Tag: Mahakal Darshan

  • भोर होते ही गूंजा हर-हर महादेव, भस्म आरती में दिव्य राजा रूप में सजे महाकाल, अद्भुत दर्शन से भक्त हुए निहाल

    भोर होते ही गूंजा हर-हर महादेव, भस्म आरती में दिव्य राजा रूप में सजे महाकाल, अद्भुत दर्शन से भक्त हुए निहाल


    उज्जैन। उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में मंगलवार तड़के भगवान महाकाल की भस्म आरती विधि विधान के साथ संपन्न हुई। सुबह करीब चार बजे मंदिर के कपाट खोले गए। जैसे ही मंदिर में बाबा महाकाल के दर्शन शुरू हुए श्रद्धालुओं के बीच भक्ति का माहौल बन गया। बड़ी संख्या में पहुंचे भक्तों ने भगवान महाकाल के दिव्य स्वरूप के दर्शन किए और जयकारों के साथ बाबा का आशीर्वाद लिया।

    भस्म आरती से पहले भगवान महाकाल का हरि ओम जल से अभिषेक किया गया। इसके बाद दूध दही घी शक्कर शहद और फलों के रस से तैयार पंचामृत से भगवान का पूजन किया गया। अभिषेक और पूजन की धार्मिक परंपराएं पूरी होने के बाद बाबा महाकाल का विशेष शृंगार किया गया।

    इस अवसर पर भगवान महाकाल को रजत चंद्र त्रिशूल और त्रिपुंड धारण कराया गया। इसके बाद ड्रायफ्रूट से बाबा का राजा स्वरूप शृंगार किया गया। भगवान के मस्तक पर शेषनाग का रजत मुकुट सुशोभित किया गया। रजत मुंडमाल और रुद्राक्ष की माला से बाबा का दिव्य स्वरूप सजाया गया। इसके साथ ही सुगंधित पुष्पों की माला अर्पित की गई। शृंगार के बाद भगवान महाकाल को फल और मिष्ठान का भोग लगाया गया।

    भस्म आरती के दौरान मंदिर परिसर में आध्यात्मिक वातावरण नजर आया। नंदी हॉल में भगवान नंदी का स्नान ध्यान और पूजन किया गया। इसके बाद झांझ मंजीरे और डमरू की मंगल ध्वनि के बीच भस्म आरती की गई। आरती के दौरान मंदिर में मौजूद श्रद्धालु बाबा महाकाल की भक्ति में लीन नजर आए। भक्तों ने भगवान के दर्शन किए और परिवार की सुख समृद्धि की कामना की।

    भगवान महाकाल की भस्म आरती को मंदिर की प्रमुख धार्मिक परंपराओं में माना जाता है। इस दौरान महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को भस्म अर्पित की गई। धार्मिक मान्यता के अनुसार भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इसी मान्यता के चलते देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु भस्म आरती में शामिल होने के लिए उज्जैन पहुंचते हैं।

    मंगलवार की भस्म आरती में भी श्रद्धालुओं का उत्साह देखने को मिला। राजा स्वरूप में सजे भगवान महाकाल के दर्शन ने भक्तों को भावविभोर कर दिया। रजत आभूषणों से सजा स्वरूप और पुष्पों से किया गया शृंगार मंदिर की धार्मिक आभा को और खास बना रहा था।

    महाकालेश्वर मंदिर में होने वाली भस्म आरती प्रतिदिन तड़के संपन्न होने वाली प्रमुख पूजा परंपरा है। इसमें अभिषेक पूजन शृंगार भोग और आरती की अलग-अलग धार्मिक विधियां पूरी की जाती हैं। मंगलवार को भी इन सभी परंपराओं के बीच बाबा महाकाल का विशेष राजा स्वरूप भक्तों के आकर्षण का केंद्र रहा।

  • भस्म अर्पण के बाद निराकार से साकार रूप में दिखे महाकाल जयकारों से गूंज उठा मंदिर परिसर

    भस्म अर्पण के बाद निराकार से साकार रूप में दिखे महाकाल जयकारों से गूंज उठा मंदिर परिसर


    उज्जैन । उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में शनिवार तड़के भगवान महाकाल की भस्म आरती विधि विधान के साथ संपन्न हुई। सुबह करीब चार बजे मंदिर के पट खुलते ही गर्भगृह में धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत हो गई। पंडे और पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित सभी देव प्रतिमाओं का पूजन किया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया और फिर पंचामृत से अभिषेक संपन्न हुआ।

