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  • एमपी विधानसभा में UCC विधेयक पेश, आज होगी चर्चा; उज्जैन जमीन विवाद पर हंगामे से कार्यवाही दो बार स्थगित

    एमपी विधानसभा में UCC विधेयक पेश, आज होगी चर्चा; उज्जैन जमीन विवाद पर हंगामे से कार्यवाही दो बार स्थगित


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के पहले ही दिन सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक टकराहट देखने को मिली। राज्य सरकार ने सदन में मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक-2026 पेश कर दिया, जबकि विपक्ष ने उज्जैन जमीन खरीद मामले को लेकर जोरदार हंगामा किया। लगातार शोर-शराबे के चलते विधानसभा की कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने स्पष्ट किया कि UCC विधेयक पर मंगलवार को विस्तृत चर्चा कराई जाएगी, जिसके बाद आगे की प्रक्रिया पूरी होगी।

    सत्र की शुरुआत से पहले ही कांग्रेस ने विरोध का अनोखा तरीका अपनाया। कांग्रेस विधायक मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेश के कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना के मुखौटे पहनकर विधानसभा पहुंचे। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि सरकार किसानों के मुद्दों से ध्यान भटकाने में लगी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में किसानों को समय पर खाद और बीज नहीं मिल रहे हैं, लेकिन सरकार इन समस्याओं के समाधान के बजाय दूसरे मुद्दों में उलझी हुई है।

    सदन के भीतर भी विपक्ष ने सरकार को कई मुद्दों पर घेरा। उमंग सिंघार ने बरगी क्रूज हादसे में जान गंवाने वाले लोगों और कथित रूप से अव्यवस्था से परेशान नीट परीक्षार्थियों का मुद्दा उठाते हुए विधानसभा सचिवालय पर श्रद्धांजलि सूची में नाम शामिल नहीं करने का सवाल खड़ा किया। इसके बाद उज्जैन में मुख्यमंत्री और उनके परिवार की जमीन खरीद से जुड़े मामले पर विपक्ष ने स्थगन प्रस्ताव रखा, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष ने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया। इस फैसले के बाद कांग्रेस विधायकों ने तीखा विरोध किया और सदन में नारेबाजी शुरू हो गई। हंगामा बढ़ने पर विधानसभा की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।

    सरकार ने इस दौरान केवल UCC विधेयक ही नहीं, बल्कि एक साथ कई महत्वपूर्ण विधेयक भी सदन के पटल पर रखे। इनमें मध्य प्रदेश निरसन विधेयक, अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं विधेयक, राजमार्ग संशोधन विधेयक, निजी विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक, आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक, धन्वंतरि स्वास्थ्य विश्वविद्यालय विधेयक, श्रम और उद्योग से जुड़े कई नए विधेयक शामिल हैं। कांग्रेस ने एक साथ इतने विधेयक पेश किए जाने पर भी आपत्ति जताई और कहा कि इन्हें पहले कार्यसूची में शामिल नहीं किया गया था। संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने जवाब दिया कि कार्य मंत्रणा समिति की बैठक में इस पर चर्चा हो चुकी थी और सभी विधायकों को विधेयकों का अध्ययन करने का पर्याप्त समय मिलेगा।

    इसी बीच ओबीसी महासभा ने भी विधानसभा के बाहर 27 प्रतिशत आरक्षण लागू करने और 13 प्रतिशत पदों को होल्ड मुक्त करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। संगठन के सदस्यों ने आरोप लगाया कि वर्षों से आंदोलन करने के बावजूद उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द फैसला नहीं लिया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

    विधानसभा के पहले दिन की कार्यवाही ने साफ संकेत दे दिए हैं कि मानसून सत्र काफी हंगामेदार रहने वाला है। एक तरफ सरकार समान नागरिक संहिता समेत कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने की तैयारी में है, वहीं विपक्ष किसानों, आरक्षण, उज्जैन जमीन विवाद और अन्य जनहित के मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बना चुका है। अब सबकी निगाहें UCC विधेयक पर होने वाली चर्चा और उज्जैन जमीन मामले में सरकार के अगले रुख पर टिकी हैं।

  • कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा को सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत, अगली सुनवाई तक स्टे

    कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा को सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत, अगली सुनवाई तक स्टे


    भोपाल। मध्यप्रदेश के कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। अदालत ने उन्हें अगली सुनवाई तक स्टे रोक प्रदान किया है। मामले की अगली सुनवाई 23 जुलाई को होगी। मुकेश मल्होत्रा की पैरवी वरिष्ठ वकील एवं राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने की।

    इससे पहले ग्वालियर हाईकोर्ट ने मुकेश मल्होत्रा के चुनाव को शून्य घोषित किया था। हाईकोर्ट ने उन्हें 15 दिन का समय दिया था, ताकि वे सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकें। बीते 9 मार्च को हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ चुनावी हलफनामे में क्रिमिनल केस छुपाने के आरोपों के चलते यह आदेश दिया था।

    हालांकि सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बावजूद, मुकेश मल्होत्रा राज्यसभा चुनाव में वोट नहीं कर पाएंगे, उन्हें मानदेय भी नहीं मिलेगा। हालांकि, वे विधानसभा की कार्यवाही में शामिल हो सकेंगे। याचिका जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच में सुनी गई। इस निर्णय से यह मामला फिलहाल स्थगित हुआ है और 23 जुलाई की अगली सुनवाई तक मुकेश मल्होत्रा के खिलाफ हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगी रहेगी।