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  • MP में कोचिंग सेंटरों पर नई नियमावली लागू करने की तैयारी, फीस से लेकर टीचर की योग्यता तक वेबसाइट पर देनी होगी पूरी जानकारी

    MP में कोचिंग सेंटरों पर नई नियमावली लागू करने की तैयारी, फीस से लेकर टीचर की योग्यता तक वेबसाइट पर देनी होगी पूरी जानकारी


    भोपाल। मध्य प्रदेश में कोचिंग सेंटरों के संचालन को व्यवस्थित बनाने और विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने नए नियमों का प्रारूप जारी किया है। उच्च शिक्षा विभाग की ओर से मध्यप्रदेश कोचिंग केंद्र पंजीयन एवं विनियमन नियम 2026 का नोटिफिकेशन जारी किया गया है। इसके तहत कोचिंग संस्थानों के पंजीयन से लेकर शिक्षकों की योग्यता सुरक्षा व्यवस्था फीस की जानकारी और विद्यार्थियों की शिकायतों के समाधान तक कई महत्वपूर्ण प्रावधान प्रस्तावित किए गए हैं। इन नियमों का उद्देश्य कोचिंग संस्थानों की जवाबदेही बढ़ाना और विद्यार्थियों को सुरक्षित तथा बेहतर शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराना है।

    प्रस्तावित नियमों के अनुसार हर कोचिंग सेंटर को अपनी वेबसाइट बनाकर विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए जरूरी जानकारियां सार्वजनिक करनी होंगी। इसमें कोचिंग की फीस का पूरा विवरण शिक्षकों की योग्यता उपलब्ध सुविधाएं और शिकायत निवारण व्यवस्था शामिल होगी। संस्थान को यह भी बताना होगा कि वहां किन परीक्षाओं की तैयारी कराई जाती है। इससे दाखिला लेने से पहले विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को कोचिंग सेंटर की व्यवस्था और खर्च की जानकारी मिल सकेगी। फीस और सुविधाओं को लेकर पारदर्शिता बढ़ाना इन प्रावधानों का प्रमुख उद्देश्य है।

    पंजीयन व्यवस्था के तहत कोचिंग संचालकों को निर्धारित समय सीमा में आवेदन करना होगा। प्रारूप के मुताबिक संस्थानों को नियम लागू होने के बाद 90 दिनों के भीतर पंजीयन के लिए आवेदन करना होगा। पंजीयन की अवधि तीन साल निर्धारित की गई है जिसके बाद उसका नवीनीकरण कराना जरूरी होगा। पंजीयन किसी दूसरे व्यक्ति या संस्थान को हस्तांतरित नहीं किया जा सकेगा। यदि किसी कोचिंग सेंटर की एक से अधिक शाखाएं हैं तो हर शाखा को अलग कोचिंग सेंटर माना जाएगा। इससे प्रत्येक शाखा की सुविधाओं और सुरक्षा व्यवस्था की अलग निगरानी की जा सकेगी।

    विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए कोचिंग परिसरों में निर्धारित उपयुक्त स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाना जरूरी होगा। हालांकि निगरानी के नाम पर विद्यार्थियों की निजता से समझौता नहीं किया जा सकेगा। शौचालयों चेंजिंग रूम और परामर्श कक्ष जैसे संवेदनशील स्थानों पर रिकॉर्डिंग की अनुमति नहीं होगी। इसके अलावा संस्थानों को पर्याप्त बैठने की व्यवस्था स्वच्छ पेयजल साफ-सफाई प्राथमिक उपचार और आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के इंतजाम करने होंगे। आगंतुकों का रिकॉर्ड रखने और सुरक्षा प्रोटोकॉल की नियमित समीक्षा करने पर भी जोर दिया गया है।

    शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर भी प्रावधान किए गए हैं। प्रारूप के अनुसार ट्यूटर बनने के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता स्नातक निर्धारित की गई है। संस्थानों को प्रशिक्षित सुरक्षा कर्मचारियों और मानसिक स्वास्थ्य सहायता के लिए योग्य परामर्शदाताओं की व्यवस्था भी करनी होगी। विद्यार्थियों को परीक्षा और प्रतियोगिता के दबाव से निपटने में मदद देने के लिए मानसिक स्वास्थ्य और करियर काउंसलिंग पर विशेष जोर दिया गया है। नियमित परामर्श सत्र आयोजित करने और अभिभावकों के साथ संवाद बनाए रखने की व्यवस्था भी प्रस्तावित है।

    नियमों में प्रवेश और पढ़ाई के दौरान धर्म मूलवंश जाति लिंग जन्मस्थान या अन्य आधारों पर किसी विद्यार्थी के साथ भेदभाव नहीं करने का प्रावधान है। इन आधारों पर विद्यार्थियों का अलग बैच बनाने पर भी रोक लगाने की बात कही गई है। विशेष आवश्यकता वाले विद्यार्थियों के लिए परिसर को दिव्यांग-अनुकूल बनाने और शिक्षकों को उनके प्रति संवेदनशील रखने पर जोर दिया गया है।

