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  • केरल के अनोखे मंदिर में साल के 364 दिन पानी में डूबा रहता है शिवलिंग, महाशिवरात्रि पर खुलते हैं दर्शन के द्वार..

    केरल के अनोखे मंदिर में साल के 364 दिन पानी में डूबा रहता है शिवलिंग, महाशिवरात्रि पर खुलते हैं दर्शन के द्वार..


    नई दिल्ली ।
    भारत में कई ऐसे प्राचीन मंदिर हैं, जो अपनी अनूठी धार्मिक परंपराओं और विशेष मान्यताओं के कारण श्रद्धालुओं के बीच अलग पहचान रखते हैं। केरल के मलप्पुरम जिले में स्थित श्री अर्धनारीश्वर मंदिर भी ऐसा ही एक धार्मिक स्थल है। इस मंदिर की सबसे खास बात यहां स्थापित शिवलिंग है, जो साल के 364 दिन पानी में डूबा रहता है। श्रद्धालुओं को भगवान शिव के दर्शन करने का विशेष अवसर साल में केवल एक बार महाशिवरात्रि के दिन मिलता है। इस दिन मंदिर परिसर से पानी निकाला जाता है और इसके बाद शिवलिंग के दर्शन कराए जाते हैं।

    यह अनोखा मंदिर केरल के मलप्पुरम जिले के अरक्कुपरम्बा क्षेत्र में स्थित है। पेरिनथलमन्ना से इसकी दूरी लगभग 17 किलोमीटर है। मंदिर में भगवान शिव और माता पार्वती के संयुक्त स्वरूप अर्धनारीश्वर की पूजा-अर्चना की जाती है। मंदिर परिसर में पानी से घिरा रास्ता भी इसकी विशेष पहचान है। वर्ष के अधिकांश समय शिवलिंग पानी के भीतर रहने के कारण यहां की धार्मिक परंपरा अन्य मंदिरों से अलग मानी जाती है। महाशिवरात्रि के अवसर पर पानी हटाए जाने के बाद भक्तों को शिवलिंग के प्रत्यक्ष दर्शन करने का अवसर मिलता है।

    इस मंदिर में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा विशेष रूप से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति और विवाह संबंधी परेशानियों से मुक्ति की कामना के लिए की जाती है। श्रद्धालुओं की मान्यता है कि यहां पूजा-अर्चना करने से विवाह में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और दांपत्य जीवन में प्रेम तथा आपसी समझ बढ़ती है। मंदिर में होने वाले प्रमुख धार्मिक अनुष्ठानों में उमा महेश्वर पूजा शामिल है। इस पूजा के दौरान भक्त भगवान शिव और माता पार्वती से वैवाहिक जीवन में खुशहाली और परिवार में शांति बनाए रखने का आशीर्वाद मांगते हैं।

    इसके अलावा मंदिर में पट्टुम थालियुम समरप्पणम नामक विशेष अनुष्ठान भी आयोजित किया जाता है। इसमें श्रद्धालु सुखद और सफल वैवाहिक जीवन की कामना करते हैं। इस परंपरा के कारण मंदिर उन लोगों के लिए भी धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है, जो विवाह संबंधी समस्याओं के समाधान और दांपत्य जीवन में खुशहाली की प्रार्थना लेकर यहां पहुंचते हैं।

    मंदिर में पूरे वर्ष अलग-अलग धार्मिक आयोजन और उत्सव होते हैं। दिसंबर या जनवरी के दौरान यहां पांच दिवसीय वार्षिक उत्सव मनाया जाता है। इसकी शुरुआत ध्वजारोहण के साथ होती है और अंतिम दिन थिरु अरट्टू अनुष्ठान के साथ इसका समापन किया जाता है। इसके अलावा जून या जुलाई में भी विशेष धार्मिक आयोजन होता है। इस अवसर पर 1008 कलश जलाभिषेक किया जाता है। इस अनुष्ठान में 1,008 कलशों में रखे पवित्र जल से भगवान का अभिषेक किया जाता है।

    मंदिर में श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए सुबह और शाम का समय निर्धारित है। यहां सुबह 6 बजे से 9:30 बजे तक और शाम 4 बजे से 7 बजे तक पूजा-अर्चना और दर्शन किए जा सकते हैं। मंदिर आने वाले भक्तों के लिए मुफ्त भोजन की व्यवस्था भी उपलब्ध है। हालांकि, महाशिवरात्रि के दिन होने वाले विशेष दर्शन और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए श्रद्धालुओं को पहले से जानकारी लेना उपयोगी रहेगा।

