Tag: Madhya Pradesh road accidents

  • बैतूल में दर्दनाक रात: तीन अलग-अलग घटनाओं में तीन मौतें, सड़क हादसों और विवाद ने छीनी जिंदगियां

    बैतूल में दर्दनाक रात: तीन अलग-अलग घटनाओं में तीन मौतें, सड़क हादसों और विवाद ने छीनी जिंदगियां


    नई दिल्ली । बैतूल जिले में शुक्रवार की रात एक साथ तीन अलग-अलग घटनाओं ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया। इन घटनाओं में तीन लोगों की मौत हो गई, जिनमें दो सड़क हादसों के शिकार हुए जबकि एक व्यक्ति ने पारिवारिक विवाद के बाद आत्महत्या कर ली। लगातार हुई इन घटनाओं से पूरे जिले में शोक और दहशत का माहौल है। पुलिस ने सभी मामलों की जांच शुरू कर दी है।

    पहली घटना बैतूल-आमला मार्ग पर बाघवाड़ सोमवारी के पास हुई, जहां मजदूरी करके घर लौट रहे 23 वर्षीय युवक गोलू पुत्र जगन उइके की दर्दनाक मौत हो गई। बताया जा रहा है कि शाम के समय जब वह काम खत्म कर घर लौट रहा था, तभी किसी अज्ञात वाहन ने उसे जोरदार टक्कर मार दी। हादसा इतना गंभीर था कि मौके पर ही उसकी हालत बिगड़ गई। स्थानीय लोगों की मदद से उसे अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस घटना के बाद उसके परिवार में कोहराम मच गया। गोलू अपने छोटे भाई ऋषि के साथ मजदूरी कर परिवार की जिम्मेदारियां संभालता था।

    दूसरी घटना गोंदी गोला क्षेत्र की है, जहां 23 वर्षीय रोशन पुत्र पिंटू टेकाम की सड़क हादसे में जान चली गई। रोशन शादी समारोह में शामिल होकर देर रात अपने गांव लौट रहा था। बताया गया कि वह बाइक से अकेला था और रास्ते में किसी कारणवश नियंत्रण खो बैठा। कुछ देर बाद वह गांव के पास सड़क किनारे अचेत अवस्था में पड़ा मिला। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टर उसे बचा नहीं सके। रोशन अपने परिवार का सहारा था और उसकी असमय मौत से घर में मातम छा गया है।

    तीसरी और सबसे दर्दनाक घटना चिचोली थाना क्षेत्र के सेहरा गांव की है। यहां 35 वर्षीय राजकुमार पुत्र शिवराम ने पारिवारिक विवाद के बाद आत्महत्या कर ली। बताया गया कि वह शाम को खेत से घर लौटा था और उसने अपनी मां से तीन हजार रुपये मांगे थे, जो उसे कुएं में मोटर डालने के लिए चाहिए थे। पैसे नहीं मिलने पर घर में विवाद बढ़ गया। इसी तनाव में आकर उसने खेत में रखी खरपतवार नाशक दवा पी ली। हालत बिगड़ने पर उसे तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां आईसीयू में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। राजकुमार तीन बेटियों और एक बेटे का पिता था और परिवार की जिम्मेदारियों का बोझ उसी पर था।

    लगातार हुई इन तीन घटनाओं ने बैतूल जिले को गहरे सदमे में डाल दिया है। पुलिस ने तीनों मामलों में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है और हादसों के कारणों का पता लगाया जा रहा है।

  • होली पर सड़कों पर बढ़ा खतरा: मध्य प्रदेश में 948 हादसे, सागर 67 मामलों के साथ टॉप पर, भोपाल भी टॉप-10 में

    होली पर सड़कों पर बढ़ा खतरा: मध्य प्रदेश में 948 हादसे, सागर 67 मामलों के साथ टॉप पर, भोपाल भी टॉप-10 में



    नई दिल्ली। होली के त्योहार के बीच मध्य प्रदेश में सड़क हादसों का आंकड़ा चिंताजनक रूप से बढ़ गया। 108 एंबुलेंस सेवा के आंकड़ों के मुताबिक 4 मार्च को एक ही दिन में प्रदेशभर में 948 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। सबसे ज्यादा हादसे सागर जिले में सामने आए, जहां 67 दुर्घटनाएं हुईं। वहीं राजधानी भोपाल में 39 हादसे दर्ज किए गए, जिससे शहर प्रदेश में आठवें स्थान पर रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि त्योहार के दौरान नशे में वाहन चलाना, तेज रफ्तार और ट्रैफिक नियमों की अनदेखी इन दुर्घटनाओं की बड़ी वजह बन रही है।

    हादसों के मामले में सागर के बाद विदिशा में 55, इंदौर में 46 और जबलपुर में 45 दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। इसके अलावा रीवा और सतना में 42-42 तथा रायसेन में 41 हादसे सामने आए। अन्य जिलों में भी स्थिति चिंताजनक रही, जहां छिंदवाड़ा में 30, धार में 28, सिंगरौली में 27 और खरगोन व बालाघाट में 25-25 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं।

    108 एंबुलेंस सेवा के सीनियर मैनेजर तरुण सिंह परिहार के अनुसार होली के दौरान नशे में वाहन चलाने की घटनाएं बढ़ जाती हैं, जिससे हादसों का खतरा भी बढ़ जाता है। इस बार बीते साल की तुलना में शराब के नशे में हुई दुर्घटनाओं की संख्या अधिक देखने को मिली है। उन्होंने बताया कि कई मामलों में लोग तेज रफ्तार से वाहन चलाते हैं और ट्रैफिक नियमों की अनदेखी करते हैं, जिससे मामूली टक्कर भी गंभीर हादसे में बदल जाती है।

    राजधानी भोपाल के सरकारी अस्पतालों में भी होली के दौरान सामान्य दिनों की तुलना में ज्यादा घायल पहुंचे। जहां आमतौर पर 20 से 25 लोग सड़क दुर्घटना में घायल होकर इलाज के लिए आते हैं, वहीं इस बार यह संख्या बढ़कर 62 तक पहुंच गई। अस्पताल सूत्रों के अनुसार अधिकतर घायल बाइक सवार थे और कई मामलों में हेलमेट का उपयोग नहीं किया गया था, जिसके कारण सिर में गंभीर चोटें आईं।

    कम्युनिटी मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. कुलदीप गुप्ता का कहना है कि सड़क दुर्घटनाओं में सिर की चोट सबसे खतरनाक होती है। रिसर्च के अनुसार ट्रॉमा में लाए गए 10 गंभीर घायलों में से लगभग 3 लोगों की जान नहीं बच पाती। उनका कहना है कि हेलमेट और सीट बेल्ट का उपयोग कई मामलों में जान बचा सकता है, लेकिन लोग अक्सर इन जरूरी नियमों की अनदेखी कर देते हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि त्योहारों के दौरान सड़क सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्कता जरूरी है। उत्सव का माहौल लोगों को लापरवाह बना देता है, लेकिन थोड़ी सी सावधानी बड़ी दुर्घटनाओं से बचा सकती है। इसलिए वाहन चलाते समय हेलमेट और सीट बेल्ट का उपयोग करना, नशे में ड्राइविंग से बचना और ट्रैफिक नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है, ताकि ऐसे हादसों की संख्या को कम किया जा सके।