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  • चीता प्रोजेक्ट में बड़ा बदलाव: अब कूनो से होंगे ट्रांसफर, विशाल बाड़े में होगी नई शिफ्टिंग

    चीता प्रोजेक्ट में बड़ा बदलाव: अब कूनो से होंगे ट्रांसफर, विशाल बाड़े में होगी नई शिफ्टिंग


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश में चीता प्रोजेक्ट अब एक नए चरण में पहुंच गया है। कूनो नेशनल पार्क में सफल पुनर्वास के बाद अब राज्य के सबसे बड़े टाइगर रिजर्व वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व (नौरादेही) में चीतों की बसाहट की तैयारी तेजी से चल रही है। खास बात यह है कि इस बार चीतों को विदेश से नहीं, बल्कि कूनो नेशनल पार्क से ही ट्रांसफर किया जाएगा। वन विभाग ने इसके लिए मुहली रेंज में विशाल और आधुनिक बोमा (बाड़े) तैयार करने का काम शुरू कर दिया है। जुलाई तक निर्माण पूरा होने के बाद अगस्त और सितंबर के बीच चीतों की शिफ्टिंग की संभावना जताई जा रही है।
     भोपाल के वन विहार जितना बड़ा बाड़ा
    नौरादेही में बन रहे कुल पांच बाड़ों का क्षेत्रफल लगभग 439 एकड़ है, जो भोपाल के वन विहार राष्ट्रीय उद्यान (करीब 451 एकड़) के लगभग बराबर है। इनमें 14 फीट ऊंचे सॉफ्ट रिलीज बाड़े और 10 फीट ऊंचे क्वॉरंटीन बाड़े शामिल हैं। सुरक्षा के लिए 6 लेयर इलेक्ट्रिक फेंसिंग भी लगाई जा रही है। वन विभाग का कहना है कि इन बाड़ों का उद्देश्य चीतों को सुरक्षित वातावरण में धीरे-धीरे प्राकृतिक माहौल के लिए तैयार करना है।
    कूनो का ‘गौरव’ बन सकता है पहला शिफ्टेड चीता
    सूत्रों के अनुसार, कूनो नेशनल पार्क से चार चीतों दो नर और दो मादा को नौरादेही लाया जा सकता है। इनमें प्रसिद्ध चीता ‘गौरव’ का नाम भी चर्चा में है। कूनो अब देश में चीता प्रोजेक्ट का प्रमुख केंद्र बन चुका है, जहां चीतों की संख्या 57 से अधिक हो चुकी है।
    बाघ, तेंदुआ और चीता एक साथ रहेंगे
    नौरादेही टाइगर रिजर्व को खास इसलिए माना जा रहा है क्योंकि यह देश का पहला ऐसा क्षेत्र होगा जहां बाघ, तेंदुआ और चीता एक साथ सह-अस्तित्व में रहेंगे। यहां विशाल खुले घास के मैदान और शिकार की पर्याप्त उपलब्धता इसे चीतों के लिए अनुकूल बनाती है। विशेषज्ञों के अनुसार चिंकारा, चीतल और सांभर की मौजूदगी इस प्रोजेक्ट को और मजबूत बनाती है। तीनों बड़े शिकारी जानवरों के अलग-अलग शिकार पैटर्न होने से टकराव की संभावना भी कम मानी जा रही है।
     ग्रामीणों को किया जाएगा जागरूक
    वन विभाग 20 मई से आसपास के गांवों में “चीता चौपाल” शुरू करेगा। इसका उद्देश्य ग्रामीणों को चीतों के व्यवहार, सुरक्षा और सह-अस्तित्व के बारे में जागरूक करना है। करीब 100 वनकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण के लिए कूनो भी भेजा जाएगा।
     नौरादेही टाइगर रिजर्व: एक नजर में
    स्थापना: 1975
    टाइगर रिजर्व दर्जा: 20 सितंबर 2023
    कुल क्षेत्रफल: 2339 वर्ग किमी (मध्यप्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व)
    जिलों में फैला: सागर, दमोह, नरसिंहपुर
    कोर एरिया: 1414 वर्ग किमी

  • भोपाल और जबलपुर जेल में दो बंदियों ने फांसी लगाई सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

