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  • डिंडौरी में दशगात्र भोज करने के बाद 70 से ज्यादा ग्रामीण बीमार, फूड पॉइजनिंग की आशंका

    डिंडौरी में दशगात्र भोज करने के बाद 70 से ज्यादा ग्रामीण बीमार, फूड पॉइजनिंग की आशंका


    डिंडौरी। मध्य प्रदेश के डिंडौरी जिले के मेहंदवानी जनपद के ग्राम झामझोला में दशगात्र भोज के बाद बड़ा स्वास्थ्य संकट खड़ा हो गया। शुक्रवार रात आयोजित इस कार्यक्रम में खाना खाने के बाद 70 से अधिक ग्रामीणों की तबीयत बिगड़ गई जिन्हें अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।

    भोज के बाद देर रात शुरू हुई परेशानी

    ग्रामीणों के मुताबिक सुखचैन धुर्वे के घर आयोजित दशगात्र कार्यक्रम में रात करीब 10 बजे लोगों ने पूड़ी सब्जी दाल और चावल का भोजन किया। इसके बाद सभी अपने घर लौट गए लेकिन देर रात करीब 12 बजे से लोगों को उल्टी-दस्त की शिकायत शुरू हो गई। देखते ही देखते कई ग्रामीण बीमार पड़ गए।

    अस्पतालों में बढ़ी मरीजों की संख्या

    शनिवार सुबह से ही मरीजों का मेहंदवानी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचना शुरू हो गया। गंभीर स्थिति वाले कुछ मरीजों को मंडला जिले के मोहगांव अस्पताल रेफर किया गया है। डॉक्टरों के अनुसार सभी मरीज फिलहाल खतरे से बाहर हैं। घटना की सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग पुलिस और राजस्व विभाग की टीमें गांव पहुंच गईं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनोज पांडेय के निर्देश पर गांव में अस्थायी मेडिकल कैंप लगाकर इलाज शुरू किया गया। मरीजों को दवाइयां दी जा रही हैं और उनकी लगातार निगरानी की जा रही है।

    50 से ज्यादा मरीज मोहगांव में भर्ती

    स्वास्थ्य विभाग के अनुसार मोहगांव अस्पताल में 50 से अधिक मरीज भर्ती हैं जबकि मेहंदवानी अस्पताल में 20 से ज्यादा लोगों का इलाज चल रहा है। सभी ने एक ही भोज का खाना खाने की बात कही है जिससे भोजन में गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है। जिला प्रशासन ने भोज में परोसे गए भोजन के नमूने जांच के लिए भेज दिए हैं। शुरुआती तौर पर फूड पॉइजनिंग की संभावना जताई जा रही है हालांकि वास्तविक कारण रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा। प्रशासन ने ग्रामीणों से अपील की है कि तबीयत खराब होने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में इलाज कराएं। साथ ही गांव में साफ-सफाई और स्वच्छ पेयजल व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।

  • इंदौर में मौत का तांडव: दूषित पानी ने ली 26वीं जान, भागीरथपुरा में हाहाकार

    इंदौर में मौत का तांडव: दूषित पानी ने ली 26वीं जान, भागीरथपुरा में हाहाकार


    इंदौर। स्वच्छता में देश का सिरमौर रहने वाला इंदौर शहर इन दिनों एक भीषण जल-त्रासदी के दौर से गुजर रहा है। शहर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी के सेवन से हो रही मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। शुक्रवार को इस जानलेवा जल संकट ने एक और बुजुर्ग की बलि ले ली, जिससे क्षेत्र में अब तक मरने वालों का आंकड़ा बढ़कर 26 हो गया है। प्रशासन की तमाम कोशिशों और दावों के बीच लगातार हो रही ये मौतें अब शहर की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं।

    ताजा मामला 63 वर्षीय बद्री प्रसाद का है, जो पिछले कई दिनों से मौत और जिंदगी के बीच संघर्ष कर रहे थे। बताया जा रहा है कि दूषित पानी के कारण उन्हें गंभीर उल्टी-दस्त की शिकायत हुई थी, जिसके बाद 17 जनवरी को उन्हें अरविंदो अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बद्री प्रसाद पहले से ही टीबी की बीमारी से जूझ रहे थे और दूषित पानी के संक्रमण ने उनके शरीर को इतना कमजोर कर दिया कि शुक्रवार को इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। उनकी मृत्यु की खबर फैलते ही भागीरथपुरा क्षेत्र में मातम के साथ-साथ प्रशासन के खिलाफ आक्रोश और गहरा गया है।

    क्षेत्र में हालात अभी भी बेहद चिंताजनक बने हुए हैं। स्वास्थ्य विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, फिलहाल अरविंदो अस्पताल में 10 और मरीज भर्ती हैं, जो दूषित पानी के दुष्प्रभाव से जूझ रहे हैं। इनमें से एक मरीज की स्थिति अत्यंत नाजुक बताई जा रही है, जिसे वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि भर्ती मरीजों में से 8 ऐसे हैं जो पहले से ही किसी न किसी गंभीर बीमारी से ग्रस्त हैं, जिससे उन पर संक्रमण का असर अधिक घातक साबित हो रहा है।

    लगातार हो रही इन मौतों ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है, लेकिन जमीन पर स्थिति अब भी बेकाबू नजर आ रही है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि जल निकासी और पाइपलाइनों में लीकेज की समस्या को समय रहते ठीक नहीं किया गया, जिसका खामियाजा अब निर्दोष लोगों को अपनी जान देकर भुगतना पड़ रहा है। भागीरथपुरा की गलियों में अब भी डर का साया है और लोग नल से आने वाले पानी की हर बूंद को संदेह की नजर से देख रहे हैं।