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  • मध्य प्रदेश की सियासत में बयान से बवाल, RSS बनाम प्रशासनिक तटस्थता पर गरमाई बहस, कांग्रेस और बीजेपी आमने-सामने

    मध्य प्रदेश की सियासत में बयान से बवाल, RSS बनाम प्रशासनिक तटस्थता पर गरमाई बहस, कांग्रेस और बीजेपी आमने-सामने

    मध्य प्रदेश: में कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के एक बयान के बाद राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमा गया है। बयान में उन्होंने प्रशासनिक तंत्र में अधिकारियों के स्वयं को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जोड़ने की प्रवृत्ति का उल्लेख किया था, जिसके बाद प्रदेश में सियासी घमासान शुरू हो गया है। कांग्रेस ने इस बयान को गंभीर संवैधानिक मुद्दा बताते हुए प्रशासनिक निष्पक्षता और तटस्थता पर सवाल खड़े किए हैं।

    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सोशल मीडिया के माध्यम से प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि प्रशासनिक ढांचे में किसी संगठन विशेष से जुड़ाव की प्रवृत्ति बढ़ रही है तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने इसे भारतीय प्रशासनिक सेवा की निष्पक्षता से जोड़ते हुए कहा कि संविधान हर अधिकारी से अपेक्षा करता है कि वह किसी वैचारिक या राजनीतिक संगठन के बजाय केवल संवैधानिक मूल्यों के प्रति निष्ठावान रहे।

    कांग्रेस की ओर से यह भी मांग उठाई गई कि इस बयान को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार से स्पष्टीकरण मांगा जाए और संवैधानिक संस्थाओं को इसकी जांच करनी चाहिए कि प्रशासनिक व्यवस्था में किसी प्रकार का वैचारिक प्रभाव तो नहीं बढ़ रहा है। इस मुद्दे ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है और विपक्ष लगातार सरकार पर निशाना साध रहा है।

    वहीं, पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने कैलाश विजयवर्गीय के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि प्रशासनिक तंत्र में वैचारिक प्रभाव की चर्चा पहले से होती रही है। उन्होंने इसे सरकार और संगठन के लंबे समय से जुड़े रहने का परिणाम बताया और आरोप लगाया कि कई बार अवसरवादी तत्व व्यवस्था में जगह बना लेते हैं, जिससे प्रशासनिक संतुलन प्रभावित होता है।

    बीजेपी की ओर से इस विवाद पर अलग रुख अपनाया गया है। पार्टी नेता डॉ. हितेश बाजपेयी ने कहा कि मंत्री के बयान को सतही तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक एक ही वैचारिक ढांचे के साथ सरकार चलने पर कुछ लोग अवसरवादी तरीके से व्यवस्था में प्रवेश कर जाते हैं, जिससे संगठनात्मक चुनौतियां उत्पन्न होती हैं। बीजेपी ने स्पष्ट किया कि बयान का आशय किसी संस्था पर सीधा आरोप नहीं था, बल्कि प्रशासनिक और वैचारिक संतुलन की आवश्यकता की ओर संकेत था।

    इस पूरे घटनाक्रम ने मध्य प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है, जहां एक तरफ प्रशासनिक निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बयान की व्याख्या को लेकर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद गहराते जा रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है, क्योंकि विपक्ष इसे संवैधानिक विमर्श के रूप में आगे बढ़ाने की तैयारी में है।

  • महिला आरक्षण को लेकर सियासी संग्राम, भोपाल में CM मोहन यादव का तीखा वार, हजारों बहनों ने निकाली पदयात्रा

    महिला आरक्षण को लेकर सियासी संग्राम, भोपाल में CM मोहन यादव का तीखा वार, हजारों बहनों ने निकाली पदयात्रा

    भोपाल । भोपाल की सड़कों पर रविवार को महिला आक्रोश और राजनीतिक संदेशों का बड़ा प्रदर्शन देखने को मिला जब ‘जन-आक्रोश महिला पदयात्रा’ में हजारों की संख्या में महिलाएं शामिल हुईं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि महिलाओं के अधिकारों को कुचलने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा और जरूरत पड़ी तो कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि बहनों की इच्छा और अधिकार के खिलाफ जाने वालों को इतिहास कभी माफ नहीं करेगा।

