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  • इंदौर में आज से सेमीकंडक्टर समिट का आगाज, ₹6200 करोड़ के निवेश प्रस्ताव पर टिकी नजरें, चिप से AI तक बनेगी रणनीति

    इंदौर में आज से सेमीकंडक्टर समिट का आगाज, ₹6200 करोड़ के निवेश प्रस्ताव पर टिकी नजरें, चिप से AI तक बनेगी रणनीति


    इंदौर । मध्य प्रदेश में सेमीकंडक्टर उद्योग को बढ़ावा देने और प्रदेश को इस क्षेत्र में नई पहचान दिलाने की दिशा में इंदौर में दो दिवसीय सेमीकंडक्टर समिट 2026 का आयोजन किया जा रहा है। शुक्रवार से ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में शुरू होने वाली इस समिट में देश की 50 से अधिक कंपनियां अपनी तकनीक उत्पाद और समाधान प्रदर्शित करेंगी। आयोजन का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए निवेश की संभावनाएं तलाशना और मध्य प्रदेश को इस क्षेत्र के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की रणनीति तैयार करना है। समिट में प्रस्तावित 6200 करोड़ रुपये के निवेश पर विशेष नजर रहेगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इस आयोजन में मध्य प्रदेश को सेमीकंडक्टर हब के रूप में विकसित करने का विजन प्रस्तुत करेंगे। वे प्रदर्शनी का अवलोकन करने के साथ उद्योग से जुड़े निवेशकों और कंपनियों के प्रतिनिधियों से वन-टू-वन बैठकें भी करेंगे। इन बैठकों में प्रदेश में निवेश की संभावनाओं तकनीकी सहयोग और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार करने जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। सरकार की कोशिश है कि इस आयोजन के जरिए निवेशकों को मध्य प्रदेश में उद्योग स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए।

    समिट का सबसे अहम पहलू पारस सेमीकंडक्टर्स की ओर से दिया गया करीब 6200 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्ताव है। कंपनी प्रदेश में सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्टिंग इकाई स्थापित करने की योजना के तहत यह प्रस्ताव लेकर आई है। यदि परियोजना आगे बढ़ती है तो इससे प्रदेश में सेमीकंडक्टर उद्योग से जुड़ी गतिविधियों को गति मिल सकती है। साथ ही इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन और संबंधित औद्योगिक क्षेत्रों के लिए नए अवसर पैदा होने की संभावना भी रहेगी। हालांकि प्रस्तावित निवेश को वास्तविक परियोजना में बदलने के लिए आगे की प्रक्रिया और फैसले महत्वपूर्ण होंगे।

    दो दिवसीय समिट में चिप डिजाइन से लेकर सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग तक कई अहम विषयों पर विचार-विमर्श होगा। एडवांस पैकेजिंग और टेस्टिंग इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अनुसंधान और तकनीकी नवाचार जैसे मुद्दे भी चर्चा के केंद्र में रहेंगे। उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ निवेशक विशेषज्ञ शिक्षाविद और स्टार्टअप से जुड़े लोग इसमें हिस्सा लेंगे। इन चर्चाओं का उद्देश्य उद्योग की जरूरतों को समझना और प्रदेश में सेमीकंडक्टर क्षेत्र के विकास के लिए संभावित रास्ते तलाशना है।

    समिट में लगने वाली प्रदर्शनी भी निवेश और कारोबारी साझेदारी के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसमें 50 से अधिक कंपनियां चिप डिजाइन पैकेजिंग और टेस्टिंग उपकरण तकनीकी सामग्री तथा इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण से संबंधित उत्पादों और क्षमताओं का प्रदर्शन करेंगी। इससे कंपनियों को संभावित निवेशकों और कारोबारी साझेदारों के साथ सीधे संपर्क स्थापित करने का अवसर मिलेगा। तकनीकी समाधान प्रदर्शित करने के साथ यह मंच उद्योग की जरूरतों और उपलब्ध क्षमताओं के बीच बेहतर तालमेल बनाने में मदद कर सकता है।

