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  • गर्मी में घूमने के लिए मध्य प्रदेश की ठंडी जगहें, 5 दिन में पूरा करें यादगार सफर..

    गर्मी में घूमने के लिए मध्य प्रदेश की ठंडी जगहें, 5 दिन में पूरा करें यादगार सफर..

    मध्य प्रदेश :गर्मी के मौसम में जब तापमान लगातार बढ़ता है, तब लोग ऐसी जगहों की तलाश करते हैं जहां ठंडक, सुकून और प्राकृतिक सुंदरता एक साथ मिल सके। मध्य प्रदेश भारत का दिल कहा जाता है और यहां कई ऐसी पर्यटन स्थल मौजूद हैं जो गर्मियों में बेहतरीन ट्रैवल डेस्टिनेशन साबित होते हैं। पचमढ़ी से लेकर खजुराहो और पन्ना नेशनल पार्क तक, यह पूरा सफर प्रकृति, इतिहास और रोमांच का अनोखा अनुभव कराता है।

    पचमढ़ी: सतपुड़ा की रानी में ठंडी राहत

    यात्रा की शुरुआत पचमढ़ी से करना सबसे बेहतर माना जाता है। इसे सतपुड़ा की रानी कहा जाता है और यह मध्य प्रदेश का एकमात्र हिल स्टेशन है जहां गर्मियों में भी मौसम सुहावना रहता है। भोपाल से इसकी दूरी लगभग 200 किलोमीटर है, जिसे 5 से 6 घंटे में पूरा किया जा सकता है। यहां बी फॉल, धूपगढ़ और जटाशंकर मंदिर प्रमुख आकर्षण हैं। दो दिन के लिए यहां का अनुमानित खर्च लगभग 2000 से 4000 रुपये तक रहता है।

    सांची: इतिहास और शांति का संगम

    पचमढ़ी के बाद सांची की यात्रा की जा सकती है। भोपाल से लगभग 46 किलोमीटर दूर स्थित यह स्थान बौद्ध स्तूपों के लिए विश्व प्रसिद्ध है। यहां का शांत वातावरण और ऐतिहासिक महत्व पर्यटकों को आकर्षित करता है। यात्रा में लगभग 1 से 1.5 घंटे लगते हैं और खर्च 500 से 1500 रुपये तक हो सकता है।

    खजुराहो: विश्व धरोहर की अद्भुत कला

    सांची से आगे बढ़ते हुए खजुराहो पहुंचा जा सकता है, जो अपनी अद्भुत मंदिर वास्तुकला के लिए विश्व प्रसिद्ध है। सांची से इसकी दूरी लगभग 350 किलोमीटर है और सड़क मार्ग से 7 से 8 घंटे लगते हैं। यहां के मंदिर भारतीय कला और संस्कृति की अनोखी झलक पेश करते हैं। इस यात्रा का अनुमानित खर्च 2000 से 3000 रुपये तक रहता है।

    पन्ना नेशनल पार्क: जंगल सफारी का रोमांच

    खजुराहो के पास ही पन्ना नेशनल पार्क स्थित है, जो वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक बेहतरीन जगह है। यहां टाइगर सफारी और प्राकृतिक वातावरण का आनंद लिया जा सकता है। खजुराहो से इसकी दूरी लगभग 25 किलोमीटर है और 30 से 40 मिनट में पहुंचा जा सकता है। सफारी सहित यहां का खर्च लगभग 1500 से 3000 रुपये तक होता है।

    पूरा ट्रैवल प्लान और खर्च

    यह पूरा सफर 4 से 5 दिनों में आसानी से पूरा किया जा सकता है। यात्रा की शुरुआत भोपाल से करते हुए पचमढ़ी, फिर सांची, उसके बाद खजुराहो और अंत में पन्ना नेशनल पार्क का दौरा किया जा सकता है। कुल दूरी लगभग 700 से 800 किलोमीटर रहती है। इस पूरे ट्रिप का खर्च प्रति व्यक्ति लगभग 8000 से 15000 रुपये तक आ सकता है।

  • पन्ना टाइगर रिजर्व में पर्यटकों को मिला दुर्लभ नजारा, बाघिन P-142 अपने शावकों के साथ जंगल में करती दिखी अठखेलियां

