Tag: Mahakaleshwar Temple

  • उज्जैन महाकालेश्वर में वसुंधरा राजे सिंधिया का दिव्य दर्शन, भक्तों के लिए प्रेरणा का अवसर

    उज्जैन महाकालेश्वर में वसुंधरा राजे सिंधिया का दिव्य दर्शन, भक्तों के लिए प्रेरणा का अवसर


    उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में बुधवार सुबह 10 बजे राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया का भव्य आगमन हुआ। मंदिर पहुंचते ही उन्होंने सबसे पहले नंदी हाल का दौरा किया और नंदी जी के दर्शन कर भगवान महाकाल का जल अर्पित किया। इस दौरान मंदिर में दर्शन व्यवस्था की भी उन्होंने तारीफ की और कहा कि मंदिर में भक्तों को सुलभ और व्यवस्थित दर्शन मिल रहे हैं।

    वसुंधरा राजे ने ज्योतिर्लिंग भगवान श्री महाकालेश्वर के दर्शन के बाद भगवान श्री वीरभद्र जी का पूजन किया। इसके साथ ही उन्होंने मंदिर में होने वाले ध्वज चल समारोह में निकलने वाले ध्वज का भी विधिवत पूजन किया। उनके इस दिव्य दर्शन ने उपस्थित श्रद्धालुओं के चेहरे पर खुशी और श्रद्धा का भाव भर दिया।

    मंदिर प्रबंध समिति की ओर से सहायक प्रशासक मूलचंद जूनवाल एवं सहायक प्रशासक प्रतीक द्विवेदी ने वसुंधरा राजे का स्वागत किया और उन्हें सत्कार प्रदान किया। उन्होंने कहा कि राजस्थान से आने वाले श्रद्धालु भी महाकाल मंदिर में बड़ी संख्या में दर्शन करने आते हैं और भगवान महाकाल का आशीर्वाद हमेशा उनके साथ रहता है।

    इस दौरान वसुंधरा राजे सिंधिया ने कहा कि सुख-दुख में हम सभी भगवान शिव के पास जाते हैं और उनके आशीर्वाद से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। मंदिर की साफ-सफाई, व्यवस्था और भक्तों के लिए सुविधाओं को देखकर उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की।

    भक्तों और पर्यटकों के लिए यह अवसर बेहद खास रहा क्योंकि एक बड़े नेता का भव्य दर्शन होने से मंदिर का वातावरण और भी श्रद्धालु भाव से भर गया। वसुंधरा राजे के दर्शन ने उपस्थित लोगों के दिलों में महाकाल के प्रति श्रद्धा और विश्वास को और मजबूत किया।इस दिव्य अवसर ने उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर में एक अलग ही उत्सव का माहौल बना दिया और श्रद्धालु बाबा महाकाल के आशीर्वाद का अनुभव कर खुश नजर आए।

  • बाबा महाकाल के भस्म आरती दर्शन: श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक अनुभव का अद्भुत अवसर

    बाबा महाकाल के भस्म आरती दर्शन: श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक अनुभव का अद्भुत अवसर


    उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर में बुधवार तड़के भस्म आरती का आयोजन अत्यंत श्रद्धा और वैदिक विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ। मंदिर के कपाट खुलते ही सबसे पहले वीरभद्र जी को प्रणाम कर स्वस्ति वाचन किया गया और पुजारियों ने आज्ञा लेकर चांदी द्वार खोला।

    इसके बाद गर्भगृह के पट खोलकर भगवान महाकाल का श्रृंगार किया गया। पंचामृत से पूजन और कर्पूर आरती के पश्चात भगवान को भांग, चंदन, सिंदूर और आभूषणों से सजाया गया। इस दिव्य श्रृंगार से महाकाल का स्वरूप अत्यंत आकर्षक और अलौकिक दिखाई दिया।

    नंदी हाल में नंदी जी का विधिवत स्नान, ध्यान और पूजन किया गया। तत्पश्चात भगवान महाकाल का जल से अभिषेक और पंचामृत से विशेष पूजा हुई, जिसमें दूध, दही, घी, शक्कर, शहद और फलों के रस का उपयोग किया गया। इसके बाद ड्रायफ्रूट, फल और मिठाई का भोग अर्पित कर भस्म अर्पित किया गया।

