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  • शिव कृपा की प्राप्ति के लिए विरला संयोग है पंचमुखी बेलपत्र, घर की नकारात्मकता दूर करने और सुख-समृद्धि के लिए ज्योतिष में बताए गए अचूक उपा

    शिव कृपा की प्राप्ति के लिए विरला संयोग है पंचमुखी बेलपत्र, घर की नकारात्मकता दूर करने और सुख-समृद्धि के लिए ज्योतिष में बताए गए अचूक उपा

    नई दिल्ली । हिंदू धर्म और सनातन पूजा पद्धति में देवों के देव महादेव की आराधना का विशेष महत्व है। भगवान शिव की पूजा में आमतौर पर तीन पत्तियों वाले सामान्य बेलपत्र का उपयोग किया जाता है, जो हर जगह आसानी से उपलब्ध हो जाता है। धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, तीन पत्तियों वाला बेलपत्र त्रिगुणों और त्रिनेत्र का प्रतीक माना जाता है। लेकिन इन सबके बीच पांच पत्तियों वाले यानी पंचमुखी बेलपत्र का मिलना एक अत्यंत दुर्लभ और चमत्कारी संयोग माना जाता है। शास्त्रों में ऐसी मान्यता है कि पंचमुखी बेलपत्र में साक्षात भगवान शिव का वास होता है और जिस व्यक्ति को यह विरला बेलपत्र प्राप्त होता है, उस पर भोलेनाथ की असीम और विशेष अनुकंपा होती है।

    मध्य प्रदेश। शिव पुराण और प्राचीन ज्योतिषीय ग्रंथों के अनुसार, पंचमुखी बेलपत्र को शिवलिंग पर अर्पित करना अमोघ फलदायी माना गया है। यदि कोई भक्त पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ इस दुर्लभ बेलपत्र को महादेव के चरणों में या शिवलिंग पर अर्पित करता है, तो उसके जीवन से सभी प्रकार की परेशानियां, मानसिक तनाव और दरिद्रता का परित्याग हो जाता है। जिस प्रकार आध्यात्मिक जगत में एकमुखी रुद्राक्ष को मिलना सबसे कठिन और दुर्लभ माना जाता है, ठीक उसी प्रकार पांच, सात या ग्यारह पत्तियों वाले बेलपत्र का मिलना भी प्रकृति का एक अद्भुत चमत्कार है। इसी दुर्लभता का फायदा उठाकर कई बार बाजार में स्वार्थी तत्वों द्वारा नकली बेलपत्र भी बेचे जाते हैं, जिससे भक्तों को सावधान रहने की आवश्यकता है।

    प्राकृतिक और असली पंचमुखी बेलपत्र की पहचान करना बेहद सरल है, बशर्ते इसके नियमों की सही जानकारी हो। असली पंचमुखी बेलपत्र की मुख्य विशेषता यह होती है कि इसके पांचों पत्ते एक ही प्राकृतिक डंठल से आपस में जुड़े होते हैं। इन्हें अलग से किसी गोंद, केमिकल या धागे की सहायता से नहीं जोड़ा जाता है। बनावट के लिहाज से इसमें सबसे ऊपर का मध्य पत्ता आकार में थोड़ा बड़ा होता है और उसके दोनों किनारों पर दो-दो छोटे पत्ते समानांतर रूप से जुड़े होते हैं। पहचान का एक और मुख्य बिंदु यह है कि इन पांचों पत्तियों की प्राकृतिक जाली, शिराएं और गहरा हरा रंग पूरी तरह से एक समान होता है, जिसमें कोई कृत्रिम अंतर दिखाई नहीं देता है।

    ज्योतिष शास्त्र में पंचमुखी बेलपत्र के कई चमत्कारी और अचूक उपायों का वर्णन किया गया है, जो मानव जीवन की दिशा बदल सकते हैं। यदि कोई परिवार लंबे समय से आर्थिक तंगी से जूझ रहा हो, व्यापार में लगातार घाटा हो रहा हो या नौकरी में पदोन्नति की बाधाएं समाप्त नहीं हो रही हों, तो उन्हें पंचमुखी बेलपत्र का उपाय अवश्य करना चाहिए। इसके लिए जातक को पूरी श्रद्धा के साथ इस दिव्य बेलपत्र को शिवलिंग पर अर्पित करना चाहिए और पूजा संपन्न होने के बाद इसे आशीर्वाद स्वरूप घर लाकर अपनी तिजोरी या धन रखने के स्थान पर पवित्रता से रख देना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से धीरे-धीरे धन की आवक बढ़ती है और तंगी दूर होती है।