    राज्य सरकार सेमीकंडक्टर नीति 2025 के तहत इस क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करने पर जोर दे रही है। समिट के दौरान पैनल चर्चाओं और राउंडटेबल बैठकों में निवेश आकर्षित करने तकनीकी विशेषज्ञ तैयार करने और मजबूत सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम विकसित करने के उपायों पर मंथन होगा। इस उद्योग के विस्तार के लिए केवल निवेश ही नहीं बल्कि कुशल मानव संसाधन अनुसंधान और आधुनिक तकनीकी सुविधाएं भी जरूरी हैं। ऐसे में इंदौर में होने वाली यह समिट मध्य प्रदेश की औद्योगिक रणनीति के लिहाज से अहम अवसर है। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि चर्चाओं और निवेश प्रस्तावों से प्रदेश को कितने ठोस औद्योगिक अवसर मिलते हैं।

  • मोहन यादव ने मुंबई में किया बड़ा ऐलान, बीना से आष्टा तक फैलेगा पेट्रोकेमिकल उद्योग, 2040 तक देश को ट्रिलियन डॉलर इंडस्ट्री बनाने का लक्ष्य

    मोहन यादव ने मुंबई में किया बड़ा ऐलान, बीना से आष्टा तक फैलेगा पेट्रोकेमिकल उद्योग, 2040 तक देश को ट्रिलियन डॉलर इंडस्ट्री बनाने का लक्ष्य


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश में औद्योगिक विकास को गति देने के लिए पेट्रोकेमिकल क्षेत्र में बड़े निवेश की तैयारी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मुंबई में आयोजित इंडिया केम 2026 के उद्घाटन सत्र में बताया कि बीना में 50 हजार करोड़ रुपये की लागत से डाउनस्ट्रीम पेट्रोकेमिकल परियोजना विकसित की जाएगी। इस परियोजना से हर साल 22 लाख टन से अधिक पेट्रोकेमिकल उत्पाद तैयार करने का लक्ष्य है। इससे प्लास्टिक पैकेजिंग फार्मा टेक्सटाइल और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों को जरूरी कच्चा माल उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। साथ ही प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियां बढ़ने और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर बनने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री के मुताबिक ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के बाद मध्यप्रदेश में करीब 12 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों को जमीन पर उतारने की दिशा में काम आगे बढ़ाया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव गुरुवार को मुंबई के बॉम्बे एग्जिबिशन सेंटर में आयोजित तीन दिवसीय इंडिया केम 2026 के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल भी मौजूद रहे। इस आयोजन में देश और विदेश के रसायन पेट्रोकेमिकल पॉलिमर तथा एग्रोकेमिकल उद्योगों से जुड़े प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान रसायन उद्योग से संबंधित रिपोर्ट और शोध सामग्री का विमोचन भी किया गया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश में उद्योगों की स्थापना के लिए बिजली पानी जमीन और औद्योगिक सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। बीना की परियोजना के साथ विजयपुर में गेल के गैस प्रसंस्करण ढांचे और सीहोर जिले के आष्टा में गेल इंडिया की पेट्रोकेमिकल परियोजना का भी उल्लेख किया गया। इन परियोजनाओं से प्रदेश में पेट्रोकेमिकल और उससे जुड़े उद्योगों के विकास की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। सरकार का प्रयास है कि बड़े उद्योगों के साथ छोटे और मध्यम उद्यमों को भी विकास के अवसर मिलें।

    प्रदेश में प्लास्टिक और पॉलिमर आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए रायसेन जिले के तामोट में 121 एकड़ और ग्वालियर के बिलोवा में 93 एकड़ क्षेत्र में प्लास्टिक पार्क विकसित किए गए हैं। इन पार्कों के जरिए संबंधित क्षेत्रों में औद्योगिक इकाइयों को प्रोत्साहित करने की योजना है। इसके अलावा पीएम मित्रा पार्क के माध्यम से टेक्सटाइल उद्योग को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री के अनुसार उद्योगों के लिए सरल और पारदर्शी व्यवस्था बनाने के साथ बिजली पानी और जमीन जैसी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है।

