बीना में कांग्रेस नेता इंदर सिंह ठाकुर ने सड़क की बदहाली के खिलाफ अनोखे अंदाज में प्रदर्शन किया। खास बात यह रही कि उन्होंने अपना जन्मदिन भी इसी विरोध के बीच मनाया। समर्थकों के साथ सड़क पर पहुंचे नेता ने शासन और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और बारिश के पानी से भरे गड्ढे में बैठ गए। इसके बाद वह गड्ढे में लेटते और तैरते हुए भी नजर आए। उनका कहना था कि सड़क की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि लोगों का निकलना मुश्किल है। प्रदर्शन के बाद तहसीलदार ने फोन पर समस्या का समाधान कराने का भरोसा दिया। आश्वासन मिलने के बाद प्रदर्शन खत्म हुआ लेकिन सड़क की मरम्मत कब होगी इसका इंतजार अब भी है। यानी जन्मदिन पर नेता जी सुर्खियों में आ गए लेकिन सड़क को अभी सुधार का इंतजार है।
उधर मंडला में सड़क की बदहाली की ऐसी तस्वीर सामने आई जिसने विकास के दावों पर ही सवाल खड़े कर दिए। भाजपा सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते एक गांव में सामुदायिक भवन के लोकार्पण कार्यक्रम में पहुंचे थे। कार्यक्रम स्थल तक पहुंचने के लिए पक्का रास्ता नहीं होने के कारण बारिश के बाद कच्चा रास्ता पूरी तरह कीचड़ में बदल गया था। जैसे ही सांसद का काफिला वहां पहुंचा वाहनों के पहिए कीचड़ में धंस गए। कुछ देर में स्थिति ऐसी हो गई कि सांसद और अधिकारियों को अपनी गाड़ियों से उतरना पड़ा। इसके बाद ग्रामीण आगे आए और ट्रैक्टर की मदद से एक एक करके वाहनों को कीचड़ से बाहर निकाला गया।
इस घटना के बाद स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठ रहा है कि जब जनप्रतिनिधि और अधिकारी खुद खराब रास्ते में फंस गए हैं तो क्या अब इस इलाके में सड़क निर्माण की समस्या को गंभीरता से लिया जाएगा। जिस रास्ते से ग्रामीण लंबे समय से गुजरने को मजबूर हैं उसी रास्ते पर सांसद के काफिले के फंसने से सड़क की जरूरत और ज्यादा सामने आ गई है।
राजधानी भोपाल की तस्वीर भी पूरी तरह राहत देने वाली नहीं है। शहर के कई इलाकों में बारिश के बाद सड़कें गड्ढों से भर गई हैं। कहीं सड़क पर बड़े गड्ढे हैं तो कहीं पानी जमा होने के कारण सड़क और गड्ढे के बीच अंतर करना मुश्किल हो रहा है। सवाल इसलिए भी उठ रहा है क्योंकि भोपाल में ही प्रदेश सरकार के मंत्री और बड़े अधिकारी बैठते हैं। इसके बावजूद आम लोगों को खराब सड़कों और जलभराव से जूझना पड़ रहा है।
इसी बीच मंत्रियों और विधायकों के निवास वाले इलाकों की बेहतर सड़कों को लेकर भी तुलना की जा रही है। पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह के बंगले के सामने की सड़क को लेकर कहा जा रहा है कि वहां सड़क की स्थिति बेहतर दिखाई देती है जबकि शहर के दूसरे हिस्सों में गड्ढे लोगों की परेशानी बढ़ा रहे हैं। मंत्री ने सड़कों की गुणवत्ता बेहतर होने और अच्छी सड़कें बनाए जाने की बात कही है। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि ये दावे जमीन पर कब दिखाई देंगे।
बीना के गड्ढे से लेकर मंडला के कीचड़ और भोपाल की जर्जर सड़कों तक सामने आई तस्वीरों ने सड़क व्यवस्था को लेकर बहस तेज कर दी है। लोगों की मांग साफ है कि बारिश के बाद सिर्फ गड्ढों पर मिट्टी या अस्थायी मरम्मत न हो बल्कि मजबूत और टिकाऊ सड़कें बनाई जाएं। क्योंकि सड़क पर चलने वाला आम आदमी हो या फिर सांसद का काफिला आखिर रास्ता सभी को एक ही मिलता है।