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधा और कहा कि महिला आरक्षण बिल का विरोध करना देश की आधी आबादी के साथ अन्याय है। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि जो नेता महिलाओं के अधिकार की बात करते हैं वही अब उनके हक को कमजोर करने में लगे हैं। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से विपक्षी नेताओं पर आरोप लगाया कि उन्होंने महिलाओं की आकांक्षाओं को दबाने का काम किया है।

    सीएम डॉ. यादव ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि भारतीय समाज की परंपरा हमेशा से नारी शक्ति के सम्मान पर आधारित रही है। उन्होंने ऐतिहासिक उदाहरण देते हुए कहा कि समाज सुधारकों ने महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष किया है और आज भी वही विचारधारा आगे बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि बिना नारी शक्ति के किसी भी समाज का विकास संभव नहीं है और सरकार हमेशा महिलाओं के साथ खड़ी है।

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने हजारों महिलाओं का अभिवादन किया और कहा कि यह आक्रोश केवल विरोध नहीं बल्कि अपने अधिकारों के लिए उठी आवाज है जिसे पूरे देश तक पहुंचाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि महिलाएं लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रख रही हैं और यह देश की शक्ति का प्रतीक है।

    इस मौके पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने भी विपक्ष पर निशाना साधा और कहा कि महिला आरक्षण कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं बल्कि महिलाओं का अधिकार था जिसे जानबूझकर रोका गया। उन्होंने कहा कि विपक्ष की भूमिका इस मामले में निराशाजनक रही है और यह कदम महिलाओं के सपनों पर चोट के समान है।

    कार्यक्रम में उपस्थित महिलाओं ने हाथों में स्लोगन लिखे पोस्टर लेकर अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। कई जगहों पर नारों और गीतों के माध्यम से महिलाओं ने अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता का संदेश दिया। पूरे आयोजन के दौरान राजधानी की सड़कों पर एक अलग ही माहौल देखने को मिला जहां सामाजिक और राजनीतिक चेतना का संगम नजर आया।

    मुख्यमंत्री ने अंत में कहा कि सरकार हर स्तर पर महिलाओं के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और आगे भी इस दिशा में मजबूत कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि विधानसभा और अन्य मंचों पर महिलाओं के अधिकारों की आवाज को मजबूती से उठाया जाएगा। पूरा आयोजन केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं बल्कि महिलाओं की शक्ति और उनके अधिकारों की अभिव्यक्ति के रूप में सामने आया, जिसने भोपाल की सड़कों को जनआंदोलन के रंग में रंग दिया।

  • महिला शक्ति बनाम राजनीति ,मध्य प्रदेश में टिकट वितरण और भागीदारी, का पूरा लेखा जोखा


    भोपाल । भोपाल मध्य प्रदेश में महिला आरक्षण और राजनीति को लेकर बहस तेज हो गई है। लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन विधेयक पारित न होने के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। भारतीय जनता पार्टी ने इसे लोकतंत्र के लिए काला अध्याय बताया है। पार्टी का कहना है कि विपक्ष के रवैये से उसकी महिला विरोधी सोच उजागर होती है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने इसे देश की आधी आबादी के साथ विश्वासघात बताया है। इसी मुद्दे को लेकर मध्य प्रदेश सहित पूरे देश में सियासत तेज हो गई है।

    लोकसभा 2024 के चुनाव में मध्य प्रदेश की सभी उनतीस सीटों पर भारतीय जनता पार्टी ने कब्जा किया। भाजपा ने इन सीटों पर छह महिला प्रत्याशियों को टिकट दिया और सभी छह महिलाओं ने जीत हासिल की। वहीं कांग्रेस ने उनतीस में से केवल एक महिला उम्मीदवार को मैदान में उतारा जो रीवा से नीलम अभय मिश्रा थीं लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली।

    राज्यसभा में मध्य प्रदेश की ग्यारह सीटों में से आठ पर भारतीय जनता पार्टी और तीन पर कांग्रेस का प्रतिनिधित्व है। भाजपा के आठ राज्यसभा सांसदों में तीन महिलाएं शामिल हैं। कांग्रेस के तीनों राज्यसभा सांसदों में एक भी महिला प्रतिनिधि नहीं है। यह आंकड़ा संसद के उच्च सदन में महिलाओं की भागीदारी की स्थिति को स्पष्ट करता है।