    पन्ना टाइगर रिजर्व में पर्यटकों को मिला दुर्लभ नजारा, बाघिन P-142 अपने शावकों के साथ जंगल में करती दिखी अठखेलियां

    मध्यप्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व में वन्यजीव प्रेमियों को एक ऐसा दुर्लभ और मनमोहक दृश्य देखने को मिला जिसने सफारी के पूरे अनुभव को यादगार बना दिया। हिनौता क्षेत्र में जंगल सफारी पर निकले पर्यटकों को उस समय रोमांच और उत्साह का अनुभव हुआ जब उन्हें बाघिन P-142 अपने दो छोटे शावकों के साथ प्राकृतिक वातावरण में विचरण करते हुए दिखाई दी। यह दृश्य न केवल रोमांचकारी था बल्कि जंगल की जीवंतता और उसमें चल रही प्राकृतिक प्रक्रियाओं की एक सुंदर झलक भी प्रस्तुत करता है।

    सफारी के दौरान अचानक सामने आए इस दृश्य ने पर्यटकों को पूरी तरह उत्साहित कर दिया। बाघिन अपने शावकों के साथ बेहद शांत और सतर्क अवस्था में नजर आई, जबकि नन्हे शावक अपने मासूम और चंचल व्यवहार से सभी का ध्यान आकर्षित कर रहे थे। कभी वे मां के करीब जाकर स्नेह जताते दिखे तो कभी झाड़ियों के बीच छिपकर खेलते और अपने प्राकृतिक व्यवहार को समझने की कोशिश करते नजर आए। यह पूरा दृश्य जंगल में जीवन के स्वाभाविक विकास और सीखने की प्रक्रिया को स्पष्ट रूप से दर्शा रहा था।

    इस अनोखे अनुभव को पर्यटकों ने कैमरों में कैद कर लिया। तस्वीरों और वीडियो में बाघिन की सतर्कता, शावकों की मासूम हरकतें और जंगल का शांत वातावरण एक साथ देखने को मिला। कुछ समय तक पर्यटकों के सामने रहने के बाद बाघिन धीरे धीरे अपने शावकों को लेकर घने जंगल की ओर बढ़ गई और देखते ही देखते सभी दृश्य से ओझल हो गए। यह क्षण पर्यटकों के लिए लंबे समय तक याद रहने वाला अनुभव बन गया।

    इस घटना ने एक बार फिर यह साबित किया है कि सुरक्षित और संतुलित प्राकृतिक वातावरण में वन्यजीव न केवल सुरक्षित रहते हैं बल्कि अपनी प्राकृतिक जीवनशैली को पूरी स्वतंत्रता के साथ जीते हैं। पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघों की बढ़ती संख्या और उनका सफल प्रजनन इस क्षेत्र की मजबूत पारिस्थितिकी व्यवस्था का संकेत देता है। यह संरक्षण प्रयासों की सफलता को भी दर्शाता है, जहां प्रकृति और वन्यजीवों के बीच संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।

    ऐसे दृश्य यह संदेश देते हैं कि जब प्राकृतिक आवास सुरक्षित रहते हैं तो वन्यजीव अपनी पूरी सहजता के साथ जीवन जीते हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रकृति का संतुलन बनाए रखने में योगदान देते हैं।

  • मिडिल ईस्ट तनाव का असर मध्यप्रदेश पर: 10 हजार टूरिस्ट ने रोकी विदेश यात्रा, करीब 60 करोड़ का ट्रैवल कारोबार प्रभावित

    मिडिल ईस्ट तनाव का असर मध्यप्रदेश पर: 10 हजार टूरिस्ट ने रोकी विदेश यात्रा, करीब 60 करोड़ का ट्रैवल कारोबार प्रभावित


    नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट और यूरोप में बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनाव का असर अब मध्यप्रदेश के टूरिज्म सेक्टर पर भी साफ दिखाई देने लगा है। दुबई और आसपास के देशों की यात्रा करने वाले हजारों लोगों ने फिलहाल अपने ट्रैवल प्लान रोक दिए हैं। ट्रैवल इंडस्ट्री के अनुसार इस सीजन में प्रदेश से करीब 10 हजार लोगों के मिडिल ईस्ट जाने की संभावना थी, लेकिन मौजूदा हालात के कारण बड़ी संख्या में यात्रियों ने अपनी बुकिंग रद्द कर दी या नई बुकिंग ही नहीं कराई।

