Tag: Mahashivratri 2026

  • अद्भुत जटोली धाम: दक्षिण-द्रविड़ शैली का वह चमत्कार, जहाँ स्फटिक शिवलिंग के दर्शन मात्र से बदल जाती है किस्मत!

    अद्भुत जटोली धाम: दक्षिण-द्रविड़ शैली का वह चमत्कार, जहाँ स्फटिक शिवलिंग के दर्शन मात्र से बदल जाती है किस्मत!


    नई दिल्‍ली । हिमाचल प्रदेश की देवभूमि अपनी दिव्यता और अलौकिक शक्ति के लिए विश्वविख्यात है, लेकिन सोलन जिले में स्थित जटोली शिव मंदिरकी आभा कुछ अलग ही है। इसे न केवल उत्तर भारत, बल्कि एशिया का सबसे ऊँचा शिव मंदिरहोने का गौरव प्राप्त है। लगभग 122 फुट ऊँचे इस मंदिर की भव्यता ऐसी है कि बादलों के बीच घिरा इसका शिखर किसी अलौकिक लोक का आभास कराता है। मान्यता है कि पौराणिक काल में स्वयं भगवान शिव ने यहाँ प्रवास किया था और उनके चरण पड़ने से यह भूमि आज भी आध्यात्मिक ऊर्जा से लबरेज है।

    इस मंदिर का निर्माण किसी चमत्कार से कम नहीं है। दक्षिण-द्रविड़ शैलीमें निर्मित इस मंदिर का कार्य वर्ष 1974 में शुरू हुआ था और इसे पूर्ण होने में लगभग 39 सालका लंबा समय लगा। मंदिर की वास्तुकला में तीन पिरामिड नुमा संरचनाएं हैं, जो इसकी भव्यता में चार चाँद लगाती हैं। मंदिर के गर्भ गृह में स्थापित स्फटिक मणि का शिवलिंगश्रद्धालुओं के आकर्षण का मुख्य केंद्र है। कहा जाता है कि इस पवित्र शिवलिंग के दर्शन मात्र से ही भक्त के जीवन के सारे कष्ट मिट जाते हैं और उसे नई दिशा प्राप्त होती है।

    महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर जटोली मंदिर का सौंदर्य और भी निखर जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, आज ही के दिन महादेव और माता पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था। वहीं, एक अन्य कथा समुद्र मंथन से जुड़ी है, जिसमें सृष्टि को बचाने के लिए शिवजी ने हलाहल विषका पान किया था। विष के प्रभाव को शांत करने के लिए देवताओं ने जिस रात जागरण और भक्ति की, वही परंपरा आज महाशिवरात्रिके रूप में मनाई जाती है। जटोली में इस रात का जागरण विशेष फलदायी माना जाता है, क्योंकि यहाँ की शांत वादियाँ और शुद्ध वातावरण भक्त को सीधे शिव तत्व से जोड़ देते हैं।

    यहाँ आने वाले श्रद्धालु केवल आस्था के वशीभूत होकर ही नहीं आते, बल्कि मंदिर की बेमिसाल नक्काशी और शांत प्राकृतिक परिवेश उन्हें मंत्रमुग्ध कर देता है। जटोली मंदिर केवल पत्थरों का ढांचा नहीं, बल्कि भक्तों की श्रद्धा और शिल्पकारों के अथक परिश्रम का प्रतीक है। महाशिवरात्रि पर यहाँ हजारों की संख्या में पहुँचने वाले श्रद्धालु जलाभिषेक कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। यदि आप भी महादेव के अनन्य भक्त हैं, तो बादलों की गोद में बसे इस दिव्य शिवालय के दर्शन आपके जीवन का एक अविस्मरणीय अनुभव साबित हो सकते हैं।

  • श्रद्धा और आस्था का केंद्र: सिद्धेश्वरनाथ महादेव मंदिर में महाशिवरात्रि पर उमड़ेगा आस्था का सागर

    श्रद्धा और आस्था का केंद्र: सिद्धेश्वरनाथ महादेव मंदिर में महाशिवरात्रि पर उमड़ेगा आस्था का सागर


