Tag: Madhya Pradesh Wildlife

  • इंदौर में आबादी के करीब पहुंचा घायल तेंदुआ, सिर-मुंह पर चोट देखकर ग्रामीणों में चिंता, रालामंडल की पहाड़ियों से आने की आशंका

    इंदौर में आबादी के करीब पहुंचा घायल तेंदुआ, सिर-मुंह पर चोट देखकर ग्रामीणों में चिंता, रालामंडल की पहाड़ियों से आने की आशंका


    इंदौर इंदौर के पास खुड़ैल थाना क्षेत्र में क्रिसेंट वॉटर पार्क के नजदीक बुधवार सुबह घायल हालत में तेंदुआ दिखाई देने से आसपास के इलाके में चिंता का माहौल बन गया। तेंदुआ एक रहवासी मकान के पास बैठा नजर आया। ग्रामीणों के मुताबिक उसके सिर और मुंह पर चोट के निशान थे और वह सुस्त हालत में दिखाई दे रहा था। सूचना मिलने के बाद पुलिस और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और इलाके में तेंदुए की तलाश शुरू कर दी। हालांकि वन विभाग के अधिकारियों की ओर से अब तक तेंदुए की मौजूदगी और उसके घायल होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

    जानकारी के मुताबिक बुधवार सुबह क्रिसेंट वॉटर पार्क के पास हरिओम ठाकुर के मकान के नजदीक लोगों ने तेंदुए को बैठे देखा। ग्रामीणों का कहना है कि तेंदुआ सामान्य रूप से सक्रिय नहीं दिख रहा था। उसके चेहरे और सिर पर चोट के निशान नजर आ रहे थे। इस स्थिति को देखते हुए आशंका जताई गई कि वह किसी दूसरे वन्यजीव के साथ संघर्ष के दौरान घायल हुआ होगा। हालांकि चोट लगने की वास्तविक वजह की पुष्टि नहीं हुई है। तेंदुए को आबादी के नजदीक देखने के बाद आसपास के लोगों में चिंता बढ़ गई और पुलिस तथा वन विभाग को इसकी सूचना दी गई।

    सूचना मिलते ही संबंधित टीमें मौके पर पहुंचीं और आसपास के क्षेत्र में उसकी तलाश शुरू की। तेंदुआ कुछ समय बाद वहां से भाग गया था। ऐसे में वन विभाग की टीम उसकी मौजूदगी का पता लगाने के लिए सर्चिंग कर रही है। ग्रामीणों को आशंका है कि घायल होने के कारण तेंदुआ किसी खेत या झाड़ियों में छिपा हो सकता है। यदि वह आसपास के रहवासी क्षेत्र में मौजूद है तो लोगों और मवेशियों के लिए खतरा पैदा हो सकता है। इसलिए उसकी लोकेशन का पता लगाना और स्थिति की पुष्टि करना जरूरी माना जा रहा है।

    हरिओम ठाकुर के मुताबिक यह पहली बार नहीं है जब उनके फार्म हाउस के आसपास तेंदुआ दिखाई दिया हो। उन्होंने बताया कि 8 अक्टूबर को भी एक तेंदुआ उनके फार्म हाउस में घुस आया था और वहां मवेशियों का शिकार किया था। उस समय ग्रामीणों ने उसे भगाया था। अब दोबारा मकान के पास तेंदुआ दिखाई देने से लोगों की चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि इलाके में तेंदुए की आवाजाही को देखते हुए वन विभाग को सतर्कता बढ़ाने और लोगों को जरूरी जानकारी देने की आवश्यकता है।

    ठाकुर के अनुसार उनके मकान के पास रालामंडल की पहाड़ियां स्थित हैं। उनका मानना है कि पहाड़ियों से तेंदुआ आसपास के खेतों और आबादी वाले क्षेत्रों तक पहुंच सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि पहाड़ी क्षेत्र और आसपास के इलाके के बीच पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने के कारण वन्यजीवों की आवाजाही बनी रहती है। फिलहाल खेतों में पानी देने का समय है और किसान सुबह तथा देर शाम तक खेतों में काम करते हैं। ऐसे में ग्रामीणों को डर है कि यदि घायल तेंदुआ खेतों या रास्तों के आसपास मौजूद रहा तो किसी अप्रिय घटना की आशंका बढ़ सकती है।