    भोपाल और जबलपुर जेल में दो बंदियों ने फांसी लगाई सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश की दो प्रमुख सेंट्रल जेलों में कैदियों द्वारा आत्महत्या किए जाने की घटनाओं ने जेल प्रशासन की व्यवस्था और सुरक्षा प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक घटना भोपाल केंद्रीय जेल की है और दूसरी जबलपुर स्थित नेताजी सुभाषचंद्र बोस केंद्रीय जेल की है। दोनों ही मामलों में पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है और कारणों का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।

    भोपाल सेंट्रल जेल में हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे एक बंदी ने आत्महत्या कर ली। मृतक की पहचान गुड्डू आदिवासी के रूप में हुई है जो रायसेन जिले के बाड़ी क्षेत्र का रहने वाला था। वह वर्ष 2017 से जेल में बंद था और जेल परिसर की गौशाला में गौसेवक के रूप में कार्य कर रहा था। जानकारी के अनुसार उसने जेल परिसर में स्थित गौशाला क्षेत्र में पेड़ पर रस्सी का फंदा बनाकर फांसी लगा ली। घटना की जानकारी मिलते ही जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया और तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। शव को पोस्टमार्टम के लिए गांधी मेडिकल कॉलेज की मर्चुरी में भेजा गया है। गांधीनगर थाना पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रारंभिक तौर पर आत्महत्या के कारण स्पष्ट नहीं हो पाए हैं।

    दूसरी घटना जबलपुर केंद्रीय जेल की है जहां एक विचाराधीन बंदी ने अस्पताल वार्ड के शौचालय में तौलिये से फंदा बनाकर आत्महत्या कर ली। मृतक की पहचान गुड्डू उर्फ राजा विश्वकर्मा के रूप में हुई है जो संजीवनी नगर क्षेत्र का निवासी था। उसे वर्ष 2024 में विभिन्न धाराओं के तहत गिरफ्तार कर जेल में बंद किया गया था। जानकारी के अनुसार वह लंबे समय से शुगर और अन्य बीमारियों से भी पीड़ित था। घटना के समय वह जेल के अस्पताल खंड में भर्ती था और वहीं उसने यह कदम उठाया। जेल स्टाफ ने तुरंत डॉक्टर को बुलाया लेकिन जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया गया।

    घटना के बाद जेल प्रशासन ने संबंधित थाने को सूचना दी और सिविल लाइन थाना पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की। उप जेलर के अनुसार बंदी की स्थिति पर निगरानी रखी जा रही थी लेकिन अचानक हुई इस घटना ने सभी को चौंका दिया।

    दोनों मामलों में आत्महत्या के पीछे के कारण फिलहाल स्पष्ट नहीं हैं। पुलिस और जेल प्रशासन सभी पहलुओं की जांच कर रहे हैं जिनमें मानसिक स्थिति स्वास्थ्य समस्याएं और जेल के भीतर की परिस्थितियां शामिल हैं। लगातार दो जेलों में ऐसी घटनाएं सामने आने के बाद सुरक्षा व्यवस्था और कैदियों की निगरानी प्रणाली पर गंभीर बहस शुरू हो गई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि जेलों में मानसिक स्वास्थ्य सहायता और नियमित काउंसलिंग की व्यवस्था को और मजबूत करने की आवश्यकता है ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। फिलहाल पुलिस जांच जारी है और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • सागर में बीएमसी पर गंभीर सवाल गर्भवती की मौत के बाद परिजनों का विरोध

    सागर में बीएमसी पर गंभीर सवाल गर्भवती की मौत के बाद परिजनों का विरोध


    सागर । सागर शहर में स्थित बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में एक गर्भवती महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। मृतका की पहचान तीस वर्षीय संध्या अहिरवार के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार संध्या को सत्रह तारीख को डिलीवरी के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिवार का आरोप है कि भर्ती के बाद समय पर इलाज नहीं मिला और गंभीर लापरवाही की गई।

