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  • पन्ना के 'जंगल रत्न' बने नेशनल हीरो: पीएम मोदी ने 'मन की बात' में की बीट गार्ड जगदीश अहिरवार की सराहना

    पन्ना के 'जंगल रत्न' बने नेशनल हीरो: पीएम मोदी ने 'मन की बात' में की बीट गार्ड जगदीश अहिरवार की सराहना


    पन्ना/नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व के एक साधारण से बीट गार्ड ने अपनी असाधारण लगन से पूरे देश का ध्यान खींचा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम मन की बात में पन्ना के वनकर्मी जगदीश प्रसाद अहिरवार के कार्यों की विशेष रूप से चर्चा की। पीएम ने जगदीश के ‘औषधीय ज्ञान’ और प्रकृति के प्रति उनके समर्पण को देश के लिए एक बड़ी प्रेरणा बताया है।जमीनी स्तर पर काम करने वाले एक वनकर्मी को राष्ट्रीय स्तर पर मिली यह पहचान न केवल पन्ना जिले, बल्कि पूरे मध्य प्रदेश के वन विभाग के लिए गौरव का विषय है।

    जगदीश का औषधीय खजाना सवा सौ पौधों की पहचान

    प्रधानमंत्री ने देश को बताया कि जगदीश प्रसाद अहिरवार ने अपने वन सेवा कार्यकाल के दौरान केवल ड्यूटी ही नहीं की बल्कि जंगलों को एक चलती-फिरती ‘किताब’ की तरह पढ़ा। अद्भुत संकलन जगदीश ने पन्ना के जंगलों में पाए जाने वाले 125 सवा सौ से अधिक औषधीय पौधों की पहचान की। विस्तृत शोध उन्होंने इन पौधों के केवल नाम ही नहीं जुटाए, बल्कि उनके वैज्ञानिक नाम, स्थानीय उपयोग, औषधीय गुण और पारंपरिक उपचार पद्धतियों को व्यवस्थित रूप से दर्ज किया। जमीनी मेहनत: यह कार्य किसी लैब में नहीं, बल्कि वर्षों तक जंगल की पगडंडियों पर चलने, स्थानीय जानकारों से संवाद करने और निरंतर अवलोकन करने का परिणाम है।

    पीएम मोदी ने क्यों की तारीफ

    प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि जगदीश जैसे कर्मठ लोग हमारी पारंपरिक चिकित्सा पद्धति और जैव-विविधता के संरक्षण के असली प्रहरी हैं। प्रधानमंत्री ने कहा जगदीश प्रसाद जी ने जंगलों की जिस संपदा को दस्तावेजों में सहेजा है, वह हमारी आने वाली पीढ़ियों और आयुर्वेद के क्षेत्र में काम करने वाले शोधकर्ताओं के लिए बहुत कीमती है।

    वनकर्मियों के योगदान को मिली नई पहचान

    अक्सर बीट गार्ड जैसे निचले स्तर के कर्मचारी गुमनामी में रहकर जंगलों और वन्यजीवों की रक्षा करते हैं। जगदीश अहिरवार का उल्लेख होने से पूरे देश के वनकर्मियों का मनोबल बढ़ा है। पन्ना के अधिकारियों के अनुसार, जगदीश का यह ज्ञान अब स्थानीय स्तर पर लोगों को जड़ी-बूटियों के प्रति जागरूक करने में काम आ रहा है।

  • पन्ना टाइगर रिजर्व के पास खौफ: वन्यजीव के हमले में 12 साल के मासूम की मौत, ग्रामीणों में भारी दहशत

    पन्ना टाइगर रिजर्व के पास खौफ: वन्यजीव के हमले में 12 साल के मासूम की मौत, ग्रामीणों में भारी दहशत

    पन्ना। मध्यप्रदेश के पन्ना जिले से एक हृदयविदारक खबर सामने आई है, जहाँ टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र से सटे एक गांव में वन्यजीव के जानलेवा हमले ने एक मासूम की जान ले ली। शुक्रवार की सुबह ग्राम जरधोवा में उस वक्त चीख-पुकार मच गई, जब 12 साल के एक बच्चे पर किसी अज्ञात शिकारी वन्यजीव ने अचानक हमला कर दिया। इस हमले में बच्चा गंभीर रूप से घायल हो गया और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद से पूरे इलाके में सन्नाटा पसरा हुआ है और लोग घरों से बाहर निकलने में डर रहे हैं।

    यह दुखद घटना पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र की सीमा से लगे जरधोवा गांव की है। बताया जा रहा है कि बच्चा सुबह जब गांव के बाहरी हिस्से के पास था, तभी झाड़ियों में छिपे किसी हिंसक जानवर ने उस पर झपट्टा मार दिया। शोर सुनकर जब तक ग्रामीण मौके पर पहुंचे, तब तक वन्यजीव बच्चे को लहूलुहान कर जंगल की ओर भाग चुका था। घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग और पुलिस प्रशासन की टीमें सक्रिय हो गई हैं।

    वन अधिकारी अपनी टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंच चुके हैं और बारीकी से साक्ष्य जुटा रहे हैं। विभाग के विशेषज्ञों द्वारा मौके पर मिले पगमार्क की जांच की जा रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि हमला तेंदुए ने किया है, बाघ ने या किसी अन्य जंगली जानवर ने। वन अधिकारियों का कहना है कि हमले की परिस्थितियों का आकलन किया जा रहा है और हमलावर जानवर की पहचान के लिए गश्त बढ़ा दी गई है।

    इस घटना ने एक बार फिर ‘इंसान और वन्यजीव’ के बीच बढ़ते संघर्ष को उजागर कर दिया है। पन्ना टाइगर रिजर्व के करीब स्थित गांवों में जंगली जानवरों की हलचल अक्सर देखी जाती है, लेकिन इस जानलेवा हमले ने ग्रामीणों के सब्र का बांध तोड़ दिया है। ग्रामीण प्रशासन से सुरक्षा के कड़े इंतजाम करने और पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं। फिलहाल, वन विभाग ने आसपास के ग्रामीणों को जंगल की सीमा की ओर न जाने और समूह में रहने की सख्त हिदायत दी है।