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  • शव यात्रा से सियासी संदेश तक एमपी की राजनीति में एक दिन में दिखे कई रंग बिजली संकट पर बवाल जलभराव पर टकराव और विजयवर्गीय के गीत के चर्चे

    शव यात्रा से सियासी संदेश तक एमपी की राजनीति में एक दिन में दिखे कई रंग बिजली संकट पर बवाल जलभराव पर टकराव और विजयवर्गीय के गीत के चर्चे

    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में गुरुवार को राजनीति प्रशासन और जनआक्रोश से जुड़ी कई घटनाओं ने पूरे दिन सुर्खियां बटोरीं। कहीं बिजली कटौती से परेशान लोगों ने ऊर्जा मंत्री के खिलाफ अनोखा विरोध प्रदर्शन किया तो कहीं बारिश के बाद जलभराव को लेकर महापौर और नगर निगम कमिश्नर आमने सामने आ गए। वहीं कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का एक भावुक गीत भी राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र बन गया।

    शिवपुरी जिले के सिरसौद क्षेत्र में लंबे समय से बिजली कटौती से परेशान ग्रामीणों का गुस्सा उस समय फूट पड़ा जब उन्होंने ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर की प्रतीकात्मक शव यात्रा निकाल दी। ग्रामीणों ने पहले मंत्री की प्रतीकात्मक अर्थी बनाई फिर उसके पास बैठकर मातम मनाया और बाद में अंतिम यात्रा निकालकर प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार भी किया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि बिजली संकट को लेकर कई बार अधिकारियों और मंत्री तक शिकायत पहुंचाई गई लेकिन केवल आश्वासन मिले जबकि हालात जस के तस बने रहे। नाराज लोगों ने कहा कि जब समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो विरोध का यह तरीका अपनाना पड़ा।

    प्रद्युम्न सिंह तोमर अक्सर सफाई अभियान निरीक्षण और जनसंपर्क जैसे कार्यक्रमों को लेकर चर्चा में रहते हैं लेकिन इस बार विरोध प्रदर्शन ने बिजली व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि बिजली व्यवस्था सुधारने पर उतना ही ध्यान दिया जाता जितना प्रचार और जनसंपर्क पर दिया जाता है तो शायद ऐसी स्थिति पैदा नहीं होती।

    उधर मुरैना में बारिश के बाद कई इलाकों में जलभराव की समस्या सामने आई। हालात का जायजा लेने पहुंचीं महापौर शारदा सोलंकी ने नगर निगम की तैयारियों पर नाराजगी जताते हुए अधिकारियों से पूछा कि बारिश से पहले नालों की सफाई क्यों नहीं कराई गई। निरीक्षण के दौरान महापौर और नगर निगम कमिश्नर के बीच तीखी बहस भी हुई। बताया गया कि कमिश्नर ने अपने तरीके से काम करने की बात कही जिस पर महापौर ने कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि यदि प्रशासन जनप्रतिनिधियों की बात नहीं मानेगा तो इसकी जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए। इस पूरे घटनाक्रम ने नगर निगम की तैयारियों और प्रशासनिक समन्वय पर सवाल खड़े कर दिए।

    इधर इंदौर में कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया जिसमें वह जाने कहां गए वो दिन गीत गाते नजर आए। विजयवर्गीय पहले भी कई बार अपनी गायकी का शौक दिखा चुके हैं लेकिन इस बार उनके गीत को लेकर राजनीतिक गलियारों में अलग अलग तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। हाल ही में उन्होंने एक कार्यक्रम में भाजपा संगठन के कुछ नेताओं के अच्छे समय का जिक्र करते हुए मजाकिया अंदाज में कहा था कि शायद उनका भी अच्छा समय आ जाए। इसके बाद अब उनके गीत को भी उसी बयान से जोड़कर देखा जा रहा है हालांकि मंत्री की ओर से इस पर कोई राजनीतिक टिप्पणी नहीं की गई है।

    इसी बीच राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी तेज रही कि हाल ही में राजधानी भोपाल में हुए मूंग खरीदी आंदोलन के पीछे एक पूर्व मंत्री की रणनीति काम कर रही थी। हालांकि इस संबंध में किसी तरह की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।

    इन घटनाओं ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि प्रदेश में जनता की मूलभूत समस्याएं प्रशासनिक जवाबदेही और राजनीतिक गतिविधियां लगातार चर्चा के केंद्र में बनी हुई हैं।

  • दतिया में बीजेपी की अग्निपरीक्षा नरोत्तम समर्थकों की नाराजगी और जातीय समीकरणों के बीच फंसा उपचुनाव

    दतिया में बीजेपी की अग्निपरीक्षा नरोत्तम समर्थकों की नाराजगी और जातीय समीकरणों के बीच फंसा उपचुनाव


