NCP गुटों के बीच चर्चाओं से हमारा कोई लेना-देना नहीं
28 जनवरी को विमान हादसे में अजित पवार का निधन

NCP गुटों के बीच चर्चाओं से हमारा कोई लेना-देना नहीं

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इन दावों की वैधता पर सवाल उठाया और कहा कि अजित पवार उनके साथ लगातार संपर्क में थे, लेकिन उन्होंने कभी भी विलय का विषय उठाया नहीं। फडणवीस ने यह भी कहा कि महायुति सरकार में अजित पवार की स्थिति मजबूत थी, और ऐसे में पार्टी छोड़ने या विलय की संभावना बेहद कम थी।
एनसीपी (अजित पवार गुट) के वरिष्ठ नेता प्रफुल पटेल, सुनील तटकरे और छगन भुजबल ने भी यह स्पष्ट किया कि 2023 में एनडीए में शामिल होने का फैसला अंतिम था और शरद पवार के साथ विलय पर कोई बातचीत नहीं हुई थी। तटकरे ने यह भी कहा कि अब एनसीपी (अजित पवार गुट) एनडीए का हिस्सा है, और शरद पवार पर निर्भर है कि वे अपनी पार्टी को सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल करना चाहते हैं या नहीं।
शरद पवार का बयान: बंद दरवाजे की बातचीत
इस बीच, शरद पवार ने इन दावों का जवाब देते हुए कहा कि विलय की चर्चा ‘बंद दरवाजे’ में हुई थी, जिसमें केवल अजित पवार, जयंत पाटिल, सुप्रिया सुले और रोहित पवार शामिल थे। उनका कहना था कि देवेंद्र फडणवीस और सुनील तटकरे जैसे लोग इस मामले से बाहर थे, और इसलिए उनके पास इस पर कोई सही जानकारी नहीं थी। इसके साथ ही, अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी में नेतृत्व संकट की स्थिति उत्पन्न हो गई है। प्रफुल पटेल और पार्टी के अन्य कार्यकर्ता अब सुनेत्रा पवार को उनके दिवंगत पति के राजनीतिक उत्तराधिकारी के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं।
पार्थ पवार को कम प्रोफाइल रखने की सलाह
सुनेत्रा पवार को पार्टी के विधायक दल का नेता चुना गया है और उन्होंने उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ भी ली है। शरद पवार ने इस स्थिति के बारे में भी कोई जानकारी नहीं होने की बात कही, जिससे पार्टी और परिवार के बीच तनाव और गहरा गया। खासतौर पर तब, जब भाजपा ने पार्थ पवार को हालिया विवादों के मद्देनजर लो प्रोफाइल बनाए रखने की सलाह दी। यह चर्चा भी उठी कि एनसीपी पार्थ पवार को राज्यसभा भेजने पर विचार कर रही है, क्योंकि यह सीट उनकी मां सुनेत्रा के उपमुख्यमंत्री बनने के बाद खाली हुई है।
वहीं, पार्थ पवार और शरद पवार एक बंद कमरे में अपने पिता के मेमोरियल पर चर्चा कर रहे थे, जबकि उनकी मां सुनेत्रा पवार राज्य की उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले रही थीं। इस समय, भाजपा शरद पवार गुट को महायुति में शामिल करने को लेकर संकोच कर रही है, जिससे दोनों गुटों के विलय की संभावनाओं पर ब्रेक लग रहा है।
एनसीपी का भविष्य और राजनीति की जटिलता
इस स्थिति के चलते एनसीपी का भविष्य अब अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है, क्योंकि दोनों गुट सत्ता पर नियंत्रण के लिए संघर्ष कर रहे हैं। भाजपा पर्दे के पीछे राज्य के बदलते राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर रही है, जिससे एनसीपी के दोनों गुटों के विलय की प्रक्रिया रुक गई है।

प्रफुल्ल पटेल के नाम की थी चर्चा
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पटेल के नाम पर विरोध?
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विलय की अफवाहों पर प्रतिक्रिया

इन्हीं मुद्दों को लेकर शुक्रवार को एनसीपी के वरिष्ठ नेता मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मिलने उनके आधिकारिक निवास वर्षा बंगले पहुंचे। इस प्रतिनिधिमंडल में प्रफुल्ल पटेल, छगन भुजबल और सुनील तटकरे शामिल थे। यह बैठक करीब आधे घंटे तक चली, जिसमें विभागों के बंटवारे और राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चा हुई।
पोर्टफोलियो और नेतृत्व को लेकर मंथन
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NCP में टूट और मौजूदा राजनीतिक समीकरण
आगे क्या?

