Tag: Madhya Pradesh education

  • इंजीनियरिंग एडमिशन में बड़ा बदलाव: अब साल में दो बार मिलेगा मौका, जुलाई और जनवरी से शुरू होंगे सत्र

    इंजीनियरिंग एडमिशन में बड़ा बदलाव: अब साल में दो बार मिलेगा मौका, जुलाई और जनवरी से शुरू होंगे सत्र


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से तकनीकी शिक्षा को लेकर एक बड़ा बदलाव सामने आ रहा है। प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों में अब साल में दो बार एडमिशन की व्यवस्था लागू की जाएगी। इस नई व्यवस्था को लागू करने के लिए राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) गाइडलाइन तैयार कर रहा है, जबकि तकनीकी शिक्षा विभाग ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

    नई व्यवस्था के तहत एक शैक्षणिक सत्र जुलाई में शुरू होगा, जबकि दूसरा सत्र जनवरी से प्रारंभ किया जाएगा। जुलाई सत्र में सभी सीटों पर एडमिशन के लिए सेंट्रलाइज्ड काउंसलिंग कराई जाएगी। इसके बाद जो सीटें खाली रह जाएंगी, उन्हें जनवरी सत्र में भरा जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे सीटें खाली रहने की समस्या खत्म होगी और एडमिशन प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी हो सकेगी।

    फिलहाल स्थिति यह है कि एडमिशन प्रक्रिया सितंबर-अक्टूबर तक खिंच जाती है और कई बार सीटों को लेकर विवाद कोर्ट तक पहुंच जाते हैं। नई व्यवस्था से इस देरी पर रोक लगेगी और एकेडमिक कैलेंडर भी तय समय पर लागू किया जा सकेगा।

    हालांकि, इस बदलाव को लेकर शिक्षा विशेषज्ञों ने कुछ चिंताएं भी जताई हैं। प्रस्ताव के मुताबिक, जनवरी सत्र में प्रवेश लेने वाले छात्रों को सीधे दूसरे सेमेस्टर से पढ़ाई शुरू कराई जा सकती है। बाद में वे पहले सेमेस्टर की पढ़ाई करेंगे। इसी तरह आगे भी सेमेस्टर का क्रम उलट-पुलट तरीके से चल सकता है जैसे चौथा सेमेस्टर पहले और तीसरा बाद में।

    विशेषज्ञों का कहना है कि इंजीनियरिंग की पढ़ाई में विषय आपस में जुड़े होते हैं। ऐसे में बेसिक विषयों से पहले एडवांस विषय पढ़ना छात्रों की समझ को प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा प्लेसमेंट पर भी असर पड़ने की आशंका है। जनवरी सत्र में एडमिशन लेने वाले छात्र फरवरी-मार्च के आसपास पासआउट होंगे, जबकि अधिकांश कंपनियां दिसंबर तक पास होने वाले छात्रों को ही भर्ती करती हैं। ऐसे में उनके लिए अलग प्लेसमेंट ड्राइव आयोजित करनी पड़ सकती है।

    लेटरल एंट्री के छात्रों पर भी इसका असर पड़ सकता है। अभी डिप्लोमा के बाद दूसरे वर्ष में प्रवेश के लिए जो सीटें बचती हैं, वे अगले सत्र में भरी जाती हैं। लेकिन साल में दो बार एडमिशन होने से इन सीटों की उपलब्धता कम हो सकती है।

    सरकार का तर्क है कि इस व्यवस्था से विश्वविद्यालय पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा और दो अलग-अलग ग्रुप बनाकर पढ़ाई सुचारु रूप से चलाई जा सकेगी। कंपनियां भी अपने प्लेसमेंट शेड्यूल में बदलाव कर सकती हैं।

    कुल मिलाकर, यह नई व्यवस्था जहां एक ओर एडमिशन प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और लचीला बनाएगी, वहीं छात्रों और संस्थानों के सामने नई चुनौतियां भी खड़ी कर सकती है। आने वाले समय में इसका वास्तविक असर साफ तौर पर देखने को मिलेगा।

  • भोपाल में पालक महासंघ का हल्ला बोल: निजी स्कूलों की मनमानी फीस के खिलाफ DEO कार्यालय का घेराव

    भोपाल में पालक महासंघ का हल्ला बोल: निजी स्कूलों की मनमानी फीस के खिलाफ DEO कार्यालय का घेराव

    भोपाल ।राजधानी भोपाल में निजी स्कूलों द्वारा मनमाने ढंग से फीस और अन्य शुल्क वसूले जाने के खिलाफ अभिभावकों का गुस्सा सड़कों पर नजर आया। पालक महासंघ के नेतृत्व में बड़ी संख्या में अभिभावकों ने जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करते हुए घेराव किया और निजी स्कूल संचालकों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि निजी स्कूल फीस, बस शुल्क, किताबों और अन्य मदों में लगातार मनमानी वसूली कर रहे हैं, जिससे अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है।