    पंचामृत अभिषेक के दौरान दूध दही घी शक्कर और फलों के रस का उपयोग किया गया। इसके बाद प्रथम घंटाल बजाकर भगवान महाकाल को हरिओम का जल अर्पित किया गया। भस्म आरती की विशेष परंपरा के तहत होने वाले पूजन के बीच गर्भगृह में मंत्रोच्चार और धार्मिक विधियां जारी रहीं।

    अभिषेक के बाद भगवान महाकाल का विशेष शृंगार किया गया। इस दौरान बाबा महाकाल को रजत ओम और बिल्वपत्र से सजा मुकुट धारण कराया गया। इसके साथ ही रुद्राक्ष की माला और शेषनाग का रजत मुकुट भी अर्पित किया गया। भगवान के मस्तक पर त्रिपुंड और त्रिशूल सजाया गया जबकि डमरू से भी विशेष शृंगार किया गया।

    बाबा महाकाल को रजत की मुंडमाला और रुद्राक्ष की माला पहनाई गई। इसके साथ ही सुगंधित पुष्पों की मालाएं भी अर्पित की गईं। विशेष शृंगार के बाद भगवान महाकाल का स्वरूप श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहा। भस्म आरती में शामिल होने पहुंचे श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के इस दिव्य स्वरूप के दर्शन किए।

    पूजन के दौरान भगवान गणेश माता पार्वती और भगवान कार्तिकेय का भी विधि विधान से पूजन किया गया। भगवान महाकाल को फल और मिष्ठान का भोग अर्पित किया गया। इसके बाद कपूर आरती हुई और नैवेद्य चढ़ाया गया। सभी धार्मिक प्रक्रियाओं के बाद भस्म आरती की मुख्य परंपरा संपन्न हुई।

    महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती को धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व दिया जाता है। मान्यता के अनुसार भस्म अर्पित किए जाने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में दर्शन देते हैं। इसी मान्यता के चलते भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल के विशेष दर्शन के लिए श्रद्धालुओं में उत्साह दिखाई दिया।

    भस्म आरती के दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की मौजूदगी बनी रही। जैसे ही पूजन और आरती की प्रक्रिया आगे बढ़ी वैसे ही पूरा परिसर भगवान महाकाल के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने हाथ जोड़कर बाबा महाकाल का आशीर्वाद लिया और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना की।

    महाकाल मंदिर में होने वाली भस्म आरती प्रतिदिन की धार्मिक दिनचर्या का महत्वपूर्ण हिस्सा है। आरती के दौरान होने वाले अभिषेक पूजन भस्म अर्पण और विशेष शृंगार के बाद भगवान महाकाल के अलग अलग स्वरूप में दर्शन होते हैं। शनिवार की भस्म आरती में भी बाबा महाकाल का रजत ओम बिल्वपत्र मुकुट और रुद्राक्ष से किया गया शृंगार श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण रहा।

  • महाकाल के दरबार में दिखी अद्भुत भक्ति: भस्म आरती में हुआ भव्य श्रृंगार रजत मुकुट त्रिशूल और आभूषणों से सजे बाबा

    महाकाल के दरबार में दिखी अद्भुत भक्ति: भस्म आरती में हुआ भव्य श्रृंगार रजत मुकुट त्रिशूल और आभूषणों से सजे बाबा


    उज्जैन । उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शुक्रवार तड़के भस्म आरती के दौरान भक्ति और आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। अलसुबह मंदिर के कपाट खुलने के साथ ही बाबा महाकाल की विशेष पूजा और श्रृंगार की प्रक्रिया शुरू हुई। भस्म आरती में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे। भक्तों ने बाबा महाकाल के दर्शन किए और सुख समृद्धि की कामना के साथ उनका आशीर्वाद लिया। पूरे मंदिर परिसर में जय महाकाल के जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा।

    मंदिर के कपाट खुलने के बाद सबसे पहले सभा मंडप में वीरभद्र जी के कान में स्वस्ति वाचन किया गया। इसके बाद घंटी बजाकर भगवान से पूजा की आज्ञा ली गई। सभा मंडप के चांदी के पट खोले गए और फिर गर्भगृह के कपाट खोले गए। गर्भगृह में प्रवेश के बाद पुजारियों ने भगवान महाकाल का पुराना श्रृंगार उतारा। इसके बाद विधि विधान के साथ पंचामृत पूजन किया गया। पूजा के बाद कर्पूर आरती की गई।

