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  • अजित पवार के भतीजे ने विमान हादसे पर जताई साजिश की आशंका, विशेषज्ञ जांच की मांग

    अजित पवार के भतीजे ने विमान हादसे पर जताई साजिश की आशंका, विशेषज्ञ जांच की मांग


    नई दिल्ली। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के पिछले महीने हुए विमान हादसे को लेकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के विधायक रोहित पवार ने मंगलवार को बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि यह दुर्घटना केवल सामान्य हादसा नहीं था, बल्कि इसमें साजिश की संभावना है। रोहित ने विशेषज्ञ एजेंसियों द्वारा विस्तृत जांच कराने की मांग की है।

    हालांकि, NCP के संस्थापक शरद पवार ने इस त्रासदी को सिर्फ दुर्घटना करार दिया और साजिश की आशंका को खारिज किया था। रोहित पवार ने विमान के पायलट कैप्टन सुमित कपूर के पिछले रिकॉर्ड पर भी सवाल उठाए और बताया कि उनके अतीत में शराब के सेवन के लिए तीन साल का निलंबन रहा है।

    विशेषज्ञ जांच की मांग

    रोहित पवार ने कहा कि सीआईडी इस मामले की पूरी जांच करने के लिए पर्याप्त नहीं है। उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से जांच कराने की मांग की, जिनमें राष्ट्रीय परिवहन सुरक्षा बोर्ड नागरिक विमानन सुरक्षा जांच एवं विश्लेषण ब्यूरो और ब्रिटेन की विमान दुर्घटना जांच शाखा शामिल हैं।

    VSR कंपनी पर शक

    रोहित ने दुर्घटनाग्रस्त लियरजेट विमान की मालिकाना कंपनी VSR पर संदेह जताया। उन्होंने बताया कि 2023 में इस कंपनी के एक विमान हादसे की रिपोर्ट सामने आ चुकी है, बावजूद इसके यह कंपनी उच्चस्तरीय नेताओं द्वारा उपयोग की जा रही है और डीजीसीए अधिकारियों पर इसका प्रभाव है। उन्होंने कंपनी, बुकिंग एजेंसी एरो और पायलट सुमित कपूर पर गंभीर सवाल उठाए।

    महज एक्सीडेंट नहीं, साजिश की संभावना

    रोहित पवार ने कहा, हमें नहीं लगता कि यह केवल दुर्घटना थी। इसमें साजिश की बू है। उन्होंने विमान के अंतिम क्षणों और लैंडिंग के समय लिए गए निर्णयों पर सवाल उठाए। रोहित ने पूछा कि क्या ट्रांसपोंडर जानबूझकर बंद किया गया, पायलटों के आने में देरी क्यों हुई और रनवे 11 पर लैंडिंग क्यों की गई।

    रोहित पवार ने कहा कि पूरा महाराष्ट्र इस बात पर सवाल उठा रहा है कि क्या अजित पवार का विमान क्रैश एक्सीडेंट था या किसी साजिश का हिस्सा। उन्होंने बताया कि यह हादसा अभी भी एक बुरे सपने जैसा महसूस होता है और कई लोग अजित पवार के जीवित होने की आशा जता रहे हैं।

  • देवेंद्र फडणवीस का आधी रात दिल्ली दौरा, महाराष्ट्र में सियासी हलचल तेज, बड़े बदलाव के आसार

    देवेंद्र फडणवीस का आधी रात दिल्ली दौरा, महाराष्ट्र में सियासी हलचल तेज, बड़े बदलाव के आसार


    नई दिल्ली । महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के देर रात अचानक दिल्ली दौरे ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। सोमवार, 9 फरवरी की रात बीजेपी के शीर्ष नेताओं से बंद कमरे में मुलाकात करने के बाद फडणवीस तड़के मुंबई लौट आए। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस दौरे से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी NCP के विलय और सहयोगी दलों के साथ नई बातचीत की अटकलें तेज हो गई हैं।

    सुनेत्रा पवार का भी दिल्ली दौरा

    फडणवीस के बाद महाराष्ट्र की उप मुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार मंगलवार, 10 फरवरी को शाम 6:45 बजे दिल्ली के लिए रवाना होंगी। उनके साथ NCP प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे और राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल भी मौजूद रहेंगे। वे बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात करेंगी। उनकी यह यात्रा शिष्टाचार भेंट के रूप में बताई जा रही है, लेकिन राजनीतिक संकेत भी इसे जोड़कर देखे जा रहे हैं।