    बैतूल जिले के भैंसदेही में पूर्णा नदी के पवित्र तट पर स्थित प्राचीन सिद्धेश्वरनाथ महादेव मंदिर महाशिवरात्रि के अवसर पर श्रद्धा और उत्साह का केंद्र बन चुका है। सदियों पुराना यह मंदिर अपनी रहस्यमयी किंवदंती, अधूरे निर्माण और चमत्कारी मान्यताओं के कारण दूर-दूर तक प्रसिद्ध है।

    मंदिर समिति और स्थानीय प्रशासन ने महाशिवरात्रि की तैयारियों में जुटकर इंतजाम किए हैं। विशेष रूप से सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण, पूजा व्यवस्था और यातायात प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। अनुमान है कि इस वर्ष हजारों श्रद्धालु यहां पहुँचेंगे और रात्रि में शिवलिंग के दर्शन और अभिषेक के लिए उपस्थित होंगे।

    स्थानीय लोगों और पुरातन मान्यताओं के अनुसार यह मंदिर कभी अधूरा रह गया था और इसे पूर्ण करने का श्राप माना जाता है। इसके बावजूद श्रद्धालुओं का विश्वास चमत्कारी घटनाओं और आस्था के कारण अटूट है। महाशिवरात्रि के दौरान यहां सुबह से ही भक्तों की कतारें लग जाती हैं। रात्रि जागरण, विधि-विधान से पूजा और बेलपत्र, धतूरा, दूध, घी और जल से अभिषेक की परंपरा यहां निभाई जाती है।

    मंदिर के पुजारी ने बताया कि इस वर्ष भी श्रद्धालुओं की संख्या अधिक रहने की संभावना है। प्रशासन और मंदिर समिति ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं और आसपास के क्षेत्रों में आपातकालीन सेवाओं और मेडिकल सुविधा की व्यवस्था की गई है। स्थानीय व्यवसायियों और पर्यटन विभाग ने भी इस अवसर को देखते हुए तैयारियां पूरी कर रखी हैं।

    स्थानीय आस्था और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस मंदिर में शिवलिंग पर विधिपूर्वक अभिषेक करने से मनोकामनाओं की पूर्ति, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति होती है। महाशिवरात्रि के अवसर पर श्रद्धालु रातभर जागरण करते हैं और संपूर्ण दिन व्रत रखते हैं।

    सिद्धेश्वरनाथ महादेव मंदिर की विशिष्टता न केवल इसके ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व में है बल्कि इसके आसपास के प्राकृतिक वातावरण और पूर्णा नदी के पवित्र तट की शांति में भी निहित है। यही कारण है कि श्रद्धालु यहां दूर-दूर से आते हैं और मंदिर की इस अनोखी आस्था और अनुभव का हिस्सा बनते हैं।

  • महाकाल का महापर्व 15 फरवरी को 44 घंटे तक नॉनस्टॉप दर्शन और दोपहर 12 बजे अद्भुत भस्म आरती का दिव्य आयोजन

    महाकाल का महापर्व 15 फरवरी को 44 घंटे तक नॉनस्टॉप दर्शन और दोपहर 12 बजे अद्भुत भस्म आरती का दिव्य आयोजन


    उज्जैन का विश्वप्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग श्री महाकालेश्वर मंदिर एक बार फिर महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर भक्ति और आस्था के महासागर में डूबने जा रहा है। इस बार महाशिवरात्रि का पर्व 15 फरवरी 2026 रविवार को मनाया जाएगा और इसे लेकर मंदिर प्रशासन ने विशेष व्यवस्थाएं की हैं। श्रद्धालुओं की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए महाकाल मंदिर के पट लगातार 44 घंटे तक खुले रहेंगे ताकि देश और विदेश से आने वाले लाखों भक्त बिना किसी बाधा के बाबा महाकाल के दर्शन कर सकें।

    6 फरवरी से ही महाकालेश्वर मंदिर में शिव नवरात्रि के साथ भगवान शिव के विवाहोत्सव की शुरुआत हो चुकी है। यह आयोजन 16 फरवरी 2026 तक चलेगा। पूरे मंदिर परिसर को भव्य और आकर्षक सजावट से सजाया जा रहा है। फूलों की विशेष साज सज्जा के साथ महादेव का दिव्य श्रृंगार किया जाएगा। मंदिर प्रशासन द्वारा सुरक्षा व्यवस्था से लेकर श्रद्धालुओं की सुविधा तक हर पहलू पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

