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शिवपुरी के जंगलों में मां बलारी का रहस्यमयी दरबार, सुबह बालिका तो दोपहर में युवा रूप की मान्यता, नवरात्र में बढ़ी भक्तों की भीड़
शिवपुरी । मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में स्थित माधव टाइगर रिजर्व अपनी प्राकृतिक सुंदरता और वन्यजीवों के लिए जाना जाता है। इसी रिजर्व की पूर्वी रेंज के घने जंगलों और खूबसूरत वादियों के बीच सदियों पुराना मां बलारी माता मंदिर स्थित है। यह मंदिर धार्मिक आस्था के साथ अपनी अनूठी लोक मान्यताओं के कारण भी श्रद्धालुओं के बीच विशेष महत्व रखता है। शारदीय नवरात्र के दौरान यहां भक्तों की आवाजाही बढ़ गई है। दूर-दराज के क्षेत्रों से श्रद्धालु जंगल के रास्ते सफर कर मां के दरबार में पहुंच रहे हैं और पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना कर रहे हैं।मां बलारी मंदिर की सबसे खास मान्यता देवी के बदलते स्वरूप से जुड़ी हुई है। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं के बीच प्रचलित मान्यता के अनुसार मां का मुखमंडल 24 घंटे के भीतर तीन बार आंशिक रूप से बदलता है। कहा जाता है कि सुबह देवी बाल रूप में दर्शन देती हैं जबकि दोपहर में उनका स्वरूप युवा दिखाई देता है। वहीं रात के समय वृद्ध स्वरूप की मान्यता है। इसी अनूठी मान्यता के चलते मंदिर के प्रति लोगों की श्रद्धा और आकर्षण बना हुआ है। नवरात्र के पावन अवसर पर बड़ी संख्या में भक्त यहां पहुंचकर माता के दर्शन करने को उत्सुक हैं।मंदिर तक पहुंचने का रास्ता भी श्रद्धालुओं के लिए एक अलग अनुभव लेकर आता है। शिवपुरी शहर से मंदिर की दूरी करीब 25 किलोमीटर बताई गई है। यहां पहुंचने के लिए यात्रियों को कुछ दूरी कच्चे रास्ते पर तय करनी पड़ती है। इसके बाद करीब 7.4 किलोमीटर का मार्ग माधव टाइगर रिजर्व के जंगल से होकर गुजरता है। घने पेड़ों और प्राकृतिक हरियाली के बीच से गुजरने वाला यह रास्ता जहां प्रकृति के करीब होने का अनुभव देता है वहीं वन्यजीवों की मौजूदगी के कारण सावधानी बरतना भी जरूरी है।नवरात्र के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा और वन क्षेत्र की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वन विभाग ने विशेष व्यवस्था की है। दी गई जानकारी के अनुसार इस अवधि में भक्तों को अपने वाहनों से मंदिर तक जाने की अनुमति दी गई है। हालांकि जंगल में प्रवेश के लिए चेकपोस्ट पर वाहनों की एंट्री अनिवार्य रखी गई है। इससे वन क्षेत्र में आने-जाने वाले वाहनों पर नजर रखी जा सके और श्रद्धालुओं की आवाजाही व्यवस्थित बनी रहे।जंगल के रास्ते पर सुरक्षा नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है। वन विभाग ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे रास्ते में अनावश्यक रूप से न रुकें और समूह में आगे बढ़ें। इसके साथ ही डीजे बजाने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है। जंगल में तेज आवाज और लापरवाही वन्यजीवों के लिए परेशानी पैदा कर सकती है। ऐसे में श्रद्धालुओं से धार्मिक यात्रा के दौरान शांति और अनुशासन बनाए रखने की अपेक्षा की जा रही है।मां बलारी मंदिर धार्मिक आस्था और प्राकृतिक वातावरण का अनूठा संगम है। एक ओर यहां देवी के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ पहुंच रही है तो दूसरी ओर माधव टाइगर रिजर्व की हरियाली इस स्थान को विशेष बनाती है। नवरात्र में मंदिर आने वाले भक्तों के लिए जरूरी है कि वे आस्था के साथ वन विभाग के नियमों का भी पालन करें। इससे धार्मिक परंपरा के साथ जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। -

महाकाल लोक के बाद अब गढ़कालिका लोक की तैयारी, 18.50 करोड़ का प्रोजेक्ट तैयार, नवरात्रि के बाद शुरू हो सकता है निर्माण
उज्जैन । मध्य प्रदेश के धार्मिक शहर उज्जैन में मां गढ़कालिका के भक्तों को जल्द ही आधुनिक सुविधाओं से युक्त भव्य मंदिर परिसर की सौगात मिल सकती है। महाकाल लोक की तर्ज पर अब गढ़कालिका माता मंदिर को गढ़कालिका लोक के रूप में विकसित करने की तैयारी की जा रही है। उज्जैन विकास प्राधिकरण ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए 18.50 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है। करीब डेढ़ हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित होने वाले इस लोक के निर्माण के लिए टेंडर जारी कर दिया गया है। तकनीकी बिड खुलने और निर्माण एजेंसी का चयन होने के बाद परियोजना का काम शुरू होने की उम्मीद है। योजना का उद्देश्य मंदिर परिसर को व्यवस्थित और सुविधाजनक बनाना है ताकि देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं को दर्शन के दौरान बेहतर अनुभव मिल सके।