    जिला परिषद और पंचायत चुनावों में बीजेपी का दबदबा
    महाराष्ट्र की हालिया जिला परिषद 12 और पंचायत समिति 125 चुनावों में बीजेपी ने सबसे मजबूत प्रदर्शन किया। जिला परिषद की 731 सीटों में से बीजेपी ने 233 और पंचायत समितियों की 1462 सीटों में सबसे ज्यादा कब्जा जमाया। अजित पवार गुट की NCP को जिला परिषद में 167 और शिंदे गुट की शिवसेना को 162 सीटें मिलीं। महायुति गठबंधन ने कुल 562 सीटें जीतकर अपनी पकड़ मजबूत की। दूसरी ओर, कांग्रेस 56, शरद पवार गुट 26 और उद्धव ठाकरे गुट 43 सीटें ही जीत सका। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि फडणवीस का दिल्ली दौरा और सुनेत्रा पवार की यात्रा आगामी महीनों में महाराष्ट्र की राजनीति में बड़े बदलावों की शुरुआत हो सकती है।

  • NCP के दोनों गुटों के विलय की चर्चा पर अब संजय राउत का बड़ा बयान, यह पूरी तरह से…

    NCP के दोनों गुटों के विलय की चर्चा पर अब संजय राउत का बड़ा बयान, यह पूरी तरह से…


    नई दिल्ली । महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार के निधन के बाद NCP के दोनों गुटों विलय को लेकर सियासी गलियारों में लगातार चर्चा जारी है. शरद पवार गुट के नेता लगातार दावा कर रहे हैं कि विलय को लेकर बातचीत अंतिम दौर में था जबकि दिवंगत अजित पवार गुट के नेता इन दावों को खारिज कर रहे हैं. इस बीच शिवसेनायूबीटीके सांसद संजय राउत ने इस पर एक बार फिर अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि एनसीपी के विलय का मामला उन्हीं पर छोड़ देना चाहिए.संजय राउत ने गुरुवार05 फरवरीको मुंबई में मीडिया से बात करते हुए एनसीपी के दोनों गुटों के विलय की अटकलों पर कहा अगर यह उनकी समस्या है तो उन्हें इसका समाधान निकालना चाहिए लेकिन एनसीपी के प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे शरद पवार को सलाह दे रहे हैं यह बहुत दिलचस्प है.

    NCP गुटों के बीच चर्चाओं से हमारा कोई लेना-देना नहीं

    शिवसेनायूबीटीके मुखपत्र सामना के मुताबिक संजय राउत ने आगे कहा जिन लोगों को शरद पवार राजनीति में लाए जिन्हें पद प्रतिष्ठा और ताकत दी वही अब शरद पवार को सलाह दे रहे हैं कि उन्हें क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए लेकिन यह पूरी तरह से उनका आंतरिक मामला है. शरद पवार और अजित पवार गुट के नेताओं के बीच चल रही चर्चाओं से हमारा कोई लेना-देना नहीं है. हमारा ध्यान इंडिया अलायंस और महाविकास अघाड़ी पर फोकस है.

    28 जनवरी को विमान हादसे में अजित पवार का निधन
    बता दें कि 28 जनवरी को बारामती में हुए एक विमान हादसे में महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम और एनसीपी के अध्यक्ष अजित पवार का निधन हो गया. इस घटना के तीन दिन बाद 31 जनवरी को उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली. उन्हें पार्टी के विधायक दल का नेता भी चुना गया. वहीं अध्यक्ष पद को लेकर एनसीपी में मंथन जारी है.

  • महाराष्ट्र की राजनीति में नई समस्या… अजित पवार के निधन के बाद उलझी NCP के दोनों गुटों के विलय की गुत्थी?

    महाराष्ट्र की राजनीति में नई समस्या… अजित पवार के निधन के बाद उलझी NCP के दोनों गुटों के विलय की गुत्थी?


    मुंबई।
    महाराष्ट्र (Maharashtra) की राजनीति में एक नई असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई है, जब अजित पवार (Ajit Pawar) के आकस्मिक निधन ने एनसीपी (NCP) के दोनों गुटों के विलय की संभावना को लेकर विरोधाभासी दावे सामने ला दिए हैं। शरद पवार (Sharad Pawar) ने यह संकेत दिया कि अजित पवार के साथ विलय को लेकर उच्चस्तरीय बातचीत चल रही थी, जबकि देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) और अजित पवार के गुट के अन्य वरिष्ठ नेता इस दावे से पूरी तरह इनकार कर रहे हैं।

    मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इन दावों की वैधता पर सवाल उठाया और कहा कि अजित पवार उनके साथ लगातार संपर्क में थे, लेकिन उन्होंने कभी भी विलय का विषय उठाया नहीं। फडणवीस ने यह भी कहा कि महायुति सरकार में अजित पवार की स्थिति मजबूत थी, और ऐसे में पार्टी छोड़ने या विलय की संभावना बेहद कम थी।