    दतिया  दतिया विधानसभा उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी के सामने इस बार सबसे बड़ी चुनौती विपक्ष नहीं बल्कि बदले हुए राजनीतिक समीकरण बन गए हैं। पूर्व गृह मंत्री और लंबे समय तक दतिया की राजनीति का प्रमुख चेहरा रहे नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं मिलने के बाद चुनावी माहौल बदलता नजर आ रहा है। पार्टी ने उनकी जगह आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया है लेकिन जमीन पर नरोत्तम मिश्रा के प्रभाव और समर्थकों की भावनाएं अब भी चुनावी चर्चा का केंद्र बनी हुई हैं।

    ग्रामीण इलाकों में कई मतदाता आज भी नरोत्तम मिश्रा को दादा के नाम से याद करते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र की समस्याओं के समाधान में उनकी सक्रिय भूमिका रहती थी। ऐसे में टिकट बदलने के फैसले के बाद कुछ समर्थकों में नाराजगी दिखाई दे रही है। हालांकि पार्टी इसे पूरी तरह नियंत्रित करने का दावा कर रही है।

    पिछले करीब 18 वर्षों में दतिया बीजेपी संगठन में नरोत्तम मिश्रा का मजबूत प्रभाव रहा। इस दौरान उनका समर्थक नेटवर्क बूथ स्तर तक सक्रिय रहा और चुनावी प्रबंधन की जिम्मेदारी भी काफी हद तक इसी टीम के पास रही। अब नए उम्मीदवार के साथ पार्टी को बूथ स्तर पर संगठन को फिर से सक्रिय करना पड़ रहा है। पुराने कार्यकर्ता दोबारा मैदान में जरूर उतरे हैं लेकिन स्थानीय स्तर पर उनका जनसंपर्क पहले जैसा मजबूत नहीं माना जा रहा।

    इसी चुनौती को देखते हुए बीजेपी ने चुनाव प्रचार में पूरी ताकत झोंक दी है। अब तक आठ मंत्री क्षेत्र में प्रचार कर चुके हैं जबकि 20 विधायकों को अलग अलग शक्ति केंद्रों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। विभिन्न मोर्चों के पदाधिकारी भी लगातार मतदाताओं तक पहुंचने में जुटे हैं। पार्टी को उम्मीद है कि व्यापक संगठनात्मक अभियान से संभावित नुकसान की भरपाई की जा सकेगी।

    नरोत्तम मिश्रा भी चुनावी अभियान से पूरी तरह दूर नहीं हैं। उन्हें चुनाव संचालन समिति का अध्यक्ष बनाया गया है और उनके फोटो मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तथा प्रदेश अध्यक्ष के साथ प्रचार सामग्री में प्रमुखता से लगाए गए हैं। हालांकि उनका प्रचार करने का तरीका अलग है। वे उम्मीदवार के साथ मंच साझा करने के बजाय स्वयं घर घर जाकर मतदाताओं से संपर्क कर रहे हैं।

    नरोत्तम मिश्रा ने समर्थकों की नाराजगी के सवाल पर कहा कि अब पार्टी में कोई असंतुष्ट नहीं है और सभी कार्यकर्ता भाजपा की जीत के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी ने उन्हें लंबे समय तक विधायक और मंत्री बनने का अवसर दिया और अब वे केवल एक कार्यकर्ता के रूप में संगठन की जिम्मेदारी निभाना चाहते हैं।

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस उपचुनाव में जातीय समीकरण भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। खासकर ब्राह्मण मतदाताओं का रुझान चुनाव परिणाम को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में दतिया का उपचुनाव केवल उम्मीदवारों की लड़ाई नहीं बल्कि संगठन की मजबूती स्थानीय नेतृत्व और सामाजिक समीकरणों की भी बड़ी परीक्षा बन गया है।

  • राहुल गांधी के विरोध में बीजेपी का प्रदर्शन विवादित तख्ती पर बढ़ा सियासी घमासान भोपाल में कांग्रेस भी करेगी पलटवार

    राहुल गांधी के विरोध में बीजेपी का प्रदर्शन विवादित तख्ती पर बढ़ा सियासी घमासान भोपाल में कांग्रेस भी करेगी पलटवार


    नई दिल्ली । दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास के बाहर राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं के प्रदर्शन के बाद मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भी राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। बुधवार को भारतीय जनता पार्टी के विधायक और कार्यकर्ता रेड क्रॉस चौराहे पर राहुल गांधी के प्रदर्शन के विरोध में एकत्र हुए और प्रदर्शन किया। इसी दौरान प्रदर्शन स्थल पर एक महिला कार्यकर्ता के हाथ में ऐसी तख्ती दिखाई दी जिस पर संविधान से जुड़ा विवादित संदेश लिखा था। पोस्टर सामने आते ही वहां मौजूद नेताओं और कार्यकर्ताओं में हलचल मच गई।