    श्री अर्धनारीश्वर मंदिर तक पहुंचने के लिए सड़क, रेल और हवाई मार्ग की सुविधा उपलब्ध है। हवाई यात्रा करने वाले श्रद्धालु कालीकट अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक पहुंच सकते हैं, जो मंदिर से लगभग 40 से 50 किलोमीटर की दूरी पर है। यहां से टैक्सी के माध्यम से मंदिर जाया जा सकता है। रेल मार्ग से आने वाले यात्रियों के लिए अंगडीपुरम रेलवे स्टेशन नजदीकी विकल्प है। स्टेशन से टैक्सी, ऑटो-रिक्शा या बस लेकर मंदिर पहुंचा जा सकता है। सड़क मार्ग से पेरिनथलमन्ना होते हुए स्थानीय बस और टैक्सी की मदद से भी मंदिर तक पहुंचना संभव है।

  • महाशिवरात्रि पर 300 वर्षों में दूसरी बार 12 योग, काशी विश्वनाथ में श्रद्धालुओं के लिए विशेष तैयारी

    महाशिवरात्रि पर 300 वर्षों में दूसरी बार 12 योग, काशी विश्वनाथ में श्रद्धालुओं के लिए विशेष तैयारी


    नई दिल्ली । देवाधिदेव महादेव के विवाहोत्सव महाशिवरात्रि पर इस साल 12 दुर्लभ योग बनेंगे। तीन सौ वर्षों में यह दूसरा मौका है जब दस से अधिक योग एक साथ बन रहे हैं। वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर में लाखों श्रद्धालुओं के आगमन की उम्मीद है, इसलिए खास तैयारियां की जा रही हैं। मंदिर लगातार 40 घंटे से अधिक समय तक खुला रहेगा। 15 फरवरी को भोर सवा दो बजे मंगला आरती के साथ कपाट खुलेंगे और 16 फरवरी की रात आरती के बाद बंद होंगे। 14 से 17 फरवरी तक स्पर्श और सुगम दर्शन पर रोक रहेगी।

    इस बार के 12 योग
    प्रीति, आयुष्मान, सौभाग्य, शोभन, सर्वार्थसिद्ध, साध्य, शिव, शुक्ल, चंद्रमंगल, त्रिग्रही, राज और ध्रुव। इससे पहले 2024 में शिवरात्रि पर 11 योग बने थे। पौराणिक कथाओं के अनुसार इस तिथि पर सृष्टि में सर्वप्रथम ज्योतिर्लिंग प्रकट हुआ और आदियोगी ने पार्वती के साथ गृहस्थ लीला रची थी।

    ज्योतिषीय लाभ
    ज्योतिषाचार्य पं. विकास शास्त्री के अनुसार, तीन सौ वर्षों में दूसरी बार बनने वाले ये योग मेष, मिथुन और सिंह राशि के जातकों के लिए विशेष लाभकारी होंगे। फाल्गुन कृष्ण पक्ष चतुर्दशी 15 फरवरी शाम 05:06 बजे शुरू होगी और 16 फरवरी शाम 05:35 बजे समाप्त होगी।

    योगों का क्रम:-
    सुबह 05:45 से शिवयोग
    06:43–09:37 सर्वार्थसिद्धि योग
    11:19–11:23 प्रीति योग
    12:17–13:54 आयुष्मान योग
    17:07–17:53 सौभाग्य योग
    19:47–20:34 शोभन योग
    20:54–22:02 साध्य योग
    22:42–23:58 शुक्ल योग
    00:54–02:54 राज योग
    02:57–05:53 ध्रुव योग

    प्रहरवार अभिषेक और मंत्र जप:-
    प्रथम प्रहर: दूध से अभिषेक, ऊँ ह्रीं ईशान्य नमः
    द्वितीय प्रहर: दही से अभिषेक, ऊँ ह्रीं अघोराय नमः
    तृतीय प्रहर: देशी घी से अभिषेक, ऊँ ह्रीं वामदेवाय नमः
    चतुर्थ प्रहर: शहद से अभिषेक, ऊँ ह्रीं सध्योजाताय नमः

    तीन राशि के जातकों को विशेष लाभ:-
    मेष: वित्तीय लाभ, पदोन्नति, नेतृत्व क्षमता में विकास
    मिथुन: पेशेवर जीवन में ऊँचाई, बड़े व्यापारिक अवसर
    सिंह: धनागमन, अचल संपत्ति में वृद्धि

    काशी विश्वनाथ मंदिर में आरती का क्रम:-
    मंगला आरती: 02:15–03:15; 03:30 से दर्शन
    मध्याह्न भोग आरती: 11:40–12:20

    चारों प्रहर की आरती:-
    प्रथम प्रहर: 21:00–00:30
    द्वितीय प्रहर: 01:30–02:30
    तृतीय प्रहर: 03:30–04:30
    चतुर्थ प्रहर: 05:00–06:15

    इस बार की महाशिवरात्रि अपने दुर्लभ 12 योगों और विशेष प्रहरवार आरती के कारण श्रद्धालुओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी।