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  • महिंद्रा की सितंबर बिक्री 15 प्रतिशत बढ़ी, हुंडई मोटर ने 77,916 वाहनों की रिकॉर्ड मासिक बिक्री दर्ज की

    महिंद्रा की सितंबर बिक्री 15 प्रतिशत बढ़ी, हुंडई मोटर ने 77,916 वाहनों की रिकॉर्ड मासिक बिक्री दर्ज की

    नई दिल्ली। देश की प्रमुख वाहन कंपनियों ने सितंबर की बिक्री के आंकड़े जारी किए हैं। महिंद्रा एंड महिंद्रा ने निर्यात समेत कुल 1,14,874 वाहनों की बिक्री की, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 15 प्रतिशत अधिक है। कंपनी की घरेलू बिक्री में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई। सितंबर में घरेलू बाजार में यूटिलिटी वाहनों की बिक्री सालाना आधार पर 14 प्रतिशत बढ़कर 64,092 यूनिट्स हो गई। वहीं, कमर्शियल वाहनों की बिक्री भी 14 प्रतिशत बढ़कर 30,420 यूनिट्स रही।

    महिंद्रा एंड महिंद्रा के ऑटोमोटिव बिजनेस के अध्यक्ष डॉ. वेलुसामी आर ने कहा कि कंपनी की इलेक्ट्रिक ओरिजिन एसयूवी की लॉन्चिंग के बाद से 1 लाख की बिलिंग का माइलस्टोन पार हो गया है। कमर्शियल वाहन खंड में भी सितंबर के दौरान अलग-अलग श्रेणियों में बिक्री बढ़ी। 2 टन से कम वजन वाले हल्के कमर्शियल वाहनों की बिक्री 19 प्रतिशत बढ़कर 4,044 यूनिट्स हो गई। वहीं, 2 से 3.5 टन वजन वाले हल्के कमर्शियल वाहनों की बिक्री 13 प्रतिशत बढ़कर 26,376 यूनिट्स रही। इलेक्ट्रिक मॉडल समेत थ्री-व्हीलर की बिक्री में 26 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और यह 16,343 यूनिट्स तक पहुंच गई।

    दूसरी ओर, हुंडई मोटर इंडिया लिमिटेड ने सितंबर में अब तक की सबसे ज्यादा मासिक बिक्री दर्ज की। कंपनी ने महीने के दौरान कुल 77,916 यूनिट्स की बिक्री की, जो पिछले साल की तुलना में 10.8 प्रतिशत अधिक है। घरेलू बाजार में कंपनी की मासिक बिक्री सालाना आधार पर 10.9 प्रतिशत बढ़कर 57,166 यूनिट्स हो गई। वहीं, निर्यात में भी 10.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह 20,750 यूनिट्स तक पहुंच गया। इस तरह घरेलू और निर्यात दोनों बाजारों में बिक्री बढ़ने से कंपनी ने सितंबर में नया मासिक रिकॉर्ड बनाया।

    हुंडई मोटर इंडिया के एमडी और सीईओ तरुण गर्ग ने कहा कि सितंबर की बिक्री का आंकड़ा जुलाई 2026 में बने कंपनी के पिछले रिकॉर्ड से भी अधिक है। उनके अनुसार, घरेलू और निर्यात बाजारों में दर्ज हुई बढ़ोतरी कंपनी के उत्पाद पोर्टफोलियो की मजबूत अपील और भारत तथा वैश्विक बाजारों में मोबिलिटी समाधान उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। कंपनी की ओर से सितंबर के आंकड़ों में घरेलू बाजार और निर्यात दोनों में दोहरे अंक की वृद्धि दर्ज की गई है।

    तरुण गर्ग ने कहा कि कंपनी को उम्मीद है कि त्योहारी सीजन के दौरान ग्राहकों का उत्साह बना रहेगा। उन्होंने यह भी बताया कि हुंडई बेयोन की बुकिंग शुरू होने से बिक्री को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है। सितंबर के बिक्री आंकड़ों में महिंद्रा एंड महिंद्रा की कुल बिक्री में 15 प्रतिशत की सालाना वृद्धि और हुंडई मोटर इंडिया की रिकॉर्ड मासिक बिक्री दर्ज हुई है। दोनों कंपनियों के आंकड़ों में घरेलू बाजार के साथ निर्यात और विभिन्न वाहन श्रेणियों में बिक्री की स्थिति भी सामने आई है।

  • E20 पेट्रोल पर नया विवाद: कार कंपनियों की ईमेल बातचीत में सामने आई चिंता तो SIAM ने क्यों वापस लिया पत्र?

    E20 पेट्रोल पर नया विवाद: कार कंपनियों की ईमेल बातचीत में सामने आई चिंता तो SIAM ने क्यों वापस लिया पत्र?


