रुपए के प्रावधान को मंजूरी दी। इसके साथ ही सड़क सुरक्षा से जुड़े प्रोजेक्ट्स और स्टेट वाइड एरिया नेटवर्क जैसी आईटी योजनाओं को भी जारी रखने का निर्णय लिया गया है।

    महिला एवं बाल विकास क्षेत्र में भी बड़ा फैसला लेते हुए ‘मिशन वात्सल्य’ के बेहतर संचालन और नए आंगनवाड़ी केंद्रों के निर्माण के लिए 2,412 करोड़ रुपए मंजूर किए गए हैं। वहीं आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए 1,295 करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि स्वीकृत की गई है।

    कैबिनेट बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने हाल ही में पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी में मिली चुनावी सफलता पर जनता का आभार भी जताया। साथ ही बताया कि अब तक राज्य में 41 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हो चुकी है, जिसका 6,520 करोड़ रुपए का भुगतान किसानों को किया जा चुका है। इस प्रक्रिया में 14.7 लाख किसानों ने रजिस्ट्रेशन कराया है।

    इसके अलावा इंदौर में 9 से 13 जून तक होने वाले अंतरराष्ट्रीय ब्रिक्स सम्मेलन की भी जानकारी दी गई, जिसमें 26 देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। सरकार को उम्मीद है कि इससे प्रदेश में कृषि और व्यापार के नए अवसर खुलेंगे।

  • मध्यप्रदेश कैबिनेट में 286.26 करोड़ की मीडवासा सिंचाई परियोजना को मिली मंजूरी..

    मध्यप्रदेश कैबिनेट में 286.26 करोड़ की मीडवासा सिंचाई परियोजना को मिली मंजूरी..

    भोपाल। मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में प्रदेश के विकास और सामाजिक कल्याण से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी प्रदान की गई। बैठक में लिए गए निर्णयों की जानकारी राज्य के स्वास्थ्य राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने मीडिया को दी। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों में बड़े स्तर पर विकास कार्यों को गति देने के उद्देश्य से कई योजनाओं और परियोजनाओं को स्वीकृति दी है, जिससे प्रदेश के ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलेगी।

    कैबिनेट बैठक में सागर जिले की मीडवासा मध्यम सिंचाई परियोजना के लिए 286.26 करोड़ रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। इस परियोजना से क्षेत्र में सिंचाई क्षमता बढ़ेगी और किसानों को कृषि उत्पादन में सीधा लाभ मिलेगा। सरकार का मानना है कि इस तरह की परियोजनाओं से कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और जल संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।

    इसके साथ ही प्रदेश में कृषि क्षेत्र को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के उद्देश्य से सब मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन के लिए 2250 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। इस योजना के तहत किसानों को आधुनिक कृषि उपकरणों और तकनीकों से जोड़ने पर जोर दिया जाएगा, जिससे उत्पादन क्षमता और दक्षता में वृद्धि हो सके।

    महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण को ध्यान में रखते हुए कैबिनेट ने महिला एवं बाल विकास से जुड़ी योजनाओं के लिए भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना, वन स्टॉप सेंटर योजना और महिला हेल्पलाइन 181 के संचालन के लिए 240.42 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। इसके तहत प्रदेश में आठ नए वन स्टॉप सेंटर स्थापित किए जाएंगे, जिससे महिलाओं को आपातकालीन सहायता और सुरक्षा सेवाएं और अधिक सुलभ हो सकेंगी।

    इसके अलावा भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास विभाग के अंतर्गत स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 1005 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है, जिससे प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को और मजबूत किया जाएगा। साथ ही प्रदेश में नए चिकित्सा महाविद्यालयों की स्थापना के लिए 1674 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है, जिससे चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार होगा।

    पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की विभिन्न योजनाओं के लिए 3553.35 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत संरचना और विकास कार्यों को गति मिलेगी। वहीं लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत विभिन्न विकास कार्यों के लिए 10801 करोड़ रुपये की बड़ी राशि को मंजूरी प्रदान की गई है, जिससे सड़क और अन्य बुनियादी ढांचे का विस्तार किया जाएगा।

    कैबिनेट बैठक में यह भी उल्लेख किया गया कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में नारी शक्ति वंदन अधिनियम को शीघ्र लागू करने के लिए विशेष सत्र आयोजित किए जाने के निर्णय का स्वागत किया गया है। राज्य सरकार ने इस पहल के लिए आभार व्यक्त किया है।

    कैबिनेट के इन निर्णयों को प्रदेश के समग्र विकास, महिला सशक्तिकरण, कृषि आधुनिकीकरण और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे आने वाले समय में व्यापक स्तर पर सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेगा।