    ऑनलाइन ट्रैवल प्लेटफॉर्म MakeMyTrip की भोपाल लोकेशन हेड Richa Singh Bhadauria के मुताबिक लगभग 2 से 2.5 हजार यात्रियों ने पहले से फ्लाइट और टूर पैकेज बुक कर लिए थे, जो सीधे प्रभावित हुए हैं। वहीं करीब 7 से 8 हजार संभावित यात्रियों ने अनिश्चित हालात को देखते हुए अपनी यात्रा योजनाएं टाल दी हैं। हालांकि फिलहाल इंटरनेशनल ट्रैवल पूरी तरह बंद नहीं हुआ है, लेकिन पर्यटन कारोबार में साफ तौर पर सुस्ती देखी जा रही है।

    60 करोड़ का संभावित कारोबार अटका
    मिडिल ईस्ट देशों के लिए औसतन एक ट्रैवल पैकेज 60 से 70 हजार रुपए प्रति व्यक्ति का होता है। यदि 60 हजार रुपए का औसत और 10 हजार यात्रियों का अनुमान लगाया जाए तो करीब 60 करोड़ रुपए का संभावित ट्रैवल कारोबार प्रभावित माना जा रहा है। हालांकि सभी मामलों में पूरी राशि का नुकसान नहीं हुआ है, क्योंकि कई एयरलाइंस यात्रियों को रिफंड या क्रेडिट शेल का विकल्प दे रही हैं।

    60–70% यात्रियों को मिला पूरा रिफंड
    ट्रैवल एजेंसियों के अनुसार प्रभावित बुकिंग्स में से लगभग 60 से 70 प्रतिशत यात्रियों को पूरा रिफंड मिल गया है। ऐसा उन मामलों में हुआ जहां एयरलाइंस ने खुद फ्लाइट रद्द की या शेड्यूल बदला। वहीं करीब 15 से 25 प्रतिशत यात्रियों को आंशिक नुकसान हुआ है, जो मुख्य रूप से वीजा फीस, होटल कैंसिलेशन पॉलिसी या नॉन-रिफंडेबल बुकिंग के कारण हुआ। कई यात्रियों ने रिफंड लेने के बजाय भविष्य के लिए ट्रैवल क्रेडिट या क्रेडिट शेल का विकल्प चुना है।

    भोपाल और इंदौर से सबसे ज्यादा कैंसिलेशन
    ट्रैवल ट्रेड के अनुभव के अनुसार मध्यप्रदेश में इंटरनेशनल लीजर ट्रैवल सबसे ज्यादा भोपाल और इंदौर से होता है। इसलिए इन शहरों से कैंसिलेशन का असर भी ज्यादा दिखाई दे रहा है। जबलपुर और ग्वालियर में भी कुछ प्रभाव देखा गया है, लेकिन फिलहाल पूरे प्रदेश में पर्यटन गतिविधियां पूरी तरह ठप नहीं हुई हैं बल्कि धीमी पड़ गई हैं।

    क्रूज ट्रैवल में भी 30–40% गिरावट
    वैश्विक अनिश्चितता का असर इंटरनेशनल क्रूज ट्रैवल पर भी पड़ा है। इस सीजन में क्रूज बुकिंग में लगभग 30 से 40 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि अधिकतर यात्री अपनी यात्रा पूरी तरह रद्द करने के बजाय उसे आगे की तारीख के लिए टालना पसंद कर रहे हैं।

    लीजर ट्रैवल सबसे ज्यादा प्रभावित
    मौजूदा हालात का सबसे ज्यादा असर लीजर ट्रैवल सेगमेंट पर पड़ा है, जिसमें फैमिली हॉलीडे, हनीमून ट्रिप और ग्रुप टूर शामिल हैं। इसके मुकाबले कॉर्पोरेट ट्रैवल अपेक्षाकृत स्थिर बना हुआ है, क्योंकि बिजनेस मीटिंग और काम से जुड़े यात्राओं को पूरी तरह टालना कई बार संभव नहीं होता।