    भस्म आरती की परंपरा में भगवान महाकाल के पूजन के साथ नंदी जी की आराधना का भी विशेष महत्व माना जाता है। नंदी हाल में नंदी जी का स्नान कराया गया। इसके बाद ध्यान और पूजन किया गया। इसके बाद बाबा महाकाल का जल से अभिषेक हुआ। अभिषेक के दौरान दूध दही घी शक्कर शहद और फलों के रस से तैयार पंचामृत से भगवान का पूजन किया गया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस तरह के पूजन से भगवान महाकाल के प्रति भक्तों की श्रद्धा और समर्पण प्रकट होता है।

    पंचामृत पूजन के बाद बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया। भगवान को रजत चंद्र त्रिशूल मुकुट और विभिन्न आभूषण अर्पित किए गए। बाबा महाकाल ने शेषनाग का रजत मुकुट धारण किया। इसके साथ ही रजत की मुंडमाला रुद्राक्ष की माला और सुगंधित पुष्पों से बनी माला से उनका श्रृंगार किया गया। भांग चंदन ड्रायफ्रूट और भस्म भी अर्पित की गई। इसके बाद भगवान को फल और मिष्ठान का भोग लगाया गया।

    भस्म आरती के दौरान महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। उज्जैन में होने वाली भस्म आरती बाबा महाकाल की विशेष आराधना के रूप में जानी जाती है। धार्मिक मान्यता है कि भस्म अर्पित किए जाने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इसी आस्था के चलते भस्म आरती के दर्शन के लिए देशभर से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं।

    शुक्रवार की भस्म आरती में बाबा महाकाल का राजा स्वरूप में किया गया श्रृंगार श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहा। रजत मुकुट त्रिशूल मुंडमाला और पुष्पमाला से सजे बाबा महाकाल की छवि ने भक्तों को भावविभोर कर दिया। आरती के दौरान मंदिर परिसर में आध्यात्मिक वातावरण बना रहा और श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन कर अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना की।

  • सोमवार की भस्म आरती में दिव्य आभा से आलोकित हुए बाबा महाकाल पंचामृत अभिषेक के बाद राजा स्वरूप में दिए अलौकिक दर्शन

    सोमवार की भस्म आरती में दिव्य आभा से आलोकित हुए बाबा महाकाल पंचामृत अभिषेक के बाद राजा स्वरूप में दिए अलौकिक दर्शन


    मध्यप्रदेश । विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में सोमवार तड़के आयोजित भस्म आरती के दौरान एक बार फिर आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला। ब्रह्म मुहूर्त में सुबह चार बजे मंदिर के पट खुलते ही पूरा परिसर हर हर महादेव और वैदिक मंत्रोच्चार से गूंज उठा। गर्भगृह में विराजित सभी देवी देवताओं का विधि विधान से पूजन किया गया जिसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक संपन्न हुआ। इसके पश्चात दूध दही घी शक्कर और फलों के रस से तैयार पंचामृत से ज्योतिर्लिंग का अभिषेक किया गया। इस पावन अनुष्ठान के दौरान वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया और उपस्थित श्रद्धालु शिव भक्ति में भाव विभोर नजर आए।

    पंचामृत अभिषेक के बाद भगवान महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया। प्रथम घंटा बजाकर वैदिक मंत्रों के बीच हरिओम का पवित्र जल अर्पित किया गया। कपूर आरती के पश्चात बाबा महाकाल के मस्तक पर भांग चंदन और त्रिपुंड अर्पित कर उन्हें दिव्य स्वरूप प्रदान किया गया। मंदिर में मौजूद श्रद्धालु इस अलौकिक श्रृंगार के दर्शन कर स्वयं को धन्य मानते दिखाई दिए। पूरे अनुष्ठान के दौरान मंदिर परिसर में भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत वातावरण बना रहा।

    श्रृंगार की अगली प्रक्रिया में ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से आच्छादित कर पवित्र भस्म अर्पित की गई। भस्म रमाने के बाद भगवान महाकाल को शेषनाग का रजत मुकुट रजत मुंडमाला रुद्राक्ष की मालाएं और सुगंधित पुष्पों से सजाया गया। मोगरा और गुलाब के फूलों से सुसज्जित बाबा महाकाल का राजाधिराज स्वरूप अत्यंत मनोहारी दिखाई दिया। इसके बाद भगवान को फल और मिष्ठान का भोग अर्पित किया गया तथा विशेष आरती संपन्न हुई। इस दिव्य दृश्य ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक आनंद से भर दिया।

