Tag: Madhya Pradesh Tourism

  • MP में मानसून ट्रिप का है प्लान तो इन जगहों पर जरूर जाएं! झरनों से लेकर जंगल और किलों तक मिलेगा शानदार नजारा

    MP में मानसून ट्रिप का है प्लान तो इन जगहों पर जरूर जाएं! झरनों से लेकर जंगल और किलों तक मिलेगा शानदार नजारा

    नई दिल्ली । मानसून का मौसम आते ही मध्य प्रदेश की खूबसूरती कई गुना बढ़ जाती है। बारिश की बूंदों के साथ पहाड़ों पर छाई हरियाली बहते झरने जंगलों की ताजगी और बादलों से घिरे खूबसूरत नजारे लोगों को घूमने के लिए आकर्षित करते हैं। अगर आप भी बारिश के मौसम में परिवार दोस्तों या पार्टनर के साथ घूमने का प्लान बना रहे हैं तो मध्य प्रदेश आपके लिए शानदार विकल्प हो सकता है। प्रदेश में ऐसी कई जगहें हैं जहां मानसून के दौरान प्रकृति अपने सबसे खूबसूरत रूप में नजर आती है।

    मानसून ट्रैवल के लिए सबसे लोकप्रिय जगहों में पचमढ़ी का नाम सबसे ऊपर आता है। सतपुड़ा की पहाड़ियों के बीच बसा पचमढ़ी बारिश के मौसम में हरियाली से ढक जाता है। यहां पहाड़ों के बीच बादलों का नजारा और झरनों का बहता पानी पर्यटकों को खास अनुभव देता है। बी फॉल्स रजत प्रपात और जटाशंकर जैसी जगहों पर बारिश के दौरान प्राकृतिक सुंदरता और भी बढ़ जाती है। हालांकि झरनों के पास जाते समय स्थानीय प्रशासन की सुरक्षा गाइडलाइन का पालन करना जरूरी है।

    इंदौर के आसपास रहने वाले लोगों के लिए पातालपानी मानसून में घूमने की अच्छी जगह हो सकती है। बारिश के दौरान यहां का झरना और आसपास की हरियाली मन मोह लेती है। दोस्तों और परिवार के साथ एक दिन की ट्रिप के लिए यह जगह आकर्षक विकल्प बन सकती है। तेज बारिश के समय पानी का बहाव अचानक बढ़ सकता है इसलिए झरने के बेहद करीब जाने से बचना चाहिए।

    जबलपुर की बात करें तो भेड़ाघाट मानसून में अलग ही रूप में नजर आता है। नर्मदा नदी के किनारे संगमरमर की ऊंची चट्टानें और आसपास का प्राकृतिक वातावरण बारिश के बाद बेहद खूबसूरत दिखाई देता है। धुआंधार जलप्रपात भी पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। पानी का प्रवाह बढ़ने पर इसका नजारा और ज्यादा प्रभावशाली हो सकता है लेकिन यहां भी सुरक्षा व्यवस्था और स्थानीय निर्देशों का ध्यान रखना जरूरी है।

    मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले का तामिया भी मानसून ट्रैवल के लिए बेहतरीन विकल्प माना जाता है। पहाड़ियों घाटियों और घने जंगलों से घिरा यह इलाका बारिश के मौसम में बेहद हरा भरा नजर आता है। यहां से दिखाई देने वाले प्राकृतिक दृश्य और शांत वातावरण उन लोगों को खास पसंद आ सकते हैं जो भीड़भाड़ से दूर कुछ समय बिताना चाहते हैं।

    इसके अलावा मांडू भी बारिश के मौसम में घूमने के लिए आकर्षक जगह है। ऐतिहासिक इमारतों के साथ हरियाली और बादलों का मेल यहां के नजारों को खास बना देता है। भोपाल के आसपास भोजपुर और केरवा जैसे स्थान भी बारिश के दौरान प्रकृति प्रेमियों को आकर्षित करते हैं।

    हालांकि मानसून में यात्रा करते समय खूबसूरत नजारों के साथ सुरक्षा का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। नदी झरने और जलप्रपात के पास सेल्फी लेने के लिए जोखिम उठाने से बचें। मौसम का पूर्वानुमान देखकर यात्रा की योजना बनाएं और रास्तों की स्थिति की जानकारी पहले हासिल करें। इस तरह थोड़ी सावधानी के साथ मध्य प्रदेश का मानसून ट्रिप खूबसूरत यादों से भरपूर बनाया जा सकता है।

  • पातालपानी-कालाकुंड के सफर का इंतजार खत्म होने वाला, बीकानेर से मेंटेन होकर इंदौर पहुंचा रैक; ट्रायल के बाद शुरू होगी ट्रेन

    पातालपानी-कालाकुंड के सफर का इंतजार खत्म होने वाला, बीकानेर से मेंटेन होकर इंदौर पहुंचा रैक; ट्रायल के बाद शुरू होगी ट्रेन


    इंदौर। 15 अगस्त का लॉन्ग वीकेंड गुजर चुका है लेकिन इंदौर और आसपास के पर्यटकों के लिए बारिश के मौसम की सबसे खास सैर यानी पातालपानी-कालाकुंड हेरिटेज ट्रेन अब तक शुरू नहीं हो सकी है। इस समय पातालपानी का झरना पूरे वेग से बह रहा है। पहाड़ घने हरे रंग में ढके हैं और घाटियों में बादलों का खूबसूरत डेरा नजर आ रहा है। ऐसे मौसम में पर्यटक इस ऐतिहासिक ट्रेन के शुरू होने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। रेलवे भी अब ट्रेन संचालन की तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुट गया है। हेरिटेज ट्रेन का पूरा रैक मेंटेनेंस के बाद बीकानेर से इंदौर पहुंच चुका है और रविवार सुबह यह लक्ष्मीबाई नगर स्टेशन पहुंचा।

