Tag: Madhya Pradesh Monsoon

  • इंदौर में बारिश का इंतजार खत्म होने की उम्मीद, अगले कुछ दिन बदलेंगे मौसम का मिजाज; 20 इंच से ज्यादा पानी की जरूरत

    इंदौर में बारिश का इंतजार खत्म होने की उम्मीद, अगले कुछ दिन बदलेंगे मौसम का मिजाज; 20 इंच से ज्यादा पानी की जरूरत


    इंदौर । इंदौर में अगस्त का आधा महीना बीत चुका है लेकिन बारिश के लिहाज से शहर को अभी भी बड़ी राहत का इंतजार है। अगस्त में अब तक किसी भी दिन आधा इंच से ज्यादा बारिश दर्ज नहीं होने से बारिश का आंकड़ा उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ पाया है। रविवार को शहर में बादल छाए रहे और मौसम में नमी बनी रही। अब मानसून सीजन के करीब डेढ़ महीने का समय बाकी है और इसी अवधि में अच्छी बारिश होने की उम्मीद जताई जा रही है। मौसम विभाग के हालिया पूर्वानुमान में भी मध्य प्रदेश में 21 अगस्त तक बारिश की गतिविधियां बने रहने के संकेत दिए गए हैं।

    इस सीजन में इंदौर में अब तक करीब 18 इंच बारिश होने की बात सामने आई है। इसके बावजूद शहर को सामान्य स्थिति तक पहुंचने के लिए अभी अच्छी मात्रा में बारिश की जरूरत है। अगस्त के शुरुआती पखवाड़े में रुक रुककर बूंदाबांदी तो हुई लेकिन लगातार तेज बारिश का दौर नहीं बन सका। यही वजह है कि शहर में बारिश का आंकड़ा अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाया है। हालिया रिपोर्टों में भी इंदौर में बारिश की कमी और भारी बारिश के लंबे इंतजार का उल्लेख किया गया है।

    अब मौसम विशेषज्ञों की नजर बंगाल की खाड़ी में सक्रिय मौसम प्रणाली पर है। इस सिस्टम के प्रभाव से मानसून ट्रफ के सक्रिय रहने की संभावना है। इसके चलते मध्य प्रदेश के अलग अलग हिस्सों में बारिश का दौर बढ़ सकता है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक मध्य प्रदेश के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों में आने वाले दिनों में व्यापक बारिश की संभावना बनी हुई है। खासतौर पर पूर्वी मध्य प्रदेश में भारी बारिश के दौर देखने को मिल सकते हैं जबकि पश्चिमी मध्य प्रदेश में भी बारिश की गतिविधियां जारी रहने का अनुमान है।

    मौसम की मौजूदा स्थिति को देखते हुए इंदौर में आने वाले कुछ दिन अहम माने जा रहे हैं। यदि बंगाल की खाड़ी से बनने वाला सिस्टम प्रभावी रहा और मानसून ट्रफ लगातार सक्रिय रही तो पश्चिमी मध्य प्रदेश में भी बारिश का असर बढ़ सकता है। इससे इंदौर में रुक रुककर होने वाली बूंदाबांदी की जगह तेज बारिश के दौर बनने की संभावना बढ़ेगी। हालांकि किसी एक सिस्टम के आधार पर पूरे सीजन की बारिश का अनुमान लगाना जल्दबाजी होगी क्योंकि मानसून की गतिविधि लगातार बदलती रहती है।

    इंदौर में अगस्त के दौरान अच्छी बारिश का इतिहास भी रहा है। शहर में अगस्त महीने की सर्वाधिक बारिश का आंकड़ा 1944 से जुड़ा है जब करीब 28 इंच पानी दर्ज किया गया था। वहीं 24 घंटे में सबसे ज्यादा बारिश का रिकॉर्ड 22 अगस्त 2020 से जुड़ा है जब करीब साढ़े 10 इंच बारिश हुई थी। इससे यह साफ होता है कि अगस्त के दूसरे हिस्से में भी इंदौर में कम समय में काफी बारिश होने की संभावना बन सकती है। हालांकि पुराने रिकॉर्ड भविष्य की बारिश की गारंटी नहीं देते।

    आमतौर पर अगस्त इंदौर के मानसून के लिहाज से महत्वपूर्ण महीना माना जाता है। इस महीने में बारिश के कई दौर देखने को मिलते हैं। इस बार शुरुआती हिस्से में कमजोर गतिविधि के कारण शहर के बारिश के आंकड़े पर असर पड़ा है। अब आने वाले दिनों में यदि मौसम प्रणाली सक्रिय रहती है तो यह कमी कुछ हद तक पूरी हो सकती है।