    मौके पर मौजूद भाजपा नेताओं को जैसे ही तख्ती पर लिखे संदेश की जानकारी मिली उन्होंने तुरंत उसे हटाने का प्रयास किया। बताया गया कि पार्टी के प्रवक्ता ने स्थिति को संभालते हुए विवादित तख्ती को सार्वजनिक रूप से दिखाई देने से रोक दिया। हालांकि इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया तथा प्रदर्शन के दौरान मौजूद लोगों के बीच भी इस विषय को लेकर चर्चा शुरू हो गई।

    भारतीय जनता पार्टी का यह प्रदर्शन दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास के बाहर राहुल गांधी और कांग्रेस नेताओं द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शन के जवाब में आयोजित किया गया था। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस पर लोकतांत्रिक मर्यादाओं का उल्लंघन करने और राजनीतिक माहौल खराब करने का आरोप लगाया। प्रदर्शन के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए कांग्रेस के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया।

    दूसरी ओर कांग्रेस ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी रणनीति तैयार कर ली है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार भोपाल के श्यामला हिल्स स्थित आदिवासी छात्रावास में छात्रों की गूंज अभियान के तहत प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे। इस दौरान वे छात्रों से जुड़े मुद्दों के साथ दिल्ली में हुए घटनाक्रम पर कांग्रेस का आधिकारिक पक्ष सामने रखेंगे। कांग्रेस का कहना है कि छात्रों के हितों और लोकतांत्रिक अधिकारों के सवाल पर पार्टी लगातार आवाज उठाती रहेगी।

    समाजवादी पार्टी ने भी इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। प्रदेश अध्यक्ष डॉ मनोज यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाने की तैयारी की है। पार्टी का कहना है कि दिल्ली में विपक्षी नेताओं के साथ हुई कार्रवाई लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं थी और इस विषय पर जनता के सामने अपना पक्ष रखा जाएगा।

    दिल्ली में हुए घटनाक्रम का असर अब प्रदेश की राजनीति पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। एक ओर भाजपा विरोध प्रदर्शन कर रही है तो दूसरी ओर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से अपनी बात जनता तक पहुंचाने में जुटी हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा मध्य प्रदेश की राजनीति में भी चर्चा का प्रमुख विषय बना रह सकता है।

    नोट: भाजपा प्रदर्शन के दौरान दिखाई देने वाली विवादित तख्ती को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दावे सामने आए हैं। इस मामले पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं और घटनाक्रम राजनीतिक विवाद का विषय बना हुआ है।

  • भाजपा में टिकट बदलने की परंपरा नहीं दतिया विवाद पर बोले कैलाश विजयवर्गीय नरोत्तम मिश्रा करेंगे संगठन का सम्मान

    भाजपा में टिकट बदलने की परंपरा नहीं दतिया विवाद पर बोले कैलाश विजयवर्गीय नरोत्तम मिश्रा करेंगे संगठन का सम्मान


    मध्य प्रदेश। दतिया विधानसभा उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी को लेकर सामने आए विवाद के बीच प्रदेश सरकार के वरिष्ठ मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने पार्टी की स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि भारतीय जनता पार्टी में टिकट घोषित होने के बाद उसे बदलने की कोई परंपरा नहीं रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि संगठन सभी कार्यकर्ताओं से संवाद कर मतभेद समाप्त करेगा और भाजपा उम्मीदवार आशुतोष तिवारी भारी मतों से चुनाव जीतेंगे।

    इंदौर में मीडिया से चर्चा करते हुए विजयवर्गीय ने कहा कि भाजपा एक लोकतांत्रिक संगठन है जहां प्रत्येक कार्यकर्ता को अपनी बात रखने का अधिकार है। किसी भी चुनाव में टिकट वितरण के बाद कुछ कार्यकर्ताओं की नाराजगी स्वाभाविक होती है लेकिन संगठन का निर्णय सभी के लिए सर्वोपरि होता है। उन्होंने कहा कि पार्टी हर फैसला लंबी चर्चा विचार विमर्श और तय प्रक्रिया के बाद करती है इसलिए घोषित प्रत्याशी को बदलने का कोई सवाल नहीं उठता।

    पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों की नाराजगी पर प्रतिक्रिया देते हुए विजयवर्गीय ने कहा कि नरोत्तम मिश्रा भाजपा के वरिष्ठ और समर्पित नेता हैं। उन्होंने हमेशा संगठन की मर्यादा का पालन किया है और इस बार भी पार्टी के निर्णय का सम्मान करेंगे। उन्होंने बताया कि उन्होंने स्वयं नरोत्तम मिश्रा से संपर्क करने का प्रयास किया लेकिन बातचीत नहीं हो सकी। इसके बावजूद उन्हें पूरा विश्वास है कि संगठन और कार्यकर्ताओं के बीच संवाद के जरिए सभी मतभेद समाप्त हो जाएंगे।

    उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश की 230 विधानसभा सीटों पर हजारों कार्यकर्ता चुनाव लड़ने की इच्छा रखते हैं लेकिन टिकट केवल एक व्यक्ति को मिलता है। ऐसे में सभी को अवसर मिलना संभव नहीं होता। संगठन सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद ही उम्मीदवार तय करता है और कार्यकर्ताओं से अपेक्षा की जाती है कि वे पार्टी के फैसले के साथ खड़े रहें। विजयवर्गीय ने कहा कि आशुतोष तिवारी लंबे समय तक संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुके हैं और वे मजबूत संगठनात्मक पृष्ठभूमि वाले कार्यकर्ता हैं इसलिए उन्हें चुनाव में व्यापक समर्थन मिलेगा।

    इस दौरान विजयवर्गीय ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के भाई से जुड़े पुराने ड्रग्स मामले पर भी कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले नेताओं को दूसरों पर आरोप लगाने से पहले अपने घर की परिस्थितियों पर भी नजर डालनी चाहिए। उनके अनुसार जब स्वयं परिवार के सदस्य अपनी पुरानी गलतियों को स्वीकार कर चुके हैं तब इस विषय पर अधिक टिप्पणी की आवश्यकता नहीं है।

    उन्होंने जीतू पटवारी की प्रस्तावित साइकिल यात्रा को लेकर भी तंज कसते हुए कहा कि केवल यात्राएं निकालने से राजनीतिक माहौल नहीं बदलता। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि इससे पहले कांग्रेस के बड़े नेताओं की यात्राओं का भी अपेक्षित राजनीतिक असर दिखाई नहीं दिया था इसलिए केवल यात्रा के भरोसे जनता का विश्वास नहीं जीता जा सकता।

    दतिया उपचुनाव को लेकर भाजपा के भीतर उठे असंतोष के बीच कैलाश विजयवर्गीय का यह बयान संगठन का स्पष्ट संदेश माना जा रहा है कि पार्टी अपने घोषित उम्मीदवार के साथ मजबूती से खड़ी है। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि संगठन नाराज कार्यकर्ताओं को किस तरह साथ लेकर चुनावी मैदान में उतरता है और उपचुनाव का परिणाम किस दिशा में जाता है।

  • मुख्यमंत्री राजा हरिश्चंद्र नहीं हैं, सच बताइए 7669 करोड़ कहां गए, सरदार सरोवर समझौते पर कांग्रेस का तीखा हमला

    मुख्यमंत्री राजा हरिश्चंद्र नहीं हैं, सच बताइए 7669 करोड़ कहां गए, सरदार सरोवर समझौते पर कांग्रेस का तीखा हमला


    मध्यप्रदेश । सरदार सरोवर परियोजना से जुड़े अंतरराज्यीय वित्तीय समझौते को लेकर मध्यप्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और राज्य सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि मध्यप्रदेश के हितों से समझौता किया गया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जो कह दें वही अंतिम सत्य नहीं हो जाता। सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि जब मध्यप्रदेश ने सरदार सरोवर परियोजना में हुए नुकसान के आधार पर 7669 करोड़ रुपए का दावा किया था तो आखिर वह दावा किस आधार पर छोड़ दिया गया। पटवारी ने पूरे समझौते पर श्वेत पत्र जारी करने और विधानसभा में विस्तृत चर्चा कराने की मांग भी की।

    भोपाल में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में जीतू पटवारी ने कहा कि नर्मदा नदी मध्यप्रदेश की जीवनरेखा है और सरदार सरोवर परियोजना के कारण सबसे अधिक नुकसान भी प्रदेश को ही उठाना पड़ा। उन्होंने कहा कि सबसे अधिक कृषि भूमि वन क्षेत्र और आदिवासी गांव मध्यप्रदेश में डूब क्षेत्र में आए। हजारों परिवारों का विस्थापन हुआ और पुनर्वास का सबसे बड़ा दायित्व भी प्रदेश ने निभाया। ऐसे में तत्कालीन आकलन के आधार पर मध्यप्रदेश ने 7669 करोड़ रुपए का दावा किया था। अब सरकार यह बताए कि वह दावा अचानक समाप्त कैसे हो गया।

    कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार केवल यह प्रचार कर रही है कि गुजरात की लगभग 1500 करोड़ रुपए की देनदारी को कम कर 231 करोड़ रुपए में निपटा दिया गया और इसे बड़ी उपलब्धि बताया जा रहा है। लेकिन सरकार यह नहीं बता रही कि मध्यप्रदेश के हजारों करोड़ रुपए के दावे का क्या हुआ। उन्होंने कहा कि जनता को पूरे समझौते की सच्चाई जानने का अधिकार है और सरकार को सभी दस्तावेज सार्वजनिक करने चाहिए।