    अब रेलवे इस रैक को महू के रास्ते पातालपानी ले जाएगा। वहां क्रेन की मदद से कोचों को ट्रैक पर उतारा जाएगा। इसके बाद कोचों को इंजन के साथ जोड़कर उनकी अलाइनमेंट और अन्य तकनीकी व्यवस्थाओं की जांच की जाएगी। इन तैयारियों के बाद रेलवे की ओर से ट्रायल रन किया जाएगा। ट्रायल के दौरान रैक की स्थिति के साथ ट्रैक संचालन व्यवस्था और सुरक्षा से जुड़े सभी मानकों को परखा जाएगा। यदि सभी व्यवस्थाएं निर्धारित मानकों के अनुरूप पाई जाती हैं तो यात्री संचालन की अनुमति दी जाएगी। रेलवे की मौजूदा तैयारी अगले सप्ताह शनिवार से हेरिटेज ट्रेन शुरू करने की है।

    इस साल ट्रेन के शुरू होने में हुई देरी की मुख्य वजह रैक का मेंटेनेंस बताया जा रहा है। आमतौर पर मानसून के दौरान पातालपानी और कालाकुंड का इलाका पर्यटकों के लिए खास आकर्षण बन जाता है। बारिश के साथ यहां की प्राकृतिक खूबसूरती कई गुना बढ़ जाती है। पहाड़ों से गिरते झरने घने जंगल घुमावदार रेल ट्रैक और बादलों से घिरी घाटियां इस सफर को रोमांचक बना देती हैं। यही वजह है कि हेरिटेज ट्रेन के संचालन का इंतजार हर साल पर्यटकों को रहता है।

    पिछले साल हेरिटेज ट्रेन का संचालन 26 जुलाई से शुरू होकर 16 नवंबर 2025 तक हुआ था। इस बार अगस्त का आधा महीना बीत जाने के बाद भी यात्री सेवा शुरू नहीं हो पाई। ऐसे में अब रैक के इंदौर पहुंचने के बाद उम्मीद बढ़ी है कि जल्द ही ट्रायल रन पूरा कर ट्रेन को यात्रियों के लिए शुरू किया जा सकता है। हालांकि अंतिम तारीख रेलवे की ओर से आधिकारिक घोषणा और ट्रायल के बाद ही स्पष्ट होगी।

    पातालपानी-कालाकुंड रेलखंड सिर्फ पर्यटन के लिहाज से ही नहीं बल्कि इतिहास के लिहाज से भी बेहद खास है। करीब 155 साल पुराने इस रेलखंड की शुरुआत वर्ष 1870 में इंदौर रियासत के महाराजा तुकोजीराव होलकर द्वितीय की पहल से हुई थी। वर्ष 1878 तक होलकर स्टेट रेलवे के तहत इसका निर्माण पूरा हो गया था। बाद में यह रेलखंड राजपुताना-मालवा रेलवे का हिस्सा बना। समय के साथ आसपास की कई मीटरगेज रेल लाइनों को ब्रॉडगेज में बदल दिया गया लेकिन पहाड़ी और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण यह रेलखंड अपनी पुरानी पहचान के साथ सुरक्षित रहा।

    रेलवे ने इस ऐतिहासिक ट्रैक को संरक्षित रखते हुए 25 दिसंबर 2018 को पहली बार हेरिटेज ट्रेन शुरू की थी। पातालपानी से कालाकुंड तक करीब 9.5 किलोमीटर का यह सफर छोटा जरूर है लेकिन रोमांच से भरपूर है। इस मार्ग में चार सुरंगें करीब 24 तीखे मोड़ छह बड़े और 35 छोटे पुल आते हैं। ट्रेन जैसे ही पहाड़ों के बीच आगे बढ़ती है एक तरफ घने जंगल और पहाड़ दिखाई देते हैं जबकि दूसरी ओर गहरी घाटियां सफर को रोमांचक बना देती हैं।

    मानसून के दौरान इस पूरे रेलखंड का नजारा बेहद आकर्षक हो जाता है। पातालपानी का झरना तेज बहाव के साथ नजर आता है और चारों ओर हरियाली छा जाती है। घाटियों में तैरते बादल और घुमावदार ट्रैक यात्रियों के लिए यादगार अनुभव बनते हैं। अब मेंटेन रैक के इंदौर पहुंचने के बाद पर्यटकों की नजर रेलवे के ट्रायल रन और आधिकारिक संचालन तारीख पर टिकी है। अगर तकनीकी और सुरक्षा जांच तय मानकों के अनुसार पूरी होती है तो अगले शनिवार से पातालपानी-कालाकुंड की खूबसूरत हेरिटेज ट्रेन एक बार फिर पटरी पर दौड़ती नजर आ सकती है।

  • उज्जैन में लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ का अनुमान, मांडू में कमरों का टोटा; महेश्वर में लग्जरी रूम का किराया 60 हजार तक

    उज्जैन में लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ का अनुमान, मांडू में कमरों का टोटा; महेश्वर में लग्जरी रूम का किराया 60 हजार तक


    मध्य प्रदेश मध्य प्रदेश में मानसून के साथ पर्यटन का रंग भी गहरा हो गया है। बारिश ने मांडू की पहाड़ियों और ऐतिहासिक इमारतों से लेकर महेश्वर के नर्मदा घाटों तक की खूबसूरती बढ़ा दी है। इसी वजह से वीकेंड पर बड़ी संख्या में पर्यटक इन जगहों का रुख कर रहे हैं। दूसरी तरफ सावन का महीना और धार्मिक आयोजनों ने उज्जैन दतिया और नलखेड़ा जैसे धार्मिक शहरों में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ा दी है। नतीजा यह है कि कई पर्यटन और धार्मिक स्थलों पर होटल और होम स्टे पहले से बुक हो चुके हैं। मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग भी मांडू महेश्वर उज्जैन और दूसरे प्रमुख स्थलों को अपने पर्यटन सर्किट में शामिल करता है।

    सबसे ज्यादा असर मांडू में दिखाई दे रहा है। बारिश के मौसम में मांडू की हरियाली झरने और ऐतिहासिक स्मारक पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। 14 से 16 अगस्त तक यहां कई होटल पूरी तरह बुक बताए जा रहे हैं और नो रूम जैसी स्थिति बन गई है। मांडू में सरकारी और निजी होटलों के साथ धर्मशालाओं में भी ठहरने की सुविधा है। सामान्य कमरों से लेकर बेहतर सुविधाओं वाले कमरों तक किराये में काफी अंतर है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक यहां कमरा करीब 500 रुपए से शुरू होकर 10 हजार रुपए तक पहुंच सकता है। बारिश के कारण वीकेंड पर मांग बढ़ने से एडवांस बुकिंग कराने वालों को ज्यादा आसानी हो रही है।