  • मोहन कैबिनेट का बड़ा फैसला: 46 लाख प्रॉपर्टियों की फ्री रजिस्ट्री, युवाओं के लिए नई योजना, किसानों को सौगात, पेट्रोलियम निगरानी के निर्देश

    मोहन कैबिनेट का बड़ा फैसला: 46 लाख प्रॉपर्टियों की फ्री रजिस्ट्री, युवाओं के लिए नई योजना, किसानों को सौगात, पेट्रोलियम निगरानी के निर्देश


    भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मध्यप्रदेश कैबिनेट की अहम बैठक संपन्न हुई। बैठक में कई बड़े फैसले लिए गए जिनका असर सीधे प्रदेश के नागरिकों और युवाओं पर पड़ने वाला है। सबसे बड़ा फैसला स्वामित्व योजना के तहत 46 लाख प्रॉपर्टियों की फ्री रजिस्ट्री का है। इस योजना में उन परिवारों को शामिल किया गया है जिनके पास अपने स्वामित्व के दस्तावेज नहीं हैं। राज्य सरकार ने यह भी तय किया कि इन रजिस्ट्री का स्टांप शुल्क माफ रहेगा जिससे आम नागरिकों को काफी राहत मिलेगी।

    कैबिनेट बैठक में युवाओं के लिए नई पहल मुख्यमंत्री यंग इंटर्न्स फॉर गुड गवर्नेंस प्रोग्राम की शुरुआत की घोषणा भी हुई। इसके तहत 4 865 युवाओं को मासिक 10 हजार रुपये मानदेय दिया जाएगा। यह योजना अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन संस्थान के माध्यम से संचालित होगी। हर ब्लॉक में 15 युवा इस योजना से जुड़े रहेंगे। ये युवा सरकार की योजनाओं का जमीन स्तर पर इम्पैक्ट और उनकी चुनौतियों की जानकारी जुटाएंगे। यह तीन वर्षों तक संचालित होगी और डिजिटल माध्यम से आंकड़े एकत्र करने का कार्य भी करेगी।

    किसानों के हित में भी कैबिनेट ने कई अहम फैसले लिए। गेंहू उपार्जन का समर्थन मूल्य 2 625 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है जिसमें केंद्र सरकार का 2 585 रुपये और प्रदेश सरकार का 40 रुपये प्रति क्विंटल शामिल है। इसके अलावा उड़द पर 600 रुपये प्रति क्विंटल का समर्थन मूल्य भी तय किया गया।

    मंत्रि परिषद ने सात विभागों की योजनाओं को अगले पांच वर्षों तक सतत जारी रखने की स्वीकृति दी है। यह योजना कुल 33 240 करोड़ रुपये की है। इनमें ऊर्जा विभाग की RDSS योजना वित्त विभाग के पब्लिक फंडिंग प्रोजेक्ट्स पंचायत और ग्रामीण विकास के परिसंपत्ति मरम्मत प्रोजेक्ट समेत अन्य योजनाएं शामिल हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र में भी बड़ा कदम उठाया गया है। मैहर कैमूर और निमरानी के अस्पतालों में 51 नए स्टाफ पदों को मंजूरी दी गई जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और उपलब्धता बढ़ेगी।

    कैबिनेट ने प्रदेश में कमर्शियल सिलेंडर की डिलीवरी पर रोक को जारी रखने का भी निर्णय लिया। केंद्र सरकार के युद्ध के हालातों के मद्देनजर यह कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री ने पेट्रोलियम पदार्थों की सतत निगरानी के निर्देश दिए ताकि आपूर्ति और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा सके। कैबिनेट मंत्री चेतन्य कश्यप ने कहा कि मध्यप्रदेश में पेट्रोलियम की पर्याप्त उपलब्धता है और युद्ध से राज्य पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

    इस तरह कैबिनेट की बैठक ने नागरिकों युवाओं और किसानों के लिए कई राहतकारी फैसले लिए हैं। मुफ्त रजिस्ट्री युवा इंटर्न योजना और समर्थन मूल्य बढ़ाने जैसे कदमों से शासन की पारदर्शिता और जनता के हित में काम करने की प्रतिबद्धता स्पष्ट होती है।

  • मप्र कैबिनेट ने 10500 करोड़ की पांच किसान हितैषी योजनाएं 5 साल तक निरंतर रखने को दी मंजूरी

    मप्र कैबिनेट ने 10500 करोड़ की पांच किसान हितैषी योजनाएं 5 साल तक निरंतर रखने को दी मंजूरी