    पंजीयन या नवीनीकरण का आवेदन अस्वीकार होने अथवा पंजीयन रद्द या निलंबित किए जाने की स्थिति में अपील का अधिकार भी दिया गया है। संबंधित आदेश की सूचना मिलने के 30 दिनों के भीतर संभागायुक्त के समक्ष अपील की जा सकेगी। प्रारूप में सुनवाई के बाद 45 दिनों के भीतर अपील का निपटारा करने का उल्लेख है।

    इन प्रस्तावित नियमों से विद्यार्थियों और अभिभावकों को कोचिंग चुनने से पहले फीस शिक्षकों की योग्यता सुविधाओं और सुरक्षा इंतजामों की जानकारी मिल सकेगी। साथ ही मानसिक स्वास्थ्य सहायता और शिकायतों के समाधान की औपचारिक व्यवस्था विकसित करने में मदद मिल सकती है। हालांकि नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन और निगरानी से ही यह स्पष्ट होगा कि कोचिंग संस्थानों में पारदर्शिता और विद्यार्थियों की सुरक्षा को कितना मजबूत बनाया जा सकेगा।

  • 6 हजार व्यवसायिक शिक्षकों को राहत, नई कंपनियां नहीं हटा सकेंगी पुराने कर्मचारी

    6 हजार व्यवसायिक शिक्षकों को राहत, नई कंपनियां नहीं हटा सकेंगी पुराने कर्मचारी


    भोपाल । मध्य प्रदेश में स्कूलों में व्यवसायिक शिक्षा से जुड़े करीब 6 हजार आउटसोर्स व्यवसायिक शिक्षकों के लिए सरकार की ओर से महत्वपूर्ण फैसला लिया गया है। स्कूल शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि अलग अलग ट्रेड में काम कर रहीं 13 कंपनियों का एग्रीमेंट खत्म होने के बाद भले ही नई कंपनियों को जिम्मेदारी दी जाए लेकिन पहले से स्कूलों में काम कर रहे व्यवसायिक प्रशिक्षकों को सेवा में रखना होगा। नई कंपनियां इन कर्मचारियों को अपनी ओर से हटाने की कार्रवाई नहीं कर सकेंगी। विभाग के इस आदेश के बाद लंबे समय से नौकरी की असुरक्षा का सामना कर रहे व्यवसायिक शिक्षकों को राहत मिलने की उम्मीद है।

    समग्र शिक्षा की ओर से जारी निर्देश के मुताबिक व्यवसायिक शिक्षा के अलग अलग ट्रेड में काम कर रहीं 13 कंपनियों का अनुबंध समाप्त किया गया है। इसके बावजूद स्कूलों में सेवाएं दे रहे व्यवसायिक प्रशिक्षक यथावत काम करते रहेंगे। प्रदेश में व्यवसायिक शिक्षा के क्षेत्र में 50 से अधिक कंपनियां काम कर रही हैं और इनके माध्यम से आउटसोर्स प्रशिक्षकों की सेवाएं ली जाती हैं। लंबे समय से कुछ प्रशिक्षकों की ओर से कंपनियों पर नियुक्ति और जॉइनिंग के नाम पर पैसे मांगने सहित कई तरह की परेशानियों के आरोप लगाए जाते रहे हैं।

    इसी तरह की समस्याओं को लेकर करीब दो महीने पहले व्यवसायिक शिक्षकों ने भोपाल में दो दिवसीय आंदोलन किया था। पहले दिन अंबेडकर पार्क में धरना दिया गया जबकि दूसरे दिन डीपीआई का घेराव किया गया। आंदोलन के बाद अधिकारियों के साथ हुई चर्चा में शिक्षकों ने नौकरी की सुरक्षा सहित कई मांगें रखीं। अब विभाग की ओर से जारी आदेश को उसी प्रक्रिया में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम बताया जा रहा है।

    लोक शिक्षण संचालनालय के निर्देश के अनुसार जिन कंपनियों का एग्रीमेंट समाप्त किया गया है उनमें अलग अलग ट्रेड की कंपनियां शामिल हैं। इनमें एग्रीकल्चर ट्रेड से जुड़ी आकाश एग्री सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड और वालेअर फैबटेक्स प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स एंड हार्डवेयर ट्रेड में एसेंसिव एडुकेयर लिमिटेड टाइम्स सेंटर फॉर लर्निंग लिमिटेड अल्टीमेट एनर्जी जबकि अपैरल ट्रेड में ब्राइट फ्यूचर डॉट कॉम स्किल प्राइवेट लिमिटेड का नाम है। हेल्थकेयर ट्रेड में डीसीआई मल्टी स्किल्स प्राइवेट लिमिटेड का अनुबंध खत्म किया गया है।

    आईटी और आईटीईएस ट्रेड में एवरग्रीन एजुकेशन ट्रस्ट जीके एजुकेशनल ट्रस्ट आईसीए एजुस्किल्स प्राइवेट लिमिटेड इंडस एजुट्रेन प्राइवेट लिमिटेड और एलएनजे इंस्टीट्यूट ऑफ स्किल्स एंड टेक्नालॉजी प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। ब्यूटी एंड वेलनेस ट्रेड में वीएलसीसी हेल्थकेयर का एग्रीमेंट खत्म किया गया है। हालांकि इंडस एजुट्रेन के कुछ अन्य ट्रेड से जुड़े एग्रीमेंट समाप्त नहीं किए गए हैं।