    डॉ. यादव ने देश के रसायन और पेट्रोकेमिकल उद्योग की विकास संभावनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2014 में इस क्षेत्र का बाजार करीब 120 अरब डॉलर का था जो अब दोगुने से अधिक हो चुका है। उन्होंने वर्ष 2040 तक भारत के रसायन एवं पेट्रोकेमिकल क्षेत्र को एक ट्रिलियन डॉलर का उद्योग बनाने के लक्ष्य में मध्यप्रदेश की भागीदारी की बात कही। वैश्विक तनाव कच्चे तेल की कीमतों में उतार चढ़ाव और आपूर्ति शृंखला में व्यवधान के बीच घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने को महत्वपूर्ण बताया गया।

    कार्यक्रम में केंद्रीय राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल ने रसायन उद्योग में सुरक्षा गुणवत्ता और कारोबार सुगमता पर जोर दिया। उन्होंने खतरनाक रसायनों के सुरक्षित संचालन के लिए कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने और गुणवत्ता नियंत्रण मानकों को लागू करने से जुड़े प्रयासों की जानकारी दी। साथ ही छोटे और मध्यम उद्योगों पर इन नियमों के प्रभाव को ध्यान में रखने की जरूरत बताई। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि राज्यों के बीच निवेश आकर्षित करने के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है। उन्होंने महाराष्ट्र में रसायन उद्योग की भूमिका और नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की योजनाओं का भी उल्लेख किया।

    बीना की प्रस्तावित परियोजना से मध्यप्रदेश में पेट्रोकेमिकल आधारित उद्योगों के लिए नई संभावनाएं बन सकती हैं। हालांकि निवेश प्रस्तावों को वास्तविक उत्पादन और रोजगार में बदलने के लिए परियोजना का क्रियान्वयन जरूरी होगा। आने वाले समय में इसकी प्रगति प्रदेश के औद्योगिक विकास पर महत्वपूर्ण असर डाल सकती है।

  • भोपाल से इंदौर और जबलपुर तक उद्योगों का नया नेटवर्क, 30 दिन में बनेगी कंपनी, 3 लाख करोड़ के निवेश की तैयारी

    भोपाल से इंदौर और जबलपुर तक उद्योगों का नया नेटवर्क, 30 दिन में बनेगी कंपनी, 3 लाख करोड़ के निवेश की तैयारी


    भोपाल । मध्यप्रदेश में औद्योगिक विकास और निवेश को बढ़ावा देने के लिए जबलपुर-इंदौर इकोनॉमिक कॉरिडोर परियोजना को आगे बढ़ाने की तैयारी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में कॉरिडोर के एकीकृत विकास के लिए नई कंपनी के गठन को मंजूरी दी गई है। जबलपुर-इंदौर इकोनॉमिक कॉरिडोर डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड राज्य शासन के स्वामित्व में काम करेगी। सरकार कंपनी को शुरुआती अंश पूंजी के रूप में 100 करोड़ रुपए देगी। इसका उद्देश्य उद्योगों के लिए नियोजित औद्योगिक क्षेत्र विकसित करना निवेश आकर्षित करना और रोजगार के नए अवसर तैयार करना है।

    कैबिनेट में प्रस्तुत योजना के मुताबिक जबलपुर भोपाल और इंदौर को जोड़ने वाले इस कॉरिडोर में पहले चरण के दौरान 10 हजार एकड़ क्षेत्र में तीन से पांच प्राथमिक औद्योगिक हब विकसित किए जाएंगे। सरकार ने मार्च 2028 तक एक लाख करोड़ रुपए से अधिक का निवेश आकर्षित करने का लक्ष्य रखा है। इससे एक लाख प्रत्यक्ष और दो लाख से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना जताई गई है। योजना के अगले तीन वर्षों में तीन लाख करोड़ रुपए से अधिक निवेश आकर्षित करने और छह लाख से ज्यादा रोजगार के अवसर तैयार करने का लक्ष्य भी रखा गया है। ये सभी आंकड़े फिलहाल सरकार की प्रस्तावित योजना और अनुमानित लक्ष्यों का हिस्सा हैं।