    एनसीपी (अजित पवार गुट) के वरिष्ठ नेता प्रफुल पटेल, सुनील तटकरे और छगन भुजबल ने भी यह स्पष्ट किया कि 2023 में एनडीए में शामिल होने का फैसला अंतिम था और शरद पवार के साथ विलय पर कोई बातचीत नहीं हुई थी। तटकरे ने यह भी कहा कि अब एनसीपी (अजित पवार गुट) एनडीए का हिस्सा है, और शरद पवार पर निर्भर है कि वे अपनी पार्टी को सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल करना चाहते हैं या नहीं।


    शरद पवार का बयान: बंद दरवाजे की बातचीत

    इस बीच, शरद पवार ने इन दावों का जवाब देते हुए कहा कि विलय की चर्चा ‘बंद दरवाजे’ में हुई थी, जिसमें केवल अजित पवार, जयंत पाटिल, सुप्रिया सुले और रोहित पवार शामिल थे। उनका कहना था कि देवेंद्र फडणवीस और सुनील तटकरे जैसे लोग इस मामले से बाहर थे, और इसलिए उनके पास इस पर कोई सही जानकारी नहीं थी। इसके साथ ही, अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी में नेतृत्व संकट की स्थिति उत्पन्न हो गई है। प्रफुल पटेल और पार्टी के अन्य कार्यकर्ता अब सुनेत्रा पवार को उनके दिवंगत पति के राजनीतिक उत्तराधिकारी के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं।


    पार्थ पवार को कम प्रोफाइल रखने की सलाह

    सुनेत्रा पवार को पार्टी के विधायक दल का नेता चुना गया है और उन्होंने उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ भी ली है। शरद पवार ने इस स्थिति के बारे में भी कोई जानकारी नहीं होने की बात कही, जिससे पार्टी और परिवार के बीच तनाव और गहरा गया। खासतौर पर तब, जब भाजपा ने पार्थ पवार को हालिया विवादों के मद्देनजर लो प्रोफाइल बनाए रखने की सलाह दी। यह चर्चा भी उठी कि एनसीपी पार्थ पवार को राज्यसभा भेजने पर विचार कर रही है, क्योंकि यह सीट उनकी मां सुनेत्रा के उपमुख्यमंत्री बनने के बाद खाली हुई है।

    वहीं, पार्थ पवार और शरद पवार एक बंद कमरे में अपने पिता के मेमोरियल पर चर्चा कर रहे थे, जबकि उनकी मां सुनेत्रा पवार राज्य की उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले रही थीं। इस समय, भाजपा शरद पवार गुट को महायुति में शामिल करने को लेकर संकोच कर रही है, जिससे दोनों गुटों के विलय की संभावनाओं पर ब्रेक लग रहा है।


    एनसीपी का भविष्य और राजनीति की जटिलता

    इस स्थिति के चलते एनसीपी का भविष्य अब अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है, क्योंकि दोनों गुट सत्ता पर नियंत्रण के लिए संघर्ष कर रहे हैं। भाजपा पर्दे के पीछे राज्य के बदलते राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर रही है, जिससे एनसीपी के दोनों गुटों के विलय की प्रक्रिया रुक गई है।

  • महाराष्ट्र: NCP के अध्यक्ष पद को लेकर मतभेद! 'पटेल' का विरोध, इस नाम की चर्चा तेज

    महाराष्ट्र: NCP के अध्यक्ष पद को लेकर मतभेद! 'पटेल' का विरोध, इस नाम की चर्चा तेज


    नई दिल्ली । उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में तेजी से घटनाक्रम बदल रहे हैं. उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार को राष्ट्रवादी कांग्रेस के विधायक दल का नेता सर्वसम्मति से चुना गया. इसके बाद सुनेत्रा पवार ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली. राष्ट्रवादी कांग्रेस के दिवंगत नेता अजित पवार पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी थे. अब उनके बाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर किसे नियुक्त किया जाएगा, इस पर चर्चा शुरू हो गई है. पिछले दो दिनों से राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए प्रफुल्ल पटेल का नाम सामने आ रहा था. कुछ खबरों में दावा किया गया कि उनकी नियुक्ति हो चुकी है. लेकिन इसके बाद पार्टी में विवाद खड़ा हो गया और प्रफुल्ल पटेल को खुद इन खबरों का खंडन करना पड़ा.

    प्रफुल्ल पटेल के नाम की थी चर्चा

    प्रफुल्ल पटेल राष्ट्रवादी कांग्रेस के राज्यसभा सांसद और राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष हैं. अजित पवार के बाद उनके अध्यक्ष बनने की चर्चा थी, लेकिन पार्टी के अंदर विरोध के बाद पटेल ने इस पर विराम लगाने की कोशिश की. इसके बावजूद पार्टी की कमान किसके हाथ जाएगी, इस पर नेताओं में मतभेद साफ नजर आ रहे हैं.