    परिजनों ने यह भी आरोप लगाया है कि अस्पताल में तैनात नर्सिंग स्टाफ ने इलाज के बदले पचास हजार रुपये की मांग की थी। उनका कहना है कि पैसे न देने की वजह से ऑपरेशन में देरी की गई और मरीज की हालत लगातार बिगड़ती चली गई। परिजनों का दावा है कि अगर समय पर ऑपरेशन किया जाता तो महिला की जान बचाई जा सकती थी।

    सोमवार सुबह करीब पांच बजे संध्या की तबीयत अचानक अत्यंत गंभीर हो गई। इसके बाद अस्पताल के डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस घटना के बाद अस्पताल परिसर में माहौल तनावपूर्ण हो गया और परिजनों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए दोषियों पर तुरंत कार्रवाई की मांग की।

    घटना के बाद परिजनों का आक्रोश बढ़ता गया और उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। उनका कहना है कि यह केवल लापरवाही का मामला नहीं है बल्कि गंभीर भ्रष्टाचार और अमानवीय व्यवहार का भी संकेत देता है। परिजनों ने आरोप लगाया कि गरीब मरीजों के साथ इलाज के नाम पर पैसों की मांग करना आम बात हो गई है और इस पर रोक लगनी चाहिए।

    अस्पताल परिसर में हुए हंगामे के बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर प्रयास किए गए लेकिन अब तक बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज प्रबंधन की ओर से इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। इससे लोगों में और अधिक नाराजगी देखी जा रही है।

    स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने भी इस घटना पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि अगर सरकारी अस्पतालों में इस तरह की लापरवाही और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आते रहेंगे तो आम जनता का भरोसा स्वास्थ्य व्यवस्था से उठ जाएगा।

    फिलहाल प्रशासन ने मामले की जांच की बात कही है लेकिन परिजन दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग पर अड़े हुए हैं। यह घटना एक बार फिर सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। ग्रामीण और गरीब तबके के मरीजों के लिए बेहतर और पारदर्शी इलाज व्यवस्था की मांग तेज हो गई है।

  • भोपाल में दर्दनाक हादसा एलपीजी टैंकर दीवार तोड़कर घर में घुसा मासूम की मौत परिवार घायल

    भोपाल में दर्दनाक हादसा एलपीजी टैंकर दीवार तोड़कर घर में घुसा मासूम की मौत परिवार घायल


    भोपाल ।
    राजधानी के छोला मंदिर क्षेत्र में शनिवार देर रात एक भयावह सड़क हादसे ने पूरे इलाके को दहला दिया जब एक एलपीजी टैंकर अनियंत्रित होकर रिहायशी इलाके में घुस गया और दीवार तोड़ते हुए सीधे एक घर के अंदर जा घुसा। यह हादसा रात लगभग दो बजकर बीस मिनट पर हुआ जब अधिकांश लोग गहरी नींद में थे और अचानक हुए तेज धमाके ने पूरे मोहल्ले में अफरा तफरी मचा दी।

    हादसे के दौरान घर में सो रही सात वर्षीय मासूम बच्ची खुशी गेहार की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। टैंकर के पहिये और मलबे के बीच वह करीब एक घंटे तक फंसी रही जिसके बाद पुलिस और स्थानीय लोगों की मदद से उसका शव बाहर निकाला जा सका। इस हृदयविदारक घटना से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा और पूरे इलाके में शोक की लहर फैल गई।

    हादसे में बच्ची के पिता मोनू गेहार मां मनीषा गेहार और भाई आरुष सहित कुल चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। सभी घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उनका इलाज जारी है। डॉक्टरों के अनुसार घायलों की हालत गंभीर बनी हुई है और लगातार निगरानी में रखा गया है।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार एलपीजी टैंकर तेज रफ्तार में था और चालक वाहन पर नियंत्रण खो बैठा जिसके बाद वह सीधे रिहायशी बस्ती की ओर बढ़ गया और घर की दीवार तोड़ते हुए अंदर घुस गया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि आसपास के दो अन्य मकानों को भी नुकसान पहुंचा है जिससे क्षेत्र में भय और दहशत का माहौल बन गया।

