Tag: Madhya Pradesh gas shortage

  • एमपी में गैस संकट गहराया: रीवा में 2000 रुपए का सिलेंडर, भोपाल-इंदौर में लंबी कतारें, होटल-रेस्टोरेंट डीजल भट्ठी पर खाना बना रहे

    एमपी में गैस संकट गहराया: रीवा में 2000 रुपए का सिलेंडर, भोपाल-इंदौर में लंबी कतारें, होटल-रेस्टोरेंट डीजल भट्ठी पर खाना बना रहे


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में LPG संकट गंभीर रूप ले चुका है। रीवा में घरेलू सिलेंडर की कालाबाजारी का मामला सामने आया है, जहां 900 रुपए का सिलेंडर दलालों द्वारा 1700 से 2000 रुपए तक बेचा जा रहा है। राज्यभर में भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन, जबलपुर समेत कई शहरों में गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें लगी हैं।

    प्रदेश में पिछले तीन दिनों से कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई ठप है। घरेलू सिलेंडर की डिलीवरी में 5 से 7 दिन की देरी हो रही है। तेल कंपनियों का कहना है कि फिलहाल केवल 15% गैस ही उपलब्ध कराई जा रही है, जो मुख्य रूप से इमरजेंसी सेवाओं और घरों के लिए है।

    रीवा में उमेश शुक्ला जैसे उपभोक्ताओं ने बताया कि सुबह से कतार में लगे रहने के बावजूद सिलेंडर नहीं मिल पाया। दलाल महंगे दामों पर सिलेंडर बेच रहे हैं, जिससे आम उपभोक्ता मजबूरी में अधिक पैसे खर्च कर रहे हैं।

    कमर्शियल सिलेंडर अब केवल अस्पताल, सेना-पुलिस कैंटीन, रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट स्थित कैंटीन, बस स्टैंड के भोजनालय को ही मिलेगा। वहीं, होटल, मैरिज गार्डन और सराफा कारीगरों को सप्लाई नहीं हो पा रही। छिंदवाड़ा में शादियों के आयोजन के लिए रसोई गैस की कमी के कारण डीजल भट्ठियों पर खाना बनाना पड़ रहा है।

    भोपाल होटल एसोसिएशन के तेजकुल पाल सिंह पाली ने बताया कि राजधानी के डेढ़ हजार से अधिक होटल और रेस्टोरेंट हर रोज 2 से 2.5 हजार सिलेंडर उपयोग करते हैं। वर्तमान स्टॉक केवल 48 घंटे का ही काम चला पाएगा।

    सिर्फ सप्लाई की कमी ही नहीं, बल्कि घरेलू सिलेंडर के लिए भी लंबी वेटिंग है। भोपाल के कई इलाकों में सिलेंडर के लिए भाग-दौड़ और भीड़ देखी गई। इंदौर में कमर्शियल सिलेंडर के संकट के कारण होटल और रेस्टोरेंट लकड़ी, कंडा और कोयला जैसे पारंपरिक ईंधन पर खाना बना रहे हैं।

    मार्च में प्रदेश भर में 20,000 से अधिक शादियां आयोजित होने वाली हैं, जिनमें कमर्शियल सिलेंडर का भारी उपयोग होता है। सिलेंडर की कमी के कारण खाने की तैयारी में बाधा आ रही है। इसके अलावा, किराना और खाद्य सामग्री की कीमतों में भी तेजी आई है। हरी मूंग, मसूर, चना और ड्राई फ्रूट्स की कीमतों में 100 से 300 रुपए प्रति क्विंटल तक की बढ़ोतरी हुई है। पिस्ता, अंजीर, केसर और अन्य महंगे ड्राई फ्रूट्स की कीमतें भी बढ़ गई हैं।

    सरकार का कहना है कि घरेलू सिलेंडर की सप्लाई सामान्य है और पेट्रोलियम उत्पाद पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। केंद्र सरकार ने देशभर में ‘आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955’ लागू कर गैस कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के निर्देश दिए हैं।

    संकट से निपटने के लिए सरकार ने पांच अहम कदम उठाए हैं:

    हाई-लेवल कमेटी बनाई गई है जो सप्लाई की समीक्षा करेगी।

    एसेंशियल कमोडिटी एक्ट के तहत गैस की जमाखोरी पर रोक।

    घरेलू सिलेंडर की बुकिंग 25 दिन बाद ही होगी।

    डिलीवरी एजेंटों द्वारा OTP और बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन अनिवार्य।

    LPG उत्पादन बढ़ाने का आदेश, अतिरिक्त उत्पादन केवल घरेलू गैस के लिए।

    इधर, ऑयल कंपनियों की सप्लाई के बाद भी होटल और रेस्टोरेंट 48 घंटे के स्टॉक पर निर्भर हैं। सरकार की तरफ से लगातार आश्वासन मिलने के बावजूद आम उपभोक्ताओं और व्यवसायियों में चिंता बरकरार है।

  • रसोई से कारोबार तक असर: एमपी में LPG की भारी कमी, सिर्फ इमरजेंसी सेवाओं को सप्लाई

    रसोई से कारोबार तक असर: एमपी में LPG की भारी कमी, सिर्फ इमरजेंसी सेवाओं को सप्लाई



