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  • फडणवीस की डिनर डिप्लोमेसी से सुलझी महायुति की गुत्थी, नेतृत्व बदलाव की अटकलें भी खारिज

    फडणवीस की डिनर डिप्लोमेसी से सुलझी महायुति की गुत्थी, नेतृत्व बदलाव की अटकलें भी खारिज


    मुंबई। महाराष्ट्र की महायुति सरकार में सरकारी निगमों में नियुक्तियों को लेकर चल रहा गतिरोध खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सरकारी आवास ‘वर्षा’ पर सोमवार देर रात महायुति के तीनों प्रमुख दलों के नेताओं की बैठक हुई। डिनर के दौरान हुई इस बैठक में निगमों के बंटवारे का फॉर्मूला तय किया गया। साथ ही मुख्यमंत्री के नेतृत्व में बदलाव की चल रही अटकलों को भी बीजेपी ने खारिज कर दिया।

    विधायकों की संख्या के आधार पर निगमों का बंटवारा

    बैठक में तय हुआ कि सरकारी निगमों में हिस्सेदारी महायुति के घटक दलों की विधानसभा में संख्या के आधार पर होगी। गठबंधन में सबसे ज्यादा विधायक बीजेपी के हैं, इसलिए निगमों में उसकी हिस्सेदारी सबसे अधिक रहेगी। इसके बाद एकनाथ शिंदे की शिवसेना और एनसीपी को हिस्सेदारी मिलेगी।

    सरकारी निगमों को ए, बी और सी तीन श्रेणियों में बांटा जाएगा। ए कैटेगरी में सबसे महत्वपूर्ण निगम रखे जाएंगे। इनके अध्यक्षों और सदस्यों के नाम जल्द तय कर सरकार को भेजे जाएंगे।

    मुख्यमंत्री फडणवीस ने सभी लंबित मामलों को जल्द निपटाने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए हर मंगलवार बैठक होगी और सरकार का लक्ष्य एक महीने के भीतर सभी विवादों का समाधान करना है।

    नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों पर बीजेपी का जवाब

    बैठक के बाद बीजेपी नेता और मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने मुख्यमंत्री के नेतृत्व में बदलाव की अटकलों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की जनता ने महायुति को बड़ा जनादेश दिया है और 235 विधायक एनडीए सरकार के साथ हैं। ऐसे में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा का कोई आधार नहीं है।

    बावनकुले ने विपक्ष पर अफवाह फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्ष मुख्यमंत्री फडणवीस के मजबूत नेतृत्व से परेशान है।

    DPDC में भी हिस्सेदारी का फॉर्मूला

    बैठक में जिला योजना विकास समिति (DPDC) से जुड़े मुद्दों पर भी सहमति बनी। इसके तहत उन क्षेत्रों में, जहां महायुति के अलग-अलग दलों के विधायक हैं, सत्ताधारी दलों के विधायकों को 60 प्रतिशत सदस्यों की नियुक्ति और फंड पर नियंत्रण मिलेगा। संबंधित पालक मंत्री को 30 प्रतिशत हिस्सेदारी दी जाएगी, जबकि छोटे सहयोगी दलों के लिए 10 प्रतिशत हिस्सेदारी का प्रावधान होगा।

    तीनों दलों के प्रमुख नेता रहे मौजूद

    बैठक में बीजेपी की ओर से देवेंद्र फडणवीस, गिरीश महाजन और चंद्रशेखर बावनकुले शामिल हुए। शिवसेना की ओर से एकनाथ शिंदे, उदय सामंत, शंभूराज देसाई और दादा भुसे मौजूद रहे। वहीं एनसीपी की ओर से सुनेत्रा पवार, छगन भुजबल, हसन मुश्रीफ और संजय खोडके ने बैठक में हिस्सा लिया।

    बैठक के बाद महायुति के भीतर चल रहे मतभेदों को कम करने की कोशिश तेज होती दिखाई दे रही है। अब निगाहें सरकारी निगमों में होने वाली नियुक्तियों पर हैं। सरकार जल्द ही इन नियुक्तियों की घोषणा कर सकती है।

  • मंगलवार की जगह सोमवार को होगी महाराष्ट्र कैबिनेट बैठक, वर्षा बंगले पर महायुति नेताओं के डिनर ने बढ़ाई राजनीतिक चर्चाएं

    मंगलवार की जगह सोमवार को होगी महाराष्ट्र कैबिनेट बैठक, वर्षा बंगले पर महायुति नेताओं के डिनर ने बढ़ाई राजनीतिक चर्चाएं