    विधानसभा चुनाव 2023 में मध्य प्रदेश की दो सौ तीस सीटों में भाजपा ने एक सौ तिरसठ सीटें जीतीं और कांग्रेस ने छियासठ सीटों पर जीत दर्ज की। एक सीट अन्य दल के खाते में गई। दोनों प्रमुख दलों ने कुल छप्पन महिला प्रत्याशियों को चुनावी मैदान में उतारा था जिनमें से सत्ताईस महिलाएं विधायक बनीं। भाजपा ने दो सौ तीस सीटों में से केवल सत्ताईस सीटों पर महिला उम्मीदवारों को टिकट दिया जो लगभग ग्यारह प्रतिशत है। इनमें से इक्कीस महिलाएं जीतकर विधानसभा पहुंचीं। कांग्रेस ने उनतीस महिलाओं को टिकट दिया जो लगभग तेरह प्रतिशत है लेकिन केवल पांच महिलाएं विधायक बन सकीं।

    इसके विपरीत मध्य प्रदेश की पंचायत व्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी काफी मजबूत दिखाई देती है। राज्य की कुल पंचायतों में लगभग दो लाख नब्बे हजार से अधिक महिला जनप्रतिनिधि सक्रिय हैं जो कुल प्रतिनिधियों का इक्यावन प्रतिशत से अधिक है। चौबीस जिला पंचायतों में महिलाएं अध्यक्ष के पद पर हैं। चार सौ चवालीस महिलाएं जिला पंचायत सदस्य हैं। एक सौ उनहत्तर महिलाएं जनपद अध्यक्ष हैं और तीन हजार चार सौ पच्चीस महिलाएं जनपद सदस्य के रूप में काम कर रही हैं। यह आंकड़े बताते हैं कि जमीनी स्तर पर महिलाओं की भागीदारी मजबूत है लेकिन विधानसभा और संसद स्तर पर उनकी संख्या अभी भी अपेक्षाकृत कम है।

    समग्र रूप से देखा जाए तो मध्य प्रदेश में महिला सशक्तिकरण की दिशा में पंचायत स्तर पर बेहतर स्थिति है लेकिन विधानसभा लोकसभा और राज्यसभा में राजनीतिक दलों द्वारा महिलाओं को टिकट देने की दर अभी भी सीमित है। यह मुद्दा लगातार राजनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ है और आने वाले चुनावों में महिला प्रतिनिधित्व को लेकर दबाव और बढ़ने की संभावना है।

  • किसानों के मुद्दे पर गरजे जीतू पटवारी शिवराज और बीजेपी पर लगाए गंभीर आरोप

    किसानों के मुद्दे पर गरजे जीतू पटवारी शिवराज और बीजेपी पर लगाए गंभीर आरोप


    भोपाल । भोपाल में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भारतीय जनता पार्टी और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान पर तीखा हमला बोला। इस दौरान उन्होंने किसानों की स्थिति और राज्य की कृषि नीतियों को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए। उनके बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर गरमाहट बढ़ गई है।

    जीतू पटवारी ने कहा कि प्रदेश में किसानों के साथ लगातार धोखा हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने कृषि आय को बढ़ाने के बड़े बड़े दावे किए लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति अलग ही नजर आती है। उन्होंने कहा कि बार बार किए गए वादों के बावजूद किसानों की आमदनी में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ।

    उन्होंने यह भी कहा कि मंडियों में किसानों को अपनी उपज बेचने में कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ा है। कई बार फसल खुले में पड़ी रह गई और समय पर खरीद नहीं हो सकी। इसके कारण किसानों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा। पटवारी ने आरोप लगाया कि नीतियों की खामियों का फायदा कुछ चुनिंदा व्यापारियों को मिला है।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस में जीतू पटवारी ने खाद और उर्वरक की समस्या को भी प्रमुख मुद्दा बनाया। उन्होंने कहा कि यूरिया और डीएपी जैसी जरूरी चीजों की उपलब्धता को लेकर लगातार संकट की स्थिति बनी रही है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की ओर से स्थिति को नियंत्रित करने के दावे किए जाते रहे हैं लेकिन वास्तविकता इससे अलग रही है।