    पटवारी ने सरकार से कई सीधे सवाल भी पूछे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बताएं यह फैसला किस कानूनी और वित्तीय आधार पर लिया गया। क्या इस विषय पर राज्य मंत्रिमंडल में चर्चा हुई थी। क्या विधानसभा को विश्वास में लिया गया था। क्या पर्यावरण विशेषज्ञों और परियोजना से जुड़े जानकारों की राय ली गई थी। उन्होंने दावा किया कि दिल्ली में हुई बैठक में शामिल होने जा रहे अधिकारियों से उनकी विमान यात्रा के दौरान बातचीत हुई थी और अधिकारियों ने बताया था कि मध्यप्रदेश अपने दावे को लेकर पूरी तैयारी के साथ बैठक में जा रहा है। ऐसे में समझौते के बाद दावा समाप्त होने पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

    कांग्रेस ने प्रदेश की आर्थिक स्थिति को भी इस मुद्दे से जोड़ते हुए सरकार पर निशाना साधा। पटवारी ने कहा कि मध्यप्रदेश पर पांच लाख इकसठ हजार करोड़ रुपए से अधिक का कर्ज हो चुका है और सरकार लगातार नया कर्ज लेकर खर्च कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि विकास की ठोस योजना के बजाय सरकार केवल प्रचार और आयोजनों पर ध्यान दे रही है। हाल ही में लिए गए नए कर्ज का उल्लेख करते हुए उन्होंने वित्तीय प्रबंधन पर भी सवाल उठाए।

    दरअसल नर्मदा नदी पर बने सरदार सरोवर बांध को लेकर मध्यप्रदेश गुजरात महाराष्ट्र और राजस्थान के बीच कई वर्षों से वित्तीय विवाद चल रहा था। मध्यप्रदेश का कहना था कि परियोजना से सबसे अधिक भूमि और गांव उसके प्रभावित हुए हैं इसलिए उसे मुआवजा मिलना चाहिए जबकि गुजरात परियोजना की लागत में अन्य राज्यों की हिस्सेदारी की मांग कर रहा था। हाल ही में नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की मौजूदगी में चारों राज्यों ने वन टाइम सेटलमेंट पर हस्ताक्षर कर वर्षों पुराने विवाद को समाप्त करने पर सहमति जताई। समझौते के तहत मध्यप्रदेश महाराष्ट्र और राजस्थान गुजरात को 550 550 करोड़ रुपए देंगे जबकि पुराने सभी वित्तीय दावों को समाप्त माना जाएगा। इसी समझौते को लेकर अब प्रदेश में सियासी घमासान तेज हो गया है और कांग्रेस सरकार से पूरे मामले में पारदर्शिता की मांग कर रही है।

  • मध्य प्रदेश की सियासत में बयान से बवाल, RSS बनाम प्रशासनिक तटस्थता पर गरमाई बहस, कांग्रेस और बीजेपी आमने-सामने

    मध्य प्रदेश की सियासत में बयान से बवाल, RSS बनाम प्रशासनिक तटस्थता पर गरमाई बहस, कांग्रेस और बीजेपी आमने-सामने

    मध्य प्रदेश: में कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के एक बयान के बाद राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमा गया है। बयान में उन्होंने प्रशासनिक तंत्र में अधिकारियों के स्वयं को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जोड़ने की प्रवृत्ति का उल्लेख किया था, जिसके बाद प्रदेश में सियासी घमासान शुरू हो गया है। कांग्रेस ने इस बयान को गंभीर संवैधानिक मुद्दा बताते हुए प्रशासनिक निष्पक्षता और तटस्थता पर सवाल खड़े किए हैं।

    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सोशल मीडिया के माध्यम से प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि प्रशासनिक ढांचे में किसी संगठन विशेष से जुड़ाव की प्रवृत्ति बढ़ रही है तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने इसे भारतीय प्रशासनिक सेवा की निष्पक्षता से जोड़ते हुए कहा कि संविधान हर अधिकारी से अपेक्षा करता है कि वह किसी वैचारिक या राजनीतिक संगठन के बजाय केवल संवैधानिक मूल्यों के प्रति निष्ठावान रहे।

    कांग्रेस की ओर से यह भी मांग उठाई गई कि इस बयान को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार से स्पष्टीकरण मांगा जाए और संवैधानिक संस्थाओं को इसकी जांच करनी चाहिए कि प्रशासनिक व्यवस्था में किसी प्रकार का वैचारिक प्रभाव तो नहीं बढ़ रहा है। इस मुद्दे ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है और विपक्ष लगातार सरकार पर निशाना साध रहा है।

    वहीं, पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने कैलाश विजयवर्गीय के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि प्रशासनिक तंत्र में वैचारिक प्रभाव की चर्चा पहले से होती रही है। उन्होंने इसे सरकार और संगठन के लंबे समय से जुड़े रहने का परिणाम बताया और आरोप लगाया कि कई बार अवसरवादी तत्व व्यवस्था में जगह बना लेते हैं, जिससे प्रशासनिक संतुलन प्रभावित होता है।