    नई दिल्ली ।
    महाराष्ट्र में साप्ताहिक कैबिनेट बैठक के कार्यक्रम में अचानक बदलाव ने राज्य की राजनीति में चर्चाओं को तेज कर दिया है। नियमित रूप से मंगलवार को होने वाली कैबिनेट बैठक अब सोमवार दोपहर सह्याद्री गेस्ट हाउस में आयोजित की जाएगी। बैठक के कार्यक्रम में हुए इस बदलाव की आधिकारिक वजह मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का मंगलवार को मुंबई से बाहर धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होना बताई गई है।

    कैबिनेट बैठक के दिन में बदलाव अपने आप में प्रशासनिक कारणों से जुड़ा बताया जा रहा है, लेकिन इसके तुरंत बाद होने वाली महायुति के प्रमुख नेताओं की बैठक ने राजनीतिक हलकों का ध्यान खींचा है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सरकारी आवास वर्षा बंगले पर सोमवार को गठबंधन के वरिष्ठ नेताओं और मंत्रियों के लिए डिनर का कार्यक्रम रखा गया है।

    इस कार्यक्रम में भारतीय जनता पार्टी, शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से जुड़े प्रमुख नेताओं की मौजूदगी रहने की संभावना है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा पवार के बीच भी चर्चा प्रस्तावित है। ऐसे में कैबिनेट बैठक और उसके बाद होने वाली राजनीतिक बैठक को लेकर गठबंधन के भीतर समन्वय और रणनीति से जुड़े मुद्दों पर बातचीत की संभावना जताई जा रही है।

    मुख्यमंत्री फडणवीस का हालिया दिल्ली दौरा भी इस पूरे घटनाक्रम के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। दिल्ली दौरे के बाद राज्य में राजनीतिक गतिविधियों के बढ़ने और अब कैबिनेट बैठक के कार्यक्रम में बदलाव के कारण सत्ता के गलियारों में संभावित बदलावों को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं।

    हालांकि, अभी तक सरकार या महायुति की ओर से किसी बड़े राजनीतिक बदलाव, मंत्रिमंडल फेरबदल या गठबंधन के समीकरण में परिवर्तन को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। इसलिए मौजूदा परिस्थितियों को फिलहाल राजनीतिक गतिविधियों और आपसी समन्वय के संदर्भ में ही देखा जा रहा है।

    सरकारी स्तर पर कैबिनेट बैठक और गठबंधन नेताओं की बातचीत का उद्देश्य सरकार के कामकाज में बेहतर तालमेल, आपसी मतभेदों को दूर करना और प्रशासनिक फैसलों में तेजी लाना बताया जा रहा है। महायुति सरकार के सामने विभिन्न राजनीतिक और प्रशासनिक मुद्दों पर समन्वय बनाए रखना महत्वपूर्ण है।

    सोमवार को होने वाली बैठक में सरकार से जुड़े विभिन्न प्रस्तावों पर चर्चा और निर्णय लिए जाने की संभावना है। इसके बाद वर्षा बंगले पर होने वाली बैठक में गठबंधन के नेताओं के बीच राजनीतिक और संगठनात्मक मुद्दों पर विचार-विमर्श हो सकता है।

    महाराष्ट्र की राजनीति में भाजपा, शिवसेना और एनसीपी के बीच समन्वय सत्ता के संचालन के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में शीर्ष नेताओं का एक साथ बैठना राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है। हालांकि, बैठक के एजेंडे को लेकर अभी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

    फिलहाल कैबिनेट बैठक को एक दिन पहले करने का कारण प्रशासनिक कार्यक्रम बताया गया है, जबकि उसके बाद होने वाली महायुति नेताओं की बैठक ने संभावित राजनीतिक फैसलों को लेकर उत्सुकता बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में इस बैठक के बाद सामने आने वाले फैसलों और नेताओं के बयानों से तस्वीर अधिक स्पष्ट हो सकती है।

  • BMC चुनाव में BJP गठबंधन की बंपर बढ़त, निशिकांत दुबे का बड़ा सियासी हमला,‘अब मुंबई आकर मिलूंगा’, ठाकरे बंधुओं को सीधी चुनौती

    BMC चुनाव में BJP गठबंधन की बंपर बढ़त, निशिकांत दुबे का बड़ा सियासी हमला,‘अब मुंबई आकर मिलूंगा’, ठाकरे बंधुओं को सीधी चुनौती


    मुंबई। बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) चुनाव के रुझानों में भाजपा गठबंधन (महायुति) को स्पष्ट बहुमत की ओर बढ़ता देख महाराष्ट्र की राजनीति में जबरदस्त हलचल मच गई है। इसी बीच भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक तीखा पोस्ट कर उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे को खुली राजनीतिक चुनौती दे दी है। दुबे ने साफ तौर पर कहा है कि वे जल्द ही मुंबई आकर दोनों नेताओं से मुलाकात करेंगे।