    मानसून सीजन का अभी करीब डेढ़ महीना बाकी है। इसलिए फिलहाल बारिश के अंतिम आंकड़े को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। मौसम विशेषज्ञों की नजर अब बंगाल की खाड़ी के सिस्टम और मानसून ट्रफ की स्थिति पर बनी हुई है। यदि दोनों का असर पश्चिमी मध्य प्रदेश तक पहुंचता है तो इंदौर में अच्छी बारिश का इंतजार खत्म हो सकता है। वहीं लगातार बारिश होने पर शहर के जलस्रोतों और आसपास के इलाकों को भी फायदा मिलने की उम्मीद रहेगी। फिलहाल रविवार को बादल छाए रहने और अगले दिनों में बारिश की संभावना ने इंदौरवासियों को राहत की उम्मीद जरूर दी है।

  • मानसून ने बदली मध्य प्रदेश की तस्वीर: 35 जिलों में मेहरबान बादल, खजुराहो-मंडला में रिकॉर्ड बारिश, कई इलाकों में बढ़ा खतरा

    मानसून ने बदली मध्य प्रदेश की तस्वीर: 35 जिलों में मेहरबान बादल, खजुराहो-मंडला में रिकॉर्ड बारिश, कई इलाकों में बढ़ा खतरा


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में जुलाई की शुरुआत के साथ ही मानसून ने पूरी ताकत दिखानी शुरू कर दी है। पिछले 24 घंटे के दौरान प्रदेश के 35 से अधिक जिलों में जोरदार बारिश दर्ज की गई जिससे एक ओर लोगों को भीषण गर्मी और उमस से राहत मिली तो दूसरी ओर कई इलाकों में जनजीवन भी प्रभावित हो गया। मौसम विभाग के अनुसार खजुराहो में 4.4 इंच और मंडला में 4.2 इंच बारिश दर्ज की गई जो प्रदेश में सबसे अधिक रही। लगातार छह दिनों से हो रही बारिश का असर यह हुआ कि प्रदेश की औसत वर्षा करीब 7 इंच तक पहुंच गई है। जून के आखिर तक जहां बारिश सामान्य से 33 प्रतिशत कम थी वहीं अब यह कमी घटकर महज 1 प्रतिशत रह गई है।

    सतना रतलाम सीधी उमरिया पन्ना पचमढ़ी रीवा श्योपुर नौगांव भोपाल नरसिंहपुर दमोह टीकमगढ़ बैतूल नर्मदापुरम इंदौर सिवनी सागर शिवपुरी बालाघाट छिंदवाड़ा रायसेन धार जबलपुर गुना उज्जैन खंडवा खरगोन दतिया मैहर शाजापुर सीहोर छतरपुर बुरहानपुर बड़वानी और पांढुर्णा सहित अनेक जिलों में दिनभर बारिश का दौर जारी रहा। लगातार हो रही वर्षा से जलस्तर बढ़ा है और खेतों में भी पर्याप्त नमी पहुंचने लगी है जिससे किसानों के चेहरे खिल उठे हैं।

    बारिश के बीच कई स्थानों पर हादसे भी सामने आए। बड़वानी जिले के सेंधवा स्थित सांदीपनि सीएम राइज स्कूल में कक्षा नौ की छत का प्लास्टर अचानक गिर गया जिससे दो छात्राएं घायल हो गईं। दोनों के सिर में मामूली चोटें आईं और उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाकर उपचार कराया गया। इस घटना ने सरकारी स्कूलों की इमारतों की स्थिति पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

    उधर इंदौर के पास खुड़ैल रोड स्थित जेतकारण गांव में लगातार बारिश के कारण सड़क धंस गई जिससे स्कूली बच्चों का आवागमन बाधित हो गया। उफनते नाले को पार कराने के लिए ग्रामीणों ने मानव शृंखला बनाकर बच्चों को सुरक्षित दूसरी ओर पहुंचाया। यह दृश्य स्थानीय लोगों की सतर्कता और सहयोग की मिसाल बन गया।

