Tag: Maharashtra Government

  • गौ तस्करी पर सख्ती: महाराष्ट्र में संगठित गिरोहों पर अब मकोका कानून लागू, प्रशासन को मिले निर्दे

    गौ तस्करी पर सख्ती: महाराष्ट्र में संगठित गिरोहों पर अब मकोका कानून लागू, प्रशासन को मिले निर्दे

    नई दिल्ली। महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में गौ तस्करी, अवैध गोवंश परिवहन और गैरकानूनी बूचड़खानों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा प्रशासनिक निर्णय लिया है। गृह विभाग द्वारा जारी नए सरकारी आदेश के तहत अब संगठित तरीके से संचालित गौ तस्करी गिरोहों और नेटवर्क पर महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून (मकोका) के तहत कार्रवाई की जाएगी। इस फैसले को राज्य में कानून-व्यवस्था और पशु संरक्षण नीति को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    सरकारी आदेश के अनुसार, राज्य की सभी महानगरपालिकाओं, नगरपालिकाओं और ग्राम पंचायतों को अपने-अपने क्षेत्रों में चल रहे अवैध बूचड़खानों की पहचान कर तत्काल प्रभाव से कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। स्थानीय प्रशासन को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है कि किसी भी स्थिति में गैरकानूनी बूचड़खानों का संचालन जारी न रहे और नियमित जांच के माध्यम से इस पर पूरी तरह नियंत्रण रखा जाए।

    इसके साथ ही अवैध रूप से गोवंश के परिवहन पर भी सरकार ने सख्ती बढ़ा दी है। परिवहन विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि ऐसे वाहनों पर मोटर वाहन कानून के तहत कड़ी कार्रवाई की जाए जो नियमों का उल्लंघन करते हुए पशुओं का परिवहन करते पाए जाएं। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस प्रकार की गतिविधियों में शामिल संगठित गिरोहों पर अब सामान्य कानूनी धाराओं के बजाय कठोर संगठित अपराध कानून लगाया जाएगा, जिससे अपराधियों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

    प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने के लिए पुलिस, पशु संवर्धन विभाग और परिवहन विभाग में अलग-अलग नोडल अधिकारी नियुक्त करने के निर्देश भी दिए गए हैं। इन अधिकारियों के संपर्क नंबर सार्वजनिक किए जाएंगे ताकि आम नागरिक आसानी से शिकायत दर्ज करा सकें और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।

    राज्य के सीमावर्ती जिलों में संयुक्त जांच चौकियां स्थापित करने की भी योजना बनाई गई है, जहां पुलिस, परिवहन विभाग, पशु संवर्धन विभाग और स्थानीय प्रशासन की संयुक्त टीमें नियमित जांच अभियान चलाएंगी। इन चौकियों का उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों में अवैध पशु परिवहन और तस्करी के संभावित रास्तों पर निगरानी को मजबूत करना है।

    सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि आपात स्थिति में हेल्पलाइन नंबर 112 पर प्राप्त शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी। जैसे ही गौ तस्करी, अवैध परिवहन या बूचड़खानों से जुड़ी कोई सूचना मिलेगी, संबंधित पुलिस इकाई तत्काल हस्तक्षेप करेगी।

    इस आदेश में संविधान के अनुच्छेद 48 का भी उल्लेख किया गया है, जिसके तहत राज्य से अपेक्षा की जाती है कि वह गायों, बछड़ों और अन्य दुधारू पशुओं की नस्लों के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रभावी कदम उठाए। सरकार ने इस नीति को अपने निर्णय का आधार बताते हुए कहा है कि पशु संरक्षण और कानून व्यवस्था दोनों को मजबूत करना उसकी प्राथमिकता है।

    कुल मिलाकर, महाराष्ट्र सरकार का यह कदम संगठित अपराध और अवैध पशु व्यापार पर कड़ा नियंत्रण स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है, जिससे आने वाले समय में इस प्रकार की गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगने की उम्मीद है।

  • विमानन क्षेत्र को राहत, महाराष्ट्र में एयर टरबाइन फ्यूल पर टैक्स में भारी कटौती..

    विमानन क्षेत्र को राहत, महाराष्ट्र में एयर टरबाइन फ्यूल पर टैक्स में भारी कटौती..

    नई दिल्ली । वैश्विक परिस्थितियों और बढ़ती ईंधन लागत के बीच महाराष्ट्र सरकार ने घरेलू विमानन क्षेत्र को बड़ी राहत देने का फैसला लिया है। राज्य सरकार ने एयर टरबाइन फ्यूल यानी एटीएफ पर लगने वाले वैट को 18 प्रतिशत से घटाकर 7 प्रतिशत कर दिया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय तनाव और पश्चिम एशिया संकट के कारण विमानन उद्योग लगातार दबाव का सामना कर रहा है। सरकार के इस कदम को एयरलाइंस और यात्रियों दोनों के लिए राहत के रूप में देखा जा रहा है।

    राज्य सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार यह नई कर दर 15 मई 2026 से लागू होगी और अगले छह महीनों तक प्रभावी रहेगी। माना जा रहा है कि इससे घरेलू एयरलाइंस के परिचालन खर्च में कमी आएगी, जिससे उड़ानों के संचालन को स्थिर बनाए रखने में मदद मिलेगी। विमानन क्षेत्र में एटीएफ सबसे बड़ा परिचालन खर्च माना जाता है और टैक्स में कमी से कंपनियों को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    पिछले कुछ समय से वैश्विक हालातों के कारण अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में अस्थिरता देखी जा रही है। इसका सीधा असर विमानन ईंधन की कीमतों पर पड़ा है, जिससे एयरलाइंस की लागत लगातार बढ़ रही थी। इसी को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने राज्यों से एटीएफ पर टैक्स कम करने की अपील की थी ताकि घरेलू विमानन सेवाओं को स्थिर बनाए रखा जा सके और यात्रियों पर बढ़ते किराए का बोझ कम किया जा सके।

