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  • उज्जैन में महाकाल के दरबार में दिखे मिलिंद सोमन-नितीश राणा, नंदी हॉल में किया जाप

    उज्जैन में महाकाल के दरबार में दिखे मिलिंद सोमन-नितीश राणा, नंदी हॉल में किया जाप


    नई दिल्ली। धार्मिक नगरी उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में मंगलवार तड़के आयोजित भस्म आरती में फिल्म अभिनेता मिलिंद सोमन और भारतीय क्रिकेटर नितीश राणा ने अपनी-अपनी पत्नियों के साथ भगवान महाकाल के दर्शन किए। दोनों ने सुबह 4 बजे होने वाली इस विशेष आरती में भाग लेकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।

    रात 2 बजे पहुंचे, नंदी हॉल में साधना का माहौल
    दोनों सेलिब्रिटी देर रात करीब 2 बजे मंदिर पहुंचे। नितीश राणा अपनी पत्नी साँची मारवाह के साथ, जबकि मिलिंद सोमन अपनी पत्नी अंकिता कोंवर के साथ यहां आए। उन्होंने मंदिर के नंदी हॉल में बैठकर करीब दो घंटे तक भस्म आरती में भाग लिया। इस दौरान वे ध्यान और जाप में लीन नजर आए, जिससे वहां मौजूद श्रद्धालुओं में भी विशेष उत्साह देखने को मिला।

    नंदी जी के कान में कही मनोकामना
    भस्म आरती के दौरान दोनों ने नंदी भगवान का पूजन किया और परंपरा के अनुसार उनके कान में अपनी मनोकामना भी व्यक्त की। आरती के पश्चात उन्होंने गर्भगृह की देहरी से भगवान महाकाल के दर्शन किए और जल अर्पित कर आशीर्वाद लिया।

    मंदिर समिति ने किया सम्मान
    दर्शन के बाद मंदिर समिति की ओर से दोनों का पारंपरिक तरीके से सम्मान भी किया गया। इस दौरान मंदिर परिसर में सुरक्षा के विशेष इंतजाम भी किए गए थे, क्योंकि बड़ी संख्या में श्रद्धालु भस्म आरती में शामिल होने पहुंचे थे।

    “बाबा का बुलावा आया” – मिलिंद सोमन
    मिलिंद सोमन ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वे लंबे समय से महाकाल के दर्शन करने की इच्छा रखते थे, लेकिन अब जाकर उन्हें यह अवसर मिला। उन्होंने कहा, “यहां आकर बहुत शांति और ऊर्जा का अनुभव हुआ। लगता है कि बाबा का बुलावा आया, तभी यहां आना संभव हो पाया।” उन्होंने यह भी बताया कि उनकी पत्नी की भी यहां आने की इच्छा थी, जो अब पूरी हो गई।

    आस्था और भक्ति का अनूठा संगम
    महाकाल मंदिर में भस्म आरती का धार्मिक महत्व बेहद खास है, जिसमें देश-विदेश से श्रद्धालु शामिल होते हैं। ऐसे में प्रसिद्ध हस्तियों की मौजूदगी इस आध्यात्मिक आयोजन को और भी खास बना देती है।

  • महाकाल में अब हर आरती सशुल्क! 250 रुपए पास पर मचा बवाल, भक्त बोले- आस्था पर क्यों लगा ‘टिकट’?

    महाकाल में अब हर आरती सशुल्क! 250 रुपए पास पर मचा बवाल, भक्त बोले- आस्था पर क्यों लगा ‘टिकट’?


    उज्जैन  उज्जैन स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में संध्या और शयन आरती के लिए 250 रुपए शुल्क लागू किए जाने के फैसले ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। अब श्रद्धालु इन आरतियों में शामिल तभी हो सकेंगे, जब उनके पास निर्धारित पास होगा। मंदिर समिति ने यह व्यवस्था भस्म आरती की तर्ज पर शुरू की है। समिति का अनुमान है कि इससे प्रतिदिन लगभग 6 लाख रुपए की अतिरिक्त आय होगी, यानी हर महीने करीब 1.80 करोड़ और सालाना लगभग 22 करोड़ रुपए का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा।

    मंदिर प्रशासन का तर्क है कि इस कदम से भीड़ नियंत्रण में मदद मिलेगी और व्यवस्था अधिक सुव्यवस्थित होगी। आरती की बुकिंग पूरी तरह ऑनलाइन कर दी गई है, जिसे पारदर्शिता की दिशा में कदम बताया जा रहा है। हालांकि जिन श्रद्धालुओं को ऑनलाइन प्रक्रिया की जानकारी नहीं है या तकनीकी दिक्कतें आती हैं, उनके लिए केवल एक हेल्प डेस्क की व्यवस्था की गई है।

    दूसरी ओर, कई श्रद्धालुओं ने इस फैसले पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि भस्म आरती पहले से सशुल्क है, लेकिन संध्या और शयन आरती में भी शुल्क लागू करना आस्था पर आर्थिक बोझ डालना है। कुछ भक्तों का आरोप है कि 250 रुपए देने वालों को बेहतर स्थान मिलता है, जबकि अन्य श्रद्धालुओं को सीमित या चलित दर्शन तक ही सीमित कर दिया जाता है। इसे वे “आस्था में भेदभाव” बता रहे हैं।

    महाकाल से जुड़े भक्त मंडलों का कहना है कि वर्षों से नियमित रूप से आरती में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं को अचानक शुल्क व्यवस्था के कारण असुविधा हो रही है। उनका तर्क है कि मंदिर में सभी भक्त समान हैं और आर्थिक आधार पर भेद नहीं होना चाहिए।

    मंदिर के कुछ पुजारियों ने भी कहा है कि शुल्क लागू करने से पहले उनसे औपचारिक परामर्श नहीं लिया गया। उनका सुझाव है कि यदि शुल्क व्यवस्था लागू की गई है, तो कम से कम 25 प्रतिशत स्थान ऐसे श्रद्धालुओं के लिए ऑफलाइन आरक्षित किए जाएं, जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं या ऑनलाइन बुकिंग नहीं कर पाते।

    राजनीतिक स्तर पर भी इस फैसले पर मतभेद सामने आए हैं। नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष ने सवाल उठाया कि जब मंदिर की आय दान और अन्य स्रोतों से पहले ही पर्याप्त है, तो अतिरिक्त शुल्क की आवश्यकता क्यों पड़ी। वहीं महापौर ने कहा कि वे मंदिर समिति के पदेन सदस्य हैं, लेकिन इस निर्णय पर उनसे औपचारिक सहमति या चर्चा नहीं की गई।

    फिलहाल मंदिर प्रशासन अपने निर्णय पर कायम है और इसे व्यवस्था सुधार की दिशा में कदम बता रहा है। दूसरी ओर, श्रद्धालुओं और जनप्रतिनिधियों की नाराजगी के चलते यह मुद्दा लगातार तूल पकड़ रहा है। अब देखना होगा कि विरोध के बाद मंदिर समिति इस व्यवस्था में कोई बदलाव करती है या नहीं।