    इस घटना के बाद अब वन विभाग की सर्चिंग पर नजर है। सबसे जरूरी है कि तेंदुए की वास्तविक स्थिति और उसके घायल होने की पुष्टि की जाए। तब तक स्थानीय लोगों को सतर्क रहने और तेंदुए के नजदीक जाने या उसे घेरने की कोशिश नहीं करने की जरूरत है। वन विभाग की टीम के सामने चुनौती तेंदुए का पता लगाने के साथ-साथ लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी है।

  • रायसेन के खेत में मिली 6-7 साल की बाघिन की लाश, बिजली के तार की चपेट में आने से मौत की आशंका

    रायसेन के खेत में मिली 6-7 साल की बाघिन की लाश, बिजली के तार की चपेट में आने से मौत की आशंका

    मध्य प्रदेश: के रायसेन जिले से वन्यजीवों से जुड़ी एक दुखद घटना सामने आई है। ओबेदुल्लागंज तहसील के दाहोद फॉरेस्ट रेंज के कागवान इलाके में एक किसान के खेत में 6 से 7 साल की वयस्क बाघिन मृत अवस्था में मिली। घटना की सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और इलाके को अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी।

    प्रारंभिक जांच में आशंका जताई गई है कि खेत में बिछाए गए बिजली के तार की चपेट में आने से बाघिन की मौत हुई हो सकती है। हालांकि, वन विभाग ने अभी मौत के कारण की अंतिम पुष्टि नहीं की है। अधिकारियों के अनुसार, बाघिन की मौत की वास्तविक वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

    डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर हेमंत रायकवार ने बताया कि बाघिन का शव सोमवार शाम जिला मुख्यालय से करीब 90 किलोमीटर दूर कागवान इलाके में किसान के खेत से बरामद किया गया। शुरुआती जांच के दौरान ऐसे संकेत मिले हैं, जिनसे बिजली का झटका लगने की आशंका सामने आई है। घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है।

    घटना के बाद वन विभाग ने संबंधित क्षेत्र को पूरी तरह सील कर दिया है। आम लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है, ताकि घटनास्थल से जुड़े साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जा सके और जांच प्रभावित न हो। अधिकारियों की टीम मौके से जरूरी साक्ष्य जुटाने में लगी रही।

    वन विभाग के अनुसार, बाघिन के शव का पोस्टमार्टम राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण यानी एनटीसीए के निर्धारित मानकों और प्रोटोकॉल के तहत कराया गया। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव का नियमानुसार निस्तारण कर दिया गया। अब जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि बाघिन की मौत किन परिस्थितियों में हुई और खेत में मौजूद बिजली के तार की इसमें क्या भूमिका रही।

    मध्य प्रदेश को देश का सबसे बड़ा टाइगर स्टेट कहा जाता है। साल 2022 की राष्ट्रीय बाघ जनगणना में राज्य में 785 बाघ दर्ज किए गए थे, जो देश के किसी भी राज्य में सबसे अधिक संख्या थी। प्रदेश में वर्तमान में कुल 9 टाइगर रिजर्व हैं। ऐसे में किसी बाघ या बाघिन की मौत वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से महत्वपूर्ण घटना मानी जाती है।

    खेतों में फसलों की सुरक्षा के लिए अवैध तरीके से बिजली के तार बिछाए जाने से वन्यजीवों के लिए खतरा पैदा होने की आशंका बनी रहती है। रायसेन की इस घटना में भी बिजली के तार से करंट लगने की आशंका सामने आने के बाद वन विभाग सतर्क है। हालांकि, बाघिन की मौत का सटीक कारण जांच और पोस्टमार्टम से जुड़े निष्कर्ष सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा।

  • कूनो में बदली चीतों की तस्वीर 4 साल पहले 8 से शुरू हुआ सफर अब भारत में 52 चीते

    कूनो में बदली चीतों की तस्वीर 4 साल पहले 8 से शुरू हुआ सफर अब भारत में 52 चीते


    नई दिल्ली।चार साल पहले जब नामीबिया से आठ चीतों को मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क लाया गया था तब भारत में इस प्रजाति की वापसी को लेकर कई सवाल थे। करीब सात दशक तक देश में चीते नहीं थे और ऐसे में अफ्रीका से लाए गए चीतों को भारतीय परिस्थितियों में बसाना बड़ी चुनौती माना जा रहा था। शुरुआती दौर में कई चीतों और शावकों की मौत ने चिंता बढ़ाई लेकिन इसके बाद चीतों के प्रजनन और उनके नए इलाकों में पहुंचने से तस्वीर धीरे धीरे बदलती गई। अब भारत में चीतों की संख्या 52 बताई जा रही है जिनमें 32 का जन्म भारत में ही हुआ है।