    घटना के बाद मौके पर भारी अफरा तफरी मच गई। स्थानीय लोग तुरंत मदद के लिए पहुंचे और मलबे में दबे लोगों को निकालने का प्रयास शुरू किया। सूचना मिलते ही छोला मंदिर और निशातपुरा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। पुलिस ने टैंकर को कब्जे में ले लिया है जबकि चालक घटना के बाद फरार बताया जा रहा है।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार वाहन की तकनीकी जांच की जा रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि हादसा मानवीय लापरवाही का परिणाम था या फिर किसी तकनीकी खराबी के कारण हुआ। वहीं प्रशासन ने घटना की गंभीरता को देखते हुए विस्तृत जांच के आदेश दे दिए हैं।

    स्थानीय लोगों ने इस हादसे के बाद प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि रिहायशी इलाकों में भारी वाहनों की आवाजाही पर नियंत्रण नहीं होने के कारण इस तरह की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। पीड़ित परिवार के लिए मुआवजे की मांग भी की जा रही है।

    एसीपी अक्षय चौधरी ने बताया कि हादसे में बच्ची खुशी गेहार की मौत हुई है जबकि चार लोग घायल हैं और सभी का इलाज जारी है। उन्होंने कहा कि आरोपी चालक की तलाश की जा रही है और उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    यह हादसा एक बार फिर शहर में भारी वाहनों की अनियंत्रित रफ्तार और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

  • तेज रफ्तार ने ली चार जिंदगियां ,अनूपपुर में ट्रैक्टर गड्ढे में पलटा ,बड़ा हादसा

    तेज रफ्तार ने ली चार जिंदगियां ,अनूपपुर में ट्रैक्टर गड्ढे में पलटा ,बड़ा हादसा


    अनूपपुर । अनूपपुर जिले में रविवार की सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे क्षेत्र को शोक में डुबो दिया जब एक ट्रैक्टर अनियंत्रित होकर सड़क से नीचे गहरे गड्ढे में जा पलटा। हादसा इतना भीषण था कि ट्रैक्टर के इंजन और ट्रॉली के बीच दबकर चार युवकों की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद मौके पर अफरा तफरी मच गई और ग्रामीण बड़ी संख्या में वहां एकत्र हो गए।

    जानकारी के अनुसार यह हादसा करन पठार थाना क्षेत्र के अंतर्गत ठाड़ पाथर गांव के पास हुआ। डिंडौरी जिले के भीमकुंडी गांव से चार दोस्त सुबह लगभग साढ़े पांच बजे ट्रैक्टर लेकर अनूपपुर के पौनी गांव गिट्टी लेने के लिए निकले थे। ट्रैक्टर में ट्रॉली खाली थी और सभी युवक रोजमर्रा के काम के लिए निर्माण सामग्री लेने जा रहे थे।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जैसे ही ट्रैक्टर ठाड़ पाथर गांव के पास एक मोड़ पर पहुंचा वहां सड़क का संतुलन बिगड़ गया और तेज रफ्तार के कारण वाहन अचानक नीचे उतर गया। देखते ही देखते ट्रैक्टर गहरे गड्ढे में पलट गया और उसमें सवार सभी युवक भारी मशीनरी के नीचे दब गए। हादसे की आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंचे और बचाव कार्य शुरू किया।

    ग्रामीणों ने अपनी ओर से ट्रैक्टर को हटाने की कोशिश की लेकिन भारी वजन और स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सफलता नहीं मिल सकी। इसके बाद तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। सूचना मिलने पर करन पठार थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जेसीबी मशीन की मदद से राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। लगभग एक घंटे की मशक्कत के बाद सुबह साढ़े छह बजे चारों शवों को ट्रैक्टर के नीचे से बाहर निकाला जा सका।

    हादसे में जान गंवाने वालों में अंकुश उइके उम्र चौबीस वर्ष जो ट्रैक्टर का चालक और मालिक था शामिल है। इसके अलावा ब्रजेश पेंदो उम्र अठारह वर्ष रवींद्र कुमार गोयल उम्र अठारह वर्ष और प्रकाश मार्को उम्र सत्रह वर्ष भी इस दर्दनाक हादसे का शिकार हो गए। सभी मृतक डिंडौरी जिले के भीमकुंडी गांव के निवासी बताए जा रहे हैं।