गढ़कालिका माता मंदिर उज्जैन के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। नवरात्रि के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन करने पहुंचते हैं। वर्तमान में मंदिर का मुख्य प्रवेश द्वार मुख्य सड़क पर स्थित है और यह अपेक्षाकृत संकरा है। भीड़ बढ़ने पर श्रद्धालुओं के आवागमन में परेशानी होने की आशंका रहती है। गढ़कालिका लोक परियोजना के तहत प्रवेश व्यवस्था को नए सिरे से विकसित करने की योजना बनाई गई है। इससे मंदिर परिसर में आने वाले भक्तों की आवाजाही अधिक व्यवस्थित हो सकेगी और भीड़ को नियंत्रित करने में भी मदद मिलेगी।परियोजना की खास बात यह है कि आम श्रद्धालुओं और वीआईपी आगंतुकों के लिए प्रवेश की अलग-अलग व्यवस्था प्रस्तावित है। मौजूदा मुख्य द्वार को वीआईपी प्रवेश के रूप में इस्तेमाल करने की योजना है। इसके सामने वीआईपी पार्किंग भी विकसित की जाएगी। वहीं आम श्रद्धालुओं के लिए पश्चिम दिशा में ओखलेश्वर रोड की तरफ से करीब नौ मीटर दूर नया प्रवेश मार्ग प्रस्तावित है। यहां जिगजैग कतार व्यवस्था बनाई जाएगी ताकि दर्शन के लिए आने वाले लोगों को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया जा सके। इस व्यवस्था से एक साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने पर भी प्रवेश द्वार के आसपास भीड़ का दबाव कम करने में सहायता मिल सकती है।गढ़कालिका लोक के विकास के साथ आसपास की सड़कों को बेहतर बनाने की योजना भी महत्वपूर्ण है। मंदिर के सामने वाली सड़क और ओखलेश्वर श्मशान से होते हुए कालभैरव की दिशा में जाने वाली सड़क का चौड़ीकरण कर उन्हें फोरलेन बनाने का काम किया जा रहा है। सड़कें चौड़ी होने से मंदिर तक पहुंचने वाले श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को आवागमन में सुविधा मिलने की उम्मीद है। बेहतर सड़क संपर्क से त्योहारों और विशेष धार्मिक अवसरों पर बढ़ने वाले यातायात के दबाव को संभालना भी आसान हो सकता है। हालांकि परियोजना की वास्तविक समयसीमा और सुविधाओं का अंतिम स्वरूप निर्माण एजेंसी के चयन तथा आगे की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।गढ़कालिका मंदिर धार्मिक और ऐतिहासिक मान्यताओं के कारण भी विशेष महत्व रखता है। मान्यता है कि महाकवि कालिदास ने इसी मंदिर में मां कालिका की आराधना कर दिव्य ज्ञान प्राप्त किया था। उज्जैन में आयोजित होने वाले कालिदास समारोह की शुरुआत भी परंपरागत रूप से इस मंदिर में पूजा-अर्चना के साथ होती है। मंदिर का जीर्णोद्धार छठी शताब्दी में राजा हर्षवर्धन द्वारा कराए जाने की मान्यता है जबकि इसका वर्तमान स्वरूप ग्वालियर के महाराजा से जुड़ा बताया जाता है। साधना और तांत्रिक परंपराओं में भी इस स्थान का विशेष महत्व माना जाता है।महाकाल लोक के विकास के बाद उज्जैन में धार्मिक पर्यटन से जुड़ी सुविधाओं को बेहतर बनाने पर लगातार जोर दिया जा रहा है। गढ़कालिका लोक परियोजना भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। यदि योजना के अनुसार निर्माण पूरा होता है तो मंदिर परिसर में प्रवेश व्यवस्था पार्किंग और श्रद्धालुओं की कतारों का प्रबंधन पहले से बेहतर हो सकेगा। इससे न केवल भक्तों को सुविधा मिलने की उम्मीद है बल्कि उज्जैन के धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिल सकता है। फिलहाल सभी की नजर टेंडर प्रक्रिया पूरी होने और निर्माण कार्य शुरू होने पर है। -

जबलपुर के भेड़ाघाट में पर्यटकों को मिलेगी नौका विहार की सुविधा, नर्मदा उत्सव के लिए विशेष इंतजाम, सुरक्षा पर प्रशासन का जोर
जबलपुर। मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल भेड़ाघाट में नर्मदा उत्सव की तैयारियां तेज हो गई हैं। 24 और 25 अक्टूबर को आयोजित होने वाले इस उत्सव से पहले नगर परिषद पंचवटी क्षेत्र में नौका विहार की सुविधा दोबारा शुरू करने जा रही है। बरसात के कारण बंद नौका विहार सोमवार से शुरू करने की तैयारी की गई है। इसके साथ ही पर्यटकों और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। नगर परिषद ने नौका विहार के लिए 300 लाइफ जैकेट उपलब्ध कराई हैं। वहीं पंचकोसी यात्रा और नर्मदा परिक्रमा के दौरान श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए अतिरिक्त लाइफ जैकेट भी मंगाई गई हैं।भेड़ाघाट अपनी प्राकृतिक सुंदरता और नर्मदा नदी के मनमोहक दृश्यों के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। यहां स्थित पंचवटी क्षेत्र में नौका विहार पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। बरसात के दौरान नदी के जलस्तर और सुरक्षा संबंधी परिस्थितियों को देखते हुए नौका विहार बंद कर दिया गया था। अब मौसम और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए इसे फिर से शुरू करने की तैयारी की गई है। नौका विहार शुरू होने से यहां आने वाले पर्यटक नर्मदा के प्राकृतिक सौंदर्य का करीब से आनंद ले सकेंगे।24 और 25 अक्टूबर को होने वाले नर्मदा उत्सव को लेकर नगर परिषद की ओर से आयोजन स्थल पर व्यवस्थाएं बेहतर बनाने का काम किया जा रहा है। नौकाओं की व्यवस्था से लेकर साफ सफाई और पर्यटकों की सुविधाओं तक विभिन्न पहलुओं पर ध्यान दिया जा रहा है। नगर परिषद अध्यक्ष चतुर सिंह लोधी ने बताया कि उत्सव को देखते हुए जरूरी व्यवस्थाएं की जा रही हैं। उन्होंने लोगों से भेड़ाघाट पहुंचकर नौका विहार और नर्मदा उत्सव का आनंद लेने की अपील भी की है।