    पटवारी ने प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रांसफर और पोस्टिंग को लेकर सिस्टम में पारदर्शिता की कमी है और कई निर्णयों को लेकर सवाल उठते रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार को लेकर जनता के बीच असंतोष बढ़ रहा है कांग्रेस अध्यक्ष ने वल्लभ भवन को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए और कहा कि वहां पर फैसलों में अनियमितताओं की बात सामने आती रही है। उन्होंने इसे प्रशासनिक व्यवस्था की बड़ी कमजोरी बताया।

    इसके अलावा उन्होंने मुरैना और इंदौर से जुड़े मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि राजनीतिक स्तर पर कई मुद्दों को अलग तरीके से प्रस्तुत किया जाता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र और संस्कृति के मुद्दों पर किसी को भी किसी प्रमाण पत्र की जरूरत नहीं है और हर दल को अपनी प्राथमिकता तय करने का अधिकार है।

    जीतू पटवारी ने अंत में कहा कि किसान देश की रीढ़ हैं और उनकी समस्याओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने घोषणा की कि वह किसानों के मुद्दों को लेकर आगे भी आंदोलनात्मक रुख अपनाएंगे और जरूरत पड़ी तो विरोध स्वरूप उपवास भी करेंगे। इस बयान के बाद मध्यप्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और सत्तापक्ष की ओर से भी प्रतिक्रिया आने की संभावना जताई जा रही है।

  • राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने किया करीब 2 करोड़ के विकास कार्यों का भूमि-पूजन

    राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने किया करीब 2 करोड़ के विकास कार्यों का भूमि-पूजन


    भोपाल :  पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर ने शनिवार को गोविंदपुरा में विभिन्न विकास कार्यों का भूमि-पूजन किया। उन्होंने बताया कि लगभग 2 करोड़ रुपये की लागत से क्षेत्र में अनेक महत्वपूर्ण निर्माण कार्य कराए जाएंगे, जिनमें मालीखेड़ी विसर्जन घाट का उन्नयन प्रमुख है।
    राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने कहा कि मालीखेड़ी विसर्जन घाट को 1 करोड़ 45 लाख रुपये की लागत से आधुनिक एवं सुविधायुक्त बनाया जाएगा। घाट पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पक्का प्लेटफॉर्म, सुरक्षा रेलिंग, समुचित प्रकाश व्यवस्था, बैठने की व्यवस्था तथा स्वच्छता संबंधी आवश्यक प्रबंध किए जाएंगे।
    राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने कहा कि गोविंदपुरा क्षेत्र में विकास कार्यों को निरंतर प्राथमिकता दी जा रही है। क्षेत्र की मूलभूत सुविधाओं को सुदृढ़ करने के लिए सड़क, नाली, प्रकाश व्यवस्था और सामुदायिक सुविधाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
    गोविन्दपुरा में वार्ड 72 के मालीखेड़ी में सीसी रोड एवं आरसीसी नाली निर्माण कार्य तथा मेन रोड स्थित दुर्गा मंदिर के चबूतरे के निर्माण कार्य का भूमि-पूजन किया गया, जिसकी लागत 7 लाख 18 हजार रुपये है। वार्ड 72 की लीलाधर कॉलोनी में आरसीसी नाली निर्माण कार्य का भूमि-पूजन किया गया, जिसकी लागत 2 लाख 86 हजार रुपये है। वार्ड 72 के गीता नगर में शंकर जी मंदिर के पास रिटेनिंग वॉल निर्माण, गीता नगर पार्श्व धाम स्थित कम्युनिटी हॉल में शेड निर्माण तथा बिहारी कॉलोनी में रोड एवं आंगनवाड़ी के पास आरसीसी नाली निर्माण कार्यों का भूमि-पूजन किया गया, जिनकी कुल लागत 15 लाख रुपये है।
    वार्ड 72 के अटल नेहरू नगर में बालाजी मंदिर से आंगनवाड़ी तक, श्री महावीर हनुमान मंदिर के पास सड़क निर्माण तथा अप्रोच रोड से मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक तक सीसी रोड निर्माण कार्य का भूमि-पूजन किया गया, जिसकी लागत 13 लाख रुपये है। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि, स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी कार्य निर्धारित समय-सीमा में उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण किए जाएं, जिससे नागरिकों को शीघ्र लाभ मिल सके।
  • 20 साल मंत्री रहे गोपाल भार्गव ने छलका दर्द, बोले- दिग्विजय ने कांग्रेस में आने का ऑफर दिया था

