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  • 26 जून महाकाल भस्म आरती में त्रिपुंड और चंद्र से सजे भगवान महाकाल, दिव्य श्रृंगार और वैदिक अनुष्ठानों के बीच उमड़ा श्रद्धालुओं की आस्था का सैलाब

    26 जून महाकाल भस्म आरती में त्रिपुंड और चंद्र से सजे भगवान महाकाल, दिव्य श्रृंगार और वैदिक अनुष्ठानों के बीच उमड़ा श्रद्धालुओं की आस्था का सैलाब

    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शुक्रवार को ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि पर प्रातःकालीन भस्म आरती श्रद्धा, परंपरा और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुई। तड़के चार बजे मंदिर के कपाट खुलने के साथ ही धार्मिक अनुष्ठानों का क्रम शुरू हुआ। देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दिव्य स्वरूप के दर्शन कर आध्यात्मिक अनुभूति प्राप्त की। पूरे मंदिर परिसर में शिवभक्ति का वातावरण बना रहा और जयकारों से माहौल भक्तिमय हो उठा।

    मंदिर के पट खुलने के बाद पुजारियों ने गर्भगृह में विराजमान सभी देवी-देवताओं का विधिवत पूजन किया। इसके उपरांत भगवान महाकाल का पवित्र जल से अभिषेक किया गया। धार्मिक परंपरा के अनुसार दूध, दही, घी, शहद और विभिन्न फलों के रस से तैयार पंचामृत से विशेष अभिषेक संपन्न हुआ। इसके बाद भगवान को भांग, चंदन और सुगंधित द्रव्यों का लेप अर्पित किया गया तथा आभूषणों और पुष्पों से उनका आकर्षक श्रृंगार किया गया।

    भस्म आरती की प्रक्रिया के दौरान प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम का जल अर्पित किया गया और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल का ध्यान किया गया। कपूर आरती के पश्चात ज्योतिर्लिंग को परंपरानुसार वस्त्र से आच्छादित कर पवित्र भस्म अर्पित की गई। इसके बाद भगवान को रजत निर्मित शेषनाग मुकुट, रजत की मुण्डमाल, रुद्राक्ष की मालाएं तथा विविध पुष्पमालाएं अर्पित कर अलंकृत किया गया। त्रिपुंड और चंद्र से सुसज्जित भगवान महाकाल का स्वरूप श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना रहा।

    सनातन परंपरा में महाकाल की भस्म आरती का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। मान्यता है कि भस्म अर्पण के उपरांत भगवान महाकाल अपने निराकार स्वरूप से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। यही कारण है कि प्रतिदिन तड़के होने वाली इस आरती में देश-विदेश से श्रद्धालु बड़ी संख्या में शामिल होने के लिए उज्जैन पहुंचते हैं। भस्म आरती को देखने और भगवान के दिव्य स्वरूप के दर्शन करने को श्रद्धालु अत्यंत पुण्यदायी मानते हैं।

    आरती के बाद श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर में स्थित नंदी महाराज के दर्शन भी किए। परंपरा के अनुसार अनेक श्रद्धालु नंदी महाराज के कान के समीप अपनी मनोकामनाएं व्यक्त करते हुए सुख, समृद्धि और कल्याण की प्रार्थना करते दिखाई दिए। पूरे मंदिर परिसर में ‘जय श्री महाकाल’ और ‘हर-हर महादेव’ के उद्घोष लगातार गूंजते रहे, जिससे वातावरण पूरी तरह शिवमय बना रहा।

    श्री महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भारतीय आध्यात्मिक परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक मानी जाती है। प्रतिदिन होने वाला यह आयोजन श्रद्धालुओं की अटूट आस्था, प्राचीन धार्मिक विधियों और सनातन संस्कृति की जीवंत परंपरा को निरंतर आगे बढ़ाता है। शुक्रवार को संपन्न हुई विशेष भस्म आरती में भी श्रद्धा, अनुशासन और भक्ति का ऐसा संगम देखने को मिला जिसने उपस्थित श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा और आत्मिक संतोष का अनुभव कराया।

  • सिंहस्थ-2028 में दुनिया देखेगी सनातन संस्कृति का वैभव: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

    सिंहस्थ-2028 में दुनिया देखेगी सनातन संस्कृति का वैभव: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