    मांडू सिर्फ प्राकृतिक खूबसूरती के लिए ही नहीं बल्कि अपने ऐतिहासिक वैभव के लिए भी प्रसिद्ध है। यहां जहाज महल रानी रूपमती महल बाज बहादुर महल अशरफी महल और होशंग शाह का मकबरा जैसे प्रमुख स्थल हैं। बारिश में इन स्मारकों के आसपास का नजारा और भी आकर्षक हो जाता है। यही वजह है कि अगस्त के इस दौर में पर्यटकों की संख्या बढ़ रही है।

    नर्मदा किनारे बसे महेश्वर की तस्वीर भी कुछ ऐसी ही है लेकिन यहां ठहरने के विकल्प अपेक्षाकृत ज्यादा हैं। महेश्वर में होटल होम स्टे रिजॉर्ट धर्मशाला और पर्यटन निगम के ठहरने के विकल्प मौजूद हैं। यहां सामान्य कमरों का किराया करीब 1200 रुपए से शुरू बताया जा रहा है जबकि हेरिटेज और लग्जरी प्रॉपर्टीज में रॉयल रूम की कीमत 60 हजार रुपए तक पहुंच सकती है। मध्य प्रदेश पर्यटन की आधिकारिक सामग्री में भी महेश्वर के लिए Narmada Retreat जैसे ठहरने के विकल्प सूचीबद्ध हैं।

    महेश्वर आने वाले पर्यटक अक्सर एक ही यात्रा में ओंकारेश्वर मांडू और उज्जैन को भी शामिल करते हैं। अहिल्या बाई होलकर की विरासत होलकर किला नर्मदा के घाट और धार्मिक स्थल यहां के प्रमुख आकर्षण हैं। ऐसे में वीकेंड पर पर्यटकों की संख्या बढ़ने के साथ अच्छे कमरों की मांग भी बढ़ जाती है।

    उज्जैन में मामला पर्यटन से ज्यादा धार्मिक भीड़ का है। सावन के दौरान महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती है और सोमवार को भीड़ और ज्यादा रहने की संभावना रहती है। हाल के यात्रियों के अनुभवों में भी सावन के दौरान सोमवार और वीकेंड को सबसे ज्यादा भीड़ से बचने की सलाह दी गई है।

    इसी तरह आगर मालवा के नलखेड़ा स्थित मां बगलामुखी मंदिर में शनिवार और रविवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। यहां होटल और ठहरने के दूसरे विकल्प पहले से बुक होने लगे हैं। दतिया में मां पीतांबरा पीठ के कारण वीकेंड पर श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ जाती है और उपलब्ध जानकारी के मुताबिक बड़ी संख्या में कमरे पहले ही बुक हो चुके हैं।

    ओरछा में भी राम राजा सरकार के मंदिर के कारण धार्मिक पर्यटन लगातार बना रहता है। यहां छोटे बड़े होटल और होम स्टे उपलब्ध हैं। वहीं खजुराहो में अगस्त के दौरान पर्यटन सीजन अपेक्षाकृत कमजोर रहने के बावजूद वीकेंड पर पर्यटकों की संख्या बढ़ सकती है। बड़े होटलों में किराये की रेंज काफी ऊंची है और फाइव स्टार प्रॉपर्टीज में कमरे 30 से 60 हजार रुपए तक पहुंच सकते हैं।

    ऐसे में अगर इस वीकेंड मध्य प्रदेश के किसी पर्यटन या धार्मिक स्थल पर जाने का प्लान है तो सबसे जरूरी सलाह यही है कि होटल की बुकिंग पहले कर लें। खासकर मांडू और उज्जैन जैसे स्थानों पर मौके पर कमरा मिलने की गारंटी नहीं मानी जा सकती। बारिश का मौसम पर्यटन के लिए बेहद खूबसूरत है लेकिन बढ़ती भीड़ के बीच बेहतर यात्रा के लिए ठहरने और आने जाने की व्यवस्था पहले से तय करना ज्यादा समझदारी होगी।

  • MP में मानसून टूरिज्म का जबरदस्त क्रेज! मांडू में 14 से 16 अगस्त तक नो रूम, दतिया में 95% कमरे बुक

    MP में मानसून टूरिज्म का जबरदस्त क्रेज! मांडू में 14 से 16 अगस्त तक नो रूम, दतिया में 95% कमरे बुक

    मध्य प्रदेश मध्य प्रदेश में मानसून के साथ पर्यटन का रंग भी गहरा हो गया है। बारिश के बाद झरनों पहाड़ियों नदियों और ऐतिहासिक स्मारकों की खूबसूरती पर्यटकों को आकर्षित कर रही है। वहीं सावन सोमवार और नागपंचमी जैसे धार्मिक आयोजनों ने उज्जैन और दूसरे धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ा दी है। पचमढ़ी मांडू महेश्वर उज्जैन दतिया नलखेड़ा और ओरछा जैसे प्रमुख पर्यटन और धार्मिक केंद्रों में वीकेंड के दौरान होटल और गेस्ट हाउस की बुकिंग तेजी से बढ़ रही है। कई जगहों पर कमरे पहले से बुक हो चुके हैं और जहां कमरे उपलब्ध हैं वहां बढ़ती मांग के कारण किराया भी सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ गया है।

    मांडू में बारिश के मौसम में ऐतिहासिक इमारतों और पहाड़ियों का नजारा बेहद आकर्षक हो जाता है। यही वजह है कि 14 से 16 अगस्त के बीच यहां होटल पूरी तरह बुक बताए जा रहे हैं। मांडू में करीब 2 सरकारी और 20 निजी होटल के अलावा 2 धर्मशालाएं हैं। यहां लगभग 800 कमरों की उपलब्धता है। सामान्य तौर पर कमरों का किराया 500 रुपए से शुरू होकर 10 हजार रुपए तक पहुंचता है। धर्मशालाओं में करीब 2 हजार रुपए तक में ठहरने की सुविधा मिल सकती है। मांडू में जहाज महल रानी रूपमती महल बाज बहादुर महल अशरफी महल और होशंग शाह का मकबरा जैसे ऐतिहासिक स्थल पर्यटकों के प्रमुख आकर्षण हैं।