    भस्म आरती में देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भगवान महाकाल के दर्शन कर सुख समृद्धि और मंगलमय जीवन की कामना की। महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से परंपरा के अनुसार भगवान महाकाल को पवित्र भस्म अर्पित की गई। सनातन परंपरा में यह मान्यता है कि भस्म अर्पित होने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। यही कारण है कि महाकाल मंदिर की भस्म आरती को विश्वभर के श्रद्धालु अत्यंत श्रद्धा और आस्था के साथ देखते हैं।

    सोमवार का दिन भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष महत्व रखता है। ऐसे में इस दिन आयोजित भस्म आरती का धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है। उज्जैन का श्री महाकालेश्वर मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है जहां प्रतिदिन होने वाली भस्म आरती सदियों पुरानी परंपरा का जीवंत स्वरूप मानी जाती है। बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन और भव्य श्रृंगार ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि आस्था और विश्वास से जुड़ी यह परंपरा आज भी करोड़ों श्रद्धालुओं की आध्यात्मिक शक्ति का सबसे बड़ा केंद्र बनी हुई है।

  • महाकाल की दिव्य भस्म आरती, रजत ॐ-बिल्वपत्र मुकुट और रुद्राक्ष माला से हुआ अलौकिक श्रृंगार

    महाकाल की दिव्य भस्म आरती, रजत ॐ-बिल्वपत्र मुकुट और रुद्राक्ष माला से हुआ अलौकिक श्रृंगार


    उज्जैन । उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शनिवार तड़के ब्रह्ममुहूर्त के दौरान भगवान महाकाल की दिव्य भस्म आरती श्रद्धा और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुई। सुबह चार बजे मंदिर के पट खुलने के साथ ही गर्भगृह में विराजमान सभी देवी-देवताओं का विधिवत पूजन किया गया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक कर दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से तैयार पंचामृत से अभिषेक किया गया। प्रथम घंटाल के साथ हरि ॐ का जल अर्पित कर विशेष पूजा संपन्न हुई।

    अभिषेक के बाद भगवान महाकाल का आकर्षक और दिव्य श्रृंगार किया गया। उन्हें रजत का ॐ और बिल्वपत्र मुकुट धारण कराया गया। रुद्राक्ष की माला, रजत की मुंडमाला, डमरू और शेषनाग से सुशोभित रजत मुकुट से अलंकृत किया गया। मस्तक पर त्रिपुंड और त्रिशूल का तिलक सजाया गया, जबकि सुगंधित पुष्पों की मनमोहक मालाओं से बाबा महाकाल का स्वरूप और भी दिव्य दिखाई दिया।

    श्रृंगार के पश्चात भगवान गणेश, माता पार्वती और भगवान कार्तिकेय का पूजन किया गया। भगवान महाकाल को फल और मिष्ठान का नैवेद्य अर्पित करने के बाद कपूर आरती की गई। इसके उपरांत महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से पवित्र भस्म अर्पित की गई और परंपरानुसार भस्म आरती संपन्न हुई।

    धार्मिक मान्यता के अनुसार भस्म अर्पित होने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इसी आस्था के साथ देशभर से पहुंचे श्रद्धालुओं ने भस्म आरती में शामिल होकर बाबा महाकाल के दर्शन किए और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। आरती के दौरान पूरा मंदिर परिसर ‘जय श्री महाकाल’ के जयघोष से गूंज उठा और भक्तिमय वातावरण ने सभी श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति से भर दिया।

  • उज्जैन से लौटते समय काल बन गया सफर, टायर ब्लास्ट के बाद हुआ भीषण सड़क हादसा

    उज्जैन से लौटते समय काल बन गया सफर, टायर ब्लास्ट के बाद हुआ भीषण सड़क हादसा


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश के उज्जैन में बाबा महाकाल के दर्शन के बाद लौट रहे एक कारोबारी की सड़क हादसे में मौत हो गई। नागझिरी थाना क्षेत्र के गरुड़ बायपास ब्रिज के पास शनिवार को तेज रफ्तार कार का अगला टायर फटने से वाहन अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकरा गया। हादसे में बेंगलुरु के सीड कारोबारी मणि कांत कुट्टी (35) की मौत हो गई, जबकि उनके साथ मौजूद इंदौर के डीलर ओम धाकड़ और चालक बालकृष्ण गंभीर रूप से घायल हो गए।

    मृतक मणि कांत कुट्टी मूल रूप से Visakhapatnam के निवासी थे और Bengaluru में सीड व्यवसाय संचालित करते थे। बताया जा रहा है कि वे हाल ही में दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे थे। महाकाल के प्रति उनकी गहरी आस्था थी और वे नियमित रूप से Shri Mahakaleshwar Temple में दर्शन करने आते थे।