    भगवान महाकाल को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुंडमाल, रुद्राक्ष की माला तथा सुगंधित पुष्पों की माला धारण कराई गई। भस्म आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और बाबा महाकाल के दिव्य आशीर्वाद का अनुभव किया। महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भी भस्म अर्पित की गई।

    धार्मिक मान्यता के अनुसार, भस्म अर्पित करने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में अपने भक्तों को दर्शन देते हैं। इस आरती को इसलिए अत्यंत विशेष और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। भस्म आरती का यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक अनुभूति का अद्भुत अवसर प्रदान करता है।

  • महाकाल भस्म आरती 24 फरवरी: उज्जैन में भगवान महाकाल का दिव्य श्रृंगार और भव्य आराधना

    महाकाल भस्म आरती 24 फरवरी: उज्जैन में भगवान महाकाल का दिव्य श्रृंगार और भव्य आराधना


    उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध Mahakaleshwar Temple में फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी और अष्टमी तिथि मंगलवार तड़के 4 बजे मंदिर के कपाट खोले गए। इस अवसर पर महाकाल भस्म आरती का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें भगवान महाकाल का दिव्य श्रृंगार किया गया। मंदिर के पट खुलने के साथ ही पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित सभी देवी-देवताओं का पूजन किया और भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से भगवान का अभिषेक संपन्न हुआ।

    भगवान महाकाल का मनोहारी श्रृंगार चंदन के त्रिपुंड, त्रिनेत्र और भांग के साथ किया गया। भस्म अर्पण से पहले प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम का जल अर्पित किया गया और मंत्रोच्चार के बीच भगवान का ध्यान किया गया। कपूर आरती के बाद ज्योतिर्लिंग को कपड़े से ढंककर भस्म रमाई गई। इसके बाद शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुण्डमाल, रुद्राक्ष की माला और पुष्पों की मालाएं अर्पित की गईं। आभूषणों और सुगंधित पुष्पों से भगवान का अलंकरण किया गया।

    अल सुबह भस्म आरती में सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे और उन्होंने बाबा महाकाल के दर्शन कर पुण्य लाभ कमाया। भक्त नंदी महाराज का दर्शन कर उनके कान के समीप जाकर अपनी मनोकामनाओं के पूर्ण होने का आशीर्वाद प्राप्त करते रहे। इस दौरान पूरा मंदिर बाबा महाकाल की जयकारों से गुंजायमान रहा। भक्तजन मंत्रोच्चार और भक्ति रस में डूबकर भगवान के चरणों में अपने मन की शांति और आशीर्वाद के लिए उपस्थित रहे।

    मंदिर में भक्तों की उपस्थिति ने माहौल को और भी आध्यात्मिक और भव्य बना दिया। पंचामृत अभिषेक और भस्म आरती का अनुभव श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत अद्भुत और प्रेरक रहा। भक्तों ने पूजा में अपनी श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ भाग लिया और महाकाल का दर्शन करके आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया। इस अवसर ने मंदिर और श्रद्धालुओं के बीच गहरा आध्यात्मिक संबंध और भक्ति भाव का अद्वितीय अनुभव प्रस्तुत किया।

    श्री महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती का यह आयोजन न केवल भव्य था बल्कि भक्तों के लिए धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व से परिपूर्ण रहा। भक्तजन यहाँ अपने मनोकामनाओं की पूर्ति, जीवन में सुख-शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्ति के लिए हर वर्ष इस भव्य आरती में भाग लेते हैं।

  • उज्जैन महाकाल मंदिर में टीम इंडिया की जीत के लिए विशेष रुद्राभिषेक

    उज्जैन महाकाल मंदिर में टीम इंडिया की जीत के लिए विशेष रुद्राभिषेक


    उज्जैन । T20 वर्ल्ड कप के रोमांचक मुकाबले से पहले आज भारत-पाकिस्तान के बीच होने वाले मुकाबले को लेकर देशभर में उत्साह चरम पर है। इसी बीच उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में टीम इंडिया की जीत के लिए विशेष पूजा का आयोजन किया गया। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर मंदिर में पुजारियों ने गर्भगृह में विशेष रूप से भगवान महाकाल का पूजन और रुद्राभिषेक किया।