    राष्ट्रीय अध्यक्ष सिर्फ सुनेत्रा पवार होंगी- कोकाटे

    राष्ट्रवादी कांग्रेस के विधायक और पूर्व मंत्री माणिकराव कोकाटे ने इस विषय पर स्पष्ट रुख अपनाया. उन्होंने कहा, पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सिर्फ और सिर्फ सुनेत्रा पवार ही होंगी. दूसरा-तीसरा कोई नहीं. दोनों राष्ट्रवादी एक साथ आ जाएं, तब भी अध्यक्ष पद सुनेत्रा वहिनी के पास ही रहेगाजब उनसे पूछा गया कि क्या उनके समर्थन में विधायकों और पदाधिकारियों के हस्ताक्षर जुटाए जा रहे हैं, तो उन्होंने कहा, हस्ताक्षर हों या न हों, अध्यक्ष पद पर सुनेत्रा पवार ही आएंगी. कोकाटे ने यह भी कहा कि सुनेत्रा पवार अजित पवार की राजनीतिक उत्तराधिकारी होंगी और पार्टी की सर्वेसर्वा बनेंगी.

    पदाधिकारियों ने भी पत्र लिखकर मांग की

    अब केवल विधायक ही नहीं, बल्कि पार्टी के प्रमुख पदाधिकारियों ने भी सुनेत्रा पवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने की मांग उठाई है. एनसीपी के सांस्कृतिक सेल के अध्यक्ष बाबासाहेब पाटील के नेतृत्व में 30 से अधिक पदाधिकारियों ने पत्र लिखकर सुनेत्रा पवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त करने की मांग की. यह पत्र वरिष्ठ नेता सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल को भेजा गया है. पत्र में कहा गया, अजित पवार के निधन से पार्टी पर दुख का साया है. ऐसे कठिन समय में पार्टी को मजबूत, संयमी और सभी को साथ रखने वाला नेतृत्व चाहिए. सुनेत्रा पवार ने प्रतिकूल परिस्थितियों में उपमुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभालकर अपनी प्रतिबद्धता सिद्ध की है. उनके अनुभव, निष्ठा और कार्यकर्ताओं के प्रति अपनापन को देखते हुए वे राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए उपयुक्त हैं. इसलिए पार्टी के विभिन्न सेल के पदाधिकारी एकमत से मांग करते हैं कि सुनेत्रा पवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया जाए.

    पटेल के नाम पर विरोध?

    वहीं प्रफुल्ल पटेल ने अध्यक्ष पद की खबरों का खंडन करते हुए कहा, मेरे राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने की खबरें पूरी तरह निराधार हैं. एनसीपी एक लोकतांत्रिक संस्था है. इतना बड़ा निर्णय वरिष्ठ नेतृत्व, विधायकों, पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की भावनाओं का सम्मान करते हुए ही लिया जाएगा. पार्टी की स्थापित प्रक्रिया का पालन किया जाएगा

    प्रफुल्ल पटेल को करना चाहिए सुनेत्रा पवार का समर्थन

    इसके बाद सुनेत्रा पवार को अध्यक्ष बनाने की मांग और तेज हो गई. पार्टी प्रवक्ता सूरज चव्हाण ने कहा, राष्ट्रीय अध्यक्ष पद अजित दादा का था. उनके बाद यह जिम्मेदारी सुनेत्रा पवार को ही स्वीकार करनी चाहिए. प्रफुल्ल पटेल का विरोध नहीं है, लेकिन उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सुनेत्रा पवार का समर्थन करते हुए काम करना चाहिए.

    एनसीपी अध्यक्ष को लेकर विपक्ष ने क्या कहा?
    वहीं इस मुद्दे पर विपक्षी दलों ने भी टिप्पणी की.मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे ने कहा, राष्ट्रवादी कांग्रेस मराठी मिट्टी से उभरा हुआ संघर्षशील कार्यकर्ताओं का पक्ष है. ऐसे पक्ष का अध्यक्ष मराठी चेहरा होना चाहिए. वहपाटील हो सकता है, लेकिनपटेल नहीं. उनके अलावा शिवसेना उद्धव गुट सांसद संजय राउत ने भी कहा कि पार्टी की कमान प्रफुल्ल पटेल के हाथ में नहीं जानी चाहिए.
  • सुनेत्रा पवार को काबिलियत के आधार पर…', जल्दबाजी में डिप्टी CM बनाए जाने पर उद्धव गुट का तंज!