    उज्जैन में स्थिति और ज्यादा खास है। सावन सोमवार और नागपंचमी एक साथ पड़ने के कारण श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है। शनिवार और रविवार को करीब 3 से 4 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है जबकि सावन सोमवार और नागपंचमी के दिन यह संख्या 5 से 6 लाख तक पहुंच सकती है। इसके चलते शहर के अधिकांश होटल पहले ही बुक हो चुके हैं। बचे हुए कमरों के किराए में भी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। सामान्य दिनों में 1500 रुपए में मिलने वाला कमरा वीकेंड पर करीब 2000 रुपए तक पहुंच गया है। महाकाल लोक के आसपास छोटे होटलों में किराया लगभग दोगुना तक बढ़ा है जबकि बड़े होटल 15 से 35 प्रतिशत तक अधिक कीमत ले रहे हैं।

    नर्मदा किनारे बसे महेश्वर में भी पर्यटकों की अच्छी भीड़ है। यहां 120 से ज्यादा होटल होम स्टे रिजॉर्ट धर्मशालाएं और पर्यटन निगम के ठहरने के विकल्प मौजूद हैं। कमरे का शुरुआती किराया करीब 1200 रुपए है लेकिन हेरिटेज और लग्जरी प्रॉपर्टीज में रॉयल रूम की कीमत 60 हजार रुपए तक पहुंच रही है। महेश्वर आने वाले पर्यटक अक्सर ओंकारेश्वर उज्जैन और मांडू का भी रुख करते हैं। अहिल्याबाई होलकर की विरासत होलकर फोर्ट और नर्मदा के घाट यहां के प्रमुख आकर्षण हैं।

    आगर मालवा के नलखेड़ा में मां बगलामुखी मंदिर के कारण हर शनिवार और रविवार श्रद्धालुओं की अच्छी भीड़ रहती है। शहर में करीब 45 होटल हैं और कमरों का किराया 500 से 4500 रुपए तक है। वीकेंड को देखते हुए यहां भी एडवांस बुकिंग शुरू हो चुकी है।

    ओरछा में राजा राम मंदिर के कारण धार्मिक पर्यटन लगातार बना रहता है। यहां करीब 15 बड़े और 50 छोटे होटल के साथ लगभग 20 होम स्टे हैं। कमरों का किराया 3 हजार से 15 हजार रुपए तक बताया जाता है। वहीं दतिया में पीतांबरा माता मंदिर के चलते श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ रही है। शहर के करीब 90 होटल और धर्मशालाओं में लगभग 95 प्रतिशत कमरे पहले ही बुक हो चुके हैं।

    खजुराहो में फिलहाल पर्यटन सीजन अपेक्षाकृत कमजोर बताया जा रहा है लेकिन वीकेंड पर यहां भी पर्यटकों की संख्या बढ़ती है। करीब 200 होटल होम स्टे और अन्य ठहरने के विकल्प मौजूद हैं। फाइव स्टार होटलों का टैरिफ 30 से 60 हजार रुपए तक जबकि थ्री स्टार होटलों में ऑफ सीजन में करीब 5 से 7 हजार और सीजन में 10 से 12 हजार रुपए तक किराया पहुंच सकता है।

    ऐसे में अगर इस वीकेंड मध्य प्रदेश के किसी पर्यटन या धार्मिक स्थल पर घूमने का प्लान है तो होटल की एडवांस बुकिंग कराना समझदारी होगी। मानसून की खूबसूरती और धार्मिक आयोजनों के कारण इस समय कई लोकप्रिय जगहों पर आखिरी समय में कमरा मिलना मुश्किल हो सकता है।

  • पचमढ़ी घूमने का बना रहे हैं प्लान तो पहले जान लें ये जरूरी ट्रैवल टिप्स वरना सफर का मजा हो सकता है खराब

    पचमढ़ी घूमने का बना रहे हैं प्लान तो पहले जान लें ये जरूरी ट्रैवल टिप्स वरना सफर का मजा हो सकता है खराब


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश के होशंगाबाद जिले में स्थित पचमढ़ी को सतपुड़ा की रानी कहा जाता है। घने जंगल ऊंचे पहाड़ मनमोहक झरने शांत वातावरण और प्राकृतिक सुंदरता हर साल हजारों पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है। खासकर मानसून के दौरान यहां की हरियाली और झरनों का नजारा किसी स्वर्ग से कम नहीं लगता। हालांकि पचमढ़ी की यात्रा पर निकलने से पहले कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद आवश्यक है ताकि आपका सफर सुरक्षित आरामदायक और यादगार बन सके।

    अगर आप पहली बार पचमढ़ी जा रहे हैं तो सबसे पहले मौसम की जानकारी जरूर लें। बरसात के दिनों में यहां लगातार बारिश होती है इसलिए रेनकोट छाता और वाटरप्रूफ बैग साथ रखें। फिसलन वाले रास्तों पर चलने के लिए मजबूत ग्रिप वाले जूते पहनना सबसे अच्छा रहता है। आरामदायक कपड़े चुनें ताकि ट्रैकिंग और घूमने में किसी तरह की परेशानी न हो।

    पचमढ़ी में कई पर्यटन स्थल वन क्षेत्र के अंदर स्थित हैं इसलिए यहां घूमने के लिए स्थानीय गाइड या अधिकृत जिप्सी सेवा का उपयोग करना बेहतर माना जाता है। बी फॉल्स धूपगढ़ जटाशंकर गुफा पांडव गुफाएं अप्सरा विहार रजत प्रपात और महादेव मंदिर जैसे प्रमुख स्थानों की यात्रा समय के अनुसार करें ताकि सभी जगह आराम से घूम सकें।

    अगर आप ट्रैकिंग के शौकीन हैं तो सुबह जल्दी निकलना सबसे अच्छा रहेगा। सुबह का मौसम सुहावना होता है और भीड़ भी कम रहती है। साथ ही पानी की बोतल हल्का नाश्ता और जरूरी दवाइयां अपने बैग में जरूर रखें। जंगल वाले क्षेत्रों में बिना अनुमति अंदर जाने से बचें और वन विभाग के सभी निर्देशों का पालन करें।