    विभाग के फैसले के बाद जहां नौकरी की सुरक्षा को लेकर राहत मिली है वहीं व्यवसायिक शिक्षकों के सामने लंबित वेतन का मुद्दा अभी भी बना हुआ है। नवीन व्यवसायिक शिक्षक महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष जगदीश परमार ने सवाल उठाया है कि जिन कंपनियों का अनुबंध समाप्त हुआ है उनके कर्मचारियों की लंबित सैलरी का भुगतान कौन करेगा। कई प्रशिक्षकों के चार से पांच महीने तक का वेतन लंबित होने की बात भी सामने आई है। स्कूल बदलने की स्थिति में पुराने बकाया वेतन के भुगतान की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। संगठनों का कहना है कि वे इस मामले में विभाग से पत्राचार करेंगे और जरूरत पड़ने पर आंदोलन का रास्ता अपनाया जा सकता है।

  • MP में TET को लेकर बढ़ी मुश्किल: ESB के इनकार से बदलेगा परीक्षा का पूरा प्लान, तारीख और सेंटर पर भी संशय

    MP में TET को लेकर बढ़ी मुश्किल: ESB के इनकार से बदलेगा परीक्षा का पूरा प्लान, तारीख और सेंटर पर भी संशय


    भोपाल। मध्यप्रदेश में डेढ़ लाख से ज्यादा शिक्षकों के लिए प्रस्तावित शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी TET को लेकर बड़ा पेच फंस गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और स्कूल शिक्षा मंत्री की घोषणा के बाद परीक्षा को ऑनलाइन के साथ ऑफलाइन कराने की तैयारी की जा रही थी लेकिन कर्मचारी चयन मंडल ESB ने ऑफलाइन परीक्षा कराने से साफ इनकार कर दिया है। ESB का कहना है कि पिछले करीब छह साल से मंडल केवल ऑनलाइन परीक्षाएं आयोजित कर रहा है और मौजूदा व्यवस्था में ऑफलाइन परीक्षा कराना उसके लिए संभव नहीं है। इस फैसले के बाद अब स्कूल शिक्षा विभाग के सामने नई परीक्षा एजेंसी तलाशने की चुनौती खड़ी हो गई है। विभाग दूसरी एजेंसी से परीक्षा कराने के साथ ही जरूरत पड़ने पर खुद परीक्षा आयोजित कराने के विकल्प पर भी विचार कर रहा है। अंतिम फैसला मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के भोपाल लौटने के बाद लिया जा सकता है।

    दरअसल सुप्रीम कोर्ट के मई 2026 में दिए गए आदेश के बाद मध्यप्रदेश में बड़ी संख्या में शिक्षकों के लिए TET पास करना जरूरी हो गया है। वर्ष 1998 से 2009 के बीच नियुक्त शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा पास करने के लिए वर्ष 2028 तक का समय दिया गया है। ऐसे शिक्षकों को हर साल होने वाली परीक्षा में शामिल होने के अवसर मिलेंगे। यदि कोई शिक्षक छह अवसर मिलने के बावजूद पात्रता परीक्षा पास नहीं कर पाता है तो उसकी सेवा समाप्त किए जाने का प्रावधान सामने आया है। इसी वजह से सरकार के लिए TET परीक्षा आयोजित कराना बेहद महत्वपूर्ण हो गया है।

    इसी क्रम में कर्मचारी चयन मंडल ने पहले 21 अगस्त से 4 सितंबर तक ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया शुरू की थी। बाद में अभ्यर्थियों को राहत देते हुए आवेदन की अंतिम तारीख बढ़ाकर 18 सितंबर कर दी गई। ESB की ओर से पहले 12 अक्टूबर से परीक्षा कराने की तैयारी की जा रही थी लेकिन अब ऑफलाइन परीक्षा से इनकार के बाद पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। यदि सरकार किसी नई एजेंसी को परीक्षा की जिम्मेदारी देती है तो परीक्षा की तारीख में भी बदलाव संभव है। नई एजेंसी को परीक्षा केंद्र तैयार करने से लेकर प्रश्नपत्र और परीक्षा संचालन तक की पूरी व्यवस्था करनी होगी।

    लोक शिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह के मुताबिक यदि TET ऑफलाइन कराई जाती है तो परीक्षा आयोजित करने में ज्यादा समय लग सकता है। ऐसे में विभाग TET के साथ शिक्षक भर्ती प्रक्रिया से जुड़े दूसरे विकल्पों पर भी विचार कर रहा है। सरकार के सामने लोक सेवा आयोग यानी PSC को परीक्षा की जिम्मेदारी देने का विकल्प भी मौजूद है लेकिन PSC ने अब तक शिक्षकों की पात्रता परीक्षा या भर्ती परीक्षा आयोजित नहीं की है। इसलिए इस विकल्प पर भी अंतिम निर्णय शासन स्तर पर ही होगा।

    परीक्षा केंद्रों को लेकर भी शिक्षकों की चिंता बढ़ी हुई है। फिलहाल भोपाल इंदौर जबलपुर खंडवा नीमच रतलाम रीवा सागर सतना उज्जैन और सीधी में परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। सागर के साथ चंबल और ग्वालियर अंचल के कई जिलों को केंद्रों में जगह नहीं मिली है। शिक्षकों की मांग है कि जिला और ब्लॉक स्तर पर परीक्षा केंद्र बनाए जाएं ताकि उन्हें परीक्षा देने के लिए दूर के शहरों की यात्रा न करनी पड़े। नई एजेंसी तय होने के बाद परीक्षा केंद्रों की संख्या और स्थानों में भी बदलाव की संभावना है।

    फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि TET परीक्षा आखिर किस एजेंसी के जरिए और किस तारीख को आयोजित होगी। आवेदन की प्रक्रिया अभी 18 सितंबर तक जारी है लेकिन एजेंसी बदलने की स्थिति में परीक्षा से जुड़ी व्यवस्थाओं में बदलाव हो सकता है। मुख्यमंत्री के लौटने के बाद होने वाली बैठक में इस पूरे मामले पर तस्वीर साफ होने की उम्मीद है। तब तक हजारों शिक्षक परीक्षा की तारीख और व्यवस्था को लेकर असमंजस में बने रहेंगे।

  • सरकारी स्कूलों में शिक्षक बनने का मौका, MP में 5 हजार अतिथि शिक्षकों की भर्ती; मेरिट से होगा चयन

    सरकारी स्कूलों में शिक्षक बनने का मौका, MP में 5 हजार अतिथि शिक्षकों की भर्ती; मेरिट से होगा चयन


    भोपाल । मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने बड़ा फैसला लिया है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 में रिक्त शिक्षक पदों के कारण पढ़ाई प्रभावित न हो इसके लिए करीब 5 हजार अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति की तैयारी शुरू कर दी गई है। रिक्त पदों के लिए संबंधित विषय के पात्र उम्मीदवार मंगलवार से ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद 1 सितंबर से अतिथि शिक्षकों की ऑनलाइन जॉइनिंग कराई जा सकेगी। अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति विकासखंड और जिला स्तर पर तैयार मेरिट पैनल के आधार पर की जाएगी।

    लोक शिक्षण संचालनालय ने इस संबंध में सोमवार को सभी संभागीय संयुक्त संचालकों जिला शिक्षा अधिकारियों विकासखंड शिक्षा अधिकारियों तथा हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूलों के प्राचार्यों को दिशा निर्देश जारी किए हैं। विभाग का उद्देश्य नियमित शिक्षकों की कमी के कारण सरकारी स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित होने से रोकना है। पूरी भर्ती प्रक्रिया ऑनलाइन रखी गई है और इसके लिए एजुकेशन पोर्टल 3.0 के तहत गेस्ट फैकल्टी मैनेजमेंट सिस्टम यानी GFMS मॉड्यूल का इस्तेमाल किया जाएगा।

    विभाग के निर्देश के मुताबिक जिन स्कूलों में शिक्षकों के पद रिक्त हैं वहां संबंधित विषय के लिए GFMS पोर्टल पर उपलब्ध रिक्तियों के आधार पर अतिथि शिक्षक बुलाए जाएंगे। इसके लिए विकासखंड स्तर पर उपलब्ध मेरिट सूची का इस्तेमाल किया जाएगा। उम्मीदवारों को उनकी मेरिट के क्रम के अनुसार संपर्क कर स्कूल में शिक्षण कार्य के लिए आमंत्रित किया जाएगा। उम्मीदवार की सहमति या असहमति की जानकारी भी GFMS पोर्टल पर दर्ज करना अनिवार्य होगा।

    इस प्रक्रिया में उन उम्मीदवारों को प्राथमिकता मिल सकती है जिन्होंने वर्ष 2025-26 में उसी विद्यालय में रिक्त पद के विरुद्ध अतिथि शिक्षक के रूप में काम किया था। यदि ऐसे पात्र आवेदक उपलब्ध हैं तो उन्हें उसी स्कूल में दोबारा शिक्षण कार्य के लिए बुलाया जा सकेगा। इससे पहले काम कर चुके अतिथि शिक्षकों को अपने अनुभव और संबंधित मेरिट के आधार पर लाभ मिलने की संभावना है।

    यदि किसी विषय के लिए विकासखंड की मेरिट सूची में कोई पात्र आवेदक उपलब्ध नहीं है तो स्कूल प्रभारी जिला स्तर पर उपलब्ध पैनल का सहारा ले सकेंगे। जिला मेरिट सूची में उपलब्ध उम्मीदवारों को भी मेरिट क्रम के अनुसार बुलाया जाएगा। जिस उम्मीदवार को अतिथि शिक्षक के रूप में शिक्षण कार्य के लिए आमंत्रित किया जाएगा उसकी जॉइनिंग की जानकारी उसी दिन GFMS मॉड्यूल में दर्ज करनी होगी। यानी नियुक्ति प्रक्रिया को ऑनलाइन सिस्टम के जरिए ही पूरा किया जाएगा।

    उम्मीदवारों के दस्तावेजों का सत्यापन भी इस प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। स्कूल प्रभारी अतिथि शिक्षक के स्कोर कार्ड में दर्ज दस्तावेजों की जांच करेंगे। यदि सत्यापन के दौरान वास्तविक दस्तावेजों और स्कोर कार्ड में दर्ज जानकारी में अंतर पाया जाता है तो उम्मीदवार की अतिथि शिक्षक पद के लिए पात्रता समाप्त की जा सकती है। इसलिए उम्मीदवारों को आवेदन से लेकर दस्तावेज सत्यापन तक सभी जानकारी सही और प्रमाणित रखना जरूरी होगा।

    विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि अतिथि शिक्षकों को बुलाने की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी। किसी भी स्थिति में ऑफलाइन तरीके से उम्मीदवारों को आमंत्रित नहीं किया जाएगा। इससे नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने और मेरिट के आधार पर उम्मीदवारों को अवसर देने की कोशिश की गई है।

    वर्ग-3 प्राथमिक शिक्षक के रिक्त पदों के लिए भी वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। यदि विकासखंड या जिला स्तर की मेरिट सूची में वर्ग-3 प्राथमिक पद के लिए कोई पात्र उम्मीदवार उपलब्ध नहीं है तो वर्ग-3 जनरल के पैनल से उम्मीदवार को प्राथमिक शिक्षक के रिक्त पद के विरुद्ध अतिथि शिक्षक के रूप में बुलाया जा सकेगा।

    स्कूल शिक्षा विभाग ने सभी संबंधित अधिकारियों और स्कूल प्रभारियों को निर्देश दिए हैं कि अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति में मेरिट सूची दस्तावेज सत्यापन ऑनलाइन जॉइनिंग और ई-अटेंडेंस से जुड़े नियमों का अनिवार्य रूप से पालन किया जाए। करीब 5 हजार अतिथि शिक्षकों की तैनाती से सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर करने और विद्यार्थियों की पढ़ाई को नियमित बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।

  • MP Board का बड़ा फैसला: माता-पिता दोनों को खो चुके छात्रों की परीक्षा फीस माफ, 2026-27 से मिलेगा लाभ

    MP Board का बड़ा फैसला: माता-पिता दोनों को खो चुके छात्रों की परीक्षा फीस माफ, 2026-27 से मिलेगा लाभ


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल ने उन विद्यार्थियों के लिए संवेदनशील पहल की है जिन्होंने अपने माता और पिता दोनों को खो दिया है। मंडल के फैसले के अनुसार ऐसे पात्र विद्यार्थियों को अब बोर्ड परीक्षाओं में शामिल होने के लिए परीक्षा शुल्क और नामांकन शुल्क जमा नहीं करना होगा। यह सुविधा शैक्षणिक सत्र 2026-27 की परीक्षाओं से लागू होगी। इस फैसले का लाभ उन विद्यार्थियों को मिलेगा जो माता-पिता के निधन के बाद किसी रिश्तेदार के सहारे अपनी पढ़ाई जारी रख रहे हैं या शासन द्वारा संचालित अथवा शासन से मान्यता प्राप्त संस्था और अनाथालय में रहकर शिक्षा हासिल कर रहे हैं।

    मंडल का यह निर्णय ऐसे बच्चों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है जिनके सामने माता-पिता के निधन के बाद पढ़ाई जारी रखना पहले ही बड़ी चुनौती होती है। कई मामलों में बच्चों की जिम्मेदारी रिश्तेदारों पर आ जाती है जबकि कुछ विद्यार्थी सरकारी या मान्यता प्राप्त संस्थाओं के संरक्षण में शिक्षा पूरी करते हैं। ऐसी स्थिति में स्कूल और बोर्ड की फीस भी उनके लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन सकती है। अब परीक्षा और नामांकन शुल्क से राहत मिलने के बाद इन विद्यार्थियों को बोर्ड परीक्षा की तैयारी पर ज्यादा ध्यान देने का अवसर मिलेगा।

    फीस छूट का लाभ लेने के लिए मंडल ने दस्तावेजों की प्रक्रिया भी निर्धारित की है। परीक्षा फॉर्म भरते समय पात्र विद्यार्थी को माता और पिता दोनों के मृत्यु प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करने होंगे। यानी केवल एक अभिभावक की मृत्यु होने की स्थिति में यह विशेष छूट लागू नहीं होगी। मंडल की ओर से तय पात्रता के अनुसार दोनों माता-पिता के निधन का प्रमाण देना जरूरी होगा।

    यदि कोई विद्यार्थी किसी शासन द्वारा संचालित या शासन से मान्यता प्राप्त संस्था में रहकर पढ़ाई कर रहा है तो उसे संस्था की ओर से जारी प्रमाण-पत्र भी देना होगा। इस प्रमाण-पत्र में विद्यार्थी की स्थिति और संबंधित संस्था में उसके आश्रय में रहने की जानकारी स्पष्ट होनी चाहिए। निर्धारित दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराने पर विद्यार्थी को शुल्क छूट का लाभ नहीं मिल सकेगा। इसलिए स्कूलों और संबंधित संस्थाओं के लिए यह जरूरी होगा कि वे पात्र विद्यार्थियों को परीक्षा फॉर्म भरने से पहले आवश्यक कागजी प्रक्रिया की जानकारी उपलब्ध कराएं।

    मंडल का यह फैसला केवल परीक्षा शुल्क कम करने तक सीमित नहीं है बल्कि इसका उद्देश्य आर्थिक कठिनाइयों के कारण किसी बच्चे की शिक्षा प्रभावित होने से रोकना भी है। माता-पिता दोनों को खो चुके विद्यार्थी कई बार बेहद सीमित संसाधनों में पढ़ाई जारी रखते हैं। ऐसे में बोर्ड परीक्षा में शामिल होने का शुल्क उनके लिए छोटी रकम नहीं होती। फीस माफ होने से उन्हें आर्थिक सहायता के साथ मानसिक राहत भी मिल सकती है।

    मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक यह व्यवस्था सत्र 2026-27 से लागू होगी और पात्र विद्यार्थी मंडल की संबंधित परीक्षाओं में शुल्क छूट का लाभ ले सकेंगे। इस पहल को शिक्षा को अधिक समावेशी बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

    इस फैसले से उन बच्चों को यह भरोसा मिलेगा कि विपरीत परिस्थितियों के बावजूद उनकी शिक्षा और परीक्षा का रास्ता आर्थिक परेशानी के कारण नहीं रुकेगा। हालांकि पात्र विद्यार्थियों को समय रहते मृत्यु प्रमाण-पत्र और संस्था से संबंधित जरूरी दस्तावेज तैयार रखने होंगे ताकि परीक्षा फॉर्म भरते समय उन्हें किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

  • इंजीनियरिंग एडमिशन में बड़ा बदलाव: अब साल में दो बार मिलेगा मौका, जुलाई और जनवरी से शुरू होंगे सत्र

    इंजीनियरिंग एडमिशन में बड़ा बदलाव: अब साल में दो बार मिलेगा मौका, जुलाई और जनवरी से शुरू होंगे सत्र


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से तकनीकी शिक्षा को लेकर एक बड़ा बदलाव सामने आ रहा है। प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों में अब साल में दो बार एडमिशन की व्यवस्था लागू की जाएगी। इस नई व्यवस्था को लागू करने के लिए राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) गाइडलाइन तैयार कर रहा है, जबकि तकनीकी शिक्षा विभाग ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

    नई व्यवस्था के तहत एक शैक्षणिक सत्र जुलाई में शुरू होगा, जबकि दूसरा सत्र जनवरी से प्रारंभ किया जाएगा। जुलाई सत्र में सभी सीटों पर एडमिशन के लिए सेंट्रलाइज्ड काउंसलिंग कराई जाएगी। इसके बाद जो सीटें खाली रह जाएंगी, उन्हें जनवरी सत्र में भरा जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे सीटें खाली रहने की समस्या खत्म होगी और एडमिशन प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी हो सकेगी।

    फिलहाल स्थिति यह है कि एडमिशन प्रक्रिया सितंबर-अक्टूबर तक खिंच जाती है और कई बार सीटों को लेकर विवाद कोर्ट तक पहुंच जाते हैं। नई व्यवस्था से इस देरी पर रोक लगेगी और एकेडमिक कैलेंडर भी तय समय पर लागू किया जा सकेगा।

    हालांकि, इस बदलाव को लेकर शिक्षा विशेषज्ञों ने कुछ चिंताएं भी जताई हैं। प्रस्ताव के मुताबिक, जनवरी सत्र में प्रवेश लेने वाले छात्रों को सीधे दूसरे सेमेस्टर से पढ़ाई शुरू कराई जा सकती है। बाद में वे पहले सेमेस्टर की पढ़ाई करेंगे। इसी तरह आगे भी सेमेस्टर का क्रम उलट-पुलट तरीके से चल सकता है जैसे चौथा सेमेस्टर पहले और तीसरा बाद में।

    विशेषज्ञों का कहना है कि इंजीनियरिंग की पढ़ाई में विषय आपस में जुड़े होते हैं। ऐसे में बेसिक विषयों से पहले एडवांस विषय पढ़ना छात्रों की समझ को प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा प्लेसमेंट पर भी असर पड़ने की आशंका है। जनवरी सत्र में एडमिशन लेने वाले छात्र फरवरी-मार्च के आसपास पासआउट होंगे, जबकि अधिकांश कंपनियां दिसंबर तक पास होने वाले छात्रों को ही भर्ती करती हैं। ऐसे में उनके लिए अलग प्लेसमेंट ड्राइव आयोजित करनी पड़ सकती है।

    लेटरल एंट्री के छात्रों पर भी इसका असर पड़ सकता है। अभी डिप्लोमा के बाद दूसरे वर्ष में प्रवेश के लिए जो सीटें बचती हैं, वे अगले सत्र में भरी जाती हैं। लेकिन साल में दो बार एडमिशन होने से इन सीटों की उपलब्धता कम हो सकती है।

    सरकार का तर्क है कि इस व्यवस्था से विश्वविद्यालय पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा और दो अलग-अलग ग्रुप बनाकर पढ़ाई सुचारु रूप से चलाई जा सकेगी। कंपनियां भी अपने प्लेसमेंट शेड्यूल में बदलाव कर सकती हैं।

    कुल मिलाकर, यह नई व्यवस्था जहां एक ओर एडमिशन प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और लचीला बनाएगी, वहीं छात्रों और संस्थानों के सामने नई चुनौतियां भी खड़ी कर सकती है। आने वाले समय में इसका वास्तविक असर साफ तौर पर देखने को मिलेगा।

  • भोपाल में पालक महासंघ का हल्ला बोल: निजी स्कूलों की मनमानी फीस के खिलाफ DEO कार्यालय का घेराव

    भोपाल में पालक महासंघ का हल्ला बोल: निजी स्कूलों की मनमानी फीस के खिलाफ DEO कार्यालय का घेराव

