Tag: maintenance

  • सर्दियों में AC कवर करने से पहले जरूर करें ये 3 काम, वरना हजारों रुपये की मरम्मत पड़ सकती है भारी

    सर्दियों में AC कवर करने से पहले जरूर करें ये 3 काम, वरना हजारों रुपये की मरम्मत पड़ सकती है भारी

    नई दिल्ली । सर्दियों का मौसम शुरू होते ही घरों में एयर कंडीशनर का इस्तेमाल कम हो जाता है। कई लोग एसी की इनडोर यूनिट को कवर करके रख देते हैं, लेकिन बाहर लगी आउटडोर यूनिट की सुरक्षा पर ध्यान नहीं देते। लंबे समय तक बंद रहने के दौरान आउटडोर यूनिट पर धूल, धुआं, स्मॉग और सुबह की ओस का असर पड़ सकता है। इससे उपकरण के अलग-अलग हिस्सों को नुकसान पहुंचने और अगले गर्मी के मौसम में मरम्मत पर अतिरिक्त खर्च होने की आशंका रहती है। ऐसे में सर्दियों के दौरान एसी को सुरक्षित रखने के लिए सही तरीके से कवर करना जरूरी है।

    एसी की आउटडोर यूनिट आमतौर पर बालकनी, छत या घर के बाहर ऐसी जगह लगी होती है, जहां वह मौसम के सीधे संपर्क में रहती है। इस्तेमाल बंद होने के बाद इस यूनिट में जमा धूल और नमी परेशानी पैदा कर सकती है। नमी के साथ गंदगी लंबे समय तक बनी रहने से कॉपर पाइप, पंखे के ब्लेड और बाहरी बॉडी पर जंग लगने का खतरा बढ़ सकता है। कुछ परिस्थितियों में पानी या नमी विद्युत उपकरणों तक पहुंचने से भी खराबी आ सकती है।

    एसी की मरम्मत का खर्च खराबी के प्रकार पर निर्भर करता है। एक सामान्य 1.5 टन स्प्लिट एसी की कॉइल की सफाई और डीस्केलिंग पर लगभग 1,500 से 3,000 रुपये खर्च हो सकते हैं। आउटडोर फैन की मोटर बदलवाने में 1,800 से 4,500 रुपये तक लग सकते हैं। वहीं, इन्वर्टर एसी का पीसीबी खराब होने पर मरम्मत या बदलाव का खर्च 3,500 से 8,500 रुपये तक पहुंच सकता है।

    यदि कंडेंसर कॉइल बदलने की जरूरत पड़े, तो लगभग 4,500 से 9,000 रुपये खर्च हो सकते हैं। कंप्रेसर खराब होने की स्थिति में यह खर्च 10,000 से 22,000 रुपये तक जा सकता है। हालांकि, वास्तविक कीमत एसी के ब्रांड, मॉडल, खराबी और सर्विस की दरों के अनुसार अलग हो सकती है। इसलिए मौसम बदलने पर उपकरण की देखभाल करना उपयोगी साबित हो सकता है।

    सर्दियों में एसी कवर करने से पहले सबसे जरूरी है कि केवल इनडोर यूनिट पर ध्यान न दिया जाए। बाहर लगी आउटडोर यूनिट को भी सुरक्षित रखना चाहिए। इसके लिए एसी की क्षमता और आकार के अनुरूप कवर चुनें। छोटा या ढीला कवर ठीक से फिट नहीं होगा, जिससे धूल और गंदगी अंदर पहुंच सकती है। कवर ऐसा होना चाहिए जिसका कपड़ा पानी को रोकने में सक्षम हो और जिसे इलास्टिक या बांधने वाली डोरी से सुरक्षित किया जा सके।

    दूसरा जरूरी काम यूनिट को पूरी तरह सुखाना है। कवर लगाने से पहले एसी की बाहरी सतह को सूखे कपड़े से साफ कर लें। यदि यूनिट पर नमी मौजूद है, तो उसे सूखने का पर्याप्त समय दें। संभव हो तो सर्दियों में लंबे समय तक एसी बंद रखने से पहले उसकी सर्विस करा लें। सर्विस के बाद यूनिट को अच्छी तरह सूखने देना चाहिए, ताकि कवर के भीतर नमी फंसी न रहे।