    भोपाल । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन के राम घाट पर आयोजित विक्रमोत्सव-2026 और गुड़ी पड़वा सृष्टि आरंभ उत्सव के अवसर पर कहा कि उज्जैन का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व विश्व स्तर पर अनोखा है। उन्होंने कहा कि आगामी सिंहस्थ-2028 में पूरी दुनिया सनातन संस्कृति के वैभव को देखेगी।

    उज्जैन का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व
    उज्जैन प्राचीन अवंतिका और उज्जयिनी के नाम से विख्यात 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक श्री महाकालेश्वर का धाम है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उज्जैन का पावन शिप्रा तट और यह नगरी जीवन में आस्था और आध्यात्मिक संबल देती है। उन्होंने महान सम्राट विक्रमादित्य की गौरवगाथा का उल्लेख किया जिनके 32 पुतलियों वाले सिंहासन नवरत्नों की विद्वता और वीरता आज भी प्रेरणा का स्रोत हैं।

    सिंहस्थ-2028 की तैयारियाँ

    उज्जैन के सभी मार्गों को फोरलेन और सिक्सलेन बनाया जा रहा है। मां शिप्रा के तट पर लगभग 30 किलोमीटर लंबे नवीन घाट विकसित किए जा रहे हैं। शहर को व्यापार और उद्योग के दृष्टिकोण से भी विकसित किया जा रहा है विक्रम उद्योगपुरी मेडिकल डिवाइस पार्क 12,500 एकड़ का औद्योगिक क्षेत्र और अतिरिक्त 5,000 एकड़ में नया पार्क तैयार। नए एयरपोर्ट और हेलीकॉप्टर सेवाओं से तीर्थाटन को नई ऊंचाई देने का प्रयास।

    सृष्टि आरंभ उत्सव की भव्य झलक

    कार्यक्रम की शुरुआत सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और पार्श्व गायक श्री विशाल मिश्रा के संगीत से हुई। भव्य ड्रोन-शो लेजर-शो और आतिशबाजी ने शिप्रा तट के आकाश को रोशनी और रंगों से भर दिया। उत्सव ने आस्था संस्कृति और आधुनिक तकनीक का अनूठा संगम प्रस्तुत किया।

    साहित्य और ज्ञान का विमोचन

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ का विक्रम पंचांग 2083 संस्कृति संचालनालय का कला पंचांग विभिन्न ग्रंथों और मोनोग्राफ का विमोचन किया। विमोचित ग्रंथों में अष्टावक्र गीता नारद गीता ब्राह्मण गीता गर्भ गीता समेत महर्षियों और वीर भारत न्यास के विभिन्न ग्रंथ शामिल थे।

    राष्ट्रीय और स्थानीय गणमान्यजन उपस्थित

    राज्यसभा सांसद श्री बालयोगी उमेशनाथ जी महाराज विधायक श्री अनिल जैन कालूहेड़ा महापौर श्री मुकेश टटवाल नगर निगम सभापति श्रीमती कलावती यादव शोधपीठ निदेशक डॉ. श्रीराम तिवारी और अन्य गणमान्यजन। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन को धार्मिक सांस्कृतिक औद्योगिक और वैश्विक पहचान का केंद्र बनाने की दिशा में उठाए गए कदमों का विवरण दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि सिंहस्थ-2028 में दुनिया सनातन संस्कृति के वैभव और उज्जैन की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को देखेगी।

  • जयवर्धन सिंह ने महाकाल की भस्म आरती में लिया आशीर्वाद, नंदी हॉल से किए दर्शन

    जयवर्धन सिंह ने महाकाल की भस्म आरती में लिया आशीर्वाद, नंदी हॉल से किए दर्शन


    उज्जैन । उज्जैन में बुधवार सुबह पूर्व मंत्री और राघोगढ़ के वर्तमान विधायक जयवर्धन सिंह बाबा महाकाल की भस्म आरती में शामिल हुए। उन्होंने देहरी पर प्रणाम कर भगवान महाकालेश्वर का आशीर्वाद लिया और नंदी हॉल में बैठकर भस्म आरती का दर्शन किया।

    इस अवसर पर कई कांग्रेस नेता भी मौजूद थे जिनमें राजेंद्र वशिष्ठ और भरत पोरवाल शामिल थे। जयवर्धन सिंह भस्म आरती के दौरान पूरी तरह से भक्ति में लीन दिखाई दिए।