    17 सितंबर 2022 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कूनो में नामीबिया से लाए गए आठ चीतों को बाड़े में छोड़ा था। इसके साथ भारत में चीता पुनर्वास परियोजना की औपचारिक शुरुआत हुई। परियोजना के पहले साल में ही कई चुनौतियां सामने आईं। 2022-23 के दौरान कुल नौ चीतों की मौत हुई। इनमें वयस्क चीते और शावक दोनों शामिल थे। गर्मी और डिहाइड्रेशन जैसी परिस्थितियों को कुछ मौतों से जोड़कर देखा गया। तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंचने के दौरान अफ्रीका से आए चीतों के लिए भारतीय मौसम के साथ तालमेल बनाना बड़ी चुनौती रहा।

    पहले साल की मुश्किलों के बाद दूसरे साल तस्वीर में बदलाव दिखाई दिया। 2023-24 के दौरान चीतों के प्रजनन से उम्मीद बढ़ी। इस अवधि में जन्मे कई शावक जीवित रहे और 13 शावकों ने एक साल की उम्र पूरी की। इसी दौरान अफ्रीका से आए वयस्क चीतों के भारतीय परिस्थितियों के साथ अनुकूलन की प्रक्रिया भी आगे बढ़ी।

    तीसरे साल परियोजना का फोकस केवल कूनो तक सीमित नहीं रहा। चीतों को खुले जंगल में छोड़ा गया और कुछ चीते कूनो की सीमा से बाहर निकलकर राजस्थान के जंगलों तक पहुंचे। इसके बाद आसपास के इलाकों में उनकी निगरानी बढ़ाई गई। स्थानीय लोगों को चीतों के व्यवहार और उनसे जुड़ी सावधानियों की जानकारी देने के लिए चीता मित्रों को भी अभियान से जोड़ा गया। इसी क्रम में तीन चीतों को मंदसौर के गांधी सागर क्षेत्र में शिफ्ट किया गया।

    अब परियोजना चौथे साल में नए चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है। कूनो के बाद नौरादेही नेशनल पार्क को भी चीतों के लिए संभावित नए घर के रूप में विकसित किया जा रहा है। वन विभाग के मुताबिक कूनो में मौजूद चीतों में बड़ी संख्या ऐसे जानवरों की है जिनका जन्म भारत में हुआ है। खुले जंगल में मौजूद चीते प्राकृतिक तरीके से शिकार कर रहे हैं और प्रजनन भी कर रहे हैं।

    चीतों की निगरानी के लिए तकनीक और ग्राउंड टीम दोनों का इस्तेमाल किया जाता है। कई चीतों के गले में सैटेलाइट कॉलर लगाए गए हैं जिनसे उनकी लोकेशन और मूवमेंट की जानकारी मिलती रहती है। इसके अलावा वन विभाग की टीमें लगातार जमीन पर निगरानी करती हैं। यदि कोई चीता कूनो की सीमा से बाहर निकलता है तो उसकी गतिविधियों पर विशेष नजर रखी जाती है।

    भारत में चीता पुनर्वास की कोशिश हालांकि नई नहीं है। 1970 के दशक में देश में चीते दोबारा बसाने की योजना पर विचार शुरू हुआ था। बाद में कई स्तरों पर प्रयास हुए लेकिन अलग अलग कारणों से योजना आगे नहीं बढ़ सकी। 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने भी अफ्रीकी चीतों को भारत लाने की अनुमति के रास्ते को आगे बढ़ाया। इसके बाद नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से चीतों को भारत लाने की प्रक्रिया शुरू हुई।

    कूनो की मौजूदा तस्वीर इस लंबे प्रयास के एक नए चरण को दिखाती है। शुरुआत में आठ चीतों से शुरू हुआ सफर अब 52 तक पहुंच चुका है। इनमें भारत में जन्मे चीतों की संख्या 32 है। आने वाले समय में चीतों को कूनो के अलावा दूसरे उपयुक्त क्षेत्रों में बसाने की योजना परियोजना के विस्तार का अहम हिस्सा होगी।

  • एक हफ्ते से पानी भरे प्लॉट में छिपा था मगरमच्छ: सड़क पर निकलते ही मचा हड़कंप वन विभाग ने किया रेस्क्यू