    घटना की जानकारी जैसे ही मृतकों के गांव भीमकुंडी पहुंची पूरे गांव में कोहराम मच गया। एक साथ चार युवकों की मौत से गांव में मातम का माहौल छा गया और परिजनों का रो रोकर बुरा हाल है। ग्रामीणों ने बताया कि सभी युवक मेहनतकश थे और रोजाना काम के लिए आसपास के क्षेत्रों में जाते थे।

    पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया और शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। प्रारंभिक जांच में हादसे का कारण तेज रफ्तार और मोड़ पर नियंत्रण खोना माना जा रहा है हालांकि पुलिस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है ताकि वास्तविक कारणों की पुष्टि हो सके।

    यह हादसा क्षेत्र में सड़क सुरक्षा और ग्रामीण मार्गों की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। स्थानीय लोग प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि ऐसे खतरनाक मोड़ों पर सुरक्षा उपाय किए जाएं ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

  • उज्जैन में सड़कों पर उतरी कांग्रेस बिजली दर बढ़ोतरी और गेहूं खरीदी टलने पर उग्र आंदोलन का ऐलान

    उज्जैन में सड़कों पर उतरी कांग्रेस बिजली दर बढ़ोतरी और गेहूं खरीदी टलने पर उग्र आंदोलन का ऐलान


    उज्जैन । मध्य प्रदेश के उज्जैन में बढ़ती महंगाई और जनसुविधाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। शहर में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर जोरदार प्रदर्शन किया और बिजली दरों में प्रस्तावित वृद्धि गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी तथा ईंधन संकट को लेकर सरकार के खिलाफ नाराजगी जताई। इस प्रदर्शन के जरिए कांग्रेस ने आम जनता और किसानों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाते हुए सरकार को चेतावनी भी दी है।

    प्रदर्शन की शुरुआत देवास गेट चौराहे से हुई जहां बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता एकत्रित हुए। यहां से रैली मालीपुरा होते हुए एटलस चौराहे तक निकाली गई। पूरे रास्ते कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए महंगाई और सरकारी नीतियों के खिलाफ विरोध जताया। रैली के समापन के बाद कलेक्टर के माध्यम से राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा गया जिसमें 1 अप्रैल से लागू होने वाली बिजली दर वृद्धि को तत्काल वापस लेने की मांग की गई।

    कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि केंद्र और राज्य सरकार की नीतियां आम नागरिकों के हितों के विपरीत हैं। उन्होंने कहा कि गैस सिलेंडर की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है जिससे आम परिवारों का बजट बिगड़ गया है। साथ ही पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता को लेकर भी संकट की स्थिति बताई जा रही है जिससे लोगों को रोजमर्रा की जिंदगी में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

    शहर कांग्रेस अध्यक्ष मुकेश भाटी के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में यह भी कहा गया कि प्रदेश में लगातार बिजली बिलों में वृद्धि की जा रही है और अब एक बार फिर प्रति यूनिट दर बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। इससे पहले ही महंगाई से जूझ रही जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। कांग्रेस ने इस निर्णय को जनविरोधी बताते हुए इसे तुरंत वापस लेने की मांग की है।

    इसके साथ ही किसानों से जुड़े मुद्दे को भी जोरशोर से उठाया गया। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी 1 अप्रैल से शुरू होनी थी लेकिन इसे बढ़ाकर 10 अप्रैल कर दिया गया है। इस फैसले से किसानों को नुकसान होगा क्योंकि उन्हें मजबूरी में अपनी फसल कम दामों पर बेचनी पड़ सकती है। इसे किसानों के साथ अन्याय बताते हुए कांग्रेस ने सरकार के फैसले की कड़ी आलोचना की।

    प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि कई स्थानों पर गैस सिलेंडर और ईंधन की कमी के कारण लोगों को ज्यादा कीमत देकर सामान खरीदना पड़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि जो गैस सिलेंडर पहले कम कीमत में मिलता था अब वह ब्लैक में काफी महंगा बिक रहा है जिससे आम लोगों की परेशानी और बढ़ गई है।