नौका विहार के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को विशेष महत्व दिया जा रहा है। इसके लिए 300 लाइफ जैकेट उपलब्ध कराई गई हैं ताकि नौकाओं में बैठने वाले लोगों को सुरक्षा उपकरण मिल सकें। पंचकोसी यात्रा और नर्मदा परिक्रमा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस क्षेत्र में पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं की संख्या को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त लाइफ जैकेट भी मंगाई गई हैं। प्रशासन का प्रयास है कि धार्मिक यात्राओं और पर्यटन गतिविधियों के दौरान लोगों को आवश्यक सुरक्षा सुविधाएं उपलब्ध रहें।पंचकोसी यात्रा के दौरान पंचवटी से भेड़ाघाट के बीच नौकाओं का संचालन किया जाता है। इस दौरान नौकाओं में गोताखोरों की टीम भी तैनात रहती है ताकि किसी आपात स्थिति में तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जा सके। नदी में नौका विहार के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन करना महत्वपूर्ण होता है। लाइफ जैकेट का इस्तेमाल और नौका संचालकों के निर्देशों का पालन संभावित दुर्घटनाओं से बचाव में मदद कर सकता है।नगर परिषद अध्यक्ष चतुर सिंह लोधी के अनुसार श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा प्रशासन की प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से नौका विहार शुरू करने से पहले जरूरी व्यवस्थाओं को दुरुस्त किया जा रहा है। नर्मदा उत्सव के दौरान भेड़ाघाट में पर्यटकों और श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ने की संभावना है। ऐसे में साफ सफाई सुरक्षा और यातायात सहित सभी व्यवस्थाओं को बेहतर बनाए रखना जरूरी होगा।नौका विहार दोबारा शुरू होने और नर्मदा उत्सव की तैयारियों के साथ भेड़ाघाट में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। प्राकृतिक सौंदर्य और धार्मिक आस्था के लिए पहचाने जाने वाले इस क्षेत्र में आने वाले लोगों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। प्रशासन की तैयारियों के बीच पर्यटकों से भी अपील है कि वे सुरक्षा नियमों का पालन करें और नर्मदा की पवित्रता बनाए रखने में सहयोग दें। -

पचमढ़ी घूमने का बना रहे हैं प्लान तो ये जगहें जरूर देखें झरनों पहाड़ों और मंदिरों के बीच यादगार होगा सफर
नई दिल्ली। मध्यप्रदेश में अगर आप ऐसी जगह घूमने का प्लान बना रहे हैं जहां पहाड़ों की खूबसूरती के साथ हरियाली झरने और शांत वातावरण का आनंद लिया जा सके तो पचमढ़ी आपके लिए शानदार विकल्प हो सकता है। सतपुड़ा की पहाड़ियों के बीच बसा पचमढ़ी प्रदेश का प्रसिद्ध हिल स्टेशन है। यहां का प्राकृतिक वातावरण शहर की भागदौड़ से दूर कुछ समय सुकून के साथ बिताने का मौका देता है। परिवार दोस्तों या पार्टनर के साथ घूमने के लिए भी पचमढ़ी की यात्रा यादगार हो सकती है।पचमढ़ी की सबसे खास बात यहां का प्राकृतिक सौंदर्य है। चारों तरफ फैली हरियाली ऊंची पहाड़ियां और जंगल इस जगह को अलग पहचान देते हैं। बारिश के मौसम में यहां का नजारा और भी आकर्षक हो जाता है। पहाड़ियों से गिरते झरने और बादलों से ढके रास्ते पर्यटकों को अपनी ओर खींचते हैं। सर्दियों में मौसम सुहावना रहता है और सुबह तथा शाम के समय हल्की ठंड के बीच घूमने का अलग आनंद मिलता है।
पचमढ़ी में घूमने के लिए कई प्रसिद्ध स्थान हैं। बी फॉल यहां के लोकप्रिय झरनों में शामिल है जहां ऊंचाई से गिरता पानी और आसपास का हराभरा वातावरण पर्यटकों को आकर्षित करता है। झरने तक पहुंचने का रास्ता भी यात्रा को रोमांचक बनाता है। इसके अलावा अप्सरा विहार भी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। यहां पानी और चट्टानों के बीच कुछ समय बिताकर प्रकृति को करीब से महसूस किया जा सकता है।
धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व रखने वाले स्थानों में पांडव गुफाएं भी पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय हैं। इन गुफाओं से जुड़ी पौराणिक मान्यताएं इन्हें खास बनाती हैं। यहां आने वाले लोग प्राकृतिक वातावरण के साथ इस स्थान से जुड़ी धार्मिक परंपराओं को भी करीब से देखते हैं। चौरागढ़ और जटाशंकर जैसे स्थान भी पचमढ़ी यात्रा को खास बना सकते हैं। जटाशंकर मंदिर प्राकृतिक चट्टानों के बीच स्थित है और भगवान शिव से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं के कारण श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
अगर आपको सूर्योदय और सूर्यास्त के खूबसूरत नजारे पसंद हैं तो पचमढ़ी में सनसेट प्वाइंट और अन्य ऊंचे स्थानों का रुख किया जा सकता है। ऊंचाई से आसपास की पहाड़ियों और जंगलों का दृश्य बेहद आकर्षक दिखाई देता है। शाम के समय आसमान के बदलते रंगों के बीच पहाड़ियों का नजारा पर्यटकों को काफी पसंद आता है।