    एक हफ्ते से पानी भरे प्लॉट में छिपा था मगरमच्छ: सड़क पर निकलते ही मचा हड़कंप वन विभाग ने किया रेस्क्यू


    जबलपुर। जबलपुर के पनागर स्थित द्वारका परिसर में करीब एक सप्ताह से दहशत का कारण बना मगरमच्छ आखिरकार वन विभाग की टीम के हाथ लग गया। करीब 5 फीट लंबे मगरमच्छ के कॉलोनी के एक खाली प्लॉट में भरे पानी में छिपे होने की जानकारी सामने आने के बाद से ही वन विभाग की टीम लगातार उसकी निगरानी कर रही थी। शुक्रवार सुबह पानी खाली करने की प्रक्रिया के दौरान मगरमच्छ अचानक प्लॉट से निकलकर सड़क की ओर आने लगा। पहले से तैयार वन विभाग की टीम ने उसे घेर लिया और सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू कर लिया। मगरमच्छ के पकड़े जाने के बाद कॉलोनी के रहवासियों ने राहत की सांस ली।

    बताया गया है कि द्वारका परिसर में 5 सितंबर को मगरमच्छ दिखाई देने की सूचना वन विभाग को मिली थी। इसके बाद वन परिक्षेत्र अधिकारी सौरभ शर्मा के निर्देश पर 12 सदस्यीय रेस्क्यू टीम बनाई गई। टीम ने खाली प्लॉट के आसपास लगातार निगरानी शुरू की। प्लॉट में काफी मात्रा में पानी भरा होने के कारण मगरमच्छ को पकड़ना आसान नहीं था। वह पानी के भीतर छिपा रहता था और टीम के पहुंचने पर दिखाई नहीं देता था।

    वन कर्मी शैलेश कुमार गौतम के मुताबिक शुरुआती तौर पर आशंका जताई गई कि मानसून के दौरान परियट नदी और आसपास की नहरों में तेज बहाव के कारण मगरमच्छ बहकर रिहायशी इलाके तक पहुंचा होगा। पानी के बहाव के साथ वह कॉलोनी के खाली प्लॉट में पहुंच गया और वहां जमा पानी में छिप गया। मगरमच्छ की मौजूदगी की जानकारी मिलने के बाद आसपास रहने वाले लोगों में भी डर का माहौल था।

    रेस्क्यू टीम ने मगरमच्छ को पकड़ने के लिए कई प्रयास किए। टीम के सदस्य कमर तक पानी में उतरकर जाल लेकर उसे तलाशते रहे। कई बार जाल डालकर उसे पकड़ने की कोशिश की गई लेकिन मगरमच्छ पानी में छिपकर टीम को चकमा देता रहा। इसके बाद प्लॉट का पानी पंप की मदद से खाली कराने की योजना बनाई गई। लगातार कई दिनों तक निगरानी और प्रयास के बावजूद मगरमच्छ पकड़ में नहीं आया।

    शुक्रवार सुबह जब प्लॉट का पानी बाहर निकाला जा रहा था तभी मगरमच्छ पानी से बाहर निकल आया। वह सड़क की ओर बढ़ने लगा। वन विभाग की टीम पहले से मौके पर मौजूद थी इसलिए कर्मचारियों ने तुरंत उसे चारों तरफ से घेर लिया। सावधानी के साथ जाल की मदद से मगरमच्छ को पकड़ लिया गया। रेस्क्यू के दौरान टीम ने यह भी सुनिश्चित किया कि मगरमच्छ को किसी तरह की चोट न पहुंचे और आसपास मौजूद लोगों की सुरक्षा भी बनी रहे।

    मगरमच्छ के सुरक्षित पकड़े जाने के बाद वन विभाग की टीम उसे परियट नदी के पास ले गई। अधिकारियों के मुताबिक रेस्क्यू किए गए मगरमच्छ को शुक्रवार सुबह ही सुरक्षित तरीके से परियट नदी में छोड़ दिया गया। करीब एक सप्ताह से चली आ रही तलाश पूरी होने के बाद कॉलोनी के लोगों ने राहत की सांस ली। इस दौरान वन विभाग की टीम ने लगातार निगरानी और सावधानी के साथ अभियान चलाया और आखिरकार मगरमच्छ को सुरक्षित पकड़ने में सफलता हासिल की।

  • शहर के करीब तेंदुए की मूवमेंट से मचा हड़कंप, सिंधिया छत्री पर बैठा दिखा Leopard; वन विभाग सतर्क