    महाराष्ट्र सरकार के इस फैसले को विमानन उद्योग के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, क्योंकि राज्य देश के सबसे व्यस्त विमानन केंद्रों में शामिल है। यहां बड़ी संख्या में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का संचालन होता है और हर साल करोड़ों यात्री हवाई यात्रा करते हैं। ऐसे में टैक्स में यह कटौती एयरलाइंस के लिए परिचालन लागत को नियंत्रित करने में सहायक साबित हो सकती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि ईंधन लागत में कमी आने से एयरलाइंस को टिकट कीमतों में अत्यधिक बढ़ोतरी से बचने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा यह कदम विमानन क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने और यात्रियों की संख्या को प्रभावित होने से रोकने के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है।

    विमानन क्षेत्र पिछले कुछ वर्षों में कई वैश्विक और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर चुका है। महामारी के बाद से उद्योग धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में लौट रहा था, लेकिन अंतरराष्ट्रीय तनाव और ईंधन की बढ़ती कीमतों ने एक बार फिर दबाव बढ़ा दिया। ऐसे में सरकारों द्वारा दी जाने वाली कर राहत और नीतिगत सहायता को उद्योग के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि यदि अन्य राज्य भी इसी तरह एटीएफ पर वैट में कटौती करते हैं, तो देशभर में विमानन उद्योग को और अधिक स्थिरता मिल सकती है। इससे यात्रियों को भी लंबे समय तक नियंत्रित किराए और बेहतर सेवाओं का लाभ मिलने की संभावना बढ़ेगी।

  • महाराष्ट्र में 8 साल बाद भी 6.56 लाख किसानों को नहीं मिली ऋण माफीसरकार ने केवल 500 करोड़ का किया प्रावधान

    महाराष्ट्र में 8 साल बाद भी 6.56 लाख किसानों को नहीं मिली ऋण माफीसरकार ने केवल 500 करोड़ का किया प्रावधान


    महाराष्ट्र । महाराष्ट्र सरकार की छत्रपति शिवाजी महाराज शेतकरी सम्मान योजना 2017 में किसानों को ऋण माफी देने के उद्देश्य से बनाई गई थी। इस योजना के तहत 6.56 लाख किसानों को ऋण माफी का लाभ देने का निर्णय लिया गया थालेकिन आठ साल का वक्त गुजरने के बावजूदइन किसानों को यह लाभ प्राप्त नहीं हो सका है। इस मुद्दे ने महाराष्ट्र के किसानों में गहरी नाराजगी पैदा कर दी हैक्योंकि राज्य सरकार ने इस योजना को लागू करने के लिए पर्याप्त राशि का प्रावधान नहीं किया है

    सहकारिता मंत्री बाबासाहेब पाटिल ने विधानसभा में एक लिखित उत्तर में स्वीकार किया कि इस योजना के तहत पात्र किसानों को ऋण माफी देने के लिए 5,975.51 करोड़ रुपये की आवश्यकता हैलेकिन सरकार ने केवल 500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या सरकार किसानों के साथ मजाक कर रही है और क्या न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन किया जा रहा है?

    किसान नेताओं ने इस मुद्दे को लेकर सरकार की आलोचना की है। शिवसेना ठाकरे गुट के नेता भास्कर जाधव ने विधानसभा में इस मामले को उठाया और बताया कि उच्च न्यायालय ने भी सरकार को इस योजना को लागू करने का आदेश दिया थाफिर भी सरकार ने इसकी पूरी आवश्यकता का सिर्फ एक छोटा सा हिस्सा आवंटित किया है।

    इतना ही नहींमुख्यमंत्री सहायता निधि में अक्टूबर महीने में 1 अरब रुपये जमा हुएलेकिन अतिवृष्टि से प्रभावित किसानों को सिर्फ 75 हजार रुपये की सहायता दी गई। इस मामले को लेकर भी RTI कार्यकर्ता वैभव कोकाट ने जांच की और पाया कि सरकार की मदद किसानों तक नहीं पहुंच पा रही है। इसके अलावाई-केवाईसी की प्रक्रिया पूरी न होनेबैंक और आधार जानकारी में अंतरऔर पोर्टल पर तकनीकी त्रुटियों के कारण5 लाख 42 हजार 141 किसानों को घोषित मदद नहीं मिल पाई है।

    राज्य सरकार द्वारा घोषित 31,628 करोड़ रुपये की सहायता पैकेज भी केवल दिखावे का हिस्सा बनकर रह गया हैक्योंकि योजना की क्रियान्वयन में गंभीर समस्याएं आई हैं। इस सब के बीचकिसानों को प्राकृतिक आपदाओंफसल नुकसान और कर्ज जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा हैऔर वे उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार जल्द ही इस मामले में ठोस और प्रभावी कदम उठाएगी।

    किसानों के हित में यदि सरकार जल्द से जल्द ऋण माफी योजना को लागू नहीं करती और उनकी परेशानियों को ध्यान में नहीं रखतीतो यह राज्य में किसानों के बीच और अधिक असंतोष पैदा कर सकता है। इस बीचयह सवाल भी खड़ा हो रहा है कि आखिरकार किसानों को अपनी मेहनत का क्या फल मिलेगाजब सरकार द्वारा घोषित योजनाओं का लाभ उन्हें समय पर नहीं मिल रहा है।