    महाशिवरात्रि के दिन 15 फरवरी को सुबह 6 बजे से दर्शन प्रारंभ होंगे और 16 फरवरी की सुबह तक बिना किसी विश्राम के जारी रहेंगे। इन 44 घंटों के दौरान मंदिर नॉनस्टॉप खुला रहेगा। श्रद्धालु दिन और रात किसी भी समय बाबा महाकाल के दर्शन कर सकेंगे। यह व्यवस्था विशेष रूप से उन भक्तों के लिए की गई है जो दूर दराज से उज्जैन पहुंचते हैं और महाशिवरात्रि पर महाकाल के साक्षात दर्शन की अभिलाषा रखते हैं।

    महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव की आराधना का सबसे बड़ा उत्सव माना जाता है। इस दिन चारों प्रहर महादेव की पूजा की जाती है। भक्त व्रत रखते हैं और रात्रि जागरण कर शिव नाम का स्मरण करते हैं। उज्जैन नगरी इस अवसर पर पूरी तरह शिवमय हो जाती है। हर ओर हर हर महादेव के जयघोष गूंजते हैं और वातावरण भक्तिरस से सराबोर हो जाता है।

    इस पर्व का सबसे विशेष और आकर्षक आयोजन 16 फरवरी को दोपहर 12 बजे होने वाली भस्म आरती होगी। महाकालेश्वर मंदिर में दोपहर की भस्म आरती साल में केवल एक बार महाशिवरात्रि पर ही आयोजित की जाती है। यह अद्भुत और दुर्लभ दृश्य देखने के लिए हर वर्ष लाखों श्रद्धालु उमड़ते हैं। भस्म आरती से पहले भगवान महाकाल को फलों फूलों और सप्तधान्य से निर्मित भव्य सेहरा बांधा जाता है। यह श्रृंगार अपने आप में अद्वितीय होता है और श्रद्धालुओं के लिए दिव्य अनुभूति का क्षण बन जाता है।

    महाशिवरात्रि और शिव नवरात्रि का यह भव्य समापन 16 फरवरी को भस्म आरती के साथ होगा। उज्जैन का यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि सांस्कृतिक और आध्यात्मिक रूप से भी अत्यंत खास है। महाकाल की नगरी में इस दौरान उमड़ने वाली आस्था यह दर्शाती है कि भगवान शिव के प्रति श्रद्धा आज भी उतनी ही प्रगाढ़ है जितनी सदियों पहले थी। महाकाल के दरबार में इस महापर्व पर शामिल होना हर शिवभक्त के लिए सौभाग्य की बात मानी जाती है और इस वर्ष 44 घंटे के निरंतर दर्शन ने इस उत्सव को और भी ऐतिहासिक बना दिया है।

  • पचमढ़ी चौरागढ़ मेला प्रशासन की चाक-चौबंद व्यवस्था में भक्तों की आस्था का जीवंत दर्शन

    पचमढ़ी चौरागढ़ मेला प्रशासन की चाक-चौबंद व्यवस्था में भक्तों की आस्था का जीवंत दर्शन


    सतपुड़ा की पहाड़ियों में स्थित पचमढ़ी इन दिनों भक्ति और श्रद्धा से सराबोर नजर आ रहा है महाशिवरात्रि के अवसर पर आयोजित चौरागढ़ मेला पूरे जोश के साथ चल रहा है चारों ओर हर-हर महादेव के जयघोष ढोल-नगाड़ों की गूंज और भक्तों की आस्था से वातावरण पूरी तरह शिवमय हो गया है भगवान शिव के दर्शन के लिए देशभर से लाखों श्रद्धालु कठिन पहाड़ी रास्तों को पार कर चौरागढ़ शिखर तक पहुंच रहे हैं