    शहर के करीब तेंदुए की मूवमेंट से मचा हड़कंप, सिंधिया छत्री पर बैठा दिखा Leopard; वन विभाग सतर्क


    शिवपुरी । शिवपुरी में एक बार फिर तेंदुए की मूवमेंट ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। रविवार को बाजा हाउस के पास स्थित सिंधिया छत्री की दीवार पर एक तेंदुआ बैठा हुआ दिखाई दिया। तेंदुए को देखकर आसपास मौजूद लोगों में अफरा तफरी मच गई। इस पूरी घटना का वीडियो भी सामने आया है जिसमें तेंदुआ कुछ देर तक छत्री की दीवार पर बैठा नजर आता है और इसके बाद जंगल की ओर भाग जाता है। शहर के रिहायशी इलाके के इतने करीब तेंदुआ दिखाई देने से स्थानीय लोगों के साथ सुबह की सैर करने वालों में भी डर का माहौल है।

    बताया जा रहा है कि सुबह के समय दो बत्ती चौराहे से लेकर बाजा हाउस तक बड़ी संख्या में लोग मॉर्निंग वॉक के लिए निकलते हैं। इसी रास्ते के नजदीक तेंदुए की मौजूदगी सामने आने के बाद लोगों की चिंता बढ़ गई है। आमतौर पर इस इलाके में सुबह के समय लोगों की आवाजाही रहती है। ऐसे में वन्यजीव के दिखाई देने के बाद लोग सतर्क हो गए हैं और कई लोगों ने सुबह अकेले निकलने से भी परहेज करना शुरू कर दिया है।

    बाजा हाउस और सिंधिया छत्री का क्षेत्र माधव टाइगर रिजर्व से सटा हुआ है। जंगल से नजदीकी होने के कारण इस इलाके में वन्यजीवों की आवाजाही पहले भी सामने आती रही है। हालांकि इस बार तेंदुआ शहर के ज्यादा आबादी वाले और रिहायशी इलाके के करीब दिखाई दिया है। यही वजह है कि स्थानीय लोगों में इसे लेकर ज्यादा चिंता देखी जा रही है। तेंदुए के दिखाई देने का वीडियो सामने आने के बाद आसपास के लोगों को भी सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।

    शिवपुरी में तेंदुए की मौजूदगी का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले नॉन कोल्हू की पुलिया और झांसी लिंक रोड के आसपास भी तेंदुए को देखे जाने की सूचना सामने आ चुकी है। इन इलाकों में कई बार तेंदुए की मूवमेंट दर्ज होने के बाद वन विभाग ने लोगों को सावधानी बरतने की अपील की थी। जंगल से लगे इलाकों में वन्यजीवों की आवाजाही को देखते हुए विभाग लगातार लोगों को सतर्क रहने की सलाह देता रहा है।

    वन विभाग की ओर से जारी एडवाइजरी में लोगों से कहा गया है कि यदि तेंदुआ या कोई अन्य जंगली जानवर दिखाई दे तो उसके करीब जाने की कोशिश बिल्कुल न करें। वन्यजीव को देखने के लिए भीड़ लगाने से भी बचना चाहिए। कई बार लोग मोबाइल से वीडियो बनाने के लिए जानवर के काफी करीब पहुंच जाते हैं जिससे वन्यजीव खुद को खतरे में महसूस कर सकता है और हमला करने की स्थिति बन सकती है।

    विभाग ने लोगों से यह भी अपील की है कि तेंदुए को घेरने पकड़ने या उसका रास्ता रोकने का प्रयास न करें। वन्यजीव दिखाई देने की स्थिति में सुरक्षित दूरी बनाए रखना और संबंधित विभाग को सूचना देना ही सबसे सुरक्षित कदम है। सिंधिया छत्री के आसपास तेंदुआ नजर आने के बाद स्थानीय लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

    खासकर सुबह और देर शाम के समय जंगल से सटे इलाकों में अकेले जाने से बचने और बच्चों को ऐसे स्थानों पर अकेले न भेजने की सलाह दी जा रही है। फिलहाल तेंदुआ सिंधिया छत्री की दीवार से जंगल की ओर चला गया लेकिन रिहायशी इलाके के करीब उसकी मौजूदगी ने लोगों को सतर्क कर दिया है। अब स्थानीय लोगों की नजर वन विभाग की गतिविधियों और तेंदुए की अगली मूवमेंट पर बनी हुई है।