    पन्ना जिले में भी तेज बारिश के कारण हरसा बागोहा नाला उफान पर आ गया। पुल के ऊपर से पानी बहने के बावजूद लोग जोखिम उठाकर नाला पार करते नजर आए जिससे किसी भी समय बड़ा हादसा होने की आशंका बनी हुई है। वहीं खजुराहो में लगातार बारिश के चलते खूडर नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया और एहतियात के तौर पर खजुराहो जटकरा मार्ग बंद करना पड़ा। प्रशासन लोगों से नदी नालों से दूर रहने की अपील कर रहा है।

    हरदा जिले में भी बारिश ने रफ्तार पकड़ ली है। इस मानसून सीजन में यहां अब तक 13 इंच से अधिक वर्षा दर्ज की जा चुकी है जो पिछले वर्ष की तुलना में अधिक है। कई जिलों में तापमान में गिरावट आने से मौसम सुहावना हो गया है और लोगों को उमस से राहत मिली है।

    मौसम विभाग ने आने वाले घंटों के लिए भी चेतावनी जारी की है। गुना अशोकनगर विदिशा सागर और छतरपुर में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है जबकि बड़वानी धार बुरहानपुर रतलाम टीकमगढ़ पन्ना सहित कई जिलों में भारी बारिश और गरज चमक के साथ वर्षा की संभावना जताई गई है। प्रशासन ने लोगों से नदी नालों और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने तथा मौसम विभाग की सलाह का पालन करने की अपील की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह बारिश का सिलसिला जारी रहा तो प्रदेश में खरीफ फसलों को बड़ा लाभ मिलेगा और जलाशयों का जलस्तर भी तेजी से बढ़ेगा।

  • पूरे मध्य प्रदेश में छाया मानसून अब चार दिन भारी बारिश का दौर 13 जिलों में अलर्ट कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात

    पूरे मध्य प्रदेश में छाया मानसून अब चार दिन भारी बारिश का दौर 13 जिलों में अलर्ट कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश में मानसून अब पूरी तरह सक्रिय हो गया है। गुरुवार को मानसून ने प्रदेश के सभी जिलों को कवर कर लिया जिसके साथ ही पूरे राज्य में बारिश का दौर तेज होने की संभावना बढ़ गई है। मौसम विभाग ने अगले चार दिनों तक कई जिलों में भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। कुछ जिलों के लिए ऑरेंज और यलो अलर्ट घोषित किया गया है जबकि कई क्षेत्रों में जलभराव तेज बहाव और बिजली गिरने जैसी स्थितियों को देखते हुए लोगों से सतर्क रहने की अपील की गई है।

    इस वर्ष प्रदेश में मानसून ने 24 जून को दस्तक दी थी और नौ दिनों के भीतर पूरे मध्य प्रदेश में फैल गया। हालांकि सामान्य स्थिति में मानसून 15 जून तक प्रदेश में पहुंच जाता है इसलिए इस बार इसकी एंट्री करीब नौ दिन देर से हुई। इसके बावजूद अब मानसून तेजी से सक्रिय हो चुका है और अधिकांश जिलों में लगातार बारिश दर्ज की जा रही है।

    मौसम विभाग के अनुसार हरदा नर्मदापुरम रायसेन छिंदवाड़ा पांढुर्णा और बालाघाट जिलों में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इन क्षेत्रों में अगले चौबीस घंटों के दौरान चार से आठ इंच तक बारिश होने की संभावना जताई गई है। वहीं अशोकनगर देवास खंडवा बैतूल सागर मंडला और डिंडौरी में भारी बारिश का यलो अलर्ट घोषित किया गया है। इसके अलावा भोपाल इंदौर उज्जैन ग्वालियर जबलपुर सहित प्रदेश के कई जिलों में गरज चमक के साथ तेज बारिश और आंधी की संभावना बनी हुई है।

    बुधवार को प्रदेश के कई हिस्सों में मानसून का असर साफ दिखाई दिया। इंदौर में तेज बारिश के कारण कई सड़कें जलमग्न हो गईं और निचले इलाकों में पानी भर गया। एक थार वाहन तेज बहाव में नाले में गिर गया जिसमें पूरा परिवार सवार था। स्थानीय लोगों की सतर्कता से सभी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। वहीं इंदौर के अहीरखेड़ी काकड़ क्षेत्र में रपटा पार करते समय दो युवक तेज बहाव में बह गए। एक युवक को सुरक्षित बचा लिया गया जबकि दूसरे की तलाश पुलिस और बचाव दल लगातार कर रहे हैं। महू में भी एक कार पानी के तेज बहाव में फंस गई जिसे ट्रैक्टर की मदद से बाहर निकाला गया।