    बीजेपी की ओर से इस विवाद पर अलग रुख अपनाया गया है। पार्टी नेता डॉ. हितेश बाजपेयी ने कहा कि मंत्री के बयान को सतही तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक एक ही वैचारिक ढांचे के साथ सरकार चलने पर कुछ लोग अवसरवादी तरीके से व्यवस्था में प्रवेश कर जाते हैं, जिससे संगठनात्मक चुनौतियां उत्पन्न होती हैं। बीजेपी ने स्पष्ट किया कि बयान का आशय किसी संस्था पर सीधा आरोप नहीं था, बल्कि प्रशासनिक और वैचारिक संतुलन की आवश्यकता की ओर संकेत था।

    इस पूरे घटनाक्रम ने मध्य प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है, जहां एक तरफ प्रशासनिक निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बयान की व्याख्या को लेकर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद गहराते जा रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है, क्योंकि विपक्ष इसे संवैधानिक विमर्श के रूप में आगे बढ़ाने की तैयारी में है।

  • महिला आरक्षण को लेकर सियासी संग्राम, भोपाल में CM मोहन यादव का तीखा वार, हजारों बहनों ने निकाली पदयात्रा

    महिला आरक्षण को लेकर सियासी संग्राम, भोपाल में CM मोहन यादव का तीखा वार, हजारों बहनों ने निकाली पदयात्रा

    भोपाल । भोपाल की सड़कों पर रविवार को महिला आक्रोश और राजनीतिक संदेशों का बड़ा प्रदर्शन देखने को मिला जब ‘जन-आक्रोश महिला पदयात्रा’ में हजारों की संख्या में महिलाएं शामिल हुईं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि महिलाओं के अधिकारों को कुचलने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा और जरूरत पड़ी तो कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि बहनों की इच्छा और अधिकार के खिलाफ जाने वालों को इतिहास कभी माफ नहीं करेगा।

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधा और कहा कि महिला आरक्षण बिल का विरोध करना देश की आधी आबादी के साथ अन्याय है। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि जो नेता महिलाओं के अधिकार की बात करते हैं वही अब उनके हक को कमजोर करने में लगे हैं। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से विपक्षी नेताओं पर आरोप लगाया कि उन्होंने महिलाओं की आकांक्षाओं को दबाने का काम किया है।

    सीएम डॉ. यादव ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि भारतीय समाज की परंपरा हमेशा से नारी शक्ति के सम्मान पर आधारित रही है। उन्होंने ऐतिहासिक उदाहरण देते हुए कहा कि समाज सुधारकों ने महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष किया है और आज भी वही विचारधारा आगे बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि बिना नारी शक्ति के किसी भी समाज का विकास संभव नहीं है और सरकार हमेशा महिलाओं के साथ खड़ी है।

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने हजारों महिलाओं का अभिवादन किया और कहा कि यह आक्रोश केवल विरोध नहीं बल्कि अपने अधिकारों के लिए उठी आवाज है जिसे पूरे देश तक पहुंचाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि महिलाएं लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रख रही हैं और यह देश की शक्ति का प्रतीक है।

    इस मौके पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने भी विपक्ष पर निशाना साधा और कहा कि महिला आरक्षण कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं बल्कि महिलाओं का अधिकार था जिसे जानबूझकर रोका गया। उन्होंने कहा कि विपक्ष की भूमिका इस मामले में निराशाजनक रही है और यह कदम महिलाओं के सपनों पर चोट के समान है।

    कार्यक्रम में उपस्थित महिलाओं ने हाथों में स्लोगन लिखे पोस्टर लेकर अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। कई जगहों पर नारों और गीतों के माध्यम से महिलाओं ने अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता का संदेश दिया। पूरे आयोजन के दौरान राजधानी की सड़कों पर एक अलग ही माहौल देखने को मिला जहां सामाजिक और राजनीतिक चेतना का संगम नजर आया।

    मुख्यमंत्री ने अंत में कहा कि सरकार हर स्तर पर महिलाओं के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और आगे भी इस दिशा में मजबूत कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि विधानसभा और अन्य मंचों पर महिलाओं के अधिकारों की आवाज को मजबूती से उठाया जाएगा। पूरा आयोजन केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं बल्कि महिलाओं की शक्ति और उनके अधिकारों की अभिव्यक्ति के रूप में सामने आया, जिसने भोपाल की सड़कों को जनआंदोलन के रंग में रंग दिया।

  • महिला शक्ति बनाम राजनीति ,मध्य प्रदेश में टिकट वितरण और भागीदारी, का पूरा लेखा जोखा


    भोपाल । भोपाल मध्य प्रदेश में महिला आरक्षण और राजनीति को लेकर बहस तेज हो गई है। लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन विधेयक पारित न होने के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। भारतीय जनता पार्टी ने इसे लोकतंत्र के लिए काला अध्याय बताया है। पार्टी का कहना है कि विपक्ष के रवैये से उसकी महिला विरोधी सोच उजागर होती है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने इसे देश की आधी आबादी के साथ विश्वासघात बताया है। इसी मुद्दे को लेकर मध्य प्रदेश सहित पूरे देश में सियासत तेज हो गई है।