पचमढ़ी जाने से पहले मौसम की जानकारी लेना जरूरी है। मानसून के दौरान बारिश के कारण कुछ रास्तों और प्राकृतिक स्थानों पर सावधानी की जरूरत पड़ सकती है। आरामदायक जूते पहनना और जरूरी सामान साथ रखना बेहतर रहता है। झरनों या पहाड़ी इलाकों में सुरक्षा नियमों का पालन करना भी जरूरी है। प्रकृति के बीच घूमते समय प्लास्टिक या कचरा फैलाने से बचना चाहिए ताकि इस खूबसूरत पर्यटन स्थल की प्राकृतिक सुंदरता बनी रहे।
रुकने के लिए पचमढ़ी में अलग अलग बजट के अनुसार होटल और अन्य ठहरने के विकल्प मिल जाते हैं। स्थानीय भोजन का स्वाद लेने के साथ आसपास के बाजारों में खरीदारी भी की जा सकती है। यहां की यात्रा को आरामदायक बनाने के लिए कम से कम दो दिन का समय रखा जा सकता है ताकि प्रमुख पर्यटन स्थलों को जल्दबाजी के बिना देखा जा सके।
कुल मिलाकर पचमढ़ी उन लोगों के लिए खास जगह है जो पहाड़ों और प्रकृति के बीच कुछ समय बिताना चाहते हैं। यहां झरनों की आवाज हरियाली से घिरी पहाड़ियां धार्मिक स्थल और शांत वातावरण एक साथ देखने को मिलता है। यही वजह है कि पचमढ़ी मध्यप्रदेश में घूमने के लिए लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में अपनी अलग पहचान रखता है।
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भोपाल संभाग के युवाओं की रीवा यात्रा शुरू मुकुंदपुर सफारी से पुरवा प्रपात तक देखेंगे पर्यटन की खूबसूरती
भोपाल । भोपाल से रीवा की यात्रा पर निकले युवाओं के दल को उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह यात्रा मध्यप्रदेश सरकार की मां तुझे सलाम योजना के तहत आयोजित की गई है। दो दिवसीय इस भ्रमण के दौरान भोपाल संभाग के युवा रीवा जिले के प्रमुख पर्यटन और धार्मिक स्थलों को करीब से जानेंगे। इस यात्रा का आयोजन खेल एवं युवा कल्याण विभाग की ओर से किया गया है। दल में भोपाल के साथ सीहोर रायसेन विदिशा और राजगढ़ जिले के युवा शामिल हैं। यात्रा का उद्देश्य युवाओं को प्रदेश के महत्वपूर्ण स्थलों और उनकी सांस्कृतिक तथा प्राकृतिक विशेषताओं से परिचित कराना है।युवाओं को रीवा भ्रमण के दौरान महामृत्युंजय मंदिर संग्रहालय मुकुंदपुर व्हाइट टाइगर सफारी पुरवा प्रपात और बसामन मामा गौ अभ्यारण्य जैसे स्थानों पर ले जाया जाएगा। इन स्थलों के माध्यम से युवाओं को रीवा की धार्मिक परंपरा प्राकृतिक संपदा वन्यजीव और स्थानीय पर्यटन की विविधता को समझने का अवसर मिलेगा। रीवा संभाग लंबे समय से अपने जलप्रपात जंगलों और ऐतिहासिक तथा धार्मिक स्थलों के लिए जाना जाता है। इसी वजह से क्षेत्र में पर्यटन को आर्थिक गतिविधियों और रोजगार से जोड़ने की संभावनाओं पर भी जोर दिया जा रहा है।
यात्रा को रवाना करते हुए उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि मध्यप्रदेश और विशेष रूप से विंध्य क्षेत्र में पर्यटन के विकास की व्यापक संभावनाएं हैं। रीवा संभाग प्राकृतिक सुंदरता से समृद्ध है। यहां मौजूद वन जलप्रपात धार्मिक स्थल और वन्यजीव क्षेत्र पर्यटकों को आकर्षित करने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने मैहर चित्रकूट और अमरकंटक जैसे धार्मिक स्थलों के साथ मुकुंदपुर व्हाइट टाइगर सफारी पन्ना नेशनल पार्क संजय टाइगर रिजर्व बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व और संजय दुबरी अभ्यारण्य का भी उल्लेख किया। ऐसे पर्यटन स्थलों को बेहतर सुविधाओं और कनेक्टिविटी के जरिए ज्यादा लोगों तक पहुंचाने पर क्षेत्रीय विकास को गति मिल सकती है।
रीवा में पर्यटन को बढ़ावा देने में बेहतर कनेक्टिविटी को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि रीवा सड़क और रेल नेटवर्क से जुड़ा हुआ है। इसके साथ ही हवाई संपर्क में भी सुधार हुआ है। कनेक्टिविटी बेहतर होने से पर्यटकों के लिए रीवा पहुंचना आसान हो रहा है और आसपास के पर्यटन स्थलों को भी एक साथ देखने की संभावना बढ़ रही है। सप्ताहांत में आने वाले पर्यटकों के लिए भी यह सुविधा उपयोगी हो सकती है।
उप मुख्यमंत्री ने रीवा के 750 मेगावाट क्षमता वाले सोलर प्लांट का भी जिक्र किया। उन्होंने बसामन मामा गौ अभ्यारण्य में बड़ी संख्या में गौवंश के संरक्षण और प्राकृतिक खेती से जुड़े प्रयासों की जानकारी दी। उनके मुताबिक ऐसे प्रयास पर्यटन के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण से भी जुड़े हैं।
कार्यक्रम में युवाओं की भूमिका पर भी जोर दिया गया। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के विकास में युवा पीढ़ी की भागीदारी महत्वपूर्ण है। यात्रा के माध्यम से युवाओं को मध्यप्रदेश की प्राकृतिक सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को करीब से देखने का अवसर मिलेगा। संभागीय खेल अधिकारी एमके धौलपुरी के अनुसार दो दिनों तक चलने वाली इस यात्रा में युवाओं को रीवा के प्रमुख स्थलों का भ्रमण कराया जाएगा। इस दौरान जनप्रतिनिधियों और विभागीय अधिकारियों की मौजूदगी भी रही।
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बारिश में पचमढ़ी बन जाती है स्वर्ग की तस्वीर घूमने से पहले जान लें मौसम से लेकर जरूरी सावधानियां तक पूरी जानकारी