    कांग्रेस ने साफ चेतावनी दी है कि यदि 1 अप्रैल से बिजली दरों में वृद्धि लागू की जाती है और जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार ने ध्यान नहीं दिया तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। इस प्रदर्शन ने यह संकेत दे दिया है कि आने वाले दिनों में महंगाई और जनहित के मुद्दों पर राजनीतिक टकराव और तेज हो सकता है।

  • हाईवे निर्माण में निगम की मिलीभगत ग्रामीण परेशान रात में कचरा डंप कर फोरलेन की गुणवत्ता खतरे में

    हाईवे निर्माण में निगम की मिलीभगत ग्रामीण परेशान रात में कचरा डंप कर फोरलेन की गुणवत्ता खतरे में


    भोपाल। भोपाल-रायसेन-सागर नेशनल हाईवे 146 के फोरलेन निर्माण में गंभीर भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। ठेकेदारों द्वारा बेस फीलिंग में मुरम की बजाय कचरे का इस्तेमाल किया जा रहा है। आदमपुर क्षेत्र से होकर गुजर रहे इस हाईवे पर भोपाल नगर निगम की मिलीभगत के आरोप भी लगाए गए हैं।

    नियमानुसार हाईवे की बेस फिलिंग के लिए मुरम का कोपरा आवश्यक है और नगर निगम का कचरा प्रोसेस कर खाद बनाया जाता है। लेकिन ठेकेदार और निगम के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से रातों-रात सैकड़ों डंपर कचरा हाईवे में फेंका जा रहा है। इस कदम से निर्माण की गुणवत्ता खतरे में है और भविष्य में रोड धंसने और पुल गिरने जैसी घटनाओं की आशंका बढ़ गई है।

    स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि रात को 12 बजे के बाद लगातार कचरा डंप किया जाता है। इससे न केवल सड़क की मजबूती प्रभावित हो रही है बल्कि कचरे से उठने वाली बदबू और गंदगी ने उनके जीवन को भी परेशान कर दिया है। बिलखिरिया के ग्रामीणों ने इसका विरोध जताया है और प्रशासन से तुरंत कार्रवाई की मांग की है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि कचरे से बेस फीलिंग करने से सड़क की लाइफ कम हो जाएगी और भारी बारिश या भारी यातायात की स्थिति में सड़क धंस सकती है। पुलों और ओवरब्रिज की मजबूती भी खतरे में पड़ सकती है। इस तरह के भ्रष्टाचार से केवल ग्रामीण ही नहीं बल्कि यात्रियों और पूरे परिवहन तंत्र की सुरक्षा भी प्रभावित होगी।

    इस पूरे मामले में ठेकेदारों और निगम के अधिकारियों की मिलीभगत उजागर हुई है। ईमानदार निरीक्षण और सही सामग्री का उपयोग करने में लापरवाही ने हाईवे निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर समय पर सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में बड़े हादसे होने की संभावना है।

    ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि वे इसे अनदेखा नहीं करेंगे और अधिकारियों से सार्वजनिक जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। सड़क निर्माण में पारदर्शिता, गुणवत्ता और नियमों का पालन ही लंबे समय तक सुरक्षित हाईवे सुनिश्चित कर सकता है।

  • डॉक्टर बनने की चाहत और सिलेबस का भारी तनाव; भोपाल GMC की छात्रा की बाथरूम में मिली लाश, पीजी इंचार्ज का बड़ा खुलासा

    डॉक्टर बनने की चाहत और सिलेबस का भारी तनाव; भोपाल GMC की छात्रा की बाथरूम में मिली लाश, पीजी इंचार्ज का बड़ा खुलासा


    भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज (GMC) में एक बार फिर मानसिक तनाव और पढ़ाई के दबाव ने एक उभरते हुए करियर को हमेशा के लिए शांत कर दिया। आलीराजपुर जिले की रहने वाली एमबीबीएस प्रथम वर्ष की छात्रा रोशनी ने कोहेफिजा स्थित एक निजी पीजी (पेइंग गेस्ट) के बाथरूम में एसिड पीकर आत्महत्या कर ली। मंगलवार सुबह जब रोशनी अपने कमरे से बाहर नहीं निकली और सहेलियों के बार-बार बुलाने पर भी कोई जवाब नहीं मिला, तब इस खौफनाक वारदात का खुलासा हुआ।