    कॉरिडोर में विकसित होने वाले औद्योगिक हब को प्लग एंड प्ले सुविधा के आधार पर तैयार किया जाएगा। इसका मतलब है कि निवेशकों को उद्योग शुरू करने के लिए जरूरी बुनियादी सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराने की कोशिश होगी। इनमें जमीन बिजली पानी सड़क सीवरेज और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसी सुविधाएं शामिल होंगी। इसके अलावा श्रमिकों के लिए आवास अस्पताल स्कूल कौशल विकास केंद्र और हरित क्षेत्र विकसित करने की भी योजना है। इन सुविधाओं के माध्यम से औद्योगिक क्षेत्रों को बेहतर तरीके से व्यवस्थित किया जा सकेगा और उद्योग लगाने वाली कंपनियों को शुरुआती तैयारियों में मदद मिलने की उम्मीद है।

    परियोजना से प्रदेश के सात जिलों में औद्योगिक गतिविधियां बढ़ाने की योजना है। इनमें जबलपुर नरसिंहपुर रायसेन भोपाल सीहोर देवास और इंदौर शामिल हैं। इन क्षेत्रों में इंजीनियरिंग मैन्युफैक्चरिंग रक्षा और एयरोस्पेस लॉजिस्टिक्स फूड प्रोसेसिंग वेयरहाउसिंग आईटी इलेक्ट्रॉनिक्स और तकनीकी सेवाओं जैसे क्षेत्रों में निवेश की संभावनाएं तलाशी जाएंगी। पर्यटन और सहायक औद्योगिक इकाइयों को भी बढ़ावा देने की योजना का हिस्सा बताया गया है। इससे स्थानीय कारोबार और संबंधित सेवाओं को भी लाभ मिलने की संभावना है।

    सरकार ने परियोजना के लिए समयसीमा भी तय की है। कैबिनेट में दी गई जानकारी के अनुसार अगले 30 दिनों में नई कंपनी का गठन करने का लक्ष्य है। छह महीने के भीतर पूरे कॉरिडोर की जीआईएस मैपिंग और लैंड बैंक तैयार किया जाएगा। इसके बाद एक साल के भीतर प्राथमिक औद्योगिक हब का मास्टर प्लान और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार कर भूमि आवंटन की प्रक्रिया शुरू करने की योजना है। कंपनी उद्योगों के लिए जमीन और बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था तथा निवेश आकर्षित करने पर ध्यान देगी। सड़क निर्माण की जिम्मेदारी संबंधित एजेंसियों के पास रहेगी।

    नई कंपनी मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम यानी एमपीआईडीसी से अलग भूमिका निभाएगी। एमपीआईडीसी प्रदेश के अन्य औद्योगिक क्षेत्रों के विकास का काम जारी रखेगा जबकि नई कंपनी सात जिलों में फैली इस विशेष कॉरिडोर परियोजना पर केंद्रित रहेगी। भूमि व्यवस्था के मामले में पहले सरकारी जमीन को प्राथमिकता देने की बात कही गई है। आवश्यकता पड़ने पर निजी भूमि सहमति से खरीदने या कानून के अनुसार अधिग्रहण की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। प्रभावित परिवारों को नियमानुसार मुआवजा और पुनर्वास देने की बात भी कही गई है। वन भूमि वाले क्षेत्रों में जरूरी सरकारी स्वीकृतियों और वनीकरण की प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही काम आगे बढ़ सकेगा।

  • MP में खुलेंगे निवेश और रोजगार के नए रास्ते, जबलपुर से उज्जैन तक उद्योगों की नजर, धार में ₹7500 करोड़ की परियोजना प्रस्तावित

    MP में खुलेंगे निवेश और रोजगार के नए रास्ते, जबलपुर से उज्जैन तक उद्योगों की नजर, धार में ₹7500 करोड़ की परियोजना प्रस्तावित