    प्रदर्शन के दौरान पालक महासंघ के पदाधिकारियों ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में शिक्षा माफिया सक्रिय है और निजी स्कूल संचालकों के दबाव में प्रशासन कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहा। उनका आरोप है कि अभिभावक लंबे समय से शिकायतें कर रहे हैं, लेकिन जिला शिक्षा अधिकारी की ओर से स्कूलों के खिलाफ कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया।

    प्रदर्शन के दौरान अभिभावकों ने DEO कार्यालय का घेराव करते हुए जोरदार नारेबाजी की और शिक्षा विभाग के खिलाफ नाराजगी जताई। पालक महासंघ के प्रतिनिधियों ने बताया कि वे अपनी मांगों को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन सौंपने पहुंचे थे, लेकिन अधिकारी ने ज्ञापन लेने से इनकार कर दिया और कार्यालय छोड़कर चले गए। इस घटना से प्रदर्शनकारियों में और अधिक आक्रोश फैल गया और उन्होंने इसे अभिभावकों की समस्याओं के प्रति प्रशासन की उदासीनता बताया।

    अभिभावकों का कहना है कि निजी स्कूल हर साल फीस में मनमानी बढ़ोतरी कर देते हैं, जबकि बस शुल्क और किताबों के नाम पर भी भारी रकम वसूली जाती है। इससे खासकर गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। कई अभिभावकों ने कहा कि बच्चों की पढ़ाई जारी रखना भी उनके लिए मुश्किल होता जा रहा है।

    पालक महासंघ ने सरकार और शिक्षा विभाग से मांग की है कि निजी स्कूलों की फीस वृद्धि पर तुरंत रोक लगाई जाए और फीस, बस चार्ज तथा किताबों की कीमतों के लिए एक पारदर्शी और तय ढांचा बनाया जाए। इसके अलावा उन्होंने शिक्षा माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और दोषी स्कूलों पर भारी जुर्माना लगाने की मांग भी उठाई है।

    प्रदर्शनकारियों ने यह भी मांग की कि जिला शिक्षा अधिकारी और संबंधित अधिकारियों पर किसी तरह का दबाव डालने वाले लोगों की जांच की जाए और यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाए। पालक महासंघ ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज किया जाएगा।

  • मध्य प्रदेश में बोर्ड पैटर्न लागू, नकल और लीक से निपटने की तैयारी

    मध्य प्रदेश में बोर्ड पैटर्न लागू, नकल और लीक से निपटने की तैयारी


    भोपाल। मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में इस साल 9वीं और 11वीं की परीक्षाएं पूरी तरह से बोर्ड पैटर्न पर आयोजित की जा रही हैं। सबसे बड़ा बदलाव परीक्षा के प्रश्नपत्रों की सुरक्षा में किया गया है। अब प्रश्नपत्र स्कूलों में नहीं, बल्कि सीधे पुलिस थानों में सुरक्षित रखे जाएंगे। परीक्षा के दिन ही केंद्राध्यक्ष की निगरानी में इन बंडलों को थाने से परीक्षा केंद्र तक लाया जाएगा और परीक्षा शुरू होने से ठीक 60 मिनट पहले खोला जाएगा।

    इस कदम से नकल और प्रश्नपत्र लीक जैसी समस्याओं को रोकने की तैयारी की जा रही है। मध्य प्रदेश राज्य मुक्त स्कूल शिक्षा परिषद द्वारा तैयार किए गए प्रश्नपत्र अब जिला शिक्षा अधिकारी और केंद्राध्यक्षों के माध्यम से परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाए जाएंगे। इससे यह सुनिश्चित होगा कि परीक्षा निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से आयोजित हो।

    कक्षा 11वीं की परीक्षाएं 23 फरवरी से 17 मार्च 2026 तक आयोजित होंगी जबकि कक्षा 9वीं की परीक्षाएं 2 मार्च से 17 मार्च 2026 तक होंगी। दोनों कक्षाओं की परीक्षाएं एक ही पाली में होंगी और दोपहर 1:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक चलेंगी।

    सभी उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन 23 मार्च 2026 तक पूरा कर लिया जाएगा। मूल्यांकन प्रक्रिया माध्यमिक शिक्षा मंडल की अंक योजना के अनुसार होगी, जिससे सभी छात्रों को निष्पक्ष अंक मिलें और मूल्यांकन में पारदर्शिता बनी रहे।

    विशेषज्ञों के अनुसार, प्रश्नपत्रों की थाने में सुरक्षा व्यवस्था से नकल की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आएगी। इससे स्कूल स्तर पर लीक की संभावना लगभग समाप्त हो जाएगी। साथ ही, परीक्षा अधिकारियों और पुलिस की निगरानी यह सुनिश्चित करेगी कि कोई भी अनुचित गतिविधि न हो।

    अभिभावक और शिक्षक इस बदलाव से संतुष्ट हैं और उनका मानना है कि इससे परीक्षा का स्तर और विश्वसनीयता दोनों बढ़ेंगे। छात्रों को भी समय से पहले प्रश्नपत्र खोलने की प्रक्रिया से अतिरिक्त तनाव कम होगा और वे बेहतर तैयारी के साथ परीक्षा में शामिल हो पाएंगे।