    एयरलाइंस दे रही लचीले विकल्प
    मौजूदा स्थिति को देखते हुए कई एयरलाइंस यात्रियों को राहत देने की कोशिश कर रही हैं। कुछ कंपनियां क्रेडिट शेल की वैधता बढ़ा रही हैं, जबकि कई एयरलाइंस बिना अतिरिक्त शुल्क के भविष्य की तारीख पर रीबुकिंग की सुविधा दे रही हैं। ट्रैवल इंडस्ट्री का फोकस फिलहाल यात्रियों का भरोसा बनाए रखने और सुरक्षित समय पर यात्रा की सुविधा उपलब्ध कराने पर है।

    तनाव लंबा चला तो बढ़ सकता है असर
    ट्रैवल इंडस्ट्री का मानना है कि फिलहाल स्थिति कोविड जैसी नहीं है, क्योंकि फ्लाइट्स चालू हैं और यात्रा पूरी तरह बंद नहीं हुई है। लेकिन अगर मिडिल ईस्ट में जियोपॉलिटिकल तनाव अगले दो से तीन महीने तक जारी रहता है, तो इंटरनेशनल टूरिज्म में गिरावट और बढ़ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे ही वैश्विक हालात सामान्य होंगे, यात्रियों की मांग फिर तेजी से वापस लौट सकती है।

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  • मिडिल ईस्ट तनाव का असर मध्यप्रदेश के पर्यटन पर: 10 हजार यात्रियों ने रोकी विदेश यात्रा, 60 करोड़ का कारोबार प्रभावित

    मिडिल ईस्ट तनाव का असर मध्यप्रदेश के पर्यटन पर: 10 हजार यात्रियों ने रोकी विदेश यात्रा, 60 करोड़ का कारोबार प्रभावित



    नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट और यूरोप क्षेत्र में बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनाव का असर अब मध्यप्रदेश के पर्यटन कारोबार पर भी दिखाई देने लगा है। दुबई और आसपास के देशों की यात्रा करने वाले हजारों पर्यटकों ने फिलहाल अपने प्लान रोक दिए हैं। ट्रैवल इंडस्ट्री से जुड़े आंकड़ों के अनुसार इस सीजन में प्रदेश से करीब 10 हजार लोगों के मिडिल ईस्ट जाने की उम्मीद थी, लेकिन मौजूदा वैश्विक हालात के कारण बड़ी संख्या में यात्रियों ने यात्रा टाल दी है।

    हजारों बुकिंग प्रभावित, कई यात्रियों ने नए प्लान ही नहीं बनाए
    ट्रैवल कंपनियों के मुताबिक करीब 2 से 2.5 हजार यात्रियों ने पहले ही फ्लाइट और टूर पैकेज बुक कर लिए थे, जिन पर सीधे असर पड़ा है। वहीं करीब 7 से 8 हजार संभावित यात्रियों ने हालात को देखते हुए नई बुकिंग ही नहीं कराई या अपनी यात्रा संबंधी पूछताछ वापस ले ली। फिलहाल अंतरराष्ट्रीय यात्रा पूरी तरह बंद नहीं हुई है, लेकिन ट्रैवल इंडस्ट्री में साफ तौर पर मंदी का संकेत दिखाई देने लगा है।

    करीब 60 करोड़ रुपये का संभावित कारोबार प्रभावित
    मिडिल ईस्ट देशों के लिए औसतन एक ट्रैवल पैकेज 60 से 70 हजार रुपये प्रति व्यक्ति का होता है। अगर औसत 60 हजार रुपये प्रति व्यक्ति और 10 हजार यात्रियों का अनुमान लगाया जाए तो करीब 60 करोड़ रुपये का संभावित कारोबार प्रभावित माना जा रहा है। हालांकि कई एयरलाइंस यात्रियों को रिफंड, क्रेडिट शेल या रीबुकिंग का विकल्प दे रही हैं, जिससे पूरा नुकसान नहीं माना जा रहा।