    मौसम विभाग का अनुमान है कि पांच जुलाई तक प्रदेश के कई हिस्सों में भारी से अति भारी बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। तीन जुलाई को धार और बड़वानी में रेड अलर्ट जारी किया गया है जबकि चार जुलाई को खरगोन में भी अति भारी बारिश की संभावना जताई गई है। ऐसे में नदी नालों के किनारे रहने वाले लोगों और जलभराव वाले क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।

    हालांकि प्रदेश में अब तक सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। एक जुलाई तक मध्य प्रदेश में लगभग चार इंच वर्षा हुई है जबकि सामान्य औसत इससे काफी अधिक रहता है। इसके बावजूद मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि जुलाई का महीना प्रदेश के लिए सबसे अधिक वर्षा वाला समय होता है और पूरे मानसून की लगभग चालीस प्रतिशत बारिश इसी महीने में होती है। ऐसे में आने वाले दिनों में बारिश का आंकड़ा तेजी से बढ़ने की उम्मीद है और इससे खेती के साथ जलाशयों में भी पानी की उपलब्धता बेहतर होने की संभावना है।

  • MP में जल्‍द दस्‍तक देगा मानसून, आज 5 जिलों में तेज आंधी और 33 में बारिश का अलर्ट

    MP में जल्‍द दस्‍तक देगा मानसून, आज 5 जिलों में तेज आंधी और 33 में बारिश का अलर्ट


    भोपाल। मध्य प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार एक बार फिर बढ़ गई है। मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार, प्रदेश में मानसून 15 से 18 जून के बीच प्रवेश कर सकता है। मानसून के आगमन से पहले राज्यभर में प्री-मानसून गतिविधियां तेज बनी हुई हैं। कई इलाकों में आंधी, बारिश और ओलावृष्टि का दौर जारी है।

    शुक्रवार को श्योपुर जिले में तेज आंधी ने भारी नुकसान पहुंचाया। अलग-अलग घटनाओं में चार लोगों की मौत हो गई। जिले में करीब एक इंच बारिश दर्ज की गई। वहीं सागर में आधा इंच पानी गिरा। जबलपुर, नरसिंहपुर, सिवनी सहित कई जिलों में भी आंधी और बारिश हुई, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की गई।

    हालांकि जून माह में अब तक प्रदेश में सामान्य से कम बारिश हुई है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में औसत से 23 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। पूर्वी क्षेत्र के जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभागों में औसत से 55 प्रतिशत कम बारिश हुई है, जबकि पश्चिमी हिस्से के भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, चंबल और नर्मदापुरम संभागों में औसत से 2 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई है।

    मौसम विभाग ने शनिवार को भिंड, दतिया, छतरपुर, पन्ना और सागर जिलों में तेज आंधी और बारिश की संभावना जताई है। इन जिलों में हवा की रफ्तार 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है।

    इसके अलावा भोपाल, रायसेन, सीहोर, विदिशा, नर्मदापुरम, बैतूल, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, अशोकनगर, मुरैना, श्योपुर, जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, पांढुर्णा, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, दमोह, टीकमगढ़ और निवाड़ी जिलों में गरज-चमक, तेज हवाओं और बारिश का दौर बना रह सकता है।

    वहीं इंदौर, उज्जैन, नीमच, मंदसौर, रतलाम, झाबुआ, अलीराजपुर, बड़वानी, धार, खरगोन, बुरहानपुर, खंडवा, हरदा, देवास, आगर-मालवा, राजगढ़ और शाजापुर जिलों में मौसम साफ रहने और तेज धूप निकलने की संभावना है।

    बारिश और बादलों के असर से कई जिलों में तापमान में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। ग्वालियर में 5.8 डिग्री की कमी के बाद अधिकतम तापमान 36.2 डिग्री सेल्सियस रहा। दतिया में तापमान 4 डिग्री गिरकर 38.2 डिग्री पर पहुंच गया। रीवा में 7.3 डिग्री की गिरावट के साथ तापमान 35.2 डिग्री दर्ज किया गया, जबकि सतना में 6.6 डिग्री की कमी आई। सिवनी में तापमान 3 डिग्री और खजुराहो में 4 डिग्री तक नीचे आया।

  • मानसून आने से पहले मौसम का यू-टर्न, 18 जिलों में बारिश-आंधी और फिर पड़ेगी भीषण गर्मी