    सुनेत्रा पवार को काबिलियत के आधार पर…', जल्दबाजी में डिप्टी CM बनाए जाने पर उद्धव गुट का तंज!


    नई दिल्ली। महाराष्ट्र में इन दिनों बारामती प्लेन हादसे में डिप्टी सीएम अजित पवार के निधन के बाद से ही राजनीतिक उथल-पुथल मची हुई है. सुनेत्रा पवार के उपमुख्यमंत्री पद के शपथ लेने के बाद से ही विपक्ष लगातार हमलावर हैखासकर शिवसेना यूबीटी. शिवसेना UBT ने तो अपने मुखपत्र सामना के संपादकीय में BJP और NCP अजित पवार गुट पर तीखा हमला बोल दिया है. सामना के मुताबिकयह शपथ समारोह जल्दबाजी और राजनीतिक साजिश का नतीजा है. लेख में अमित शाह और देवेंद्र फडणवीस को इसके पीछे की मुख्य ताकत बताया गया है. UBT के माउथपीस ने मौजूदा राजनीतिक हालात को घटिया राजनीति बताया है.

    शोक में था महाराष्ट्रदिखाई गई जल्दबाजी- सामना
    सामना के संपादकीय में कहा गया है कि डिप्टी CM शपथ समारोह महाराष्ट्र के राजनीतिक और सांस्कृतिक मूल्यों के खिलाफ है. आरोप लगाया गया कि अजित पवार के निधन के बाद राज्य शोक में थालेकिन इसी दौरान सत्ता की जल्दबाजी दिखाई गईUBT का कहना है कि यह फैसला संवेदनशीलता और परंपराओं की अनदेखी का उदाहरण है.लेख में यह भी कहा गया कि BJP हिंदुत्व और संस्कृति की बात करती हैलेकिन व्यवहार में अपने ही रीति-रिवाजों का पालन नहीं करती. शोक काल में सत्ता प्रदर्शन को सामना ने बेहद घटिया राजनीति करार दिया है.

    सुनेत्रा पवार की नियुक्ति पर सवाल
    संपादकीय में सुनेत्रा पवार को उप मुख्यमंत्री बनाए जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं. सामना का कहना है कि यह पद उनकी व्यक्तिगत काबिलियत या राजनीतिक अनुभव के आधार पर नहीं दिया गया. लेख में तंज कसते हुए लिखा गया है कि यह नियुक्ति पूरी तरह सत्ता संतुलन और अंदरूनी जोड़तोड़ का परिणाम है. सामना के अनुसारशरद पवार और सुप्रिया सुले की प्रतिक्रियाएं इस बात की ओर इशारा करती हैं कि परिवार को भी इस शपथ की पूर्व जानकारी नहीं थी. इससे पूरे घटनाक्रम पर संदेह और गहराता है.

    NCP की स्थिति और फडणवीस का नियंत्रण
    UBT के मुखपत्र ने NCP की मौजूदा हालत पर तीखी टिप्पणी की है. संपादकीय में कहा गया है कि पार्टी की नाव का कैप्टन अब नहीं रहा और फिलहाल इसे देवेंद्र फडणवीस नियंत्रित कर रहे हैं. सामना का आरोप है कि NCP अब स्वतंत्र राजनीतिक इकाई नहीं रह गई है.लेख में यह भी कहा गया है कि पार्टी के भीतर नेतृत्व और दिशा को लेकर भ्रम है. खुले तौर पर यह संकेत दिया गया कि सत्ता में बने रहने के लिए समझौते किए जा रहे हैंजिससे पार्टी की वैचारिक पहचान कमजोर हो रही है.

    बेहद घटिया राजनीति’ का आरोप
    संपादकीय के अंत में UBT ने मौजूदा राजनीतिक हालात को बेहद घटिया राजनीति बताया है. सामना का कहना है कि सत्ता की लालसा ने संवेदनशीलतासंस्कृति और नैतिकता को पीछे छोड़ दिया है. यह स्थिति महाराष्ट्र की राजनीति के लिए खतरनाक संकेत है.UBT ने इशारों में कहा है कि आने वाले समय में इसका राजनीतिक असर दिखेगा. सामना के मुताबिकयह पूरा घटनाक्रम केवल पद और नियंत्रण की लड़ाई हैजिसमें जनता और मूल्यों को दरकिनार कर दिया गया है.
  • NCP महाराष्ट्र में BJP-नेतृत्व वाले NDA के साथ बनी रहेगी, विलय की अटकलों को सुनील तटकरे ने किया खारिज

    NCP महाराष्ट्र में BJP-नेतृत्व वाले NDA के साथ बनी रहेगी, विलय की अटकलों को सुनील तटकरे ने किया खारिज