    निशिकांत दुबे के इस बयान को केवल जीत की खुशी नहीं, बल्कि एक राजनीतिक संदेश और शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने अपने पोस्ट के जरिए संकेत दिया कि मुंबई की राजनीति में लंबे समय से चला आ रहा ‘ठाकरे वर्चस्व’ अब अंतिम दौर में है और बीएमसी में बदलाव तय है।

    भाषावाद और परिवारवाद पर सीधा प्रहार
    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि दुबे का यह बयान सीधे तौर पर भाषावादी राजनीति और परिवार-केंद्रित सत्ता पर हमला है। उनका संदेश साफ है

    मुंबई अब किसी एक परिवार या भाषा की राजनीति तक सीमित नहीं रही। मतदाताओं ने भाजपा की ‘सबका साथ, सबका विकास’ की नीति पर भरोसा जताया है।

    राज–उद्धव की जोड़ी को बड़ा झटका
    चुनावी रुझानों के मुताबिक, भाजपा गठबंधन 115 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जो बहुमत के आंकड़े 114 से अधिक है। इसके मुकाबले उद्धव ठाकरे गुट और MNS की संयुक्त ताकत करीब 68 सीटों तक सिमटी नजर आ रही है, जबकि कांग्रेस लगभग 10 सीटों पर सिमटती दिख रही है।
    इसके अलावा नागपुर, ठाणे और पुणे जैसे बड़े शहरी निकायों में भी भाजपा गठबंधन मजबूत स्थिति में पहुंचता नजर आ रहा है।

    पुराने विवाद से जुड़ा नया सियासी मोड़
    यह सियासी टकराव उस पुराने विवाद से भी जुड़ा है, जब जुलाई में निशिकांत दुबे ने गैर-मराठी दुकानदारों के साथ हुई मारपीट पर कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। उस वक्त दिए गए उनके बयान“यूपी-बिहार आओगे तो पटक-पटक कर मारेंगे”ने महाराष्ट्र से लेकर राष्ट्रीय राजनीति तक विवाद खड़ा कर दिया था।

    अब बीएमसी चुनाव में भाजपा गठबंधन की बढ़त के बीच दुबे का मुंबई आने का ऐलान ठाकरे खेमे के लिए एक नई और बड़ी राजनीतिक चुनौती माना जा रहा है। यह साफ हो गया है कि बीएमसी चुनाव सिर्फ स्थानीय सत्ता की लड़ाई नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति की दिशा तय करने वाला मुकाबला बन चुका है।

  • महानगर पालिका चुनावों से पहले महायुति को मिली बढ़त 66 उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए

    महानगर पालिका चुनावों से पहले महायुति को मिली बढ़त 66 उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए


    नई दिल्ली । महाराष्ट्र में आगामी महानगरपालिका चुनावों से पहले भाजपा के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन को बड़ी बढ़त मिली है। शुक्रवार को नामांकन पत्रों की वापसी की अंतिम तिथि समाप्त होने के बाद महायुति के 66 उम्मीदवारों का निर्विरोध चुना जाना तय हो गया है। वहीं अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी के दो उम्मीदवारों को भी निर्विरोध जीत मिली है।महानगरपालिका चुनावों में अब तक की स्थिति यह रही कि विपक्षी दलों और गठबंधनों के उम्मीदवारों ने अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली है जिससे कुल 68 उम्मीदवार निर्विरोध चुन लिए गए हैं। इनमें से 66 भाजपा और शिवसेना गठबंधन से हैं जबकि एनसीपी के दो उम्मीदवार भी निर्विरोध विजयी हुए हैं।

    प्रमुख क्षेत्रों में महायुति की बढ़त

    मुंबई महानगर क्षेत्र एमएमआर में कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका में महायुति के सबसे अधिक 21 उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए जिनमें से 15 भाजपा और 6 शिवसेना के थे। उत्तर महाराष्ट्र के जलगांव जिले में भी भाजपा और शिवसेना ने समान सफलता हासिल की जहां दोनों दलों के छह-छह उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए।

    पनवेल और भिवंडी में महायुति की मजबूत पकड़

    पनवेल में भाजपा ने सात उम्मीदवारों को निर्विरोध जीत दिलाई है जबकि भिवंडी में जहां राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी NCP का प्रभाव रहा है भाजपा के छह उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हुए।

