Tag: Madhya Pradesh Transport

  • इंदौर से MP के पब्लिक ट्रांसपोर्ट को नई दिशा 2030 तक का विजन तैयार PPP मॉडल और AI से बदलेगा बसों का संचालन

    इंदौर से MP के पब्लिक ट्रांसपोर्ट को नई दिशा 2030 तक का विजन तैयार PPP मॉडल और AI से बदलेगा बसों का संचालन

    इंदौर । मध्य प्रदेश में सार्वजनिक यात्री परिवहन व्यवस्था को नई दिशा देने की तैयारी शुरू हो गई है। इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में शुक्रवार से दो दिवसीय यात्री परिवहन विजन समिट 2026 की शुरुआत हुई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समिट का शुभारंभ करते हुए कहा कि प्रदेश में ऐसी परिवहन व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है जो आधुनिक सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल हो। सरकार का फोकस पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप यानी PPP मॉडल के जरिए यात्री परिवहन को मजबूत करने पर रहेगा।

    समिट में परिवहन एवं स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल समेत देशभर से आए परिवहन विशेषज्ञ निजी बस ऑपरेटर राज्य परिवहन उपक्रमों आईटी कंपनियों और उद्योग जगत के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। दो दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में मध्य प्रदेश में यात्री परिवहन के भविष्य को लेकर विस्तार से मंथन किया जाएगा।

    समिट का प्रमुख केंद्र मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा है। सरकार मध्य प्रदेश यात्री परिवहन एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड यानी MPYPIL के माध्यम से परिवहन व्यवस्था में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने की तैयारी कर रही है। इसके साथ ही आधुनिक आईटी सिस्टम और हरित ऊर्जा आधारित परिवहन को भी बढ़ावा देने की योजना है। इसका उद्देश्य यात्रियों को बेहतर सुविधा देने के साथ ही परिवहन व्यवस्था को ज्यादा सुरक्षित और टिकाऊ बनाना है।

    समिट के दौरान इंडस्ट्री एक्सपो और हैकाथॉन का भी शुभारंभ किया जा रहा है। एक्सपो में बस निर्माता कंपनियों आईटी कंपनियों वित्तीय संस्थानों और परिवहन क्षेत्र से जुड़े संगठनों ने अपने तकनीकी समाधान और नए प्रयोग प्रदर्शित किए हैं। इस मौके पर MPYPIL के नए लोगो और विशेष पुस्तिका का विमोचन भी किया जाएगा।

    दो दिवसीय समिट में कुल आठ प्रमुख सत्र आयोजित होंगे। इनमें MP मोबिलिटी विजन 2030 PPP मॉडल के जरिए निवेश बस संचालन में वित्तीय आत्मनिर्भरता रोजगार और उद्यमिता यात्री सुरक्षा AI आधारित रूट प्लानिंग ग्रीन मोबिलिटी और एकीकृत टिकटिंग सिस्टम जैसे विषयों पर चर्चा होगी। विशेषज्ञ इस बात पर भी सुझाव देंगे कि प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन को किस तरह तकनीक से जोड़ा जाए ताकि यात्रियों को कम समय में बेहतर और सुरक्षित सेवा मिल सके।

    ग्रीन मोबिलिटी पर भी खास जोर रहेगा। समिट में इलेक्ट्रिक हाइड्रोजन और फ्लेक्स फ्यूल बसों को लेकर संभावनाओं पर चर्चा होगी। इनके संचालन के लिए चार्जिंग और रिफ्यूलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की जरूरत पर भी विशेषज्ञ विचार रखेंगे। इसके अलावा AI और रियल टाइम डेटा के इस्तेमाल से बसों के रूट और शेड्यूल को बेहतर बनाने पर मंथन होगा।

    समिट में टाटा मोटर्स ईकेए मोबिलिटी ग्रीनसेल मोबिलिटी वोल्वो आयशर स्विच मोबिलिटी रैपिडो चलो मोबिलिटी यश टेक्नोलॉजीज SBI और इंडियन ऑयल समेत कई प्रमुख संस्थान हिस्सा ले रहे हैं। WRI इंडिया BITS पिलानी CEPT अहमदाबाद KPMG और DIMTS के विशेषज्ञ भी अपने अनुभव साझा करेंगे। माना जा रहा है कि इस समिट से मध्य प्रदेश में यात्री परिवहन व्यवस्था के लिए नई नीति और निवेश के रास्ते मजबूत होंगे।

  • मध्यप्रदेश में बंद परिवहन निगम पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार को फिर नोटिस

    मध्यप्रदेश में बंद परिवहन निगम पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार को फिर नोटिस


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश में वर्षों से बंद पड़े राज्य सड़क परिवहन निगम को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने राज्य और केंद्र सरकार को पुनः नोटिस जारी करते हुए छह सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। यह मामला जनहित याचिका के रूप में सामने आया है, जिसमें राज्य में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की गंभीर स्थिति को उजागर किया गया है।

     21 साल से बंद परिवहन सेवा पर सवाल
    यह याचिका सामाजिक कार्यकर्ता और अधिवक्ता बीएल जैन द्वारा दायर की गई थी। इसमें कहा गया है कि लगभग 21 वर्षों से राज्य का परिवहन निगम बंद पड़ा है, जिसके कारण लोगों को यात्रा के लिए निजी बसों और असुरक्षित साधनों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

     ग्रामीण इलाकों में हालात गंभीर
    याचिका में बताया गया कि ग्रामीण क्षेत्रों में बसों की कमी के कारण लोग मालवाहक वाहनों में यात्रा करने को मजबूर हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बढ़ रहा है। कई मामलों में जानमाल की हानि भी हो चुकी है।

     पहले भी नोटिस, लेकिन जवाब नहीं
    कोर्ट ने पहले भी सितंबर 2024 में राज्य सरकार को चार सप्ताह में जवाब देने के निर्देश दिए थे, लेकिन अब तक कोई जवाब दाखिल नहीं किया गया। इस पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए दोबारा नोटिस जारी किया है।

    सरकारी जिम्मेदारी पर उठे सवाल
    याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि सुरक्षित और सुलभ परिवहन व्यवस्था उपलब्ध कराना सरकार की मूल जिम्मेदारी है, ठीक वैसे ही जैसे शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं। केरल और महाराष्ट्र जैसे राज्यों का उदाहरण देते हुए कहा गया कि वहां सरकारी परिवहन निगम सफलतापूर्वक चल रहे हैं और लाभ में भी हैं।

     घोषणाओं के बावजूद ठोस कदम नहीं
    याचिका में यह भी कहा गया कि राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर सार्वजनिक परिवहन सेवा शुरू करने की घोषणाएं की गईं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई जमीन पर नहीं दिखी।

     सार्वजनिक परिवहन पर बढ़ा दबाव
    मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की यह सख्ती राज्य में बंद परिवहन व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ रही है। अब सभी की नजर सरकार के जवाब और आगामी कदमों पर टिकी है।