    शनिवार दोपहर मणि कांत कुट्टी अपने सहयोगी ओम धाकड़ और चालक बालकृष्ण के साथ महाकाल मंदिर में दर्शन करने पहुंचे थे। दर्शन के बाद तीनों स्कोडा कार से इंदौर के लिए रवाना हुए। रास्ते में उज्जैन-देवास बायपास पर अचानक कार का अगला बायां टायर फट गया। तेज रफ्तार होने के कारण चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख सका और कार डिवाइडर से जा टकराई।

    हादसा इतना भीषण था कि कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। स्थानीय लोगों ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया और घायलों को अस्पताल पहुंचाया। उपचार के दौरान मणि कांत कुट्टी ने दम तोड़ दिया, जबकि ओम धाकड़ और चालक बालकृष्ण का इलाज जारी है।

    चालक बालकृष्ण ने बताया कि टायर फटने के बाद कार पूरी तरह अनियंत्रित हो गई थी और दुर्घटना से बचने का कोई मौका नहीं मिला। उन्होंने कहा कि मणि कांत कुट्टी कई वर्षों से बाबा महाकाल के दर्शन करने आते रहे थे और उनकी धार्मिक आस्था बेहद गहरी थी।

    इस हादसे की एक खास बात यह रही कि मृतक के आईफोन में एसओएस (SOS) सुविधा सक्रिय थी। दुर्घटना होते ही उनके भाई के मोबाइल पर स्वतः आपातकालीन संदेश पहुंच गया। सूचना मिलते ही परिजन विशाखापट्टनम से उज्जैन के लिए रवाना हो गए। इसी तरह इंदौर निवासी ओम धाकड़ के परिवार को भी मोबाइल अलर्ट के माध्यम से हादसे की जानकारी मिल गई, जिसके बाद वे तत्काल अस्पताल पहुंचे।

    पुलिस ने मामला दर्ज कर दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में हादसे की वजह टायर फटना माना जा रहा है। यह घटना एक बार फिर लंबी दूरी की यात्रा के दौरान वाहन के टायर और तकनीकी स्थिति की नियमित जांच की आवश्यकता को रेखांकित करती है।

  • राज्यसभा चुनाव में गरमाई राजनीति, सीएम का बड़ा बयान- जीत तक चैन नहीं

    राज्यसभा चुनाव में गरमाई राजनीति, सीएम का बड़ा बयान- जीत तक चैन नहीं


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश की राजनीति में राज्यसभा की तीसरी सीट को लेकर मुकाबला बेहद रोचक हो गया है। भाजपा ने महेश केवट को प्रत्याशी बनाकर चुनावी समीकरणों में नया मोड़ ला दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नामांकन के दौरान इसे रामायण से जोड़ते हुए कहा कि रामराजा की नगरी में भगवान राम का आशीर्वाद एक बार फिर निषादराज की परंपरा को आगे बढ़ा रहा है।

    महेश केवट ने भी इसे रामायण की भावना से जोड़ते हुए कहा कि जैसे भगवान राम ने निषादराज को गले लगाया था, वैसे ही भाजपा ने वंचित वर्ग को सम्मान दिया है। इसी बयान के बाद राजनीतिक हलकों में “केवट की नैया” और “सियासी रामायण” की चर्चा तेज हो गई है।

    आंकड़ों की जंग और सत्ता की रणनीति
    वर्तमान राजनीतिक गणित के अनुसार भाजपा के पास करीब 48 वोट बताए जा रहे हैं, जबकि जीत के लिए 58 वोटों की जरूरत है। यही वजह है कि तीसरी सीट का समीकरण पूरी तरह अनिश्चित बना हुआ है। दूसरी ओर कांग्रेस ने भी अपने विधायकों को टूट-फूट से बचाने के लिए सख्त रणनीति अपनाई है।

    कांग्रेस ने 62 विधायकों को बेंगलुरु शिफ्ट करने का फैसला किया है ताकि क्रॉस वोटिंग की आशंका को रोका जा सके। पार्टी नेताओं का दावा है कि सभी विधायक एकजुट हैं, लेकिन अंदरूनी डर ने सियासी माहौल को गर्म कर दिया है।

    कांग्रेस की बाड़ाबंदी और भाजपा पर आरोप
    कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया है कि भाजपा विधायकों की खरीद-फरोख्त की कोशिश कर सकती है। वहीं भाजपा खेमे का दावा है कि उनके पास अतिरिक्त समर्थन जुटाने की रणनीति मौजूद है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि क्या भाजपा विपक्षी खेमे में सेंध लगाने में सफल होगी या कांग्रेस अपनी एकजुटता बचा पाएगी।