    मानसून आने से पहले मौसम का यू-टर्न, 18 जिलों में बारिश-आंधी और फिर पड़ेगी भीषण गर्मी


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश में मानसून की दस्तक अब ज्यादा दूर नहीं है। मौसम विभाग और मौसम विशेषज्ञों के अनुसार प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून 15 से 18 जून के बीच प्रवेश कर सकता है। अनुमान है कि मानसून की पहली एंट्री इंदौर और जबलपुर संभाग के छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, बालाघाट, बैतूल, बड़वानी, खरगोन या बुरहानपुर जिले के रास्ते हो सकती है। इसके पहले पूरे प्रदेश में प्री-मानसून गतिविधियां सक्रिय रहेंगी, जिससे कई क्षेत्रों में तेज आंधी, गरज-चमक और बारिश का दौर जारी रहेगा।

    मौसम विभाग ने मंगलवार को प्रदेश के करीब 20 जिलों में तेज हवाओं और बारिश का अलर्ट जारी किया है। इनमें बड़वानी, खरगोन, बुरहानपुर, खंडवा, हरदा, नर्मदापुरम, बैतूल, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, जबलपुर, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, अनूपपुर, उमरिया और शहडोल सहित कई जिले शामिल हैं। इन क्षेत्रों में कहीं-कहीं तेज हवा के साथ गरज-चमक और हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है।

    हालांकि बारिश के साथ गर्मी का असर भी बना रहेगा। मौसम विभाग ने 10 और 11 जून को भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर जिलों में हीटवेव का अलर्ट जारी किया है। इससे साफ है कि प्रदेश में फिलहाल तीनों मौसम—गर्मी, आंधी-बारिश और बढ़ती नमी—एक साथ प्रभाव दिखा रहे हैं।

    सोमवार को प्रदेश के कई हिस्सों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया गया। मंडला सबसे गर्म रहा, जहां अधिकतम तापमान 42.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। छिंदवाड़ा, खजुराहो, दमोह, मलाजखंड, राजगढ़, नरसिंहपुर, दतिया और शाजापुर सहित कई शहरों में तापमान 41 डिग्री से ऊपर पहुंच गया। वहीं ग्वालियर में 41.6 डिग्री, जबलपुर में 40 डिग्री, उज्जैन में 39.5 डिग्री, भोपाल में 38.7 डिग्री और इंदौर में 38.6 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया।

    मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदेश इस समय एक महत्वपूर्ण संक्रमण काल से गुजर रहा है। पूर्वी मध्य प्रदेश के रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला, बालाघाट और सिवनी जिलों में अगले तीन से चार दिनों तक गरज-चमक के साथ बारिश की गतिविधियां बनी रह सकती हैं। महाकौशल क्षेत्र में कई स्थानों पर मध्यम वर्षा होने की संभावना है, जबकि बिजली गिरने और तेज हवाओं की घटनाओं में भी वृद्धि हो सकती है।

    भोपाल, रायसेन, सीहोर, विदिशा, राजगढ़, नर्मदापुरम, बैतूल और हरदा जैसे जिलों में दोपहर बाद बादल छाने और हल्की से मध्यम बारिश होने के आसार हैं। इससे पिछले कुछ दिनों से पड़ रही भीषण गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है। वहीं मालवा-निमाड़ क्षेत्र में अरब सागर से आने वाली नमी का असर दिखाई देगा, जिसके कारण बादलों की आवाजाही और उमस में बढ़ोतरी हो सकती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान मौसमीय परिस्थितियां मानसून के आगमन के लिए अनुकूल बन रही हैं। यदि अगले कुछ दिनों तक यही स्थिति बनी रहती है, तो दक्षिण-पूर्वी और पूर्वी मध्य प्रदेश में मानसूनी गतिविधियां तेजी से बढ़ सकती हैं। किसानों के लिए यह खरीफ सीजन की तैयारी का समय है, लेकिन विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि स्थायी और व्यापक वर्षा शुरू होने के बाद ही बुवाई का निर्णय लेना अधिक उचित रहेगा।

    मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार प्रदेश में सक्रिय प्री-मानसून सिस्टम, चक्रवाती परिसंचरण और पश्चिमी विक्षोभ के संयुक्त प्रभाव से मौसम में लगातार बदलाव देखने को मिल रहा है। आने वाले दिनों में तापमान में 2 से 5 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट दर्ज हो सकती है, जिससे कई क्षेत्रों में मौसम सुहावना होने की संभावना है।