    लोकसभा 2024 के चुनाव में मध्य प्रदेश की सभी उनतीस सीटों पर भारतीय जनता पार्टी ने कब्जा किया। भाजपा ने इन सीटों पर छह महिला प्रत्याशियों को टिकट दिया और सभी छह महिलाओं ने जीत हासिल की। वहीं कांग्रेस ने उनतीस में से केवल एक महिला उम्मीदवार को मैदान में उतारा जो रीवा से नीलम अभय मिश्रा थीं लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली।

    राज्यसभा में मध्य प्रदेश की ग्यारह सीटों में से आठ पर भारतीय जनता पार्टी और तीन पर कांग्रेस का प्रतिनिधित्व है। भाजपा के आठ राज्यसभा सांसदों में तीन महिलाएं शामिल हैं। कांग्रेस के तीनों राज्यसभा सांसदों में एक भी महिला प्रतिनिधि नहीं है। यह आंकड़ा संसद के उच्च सदन में महिलाओं की भागीदारी की स्थिति को स्पष्ट करता है।

    विधानसभा चुनाव 2023 में मध्य प्रदेश की दो सौ तीस सीटों में भाजपा ने एक सौ तिरसठ सीटें जीतीं और कांग्रेस ने छियासठ सीटों पर जीत दर्ज की। एक सीट अन्य दल के खाते में गई। दोनों प्रमुख दलों ने कुल छप्पन महिला प्रत्याशियों को चुनावी मैदान में उतारा था जिनमें से सत्ताईस महिलाएं विधायक बनीं। भाजपा ने दो सौ तीस सीटों में से केवल सत्ताईस सीटों पर महिला उम्मीदवारों को टिकट दिया जो लगभग ग्यारह प्रतिशत है। इनमें से इक्कीस महिलाएं जीतकर विधानसभा पहुंचीं। कांग्रेस ने उनतीस महिलाओं को टिकट दिया जो लगभग तेरह प्रतिशत है लेकिन केवल पांच महिलाएं विधायक बन सकीं।

    इसके विपरीत मध्य प्रदेश की पंचायत व्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी काफी मजबूत दिखाई देती है। राज्य की कुल पंचायतों में लगभग दो लाख नब्बे हजार से अधिक महिला जनप्रतिनिधि सक्रिय हैं जो कुल प्रतिनिधियों का इक्यावन प्रतिशत से अधिक है। चौबीस जिला पंचायतों में महिलाएं अध्यक्ष के पद पर हैं। चार सौ चवालीस महिलाएं जिला पंचायत सदस्य हैं। एक सौ उनहत्तर महिलाएं जनपद अध्यक्ष हैं और तीन हजार चार सौ पच्चीस महिलाएं जनपद सदस्य के रूप में काम कर रही हैं। यह आंकड़े बताते हैं कि जमीनी स्तर पर महिलाओं की भागीदारी मजबूत है लेकिन विधानसभा और संसद स्तर पर उनकी संख्या अभी भी अपेक्षाकृत कम है।

    समग्र रूप से देखा जाए तो मध्य प्रदेश में महिला सशक्तिकरण की दिशा में पंचायत स्तर पर बेहतर स्थिति है लेकिन विधानसभा लोकसभा और राज्यसभा में राजनीतिक दलों द्वारा महिलाओं को टिकट देने की दर अभी भी सीमित है। यह मुद्दा लगातार राजनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ है और आने वाले चुनावों में महिला प्रतिनिधित्व को लेकर दबाव और बढ़ने की संभावना है।

  • किसानों के मुद्दे पर गरजे जीतू पटवारी शिवराज और बीजेपी पर लगाए गंभीर आरोप

    किसानों के मुद्दे पर गरजे जीतू पटवारी शिवराज और बीजेपी पर लगाए गंभीर आरोप


    भोपाल । भोपाल में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भारतीय जनता पार्टी और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान पर तीखा हमला बोला। इस दौरान उन्होंने किसानों की स्थिति और राज्य की कृषि नीतियों को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए। उनके बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर गरमाहट बढ़ गई है।

    जीतू पटवारी ने कहा कि प्रदेश में किसानों के साथ लगातार धोखा हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने कृषि आय को बढ़ाने के बड़े बड़े दावे किए लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति अलग ही नजर आती है। उन्होंने कहा कि बार बार किए गए वादों के बावजूद किसानों की आमदनी में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ।