    मध्य प्रदेश शिक्षा विभाग का कहना है कि यह कदम राज्य में परीक्षा प्रणाली को और मजबूत बनाने के लिए उठाया गया है। भविष्य में इसे अन्य कक्षाओं और बोर्ड परीक्षाओं में भी लागू किए जाने की संभावना है।

    इस प्रकार इस साल 9वीं और 11वीं की परीक्षाएं केवल पाठ्यक्रम की समझ ही नहीं, बल्कि अनुशासन और ईमानदारी की परीक्षा भी होंगी। छात्रों और शिक्षकों के लिए यह नई प्रणाली चुनौतीपूर्ण, लेकिन पारदर्शिता और सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

  • जनजातीय छात्रावासों में सुरक्षा सख्ती: अधीक्षक अब बच्चों के साथ रात बिताएंगे, नियम उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई

    जनजातीय छात्रावासों में सुरक्षा सख्ती: अधीक्षक अब बच्चों के साथ रात बिताएंगे, नियम उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई


    भोपाल। प्रदेश के जनजातीय छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों, खासकर छात्राओं की सुरक्षा और अनुशासन को लेकर राज्य सरकार ने बड़े कदम उठाए हैं। अब छात्रावासों में अधीक्षक का रातभर परिसर में रहना अनिवार्य होगा। नियमों का पालन न करने वाले अधीक्षकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और उन्हें पद से हटाया जा सकता है।सरकार ने यह निर्णय छात्रावासों में लगातार मिल रही शिकायतों और सुरक्षा से जुड़े मामलों को ध्यान में रखते हुए लिया है। वर्तमान में कई अधीक्षक मूल रूप से शिक्षक हैं, जो न तो नियमित रूप से पढ़ा रहे हैं और न ही छात्रावासों में पर्याप्त समय दे रहे हैं। बच्चों के हित में उचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए नई अधीक्षक कैडर प्रणाली लागू करने की तैयारी की जा रही है। योजना के तहत अगले कुछ वर्षों में चरणबद्ध तरीके से पूर्णकालिक अधीक्षकों की नियुक्ति की जाएगी, जबकि मौजूदा शिक्षक अधीक्षक अपने मूल शिक्षण कार्य में लौटेंगे।
    छात्राओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सरकार ने तय किया है कि प्रत्येक छात्रावास में अधीक्षक के लिए आवासीय व्यवस्था होगी। अधीक्षक को बच्चों के साथ ही परिसर में रुकना होगा, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई की जा सके। इसके साथ ही संभाग स्तर पर विशेष निगरानी टीमें बनाई जाएंगी, जो छात्रावासों का औचक निरीक्षण करेंगी और व्यवस्थाओं की रिपोर्ट तैयार करेंगी।तकनीकी निगरानी को भी मजबूत किया जाएगा। प्रदेश के लगभग 2500 जनजातीय छात्रावासों में सीसीटीवी कैमरे और बायोमेट्रिक/थंब इम्प्रेशन सिस्टम लगवाए जाएंगे। इससे यह रिकॉर्ड रखा जा सकेगा कि कौन व्यक्ति कब छात्रावास में आया और कब गया। इसके अलावा, भोजन की गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए रोजाना परोसी जाने वाली थाली की तस्वीर भेजना भी अनिवार्य किया जाएगा।
    इस बीच, भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री परिसर की जमीन को लेकर सरकार ने स्पष्ट किया कि इसका अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री स्तर पर ही लिया जाएगा। लंबे समय से लंबित कचरा निष्पादन की प्रक्रिया को पूरा करना सरकार की बड़ी उपलब्धियों में से एक माना जा रहा है।सरकार ने यह भी निर्देश दिया है कि आगामी शिक्षा सत्र से पहले किसी भी छात्रावास में बिना पुलिस सत्यापन के कोई कर्मचारी नियुक्त नहीं होगा। सुरक्षा गार्ड से लेकर अन्य स्टाफ की पृष्ठभूमि जांच अनिवार्य होगी।
    इसके अलावा, जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा के विस्तार पर भी जोर दिया जा रहा है। प्रत्येक विकासखंड में आधुनिक सुविधाओं वाले स्कूल, छात्रावास और सांस्कृतिक केंद्र विकसित करने की योजना है। इसका उद्देश्य बच्चों और युवाओं को बेहतर शिक्षा, सुरक्षित आवास और सांस्कृतिक गतिविधियों के अवसर प्रदान करना है।सुरक्षा, अनुशासन और शिक्षा के इस सुधार से यह उम्मीद जताई जा रही है कि प्रदेश के छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों को सुरक्षित वातावरण मिलेगा और उनकी पढ़ाई पर भी ध्यान केंद्रित किया जा सकेगा। सरकार का कहना है कि इस कदम से छात्राओं और छात्रों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं की संभावना न्यूनतम होगी।