    इसके अतिरिक्त, घर की नकारात्मक ऊर्जा और पारिवारिक कलह को शांत करने में भी यह बेलपत्र बेहद प्रभावी माना जाता है। इसके निवारण के लिए शिवलिंग पर चढ़ाए गए पंचमुखी बेलपत्र को घर लाकर अपने पूजा स्थल या मंदिर में स्थापित करना चाहिए। श्रद्धालु चाहें तो इसे भगवान शिव और माता पार्वती के चित्र या प्रतिमा के समीप एक सुंदर फ्रेम में मढ़वाकर भी रख सकते हैं। प्रतिदिन इस पंचमुखी बेलपत्र की नियमित पूजा-आरती करने से घर के भीतर मौजूद सभी प्रकार की नकारात्मक शक्तियां नष्ट हो जाती हैं और सुख, शांति तथा समृद्धि का वास होता है।

  • शिवजलाभिषेक, हल्दी-मेहंदी और शोभा यात्रा: महाशिवरात्रि पर श्रद्धालुओं का उमड़ा सैलाब

    शिवजलाभिषेक, हल्दी-मेहंदी और शोभा यात्रा: महाशिवरात्रि पर श्रद्धालुओं का उमड़ा सैलाब


    इंदौर । महाकाल रोड पर संस्था नमो नवगृह (शनि) एवं सत्यमेव जयते द्वारा महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर 13 से 15 फरवरी तक भव्य महाशिवरात्रि महाकुंभ का आयोजन किया जा रहा है। इस आयोजन के तहत शिव जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और भव्य शोभायात्रा का कार्यक्रम रखा गया है।

    आज शुक्रवार को महोत्सव का श्री गणेश हुआ। संस्था के सरंक्षक पूर्व पार्षद केके यादव और पार्षद शिवम यादव ने बताया कि क्षेत्र में पिछले 22 सालों से यह आयोजन किया जा रहा है। इसका उद्देश्य सनातन धर्म की ध्वजा बुलंद करना और युवाओं एवं मातृशक्तियों को एकजुट करना है।

    आज शुक्रवार दोपहर 11:30 बजे हल्दी मेहंदी और कुमकुम रस्म का आयोजन शुभ मुहूर्त में हुआ, जिसमें सैकड़ों महिलाएं शामिल रहीं। महाकाल मार्ग पर यह शिव स्तुति का सबसे बड़ा आयोजन है, जिसमें शहर और प्रदेश के सनातन धर्म के प्रेमी भक्तजन उमड़ते हैं।

    मेहंदी रस्म में मातृशक्तियों ने शिव और माता पार्वती के प्रति आस्था व्यक्त की। हाथों में, त्रिशूल और शिवलिंग पर विशेष मेहंदी लगाई गई। इस दौरान भक्तगण भजनों पर झूमते रहे और सभी ने शहर, प्रदेश और देश की खुशहाली की कामना की। मुख्य रूप से श्रीमती मंजू यादव, तारा यादव, अर्चना गायकवाड, रीना यादव, पार्वती चौधरी, मंजू खंडेलवाल, कमलेश केवट, अनीता वाघरकर, आरती कुर्मी, रचना शर्मा, प्रियंका सेन, सावित्री यादव और करिश्मा प्रजापत सहित सैकड़ों महिलाएं शामिल रहीं।

    14 फरवरी, शनिवार को रात्रि जागरण और संगीत कार्यक्रम होगा। इसके बाद 15 फरवरी को बाणेश्वर कुंड से मरीमाता चौराहे तक भव्य शोभा यात्रा निकलेगी। इसमें 10 हजार से अधिक महिलाएं सिर पर कलश लेकर शामिल होंगी। कलश में पांच पवित्र नदियों का जल रहेगा। शोभायात्रा में बग्घी-घोड़े, झांकियां, साधु-संत-महंत, पहलवान, खिलाड़ी और प्रतिभाशाली क्षेत्रीय लोग भी शामिल होंगे, सभी “ॐ नमः शिवाय” का जाप करते हुए चलेंगे।

    इस आयोजन में 100 से अधिक बस्तियों के लोग सहभागी बनेंगे। इसके साथ ही सामाजिक संदेश भी दिए जाएंगे, जैसे बेटी बचाओ, पर्यावरण संरक्षण, जल बचत, यातायात नियमों का पालन और बच्चों को मोबाइल से दूर रखना।इस भव्य महोत्सव ने न केवल धार्मिक आस्था को प्रदर्शित किया, बल्कि मातृशक्तियों और युवाओं को एकजुट करने का संदेश भी दिया।

  • Maha Shivratri पर इस बार बन रहे कई दुर्लभ संयोग… जानिए पूजा-जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त और विधि

    Maha Shivratri पर इस बार बन रहे कई दुर्लभ संयोग… जानिए पूजा-जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त और विधि


    नई दिल्ली।
    महाशिवरात्रि (Maha Shivratri) हिंदू धर्म का एक अत्यंत पावन पर्व (Holy Festival) है, जिसका भक्त पूरे साल इंतजार करते हैं. साल 2026 में महाशिवरात्रि (Maha Shivratri 2026) 15 फरवरी, रविवार को मनाई जाएगी. इस बार तिथि को लेकर कुछ लोगों के मन में भ्रम था कि व्रत 15 को रखा जाए या 16 फरवरी को, लेकिन शास्त्रों के अनुसार 15 फरवरी को ही पर्व मनाना उचित रहेगा. फाल्गुन मास (Phalguna Month) के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि इस बार 15 फरवरी शाम 5 बजकर 5 मिनट बजे से शुरू होकर 16 फरवरी शाम 5 बजकर 35 मिनट तक रहेगी. चूंकि, निशीथकाल (मध्य रात्रि) में चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी की रात को ही रहेगी, इसलिए इसी दिन महाशिवरात्रि मनाना शास्त्रसम्मत है.