    भोपाल । मध्यप्रदेश में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने की दिशा में सरकार लगातार बड़े औद्योगिक समूहों के साथ चर्चा कर रही है। मुंबई में आयोजित मध्यप्रदेश में निवेश की संभावनाओं पर संवाद कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कई प्रमुख उद्योगपतियों से मुलाकात कर प्रदेश में नए निवेश की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की। इस दौरान RPG ग्रुप ने विद्युत पारेषण टायर निर्माण और आईटी क्षेत्र में निवेश की संभावनाएं तलाशने में रुचि दिखाई। वहीं वेलस्पन समूह ने पाइप निर्माण टेक्निकल टेक्सटाइल और अधोसंरचना क्षेत्र में निवेश पर चर्चा की। इसके अलावा भिलोसा इंडस्ट्रीज ने धार के पीएम मित्र पार्क में चरणबद्ध तरीके से ₹7500 करोड़ के निवेश का प्रस्ताव रखा है।

    RPG ग्रुप के अध्यक्ष हर्ष गोयनका के साथ हुई चर्चा में जबलपुर में विद्युत पारेषण क्षेत्र में निवेश की संभावना पर विशेष रूप से बातचीत हुई। कंपनी ने मध्यप्रदेश की औद्योगिक सुविधाओं कुशल कार्यबल और भौगोलिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए नई औद्योगिक इकाइयां स्थापित करने में रुचि दिखाई। टायर निर्माण इकाई के लिए रतलाम सागर और जबलपुर जैसे शहरों की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। कंपनी इन क्षेत्रों में उपलब्ध औद्योगिक सुविधाओं और अन्य आवश्यकताओं का आकलन करने के बाद आगे की प्रक्रिया पर निर्णय ले सकती है।

    आईटी क्षेत्र में निवेश के लिए उज्जैन को भी संभावित स्थान के तौर पर देखा जा रहा है। RPG समूह की टीम संभावित स्थलों का दौरा कर सुविधाओं और कारोबारी संभावनाओं का आकलन करेगी। इस दौरान उज्जैन के आईटी बिल्ट अप पार्क में उपलब्ध प्लग एंड प्ले सुविधाओं के इस्तेमाल की संभावना पर भी चर्चा हुई। इससे कंपनी को तैयार बुनियादी ढांचे के जरिए अपनी आईटी गतिविधियां शुरू करने में मदद मिल सकती है।

    इसके बाद मुख्यमंत्री ने वेलस्पन एंटरप्राइजेज के प्रबंध निदेशक संदीप गर्ग से मुलाकात की। बैठक में पाइप निर्माण टेक्निकल टेक्सटाइल और अधोसंरचना क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा हुई। वेलस्पन समूह ने मिल की जमीन पर टेक्निकल टेक्सटाइल पार्क विकसित करने में रुचि दिखाई है। समूह की ओर से पार्क में एंकर यूनिट स्थापित करने का प्रस्ताव भी सामने आया। कंपनी अपनी टीम भेजकर प्रस्तावित स्थल का निरीक्षण करेगी।

    बैठक में वेलस्पन कॉर्प की एमएस लाइन पाइप क्षेत्र में ₹150 करोड़ के निवेश प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। इसके साथ ही सिंटेक्स के करीब ₹700 करोड़ के प्रगतिरत निवेश का उल्लेख किया गया। रायसेन और देवास में समूह की मौजूदगी को देखते हुए पाइप और टेक्सटाइल गतिविधियों के विस्तार की संभावनाएं भी तलाशी गईं। सड़क निर्माण और जल एवं अपशिष्ट जल प्रबंधन परियोजनाओं में समूह की भागीदारी पर भी बातचीत हुई।

    इसी निवेश संवाद में भिलोसा इंडस्ट्रीज ने धार के पीएम मित्र पार्क में बड़ी परियोजना स्थापित करने का प्रस्ताव रखा। कंपनी चरणबद्ध तरीके से करीब ₹7500 करोड़ का निवेश करने की योजना पर काम कर रही है। शुरुआती चरण में ₹2500 करोड़ का पूंजी निवेश प्रस्तावित है। परियोजना के लिए 200 एकड़ जमीन टेक्सटाइल निर्माण और 100 एकड़ जमीन सहायक इकाइयों के लिए प्रस्तावित है। उत्पादन वर्ष 2028 से शुरू करने का लक्ष्य बताया गया है।