    नई दिल्ली। देशभर में E20 पेट्रोल को लेकर चल रही बहस के बीच एक नई रिपोर्ट ने ऑटो सेक्टर में हलचल बढ़ा दी है। पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल ब्लेंडिंग को लेकर पहले से ही वाहन मालिकों के बीच कई तरह की चिंताएं सामने आती रही हैं। अब Reuters की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि Tata Motors Maruti Suzuki और Mahindra जैसी बड़ी ऑटो कंपनियों के अधिकारी भी E20 फ्यूल की गुणवत्ता को लेकर आपस में चर्चा कर रहे थे। कंपनियों के बीच हुई ईमेल बातचीत में पेट्रोल में क्लोराइड और नमी की मात्रा को लेकर चिंता सामने आने की बात कही गई है।

    भारत में E20 फ्यूल को पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करने और प्रदूषण घटाने के उद्देश्य से बढ़ावा दिया गया है। सरकार की इथेनॉल ब्लेंडिंग नीति के तहत देशभर में E20 पेट्रोल का इस्तेमाल बढ़ाया गया है। लेकिन इसके साथ ही वाहन मालिकों की चिंता भी बढ़ी है कि लंबे समय तक ऐसे ईंधन के इस्तेमाल का गाड़ियों पर क्या असर पड़ेगा। इसी बीच ऑटो कंपनियों से जुड़े कुछ आंतरिक डेटा ने इस बहस को और गंभीर बना दिया है।

    रिपोर्ट के मुताबिक कई ऑटोमेकर्स ने करीब एक साल की अवधि में 21 राज्यों के 250 से ज्यादा पेट्रोल पंपों से ईंधन के सैंपल इकट्ठा कर उनकी जांच की थी। दावा है कि 18 राज्यों के कई सैंपल में क्लोराइड की मात्रा और नमी का स्तर ज्यादा पाया गया। कंपनियों से जुड़े अधिकारियों के बीच हुई बातचीत में इन तत्वों की वजह से वाहनों के कुछ हिस्सों में संभावित समस्याओं को लेकर चिंता जताई गई थी।

    हालांकि इस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण बात यह है कि ऑटो कंपनियां सार्वजनिक तौर पर E20 फ्यूल का विरोध नहीं कर रही हैं। बल्कि उद्योग संगठन SIAM ने भी बाद में सरकार को भेजे गए अपने पत्र को वापस ले लिया था। 28 जुलाई को भेजी गई शिकायत में E20 पेट्रोल में संभावित मिलावट और गुणवत्ता को लेकर चिंता जताई गई थी लेकिन बाद में SIAM ने कहा कि पत्र में इस्तेमाल किए गए कुछ आंकड़ों की और जांच तथा वैलिडेशन की जरूरत है।

    SIAM के मुताबिक यह डेटा आंतरिक चर्चा और वैलिडेशन के लिए जुटाया गया था। संगठन का कहना है कि टेस्टिंग का आधार और सैंपल साइज किसी अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए पर्याप्त नहीं था। इसी वजह से सरकार को भेजे गए पत्र को वापस लेने का फैसला किया गया। साथ ही SIAM इस विषय पर ज्यादा व्यापक और वैज्ञानिक अध्ययन कराने की योजना बना रहा है।

    इस बीच पेट्रोलियम मंत्रालय की तरफ से इस रिपोर्ट पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि SIAM का पत्र मिलने से करीब दो सप्ताह पहले ही सरकारी तेल कंपनियां पेट्रोल पंपों पर ईंधन की गुणवत्ता और संभावित मिलावट की जांच शुरू कर चुकी थीं। उनके मुताबिक जांच में केवल चार मामले ही इस तरह की समस्या से जुड़े मिले।

    सरकारी तेल कंपनियों ने भी रैंडम और वैज्ञानिक परीक्षणों के आधार पर E20 पेट्रोल की गुणवत्ता को लेकर बड़ी चिंता की बात को खारिज किया है। उनका कहना है कि किए गए परीक्षणों में ईंधन में ऐसी कोई व्यापक समस्या सामने नहीं आई जिससे वाहन मालिकों को घबराने की जरूरत हो।

    वहीं Mahindra ने Reuters की रिपोर्ट में ईमेल के आधार पर निकाले गए निष्कर्षों को पूरी तरह गलत बताया है। कंपनी का कहना है कि उपलब्ध जानकारी के आधार पर निकाले गए परिणाम सही नहीं हैं। दूसरी तरफ Maruti Suzuki और Tata Motors की ओर से इस मामले में कोई विस्तृत जवाब नहीं दिया गया है।

    पूरे विवाद का सबसे अहम पहलू यही है कि एक तरफ सरकारी तेल कंपनियां E20 पेट्रोल की गुणवत्ता को लेकर आश्वस्त कर रही हैं और दूसरी तरफ ऑटो इंडस्ट्री के भीतर हुए परीक्षणों तथा बातचीत को लेकर रिपोर्ट में अलग तस्वीर सामने आई है। ऐसे में अभी यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगा कि E20 पेट्रोल सभी वाहनों के लिए नुकसानदायक है। फिलहाल सबसे जरूरी है कि ईंधन की गुणवत्ता और संभावित क्लोराइड तथा नमी की समस्या को लेकर व्यापक वैज्ञानिक जांच हो और उसके निष्कर्ष सार्वजनिक किए जाएं। इससे वाहन मालिकों के बीच बनी आशंकाओं को भी स्पष्ट जवाब मिल सकेगा।