    भोपाल और इंदौर से सबसे ज्यादा असर
    ट्रैवल एजेंसियों के अनुसार मध्यप्रदेश में इंटरनेशनल लीजर ट्रैवल सबसे ज्यादा भोपाल और इंदौर से होता है। इसलिए इन शहरों से बुकिंग कैंसिलेशन का असर भी ज्यादा दिखाई दे रहा है। जबलपुर और ग्वालियर में भी प्रभाव है, लेकिन फिलहाल पूरे प्रदेश में पर्यटन गतिविधियां पूरी तरह रुकी नहीं हैं बल्कि धीमी पड़ी हैं।

    क्रूज ट्रैवल में भी आई गिरावट
    वैश्विक अनिश्चितता का असर इंटरनेशनल क्रूज ट्रैवल पर भी पड़ा है। इस सीजन में क्रूज बुकिंग में लगभग 30 से 40 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि अधिकतर यात्री क्रूज ट्रिप रद्द करने के बजाय उसे आगे की तारीख के लिए टालना पसंद कर रहे हैं।

    घरेलू पर्यटन की ओर बढ़ा रुझान
    अंतरराष्ट्रीय हालात को देखते हुए अब कई यात्री घरेलू पर्यटन की ओर रुख कर रहे हैं। ट्रैवल एजेंसियों के मुताबिक हाल के दिनों में हिमाचल, गोवा, केरल और राजस्थान जैसे पर्यटन स्थलों के लिए पूछताछ बढ़ी है। जो परिवार पहले दुबई या यूरोप की योजना बना रहे थे, वे अब भारत के भीतर ही छुट्टियां मनाने के विकल्प तलाश रहे हैं।

    साउथ-ईस्ट एशिया बन रहा नया विकल्प
    मिडिल ईस्ट के विकल्प के रूप में अब यात्रियों का रुझान दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों की ओर भी बढ़ रहा है। सिंगापुर, थाईलैंड, मलेशिया, श्रीलंका और मालदीव जैसे देशों के लिए इंक्वायरी बढ़ने लगी है। आसान वीजा प्रक्रिया और अपेक्षाकृत सुरक्षित माहौल के कारण पर्यटक इन्हें बेहतर विकल्प मान रहे हैं।

    अगर तनाव लंबा चला तो और बढ़ सकता है असर
    ट्रैवल इंडस्ट्री का कहना है कि फिलहाल स्थिति कोविड जैसी नहीं है क्योंकि फ्लाइट्स चालू हैं और यात्रा पूरी तरह बंद नहीं हुई है। लेकिन यदि मिडिल ईस्ट में तनाव अगले दो से तीन महीने तक जारी रहता है तो अंतरराष्ट्रीय पर्यटन पर असर और बढ़ सकता है। उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे ही वैश्विक हालात सामान्य होंगे, यात्रियों का भरोसा लौटेगा और पर्यटन बाजार फिर तेजी से उभर सकता है।

  • माघ पूर्णिमा पर आस्था का सैलाब: कड़ाके की ठंड में नर्मदापुरम के सेठानी घाट पर गूंजे 'नर्मदे हर' के जयकारे, हजारों श्रद्धालुओं ने किया स्नान

    माघ पूर्णिमा पर आस्था का सैलाब: कड़ाके की ठंड में नर्मदापुरम के सेठानी घाट पर गूंजे 'नर्मदे हर' के जयकारे, हजारों श्रद्धालुओं ने किया स्नान


    नर्मदापुरम । मध्य प्रदेश की संस्कारधानी और मां नर्मदा के पावन तट नर्मदापुरम में आज माघ पूर्णिमा का अद्भुत आध्यात्मिक नजारा देखने को मिला। माघ मास के इस अंतिम और पवित्र दिन पर प्रसिद्ध सेठानी घाट श्रद्धा के सागर में डूबा नजर आया। कड़ाके की ठंड और सुबह की सर्द हवाओं की परवाह न करते हुए, हजारों की संख्या में श्रद्धालु सूर्योदय से पहले ही मां नर्मदा की शरण में पहुँच गए और आस्था की डुबकी लगाई।