    पचमढ़ी की प्राकृतिक सुंदरता को सुरक्षित रखना हर पर्यटक की जिम्मेदारी है। प्लास्टिक की बोतलें चिप्स के पैकेट या अन्य कचरा खुले में बिल्कुल न फेंकें। जहां डस्टबिन उपलब्ध हो वहीं कचरा डालें। प्राकृतिक स्थलों पर तेज आवाज में संगीत बजाने से बचें ताकि वहां का शांत वातावरण बना रहे और वन्यजीव भी प्रभावित न हों।

    यात्रा पर निकलने से पहले होटल की बुकिंग पहले ही कर लेना समझदारी होगी खासकर छुट्टियों और मानसून सीजन में यहां पर्यटकों की संख्या काफी बढ़ जाती है। पहले से बुकिंग होने पर आपको बेहतर सुविधा और उचित कीमत पर ठहरने की जगह मिल सकती है।

    पचमढ़ी की स्थानीय संस्कृति और स्वाद का आनंद लेना भी यात्रा का अहम हिस्सा है। यहां मिलने वाले स्थानीय व्यंजन और हस्तशिल्प आपकी यात्रा को और खास बना सकते हैं। खरीदारी करते समय स्थानीय दुकानदारों से विनम्र व्यवहार करें और स्थानीय नियमों का सम्मान करें।

    अगर आप परिवार के साथ यात्रा कर रहे हैं तो बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें। फिसलन वाले झरनों और पहाड़ी किनारों पर अनावश्यक जोखिम न लें। फोटो खींचते समय भी सुरक्षा को प्राथमिकता दें क्योंकि एक छोटी सी लापरवाही बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है।

    पचमढ़ी सिर्फ एक पर्यटन स्थल नहीं बल्कि प्रकृति प्रेमियों के लिए एक अनमोल धरोहर है। सही योजना आवश्यक तैयारी और जिम्मेदार व्यवहार के साथ की गई यात्रा न केवल आपको खूबसूरत यादें देगी बल्कि इस प्राकृतिक विरासत को सुरक्षित रखने में भी आपकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

  • गर्मी में घूमने के लिए मध्य प्रदेश की ठंडी जगहें, 5 दिन में पूरा करें यादगार सफर..

    गर्मी में घूमने के लिए मध्य प्रदेश की ठंडी जगहें, 5 दिन में पूरा करें यादगार सफर..

    मध्य प्रदेश :गर्मी के मौसम में जब तापमान लगातार बढ़ता है, तब लोग ऐसी जगहों की तलाश करते हैं जहां ठंडक, सुकून और प्राकृतिक सुंदरता एक साथ मिल सके। मध्य प्रदेश भारत का दिल कहा जाता है और यहां कई ऐसी पर्यटन स्थल मौजूद हैं जो गर्मियों में बेहतरीन ट्रैवल डेस्टिनेशन साबित होते हैं। पचमढ़ी से लेकर खजुराहो और पन्ना नेशनल पार्क तक, यह पूरा सफर प्रकृति, इतिहास और रोमांच का अनोखा अनुभव कराता है।

    पचमढ़ी: सतपुड़ा की रानी में ठंडी राहत

    यात्रा की शुरुआत पचमढ़ी से करना सबसे बेहतर माना जाता है। इसे सतपुड़ा की रानी कहा जाता है और यह मध्य प्रदेश का एकमात्र हिल स्टेशन है जहां गर्मियों में भी मौसम सुहावना रहता है। भोपाल से इसकी दूरी लगभग 200 किलोमीटर है, जिसे 5 से 6 घंटे में पूरा किया जा सकता है। यहां बी फॉल, धूपगढ़ और जटाशंकर मंदिर प्रमुख आकर्षण हैं। दो दिन के लिए यहां का अनुमानित खर्च लगभग 2000 से 4000 रुपये तक रहता है।

    सांची: इतिहास और शांति का संगम

    पचमढ़ी के बाद सांची की यात्रा की जा सकती है। भोपाल से लगभग 46 किलोमीटर दूर स्थित यह स्थान बौद्ध स्तूपों के लिए विश्व प्रसिद्ध है। यहां का शांत वातावरण और ऐतिहासिक महत्व पर्यटकों को आकर्षित करता है। यात्रा में लगभग 1 से 1.5 घंटे लगते हैं और खर्च 500 से 1500 रुपये तक हो सकता है।

    खजुराहो: विश्व धरोहर की अद्भुत कला

    सांची से आगे बढ़ते हुए खजुराहो पहुंचा जा सकता है, जो अपनी अद्भुत मंदिर वास्तुकला के लिए विश्व प्रसिद्ध है। सांची से इसकी दूरी लगभग 350 किलोमीटर है और सड़क मार्ग से 7 से 8 घंटे लगते हैं। यहां के मंदिर भारतीय कला और संस्कृति की अनोखी झलक पेश करते हैं। इस यात्रा का अनुमानित खर्च 2000 से 3000 रुपये तक रहता है।

    पन्ना नेशनल पार्क: जंगल सफारी का रोमांच

    खजुराहो के पास ही पन्ना नेशनल पार्क स्थित है, जो वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक बेहतरीन जगह है। यहां टाइगर सफारी और प्राकृतिक वातावरण का आनंद लिया जा सकता है। खजुराहो से इसकी दूरी लगभग 25 किलोमीटर है और 30 से 40 मिनट में पहुंचा जा सकता है। सफारी सहित यहां का खर्च लगभग 1500 से 3000 रुपये तक होता है।

    पूरा ट्रैवल प्लान और खर्च

    यह पूरा सफर 4 से 5 दिनों में आसानी से पूरा किया जा सकता है। यात्रा की शुरुआत भोपाल से करते हुए पचमढ़ी, फिर सांची, उसके बाद खजुराहो और अंत में पन्ना नेशनल पार्क का दौरा किया जा सकता है। कुल दूरी लगभग 700 से 800 किलोमीटर रहती है। इस पूरे ट्रिप का खर्च प्रति व्यक्ति लगभग 8000 से 15000 रुपये तक आ सकता है।