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को विधानसभा स्थित अपने कक्ष में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में 10500 करोड़ रुपये की लागत के पांच किसान हितैषी योजनाओं को अगले पांच साल तक निरंतर रखने की मंजूरी दी गई।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह जानकारी विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सदन में दी। उन्होंने सदन को अवगत कराया कि आज ही मध्य प्रदेश सरकार की मंत्रि-परिषद् की बैठक सम्पन्न हुई। किसान कल्याण वर्ष का किसानों को अधिकतम लाभ दिलाने के लिए मंत्रि-परिषद् ने आज ही किसानों एवं कृषि से सम्बद्ध क्षेत्रों के विकास के लिए करीब 10500 करोड़ रुपये की लागत के पांच किसान हितैषी योजनाएं 31 मार्च 2031 तक जारी रहेंगी और इसका सर्वाधिक लाभ मध्य प्रदेश के किसानों को मिलेगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सदन में कहा कि किसान हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। आज की पूरी कैबिनेट हमने प्रदेश के किसानों को ही समर्पित की है। उन्होंने कहा कि देश में ऐसा पहली बार हो रहा है कि मध्य प्रदेश सरकार ने दलहन फसल उड़द एवं तिलहन फसल सरसों के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि उड़द को हम तय समर्थन मूल्य पर खरीदेंगे और किसानों को तय समर्थन मूल्य के अतिरिक्त खरीदी गई उड़द पर 600 रुपये प्रति क्विंटल बोनस राशि भी देंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश में सरसों का उत्पादन इस वर्ष 28 प्रतिशत तक बढ़ गया है। इस वर्ष 3.38 मीट्रिक टन सरसों का उत्पादन होने की संभावना है। हम सरसों की फसल को भावांतर योजना के दायरे में लेकर आ रहे हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सदन को मंत्रि-परिषद् की बैठक में आज लिए गए सभी निर्णयों की सिलसिलेवार जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने बताया कि जिन पांच किसान हितैषी योजनाओं को 31 मार्च 2031 तक निरंतर रखने का निर्णय मंत्रि-परिषद् ने लिया है, उनमें निम्न योजनाएं शामिल हैं-


    प्रधानमंत्री राष्ट्रीय किसान कृषि विकास योजना

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि 2008.683 करोड़ रुपये की इस योजना की मंजूरी से कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र की विकास के लिए आवश्यक संसाधनों की पूर्ति राज्य सरकार के माध्यम से की जा सकेगी।

    प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पर ड्रॉप मोर क्रॉप)

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि 2393.97 करोड़ रुपये की इस योजना की मंजूरी से किसानों को अपने खेतों में स्प्रिंकलर/ड्रिप इरीगेशन सिस्टम लगाने के लिए शासकीय अनुदान 31 मार्च 2031 तक निरंतर मिलता रहेगा। इस योजना से किसान के खेतों में माइक्रो इरीगेशन सुविधाओं में अगले 5 सालों तक लगातार विस्तार होता रहेगा।

    राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन योजना

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि 3285.49 करोड़ रुपये की इस योजना को मंजूरी मिलने से ऐसे किसान, जो धान, गेहूं, दलहन, मोटा अनाज, नगदी फसलों का पैदावार करते हैं, उन्हें क्षेत्र विस्तार, अपना उत्पादन बढ़ाने एवं मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाने के लिए आवश्यक सहयोग राज्य सरकार के जरिए निरंतर मिलता रहेगा।

    नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि 1011.59 करोड़ रुपये की इस योजना की स्वीकृति से प्रदेश में प्राकृतिक खेती के क्षेत्रफल में विस्तार 31 मार्च 2031 तक निरंतर होता रहेगा। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती का विकास जरूरी है। यह न केवल मध्य प्रदेश की नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होगी, वरन् मिट्टी की उर्वरता में सुधार, उत्पादन बढ़ाने, पर्यावरण सुरक्षा एवं रसायन मुक्त खाद्य उपलब्ध कराने में भी सहायक होगी।

    राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन – ऑयल सीड योजना

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि 1793.87 करोड़ रुपये की इस योजना को मंजूरी मिलने से प्रदेश के ऐसे सभी किसानों को, जो तिलहन फसलों का उत्पादन करते हैं, उन्हें निरंतर लाभ प्राप्त होगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि करीब 10500 करोड़ रुपए की बड़ी लागत वाली इन पांच किसान मित्र योजनाओं को अगले 5 सालों तक निरंतर रखने से किसानों के माध्यम से प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में आमूल-चूल सुधार होगा। साथ ही रसायन युक्त उत्पादन से निजात पाने में भी ये 5 योजनाएं बेहद सहायक सिद्ध होंगी।