नई दिल्ली । मध्यप्रदेश की सतपुड़ा पहाड़ियों के बीच बसा पचमढ़ी बारिश के मौसम में अपनी खूबसूरती के चरम पर पहुंच जाता है। चारों तरफ फैली हरियाली पहाड़ियों से उतरते झरने बादलों से ढकी चोटियां और जंगलों के बीच छाई धुंध यहां आने वाले पर्यटकों को अलग ही अनुभव देती है। पचमढ़ी को मानसून में घूमने की खास वजह यहां के झरने और प्राकृतिक नजारे हैं। मध्यप्रदेश पर्यटन भी बारिश के मौसम में पचमढ़ी के धूपगढ़ और आसपास के प्राकृतिक स्थलों को खास आकर्षण के तौर पर बताता है।बारिश के मौसम में पचमढ़ी की सबसे खास बात यहां कऔर ठंडा मौसम है। सितंबर की शुरुआत में भी मौसम विभाग के पर्यटन पूर्वानुमान में पचमढ़ी में बादल और बारिश या गरज के साथ बौछारों की संभावना दर्ज की गई है। 3 सितंबर को यहां अधिकतम तापमान 24 डिग्री और न्यूनतम तापमान 19.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था जबकि पिछले 24 घंटे में 9 मिलीमीटर बारिश हुई थी। आने वाले दिनों में भी बादलों और बारिश का दौर बने रहने के संकेत मिले हैं।
मानसून में पचमढ़ी घूमने वालों के लिए बी फॉल्स राजत प्रपात और अप्सरा विहार खास आकर्षण बने रहते हैं। बारिश के बाद इन झरनों में पानी का प्रवाह बढ़ जाता है जिससे इनका नजारा बेहद शानदार दिखाई देता है। राजत प्रपात करीब 350 फीट की ऊंचाई से गिरता है और धूप पड़ने पर पानी की धार चांदी की पट्टी जैसी नजर आती है। अप्सरा विहार भी पर्यटकों के बीच लोकप्रिय है और यहां तक पहुंचने के लिए छोटा पैदल रास्ता तय करना पड़ता है।
इसके अलावा धूपगढ़ मानसून में पचमढ़ी की यात्रा का सबसे यादगार पड़ाव बन सकता है। बारिश के बाद पहाड़ों पर छाई धुंध और बादलों के बीच से दिखाई देने वाला नजारा पर्यटकों को आकर्षित करता है। सतपुड़ा की पहाड़ियों पर हरियाली की चादर बिछ जाती है और कई जगहों पर बादल इतने नीचे नजर आते हैं कि ऐसा लगता है जैसे पर्यटक बादलों के बीच खड़े हों। पचमढ़ी समुद्र तल से करीब 1067 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और इसी वजह से बारिश के दौरान यहां का वातावरण मैदानी इलाकों की तुलना में काफी ठंडा और खुशनुमा रहता है।
हालांकि बारिश के मौसम में पचमढ़ी घूमने का अपना रोमांच है लेकिन यात्रा के दौरान सावधानी भी बेहद जरूरी है। लगातार बारिश के बाद पहाड़ी रास्ते और ट्रैक फिसलन भरे हो सकते हैं इसलिए मजबूत ग्रिप वाले जूते पहनना बेहतर रहेगा। झरनों और गहरी घाटियों के आसपास सुरक्षा घेरा पार करने से बचना चाहिए। मौसम अचानक खराब होने पर ऊंचे और खुले स्थानों पर जाने से भी बचना जरूरी है। जंगल या ट्रैकिंग वाले क्षेत्रों में स्थानीय प्रशासन और गाइड के निर्देशों का पालन करना चाहिए।
बारिश में पचमढ़ी जाने वालों को छाता या रेनकोट के साथ अतिरिक्त कपड़े और मोबाइल को सुरक्षित रखने के लिए वाटरप्रूफ कवर भी रखना चाहिए। अगर यात्रा का उद्देश्य झरनों और हरियाली का आनंद लेना है तो सुबह का समय बेहतर रह सकता है क्योंकि बाद में बारिश तेज होने पर कुछ रास्तों पर आवाजाही प्रभावित हो सकती है। मौसम विभाग का ताजा पूर्वानुमान देखकर ही दिन की यात्रा तय करना समझदारी होगी।
कुल मिलाकर बारिश के मौसम में पचमढ़ी उन लोगों के लिए शानदार पर्यटन स्थल है जो भीड़भाड़ से दूर पहाड़ हरियाली झरने और बादलों के बीच कुछ सुकून भरे पल बिताना चाहते हैं। मानसून में यहां की प्रकृति का रंग पूरी तरह बदल जाता है और यही वजह है कि बारिश के दिनों में पचमढ़ी की यात्रा सामान्य पर्यटन से कहीं ज्यादा यादगार बन जाती है।
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MP में मानसून ट्रिप का है प्लान तो इन जगहों पर जरूर जाएं! झरनों से लेकर जंगल और किलों तक मिलेगा शानदार नजारा
नई दिल्ली । मानसून का मौसम आते ही मध्य प्रदेश की खूबसूरती कई गुना बढ़ जाती है। बारिश की बूंदों के साथ पहाड़ों पर छाई हरियाली बहते झरने जंगलों की ताजगी और बादलों से घिरे खूबसूरत नजारे लोगों को घूमने के लिए आकर्षित करते हैं। अगर आप भी बारिश के मौसम में परिवार दोस्तों या पार्टनर के साथ घूमने का प्लान बना रहे हैं तो मध्य प्रदेश आपके लिए शानदार विकल्प हो सकता है। प्रदेश में ऐसी कई जगहें हैं जहां मानसून के दौरान प्रकृति अपने सबसे खूबसूरत रूप में नजर आती है।मानसून ट्रैवल के लिए सबसे लोकप्रिय जगहों में पचमढ़ी का नाम सबसे ऊपर आता है। सतपुड़ा की पहाड़ियों के बीच बसा पचमढ़ी बारिश के मौसम में हरियाली से ढक जाता है। यहां पहाड़ों के बीच बादलों का नजारा और झरनों का बहता पानी पर्यटकों को खास अनुभव देता है। बी फॉल्स रजत प्रपात और जटाशंकर जैसी जगहों पर बारिश के दौरान प्राकृतिक सुंदरता और भी बढ़ जाती है। हालांकि झरनों के पास जाते समय स्थानीय प्रशासन की सुरक्षा गाइडलाइन का पालन करना जरूरी है।
इंदौर के आसपास रहने वाले लोगों के लिए पातालपानी मानसून में घूमने की अच्छी जगह हो सकती है। बारिश के दौरान यहां का झरना और आसपास की हरियाली मन मोह लेती है। दोस्तों और परिवार के साथ एक दिन की ट्रिप के लिए यह जगह आकर्षक विकल्प बन सकती है। तेज बारिश के समय पानी का बहाव अचानक बढ़ सकता है इसलिए झरने के बेहद करीब जाने से बचना चाहिए।