    प्रस्तावित परियोजना में पॉलिएस्टर यार्न फाइबर निटेड फैब्रिक और मैन मेड फाइबर आधारित नॉन गारमेंट फैब्रिक का उत्पादन किया जाएगा। इससे धार और इंदौर क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों के साथ रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है। प्रस्ताव के अनुसार परियोजना से करीब 3750 प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है।

    इन निवेश प्रस्तावों को आगे बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने और एकल खिड़की व्यवस्था के जरिए अनुमतियों को आसान बनाने की बात कही है। यदि प्रस्तावित परियोजनाएं आगे बढ़ती हैं तो मध्यप्रदेश में ऊर्जा टेक्सटाइल आईटी पाइप और अधोसंरचना जैसे कई क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार हो सकता है।

  • चिप डिजाइन से GCC और ड्रोन तक MP में निवेश की तैयारी: बेंगलुरु में मिले ₹1200 करोड़ के प्रस्ताव निवेशकों को सरकार देगी जमीन

    चिप डिजाइन से GCC और ड्रोन तक MP में निवेश की तैयारी: बेंगलुरु में मिले ₹1200 करोड़ के प्रस्ताव निवेशकों को सरकार देगी जमीन


    भोपाल । मध्यप्रदेश में निवेश बढ़ाने की दिशा में सरकार को बेंगलुरु में आयोजित निवेशक संवाद से बड़ी प्रतिक्रिया मिली है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 22 सितंबर को बेंगलुरु में उद्योगपतियों और प्रमुख निवेशकों के साथ वन-टू-वन बैठकें कीं। इन मुलाकातों के दौरान मध्यप्रदेश के लिए 1200 करोड़ रुपए से अधिक के नए निवेश प्रस्ताव सामने आए। खास बात यह रही कि निवेशकों की रुचि केवल पारंपरिक उद्योगों तक सीमित नहीं रही बल्कि चिप डिजाइन ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर डेटा सेंटर ड्रोन स्पेसटेक और अन्य तकनीकी क्षेत्रों में भी निवेश की संभावनाओं पर चर्चा हुई।

    मुख्यमंत्री के साथ केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया भी मौजूद रहे। बैठक में ग्वालियर में विकसित किए जा रहे टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन यानी TMZ को विशेष रूप से निवेशकों के सामने रखा गया। सरकार की ओर से बताया गया कि इस क्षेत्र में निवेश के लिए बढ़ती रुचि को देखते हुए अब दूसरे चरण की तैयारी की जाएगी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक TMZ में पहले से करीब 5000 करोड़ रुपए के निवेश का आधार तैयार हो चुका है और नए प्रस्ताव आने के बाद अतिरिक्त जमीन की जरूरत होगी।

    मुख्यमंत्री ने निवेशकों से कहा कि मध्यप्रदेश में उद्योगों की जरूरत के मुताबिक जमीन उपलब्ध कराने की दिशा में सरकार काम करेगी। सरकार का फोकस निवेशकों को जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने और अनुमति प्रक्रिया को आसान बनाने पर भी है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश में सिंगल विंडो व्यवस्था नीतिगत सहयोग और औद्योगिक अधोसंरचना का उल्लेख करते हुए निवेशकों को राज्य में विस्तार के अवसरों से अवगत कराया।

    बेंगलुरु की बैठक में थोलोन्स की ओर से मध्यप्रदेश में 210 करोड़ रुपए के निवेश से ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर स्थापित करने के प्रस्ताव पर चर्चा हुई। वहीं असेइक मावेन सिलिकॉन की ओर से करीब 100 करोड़ रुपए के निवेश से चिप डिजाइन हाउस स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया। कोर-आईसी टेक्नोलॉजीज ने भी लगभग 100 करोड़ रुपए के निवेश से चिप डिजाइन सर्विसेज विकसित करने में रुचि दिखाई। इससे मध्यप्रदेश में सेमीकंडक्टर और चिप डिजाइन जैसे तकनीकी क्षेत्रों में संभावित विस्तार की तस्वीर सामने आती है।