    धुले और अहिल्यानगर में परिणाम

    धुले जिले में भाजपा के तीन उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए। अहिल्यानगर में निर्विरोध चुनावों में एनसीपी को दो सीटें मिलीं जबकि भाजपा ने एक सीट पर विजय प्राप्त की।ठाणे में शिवसेना की सफलताएं और राज ठाकरे का विरोध ठाणे जिले में जहां सत्तारूढ़ महायुति के बीच राजनीतिक मतभेद थे शिवसेना ने छह सीटों पर निर्विरोध जीत दर्ज की है। हालांकि राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना MNS ने इन निर्विरोध चुनावों को लेकर आपत्ति जताई है और चुनावी प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं।

    राजनीतिक विश्लेषक की राय

    राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि हाल ही में संपन्न नगर परिषद चुनावों में महायुति के क्लीन स्वीप के बाद इन निर्विरोध जीतों से राज्य में सत्तारूढ़ गठबंधन को मनोवैज्ञानिक बढ़त और नई ऊर्जा मिली है। विशेषज्ञों के अनुसार निर्विरोध जीत के चलते महायुति को संगठनात्मक मजबूती मिलेगी और वे उन क्षेत्रों में भी पूरी ताकत से प्रचार कर सकेंगे जहां सीधा चुनावी मुकाबला बाकी है।महाराष्ट्र में बीएमसी समेत अन्य महानगरपालिका चुनावों के लिए 15 जनवरी को मतदान होगा और 16 जनवरी को परिणाम घोषित किए जाएंगे।

  • भाजपा को महाराष्ट्र में ऐतिहासिक सफलता40 साल बाद कम्पटी नगरपालिका में जीती पहली बार सत्ता

    भाजपा को महाराष्ट्र में ऐतिहासिक सफलता40 साल बाद कम्पटी नगरपालिका में जीती पहली बार सत्ता


    नागपुर । महाराष्ट्र में भाजपा के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन को निकाय चुनावों में एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। कुल 288 जिलों के निकायों में से 215 में महायुति ने अध्यक्ष पद पर जीत हासिल की हैजिसमें भाजपा ने 129 सीटों पर जीत के साथ सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है। लेकिन भाजपा को सबसे बड़ी और ऐतिहासिक जीत कम्पटी नगरपालिका परिषद में मिलीजहां 40 साल बाद पहली बार उसे सत्ता हासिल हुई है। कम्पटी नगरपालिका परिषद में भाजपा के कैंडिडेट अजय अग्रवाल ने 103 वोटों के मामूली अंतर से जीत दर्ज की। हालांकिकांग्रेस के कैंडिडेट शाकूर नागानी ने चुनाव परिणाम में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए कहा कि वह पूरे दिन चुनाव में आगे चल रहे थेलेकिन आखिरी समय में गड़बड़ी कर के अजय अग्रवाल को जिताया गया।

    यह चुनाव परिणाम नागपुर जिले में काफी चर्चा में रहाखासकर इस सीट के लिए भाजपा और कांग्रेस के बीच तीखी बयानबाजी के कारण। एक और दिलचस्प बात यह रही कि बहुजन रिपब्लिकन एकता मंच की नेता सुलेखा कुंभारे ने इस सीट पर अजय कदम को कैंडिडेट बनाया था। हालांकिभाजपा ने इस बार उनका समर्थन नहीं कियाक्योंकि पार्टी को इस बार महाराष्ट्र में भगवा लहर की उम्मीद थी। कुंभारे ने यह भी दावा किया कि नितिन गडकरी उन्हें अपनी बहन मानते रहे हैंलेकिन भाजपा ने उनका समर्थन नहीं किया।नागपुर की इस महत्वपूर्ण नगरपालिका परिषद में भाजपा की 40 साल बाद जीत एक बड़ी राजनीतिक घटना मानी जा रही है।

    कांग्रेस के भीतर भी टिकट बंटवारे को लेकर विवाद उभरेऔर यह सवाल उठने लगा कि भाजपा अब बीएमसी में जीत की कोशिश कर सकती है।
    केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का नागपुर संसदीय क्षेत्र होने के बावजूद इस नगरपालिका परिषद में भाजपा की जीत का यह लंबे समय से इंतजार थाजो अब समाप्त हुआ। कांग्रेस ने भी अपनी स्थिति को लेकर सवाल उठाएऔर उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने यह कहा कि बीएमसी में कांग्रेस का कोई वजूद नहीं हैक्योंकि पिछले 30 सालों से वे ही लगातार जीत रहे हैं। इन नतीजों के बादविपक्षी गठबंधन महाअघाड़ी में भी विवाद शुरू हो गया हैजो भविष्य में महाराष्ट्र की राजनीति में और भी हलचल पैदा कर सकता है।