    ‘पुष्पा’ गेटअप में महाकाल दर्शन, वायरल वीडियो से उठे सवाल
    उज्जैन के महाकाल मंदिर में एक युवक का ‘पुष्पा’ फिल्म स्टाइल में दर्शन करने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। युवक ने अल्लू अर्जुन के किरदार जैसा गेटअप अपनाया और मंदिर परिसर में आकर्षण का केंद्र बन गया।

    हैरानी की बात यह रही कि सुरक्षा कर्मी उसके साथ मौजूद रहे और उसे वीआईपी तरीके से दर्शन भी कराए गए। कुछ कर्मचारियों ने उसके साथ सेल्फी भी ली, जबकि मंदिर में फोटो-वीडियो पर रोक है। इस घटना के बाद मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था और नियमों के पालन पर सवाल खड़े हो गए हैं।

    सियासत, धर्म और व्यवस्था पर सवाल
    एक तरफ राज्यसभा चुनाव में रामायण के पात्रों के जरिए सियासी संदेश दिए जा रहे हैं, तो दूसरी तरफ मंदिर में ‘पुष्पा’ स्टाइल वायरल वीडियो व्यवस्था पर सवाल उठा रहा है। मध्य प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक घटनाएं इन दिनों लगातार सुर्खियों में बनी हुई हैं।

  • महाकाल भस्म आरती: भांग चंदन और बेलपत्र से सजा बाबा महाकाल का दिव्य श्रृंगार, गूंजे जय महाकाल के जयकारे

    महाकाल भस्म आरती: भांग चंदन और बेलपत्र से सजा बाबा महाकाल का दिव्य श्रृंगार, गूंजे जय महाकाल के जयकारे


    उज्जैन । धार्मिक नगरी उज्जैन में स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में बुधवार तड़के आयोजित भस्म आरती के दौरान भक्तिमय वातावरण देखने को मिला। चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर तड़के करीब 4 बजे मंदिर के कपाट खोले गए जिसके बाद विधि-विधान से भगवान महाकालेश्वर की भस्म आरती संपन्न हुई। इस दौरान बाबा महाकाल का भव्य और दिव्य श्रृंगार किया गया जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे।

    मंदिर के पट खुलने के बाद पुजारियों ने सबसे पहले गर्भगृह में स्थापित सभी देवी-देवताओं का पूजन-अर्चन किया। इसके पश्चात भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। इसके बाद दूध दही घी शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक कर विशेष पूजन संपन्न किया गया। पूरे अनुष्ठान के दौरान मंदिर परिसर वैदिक मंत्रोच्चार और घंटियों की ध्वनि से गूंजता रहा जिससे वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक हो गया।

    अभिषेक के बाद भगवान महाकाल का आकर्षक श्रृंगार किया गया। बाबा को चंदन का त्रिपुंड और त्रिनेत्र से अलंकृत किया गया वहीं भांग और बेलपत्र से भी विशेष सजावट की गई। सुगंधित पुष्पों और मालाओं से सजे भगवान महाकाल का स्वरूप अत्यंत मनमोहक नजर आ रहा था। इसके बाद भस्म अर्पण की परंपरा निभाई गई। भस्म अर्पण से पहले प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम का जल अर्पित किया गया और मंत्रोच्चार के बीच भगवान का ध्यान किया गया।

    कपूर आरती के पश्चात ज्योतिर्लिंग को कपड़े से ढांककर पवित्र भस्म रमाई गई। यह परंपरा महाकाल मंदिर की सबसे विशेष और प्राचीन परंपराओं में से एक मानी जाती है। भस्म आरती के बाद भगवान महाकाल को शेषनाग का रजत मुकुट रजत की मुण्डमाल रुद्राक्ष की माला और विभिन्न प्रकार के सुगंधित पुष्पों की मालाएं अर्पित की गईं। इसके साथ ही कई आभूषणों से भगवान का अलंकरण किया गया जिससे उनका स्वरूप और भी दिव्य दिखाई दे रहा था।

    तड़के आयोजित इस भस्म आरती में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर बाबा महाकाल के दर्शन किए और पुण्य लाभ अर्जित किया। मंदिर परिसर में हर ओर जय महाकाल के जयकारे गूंज रहे थे जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। दर्शन के बाद श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के पास पहुंचकर उनके कान में अपनी मनोकामनाएं भी व्यक्त कीं और बाबा से सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मांगा।