    स्टार्टअप सेक्टर को लेकर भी बैठक में महत्वपूर्ण चर्चा हुई। डीपटेक वेंचर कैपिटल फंड सीफंड की ओर से मध्यप्रदेश के स्टार्टअप्स के लिए करीब 200 करोड़ रुपए की फंडिंग उपलब्ध कराने की योजना पर बात हुई। इसके अलावा आधुनिक डेटा सेंटर स्थापित करने और स्पेसटेक क्षेत्र में संभावित सहयोग को लेकर भी निवेशकों के साथ बातचीत हुई। मोबिलिटी और पर्यावरण से जुड़े क्षेत्रों की कंपनियों के प्रतिनिधियों ने भी प्रदेश में अपनी योजनाओं को लेकर चर्चा की।

    ड्रोन तकनीक को लेकर भी निवेश की संभावनाएं तलाशी गईं। एयरबाउंड आइडियाफोर्ज नॉटिकल विंग्स न्यूस्पेस एंड रिसर्च टेक्नोलॉजीज और अनमैन्ड सिस्टम्स से जुड़े प्रतिनिधियों के साथ मध्यप्रदेश में ड्रोन निर्माण और परीक्षण का इकोसिस्टम विकसित करने पर बातचीत हुई। तकनीक आधारित इन क्षेत्रों में निवेश आने से प्रदेश में नए औद्योगिक अवसरों के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और कौशल विकास की संभावनाएं भी बन सकती हैं।

    बेंगलुरु संवाद के दौरान मुख्यमंत्री ने ग्वालियर TMZ की विशेषताओं के साथ मध्यप्रदेश के अन्य शहरों में उद्योग विस्तार की संभावनाओं पर भी चर्चा की। अब इन निवेश प्रस्तावों को अगले चरण में ले जाने के लिए जमीन और अन्य जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था पर काम किया जाएगा। निवेश प्रस्ताव फिलहाल कंपनियों की रुचि और प्रस्तावित निवेश हैं इसलिए वास्तविक निवेश का आकार और परियोजनाओं का क्रियान्वयन आगे की प्रक्रिया और औपचारिक मंजूरियों पर निर्भर करेगा।

  • विदेशी निवेशकों को MP बुलाने दुबई पहुंचे मोहन यादव, बड़े उद्योग समूहों से वन-टू-वन बैठक; GIS 2027 पर रहेगा फोकस

    विदेशी निवेशकों को MP बुलाने दुबई पहुंचे मोहन यादव, बड़े उद्योग समूहों से वन-टू-वन बैठक; GIS 2027 पर रहेगा फोकस


    भोपाल । मध्यप्रदेश में निवेश बढ़ाने और प्रदेश को वैश्विक कारोबारी नक्शे पर और मजबूती से स्थापित करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रविवार को चार दिवसीय दुबई दौरे पर रवाना हो गए। मुख्यमंत्री 6 से 9 सितंबर तक संयुक्त अरब अमीरात में रहेंगे और इस दौरान दुनिया के प्रमुख निवेशकों उद्योग समूहों तथा कारोबारी प्रतिनिधियों से सीधे संवाद करेंगे। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य मध्यप्रदेश में नए निवेश आकर्षित करना कारोबार के नए अवसर तलाशना और वैश्विक कंपनियों के साथ दीर्घकालिक साझेदारी को बढ़ावा देना है।

    दुबई पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री प्रवासी भारतीय समुदाय से संवाद करेंगे। इसके साथ ही मध्यप्रदेश के स्थानीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान दिलाने के लिए एक जिला एक उत्पाद के स्टॉल का उद्घाटन भी किया जाएगा। इस स्टॉल पर बेल मेटल चंदेरी माहेश्वरी बाटिक जरी जरदोजी और ग्वालियर कारपेट जैसे प्रदेश के पारंपरिक और स्थानीय उत्पाद प्रदर्शित किए जाएंगे। इसके जरिए मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक विरासत के साथ उसके कारोबारी और निर्यात संभावनाओं को भी सामने रखा जाएगा।