    पूजा के दौरान भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ियों की फोटो बाबा महाकाल के चरणों में रखी गई, और उनके लिए विशेष वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विजय की कामना की गई। पुजारियों ने मंत्रों और आराधना के माध्यम से यह प्रार्थना की कि भारतीय टीम इस महत्त्वपूर्ण मुकाबले में सफलता अर्जित करे और पाकिस्तान पर करारी जीत हासिल हो।

    मंदिर में उपस्थित श्रद्धालुओं ने भी पूजा में भाग लिया और इस अवसर को देशभक्ति और खेल प्रेम का अनूठा संगम बताया। रुद्राभिषेक के दौरान गर्भगृह में चल रही मंत्रोच्चार की गूंज ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया। पुजारियों ने कहा कि इस प्रकार की पूजा से खिलाड़ियों के मनोबल और देशवासियों के उत्साह में वृद्धि होती है।

    भारत-पाकिस्तान मुकाबला हमेशा ही क्रिकेट प्रेमियों के लिए खास होता है, और T20 वर्ल्ड कप जैसे बड़े आयोजन में इसका रोमांच और भी बढ़ जाता है। इसी रोमांच को देखते हुए देशभर के मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चन की जा रही है। उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर भी इस श्रृंखला में शामिल हुआ और भारतीय टीम की विजय के लिए विशेष रूप से भगवान महाकाल की उपासना की गई।

    मंदिर प्रशासन ने बताया कि इस अवसर पर सुरक्षा और व्यवस्थाओं का विशेष ध्यान रखा गया था, ताकि पूजा-संस्कार और खेल प्रेम का यह संगम सुरक्षित और सुचारू रूप से संपन्न हो सके। कई श्रद्धालु और स्थानीय नागरिक भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए और उन्होंने अपने विश्वास और आस्था के साथ टीम इंडिया के लिए विजय की प्रार्थना की।

    क्रिकेट प्रेमियों के लिए यह आयोजन उत्साह और आस्था का प्रतीक बन गया है। उज्जैन महाकाल मंदिर की पावन गलियों में मंत्रों की ध्वनि और भारतीय टीम की जीत के लिए किये जा रहे विशेष रुद्राभिषेक ने माहौल को गरिमा और उमंग से भर दिया।

    इस प्रकार महाकालेश्वर मंदिर ने न केवल धार्मिक महत्व को जीवित रखा, बल्कि खेल और देशभक्ति के प्रति श्रद्धा को भी उजागर किया। आज का दिन भारतीय क्रिकेट प्रेमियों के लिए यादगार बन गया है, और उम्मीद जताई जा रही है कि टीम इंडिया के लिए यह पूजा शुभ और फलदायी सिद्ध होगी।

  • महाकाल का महापर्व 15 फरवरी को 44 घंटे तक नॉनस्टॉप दर्शन और दोपहर 12 बजे अद्भुत भस्म आरती का दिव्य आयोजन

    महाकाल का महापर्व 15 फरवरी को 44 घंटे तक नॉनस्टॉप दर्शन और दोपहर 12 बजे अद्भुत भस्म आरती का दिव्य आयोजन


    उज्जैन का विश्वप्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग श्री महाकालेश्वर मंदिर एक बार फिर महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर भक्ति और आस्था के महासागर में डूबने जा रहा है। इस बार महाशिवरात्रि का पर्व 15 फरवरी 2026 रविवार को मनाया जाएगा और इसे लेकर मंदिर प्रशासन ने विशेष व्यवस्थाएं की हैं। श्रद्धालुओं की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए महाकाल मंदिर के पट लगातार 44 घंटे तक खुले रहेंगे ताकि देश और विदेश से आने वाले लाखों भक्त बिना किसी बाधा के बाबा महाकाल के दर्शन कर सकें।

    6 फरवरी से ही महाकालेश्वर मंदिर में शिव नवरात्रि के साथ भगवान शिव के विवाहोत्सव की शुरुआत हो चुकी है। यह आयोजन 16 फरवरी 2026 तक चलेगा। पूरे मंदिर परिसर को भव्य और आकर्षक सजावट से सजाया जा रहा है। फूलों की विशेष साज सज्जा के साथ महादेव का दिव्य श्रृंगार किया जाएगा। मंदिर प्रशासन द्वारा सुरक्षा व्यवस्था से लेकर श्रद्धालुओं की सुविधा तक हर पहलू पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