    कठिन और पथरीली चढ़ाई के बावजूद श्रद्धालु अपने कंधों पर भारी त्रिशूल उठाकर मंदिर तक जाते हैं मान्यता है कि मनोकामना पूरी होने पर त्रिशूल चढ़ाया जाता है इसी कारण दिनभर नहीं बल्कि देर रात तक भी भक्तों की कतार शिखर मंदिर तक बनी रहती है भक्त नाचते गाते जयकारे लगाते हुए भोलेनाथ के दर्शन कर रहे हैं पहाड़ी की ठंडी हवा और थकान भी आस्था के आगे कमजोर साबित हो रही है

    मेले में भारी भीड़ के बीच अपनों से बिछड़ने वालों के लिए प्रशासन द्वारा बनाया गया खोया-पाया केंद्र काफी कारगर साबित हो रहा है पब्लिक एड्रेस सिस्टम के जरिए लगातार घोषणाएं की जा रही हैं हाल ही में सिवनी जिले का आठ वर्षीय बालक शौर्य नायक भीड़ में खो गया था जिसे कंट्रोल रूम की सतर्कता से ढूंढकर परिजनों को सौंपा गया इसी तरह छिंदवाड़ा निवासी आशा राठौर को भी उनके भाई से मिलवाया गया

    कलेक्टर सोनिया मीणा के निर्देश पर मेला व्यवस्था पर लगातार नजर रखी जा रही है जिला पंचायत सीईओ हिमांशु जैन और एसडीएम आकिब खान स्वयं पैदल भ्रमण कर व्यवस्थाओं का निरीक्षण कर रहे हैं कलेक्टर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पल-पल की जानकारी लेकर आवश्यक निर्देश दे रही हैं सुरक्षा, यातायात और स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया गया है

    मेले में सुरक्षा के लिए पुलिस बल चौबीस घंटे तैनात है परिवहन विभाग यह सुनिश्चित कर रहा है कि श्रद्धालुओं से अतिरिक्त किराया न वसूला जाए वहीं स्वच्छता व्यवस्था बनाए रखने के लिए सफाई मित्र सुबह से सक्रिय रहते हैं शौचालयों की नियमित सफाई कचरा प्रबंधन और ब्लीचिंग पाउडर के छिड़काव से स्वच्छ वातावरण बनाए रखा जा रहा है

    पचमढ़ी का चौरागढ़ मेला न केवल धार्मिक आयोजन है बल्कि कठिन परिस्थितियों में भी आस्था की जीत का जीवंत उदाहरण बन गया है त्रिशूल लेकर शिखर तक पहुंचते भक्त प्रशासन की सजग व्यवस्था सुरक्षा और स्वच्छता का अनुभव कर आस्था और विश्वास से परिपूर्ण हो रहे हैं इस मेला ने यह दिखा दिया है कि कठिन मार्ग और भारी भीड़ के बीच भी श्रद्धा कभी कमजोर नहीं होती है

  • Mahashivratri 2026: महादेव की विशेष कृपा, मेष, सिंह, तुला और कुंभ राशि के लिए बन रहा दुर्लभ राजयोग

    Mahashivratri 2026: महादेव की विशेष कृपा, मेष, सिंह, तुला और कुंभ राशि के लिए बन रहा दुर्लभ राजयोग


    नई दिल्ली। इस वर्ष महाशिवरात्रि 15 फरवरी 2026 को देशभर में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई जाएगी। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस बार का संयोग विशेष माने जा रहे हैं। चंद्रमा, शनि और गुरु ग्रहों की स्थिति ऐसे बन रही है कि इसे ‘राजयोग’ कहा गया है। इस योग का सकारात्मक प्रभाव मेष, सिंह, तुला और कुंभ राशि के जातकों पर विशेष रूप से रहने की संभावना है।

    राजयोग का प्रभाव कार्यक्षेत्र, व्यवसाय, निवेश और आर्थिक मामलों में उन्नति के संकेत देता है। लंबे समय से रुके हुए कार्य गति पकड़ सकते हैं और नई संभावनाओं के द्वार खुल सकते हैं।

    राशि अनुसार संभावित लाभ
    मेष राशि: करियर में बदलाव और उन्नति का समय है। नौकरी में प्रमोशन, नई जिम्मेदारी या व्यवसाय में विस्तार संभव है। स्टार्टअप या निवेश से जुड़े फैसलों में लाभ मिलने की संभावना है।