    मुख्यमंत्री यूएई में भारत के राजदूत डॉ. दीपक मित्तल और दुबई के महावाणिज्य दूत डॉ. ई. विष्णु वर्धन रेड्डी से मुलाकात करेंगे। इसके अलावा अरब संसद के अध्यक्ष मोहम्मद अहमद अल यम्माही के सम्मान में आयोजित कार्यक्रम में भी शामिल होंगे। इस दौरान मुख्यमंत्री उन्हें मध्यप्रदेश में आयोजित होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2027 के लिए आमंत्रित करेंगे।

    दौरे के पहले दिन मुख्यमंत्री एआईएम कांग्रेस के आमंत्रण आधारित टाइकून्स कार्यक्रम में शामिल होंगे। इस कार्यक्रम में संप्रभु संपदा कोष फैमिली ऑफिस और बड़े कॉरपोरेट संस्थानों से जुड़े करीब 500 प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। ऐसे में मुख्यमंत्री के सामने मध्यप्रदेश की निवेश क्षमता और उद्योगों के लिए उपलब्ध अवसरों को सीधे बड़े कारोबारी समूहों तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण मौका होगा।

    7 सितंबर को एआईएम कांग्रेस 2026 के उद्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री हिस्सा लेंगे और लीडर्स सेशन को संबोधित करेंगे। इसी दौरान मध्यप्रदेश पवेलियन का उद्घाटन किया जाएगा जहां प्रदेश की औद्योगिक क्षमता निवेश नीतियों पर्यटन और प्रमुख क्षेत्रों को अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के सामने प्रस्तुत किया जाएगा। मुख्यमंत्री रास अल खैमाह के शासक शेख सऊद बिन सक्र अल कासिमी से भी मुलाकात करेंगे और उन्हें ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2027 का न्योता देंगे। इसके अलावा तातारस्तान के गवर्नर और यूएई के शीर्ष कारोबारी नेतृत्व के साथ भी बैठकें प्रस्तावित हैं।

    8 सितंबर को मुख्यमंत्री का पूरा फोकस निवेशकों के साथ सीधे संवाद पर रहेगा। इस दौरान राणा होल्डिंग्स जेम्स एजुकेशन क्रेसेंट ग्रुप प्योर हेल्थ शराफ ग्रुप डीपी वर्ल्ड ब्यूमर्क कॉरपोरेशन वेस्ट जोन केजीके ग्रुप और वीएफएस ग्लोबल समेत कई बड़े कारोबारी समूहों के प्रतिनिधियों के साथ वन-टू-वन बैठकें होंगी। शारजाह चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों के साथ राउंड टेबल बैठक भी होगी।

    रियल एस्टेट शहरी विकास और पर्यटन के क्षेत्र में भी संभावनाएं तलाशने पर जोर रहेगा। मुख्यमंत्री बीआह ग्रुप और दुबई के प्रमुख कारोबारी समूह इमार के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे। इन बैठकों के जरिए मध्यप्रदेश में निवेश और संभावित कारोबारी साझेदारी के रास्ते तलाशे जाएंगे।

    दौरे के अंतिम दिन 9 सितंबर को इन्वेस्ट मध्यप्रदेश निवेश अवसरों पर संवाद कार्यक्रम आयोजित होगा। इसमें यूएई के व्यवसाय और परोपकार के लिए विशेष दूत बद्र जाफर विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री इस मंच से मध्यप्रदेश की औद्योगिक ताकत पर्यटन क्षमता और निवेश के अनुकूल माहौल को निवेशकों के सामने रखेंगे। इसके बाद मुख्यमंत्री दुबई से नई दिल्ली के लिए रवाना होंगे। माना जा रहा है कि यह दौरा मध्यप्रदेश के आगामी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2027 के लिए अंतरराष्ट्रीय निवेश जुटाने की दिशा में अहम कड़ी साबित हो सकता है।