    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में एलपीजी गैस की कमी अब आम लोगों की रसोई तक पहुंचने लगी है। पिछले तीन दिनों से प्रदेश में कमर्शियल गैस सिलेंडरों की सप्लाई लगभग ठप पड़ी है, जबकि घरेलू सिलेंडर के लिए भी लोगों को 5 से 7 दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है। ऑयल कंपनियों के अनुसार फिलहाल प्रदेश में सिर्फ करीब 15 प्रतिशत एलपीजी ही उपलब्ध है, जिसे प्राथमिकता के आधार पर इमरजेंसी सेवाओं और घरेलू उपयोग के लिए रखा गया है। ऐसे में गुरुवार से प्रदेश में गैस संकट और गहराने की आशंका जताई जा रही है।

    कमर्शियल गैस की सीमित सप्लाई के कारण अब सिलेंडर केवल अस्पतालों, सेना और पुलिस की कैंटीन, रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट और बस स्टैंड की कैंटीन जैसे जरूरी स्थानों को ही दिए जाएंगे। इसके लिए खाद्य विभाग को जरूरत के हिसाब से ऑयल कंपनियों को सूची भेजनी होगी। दूसरी ओर होटल, रेस्टोरेंट, मैरिज गार्डन और छोटे कारोबारियों को फिलहाल कमर्शियल गैस नहीं मिल सकेगी। इससे खानपान और अन्य व्यवसायों पर बड़ा असर पड़ने की संभावना है।

    राजधानी भोपाल में होटल और रेस्टोरेंट संचालकों की चिंता बढ़ गई है। भोपाल होटल एसोसिएशन के अनुसार शहर में करीब डेढ़ हजार होटल और रेस्टोरेंट हैं, जहां रोजाना दो से ढाई हजार कमर्शियल सिलेंडर की खपत होती है। जिन संस्थानों के पास कुछ स्टॉक बचा है, वे अधिकतम 48 घंटे तक ही काम चला पाएंगे। इसके बाद गैस सप्लाई नहीं मिलने पर कई होटल और रेस्टोरेंट बंद करने की नौबत आ सकती है। होटल संचालकों ने सरकार से कमर्शियल गैस की आपूर्ति बहाल करने की मांग की है।

    सरकारी स्तर पर घरेलू गैस की सप्लाई सामान्य होने का दावा किया जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर और जबलपुर समेत कई शहरों में गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें देखी जा रही हैं। राजधानी के कई इलाकों में लोगों को सिलेंडर बुकिंग के बाद कई दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है। कुछ जगहों पर लोगों के बीच सिलेंडर को लेकर भाग-दौड़ की स्थिति भी बनी है।

    इस बीच अधिकारियों का कहना है कि अब एक सिलेंडर की बुकिंग के बाद अगली बुकिंग करीब 25 दिन बाद ही की जा सकेगी। साथ ही सर्वर की तकनीकी समस्या और कुछ लोगों द्वारा अतिरिक्त सिलेंडर जमा करने की वजह से भी एजेंसियों के बाहर भीड़ बढ़ रही है।

    गैस संकट का असर शादी समारोहों पर भी पड़ सकता है। मार्च महीने में प्रदेश में करीब 20 हजार से ज्यादा शादियां होने वाली हैं, जिनमें बड़े पैमाने पर कमर्शियल गैस सिलेंडर का इस्तेमाल होता है। पिछले तीन दिनों से सिलेंडर नहीं मिलने के कारण कैटरिंग और भोजन व्यवस्था करने वालों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

    उधर अंतरराष्ट्रीय हालात का असर भोपाल के बाजारों में भी दिखाई देने लगा है। व्यापारियों के अनुसार पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण कई खाद्य वस्तुओं और ड्राई फ्रूट्स के दाम बढ़ गए हैं। दालों की कीमतों में तेजी आई है, जबकि मिर्च और धनिया जैसे मसाले भी महंगे हुए हैं। पिस्ता, अंजीर और केसर जैसे ड्राई फ्रूट्स की कीमतों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है क्योंकि इनका आयात बड़े पैमाने पर ईरान के रास्ते होता है।

    कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर पैकेजिंग उद्योग पर भी पड़ा है। प्लास्टिक और पैकेजिंग से जुड़े सामानों के दामों में करीब 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी बताई जा रही है। वहीं खाद्य तेल के बाजार में भी तेजी देखी जा रही है। सोयाबीन तेल की कीमतों में पिछले पंद्रह दिनों में लगभग 14 रुपए प्रति किलो तक वृद्धि हुई है, जबकि मूंगफली तेल के 15 लीटर जार की कीमत भी तेजी से बढ़ी है।

    इधर गैस और जरूरी वस्तुओं की जमाखोरी रोकने के लिए केंद्र सरकार ने देशभर में आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 को लागू कर दिया है। इसके तहत गैस की सप्लाई को चार अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर वितरण की व्यवस्था की जा रही है, ताकि जरूरी सेवाओं और घरेलू उपयोग के लिए गैस की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।

    प्रदेश सरकार ने लोगों से घबराने की बजाय अधिकृत जानकारी पर भरोसा करने की अपील की है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी पेट्रोल, डीजल और गैस की उपलब्धता पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश अधिकारियों को दिए हैं।