    सिंह राशि: कार्यस्थल पर मान-सम्मान और आर्थिक मजबूती बढ़ सकती है। बड़े व्यावसायिक सौदे फाइनल होने और पैतृक संपत्ति मिलने के योग हैं।

    तुला राशि: निवेश और शेयर बाजार, प्रॉपर्टी या साझेदारी व्यवसाय में लाभ की संभावना है। करियर में रुके हुए अवसर फिर से सक्रिय हो सकते हैं।

    कुंभ राशि: आय के नए स्रोत खुल सकते हैं। रचनात्मक क्षेत्रों में पहचान और प्रशंसा मिलने के संकेत हैं। सरकारी परियोजनाओं या अटकी व्यावसायिक योजनाओं में गति आने की संभावना है।

    महाशिवरात्रि के उपाय और पूजा
    ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार, श्रद्धा और नियमपूर्वक पूजा करने से राजयोग का प्रभाव और मजबूत हो सकता है। इसके लिए उपाय इस प्रकार हैं:

    शिवलिंग का अभिषेक: गन्ने के रस या शहद से।

    स्तोत्र पाठ: शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करना शुभ माना गया है।रात्रि जागरण: रातभर भक्ति और ध्यान करना फलदायी है।इन उपायों से न केवल आध्यात्मिक लाभ मिलता है, बल्कि जीवन में सकारात्मक बदलाव और नए अवसर भी खुल सकते हैं।

  • महाशिवरात्रि 2026 पर ग्रहों का महासंयोग: कुंभ राशि में बनेगा चतुर्ग्रही योग, इन 4 राशियों की खुलेगी किस्मत!

    महाशिवरात्रि 2026 पर ग्रहों का महासंयोग: कुंभ राशि में बनेगा चतुर्ग्रही योग, इन 4 राशियों की खुलेगी किस्मत!


    नई दिल्ली । आध्यात्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से साल 2026 की महाशिवरात्रि बेहद खास होने जा रही है। 15 फरवरी 2026 को जब पूरा देश महादेव की भक्ति में लीन होगा, तब अंतरिक्ष में ग्रहों की एक ऐसी हलचल होगी जो कई राशियों के भाग्य को सुनहरे अक्षरों में लिख देगी। इस दिन कुंभ राशि में चार बड़े ग्रहों राहु, बुध, शुक्र और सूर्य का दुर्लभ चतुर्ग्रही योग बनने जा रहा है। वर्तमान में कुंभ में राहु और बुध पहले से ही मौजूद हैं, लेकिन शिवरात्रि के शुभ अवसर तक शुक्र और सूर्य भी इस राशि में प्रवेश कर जाएंगे। ज्योतिषविदों का मानना है कि शनि की स्वामित्व वाली इस राशि में ग्रहों का यह जमावड़ा न केवल भगवान शिव की असीम कृपा दिलाएगा, बल्कि शनि देव के आशीर्वाद से जातकों के जीवन में सकारात्मकता का संचार भी करेगा।

    इस महासंयोग का सबसे शक्तिशाली प्रभाव मेष राशि के जातकों पर देखने को मिलेगा। मेष राशि वालों के लिए यह समय किसी वरदान से कम नहीं है, जहाँ आर्थिक तंगी दूर होगी और धन की आवक के नए रास्ते खुलेंगे। निवेश की पुरानी योजनाएं अब फल देने लगेंगी और जो लोग लंबे समय से बेरोजगारी का सामना कर रहे हैं, उनके लिए रोजगार के बेहतरीन अवसर पैदा होंगे। इसी तरह कन्या राशि के जातकों के लिए भी यह महाशिवरात्रि खुशियों की सौगात लेकर आएगी। पैतृक संपत्ति के अटके हुए मामले सुलझ सकते हैं और नया वाहन या मकान खरीदने का सपना सच हो सकता है। इस दौरान किसी प्रभावशाली व्यक्तित्व से आपकी मुलाकात करियर की दिशा और दशा दोनों बदल सकती है।