जबलपुर की बात करें तो भेड़ाघाट मानसून में अलग ही रूप में नजर आता है। नर्मदा नदी के किनारे संगमरमर की ऊंची चट्टानें और आसपास का प्राकृतिक वातावरण बारिश के बाद बेहद खूबसूरत दिखाई देता है। धुआंधार जलप्रपात भी पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। पानी का प्रवाह बढ़ने पर इसका नजारा और ज्यादा प्रभावशाली हो सकता है लेकिन यहां भी सुरक्षा व्यवस्था और स्थानीय निर्देशों का ध्यान रखना जरूरी है।
मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले का तामिया भी मानसून ट्रैवल के लिए बेहतरीन विकल्प माना जाता है। पहाड़ियों घाटियों और घने जंगलों से घिरा यह इलाका बारिश के मौसम में बेहद हरा भरा नजर आता है। यहां से दिखाई देने वाले प्राकृतिक दृश्य और शांत वातावरण उन लोगों को खास पसंद आ सकते हैं जो भीड़भाड़ से दूर कुछ समय बिताना चाहते हैं।
इसके अलावा मांडू भी बारिश के मौसम में घूमने के लिए आकर्षक जगह है। ऐतिहासिक इमारतों के साथ हरियाली और बादलों का मेल यहां के नजारों को खास बना देता है। भोपाल के आसपास भोजपुर और केरवा जैसे स्थान भी बारिश के दौरान प्रकृति प्रेमियों को आकर्षित करते हैं।
हालांकि मानसून में यात्रा करते समय खूबसूरत नजारों के साथ सुरक्षा का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। नदी झरने और जलप्रपात के पास सेल्फी लेने के लिए जोखिम उठाने से बचें। मौसम का पूर्वानुमान देखकर यात्रा की योजना बनाएं और रास्तों की स्थिति की जानकारी पहले हासिल करें। इस तरह थोड़ी सावधानी के साथ मध्य प्रदेश का मानसून ट्रिप खूबसूरत यादों से भरपूर बनाया जा सकता है।
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पातालपानी-कालाकुंड के सफर का इंतजार खत्म होने वाला, बीकानेर से मेंटेन होकर इंदौर पहुंचा रैक; ट्रायल के बाद शुरू होगी ट्रेन
इंदौर। 15 अगस्त का लॉन्ग वीकेंड गुजर चुका है लेकिन इंदौर और आसपास के पर्यटकों के लिए बारिश के मौसम की सबसे खास सैर यानी पातालपानी-कालाकुंड हेरिटेज ट्रेन अब तक शुरू नहीं हो सकी है। इस समय पातालपानी का झरना पूरे वेग से बह रहा है। पहाड़ घने हरे रंग में ढके हैं और घाटियों में बादलों का खूबसूरत डेरा नजर आ रहा है। ऐसे मौसम में पर्यटक इस ऐतिहासिक ट्रेन के शुरू होने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। रेलवे भी अब ट्रेन संचालन की तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुट गया है। हेरिटेज ट्रेन का पूरा रैक मेंटेनेंस के बाद बीकानेर से इंदौर पहुंच चुका है और रविवार सुबह यह लक्ष्मीबाई नगर स्टेशन पहुंचा।अब रेलवे इस रैक को महू के रास्ते पातालपानी ले जाएगा। वहां क्रेन की मदद से कोचों को ट्रैक पर उतारा जाएगा। इसके बाद कोचों को इंजन के साथ जोड़कर उनकी अलाइनमेंट और अन्य तकनीकी व्यवस्थाओं की जांच की जाएगी। इन तैयारियों के बाद रेलवे की ओर से ट्रायल रन किया जाएगा। ट्रायल के दौरान रैक की स्थिति के साथ ट्रैक संचालन व्यवस्था और सुरक्षा से जुड़े सभी मानकों को परखा जाएगा। यदि सभी व्यवस्थाएं निर्धारित मानकों के अनुरूप पाई जाती हैं तो यात्री संचालन की अनुमति दी जाएगी। रेलवे की मौजूदा तैयारी अगले सप्ताह शनिवार से हेरिटेज ट्रेन शुरू करने की है।
इस साल ट्रेन के शुरू होने में हुई देरी की मुख्य वजह रैक का मेंटेनेंस बताया जा रहा है। आमतौर पर मानसून के दौरान पातालपानी और कालाकुंड का इलाका पर्यटकों के लिए खास आकर्षण बन जाता है। बारिश के साथ यहां की प्राकृतिक खूबसूरती कई गुना बढ़ जाती है। पहाड़ों से गिरते झरने घने जंगल घुमावदार रेल ट्रैक और बादलों से घिरी घाटियां इस सफर को रोमांचक बना देती हैं। यही वजह है कि हेरिटेज ट्रेन के संचालन का इंतजार हर साल पर्यटकों को रहता है।
पिछले साल हेरिटेज ट्रेन का संचालन 26 जुलाई से शुरू होकर 16 नवंबर 2025 तक हुआ था। इस बार अगस्त का आधा महीना बीत जाने के बाद भी यात्री सेवा शुरू नहीं हो पाई। ऐसे में अब रैक के इंदौर पहुंचने के बाद उम्मीद बढ़ी है कि जल्द ही ट्रायल रन पूरा कर ट्रेन को यात्रियों के लिए शुरू किया जा सकता है। हालांकि अंतिम तारीख रेलवे की ओर से आधिकारिक घोषणा और ट्रायल के बाद ही स्पष्ट होगी।
पातालपानी-कालाकुंड रेलखंड सिर्फ पर्यटन के लिहाज से ही नहीं बल्कि इतिहास के लिहाज से भी बेहद खास है। करीब 155 साल पुराने इस रेलखंड की शुरुआत वर्ष 1870 में इंदौर रियासत के महाराजा तुकोजीराव होलकर द्वितीय की पहल से हुई थी। वर्ष 1878 तक होलकर स्टेट रेलवे के तहत इसका निर्माण पूरा हो गया था। बाद में यह रेलखंड राजपुताना-मालवा रेलवे का हिस्सा बना। समय के साथ आसपास की कई मीटरगेज रेल लाइनों को ब्रॉडगेज में बदल दिया गया लेकिन पहाड़ी और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण यह रेलखंड अपनी पुरानी पहचान के साथ सुरक्षित रहा।