    भोपाल ।राजधानी भोपाल में निजी स्कूलों द्वारा मनमाने ढंग से फीस और अन्य शुल्क वसूले जाने के खिलाफ अभिभावकों का गुस्सा सड़कों पर नजर आया। पालक महासंघ के नेतृत्व में बड़ी संख्या में अभिभावकों ने जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करते हुए घेराव किया और निजी स्कूल संचालकों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि निजी स्कूल फीस, बस शुल्क, किताबों और अन्य मदों में लगातार मनमानी वसूली कर रहे हैं, जिससे अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है।

    प्रदर्शन के दौरान पालक महासंघ के पदाधिकारियों ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में शिक्षा माफिया सक्रिय है और निजी स्कूल संचालकों के दबाव में प्रशासन कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहा। उनका आरोप है कि अभिभावक लंबे समय से शिकायतें कर रहे हैं, लेकिन जिला शिक्षा अधिकारी की ओर से स्कूलों के खिलाफ कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया।

    प्रदर्शन के दौरान अभिभावकों ने DEO कार्यालय का घेराव करते हुए जोरदार नारेबाजी की और शिक्षा विभाग के खिलाफ नाराजगी जताई। पालक महासंघ के प्रतिनिधियों ने बताया कि वे अपनी मांगों को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन सौंपने पहुंचे थे, लेकिन अधिकारी ने ज्ञापन लेने से इनकार कर दिया और कार्यालय छोड़कर चले गए। इस घटना से प्रदर्शनकारियों में और अधिक आक्रोश फैल गया और उन्होंने इसे अभिभावकों की समस्याओं के प्रति प्रशासन की उदासीनता बताया।

    अभिभावकों का कहना है कि निजी स्कूल हर साल फीस में मनमानी बढ़ोतरी कर देते हैं, जबकि बस शुल्क और किताबों के नाम पर भी भारी रकम वसूली जाती है। इससे खासकर गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। कई अभिभावकों ने कहा कि बच्चों की पढ़ाई जारी रखना भी उनके लिए मुश्किल होता जा रहा है।

    पालक महासंघ ने सरकार और शिक्षा विभाग से मांग की है कि निजी स्कूलों की फीस वृद्धि पर तुरंत रोक लगाई जाए और फीस, बस चार्ज तथा किताबों की कीमतों के लिए एक पारदर्शी और तय ढांचा बनाया जाए। इसके अलावा उन्होंने शिक्षा माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और दोषी स्कूलों पर भारी जुर्माना लगाने की मांग भी उठाई है।

    प्रदर्शनकारियों ने यह भी मांग की कि जिला शिक्षा अधिकारी और संबंधित अधिकारियों पर किसी तरह का दबाव डालने वाले लोगों की जांच की जाए और यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाए। पालक महासंघ ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज किया जाएगा।

  • मध्य प्रदेश में बोर्ड पैटर्न लागू, नकल और लीक से निपटने की तैयारी

    मध्य प्रदेश में बोर्ड पैटर्न लागू, नकल और लीक से निपटने की तैयारी


    भोपाल। मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में इस साल 9वीं और 11वीं की परीक्षाएं पूरी तरह से बोर्ड पैटर्न पर आयोजित की जा रही हैं। सबसे बड़ा बदलाव परीक्षा के प्रश्नपत्रों की सुरक्षा में किया गया है। अब प्रश्नपत्र स्कूलों में नहीं, बल्कि सीधे पुलिस थानों में सुरक्षित रखे जाएंगे। परीक्षा के दिन ही केंद्राध्यक्ष की निगरानी में इन बंडलों को थाने से परीक्षा केंद्र तक लाया जाएगा और परीक्षा शुरू होने से ठीक 60 मिनट पहले खोला जाएगा।

    इस कदम से नकल और प्रश्नपत्र लीक जैसी समस्याओं को रोकने की तैयारी की जा रही है। मध्य प्रदेश राज्य मुक्त स्कूल शिक्षा परिषद द्वारा तैयार किए गए प्रश्नपत्र अब जिला शिक्षा अधिकारी और केंद्राध्यक्षों के माध्यम से परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाए जाएंगे। इससे यह सुनिश्चित होगा कि परीक्षा निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से आयोजित हो।

    कक्षा 11वीं की परीक्षाएं 23 फरवरी से 17 मार्च 2026 तक आयोजित होंगी जबकि कक्षा 9वीं की परीक्षाएं 2 मार्च से 17 मार्च 2026 तक होंगी। दोनों कक्षाओं की परीक्षाएं एक ही पाली में होंगी और दोपहर 1:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक चलेंगी।

    सभी उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन 23 मार्च 2026 तक पूरा कर लिया जाएगा। मूल्यांकन प्रक्रिया माध्यमिक शिक्षा मंडल की अंक योजना के अनुसार होगी, जिससे सभी छात्रों को निष्पक्ष अंक मिलें और मूल्यांकन में पारदर्शिता बनी रहे।

    विशेषज्ञों के अनुसार, प्रश्नपत्रों की थाने में सुरक्षा व्यवस्था से नकल की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आएगी। इससे स्कूल स्तर पर लीक की संभावना लगभग समाप्त हो जाएगी। साथ ही, परीक्षा अधिकारियों और पुलिस की निगरानी यह सुनिश्चित करेगी कि कोई भी अनुचित गतिविधि न हो।