    महाशिवरात्रि के दिन 15 फरवरी को सुबह 6 बजे से दर्शन प्रारंभ होंगे और 16 फरवरी की सुबह तक बिना किसी विश्राम के जारी रहेंगे। इन 44 घंटों के दौरान मंदिर नॉनस्टॉप खुला रहेगा। श्रद्धालु दिन और रात किसी भी समय बाबा महाकाल के दर्शन कर सकेंगे। यह व्यवस्था विशेष रूप से उन भक्तों के लिए की गई है जो दूर दराज से उज्जैन पहुंचते हैं और महाशिवरात्रि पर महाकाल के साक्षात दर्शन की अभिलाषा रखते हैं।

    महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव की आराधना का सबसे बड़ा उत्सव माना जाता है। इस दिन चारों प्रहर महादेव की पूजा की जाती है। भक्त व्रत रखते हैं और रात्रि जागरण कर शिव नाम का स्मरण करते हैं। उज्जैन नगरी इस अवसर पर पूरी तरह शिवमय हो जाती है। हर ओर हर हर महादेव के जयघोष गूंजते हैं और वातावरण भक्तिरस से सराबोर हो जाता है।

    इस पर्व का सबसे विशेष और आकर्षक आयोजन 16 फरवरी को दोपहर 12 बजे होने वाली भस्म आरती होगी। महाकालेश्वर मंदिर में दोपहर की भस्म आरती साल में केवल एक बार महाशिवरात्रि पर ही आयोजित की जाती है। यह अद्भुत और दुर्लभ दृश्य देखने के लिए हर वर्ष लाखों श्रद्धालु उमड़ते हैं। भस्म आरती से पहले भगवान महाकाल को फलों फूलों और सप्तधान्य से निर्मित भव्य सेहरा बांधा जाता है। यह श्रृंगार अपने आप में अद्वितीय होता है और श्रद्धालुओं के लिए दिव्य अनुभूति का क्षण बन जाता है।

    महाशिवरात्रि और शिव नवरात्रि का यह भव्य समापन 16 फरवरी को भस्म आरती के साथ होगा। उज्जैन का यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि सांस्कृतिक और आध्यात्मिक रूप से भी अत्यंत खास है। महाकाल की नगरी में इस दौरान उमड़ने वाली आस्था यह दर्शाती है कि भगवान शिव के प्रति श्रद्धा आज भी उतनी ही प्रगाढ़ है जितनी सदियों पहले थी। महाकाल के दरबार में इस महापर्व पर शामिल होना हर शिवभक्त के लिए सौभाग्य की बात मानी जाती है और इस वर्ष 44 घंटे के निरंतर दर्शन ने इस उत्सव को और भी ऐतिहासिक बना दिया है।

  • MP : उज्जैन के प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में गैर-हिन्दुओं की एंट्री पर लगे प्रतिबंध…. जानें क्यों उठी ऐसी मांग ?

    MP : उज्जैन के प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में गैर-हिन्दुओं की एंट्री पर लगे प्रतिबंध…. जानें क्यों उठी ऐसी मांग ?


    उज्जैन।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के उज्जैन (Ujjain) में स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर (Mahakaleshwar Temple) में गैर हिन्दुओं के प्रवेश को लेकर हिन्दू जागरण मंच (Hindu Jagran Manch) और मंदिर पुजारी ने प्रतिबंध लगाने की मांग उठाई है। यह मांग उत्तराखंड (Uttarakhand) के गंगोत्री धाम (Gangotri Dham) में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध की खबर सामने आने के बाद उठी है जिसमे देश के बारह ज्योतिर्लिंग में भी इस तरह की व्यवस्था लागू करने की मांग की जा रही है। इस पूरे मामले में हिन्दू जागरण मंच के पदाधिकारी का कहना है कि पिछले साल 25 के करीब गैर हिन्दू महाकाल मंदिर सहित आसपास से पकड़े गए थे। जो यहां घूमने आए थे। वंही महाकाल मंदिर के वरिष्ठ पुजारी का कहना है कि गैर-हिंदू सनातन धर्म में आस्था रखता है तो उसे मंदिर आने से नहीं रोका जाना चाहिए। उस पर रोक तब लगे जब वह घूमने की मंशा से आया हो।