    घटना की जानकारी मिलते ही आलीराजपुर से भोपाल पहुंचे पिता वंतर सिंह कलेश की आंखों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि रोशनी बचपन से ही मेधावी थी और उसका सपना एक सफल डॉक्टर बनने का था। नीट परीक्षा में 400 से अधिक अंक हासिल कर उसने अपनी मेहनत के दम पर गांधी मेडिकल कॉलेज में दाखिला लिया था। पिता के अनुसार, रोशनी पिछले कुछ दिनों से घर पर ही थी और शनिवार को ही उन्होंने खुद उसे भोपाल जाने वाली ट्रेन में बैठाया था। हालांकि रोशनी ने बातों-बातों में पढ़ाई के दबाव का जिक्र किया था, लेकिन वह हमेशा हिम्मत दिखाते हुए कहती थी, “पापा, मैं संभाल लूंगी, मैं पढ़ लूंगी।” किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि पढ़ाई का यह बोझ उसकी जान ले लेगा।

    दूसरी ओर, पीजी की संचालक करुणा नायर के बयानों ने मामले में एक नया मोड़ दे दिया है। संचालक का दावा है कि रोशनी जब दो दिन पहले घर से लौटी थी, तभी से वह अपनी सहेलियों के सामने सुसाइड करने की बातें कर रही थी। मंगलवार सुबह जब वह कॉलेज के लिए तैयार होकर बाहर नहीं निकली, तो सहेलियों ने गार्ड को बुलाकर दरवाजा तुड़वाया। भीतर का नजारा भयावह था; रोशनी बाथरूम में बेसुध पड़ी थी और पास ही एसिड की खाली बोतल पड़ी मिली। उसे तुरंत हमीदिया अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने भी इस बात की पुष्टि कर दी है कि एसिड पीने के कारण अंदरूनी अंगों के बुरी तरह जल जाने से उसकी मृत्यु हुई।

    गांधी मेडिकल कॉलेज की डीन कविता एन. सिंह ने घटना पर दुख व्यक्त करते हुए बताया कि रोशनी एक ‘डे-स्कॉलर’ छात्रा थी और अक्टूबर में ही उसने कॉलेज में प्रवेश लिया था। प्रारंभिक जांच और मोबाइल संदेशों से यह संकेत मिले हैं कि रोशनी को मेडिकल का सिलेबस समझने में कठिनाई हो रही थी। वह कड़ी मेहनत कर रही थी, लेकिन उसे लग रहा था कि वह विषयों को ठीक से समझ नहीं पा रही है। इसी ‘एकेडमिक स्ट्रेस’ के कारण वह गहरे अवसाद में चली गई थी। पुलिस अब इस मामले की हर पहलू से बारीकी से जांच कर रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि क्या तनाव का कारण सिर्फ पढ़ाई थी या इसके पीछे कुछ और भी वजहें छिपी हैं।

  • मुरैना में मंदिर की छत गिरने से मातम प्रसाद लेने गईं तीन मासूम बच्चियों की दर्दनाक मौत

    मुरैना में मंदिर की छत गिरने से मातम प्रसाद लेने गईं तीन मासूम बच्चियों की दर्दनाक मौत


    मुरैना/मध्य प्रदेश के मुरैना जिले से एक बेहद दर्दनाक हादसे की खबर सामने आई है, जहां मंदिर की छत गिरने से तीन मासूम बच्चियों की मौत हो गई। यह हादसा उस वक्त हुआ जब बच्चियां मंदिर में प्रसाद लेने गई थीं। अचानक हुए इस हादसे ने पूरे इलाके को सदमे में डाल दिया और गांव में मातम का माहौल बन गया।

    घटना मुरैना जिले के कैलारस थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले एहरौली गांव की है। यहां स्थित चमड़ा माता मंदिर में रोज की तरह श्रद्धालु पूजा और प्रसाद लेने पहुंचे थे। इसी दौरान अचानक मंदिर की छत भरभराकर गिर गई। छत गिरते ही वहां अफरा तफरी मच गई और लोग इधर उधर भागने लगे। मलबे के नीचे कई लोग दब गए।