    आरती के बाद उन्होंने मंदिर परिसर में स्थित भगवान वीरभद्र के दर्शन भी किए। यह धार्मिक आयोजन स्थानीय लोगों और भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है और जयवर्धन सिंह की उपस्थिति ने इसे और भी यादगार बना दिया।

  • नववर्ष 2026: मध्यप्रदेश के प्रमुख मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, नए साल का भव्य आगाज

    नववर्ष 2026: मध्यप्रदेश के प्रमुख मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, नए साल का भव्य आगाज


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश में नववर्ष 2026 की पहली सुबह धार्मिक आस्था और सामाजिक उत्साह के बीच शुरू हुई। 1 जनवरी की सुबह होते ही प्रदेश के प्रमुख मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिली। उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में तड़के चार बजे से दर्शन का सिलसिला शुरू हो गया। सुबह नौ बजे तक लगभग 80 हजार श्रद्धालु भगवान महाकाल के दर्शन कर चुके थे। प्रशासन के अनुसार दिनभर यह संख्या और बढ़ने की संभावना है।महाकाल मंदिर में नए साल के अवसर पर विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं। सुरक्षा के लिए ड्रोन कैमरों से निगरानी रखी गई और श्रद्धालुओं के लिए कतारबद्ध दर्शन की सुविधा सुनिश्चित की गई। इस दौरान महिला क्रिकेट विश्वकप विजेता भारतीय टीम की सदस्य भी मंदिर पहुंचीं और बाबा महाकाल का आशीर्वाद लिया। मंदिर प्रबंधन समिति ने उनका पारंपरिक तरीके से स्वागत किया।

    उज्जैन के अलावा नर्मदा तट पर स्थित ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग में भी सुबह से भक्तों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। मंदिर परिसर को फूलों और रोशनी से सजाया गया और मंगला आरती के बाद दर्शन खोले गए। इसके साथ ही ओरछा के रामराजा मंदिर, मैहर के शारदा देवी मंदिर, नलखेड़ा के मां बगलामुखी धाम और देवास के प्रमुख मंदिरों में भी हजारों भक्त नए साल की पहली सुबह दर्शन के लिए पहुंचे।सीहोर जिले के प्राचीन चिंतामन गणेश मंदिर में ठंड और कोहरे के बावजूद भक्तों का उत्साह कम नहीं हुआ। दमोह जिले के बांदकपुर स्थित जागेश्वरनाथ धाम में भी विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया। गुना के हनुमान टेकरी मंदिर में सुबह की आरती के साथ ही श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा, जहां प्रशासन ने अनुमान लगाया कि एक लाख से अधिक भक्त पहुंचे।

    धार्मिक गतिविधियों के साथ ही प्रदेश के शहरों और पर्यटन स्थलों पर नए साल का जश्न भी देर रात तक चलता रहा। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन में लोग सड़कों, होटलों और सार्वजनिक स्थलों पर एक-दूसरे को नववर्ष की शुभकामनाएं दे रहे थे। मांडू और पचमढ़ी जैसे पर्यटन केंद्रों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम, संगीत और अलाव के माध्यम से नए साल का स्वागत किया गया।जबलपुर के भेड़ाघाट धुआंधार में साल के पहले सूर्योदय को देखने बड़ी संख्या में पर्यटक और स्थानीय लोग पहुंचे। उगते सूर्य के साथ लोगों ने नए साल की शुरुआत को यादगार बनाया। इस प्रकार, मध्यप्रदेश में नववर्ष 2026 की सुबह धार्मिक आस्था और सामाजिक उत्सव दोनों के लिए विशेष रही।

  • उज्जैन में महाकाल मंदिर में फूलों की बड़ी माला पर 1 जनवरी से रोकभक्तों से की गई अपील

    उज्जैन में महाकाल मंदिर में फूलों की बड़ी माला पर 1 जनवरी से रोकभक्तों से की गई अपील