    20 साल मंत्री रहे गोपाल भार्गव ने छलका दर्द, बोले- दिग्विजय ने कांग्रेस में आने का ऑफर दिया था


    सागर: बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पिछले 40 वर्षों से विधायक रहे गोपाल भार्गव ने मोहन कैबिनेट में जगह न मिलने का अपना दर्द सार्वजनिक रूप से साझा किया। सागर में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने अपने राजनीतिक संघर्ष और अनुभवों का जिक्र करते हुए कहा कि लंबे समय तक सेवा देने के बावजूद अपेक्षित सम्मान न मिलना गहरा दुख देता है।

    गोपाल भार्गव ने बताया कि उन्होंने 20 साल तक लगातार मंत्री पदों पर रहते हुए कठिन परिस्थितियों का सामना किया, जबकि आज के दौर में लोग 20 महीने भी नहीं टिक पाते। उन्होंने कहा, राजनीति में उपेक्षा किसी भी व्यक्ति को भीतर से तोड़ देती है। अगर किसी व्यक्ति की बात सरकार नहीं सुनती, तो उसका मन टूट जाता है।

    कार्यक्रम में उन्होंने यह भी खुलासा किया कि पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने उन्हें एक बार कांग्रेस में शामिल होने का प्रस्ताव दिया था। इस प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया देते हुए भार्गव ने कहा, मैंने साफ कह दिया था कि यह माल टिकाऊ है, बिकाऊ नहीं। उन्होंने जोर देकर कहा कि उन्होंने हमेशा सिद्धांतों की राजनीति की है और किसी भी प्रकार के राजनीतिक सौदे से खुद को दूर रखा।

    गोपाल भार्गव ने संकेत दिया कि लंबे समय तक पार्टी को समर्पित रहने के बावजूद उन्हें अपेक्षित सम्मान न मिलना उनकी पीड़ा का मुख्य कारण है। उन्होंने कहा, मैंने पार्टी को जीवन दिया है, और यह सीधे तौर पर मंत्री नहीं बनाए जाने की पीड़ा की ओर इशारा करता है।उल्लेखनीय है कि गोपाल भार्गव सागर जिले की रहली विधानसभा से लगातार नौ बार विधायक चुने गए हैं। वे भाजपा के सबसे वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं और पूर्व में लोक निर्माण विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास सहित कई महत्वपूर्ण विभागों के मंत्री रह चुके हैं।

    इससे पहले दिए गए एक बयान में उन्होंने कहा था, हर जगह सिर्फ ब्राह्मणों को ही टारगेट किया जा रहा है। इस बयान ने प्रदेशभर में राजनीतिक और सामाजिक हलचल मचा दी। उनके हालिया बयान और मंत्री न बनने की पीड़ा भविष्य में पार्टी और प्रदेश की राजनीति पर क्या असर डालेगी, यह आने वाले समय में देखने वाली बात होगी।

    गोपाल भार्गव की यह खुलकर कही गई भावनाएं वरिष्ठ नेताओं के अनुभव और पार्टी में वरिष्ठता के महत्व को भी उजागर करती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजनीति में स्थायित्व, सेवा और नैतिकता उनके लिए हमेशा प्राथमिकता रही है, और कोई भी पद उनके सिद्धांतों से ऊपर नहीं है।सागर और प्रदेश के राजनीतिक जानकार मानते हैं कि भार्गव के बयान आने वाले दिनों में पार्टी के अंदर और समाज में हलचल पैदा कर सकते हैं। वरिष्ठ नेताओं की अपेक्षाएं, सम्मान और उनके अनुभव को अगर नजरअंदाज किया गया, तो राजनीतिक समीकरणों पर इसका असर पड़ सकता है