    प्रसाद लेने गईं तीन बच्चियां छत के नीचे दब गईं। मौके पर मौजूद लोगों ने उन्हें बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। तीनों बच्चियों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। इस हादसे में तीन अन्य बच्चियां और एक पति पत्नी भी गंभीर रूप से घायल हो गए।

    घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग और ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। मलबा हटाने का काम शुरू किया गया और घायलों को बाहर निकाला गया। सभी घायलों को तुरंत जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। डॉक्टरों के अनुसार कुछ घायलों की हालत गंभीर बनी हुई है, जिन पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।

    हादसे की जानकारी मिलते ही कैलारस थाना पुलिस मौके पर पहुंची और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस ने घटनास्थल को घेर लिया और मलबे का निरीक्षण किया। प्रारंभिक जांच में मंदिर की जर्जर हालत सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि मंदिर की छत काफी पुरानी थी और लंबे समय से उसकी मरम्मत नहीं कराई गई थी।

    इस हादसे के बाद ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि मंदिर की हालत पहले से खराब थी, लेकिन इस ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया। यदि समय रहते मरम्मत कराई जाती तो शायद यह हादसा टल सकता था।

    घटना के बाद गांव में शोक की लहर दौड़ गई है। जिन परिवारों ने अपनी मासूम बेटियों को खोया है, उनका रो रोकर बुरा हाल है। ग्रामीणों ने प्रशासन से पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता और घायलों को बेहतर इलाज मुहैया कराने की मांग की है।फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और हादसे के कारणों का पता लगाया जा रहा है। प्रशासन की ओर से भी मौके पर अधिकारियों को भेजा गया है और आगे की कार्रवाई की जा रही है।

  • इंदौर-बैतूल हाईवे पर दर्दनाक हादसा, मां-बेटे समेत चार की मौत

    इंदौर-बैतूल हाईवे पर दर्दनाक हादसा, मां-बेटे समेत चार की मौत


    इंदौर-बैतूल/ राष्ट्रीय राजमार्ग पर मंगलवार रात एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को शोक में डुबो दिया। गुराडिया और दुलवा क्षेत्र में हुई घटनाओं में तेज रफ्तार कार ने बाइक सवार तीन लोगों को टक्कर मार दी, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। सूचना मिलते ही नेमावर पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को तत्काल नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया। लेकिन उनकी जान बचाई नहीं जा सकी।

    हादसे में मरने वाले तीन में से दो लोग क्षेत्र के ग्राम खूबगांव के निवासी थे। 23 वर्षीय महेंद्र और उनकी 65 वर्षीय मां नर्मदाबाई के साथ ही 45 वर्षीय चंदू नामक युवक ने भी अपनी जान गंवाई। शुरुआती जांच में पुलिस ने पता लगाया कि यह सभी लोग किसी मवेशी के सौदे के लिए नेमावर की ओर जा रहे थे। हालांकि यह अभी स्पष्ट नहीं हो पाया कि उनका अंतिम गंतव्य कहां था।

    नेमावर थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मृतकों के शव पोस्टमार्टम के बाद उनके स्वजनों को सौंप दिए गए हैं। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि हादसे में तेज रफ्तार और हाईवे पर असुरक्षित ड्राइविंग प्रमुख कारण रही या अन्य कोई कारक भी शामिल था।स्थानीय लोग और राहगीर हाईवे पर वाहन चलाते समय सतर्क रहने की चेतावनी दे रहे हैं। हादसे ने हाईवे पर सुरक्षा उपायों और सड़क दुर्घटनाओं के जोखिम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीण और परिवार के लोग शोक में हैं और मृतकों को अंतिम विदाई दे रहे हैं।

    इस हादसे ने यह भी याद दिलाया कि सड़क सुरक्षा नियमों का पालन न करना और तेज रफ्तार वाहन चलाना किसी भी समय जानलेवा साबित हो सकता है। नेमावर पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे हाईवे पर वाहन चलाते समय सावधानी बरतें और नियमों का पालन करें ताकि ऐसे हादसे दोबारा न हों।