नौरादेही में बन रहे कुल पांच बाड़ों का क्षेत्रफल लगभग 439 एकड़ है, जो भोपाल के वन विहार राष्ट्रीय उद्यान (करीब 451 एकड़) के लगभग बराबर है। इनमें 14 फीट ऊंचे सॉफ्ट रिलीज बाड़े और 10 फीट ऊंचे क्वॉरंटीन बाड़े शामिल हैं। सुरक्षा के लिए 6 लेयर इलेक्ट्रिक फेंसिंग भी लगाई जा रही है। वन विभाग का कहना है कि इन बाड़ों का उद्देश्य चीतों को सुरक्षित वातावरण में धीरे-धीरे प्राकृतिक माहौल के लिए तैयार करना है।
सूत्रों के अनुसार, कूनो नेशनल पार्क से चार चीतों दो नर और दो मादा को नौरादेही लाया जा सकता है। इनमें प्रसिद्ध चीता ‘गौरव’ का नाम भी चर्चा में है। कूनो अब देश में चीता प्रोजेक्ट का प्रमुख केंद्र बन चुका है, जहां चीतों की संख्या 57 से अधिक हो चुकी है।
नौरादेही टाइगर रिजर्व को खास इसलिए माना जा रहा है क्योंकि यह देश का पहला ऐसा क्षेत्र होगा जहां बाघ, तेंदुआ और चीता एक साथ सह-अस्तित्व में रहेंगे। यहां विशाल खुले घास के मैदान और शिकार की पर्याप्त उपलब्धता इसे चीतों के लिए अनुकूल बनाती है। विशेषज्ञों के अनुसार चिंकारा, चीतल और सांभर की मौजूदगी इस प्रोजेक्ट को और मजबूत बनाती है। तीनों बड़े शिकारी जानवरों के अलग-अलग शिकार पैटर्न होने से टकराव की संभावना भी कम मानी जा रही है।
वन विभाग 20 मई से आसपास के गांवों में “चीता चौपाल” शुरू करेगा। इसका उद्देश्य ग्रामीणों को चीतों के व्यवहार, सुरक्षा और सह-अस्तित्व के बारे में जागरूक करना है। करीब 100 वनकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण के लिए कूनो भी भेजा जाएगा।
स्थापना: 1975
टाइगर रिजर्व दर्जा: 20 सितंबर 2023
कुल क्षेत्रफल: 2339 वर्ग किमी (मध्यप्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व)
जिलों में फैला: सागर, दमोह, नरसिंहपुर
कोर एरिया: 1414 वर्ग किमी