    नई दिल्ली। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी NCP की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष और लोकसभा सांसद सुनील तटकरे ने स्पष्ट किया है कि उनकी पार्टी भाजपा नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन NDA का हिस्सा बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि संगठन दिवंगत अजित पवार की विचारधारा और मार्ग पर आगे बढ़ेगा।

    विलय की अफवाहों पर प्रतिक्रिया

    हाल ही में यह दावा किया गया था कि NCP और शरद पवार की राकांपा का विलय 12 फरवरी को घोषित किया जाएगा। इस पर तटकरे ने कहा, “हमारा रुख स्पष्ट है। पार्टी और अजित दादा की विचारधारा को हम आगे बढ़ाएंगे। राजग के साथ हमारा सहयोग कायम रहेगा।” उन्होंने जोर देकर कहा कि अजित पवार की सहमति के बिना कोई राजनीतिक निर्णय नहीं लिया गया।

    शपथ और पार्टी संबंध
    तटकरे ने सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाने की जल्दबाजी पर कहा कि यह निर्णय महाराष्ट्र के हित में और राकांपा को मजबूत करने के लिए लिया गया। उन्होंने भाजपा की प्रशंसा करते हुए कहा कि गठबंधन में हमेशा सम्मानजनक व्यवहार रहा है।

    अस्थियों का अंतिम संस्कार और आगे की प्रक्रिया
    सुनील तटकरे ने बताया कि अजित पवार की अस्थियों को राज्य के सभी जिलों में ले जाकर श्रद्धांजलि दी जाएगी। वहीं, राकांपा के वरिष्ठ नेता माणिकराव कोकाटे ने कहा कि विलय या आगे की राजनीतिक दिशा का फैसला सुनेत्रा पवार करेंगी और उनका निर्णय पार्टी में सभी के लिए बाध्यकारी होगा।

  • सुनेत्रा पवार को डिप्टी CM बनाने की मांग तेज, NCP नेताओं की CM फडणवीस से मुलाकात

    सुनेत्रा पवार को डिप्टी CM बनाने की मांग तेज, NCP नेताओं की CM फडणवीस से मुलाकात


    मुंबई । महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। उनके पद, विभागों और एनसीपी की भविष्य की दिशा को लेकर चर्चाएं जोर पकड़ रही हैं। पार्टी के भीतर यह मांग उठने लगी है कि उपमुख्यमंत्री का पद अजित पवार की पत्नी और राज्यसभा सांसद सुनेत्रा पवार को सौंपा जाए।

    इन्हीं मुद्दों को लेकर शुक्रवार को एनसीपी के वरिष्ठ नेता मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मिलने उनके आधिकारिक निवास वर्षा बंगले पहुंचे। इस प्रतिनिधिमंडल में प्रफुल्ल पटेल, छगन भुजबल और सुनील तटकरे शामिल थे। यह बैठक करीब आधे घंटे तक चली, जिसमें विभागों के बंटवारे और राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चा हुई।

    पोर्टफोलियो और नेतृत्व को लेकर मंथन

    अजित पवार के पास सरकार में वित्त, आबकारी और खेल जैसे अहम विभागों की जिम्मेदारी थी, साथ ही वे उपमुख्यमंत्री भी थे। अब पार्टी के भीतर इस बात पर गहन विचार चल रहा है कि इन विभागों की जिम्मेदारी किसे दी जाए और एनसीपी की राष्ट्रीय कमान किसके हाथ में होगी। पार्टी सूत्रों का दावा है कि एनसीपी के दोनों गुटों के संभावित विलय को लेकर जो बातचीत अजित पवार कर रहे थे, उस पर अंतिम निर्णय शरद पवार ही लेंगे।

    प्रफुल्ल पटेल का बयान: जल्द हो फैसला

    मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद प्रफुल्ल पटेल ने मीडिया से कहा कि पार्टी ने जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए जल्द निर्णय लेने की जरूरत पर जोर दिया है। उन्होंने कहा, “अजित पवार के विभागों और एनसीपी से जुड़े फैसलों को लेकर अनिश्चितता नहीं होनी चाहिए। मौजूदा हालात में कार्यकर्ताओं और जनता की भावनाओं को देखते हुए देरी ठीक नहीं है।”

    NCP में टूट और मौजूदा राजनीतिक समीकरण

    शरद पवार द्वारा 1999 में स्थापित राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी जुलाई 2023 में दो हिस्सों में बंट गई थी, जब अजित पवार महायुति सरकार में शामिल हुए थे। उस समय उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाया गया था। नवंबर 2024 के विधानसभा चुनावों के बाद देवेंद्र फडणवीस के मुख्यमंत्री बनने पर भी अजित पवार उसी पद पर बने रहे। पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर दोनों गुटों के बीच कानूनी संघर्ष हुआ, जिसमें अजित पवार के गुट को मूल एनसीपी नाम और ‘एनालॉग अलार्म घड़ी’ चुनाव चिह्न मिला। फिलहाल अजित पवार का गुट सत्तारूढ़ महायुति का हिस्सा है, जबकि शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी एसपी विपक्षी महा विकास अघाड़ी में शामिल है।

    आगे क्या?

    अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी जाती है, विभागों का बंटवारा किस दिशा में होता है और एनसीपी के दोनों गुटों के भविष्य को लेकर शरद पवार क्या फैसला लेते हैं। आने वाले दिन महाराष्ट्र की राजनीति के लिए अहम साबित हो सकते हैं।

  • महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा मोड़ टला एनसीपी के दोनों गुटों के विलय की तैयारी अंतिम दौर में थी, 8 फरवरी को होना था ऐलान

    महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा मोड़ टला एनसीपी के दोनों गुटों के विलय की तैयारी अंतिम दौर में थी, 8 फरवरी को होना था ऐलान


    नई दिल्ली। महाराष्ट्र की राजनीति में फरवरी के पहले हफ्ते एक बड़ा सियासी उलटफेर देखने को मिल सकता था। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के दोनों धड़ोंशरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी (एसपी) और उपमुख्यमंत्री अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपीके एक होने की पटकथा लगभग तैयार थी। पार्टी सूत्रों के मुताबिक 8 फरवरी 2026 को औपचारिक विलय की घोषणा होनी थी, लेकिन कुछ राजनीतिक और रणनीतिक कारणों से यह प्रक्रिया फिलहाल टाल दी गई।

    बीते कुछ महीनों से चाचा-भतीजे की बढ़ती नजदीकियां महाराष्ट्र की राजनीति में चर्चा का केंद्र बनी रहीं। पुणे और बारामती क्षेत्र में स्थानीय निकाय स्तर पर दोनों गुटों के नेताओं का साथ आना इस बात का संकेत माना जा रहा था कि पार्टी में आई टूट स्थायी नहीं रहेगी। इसी बीच बंद कमरे में हुई कई बैठकों ने सियासी हलचल और तेज कर दी थी।

    जिला परिषद चुनाव के बाद ऐलान की रणनीति
    एक रिपोर्ट के अनुसार, विलय को लेकर बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी थी। जिला परिषद और नगर निकाय चुनावों के बाद औपचारिक घोषणा की रणनीति तय की गई थी। दोनों पक्ष इस बात पर सहमत थे कि बंटा हुआ जनाधार आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों में नुकसान पहुंचा सकता है।

    एनसीपी (एसपी) के वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल ने पुष्टि की कि दोनों गुटों के बीच लगातार संवाद चल रहा था। उन्होंने बताया कि 16 जनवरी को उनके आवास पर अहम बैठक हुई, जिसमें चुनाव साथ लड़ने और संगठनात्मक ढांचे को लेकर अंतिम दौर की चर्चा की गई। इसके अगले दिन 17 जनवरी को शरद पवार के आवास पर भी भविष्य की रणनीति पर मंथन हुआ।

    कैबिनेट फेरबदल पर भी हुई चर्चा
    एनसीपी (एसपी) नेता शशिकांत शिंदे ने भी स्वीकार किया कि विलय को लेकर बातचीत नई नहीं है और दोनों पक्षों की सहमति से आगे बढ़ रही थी। उनके अनुसार, अजित पवार पहले ही संकेत दे चुके थे कि स्थानीय निकाय चुनावों के बाद दोनों गुट साथ आ सकते हैं। सूत्रों का कहना है कि इस दौरान संभावित कैबिनेट फेरबदल और नए चेहरों को सरकार में शामिल करने पर भी अनौपचारिक चर्चा हुई थी।

    दोनों गुटों ने हाल के पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम चुनावों में गठबंधन किया था और 5 फरवरी को होने वाले जिला परिषद चुनावों में भी साथ लड़ने की योजना बनाई गई थी।

    दुर्घटना के बाद रुकी प्रक्रिया
    28 जनवरी 2026 को विमान दुर्घटना में अजित पवार के असामयिक निधन के बाद विलय की आधिकारिक घोषणा पर फिलहाल विराम लग गया। हालांकि शिंदे ने संकेत दिए हैं कि प्रक्रिया पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है और अनुकूल परिस्थितियों में इसे आगे बढ़ाया जा सकता है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह विलय होता, तो यह शरद पवार की पार्टी के लिए सरकार में शामिल होने की दिशा में बड़ा कदम साबित होता। फिलहाल एनसीपी (एसपी) महाविकास अघाड़ी का हिस्सा है, जबकि अजित पवार की एनसीपी सत्तारूढ़ महायुति में शामिल रही है। ऐसे में दोनों गुटों का एक होना राज्य की सत्ता राजनीति के समीकरण पूरी तरह बदल सकता था।

