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  • महोबा में एसडीएम और अधिवक्ता विवाद ने पकड़ा तूल कलेक्ट्रेट में वकीलों का प्रदर्शन कार्रवाई नहीं हुई तो कोर्ट बहिष्कार की चेतावनी

    महोबा में एसडीएम और अधिवक्ता विवाद ने पकड़ा तूल कलेक्ट्रेट में वकीलों का प्रदर्शन कार्रवाई नहीं हुई तो कोर्ट बहिष्कार की चेतावनी


    महोबा । उत्तर प्रदेश के महोबा जिले में प्रशासन और अधिवक्ताओं के बीच विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। सदर एसडीएम पर एक अधिवक्ता से फोन पर अभद्र व्यवहार करने तथा कथित रूप से उन्हें कोर्ट में न आने और वकालत का लाइसेंस रद्द कराने की धमकी देने के आरोपों के बाद जिला मुख्यालय का माहौल गरमा गया। मामले के विरोध में जिला अधिवक्ता समिति के बैनर तले बड़ी संख्या में वकीलों ने कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन किया और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए निष्पक्ष कार्रवाई की मांग उठाई।

    विवाद की शुरुआत बीजानगर निवासी अधिवक्ता परशुराम कुशवाहा के रास्ते से जुड़े विवाद से हुई। अधिवक्ता का आरोप है कि समस्या का समाधान कराने के बजाय सदर एसडीएम ने उनसे फोन पर अनुचित भाषा का प्रयोग किया और कथित तौर पर गंभीर धमकियां दीं। उनका कहना है कि उन्होंने प्रशासनिक लापरवाही की शिकायत जनसुनवाई पोर्टल पर दर्ज कराई थी जिसके बाद उनके साथ यह व्यवहार किया गया। अधिवक्ता ने दावा किया है कि बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग भी मौजूद है और इसी आधार पर उन्होंने पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र देकर एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।

    घटना के बाद जिला अधिवक्ता समिति ने इसे अधिवक्ताओं के सम्मान से जुड़ा मामला बताते हुए विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि यदि अधिवक्ताओं के साथ इस प्रकार का व्यवहार किया जाएगा तो न्यायिक व्यवस्था की गरिमा प्रभावित होगी। प्रदर्शन के दौरान वकीलों ने मांग की कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि आरोप सही पाए जाएं तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

    अधिवक्ता समिति के पदाधिकारियों ने यह भी कहा कि यदि पीड़ित अधिवक्ता की समस्या का शीघ्र समाधान नहीं हुआ और आरोपों पर उचित कार्रवाई नहीं की गई तो वे एसडीएम न्यायालय का पूर्ण बहिष्कार करने के साथ व्यापक आंदोलन शुरू करेंगे। उनका कहना है कि अधिवक्ताओं को दबाव में लेने या डराने का कोई भी प्रयास स्वीकार नहीं किया जाएगा।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन की ओर से अतिरिक्त जिला अधिकारी ने अधिवक्ताओं से मुलाकात कर उनका ज्ञापन प्राप्त किया। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और तहसील स्तर पर लंबित समस्याओं के समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। प्रशासन का कहना है कि किसी भी पक्ष के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

    फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर जिले में प्रशासन और अधिवक्ताओं के बीच तनाव बना हुआ है। दोनों पक्ष अपने अपने रुख पर कायम हैं। एक ओर अधिवक्ता संगठन कार्रवाई की मांग पर अड़ा है तो दूसरी ओर प्रशासन का कहना है कि मामले की जांच के बाद ही तथ्यों के आधार पर निर्णय लिया जाएगा। अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं क्योंकि यही तय करेगी कि यह विवाद जल्द सुलझेगा या आगे और गहराएगा।

  • 25 हजार आबादी के भरोसे सिर्फ एक फार्मासिस्ट! महोबा के ग्योंडी गांव में बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा

    25 हजार आबादी के भरोसे सिर्फ एक फार्मासिस्ट! महोबा के ग्योंडी गांव में बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा


    महोबा  महोबा जिले के कबरई विकासखंड के सबसे बड़े गांव ग्योंडी में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली अब ग्रामीणों के सब्र की सीमा पार कर चुकी है। करीब 25 हजार की आबादी वाले इस गांव का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र वर्षों से डॉक्टरों और जरूरी स्वास्थ्य कर्मियों की कमी से जूझ रहा है। हालात ऐसे हैं कि पूरे अस्पताल की जिम्मेदारी केवल एक फार्मासिस्ट के भरोसे चल रही है। इलाज के लिए आने वाले मरीजों को न तो नियमित चिकित्सक मिलते हैं और न ही स्टाफ नर्स लैब टेक्नीशियन जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं। इससे ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है।

    स्वास्थ्य सुविधाओं की इसी बदहाली के विरोध में बुंदेलखंड नव निर्माण सेना के नेतृत्व में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर तत्काल कार्रवाई की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि ग्योंडी गांव ही नहीं बल्कि आसपास के कई गांवों के लोग भी इसी सरकारी अस्पताल पर निर्भर हैं लेकिन पर्याप्त चिकित्सा व्यवस्था नहीं होने से लोगों को मजबूरी में निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है। इससे गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है जबकि गंभीर मरीजों की जान भी खतरे में पड़ जाती है।

    ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि अस्पताल में लंबे समय से डॉक्टरों के पद खाली पड़े हैं और प्रशासन इस ओर गंभीरता नहीं दिखा रहा है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में चौबीस घंटे आपातकालीन चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं है। आवश्यक दवाइयों की कमी जांच सुविधाओं का अभाव और साफ सफाई बिजली तथा पेयजल जैसी मूलभूत व्यवस्थाएं भी संतोषजनक नहीं हैं। ऐसे में सरकारी अस्पताल होने के बावजूद मरीजों को अपेक्षित उपचार नहीं मिल पा रहा है।

    बुंदेलखंड नव निर्माण सेना ने प्रशासन के सामने पांच सूत्रीय मांगें रखीं। संगठन ने अस्पताल के सभी रिक्त पदों पर तत्काल नियुक्तियां करने नियमित डॉक्टरों और स्टाफ नर्स की तैनाती सुनिश्चित करने चौबीस घंटे आपातकालीन चिकित्सा सेवा शुरू करने आवश्यक दवाइयों और जांच सुविधाओं की उपलब्धता बढ़ाने तथा अस्पताल में साफ सफाई बिजली और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं को दुरुस्त करने की मांग की है।

    संगठन के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाए तो व्यापक जन आंदोलन शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर जिले में चक्का जाम और बड़े स्तर पर प्रदर्शन भी किया जाएगा जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधा से लोगों को वंचित रखना गंभीर लापरवाही है और इसे अब किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।

    जिलाधिकारी ने ग्रामीणों की समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए उनकी जायज मांगों पर जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया है। प्रशासन का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग से समन्वय कर अस्पताल में आवश्यक संसाधनों और स्टाफ की व्यवस्था कराने का प्रयास किया जाएगा। अब ग्रामीणों की निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं क्योंकि लंबे समय से चली आ रही इस समस्या के समाधान का इंतजार हजारों लोगों को है।