    इन मंदिरों में भी प्रतिबंध की मांग

    माहेश्वरी ने दावा किया कि साल 2025 में हिंदू जागरण मंच ने महाकाल मंदिर परिसर से एक दर्जन से अधिक युवकों को पकड़ा है, जो लड़कियों के साथ मंदिर परिसर में पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि महाकाल मंदिर क्षेत्र पहले से ही संवेदनशील रहा है, ऐसे में अतिरिक्त सतर्कता जरूरी है। इसी तरह काल भैरव, मंगलनाथ और सांदीपनि आश्रम जैसे शहर के प्रमुख मंदिरों में भी गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।

    देश के उत्तराखंड के गंगोत्री धाम में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध की खबर सामने आने के बाद देश के बारह ज्योतिर्लिंग में भी इस तरह की व्यवस्था लागू करने की मांग जोर पकड़ने लगी है। इसकी शुरुआत उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर से होती नजर आ रही है। उत्तराखंड की चारधाम यात्रा और उससे जुड़े मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध की मांग के बीच अब उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में भी इसी तरह की मांग उठने लगी है। महाकाल मंदिर के वरिष्ठ पुजारी महेश शर्मा और हिंदू जागरण मंच ने केंद्र और राज्य सरकार से महाकाल मंदिर सहित शहर के प्रमुख मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है।

    महाकाल मंदिर के वरिष्ठ पुजारी महेश शर्मा ने कहा कि यदि कोई गैर-हिंदू सनातन धर्म में आस्था रखता है तो उसे मंदिर आने से नहीं रोका जाना चाहिए, लेकिन यदि कोई व्यक्ति केवल घूमने-फिरने या गलत मंशा के साथ मंदिर में प्रवेश करता है और इससे सनातन धर्म की भावनाओं को ठेस पहुंचती है, तो ऐसे लोगों पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।

    हिंदू जागरण मंच के रितेश माहेश्वरी ने कहा कि यह व्यवस्था केवल महाकाल मंदिर तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि देश के सभी 12 ज्योतिर्लिंग में लागू की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि जो लोग घर वापसी कर चुके हैं, उन्हें छोड़कर गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाई जाए।

  • महाकाल मंदिर को 111 किलो पीतल के नंदी का दान, जयपुर के भक्त ने अर्पित की श्रद्धा

    महाकाल मंदिर को 111 किलो पीतल के नंदी का दान, जयपुर के भक्त ने अर्पित की श्रद्धा


    उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में श्रद्धा और आस्था का एक और अनुपम उदाहरण देखने को मिला। जयपुर निवासी भक्त विपिन बंसल ने अपनी मनोकामना पूर्ण होने पर भगवान महाकाल को 111 किलोग्राम वजन के पीतल के नंदी दान स्वरूप अर्पित किए। इस अवसर पर मंदिर समिति द्वारा दानदाता का विधिवत सम्मान किया गया।

    मंदिर प्रशासन से प्राप्त जानकारी के अनुसार, जयपुर निवासी विपिन बंसल ने पुजारी राजेश शर्मा की प्रेरणा से भगवान महाकाल के चरणों में यह विशेष दान अर्पित किया। पीतल से निर्मित इन नंदी प्रतिमाओं का कुल वजन 111 किलोग्राम है, जो अपनी कलात्मकता और भव्यता के कारण विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।दान स्वीकार किए जाने के बाद श्री महाकालेश्वर मंदिर समिति ने दानदाता विपिन बंसल को भगवान महाकाल का प्रसाद और दुपट्टा भेंट कर सम्मानित किया। मंदिर समिति के सहायक प्रशासक मूलचंद जूनवाल ने बताया कि दान में प्राप्त इन सुंदर पीतल के नंदी को मंदिर परिसर में उचित और सुरक्षित स्थान पर विधिवत स्थापित किया जाएगा, ताकि श्रद्धालु इनके दर्शन कर सकें।

