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  • तिलकुट चौथ व्रत 2026: संतान की रक्षा और दीर्घायु का पावन संकल्प, माता-पिता अवश्य जानें कथा और महत्व

    तिलकुट चौथ व्रत 2026: संतान की रक्षा और दीर्घायु का पावन संकल्प, माता-पिता अवश्य जानें कथा और महत्व


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म में माघ मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि का विशेष महत्व है। इसी दिन तिलकुट चौथ व्रत रखा जाता है, जिसे सकट चौथ का ही एक रूप माना जाता है। यह व्रत विशेष रूप से माता-पिता द्वारा संतान की लंबी आयु, उसके सुखद भविष्य और परिवार की सुरक्षा के लिए किया जाता है। वर्ष 2026 में भी श्रद्धा और आस्था के साथ यह व्रत रखा जाएगा। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान गणेश की विधिवत पूजा और कथा श्रवण से जीवन की बड़ी बाधाएं दूर होती हैं।

    तिलकुट चौथ का नाम ही इसके स्वरूप को दर्शाता है। इस दिन तिल और गुड़ से बने पकवानों का विशेष महत्व होता है। माताएं दिनभर व्रत रखकर शाम के शुभ समय में गणेश जी को तिलकुट लड्डू और दूर्वा अर्पित करती हैं। पूजा के बाद व्रत कथा सुनना और सुनाना अनिवार्य माना गया है क्योंकि कथा के बिना व्रत अधूरा माना जाता है।

    तिलकुट चौथ व्रत की पौराणिक कथा

    कथा के अनुसार, एक नगर में साहूकार और उसकी पत्नी रहते थे, जो धर्म-कर्म में विश्वास नहीं रखते थे। संतान न होने से वे दुखी रहते थे। एक दिन साहूकारनी ने पड़ोस में सकट चौथ की कथा सुनी जिसमें बताया गया कि इस व्रत से अन्न, धन, सुहाग और संतान की प्राप्ति होती है। साहूकारनी ने मन में संकल्प लिया कि यदि उसे पुत्र प्राप्त हुआ तो वह तिलकुट चौथ का व्रत करेगी।

    भगवान गणेश की कृपा से उसके घर पुत्र जन्मा, लेकिन समय बीतने के साथ वह अपना वचन भूल गई। जब पुत्र का विवाह तय हुआ, तब चौथ माता नाराज हो गईं और पुत्र को पीपल के पेड़ पर बैठा दिया। विवाह से पहले जब होने वाली बहू जंगल गई, तो उसे पेड़ से आवाज आई-ओ मेरी अर्धब्यहि। सच्चाई जानकर साहूकारनी को अपनी भूल का एहसास हुआ। उसने तुरंत ढाई मन तिलकुट चढ़ाकर विधिवत पूजा की। गणेश जी प्रसन्न हुए और पुत्र सुरक्षित विवाह मंडप में पहुंच गया।

    व्रत विधि और नियम

    इस दिन प्रातः स्नान के बाद व्रत का संकल्प लिया जाता है। शाम को चंद्रमा और गणेश जी की पूजा की जाती है। तिल-गुड़ का भोग अर्पित कर कथा सुनी जाती है। व्रत का पारण संतान को तिलकुट खिलाकर किया जाता है। मान्यता है कि इससे संतान को नकारात्मक शक्तियों से रक्षा मिलती है।

    तिलकुट चौथ व्रत का महत्व
    यह व्रत माता-पिता और संतान के बीच भावनात्मक व आध्यात्मिक संबंध को मजबूत करता है। माना जाता है कि इससे संतान पर आने वाले संकट टलते हैं, विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। यही कारण है कि तिलकुट चौथ व्रत को मातृत्व और संतान-सुरक्षा का विशेष पर्व माना गया है।

  • 19 January 2026 Panchang: गुप्त नवरात्रि की शुरुआत, सर्वार्थ सिद्धि योग का शुभ संयोग

    19 January 2026 Panchang: गुप्त नवरात्रि की शुरुआत, सर्वार्थ सिद्धि योग का शुभ संयोग


    नई दिल्ली। अगर आप अपने दिन की शुरुआत शुभ और सकारात्मक ऊर्जा के साथ करना चाहते हैं तो 19 जनवरी 2026 का पंचांग आपके लिए बेहद लाभकारी साबित हो सकता है। यह दिन धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से खास माना जा रहा है। सोमवार के दिन माघ माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि है और इसी दिन से गुप्त नवरात्रि की शुरुआत हो रही है, जो 27 जनवरी तक चलेगी।

    गुप्त नवरात्रि विशेष रूप से साधना, तंत्र-मंत्र और देवी उपासना के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस दिन मां दुर्गा की गुप्त रूप से आराधना की जाती है। साथ ही आज सोमवार व्रत रखा जाएगा जो भगवान शिव को समर्पित होता है। शिव भक्तों के लिए यह दिन विशेष फलदायी माना गया है।

    शुभ योग और ग्रह स्थिति
    19 जनवरी को सर्वार्थ सिद्धि योग का निर्माण हो रहा है। यह योग नए कार्यों की शुरुआत, पूजा-पाठ, व्रत, जप-तप और निवेश के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
    इस दिन चंद्रमा मकर राशि में संचार करेगा और सूर्य भी मकर राशि में स्थित रहेगा, जिससे कार्यों में स्थिरता और अनुशासन का प्रभाव देखने को मिलेगा।

    शुभ काल Auspicious Timings
    ब्रह्म मुहूर्त: 05:10 AM – 05:58 AM

    अमृत काल: 02:09 AM – 03:50 AM

    अभिजीत मुहूर्त: 11:52 AM – 12:35 PM

    इन समयों में पूजा, ध्यान, मंत्र जाप और महत्वपूर्ण निर्णय लेना शुभ माना जाता है।

    अशुभ काल Inauspicious Timings
    राहु काल: 08:09 AM – 09:30 AM

    यम गण्ड: 10:52 AM – 12:14 PM

    कुलिक काल: 01:35 PM – 02:57 PM

    दुर्मुहूर्त:

    12:35 PM – 01:19 PM

    02:46 PM – 03:29 PM

    वर्ज्यम्: 04:04 PM – 05:45 PM

    इन समयों में शुभ कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है।

    सूर्य और चंद्रमा का समय
    सूर्योदय: 06:47 AM

    सूर्यास्त: 05:40 PM

    चन्द्रोदय: 07:06 AM

    चन्द्रास्त: 06:16 PM

    क्या करें इस दिन
    मां दुर्गा और भगवान शिव की पूजा करें

    गुप्त नवरात्रि के संकल्प लें

    मंत्र जाप, ध्यान और साधना के लिए दिन उत्तम

    नए कार्यों की योजना बनाना शुभ  इस प्रकार 19 जनवरी 2026 का दिन धार्मिक, आध्यात्मिक और ज्योतिषीय रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है। सही मुहूर्त और पंचांग के अनुसार कार्य करने से दिन सफल और फलदायी बन सकता है।