रेलवे ने इस ऐतिहासिक ट्रैक को संरक्षित रखते हुए 25 दिसंबर 2018 को पहली बार हेरिटेज ट्रेन शुरू की थी। पातालपानी से कालाकुंड तक करीब 9.5 किलोमीटर का यह सफर छोटा जरूर है लेकिन रोमांच से भरपूर है। इस मार्ग में चार सुरंगें करीब 24 तीखे मोड़ छह बड़े और 35 छोटे पुल आते हैं। ट्रेन जैसे ही पहाड़ों के बीच आगे बढ़ती है एक तरफ घने जंगल और पहाड़ दिखाई देते हैं जबकि दूसरी ओर गहरी घाटियां सफर को रोमांचक बना देती हैं।
मानसून के दौरान इस पूरे रेलखंड का नजारा बेहद आकर्षक हो जाता है। पातालपानी का झरना तेज बहाव के साथ नजर आता है और चारों ओर हरियाली छा जाती है। घाटियों में तैरते बादल और घुमावदार ट्रैक यात्रियों के लिए यादगार अनुभव बनते हैं। अब मेंटेन रैक के इंदौर पहुंचने के बाद पर्यटकों की नजर रेलवे के ट्रायल रन और आधिकारिक संचालन तारीख पर टिकी है। अगर तकनीकी और सुरक्षा जांच तय मानकों के अनुसार पूरी होती है तो अगले शनिवार से पातालपानी-कालाकुंड की खूबसूरत हेरिटेज ट्रेन एक बार फिर पटरी पर दौड़ती नजर आ सकती है।
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उज्जैन में लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ का अनुमान, मांडू में कमरों का टोटा; महेश्वर में लग्जरी रूम का किराया 60 हजार तक
मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में मानसून के साथ पर्यटन का रंग भी गहरा हो गया है। बारिश ने मांडू की पहाड़ियों और ऐतिहासिक इमारतों से लेकर महेश्वर के नर्मदा घाटों तक की खूबसूरती बढ़ा दी है। इसी वजह से वीकेंड पर बड़ी संख्या में पर्यटक इन जगहों का रुख कर रहे हैं। दूसरी तरफ सावन का महीना और धार्मिक आयोजनों ने उज्जैन दतिया और नलखेड़ा जैसे धार्मिक शहरों में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ा दी है। नतीजा यह है कि कई पर्यटन और धार्मिक स्थलों पर होटल और होम स्टे पहले से बुक हो चुके हैं। मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग भी मांडू महेश्वर उज्जैन और दूसरे प्रमुख स्थलों को अपने पर्यटन सर्किट में शामिल करता है।सबसे ज्यादा असर मांडू में दिखाई दे रहा है। बारिश के मौसम में मांडू की हरियाली झरने और ऐतिहासिक स्मारक पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। 14 से 16 अगस्त तक यहां कई होटल पूरी तरह बुक बताए जा रहे हैं और नो रूम जैसी स्थिति बन गई है। मांडू में सरकारी और निजी होटलों के साथ धर्मशालाओं में भी ठहरने की सुविधा है। सामान्य कमरों से लेकर बेहतर सुविधाओं वाले कमरों तक किराये में काफी अंतर है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक यहां कमरा करीब 500 रुपए से शुरू होकर 10 हजार रुपए तक पहुंच सकता है। बारिश के कारण वीकेंड पर मांग बढ़ने से एडवांस बुकिंग कराने वालों को ज्यादा आसानी हो रही है।
मांडू सिर्फ प्राकृतिक खूबसूरती के लिए ही नहीं बल्कि अपने ऐतिहासिक वैभव के लिए भी प्रसिद्ध है। यहां जहाज महल रानी रूपमती महल बाज बहादुर महल अशरफी महल और होशंग शाह का मकबरा जैसे प्रमुख स्थल हैं। बारिश में इन स्मारकों के आसपास का नजारा और भी आकर्षक हो जाता है। यही वजह है कि अगस्त के इस दौर में पर्यटकों की संख्या बढ़ रही है।
नर्मदा किनारे बसे महेश्वर की तस्वीर भी कुछ ऐसी ही है लेकिन यहां ठहरने के विकल्प अपेक्षाकृत ज्यादा हैं। महेश्वर में होटल होम स्टे रिजॉर्ट धर्मशाला और पर्यटन निगम के ठहरने के विकल्प मौजूद हैं। यहां सामान्य कमरों का किराया करीब 1200 रुपए से शुरू बताया जा रहा है जबकि हेरिटेज और लग्जरी प्रॉपर्टीज में रॉयल रूम की कीमत 60 हजार रुपए तक पहुंच सकती है। मध्य प्रदेश पर्यटन की आधिकारिक सामग्री में भी महेश्वर के लिए Narmada Retreat जैसे ठहरने के विकल्प सूचीबद्ध हैं।
महेश्वर आने वाले पर्यटक अक्सर एक ही यात्रा में ओंकारेश्वर मांडू और उज्जैन को भी शामिल करते हैं। अहिल्या बाई होलकर की विरासत होलकर किला नर्मदा के घाट और धार्मिक स्थल यहां के प्रमुख आकर्षण हैं। ऐसे में वीकेंड पर पर्यटकों की संख्या बढ़ने के साथ अच्छे कमरों की मांग भी बढ़ जाती है।
उज्जैन में मामला पर्यटन से ज्यादा धार्मिक भीड़ का है। सावन के दौरान महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती है और सोमवार को भीड़ और ज्यादा रहने की संभावना रहती है। हाल के यात्रियों के अनुभवों में भी सावन के दौरान सोमवार और वीकेंड को सबसे ज्यादा भीड़ से बचने की सलाह दी गई है।
इसी तरह आगर मालवा के नलखेड़ा स्थित मां बगलामुखी मंदिर में शनिवार और रविवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। यहां होटल और ठहरने के दूसरे विकल्प पहले से बुक होने लगे हैं। दतिया में मां पीतांबरा पीठ के कारण वीकेंड पर श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ जाती है और उपलब्ध जानकारी के मुताबिक बड़ी संख्या में कमरे पहले ही बुक हो चुके हैं।