    मकर और कुंभ राशि के जातकों के लिए भी यह समय किसी बड़े टर्निंग पॉइंट की तरह होगा। मकर राशि वालों को कोर्ट-कचहरी के पुराने विवादों से मुक्ति मिलेगी और कर्ज का बोझ कम होने से मानसिक शांति का अनुभव होगा। वहीं, चूंकि यह चतुर्ग्रही योग स्वयं कुंभ राशि में ही बन रहा है, इसलिए इस राशि के जातकों के लिए लाभ की संभावनाएं सबसे अधिक हैं। कुंभ राशि के जो जातक नौकरी छोड़कर स्वयं का स्टार्टअप या कारोबार शुरू करना चाहते हैं, उनके लिए यह समय सबसे अनुकूल है। सोने-चांदी में निवेश और संतान पक्ष से मिलने वाली खुशखबरी उनके उत्साह को दोगुना कर देगी। कुल मिलाकर, 15 फरवरी 2026 की यह महाशिवरात्रि आर्थिक सामाजिक और व्यक्तिगत विकास की दृष्टि से इन चार राशियों के लिए एक ऐतिहासिक पड़ाव साबित होने वाली है।

  • Mahashivratri 2026: इस बार महाशिवरात्रि का व्रत रखने वालों को मिलेगा दोगुना फल, बन रहे हैं ये 2 बेहद शुभ संयोग!

    Mahashivratri 2026: इस बार महाशिवरात्रि का व्रत रखने वालों को मिलेगा दोगुना फल, बन रहे हैं ये 2 बेहद शुभ संयोग!


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि का पर्व शिव भक्ति का सबसे बड़ा उत्सव माना जाता है. साल 2026 में महाशिवरात्रि का व्रत 15 फरवरी को रखा जाएगा. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस साल की महाशिवरात्रि बेहद खास होने वाली है क्योंकि इस दिन दो ऐसे दुर्लभ संयोग बन रहे हैं, जो भक्तों की हर मनोकामना पूरी करने की शक्ति रखते हैं.आइए जानते हैं इन शुभ संयोगों के बारे में और क्या है पूजा का सही मुहूर्त.

    महाशिवरात्रि 2026 पर बन रहे हैं ये 2 शुभ संयोग

    सर्वार्थ सिद्धि योग पंचांग के अनुसार, 15 फरवरी को सुबह 07:00 बजे से शाम 07:48 बजे तक 12 घंटे से अधिक सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा. मान्यता है कि इस योग में की गई पूजा, दान या नया कार्य व्यक्ति को हर क्षेत्र में सफलता दिलाता है. अगर आपके काम लंबे समय से अटके हैं, तो इस समय में रुद्राभिषेक करना बहुत ही लाभकारी होगा.

    श्रवण नक्षत्र और शिववास
    शाम 07:48 बजे के बाद श्रवण नक्षत्र शुरू होगा. शास्त्रों में श्रवण नक्षत्र को शिव साधना के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है. साथ ही इस दिन शिववास का संयोग भी है, जो रुद्राभिषेक के फल को कई गुना बढ़ा देता है.

    महाशिवरात्रि की पूजा विधि
    यदि आप इस विशेष दिन पर महादेव को प्रसन्न करना चाहते हैं, तो इस विधि से पूजा करें. ब्रह्म मुहूर्त में स्नान: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण कर व्रत का संकल्प लें. पंचामृत अभिषेक: शिवलिंग पर दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल पंचामृत से अभिषेक करें. प्रिय वस्तुएं अर्पित करें: महादेव को बेलपत्र, धतूरा, शमी के पत्ते, मदार के फूल और भस्म अर्पित करें. मंत्र जाप: पूजा के दौरान ॐ नमः शिवाय मंत्र का निरंतर जाप करते रहें. दीपदान और आरती: शाम के समय और निशिता काल में शिव चालीसा का पाठ करें और घी के दीपक से आरती करें.

    महाशिवरात्रि का महत्व

    पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था. महाशिवरात्रि का व्रत रखने से कुंवारी कन्याओं को मनचाहा वर मिलता है और विवाहित महिलाओं का वैवाहिक जीवन सुखमय बना रहता है. आध्यात्मिक दृष्टि से यह रात्रि जागरण और अपनी चेतना को जागृत करने का महापर्व है.