    मंदिर समिति के अधिकारियों ने कहा कि महाकालेश्वर मंदिर में देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु अपनी आस्था और विश्वास के अनुसार दान करते हैं। कोई सोने-चांदी के आभूषण अर्पित करता है, तो कोई नकद राशि या धार्मिक सामग्री भेंट करता है। भक्तों का मानना है कि भगवान महाकाल अपने भक्तों की सच्ची मनोकामनाएं अवश्य पूरी करते हैं, और उसी कृतज्ञता स्वरूप वे इस तरह के दान अर्पित करते हैं।जयपुर के भक्त द्वारा किया गया यह दान भी उसी अटूट श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक है। मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं ने भी पीतल के नंदी के दान को सराहा और इसे भगवान महाकाल के प्रति भक्त की गहरी आस्था बताया।

    श्री महाकालेश्वर मंदिर, जो बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है, न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यहां भक्तों द्वारा किए जाने वाले दान और सेवा कार्य भी इसकी महिमा को और बढ़ाते हैं। इस प्रकार के दान मंदिर की परंपराओं और आध्यात्मिक गरिमा को सशक्त बनाते हैं।

  • रविवार की भस्म आरती में राजा स्वरूप में दर्शन दिए भगवान महाकाल, भांग-चंदन व रजत आभूषणों से हुआ दिव्य श्रृंगार

    रविवार की भस्म आरती में राजा स्वरूप में दर्शन दिए भगवान महाकाल, भांग-चंदन व रजत आभूषणों से हुआ दिव्य श्रृंगार


    उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में रविवार तड़के भस्म आरती श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में संपन्न हुई। सुबह चार बजे मंदिर के पट खुलते ही गर्भगृह में विराजित भगवान महाकाल सहित सभी प्रतिमाओं का विधिवत पूजन-अर्चन किया गया। जैसे ही मंदिर परिसर में घंटियों की ध्वनि गूंजी, पूरा वातावरण हर-हर महादेव के जयघोष से भक्तिमय हो उठा।भस्म आरती की शुरुआत जलाभिषेक से हुई। पंडे-पुजारियों ने भगवान महाकाल का पवित्र जल से अभिषेक किया, इसके बाद दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से बने पंचामृत से बाबा का विशेष अभिषेक संपन्न हुआ। प्रथम घंटाल बजाकर हरि ओम के मंत्रोच्चार के साथ भगवान को जल अर्पित किया गया, जिससे गर्भगृह में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हुआ।

    पूजन-अभिषेक के पश्चात भगवान महाकाल का दिव्य श्रृंगार किया गया। बाबा को भांग और चंदन अर्पित कर रजत चंद्र, मुकुट और आभूषणों से राजा स्वरूप में सजाया गया। त्रिशूल, त्रिपुंड और रुद्राक्ष की माला धारण कराकर भगवान को अलौकिक रूप प्रदान किया गया। मस्तक पर रजत चंद्र, भांग-चंदन और गुलाब के पुष्पों से विशेष सजावट की गई। इसके बाद कपूर आरती की गई, जिसकी लौ से पूरा गर्भगृह प्रकाशमान हो गया।आरती के बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढांककर परंपरानुसार भस्म रमाई गई। महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को पवित्र भस्म अर्पित की गई। धार्मिक मान्यता है कि भस्म अर्पण के पश्चात भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इस क्षण को देखने के लिए श्रद्धालु पूरी श्रद्धा और आस्था के साथ मौजूद रहे।

    भस्म अर्पण के पश्चात बाबा महाकाल को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुंडमाल, रुद्राक्ष की माला और सुगंधित पुष्पों की माला अर्पित की गई। गुलाब के सुगंधित फूलों से सजे भगवान को ड्रायफ्रूट, फल, मिष्ठान और विशेष भोग अर्पित किया गया। श्रृंगार और भोग के बाद बाबा का स्वरूप अत्यंत मनोहारी और दिव्य नजर आया।भस्म आरती के दौरान मंदिर परिसर में देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या उपस्थित रही। भक्तों ने नंदी मंडपम, गणेश मंडपम और मंदिर परिसर के विभिन्न स्थानों से बाबा महाकाल के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। कई श्रद्धालु भाव-विभोर होकर भगवान महाकाल की आराधना में लीन दिखाई दिए।

    श्री महाकालेश्वर मंदिर में प्रतिदिन होने वाली भस्म आरती विश्वभर में अपनी विशिष्ट परंपरा और आध्यात्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। रविवार की इस भस्म आरती में राजा स्वरूप में सजे भगवान महाकाल के दर्शन ने श्रद्धालुओं के मन को शांति, श्रद्धा और भक्ति से भर दिया।