    उज्जैन ।उज्जैन के प्रसिद्ध महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में भगवान महाकाल को फूलों की बड़ी और भारी माला पहनाने पर 1 जनवरी से रोक लगा दी गई है। इस फैसले के बाद भक्तों को मंदिर प्रशासन की ओर से यह निर्देश जारी किए गए हैं कि वे अब महाकाल के लिए अजगर माला जैसी भारी माला न खरीदें। यह कदम मंदिर के संरक्षण और उसके दीर्घकालिक रखरखाव को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।

    महाकालेश्वर मंदिर प्रशासन ने भक्तों को सूचित करने के लिए मंदिर के उद्घोषणा कक्ष से लगातार उद्घोषण करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। मंदिर समिति ने भक्तों से अपील की है कि वे अब केवल फूलों की छोटी माला और सीमित मात्रा में फूल अर्पित करें। यह निर्णय मंदिर के संरक्षात्मक प्रयासों का हिस्सा हैजो मंदिर परिसर के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को सुरक्षित रखने के लिए लिए गए हैं।

    नए नियमों का उद्देश्य और कारण

    यह कदम मंदिर के संरक्षकों और विशेषज्ञों की सलाह पर उठाया गया है। महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के क्षरण को रोकने के लिए कुछ वर्षों पहले ही सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई थीजिसमें मंदिर की संरक्षा और उसे सुरक्षित रखने के उपायों की मांग की गई थी। इस याचिका के बादसुप्रीम कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) और भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआइ) के विशेषज्ञों की एक टीम गठित की थीजिन्होंने मंदिर के संरक्षण पर गहन अध्ययन किया और कई सुझाव दिए।

    विशेषज्ञों ने वर्ष 2019 से महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के संरक्षात्मक पहलुओं की जांच शुरू कीजिसमें यह पाया गया कि भारी फूलों की माला पहनाने से मंदिर की संरचना और विशेष रूप से ज्योतिर्लिंग का क्षरण हो सकता है। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि केवल छोटी माला और सीमित मात्रा में फूल अर्पित किए जाएंताकि मंदिर का संरचनात्मक नुकसान रोका जा सके और उसका ऐतिहासिक महत्व बरकरार रहे।

    महाकालेश्वर मंदिर का ऐतिहासिक महत्व

    महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का भारत के धार्मिक मानचित्र पर अत्यधिक महत्व है। यह मंदिर हिंदू धर्म के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और इसे विशेष रूप से शिव पूजा के लिए अत्यधिक पवित्र स्थान माना जाता है। यहाँ हर दिन लाखों श्रद्धालु पूजा-अर्चना करने आते हैंऔर भगवान महाकाल की उपासना में लीन रहते हैं। इस मंदिर का महत्व न केवल धार्मिक दृष्टि से हैबल्कि यह ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर भी है।

    मंदिर प्रशासन का यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि धार्मिक स्थलों के संरक्षण के लिए इस तरह के उपायों की आवश्यकता समय-समय पर महसूस की जाती रही है। खासकर जब बड़े पैमाने पर श्रद्धालु आते हैंतो छोटे-छोटे उपाय भी मंदिर की संरचना और मूर्तियों के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

    भविष्य में और क्या बदलाव हो सकते हैं

    महाकालेश्वर मंदिर प्रशासन द्वारा यह कदम केवल फूलों की माला पर रोक लगाने तक सीमित नहीं रहेगा। इसके अलावामंदिर प्रशासन द्वारा अन्य संरक्षात्मक उपायों पर भी विचार किया जा रहा है। मंदिर में होने वाली पूजा-पाठ की विधियोंश्रद्धालुओं के आने-जाने के तरीकोंऔर अन्य वस्तुओं के अर्पण की प्रक्रिया पर भी सुधार किए जा सकते हैंताकि मंदिर का संरचनात्मक क्षरण और धार्मिक महत्व दोनों की सुरक्षा की जा सके।

    मंदिर समिति का कहना है कि भविष्य में अन्य उपायों पर भी काम किया जाएगाताकि महाकालेश्वर मंदिर की भव्यता और शुद्धता बनी रहे। इस निर्णय के माध्यम से न केवल धार्मिक स्थलों के संरक्षण के लिए जागरूकता बढ़ेगीबल्कि यह समाज में पर्यावरण और संरक्षा के प्रति एक सकारात्मक संदेश भी देगा। अंतत यह कदम महाकालेश्वर मंदिर के संरक्षण और सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास हैजो धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों को बचाने के लिए आवश्यक है।