बीते कुछ महीनों से चाचा-भतीजे की बढ़ती नजदीकियां महाराष्ट्र की राजनीति में चर्चा का केंद्र बनी रहीं। पुणे और बारामती क्षेत्र में स्थानीय निकाय स्तर पर दोनों गुटों के नेताओं का साथ आना इस बात का संकेत माना जा रहा था कि पार्टी में आई टूट स्थायी नहीं रहेगी। इसी बीच बंद कमरे में हुई कई बैठकों ने सियासी हलचल और तेज कर दी थी।
जिला परिषद चुनाव के बाद ऐलान की रणनीति
एक रिपोर्ट के अनुसार, विलय को लेकर बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी थी। जिला परिषद और नगर निकाय चुनावों के बाद औपचारिक घोषणा की रणनीति तय की गई थी। दोनों पक्ष इस बात पर सहमत थे कि बंटा हुआ जनाधार आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों में नुकसान पहुंचा सकता है।
एनसीपी (एसपी) के वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल ने पुष्टि की कि दोनों गुटों के बीच लगातार संवाद चल रहा था। उन्होंने बताया कि 16 जनवरी को उनके आवास पर अहम बैठक हुई, जिसमें चुनाव साथ लड़ने और संगठनात्मक ढांचे को लेकर अंतिम दौर की चर्चा की गई। इसके अगले दिन 17 जनवरी को शरद पवार के आवास पर भी भविष्य की रणनीति पर मंथन हुआ।
कैबिनेट फेरबदल पर भी हुई चर्चा
एनसीपी (एसपी) नेता शशिकांत शिंदे ने भी स्वीकार किया कि विलय को लेकर बातचीत नई नहीं है और दोनों पक्षों की सहमति से आगे बढ़ रही थी। उनके अनुसार, अजित पवार पहले ही संकेत दे चुके थे कि स्थानीय निकाय चुनावों के बाद दोनों गुट साथ आ सकते हैं। सूत्रों का कहना है कि इस दौरान संभावित कैबिनेट फेरबदल और नए चेहरों को सरकार में शामिल करने पर भी अनौपचारिक चर्चा हुई थी।
दोनों गुटों ने हाल के पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम चुनावों में गठबंधन किया था और 5 फरवरी को होने वाले जिला परिषद चुनावों में भी साथ लड़ने की योजना बनाई गई थी।
दुर्घटना के बाद रुकी प्रक्रिया
28 जनवरी 2026 को विमान दुर्घटना में अजित पवार के असामयिक निधन के बाद विलय की आधिकारिक घोषणा पर फिलहाल विराम लग गया। हालांकि शिंदे ने संकेत दिए हैं कि प्रक्रिया पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है और अनुकूल परिस्थितियों में इसे आगे बढ़ाया जा सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह विलय होता, तो यह शरद पवार की पार्टी के लिए सरकार में शामिल होने की दिशा में बड़ा कदम साबित होता। फिलहाल एनसीपी (एसपी) महाविकास अघाड़ी का हिस्सा है, जबकि अजित पवार की एनसीपी सत्तारूढ़ महायुति में शामिल रही है। ऐसे में दोनों गुटों का एक होना राज्य की सत्ता राजनीति के समीकरण पूरी तरह बदल सकता था।
भले ही 8 फरवरी को होने वाला संभावित ऐलान टल गया हो, लेकिन एनसीपी के दोनों गुटों के एक होने की कहानी अभी खत्म नहीं हुई है। आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति में इससे जुड़ा कोई बड़ा फैसला फिर सुर्खियों में आ सकता है।


नितेश राणे के बयान पर प्रतिक्रिया
नितेश राणे के हिंदुत्व और राष्ट्रवाद पर दिए गए बयान के बाद यह विवाद उठ खड़ा है। राणे ने कहा था कि वह हिंदुत्व और राष्ट्रवाद के लिए काम कर रहे हैं और किसी भी प्रकार के धर्मनिरपेक्षता या ध्रुवीकरण के लिए नहीं। उन्होंने विशेष रूप से रामनवमी या हनुमान जयंती जैसे धार्मिक जुलूसों में पत्थरबाजी की घटनाओं पर सवाल उठाए थे। उनका कहना था कि जब ईद और मुहर्रम शांतिपूर्वक मनाए जा सकते हैं, तो रामनवमी या हनुमान जयंती पर ऐसा क्यों होता है। राणे ने कहा था कि उनका किसी खास समुदाय से विरोध नहीं है, लेकिन जो लोग जिहाद करना चाहते हैं, उनके खिलाफ उनकी आपत्ति स्वाभाविक है। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग वंदे मातरम नहीं बोलते उन्हें पाकिस्तान भेजा जाना चाहिए।
अबू आजमी की कड़ी प्रतिक्रिया
सपा नेता की भाषा पर सवाल