    अभिभावक और शिक्षक इस बदलाव से संतुष्ट हैं और उनका मानना है कि इससे परीक्षा का स्तर और विश्वसनीयता दोनों बढ़ेंगे। छात्रों को भी समय से पहले प्रश्नपत्र खोलने की प्रक्रिया से अतिरिक्त तनाव कम होगा और वे बेहतर तैयारी के साथ परीक्षा में शामिल हो पाएंगे।

    मध्य प्रदेश शिक्षा विभाग का कहना है कि यह कदम राज्य में परीक्षा प्रणाली को और मजबूत बनाने के लिए उठाया गया है। भविष्य में इसे अन्य कक्षाओं और बोर्ड परीक्षाओं में भी लागू किए जाने की संभावना है।

    इस प्रकार इस साल 9वीं और 11वीं की परीक्षाएं केवल पाठ्यक्रम की समझ ही नहीं, बल्कि अनुशासन और ईमानदारी की परीक्षा भी होंगी। छात्रों और शिक्षकों के लिए यह नई प्रणाली चुनौतीपूर्ण, लेकिन पारदर्शिता और सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

  • जनजातीय छात्रावासों में सुरक्षा सख्ती: अधीक्षक अब बच्चों के साथ रात बिताएंगे, नियम उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई

    जनजातीय छात्रावासों में सुरक्षा सख्ती: अधीक्षक अब बच्चों के साथ रात बिताएंगे, नियम उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई


    भोपाल। प्रदेश के जनजातीय छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों, खासकर छात्राओं की सुरक्षा और अनुशासन को लेकर राज्य सरकार ने बड़े कदम उठाए हैं। अब छात्रावासों में अधीक्षक का रातभर परिसर में रहना अनिवार्य होगा। नियमों का पालन न करने वाले अधीक्षकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और उन्हें पद से हटाया जा सकता है।सरकार ने यह निर्णय छात्रावासों में लगातार मिल रही शिकायतों और सुरक्षा से जुड़े मामलों को ध्यान में रखते हुए लिया है। वर्तमान में कई अधीक्षक मूल रूप से शिक्षक हैं, जो न तो नियमित रूप से पढ़ा रहे हैं और न ही छात्रावासों में पर्याप्त समय दे रहे हैं। बच्चों के हित में उचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए नई अधीक्षक कैडर प्रणाली लागू करने की तैयारी की जा रही है। योजना के तहत अगले कुछ वर्षों में चरणबद्ध तरीके से पूर्णकालिक अधीक्षकों की नियुक्ति की जाएगी, जबकि मौजूदा शिक्षक अधीक्षक अपने मूल शिक्षण कार्य में लौटेंगे।
    छात्राओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सरकार ने तय किया है कि प्रत्येक छात्रावास में अधीक्षक के लिए आवासीय व्यवस्था होगी। अधीक्षक को बच्चों के साथ ही परिसर में रुकना होगा, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई की जा सके। इसके साथ ही संभाग स्तर पर विशेष निगरानी टीमें बनाई जाएंगी, जो छात्रावासों का औचक निरीक्षण करेंगी और व्यवस्थाओं की रिपोर्ट तैयार करेंगी।तकनीकी निगरानी को भी मजबूत किया जाएगा। प्रदेश के लगभग 2500 जनजातीय छात्रावासों में सीसीटीवी कैमरे और बायोमेट्रिक/थंब इम्प्रेशन सिस्टम लगवाए जाएंगे। इससे यह रिकॉर्ड रखा जा सकेगा कि कौन व्यक्ति कब छात्रावास में आया और कब गया। इसके अलावा, भोजन की गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए रोजाना परोसी जाने वाली थाली की तस्वीर भेजना भी अनिवार्य किया जाएगा।
    इस बीच, भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री परिसर की जमीन को लेकर सरकार ने स्पष्ट किया कि इसका अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री स्तर पर ही लिया जाएगा। लंबे समय से लंबित कचरा निष्पादन की प्रक्रिया को पूरा करना सरकार की बड़ी उपलब्धियों में से एक माना जा रहा है।सरकार ने यह भी निर्देश दिया है कि आगामी शिक्षा सत्र से पहले किसी भी छात्रावास में बिना पुलिस सत्यापन के कोई कर्मचारी नियुक्त नहीं होगा। सुरक्षा गार्ड से लेकर अन्य स्टाफ की पृष्ठभूमि जांच अनिवार्य होगी।
    इसके अलावा, जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा के विस्तार पर भी जोर दिया जा रहा है। प्रत्येक विकासखंड में आधुनिक सुविधाओं वाले स्कूल, छात्रावास और सांस्कृतिक केंद्र विकसित करने की योजना है। इसका उद्देश्य बच्चों और युवाओं को बेहतर शिक्षा, सुरक्षित आवास और सांस्कृतिक गतिविधियों के अवसर प्रदान करना है।सुरक्षा, अनुशासन और शिक्षा के इस सुधार से यह उम्मीद जताई जा रही है कि प्रदेश के छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों को सुरक्षित वातावरण मिलेगा और उनकी पढ़ाई पर भी ध्यान केंद्रित किया जा सकेगा। सरकार का कहना है कि इस कदम से छात्राओं और छात्रों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं की संभावना न्यूनतम होगी।