  • पन्ना टाइगर रिजर्व में पर्यटकों को मिला दुर्लभ नजारा, बाघिन P-142 अपने शावकों के साथ जंगल में करती दिखी अठखेलियां

    पन्ना टाइगर रिजर्व में पर्यटकों को मिला दुर्लभ नजारा, बाघिन P-142 अपने शावकों के साथ जंगल में करती दिखी अठखेलियां

    मध्यप्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व में वन्यजीव प्रेमियों को एक ऐसा दुर्लभ और मनमोहक दृश्य देखने को मिला जिसने सफारी के पूरे अनुभव को यादगार बना दिया। हिनौता क्षेत्र में जंगल सफारी पर निकले पर्यटकों को उस समय रोमांच और उत्साह का अनुभव हुआ जब उन्हें बाघिन P-142 अपने दो छोटे शावकों के साथ प्राकृतिक वातावरण में विचरण करते हुए दिखाई दी। यह दृश्य न केवल रोमांचकारी था बल्कि जंगल की जीवंतता और उसमें चल रही प्राकृतिक प्रक्रियाओं की एक सुंदर झलक भी प्रस्तुत करता है।

    सफारी के दौरान अचानक सामने आए इस दृश्य ने पर्यटकों को पूरी तरह उत्साहित कर दिया। बाघिन अपने शावकों के साथ बेहद शांत और सतर्क अवस्था में नजर आई, जबकि नन्हे शावक अपने मासूम और चंचल व्यवहार से सभी का ध्यान आकर्षित कर रहे थे। कभी वे मां के करीब जाकर स्नेह जताते दिखे तो कभी झाड़ियों के बीच छिपकर खेलते और अपने प्राकृतिक व्यवहार को समझने की कोशिश करते नजर आए। यह पूरा दृश्य जंगल में जीवन के स्वाभाविक विकास और सीखने की प्रक्रिया को स्पष्ट रूप से दर्शा रहा था।

    इस अनोखे अनुभव को पर्यटकों ने कैमरों में कैद कर लिया। तस्वीरों और वीडियो में बाघिन की सतर्कता, शावकों की मासूम हरकतें और जंगल का शांत वातावरण एक साथ देखने को मिला। कुछ समय तक पर्यटकों के सामने रहने के बाद बाघिन धीरे धीरे अपने शावकों को लेकर घने जंगल की ओर बढ़ गई और देखते ही देखते सभी दृश्य से ओझल हो गए। यह क्षण पर्यटकों के लिए लंबे समय तक याद रहने वाला अनुभव बन गया।

    इस घटना ने एक बार फिर यह साबित किया है कि सुरक्षित और संतुलित प्राकृतिक वातावरण में वन्यजीव न केवल सुरक्षित रहते हैं बल्कि अपनी प्राकृतिक जीवनशैली को पूरी स्वतंत्रता के साथ जीते हैं। पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघों की बढ़ती संख्या और उनका सफल प्रजनन इस क्षेत्र की मजबूत पारिस्थितिकी व्यवस्था का संकेत देता है। यह संरक्षण प्रयासों की सफलता को भी दर्शाता है, जहां प्रकृति और वन्यजीवों के बीच संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।

    ऐसे दृश्य यह संदेश देते हैं कि जब प्राकृतिक आवास सुरक्षित रहते हैं तो वन्यजीव अपनी पूरी सहजता के साथ जीवन जीते हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रकृति का संतुलन बनाए रखने में योगदान देते हैं।

  • मिडिल ईस्ट तनाव का असर मध्यप्रदेश पर: 10 हजार टूरिस्ट ने रोकी विदेश यात्रा, करीब 60 करोड़ का ट्रैवल कारोबार प्रभावित

    मिडिल ईस्ट तनाव का असर मध्यप्रदेश पर: 10 हजार टूरिस्ट ने रोकी विदेश यात्रा, करीब 60 करोड़ का ट्रैवल कारोबार प्रभावित


    नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट और यूरोप में बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनाव का असर अब मध्यप्रदेश के टूरिज्म सेक्टर पर भी साफ दिखाई देने लगा है। दुबई और आसपास के देशों की यात्रा करने वाले हजारों लोगों ने फिलहाल अपने ट्रैवल प्लान रोक दिए हैं। ट्रैवल इंडस्ट्री के अनुसार इस सीजन में प्रदेश से करीब 10 हजार लोगों के मिडिल ईस्ट जाने की संभावना थी, लेकिन मौजूदा हालात के कारण बड़ी संख्या में यात्रियों ने अपनी बुकिंग रद्द कर दी या नई बुकिंग ही नहीं कराई।

    ऑनलाइन ट्रैवल प्लेटफॉर्म MakeMyTrip की भोपाल लोकेशन हेड Richa Singh Bhadauria के मुताबिक लगभग 2 से 2.5 हजार यात्रियों ने पहले से फ्लाइट और टूर पैकेज बुक कर लिए थे, जो सीधे प्रभावित हुए हैं। वहीं करीब 7 से 8 हजार संभावित यात्रियों ने अनिश्चित हालात को देखते हुए अपनी यात्रा योजनाएं टाल दी हैं। हालांकि फिलहाल इंटरनेशनल ट्रैवल पूरी तरह बंद नहीं हुआ है, लेकिन पर्यटन कारोबार में साफ तौर पर सुस्ती देखी जा रही है।

    60 करोड़ का संभावित कारोबार अटका
    मिडिल ईस्ट देशों के लिए औसतन एक ट्रैवल पैकेज 60 से 70 हजार रुपए प्रति व्यक्ति का होता है। यदि 60 हजार रुपए का औसत और 10 हजार यात्रियों का अनुमान लगाया जाए तो करीब 60 करोड़ रुपए का संभावित ट्रैवल कारोबार प्रभावित माना जा रहा है। हालांकि सभी मामलों में पूरी राशि का नुकसान नहीं हुआ है, क्योंकि कई एयरलाइंस यात्रियों को रिफंड या क्रेडिट शेल का विकल्प दे रही हैं।