    उज्जैन के महाकाल मंदिर में प्रतिदिन तड़के होने वाली भस्म आरती का विशेष धार्मिक महत्व है। देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी श्रद्धालु इस अद्भुत परंपरा को देखने और बाबा महाकाल के दर्शन करने के लिए यहां पहुंचते हैं। माना जाता है कि सच्चे मन से बाबा महाकाल के दर्शन और आराधना करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

  • 25 जनवरी महाकाल भस्म आरती: चंद्र अर्पण और चंदन से हुआ दिव्य श्रृंगार, अलसुबह उमड़े श्रद्धालु, घर बैठे करें बाबा महाकाल के दर्शन

    25 जनवरी महाकाल भस्म आरती: चंद्र अर्पण और चंदन से हुआ दिव्य श्रृंगार, अलसुबह उमड़े श्रद्धालु, घर बैठे करें बाबा महाकाल के दर्शन


    उज्जैन । विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में माघ माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि रविवार को अलसुबह भव्य और दिव्य भस्म आरती का आयोजन किया गया। तड़के ठीक 4 बजे मंदिर के कपाट खुलते ही बाबा महाकाल के जयकारों से संपूर्ण परिसर गूंज उठा। इस अवसर पर भगवान महाकाल का विशेष और मनोहारी श्रृंगार किया गया, जिसे देखकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।

    मंदिर के कपाट खुलने के बाद पुजारियों द्वारा विधि-विधान से गर्भगृह में विराजित सभी देवी-देवताओं का पूजन किया गया। इसके पश्चात भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। अभिषेक क्रम में दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से निर्मित पंचामृत से भगवान का अभिषेक संपन्न हुआ। मंत्रोच्चार और वैदिक विधानों के बीच पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा।

    अभिषेक के बाद बाबा महाकाल का दिव्य श्रृंगार किया गया। भगवान के मस्तक पर चंद्र अर्पित किया गया, वहीं चंदन से त्रिपुंड और त्रिनेत्र अंकित कर भांग से मनोहारी श्रृंगार रचा गया। श्रृंगार के इस अलौकिक स्वरूप ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके पश्चात प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम के जल का अर्पण किया गया और ध्यान मंत्रों के साथ भगवान का आवाहन किया गया।

    भस्म अर्पण की परंपरा के तहत कपूर आरती की गई। इसके बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढांककर विधि-विधान से भस्म रमाई गई। भस्म आरती के इस दुर्लभ दृश्य को देखने के लिए सैकड़ों श्रद्धालु अलसुबह ही मंदिर परिसर में उपस्थित रहे। भस्म रमाने के बाद बाबा महाकाल को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुंडमाल, रुद्राक्ष की मालाएं और सुगंधित पुष्प अर्पित किए गए। फूलों और आभूषणों से भगवान का भव्य अलंकरण किया गया।

    भस्म आरती के दौरान श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के दर्शन भी किए। परंपरा अनुसार श्रद्धालु नंदी महाराज के कान के समीप जाकर अपनी मनोकामनाएं व्यक्त करते नजर आए। श्रद्धालुओं का मानना है कि नंदी के माध्यम से कही गई प्रार्थना सीधे बाबा महाकाल तक पहुंचती है और शीघ्र फलित होती है।

    पूरे भस्म आरती आयोजन के दौरान जय श्री महाकाल हर-हर महादेव और बाबा महाकाल की जय के जयकारों से मंदिर परिसर गूंजता रहा। अलसुबह की ठंड के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी। देश-विदेश से आए भक्तों ने बाबा महाकाल के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया।

    जो श्रद्धालु मंदिर पहुंचकर दर्शन नहीं कर सके, वे मंदिर समिति द्वारा उपलब्ध कराए गए लाइव दर्शन के माध्यम से घर बैठे बाबा महाकाल के दिव्य स्वरूप के दर्शन कर पुण्य लाभ प्राप्त कर सके। महाकाल की भस्म आरती न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह भारत की सबसे प्राचीन और अद्वितीय धार्मिक परंपराओं में से एक मानी जाती है।

  • उज्जैन में आस्था का महासैलाब: साल के आखिरी रविवार महाकाल दरबार पहुंचे डेढ़ लाख से अधिक श्रद्धालु

    उज्जैन में आस्था का महासैलाब: साल के आखिरी रविवार महाकाल दरबार पहुंचे डेढ़ लाख से अधिक श्रद्धालु