    उन्होंने यह भी कहा कि मंडियों में किसानों को अपनी उपज बेचने में कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ा है। कई बार फसल खुले में पड़ी रह गई और समय पर खरीद नहीं हो सकी। इसके कारण किसानों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा। पटवारी ने आरोप लगाया कि नीतियों की खामियों का फायदा कुछ चुनिंदा व्यापारियों को मिला है।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस में जीतू पटवारी ने खाद और उर्वरक की समस्या को भी प्रमुख मुद्दा बनाया। उन्होंने कहा कि यूरिया और डीएपी जैसी जरूरी चीजों की उपलब्धता को लेकर लगातार संकट की स्थिति बनी रही है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की ओर से स्थिति को नियंत्रित करने के दावे किए जाते रहे हैं लेकिन वास्तविकता इससे अलग रही है।

    पटवारी ने प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रांसफर और पोस्टिंग को लेकर सिस्टम में पारदर्शिता की कमी है और कई निर्णयों को लेकर सवाल उठते रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार को लेकर जनता के बीच असंतोष बढ़ रहा है कांग्रेस अध्यक्ष ने वल्लभ भवन को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए और कहा कि वहां पर फैसलों में अनियमितताओं की बात सामने आती रही है। उन्होंने इसे प्रशासनिक व्यवस्था की बड़ी कमजोरी बताया।

    इसके अलावा उन्होंने मुरैना और इंदौर से जुड़े मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि राजनीतिक स्तर पर कई मुद्दों को अलग तरीके से प्रस्तुत किया जाता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र और संस्कृति के मुद्दों पर किसी को भी किसी प्रमाण पत्र की जरूरत नहीं है और हर दल को अपनी प्राथमिकता तय करने का अधिकार है।

    जीतू पटवारी ने अंत में कहा कि किसान देश की रीढ़ हैं और उनकी समस्याओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने घोषणा की कि वह किसानों के मुद्दों को लेकर आगे भी आंदोलनात्मक रुख अपनाएंगे और जरूरत पड़ी तो विरोध स्वरूप उपवास भी करेंगे। इस बयान के बाद मध्यप्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और सत्तापक्ष की ओर से भी प्रतिक्रिया आने की संभावना जताई जा रही है।

  • राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने किया करीब 2 करोड़ के विकास कार्यों का भूमि-पूजन

    राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने किया करीब 2 करोड़ के विकास कार्यों का भूमि-पूजन


    भोपाल :  पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर ने शनिवार को गोविंदपुरा में विभिन्न विकास कार्यों का भूमि-पूजन किया। उन्होंने बताया कि लगभग 2 करोड़ रुपये की लागत से क्षेत्र में अनेक महत्वपूर्ण निर्माण कार्य कराए जाएंगे, जिनमें मालीखेड़ी विसर्जन घाट का उन्नयन प्रमुख है।
    राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने कहा कि मालीखेड़ी विसर्जन घाट को 1 करोड़ 45 लाख रुपये की लागत से आधुनिक एवं सुविधायुक्त बनाया जाएगा। घाट पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पक्का प्लेटफॉर्म, सुरक्षा रेलिंग, समुचित प्रकाश व्यवस्था, बैठने की व्यवस्था तथा स्वच्छता संबंधी आवश्यक प्रबंध किए जाएंगे।
    राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने कहा कि गोविंदपुरा क्षेत्र में विकास कार्यों को निरंतर प्राथमिकता दी जा रही है। क्षेत्र की मूलभूत सुविधाओं को सुदृढ़ करने के लिए सड़क, नाली, प्रकाश व्यवस्था और सामुदायिक सुविधाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
    गोविन्दपुरा में वार्ड 72 के मालीखेड़ी में सीसी रोड एवं आरसीसी नाली निर्माण कार्य तथा मेन रोड स्थित दुर्गा मंदिर के चबूतरे के निर्माण कार्य का भूमि-पूजन किया गया, जिसकी लागत 7 लाख 18 हजार रुपये है। वार्ड 72 की लीलाधर कॉलोनी में आरसीसी नाली निर्माण कार्य का भूमि-पूजन किया गया, जिसकी लागत 2 लाख 86 हजार रुपये है। वार्ड 72 के गीता नगर में शंकर जी मंदिर के पास रिटेनिंग वॉल निर्माण, गीता नगर पार्श्व धाम स्थित कम्युनिटी हॉल में शेड निर्माण तथा बिहारी कॉलोनी में रोड एवं आंगनवाड़ी के पास आरसीसी नाली निर्माण कार्यों का भूमि-पूजन किया गया, जिनकी कुल लागत 15 लाख रुपये है।
    वार्ड 72 के अटल नेहरू नगर में बालाजी मंदिर से आंगनवाड़ी तक, श्री महावीर हनुमान मंदिर के पास सड़क निर्माण तथा अप्रोच रोड से मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक तक सीसी रोड निर्माण कार्य का भूमि-पूजन किया गया, जिसकी लागत 13 लाख रुपये है। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि, स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी कार्य निर्धारित समय-सीमा में उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण किए जाएं, जिससे नागरिकों को शीघ्र लाभ मिल सके।