    60–70% यात्रियों को मिला पूरा रिफंड
    ट्रैवल एजेंसियों के अनुसार प्रभावित बुकिंग्स में से लगभग 60 से 70 प्रतिशत यात्रियों को पूरा रिफंड मिल गया है। ऐसा उन मामलों में हुआ जहां एयरलाइंस ने खुद फ्लाइट रद्द की या शेड्यूल बदला। वहीं करीब 15 से 25 प्रतिशत यात्रियों को आंशिक नुकसान हुआ है, जो मुख्य रूप से वीजा फीस, होटल कैंसिलेशन पॉलिसी या नॉन-रिफंडेबल बुकिंग के कारण हुआ। कई यात्रियों ने रिफंड लेने के बजाय भविष्य के लिए ट्रैवल क्रेडिट या क्रेडिट शेल का विकल्प चुना है।

    भोपाल और इंदौर से सबसे ज्यादा कैंसिलेशन
    ट्रैवल ट्रेड के अनुभव के अनुसार मध्यप्रदेश में इंटरनेशनल लीजर ट्रैवल सबसे ज्यादा भोपाल और इंदौर से होता है। इसलिए इन शहरों से कैंसिलेशन का असर भी ज्यादा दिखाई दे रहा है। जबलपुर और ग्वालियर में भी कुछ प्रभाव देखा गया है, लेकिन फिलहाल पूरे प्रदेश में पर्यटन गतिविधियां पूरी तरह ठप नहीं हुई हैं बल्कि धीमी पड़ गई हैं।

    क्रूज ट्रैवल में भी 30–40% गिरावट
    वैश्विक अनिश्चितता का असर इंटरनेशनल क्रूज ट्रैवल पर भी पड़ा है। इस सीजन में क्रूज बुकिंग में लगभग 30 से 40 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि अधिकतर यात्री अपनी यात्रा पूरी तरह रद्द करने के बजाय उसे आगे की तारीख के लिए टालना पसंद कर रहे हैं।

    लीजर ट्रैवल सबसे ज्यादा प्रभावित
    मौजूदा हालात का सबसे ज्यादा असर लीजर ट्रैवल सेगमेंट पर पड़ा है, जिसमें फैमिली हॉलीडे, हनीमून ट्रिप और ग्रुप टूर शामिल हैं। इसके मुकाबले कॉर्पोरेट ट्रैवल अपेक्षाकृत स्थिर बना हुआ है, क्योंकि बिजनेस मीटिंग और काम से जुड़े यात्राओं को पूरी तरह टालना कई बार संभव नहीं होता।

    एयरलाइंस दे रही लचीले विकल्प
    मौजूदा स्थिति को देखते हुए कई एयरलाइंस यात्रियों को राहत देने की कोशिश कर रही हैं। कुछ कंपनियां क्रेडिट शेल की वैधता बढ़ा रही हैं, जबकि कई एयरलाइंस बिना अतिरिक्त शुल्क के भविष्य की तारीख पर रीबुकिंग की सुविधा दे रही हैं। ट्रैवल इंडस्ट्री का फोकस फिलहाल यात्रियों का भरोसा बनाए रखने और सुरक्षित समय पर यात्रा की सुविधा उपलब्ध कराने पर है।

    तनाव लंबा चला तो बढ़ सकता है असर
    ट्रैवल इंडस्ट्री का मानना है कि फिलहाल स्थिति कोविड जैसी नहीं है, क्योंकि फ्लाइट्स चालू हैं और यात्रा पूरी तरह बंद नहीं हुई है। लेकिन अगर मिडिल ईस्ट में जियोपॉलिटिकल तनाव अगले दो से तीन महीने तक जारी रहता है, तो इंटरनेशनल टूरिज्म में गिरावट और बढ़ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे ही वैश्विक हालात सामान्य होंगे, यात्रियों की मांग फिर तेजी से वापस लौट सकती है।

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  • मिडिल ईस्ट तनाव का असर मध्यप्रदेश के पर्यटन पर: 10 हजार यात्रियों ने रोकी विदेश यात्रा, 60 करोड़ का कारोबार प्रभावित

    मिडिल ईस्ट तनाव का असर मध्यप्रदेश के पर्यटन पर: 10 हजार यात्रियों ने रोकी विदेश यात्रा, 60 करोड़ का कारोबार प्रभावित



    नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट और यूरोप क्षेत्र में बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनाव का असर अब मध्यप्रदेश के पर्यटन कारोबार पर भी दिखाई देने लगा है। दुबई और आसपास के देशों की यात्रा करने वाले हजारों पर्यटकों ने फिलहाल अपने प्लान रोक दिए हैं। ट्रैवल इंडस्ट्री से जुड़े आंकड़ों के अनुसार इस सीजन में प्रदेश से करीब 10 हजार लोगों के मिडिल ईस्ट जाने की उम्मीद थी, लेकिन मौजूदा वैश्विक हालात के कारण बड़ी संख्या में यात्रियों ने यात्रा टाल दी है।

    हजारों बुकिंग प्रभावित, कई यात्रियों ने नए प्लान ही नहीं बनाए
    ट्रैवल कंपनियों के मुताबिक करीब 2 से 2.5 हजार यात्रियों ने पहले ही फ्लाइट और टूर पैकेज बुक कर लिए थे, जिन पर सीधे असर पड़ा है। वहीं करीब 7 से 8 हजार संभावित यात्रियों ने हालात को देखते हुए नई बुकिंग ही नहीं कराई या अपनी यात्रा संबंधी पूछताछ वापस ले ली। फिलहाल अंतरराष्ट्रीय यात्रा पूरी तरह बंद नहीं हुई है, लेकिन ट्रैवल इंडस्ट्री में साफ तौर पर मंदी का संकेत दिखाई देने लगा है।

    करीब 60 करोड़ रुपये का संभावित कारोबार प्रभावित
    मिडिल ईस्ट देशों के लिए औसतन एक ट्रैवल पैकेज 60 से 70 हजार रुपये प्रति व्यक्ति का होता है। अगर औसत 60 हजार रुपये प्रति व्यक्ति और 10 हजार यात्रियों का अनुमान लगाया जाए तो करीब 60 करोड़ रुपये का संभावित कारोबार प्रभावित माना जा रहा है। हालांकि कई एयरलाइंस यात्रियों को रिफंड, क्रेडिट शेल या रीबुकिंग का विकल्प दे रही हैं, जिससे पूरा नुकसान नहीं माना जा रहा।