    सर्द हवाओं पर भारी पड़ी शिव-भक्ति रविवार तड़के से ही सेठानी घाट और आसपास के अन्य घाटों पर भक्तों की लंबी कतारें लगने लगी थीं। जैसे ही भोर की पहली किरण ने नर्मदा के जल को छुआ, पूरा वातावरण ‘नर्मदे हर’ और ‘हर-हर महादेव’ के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा। ठिठुरन के बावजूद क्या बच्चे, क्या बूढ़ेहर कोई मां नर्मदा के शीतल जल में पुण्य लाभ अर्जित करने के लिए लालायित दिखा। श्रद्धालुओं ने स्नान के पश्चात सूर्य को अर्घ्य दिया और तट पर स्थित प्राचीन शिवलिंगों का विधि-विधान से पूजन-अर्चन कर परिवार की सुख-समृद्धि की मंगल कामना की।

    दान-पुण्य और मोक्ष की मान्यता शास्त्रों के अनुसार माघ पूर्णिमा का दिन आध्यात्मिक शुद्धि के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से व्यक्ति के समस्त ज्ञात-अज्ञात पापों का शमन होता है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। माताओं और बहनों ने घाट पर दीपदान किया और अन्न-वस्त्र का दान कर पुण्य लाभ कमाया। नर्मदापुरम की इस पावन धरा पर भक्तों का यह अटूट विश्वास दर्शाता है कि भारतीय संस्कृति में आस्था के आगे मौसम की कठोरता भी गौण हो जाती है।

    प्रशासन द्वारा घाटों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। गोताखोरों की टीम और पुलिस बल मुस्तैद रहा ताकि उमड़ती भीड़ के बीच कोई अप्रिय घटना न हो। दान-पुण्य भजन-कीर्तन और जप-तप का यह सिलसिला देर शाम होने वाली महाआरती तक जारी रहने की उम्मीद है।

  • पर्यटन मानचित्र पर चमकेगा विदिशा का उदयपुर: सरकार ने दी 'विरासत गांव' की सौगात, चार प्राचीन धरोहरें राज्य संरक्षित घोषित

    पर्यटन मानचित्र पर चमकेगा विदिशा का उदयपुर: सरकार ने दी 'विरासत गांव' की सौगात, चार प्राचीन धरोहरें राज्य संरक्षित घोषित


    विदिशा । मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक और पुरातात्विक विरासत में अब एक और सुनहरा अध्याय जुड़ने जा रहा है। विदिशा जिले की गंजबसौदा तहसील में स्थित ऐतिहासिक गांव ‘उदयपुर’ को मध्य प्रदेश सरकार ने ‘विरासत गांव  के तौर पर विकसित करने का बड़ा फैसला लिया है। यह कदम न केवल इस प्राचीन क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान को सुरक्षित करेगा, बल्कि इसे देश के प्रमुख पर्यटन केंद्रों की सूची में भी अग्रणी स्थान दिलाएगा।

    उदयपुर अपनी भव्य स्थापत्य कला और समृद्ध इतिहास के लिए दुनिया भर के पुरातत्व प्रेमियों के बीच प्रसिद्ध है। यहाँ का भव्य ‘नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर’ पहले से ही भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित राष्ट्रीय स्मारक है। अब इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय ने गांव की चार अन्य महत्वपूर्ण धरोहरों को ‘राज्य संरक्षित स्मारक’ के रूप में अधिसूचित कर दिया है। सरकार की इस योजना के तहत उदयसागर तालाब, प्राचीन गणेश मंदिर और ऐतिहासिक बावड़ी जैसे स्थलों का विशेष जीर्णोद्धार और संरक्षण किया जाएगा।

    विरासत गांव के तौर पर विकसित होने से यहाँ बुनियादी सुविधाओं का विस्तार होगा, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। सरकार का लक्ष्य यहाँ आने वाले पर्यटकों को मध्य प्रदेश की पौराणिक और शिवकालीन वास्तुकला से रूबरू कराना है। विशेषज्ञों का मानना है कि गंजबसौदा के उदयपुर में वो तमाम खूबियाँ मौजूद हैं जो इसे खजुराहो या ओरछा जैसी पहचान दिला सकती हैं। संरक्षण की इस पहल से उदयपुर की प्राचीन गलियां, मंदिर और जल संरचनाएं एक बार फिर अपने पुराने वैभव को प्राप्त कर सकेंगी।