    उज्जैन।साल के अंतिम रविवार को धार्मिक नगरी उज्जैन में आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। ज्योतिर्लिंग श्री महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की रिकॉर्ड भीड़ उमड़ पड़ी। सर्दियों की छुट्टियां शुरू होते ही देशभर से भक्त उज्जैन पहुंचने लगे हैं। इसी क्रम में रविवार को करीब डेढ़ लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन कर साल के अंतिम दिनों को आध्यात्मिक रूप से सार्थक बनाया। सुबह तड़के भस्म आरती के बाद से ही मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में भक्तों की लंबी कतारें लग गई थीं। श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए मंदिर प्रशासन को दर्शन व्यवस्था में कई बदलाव करने पड़े। सामान्य दर्शनार्थियों को चारधाम मंदिर पार्किंग से शक्तिपथ होते हुए त्रिवेणी संग्रहालय द्वार से मंदिर में प्रवेश दिया गया।

    शीघ्र दर्शन के लिए खोला गया सम्राट अशोक सेतु

    शनिवार को सुरक्षा कारणों से बंद किया गया सम्राट अशोक सेतु रविवार को पुनः खोला गया, लेकिन इसे केवल 250 रुपये के शीघ्र दर्शन टिकट वाले श्रद्धालुओं के लिए आरक्षित रखा गया। इसके चलते सामान्य और शीघ्र दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की अलग-अलग व्यवस्थाएं बनाई गईं, ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके।महाकाल मंदिर में श्री महाकाल लोक के निर्माण के बाद से सप्ताहांत और विशेष अवसरों पर श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। साल का आखिरी रविवार भी इसका साक्षी बना, जब सुबह से देर रात तक मंदिर परिसर में भक्तों का सैलाब उमड़ता रहा।

    प्रशासन को करना पड़ा इंतजामों में बदलाव

    शनिवार से ही श्रद्धालुओं का उज्जैन पहुंचना शुरू हो गया था। जनदबाव बढ़ने के कारण जिला प्रशासन और मंदिर समिति को अपनी व्यवस्थाओं में बदलाव करना पड़ा। रविवार को उत्तर और पूर्व दिशा के सभी द्वार बंद रखे गए जबकि केवल पश्चिम दिशा से श्री महाकाल लोक और सम्राट अशोक सेतु के माध्यम से श्रद्धालुओं को प्रवेश दिया गया।भीड़ को देखते हुए 31 दिसंबर और 1 जनवरी के लिए भी प्रशासन ने अतिरिक्त तैयारियां शुरू कर दी हैं। चारधाम पार्किंग में जिगजैग बैरिकेडिंग की व्यवस्था की जा रही है, ताकि कतारों को सुव्यवस्थित रखा जा सके। इसके अलावा, पेयजल, चिकित्सा और सुरक्षा से जुड़े अतिरिक्त इंतजाम भी किए जा रहे हैं।

    अन्य मंदिरों में भी उमड़ी श्रद्धा

    महाकाल मंदिर के अलावा उज्जैन के अन्य प्रमुख मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। काल भैरव मंदिर में रविवार को 75 हजार से अधिक भक्तों ने दर्शन किए। भीड़ के चलते काल भैरव मंदिर में प्रोटोकॉल दर्शन व्यवस्था अस्थायी रूप से स्थगित रही और जिला प्रशासन द्वारा जारी सूची के अनुसार ही दर्शन कराए गए।इसके अलावा मंगलनाथ मंदिर, अंगारेश्वर महादेव मंदिर और चिंतामन गणेश मंदिर में भी दिनभर श्रद्धालुओं का आना-जाना बना रहा। सभी मंदिरों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किया गया।

    अव्यवस्थाओं पर उठे सवाल

    भारी भीड़ के बावजूद महाकाल मंदिर के बाहर अव्यवस्थाएं देखने को मिलीं। आसपास की गलियों और शहनाई गेट के सामने अवैध पार्किंग से यातायात बाधित रहा। वहीं, मुख्य द्वार के पास फूल-माला और पूजन सामग्री की दुकानों के अतिक्रमण के कारण श्रद्धालुओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। भीड़ के बीच इस अव्यवस्था पर नियंत्रण को लेकर प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं।

    आगे और बढ़ सकती है भीड़
    प्रशासन का अनुमान है कि नववर्ष के अवसर पर उज्जैन में श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ सकती है। होटल, धर्मशालाएं और गेस्ट हाउस लगभग पूरी तरह भर चुके हैं। श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे प्रशासन के निर्देशों का पालन करें और धैर्य बनाए रखें, ताकि सभी को सुगम दर्शन का अवसर मिल सके।