    भले ही 8 फरवरी को होने वाला संभावित ऐलान टल गया हो, लेकिन एनसीपी के दोनों गुटों के एक होने की कहानी अभी खत्म नहीं हुई है। आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति में इससे जुड़ा कोई बड़ा फैसला फिर सुर्खियों में आ सकता है।

  • टिकट नहीं मिला तो बगावत की हद पार: NCP विधायक के दफ्तर के बाहर बेटे ने किया पेशाब महाराष्ट्र की सियासत गरमाई

    टिकट नहीं मिला तो बगावत की हद पार: NCP विधायक के दफ्तर के बाहर बेटे ने किया पेशाब महाराष्ट्र की सियासत गरमाई

    नई दिल्ली। महाराष्ट्र में जिला परिषद चुनावों से पहले राजनीतिक सरगर्मियां अपने चरम पर हैं लेकिन लातूर जिले से सामने आई एक घटना ने सियासी विरोध की मर्यादा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के विधायक और पूर्व मंत्री संजय बंसोडे के स्थानीय कार्यालय के बाहर एक युवक द्वारा खुलेआम पेशाब किए जाने की घटना ने न सिर्फ राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी बल्कि आम जनता को भी हैरान कर दिया।
    यह पूरी घटना बुधवार 21 जनवरी की बताई जा रही है जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।मामला लातूर जिले की उदगीर तहसील का है जहां आगामी जिला परिषद चुनावों के लिए टिकट बंटवारे को लेकर पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आ गया। जानकारी के अनुसार उदगीर के निदेबन क्षेत्र से जुड़े सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता मधुकर एकुरकेकर को 5 फरवरी को होने वाले जिला परिषद चुनाव के लिए NCP की ओर से उम्मीदवार नहीं बनाया गया। इसी फैसले से नाराज होकर उनके बेटे नितिन एकुरकेकर ने विरोध का ऐसा तरीका अपनाया जिसने सबको चौंका दिया।

    बताया जा रहा है कि नितिन एकुरकेकर ने पार्टी नेतृत्व पर अन्याय का आरोप लगाते हुए NCP विधायक संजय बंसोडे के कार्यालय के बाहर पेशाब कर अपना आक्रोश जाहिर किया। यही नहीं उन्होंने इस पूरी घटना का वीडियो खुद अपने सोशल मीडिया हैंडल पर शेयर किया। कुछ ही घंटों में यह वीडियो वायरल हो गया और देखते ही देखते राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक हंगामा मच गया। हालांकि विवाद बढ़ता देख नितिन ने बाद में यह वीडियो अपने अकाउंट से हटा लिया।

    वीडियो सामने आने के बाद लोगों की प्रतिक्रियाएं भी दो धड़ों में बंटी नजर आईं। बड़ी संख्या में लोगों ने इसे लोकतांत्रिक विरोध के नाम पर की गई शर्मनाक और अशोभनीय हरकत बताया। उनका कहना है कि राजनीतिक असहमति जताने के कई संवैधानिक और सभ्य तरीके होते हैं लेकिन इस तरह का कृत्य न केवल व्यक्ति विशेष बल्कि पूरे राजनीतिक तंत्र की छवि को नुकसान पहुंचाता है। वहीं कुछ लोगों ने इसे पार्टी नेतृत्व के प्रति कार्यकर्ताओं की हताशा और गुस्से का प्रतीक बताया हालांकि उन्होंने भी इस तरीके का समर्थन नहीं किया।

    इस घटना ने NCP को भी असहज स्थिति में ला खड़ा किया है। पार्टी के भीतर टिकट वितरण को लेकर असंतोष की बातें पहले भी सामने आती रही हैं लेकिन इस तरह का सार्वजनिक और आपत्तिजनक विरोध पहली बार देखने को मिला है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चुनाव से पहले इस तरह की घटनाएं दलों के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती हैं और मतदाताओं के बीच गलत संदेश भी भेजती हैं।कुल मिलाकर लातूर की यह घटना महाराष्ट्र की राजनीति में बढ़ते तनाव गुटबाजी और असंतोष की तस्वीर पेश करती है। सवाल यह है कि क्या राजनीतिक दल समय रहते अपने कार्यकर्ताओं की नाराजगी को संभाल पाएंगे या फिर आने वाले दिनों में सियासत का तापमान और चढ़ता नजर आएगा।