  • खजुराहो में आकार ले रहा ‘विरासत वन’, 17 एकड़ में प्रकृति-संस्कृति का अनूठा संगम; बंगाल के कलाकार गढ़ रहे जीवंत मूर्तियां

    खजुराहो में आकार ले रहा ‘विरासत वन’, 17 एकड़ में प्रकृति-संस्कृति का अनूठा संगम; बंगाल के कलाकार गढ़ रहे जीवंत मूर्तियां


    खजुराहो /पर्यटन नगरी खजुराहो अब केवल अपने विश्वप्रसिद्ध मंदिरों के लिए ही नहीं बल्कि प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण की एक अनूठी पहल के लिए भी पहचानी जाने वाली है। खजुराहो के खर्रोही क्षेत्र में 17 एकड़ भूमि पर विरासत वन विकसित किया जा रहा है जो हरियाली जैव विविधता और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत उदाहरण बनेगा। यह वन खास तौर पर बच्चों और युवाओं को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है ताकि वे घूमते-घूमते जंगल पर्यावरण और प्रकृति के महत्व को खुद समझ सकें।

    विरासत वन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे पारंपरिक उद्यान की तरह नहीं बल्कि एक लिविंग क्लासरूम के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां लगाए गए पेड़-पौधे वन्यजीवों की आकृतियां और थीम आधारित वन क्षेत्र बच्चों को किताबों से बाहर निकलकर सीखने का अवसर देंगे। वन विभाग की इस पहल के तहत एक समय के बंजर भू-भाग को हरित स्वरूप में बदल दिया गया है जो अब पर्यावरण संरक्षण का मिसाल बन रहा है।विरासत वन में आधुनिक तकनीक का भी खास इस्तेमाल किया गया है। यहां पेड़ों और प्रमुख स्थलों पर क्यूआर कोड लगाए गए हैं। जैसे ही कोई बच्चा या पर्यटक क्यूआर कोड स्कैन करेगा उससे जुड़ी जानकारी सीधे मोबाइल स्क्रीन पर आ जाएगी। इसमें उस पेड़ या पौधे का नाम उसकी प्रजाति औषधीय गुण पर्यावरण में भूमिका और उससे जुड़े रोचक तथ्य डिजिटल रूप में उपलब्ध होंगे। इससे बच्चों में तकनीक के माध्यम से सीखने की रुचि भी बढ़ेगी।

    इस वन को और आकर्षक बनाने के लिए जंगल के जानवरों की जीवंत मूर्तियां भी स्थापित की जा रही हैं। खास बात यह है कि इन मूर्तियों को अंतिम रूप देने के लिए बंगाल से आए अनुभवी कलाकार काम कर रहे हैं। कलाकारों द्वारा बनाई जा रही ये मूर्तियां इतनी वास्तविक होंगी कि देखने वालों को जंगल में होने का अहसास कराएंगी। अधिकारियों के अनुसार इस मूर्तिकला का लगभग 90 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और जल्द ही यह वन पूरी तरह तैयार होकर लोगों के लिए खोल दिया जाएगा।विरासत वन में 200 से अधिक प्रजातियों के 25 हजार से ज्यादा पौधे लगाए गए हैं। यहां अलग-अलग विषयों पर आधारित वन विकसित किए गए हैं जिनमें नवग्रह वन नक्षत्र वन सप्तऋषि वन लक्ष्मी वन औषधीय वन और जैव विविधता वन शामिल हैं। हर वन का अपना अलग महत्व और उद्देश्य है जिससे भारतीय संस्कृति ज्योतिष आयुर्वेद और प्रकृति के गहरे संबंध को समझा जा सके।

    वन विभाग का मानना है कि विरासत वन न केवल पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में मदद करेगा बल्कि पर्यटन को भी नया आयाम देगा। खजुराहो आने वाले पर्यटक अब मंदिरों के साथ-साथ प्रकृति और पर्यावरण से जुड़े इस विशेष केंद्र का भी अनुभव ले सकेंगे। यह पहल आने वाली पीढ़ियों को प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनाने और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने में अहम भूमिका निभाएगी।