Tag: Madhya Pradesh Forest Department

  • इंदौर की लकड़ी मंडी में बड़ा खेल! शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई, राज्य स्तरीय टीम ने पकड़े बिना टीपी और फर्जी दस्तावेज वाले वाहन

    इंदौर की लकड़ी मंडी में बड़ा खेल! शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई, राज्य स्तरीय टीम ने पकड़े बिना टीपी और फर्जी दस्तावेज वाले वाहन


    इंदौर । इंदौर के धार रोड स्थित जीएनटी टिम्बर मार्केट में अवैध वनोपज के कारोबार को लेकर वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। करीब तीन महीने पहले ही विभाग के अधिकारियों को शिकायत मिली थी कि मार्केट और आसपास के इलाकों में बिना ट्रांजिट परमिट यानी टीपी के लकड़ी और अन्य वनोपज लाई जा रही है। शिकायतों को गंभीर मानते हुए इंदौर डीएफओ ने सात रात्रि गश्ती दल भी गठित किए थे। इन दलों को अलग-अलग दिनों में जीएनटी मार्केट और आसपास के क्षेत्रों में निगरानी कर अवैध परिवहन रोकने की जिम्मेदारी दी गई थी। इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर कोई बड़ी कार्रवाई सामने नहीं आई और आखिरकार राज्य स्तरीय उड़न दस्ते को इंदौर आकर कार्रवाई करनी पड़ी।

    वन विभाग की ओर से 15 मई को जारी आदेश में साफ तौर पर कहा गया था कि सीएम हेल्पलाइन फोन और अन्य माध्यमों से लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि जीएनटी मार्केट में बिना टीपी अवैध वनोपज लाई जा रही है और उसका कारोबार किया जा रहा है। इसके बाद सात टीमों को रात में गश्त करने और यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए थे कि बिना वैध दस्तावेज के कोई वनोपज इंदौर में प्रवेश न कर सके। प्रत्येक टीम को सप्ताह में एक दिन रात्रि गश्त करनी थी। यानी विभाग को शिकायत की जानकारी भी थी और निगरानी के लिए बाकायदा व्यवस्था भी बनाई गई थी लेकिन अवैध कारोबार पर प्रभावी अंकुश नहीं लग सका।

    मामला राज्य स्तर तक पहुंचने के बाद भोपाल से राज्य स्तरीय उड़न दस्ता इंदौर पहुंचा। टीम ने धार रोड स्थित जीएनटी टिम्बर मार्केट में कार्रवाई करते हुए बबूल की लकड़ी से भरे दो वाहनों को पकड़ा। जांच के दौरान एक वाहन का चालक लकड़ी के परिवहन से संबंधित टीपी पेश नहीं कर सका। दूसरे वाहन में महाराष्ट्र के जलगांव की टीपी दिखाई गई लेकिन जांच में उसे फर्जी पाया गया। टीम ने दस्तावेज को स्कैन कर तैयार की गई फर्जी टीपी बताया। दोनों वाहनों को जब्त कर वन विभाग के नवरत्न बाग स्थित कार्यालय भेज दिया गया।

    इस कार्रवाई के दौरान स्थानीय वन अमले को पहले से शामिल नहीं किया गया था। राज्य स्तरीय टीम के साथ उज्जैन और देवास के वन कर्मचारी भी मौजूद रहे। टीम ने जीएनटी मार्केट की जालाराम इंटरप्राइजेस की आरा मशीन की भी जांच की। करीब दो घंटे तक दस्तावेज और रिकॉर्ड खंगालने के बाद मशीन को सील कर दिया गया।

    प्रारंभिक जांच में यह आशंका भी सामने आई है कि अलग-अलग राज्यों की टीपी का इस्तेमाल कर मध्यप्रदेश की लकड़ी को दूसरे राज्यों से लाई गई वनोपज के रूप में दिखाया जा रहा हो सकता है। महाराष्ट्र तेलंगाना गुजरात राजस्थान और उत्तर प्रदेश की टीपी के जरिए लकड़ी के परिवहन की शिकायतें जांच के दायरे में हैं। यह भी आरोप सामने आते रहे हैं कि एक ही टीपी के आधार पर अलग-अलग वाहनों में लकड़ी भेजी जाती है।

    जीएनटी मार्केट में बिना सील हैमर के लकड़ी से भरे वाहनों के पहुंचने की शिकायतें भी सामने आई हैं। आरोप है कि ऐसी लकड़ी को आरा मशीनों में चीरकर गुटके और फाचरे तैयार किए जाते हैं और फिर उन्हें इंदौर की नगरीय सीमा से बाहर भेज दिया जाता है। अब राज्य स्तरीय टीम इन सभी पहलुओं की जांच कर रही है।

    डीएफओ इंदौर लालसुधाकर सिंह के मुताबिक बिना वैध दस्तावेज के वनोपज का परिवहन अवैध माना जाता है और ऐसे मामलों में वाहन तथा संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब विभाग को तीन महीने पहले ही अवैध कारोबार की सूचना मिल चुकी थी और सात गश्ती दल निगरानी में लगाए गए थे तो राज्य स्तरीय टीम की कार्रवाई से पहले स्थानीय स्तर पर प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हो सकी। जांच आगे बढ़ने के साथ इस सवाल का जवाब भी सामने आने की उम्मीद है।

  • पन्ना के 'जंगल रत्न' बने नेशनल हीरो: पीएम मोदी ने 'मन की बात' में की बीट गार्ड जगदीश अहिरवार की सराहना

    पन्ना के 'जंगल रत्न' बने नेशनल हीरो: पीएम मोदी ने 'मन की बात' में की बीट गार्ड जगदीश अहिरवार की सराहना