ओरछा में भी राम राजा सरकार के मंदिर के कारण धार्मिक पर्यटन लगातार बना रहता है। यहां छोटे बड़े होटल और होम स्टे उपलब्ध हैं। वहीं खजुराहो में अगस्त के दौरान पर्यटन सीजन अपेक्षाकृत कमजोर रहने के बावजूद वीकेंड पर पर्यटकों की संख्या बढ़ सकती है। बड़े होटलों में किराये की रेंज काफी ऊंची है और फाइव स्टार प्रॉपर्टीज में कमरे 30 से 60 हजार रुपए तक पहुंच सकते हैं।
ऐसे में अगर इस वीकेंड मध्य प्रदेश के किसी पर्यटन या धार्मिक स्थल पर जाने का प्लान है तो सबसे जरूरी सलाह यही है कि होटल की बुकिंग पहले कर लें। खासकर मांडू और उज्जैन जैसे स्थानों पर मौके पर कमरा मिलने की गारंटी नहीं मानी जा सकती। बारिश का मौसम पर्यटन के लिए बेहद खूबसूरत है लेकिन बढ़ती भीड़ के बीच बेहतर यात्रा के लिए ठहरने और आने जाने की व्यवस्था पहले से तय करना ज्यादा समझदारी होगी।
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MP में मानसून टूरिज्म का जबरदस्त क्रेज! मांडू में 14 से 16 अगस्त तक नो रूम, दतिया में 95% कमरे बुक
मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश में मानसून के साथ पर्यटन का रंग भी गहरा हो गया है। बारिश के बाद झरनों पहाड़ियों नदियों और ऐतिहासिक स्मारकों की खूबसूरती पर्यटकों को आकर्षित कर रही है। वहीं सावन सोमवार और नागपंचमी जैसे धार्मिक आयोजनों ने उज्जैन और दूसरे धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ा दी है। पचमढ़ी मांडू महेश्वर उज्जैन दतिया नलखेड़ा और ओरछा जैसे प्रमुख पर्यटन और धार्मिक केंद्रों में वीकेंड के दौरान होटल और गेस्ट हाउस की बुकिंग तेजी से बढ़ रही है। कई जगहों पर कमरे पहले से बुक हो चुके हैं और जहां कमरे उपलब्ध हैं वहां बढ़ती मांग के कारण किराया भी सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ गया है।मांडू में बारिश के मौसम में ऐतिहासिक इमारतों और पहाड़ियों का नजारा बेहद आकर्षक हो जाता है। यही वजह है कि 14 से 16 अगस्त के बीच यहां होटल पूरी तरह बुक बताए जा रहे हैं। मांडू में करीब 2 सरकारी और 20 निजी होटल के अलावा 2 धर्मशालाएं हैं। यहां लगभग 800 कमरों की उपलब्धता है। सामान्य तौर पर कमरों का किराया 500 रुपए से शुरू होकर 10 हजार रुपए तक पहुंचता है। धर्मशालाओं में करीब 2 हजार रुपए तक में ठहरने की सुविधा मिल सकती है। मांडू में जहाज महल रानी रूपमती महल बाज बहादुर महल अशरफी महल और होशंग शाह का मकबरा जैसे ऐतिहासिक स्थल पर्यटकों के प्रमुख आकर्षण हैं।
उज्जैन में स्थिति और ज्यादा खास है। सावन सोमवार और नागपंचमी एक साथ पड़ने के कारण श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है। शनिवार और रविवार को करीब 3 से 4 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है जबकि सावन सोमवार और नागपंचमी के दिन यह संख्या 5 से 6 लाख तक पहुंच सकती है। इसके चलते शहर के अधिकांश होटल पहले ही बुक हो चुके हैं। बचे हुए कमरों के किराए में भी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। सामान्य दिनों में 1500 रुपए में मिलने वाला कमरा वीकेंड पर करीब 2000 रुपए तक पहुंच गया है। महाकाल लोक के आसपास छोटे होटलों में किराया लगभग दोगुना तक बढ़ा है जबकि बड़े होटल 15 से 35 प्रतिशत तक अधिक कीमत ले रहे हैं।
नर्मदा किनारे बसे महेश्वर में भी पर्यटकों की अच्छी भीड़ है। यहां 120 से ज्यादा होटल होम स्टे रिजॉर्ट धर्मशालाएं और पर्यटन निगम के ठहरने के विकल्प मौजूद हैं। कमरे का शुरुआती किराया करीब 1200 रुपए है लेकिन हेरिटेज और लग्जरी प्रॉपर्टीज में रॉयल रूम की कीमत 60 हजार रुपए तक पहुंच रही है। महेश्वर आने वाले पर्यटक अक्सर ओंकारेश्वर उज्जैन और मांडू का भी रुख करते हैं। अहिल्याबाई होलकर की विरासत होलकर फोर्ट और नर्मदा के घाट यहां के प्रमुख आकर्षण हैं।
आगर मालवा के नलखेड़ा में मां बगलामुखी मंदिर के कारण हर शनिवार और रविवार श्रद्धालुओं की अच्छी भीड़ रहती है। शहर में करीब 45 होटल हैं और कमरों का किराया 500 से 4500 रुपए तक है। वीकेंड को देखते हुए यहां भी एडवांस बुकिंग शुरू हो चुकी है।
ओरछा में राजा राम मंदिर के कारण धार्मिक पर्यटन लगातार बना रहता है। यहां करीब 15 बड़े और 50 छोटे होटल के साथ लगभग 20 होम स्टे हैं। कमरों का किराया 3 हजार से 15 हजार रुपए तक बताया जाता है। वहीं दतिया में पीतांबरा माता मंदिर के चलते श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ रही है। शहर के करीब 90 होटल और धर्मशालाओं में लगभग 95 प्रतिशत कमरे पहले ही बुक हो चुके हैं।
खजुराहो में फिलहाल पर्यटन सीजन अपेक्षाकृत कमजोर बताया जा रहा है लेकिन वीकेंड पर यहां भी पर्यटकों की संख्या बढ़ती है। करीब 200 होटल होम स्टे और अन्य ठहरने के विकल्प मौजूद हैं। फाइव स्टार होटलों का टैरिफ 30 से 60 हजार रुपए तक जबकि थ्री स्टार होटलों में ऑफ सीजन में करीब 5 से 7 हजार और सीजन में 10 से 12 हजार रुपए तक किराया पहुंच सकता है।
ऐसे में अगर इस वीकेंड मध्य प्रदेश के किसी पर्यटन या धार्मिक स्थल पर घूमने का प्लान है तो होटल की एडवांस बुकिंग कराना समझदारी होगी। मानसून की खूबसूरती और धार्मिक आयोजनों के कारण इस समय कई लोकप्रिय जगहों पर आखिरी समय में कमरा मिलना मुश्किल हो सकता है।