    भोपाल और इंदौर से सबसे ज्यादा असर
    ट्रैवल एजेंसियों के अनुसार मध्यप्रदेश में इंटरनेशनल लीजर ट्रैवल सबसे ज्यादा भोपाल और इंदौर से होता है। इसलिए इन शहरों से बुकिंग कैंसिलेशन का असर भी ज्यादा दिखाई दे रहा है। जबलपुर और ग्वालियर में भी प्रभाव है, लेकिन फिलहाल पूरे प्रदेश में पर्यटन गतिविधियां पूरी तरह रुकी नहीं हैं बल्कि धीमी पड़ी हैं।

    क्रूज ट्रैवल में भी आई गिरावट
    वैश्विक अनिश्चितता का असर इंटरनेशनल क्रूज ट्रैवल पर भी पड़ा है। इस सीजन में क्रूज बुकिंग में लगभग 30 से 40 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि अधिकतर यात्री क्रूज ट्रिप रद्द करने के बजाय उसे आगे की तारीख के लिए टालना पसंद कर रहे हैं।

    घरेलू पर्यटन की ओर बढ़ा रुझान
    अंतरराष्ट्रीय हालात को देखते हुए अब कई यात्री घरेलू पर्यटन की ओर रुख कर रहे हैं। ट्रैवल एजेंसियों के मुताबिक हाल के दिनों में हिमाचल, गोवा, केरल और राजस्थान जैसे पर्यटन स्थलों के लिए पूछताछ बढ़ी है। जो परिवार पहले दुबई या यूरोप की योजना बना रहे थे, वे अब भारत के भीतर ही छुट्टियां मनाने के विकल्प तलाश रहे हैं।

    साउथ-ईस्ट एशिया बन रहा नया विकल्प
    मिडिल ईस्ट के विकल्प के रूप में अब यात्रियों का रुझान दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों की ओर भी बढ़ रहा है। सिंगापुर, थाईलैंड, मलेशिया, श्रीलंका और मालदीव जैसे देशों के लिए इंक्वायरी बढ़ने लगी है। आसान वीजा प्रक्रिया और अपेक्षाकृत सुरक्षित माहौल के कारण पर्यटक इन्हें बेहतर विकल्प मान रहे हैं।

    अगर तनाव लंबा चला तो और बढ़ सकता है असर
    ट्रैवल इंडस्ट्री का कहना है कि फिलहाल स्थिति कोविड जैसी नहीं है क्योंकि फ्लाइट्स चालू हैं और यात्रा पूरी तरह बंद नहीं हुई है। लेकिन यदि मिडिल ईस्ट में तनाव अगले दो से तीन महीने तक जारी रहता है तो अंतरराष्ट्रीय पर्यटन पर असर और बढ़ सकता है। उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे ही वैश्विक हालात सामान्य होंगे, यात्रियों का भरोसा लौटेगा और पर्यटन बाजार फिर तेजी से उभर सकता है।

  • माघ पूर्णिमा पर आस्था का सैलाब: कड़ाके की ठंड में नर्मदापुरम के सेठानी घाट पर गूंजे 'नर्मदे हर' के जयकारे, हजारों श्रद्धालुओं ने किया स्नान

    माघ पूर्णिमा पर आस्था का सैलाब: कड़ाके की ठंड में नर्मदापुरम के सेठानी घाट पर गूंजे 'नर्मदे हर' के जयकारे, हजारों श्रद्धालुओं ने किया स्नान


    नर्मदापुरम । मध्य प्रदेश की संस्कारधानी और मां नर्मदा के पावन तट नर्मदापुरम में आज माघ पूर्णिमा का अद्भुत आध्यात्मिक नजारा देखने को मिला। माघ मास के इस अंतिम और पवित्र दिन पर प्रसिद्ध सेठानी घाट श्रद्धा के सागर में डूबा नजर आया। कड़ाके की ठंड और सुबह की सर्द हवाओं की परवाह न करते हुए, हजारों की संख्या में श्रद्धालु सूर्योदय से पहले ही मां नर्मदा की शरण में पहुँच गए और आस्था की डुबकी लगाई।

    सर्द हवाओं पर भारी पड़ी शिव-भक्ति रविवार तड़के से ही सेठानी घाट और आसपास के अन्य घाटों पर भक्तों की लंबी कतारें लगने लगी थीं। जैसे ही भोर की पहली किरण ने नर्मदा के जल को छुआ, पूरा वातावरण ‘नर्मदे हर’ और ‘हर-हर महादेव’ के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा। ठिठुरन के बावजूद क्या बच्चे, क्या बूढ़ेहर कोई मां नर्मदा के शीतल जल में पुण्य लाभ अर्जित करने के लिए लालायित दिखा। श्रद्धालुओं ने स्नान के पश्चात सूर्य को अर्घ्य दिया और तट पर स्थित प्राचीन शिवलिंगों का विधि-विधान से पूजन-अर्चन कर परिवार की सुख-समृद्धि की मंगल कामना की।

    दान-पुण्य और मोक्ष की मान्यता शास्त्रों के अनुसार माघ पूर्णिमा का दिन आध्यात्मिक शुद्धि के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से व्यक्ति के समस्त ज्ञात-अज्ञात पापों का शमन होता है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। माताओं और बहनों ने घाट पर दीपदान किया और अन्न-वस्त्र का दान कर पुण्य लाभ कमाया। नर्मदापुरम की इस पावन धरा पर भक्तों का यह अटूट विश्वास दर्शाता है कि भारतीय संस्कृति में आस्था के आगे मौसम की कठोरता भी गौण हो जाती है।

    प्रशासन द्वारा घाटों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। गोताखोरों की टीम और पुलिस बल मुस्तैद रहा ताकि उमड़ती भीड़ के बीच कोई अप्रिय घटना न हो। दान-पुण्य भजन-कीर्तन और जप-तप का यह सिलसिला देर शाम होने वाली महाआरती तक जारी रहने की उम्मीद है।