    पन्ना/नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व के एक साधारण से बीट गार्ड ने अपनी असाधारण लगन से पूरे देश का ध्यान खींचा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम मन की बात में पन्ना के वनकर्मी जगदीश प्रसाद अहिरवार के कार्यों की विशेष रूप से चर्चा की। पीएम ने जगदीश के ‘औषधीय ज्ञान’ और प्रकृति के प्रति उनके समर्पण को देश के लिए एक बड़ी प्रेरणा बताया है।जमीनी स्तर पर काम करने वाले एक वनकर्मी को राष्ट्रीय स्तर पर मिली यह पहचान न केवल पन्ना जिले, बल्कि पूरे मध्य प्रदेश के वन विभाग के लिए गौरव का विषय है।

    जगदीश का औषधीय खजाना सवा सौ पौधों की पहचान

    प्रधानमंत्री ने देश को बताया कि जगदीश प्रसाद अहिरवार ने अपने वन सेवा कार्यकाल के दौरान केवल ड्यूटी ही नहीं की बल्कि जंगलों को एक चलती-फिरती ‘किताब’ की तरह पढ़ा। अद्भुत संकलन जगदीश ने पन्ना के जंगलों में पाए जाने वाले 125 सवा सौ से अधिक औषधीय पौधों की पहचान की। विस्तृत शोध उन्होंने इन पौधों के केवल नाम ही नहीं जुटाए, बल्कि उनके वैज्ञानिक नाम, स्थानीय उपयोग, औषधीय गुण और पारंपरिक उपचार पद्धतियों को व्यवस्थित रूप से दर्ज किया। जमीनी मेहनत: यह कार्य किसी लैब में नहीं, बल्कि वर्षों तक जंगल की पगडंडियों पर चलने, स्थानीय जानकारों से संवाद करने और निरंतर अवलोकन करने का परिणाम है।

    पीएम मोदी ने क्यों की तारीफ

    प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि जगदीश जैसे कर्मठ लोग हमारी पारंपरिक चिकित्सा पद्धति और जैव-विविधता के संरक्षण के असली प्रहरी हैं। प्रधानमंत्री ने कहा जगदीश प्रसाद जी ने जंगलों की जिस संपदा को दस्तावेजों में सहेजा है, वह हमारी आने वाली पीढ़ियों और आयुर्वेद के क्षेत्र में काम करने वाले शोधकर्ताओं के लिए बहुत कीमती है।

    वनकर्मियों के योगदान को मिली नई पहचान

    अक्सर बीट गार्ड जैसे निचले स्तर के कर्मचारी गुमनामी में रहकर जंगलों और वन्यजीवों की रक्षा करते हैं। जगदीश अहिरवार का उल्लेख होने से पूरे देश के वनकर्मियों का मनोबल बढ़ा है। पन्ना के अधिकारियों के अनुसार, जगदीश का यह ज्ञान अब स्थानीय स्तर पर लोगों को जड़ी-बूटियों के प्रति जागरूक करने में काम आ रहा है।

  • पन्ना टाइगर रिजर्व के पास खौफ: वन्यजीव के हमले में 12 साल के मासूम की मौत, ग्रामीणों में भारी दहशत

    पन्ना टाइगर रिजर्व के पास खौफ: वन्यजीव के हमले में 12 साल के मासूम की मौत, ग्रामीणों में भारी दहशत

    पन्ना। मध्यप्रदेश के पन्ना जिले से एक हृदयविदारक खबर सामने आई है, जहाँ टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र से सटे एक गांव में वन्यजीव के जानलेवा हमले ने एक मासूम की जान ले ली। शुक्रवार की सुबह ग्राम जरधोवा में उस वक्त चीख-पुकार मच गई, जब 12 साल के एक बच्चे पर किसी अज्ञात शिकारी वन्यजीव ने अचानक हमला कर दिया। इस हमले में बच्चा गंभीर रूप से घायल हो गया और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद से पूरे इलाके में सन्नाटा पसरा हुआ है और लोग घरों से बाहर निकलने में डर रहे हैं।

    यह दुखद घटना पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र की सीमा से लगे जरधोवा गांव की है। बताया जा रहा है कि बच्चा सुबह जब गांव के बाहरी हिस्से के पास था, तभी झाड़ियों में छिपे किसी हिंसक जानवर ने उस पर झपट्टा मार दिया। शोर सुनकर जब तक ग्रामीण मौके पर पहुंचे, तब तक वन्यजीव बच्चे को लहूलुहान कर जंगल की ओर भाग चुका था। घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग और पुलिस प्रशासन की टीमें सक्रिय हो गई हैं।

    वन अधिकारी अपनी टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंच चुके हैं और बारीकी से साक्ष्य जुटा रहे हैं। विभाग के विशेषज्ञों द्वारा मौके पर मिले पगमार्क की जांच की जा रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि हमला तेंदुए ने किया है, बाघ ने या किसी अन्य जंगली जानवर ने। वन अधिकारियों का कहना है कि हमले की परिस्थितियों का आकलन किया जा रहा है और हमलावर जानवर की पहचान के लिए गश्त बढ़ा दी गई है।

    इस घटना ने एक बार फिर ‘इंसान और वन्यजीव’ के बीच बढ़ते संघर्ष को उजागर कर दिया है। पन्ना टाइगर रिजर्व के करीब स्थित गांवों में जंगली जानवरों की हलचल अक्सर देखी जाती है, लेकिन इस जानलेवा हमले ने ग्रामीणों के सब्र का बांध तोड़ दिया है। ग्रामीण प्रशासन से सुरक्षा के कड़े इंतजाम करने और पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं। फिलहाल, वन विभाग ने आसपास के ग्रामीणों को जंगल की सीमा की ओर न जाने और समूह में रहने की सख्त हिदायत दी है।