    महाशिवरात्रि पर पूजा का सही समय क्या है?

    अगर आप मंदिर में जलाभिषेक करने जा रहे हैं तो दिन में किसी भी समय जा सकते हैं. लेकिन यदि रुद्राभिषेक करना चाहते हैं तो रात्रि का समय सबसे उत्तम माना गया है।
    प्रथम पहर: शाम 7 बजे से 9 बजे तक
    द्वितीय पहर: रात 10 बजे से 12 बजे तक
    तृतीय पहर: रात 1 बजे से 3 बजे तक
    चतुर्थ पहर: सुबह 4 बजे से 6 बजे तक
    यदि चारों पहर संभव न हो, तो कम से कम एक पहर में रुद्राभिषेक अवश्य करें.


    महाशिवरात्रि 2026 शुभ संयोग (Maha Shivratri 2026 Shubh Sanyog)

    महाशिवरात्रि इस बार बहुत ही विशेष मानी जा रही है. दरअसल इस दिन शिव योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, प्रीति योग, आयुष्मान योग, सौभाग्य योग, शोभन योग, साध्य योग, शुक्ल योग, ध्रुव योग, व्यतिपात और वरियान योग का भी प्रभाव बना रहेगा.

    महाशिवरात्रि 2026 जलाभिषेक शुभ मुहूर्त (Maha Shivratri 2026 Jalabhishek Muhurat)
    इस बार महाशिवरात्रि पर भगवान शिव के जलाभिषेक के लिए दिनभर कई शुभ मुहूर्त मिलेंग, जिनमें भक्त पूजा-अर्चना कर सकते हैं. पहला मुहूर्त सुबह 8 बजकर 24 मिनट से शुरू होकर 9 बजकर 48 मिनट तक रहेगा. इसके बाद दूसरा मुहूर्त सुबह 9 बजकर 48 मिनट से 11 बजकर 11 मिनट तक का रहेगा.

    तीसरा मुहूर्त अमृत सर्वोत्तम मुहूर्त रहेगा, जो सुबह 11 बजकर 11 मिनट से 12 बजकर 35 मिनट तक का रहेगा, जिसमें जल चढ़ाना अत्यंत फलदायी रहेगा. जो श्रद्धालु शाम को पूजा करना चाहते हैं, वे 6 बजकर 11 मिनट से 7 बजकर 47 मिनट के बीच अभिषेक कर सकते हैं. इन सभी मुहूर्तों में श्रद्धा और सच्चे मन से शिवलिंग पर जल अर्पित करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है.


    रुद्राभिषेक में क्या चढ़ाएं?

    भगवान शिव को जल, गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद, बेलपत्र, शमी पत्र, भस्म, चंदन और मौसमी फल अर्पित किए जाते हैं. कई लोग पार्थिव शिवलिंग बनाकर भी अभिषेक करते हैं. शिवलिंग पर जल चढ़ाने का विशेष महत्व है. मान्यता है कि जल हमारे भावों को धारण करता है. जब हम सच्चे मन से जल अर्पित करते हैं, तो हमारे मन की सकारात्मक ऊर्जा भी ईश्वर तक पहुंचती है और नकारात्मकता धीरे-धीरे कम होने लगती है.


    महाशिवरात्रि पर जरूर करें ये उपाय

    अगर जीवन में आर्थिक परेशानी है, आय कम है या मेहनत के अनुसार फल नहीं मिल रहा, तो महाशिवरात्रि के दिन व्रत रखें. सुबह स्नान के बाद शिव मंदिर जाकर गंगाजल से अभिषेक करें. ”ऊं नमः शिवाय” मंत्र का जाप करते हुए 11 बेलपत्र चढ़ाएं. दिन भर श्रद्धा से व्रत रखें. शाम को रुद्राभिषेक कराएं और कम से कम 11 माला ”ऊं नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें. नियमित रूप से मंत्र जाप जारी रखने से धीरे-धीरे आर्थिक स्थिति में सुधार देखने को मिल सकता है.


    तनाव और डिप्रेशन दूर करने का उपाय

    अगर मन में तनाव, नकारात्मकता या बेचैनी रहती है, तो महाशिवरात्रि पर गंगाजल और कच्चे दूध से अभिषेक करें. 11 बेलपत्र अर्पित करें और प्रतिदिन 108 बार ”ऊं नमः शिवाय” का जाप शुरू करें. नियमित मंत्र जाप से मन को शांति मिलती है और सकारात्मक सोच विकसित होती है.