    तीसरी सावधानी बिजली की आपूर्ति से जुड़ी है। कवर लगाने के बाद एसी का स्विच बंद करके उसका प्लग निकाल दें, यदि वह प्लग के जरिए जुड़ा है। कवर को इस तरह लगाएं कि नीचे की ओर हवा की थोड़ी आवाजाही बनी रहे। इससे यूनिट के भीतर नमी जमा होने की आशंका कम करने में मदद मिल सकती है। कवर को पूरी तरह वायुरुद्ध तरीके से बंद करने से बचना चाहिए।

    बाजार में सामान्य एसी कवर लगभग 250 रुपये से मिल सकते हैं, जबकि कुछ ब्रांडेड विकल्पों की कीमत करीब 325 रुपये बताई गई है। कवर खरीदते समय केवल कीमत के बजाय उसकी फिटिंग, कपड़े की गुणवत्ता और पानी से बचाव की क्षमता पर ध्यान देना चाहिए। सही आकार का कवर और नियमित देखभाल एसी को सर्दियों के दौरान बेहतर स्थिति में रखने में मदद कर सकते हैं।

  • सिलाई मशीन में बार-बार छूट रहे टांके या बन रहा धागे का गुच्छा, इन आसान तरीकों से पहचानें असली समस्या

    सिलाई मशीन में बार-बार छूट रहे टांके या बन रहा धागे का गुच्छा, इन आसान तरीकों से पहचानें असली समस्या

    नई दिल्ली । घर पर सिलाई करते समय मशीन का अचानक ठीक से काम न करना आम समस्या है। कभी टांके छूटने लगते हैं, कभी नीचे की तरफ धागा उलझकर गुच्छा बना लेता है और कई बार बॉबिन जाम होने से सिलाई पूरी तरह रुक जाती है। ऐसी स्थिति में तुरंत मशीन को सर्विस सेंटर ले जाने की जरूरत नहीं होती। कुछ सामान्य चीजों की जांच करके समस्या की वजह का पता लगाया जा सकता है।

    सिलाई मशीन में टांके छूटने की सबसे सामान्य वजहों में सुई, धागे की थ्रेडिंग, बॉबिन और टेंशन से जुड़ी गड़बड़ी शामिल हो सकती है। कपड़े के अनुसार सही सुई और धागे का इस्तेमाल करना भी जरूरी है। अगर सुई टेढ़ी, कुंद या गलत तरीके से लगी है तो वह कपड़े में सही ढंग से टांका नहीं बना पाएगी। इसलिए सबसे पहले सुई की स्थिति और उसकी दिशा जांचनी चाहिए।

    इसके बाद ऊपर वाले धागे की थ्रेडिंग पर ध्यान दें। धागा मशीन के सभी जरूरी गाइड और लीवर से सही तरीके से होकर गुजर रहा है या नहीं, इसकी जांच करें। जरूरत पड़ने पर धागा पूरी तरह निकालकर दोबारा सही तरीके से डालें। साथ ही बॉबिन और कपड़े को दबाकर रखने वाले पैर की स्थिति भी देखना जरूरी है।

    अगर बॉबिन बार-बार जाम हो रही है तो सबसे पहले मशीन बंद करके उसका प्लग निकाल दें। बॉबिन बाहर निकालकर देखें कि उसमें धागा बराबर तरीके से लिपटा हुआ है या नहीं। ढीली या असमान लपेट भी जाम होने की वजह बन सकती है। बॉबिन में किसी तरह की टूट-फूट होने पर भी समस्या आ सकती है।

    बॉबिन वाले हिस्से में जमा रूई और धागे के छोटे टुकड़ों को समय-समय पर साफ करना चाहिए। बॉबिन को मशीन में सही दिशा में लगाएं और यह भी जांचें कि धागा सही तरफ से निकल रहा है। अगर धागा बुरी तरह उलझ गया हो तो हाथ वाले पहिए को जबरदस्ती घुमाने से बचें।

    जिग-जैग सिलाई में टांके असमान आ रहे हों तो धागे की थ्रेडिंग, टेंशन और सिलाई की सेटिंग जांचें। टांके की चौड़ाई और लंबाई भी सही होनी चाहिए। एक साथ कई सेटिंग बदलने के बजाय एक-एक बदलाव करके छोटे कपड़े पर सिलाई की जांच करना बेहतर रहता है। इससे समस्या की सही वजह पहचानने में आसानी होती है।

    कपड़े के नीचे धागा गुच्छा बनने पर ऊपर वाले धागे की थ्रेडिंग दोबारा जांचें। धागा निकालकर दोबारा डालते समय कपड़े को दबाकर रखने वाले पैर को ऊपर रखें। इसके बाद टेंशन, बॉबिन की स्थिति और बॉबिन वाले हिस्से की सफाई जांचें।

    सुई बदलना, धागा दोबारा डालना, मशीन की सफाई करना और बॉबिन सही तरीके से लगाना जैसी सामान्य देखभाल घर पर की जा सकती है। किसी भी सफाई या जांच से पहले मशीन बंद करके उसका प्लग निकालना जरूरी है।

    हालांकि, अगर हाथ से घुमाने वाला पहिया काम नहीं कर रहा है, सुई बार-बार प्लेट से टकरा रही है, मोटर असामान्य तरीके से चल रही है या सामान्य जांच के बाद भी सिलाई ठीक नहीं हो रही है, तो मशीन को खुद खोलने के बजाय विशेषज्ञ की मदद लेना बेहतर है। नियमित सफाई, सही सुई-धागे का इस्तेमाल और बॉबिन की उचित देखभाल से मशीन की कार्यक्षमता बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

  • पत्नी की दूसरी शादी के बाद क्या पहले पति की एलिमनी खत्म हो जाती है, जानिए भारतीय कानून में गुजारा भत्ते का नियम

    पत्नी की दूसरी शादी के बाद क्या पहले पति की एलिमनी खत्म हो जाती है, जानिए भारतीय कानून में गुजारा भत्ते का नियम


    नई दिल्ली ।
    तलाक के बाद पत्नी को मिलने वाले गुजारा भत्ते यानी एलिमनी को लेकर अक्सर यह सवाल उठता है कि अगर महिला दोबारा शादी कर ले तो क्या पहले पति को पहले की तरह आर्थिक सहायता देते रहना होगा। भारतीय कानून में इस स्थिति को लेकर अलग-अलग प्रावधान मौजूद हैं और दूसरी शादी के बाद पूर्व पति की जिम्मेदारी पर इसका सीधा प्रभाव पड़ सकता है।

    सामान्य कानूनी स्थिति यह है कि तलाकशुदा महिला के दोबारा विवाह करने के बाद पहले पति से मिलने वाला नियमित गुजारा भत्ता जारी रहने का आधार खत्म हो सकता है। इसकी वजह यह है कि पुनर्विवाह के बाद महिला के भरण-पोषण की परिस्थितियां बदल जाती हैं। हालांकि, किसी मामले में अंतिम स्थिति संबंधित कानून, अदालत के आदेश और मामले की परिस्थितियों पर निर्भर करती है।

    हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 25 स्थायी गुजारा भत्ता और भरण-पोषण से संबंधित प्रावधान देती है। इसके तहत अदालत परिस्थितियों में बदलाव होने पर पहले दिए गए आदेश में बदलाव कर सकती है। पत्नी के पुनर्विवाह को भी ऐसे महत्वपूर्ण बदलावों में माना जा सकता है, जिसके आधार पर पूर्व पति अदालत से एलिमनी के आदेश में संशोधन या उसे समाप्त करने की मांग कर सकता है।

    इसका अर्थ यह नहीं है कि केवल दूसरी शादी की जानकारी सामने आते ही हर स्थिति में भुगतान अपने आप समाप्त मान लिया जाएगा। यदि पहले पति के पक्ष में कोई एलिमनी आदेश मौजूद है, तो उसके प्रभाव और उसे बदलने की प्रक्रिया को संबंधित न्यायालय के आदेश के अनुसार देखा जाता है। इसलिए किसी व्यक्ति को अपने स्तर पर भुगतान बंद करने के बजाय कानूनी प्रक्रिया अपनाना जरूरी हो सकता है।

    भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता यानी BNSS की धारा 144 भी पत्नी, बच्चों और माता-पिता के भरण-पोषण से संबंधित प्रावधान देती है। इस व्यवस्था में भी तलाकशुदा महिला के पुनर्विवाह की स्थिति महत्वपूर्ण होती है। हालांकि, किसी विशेष मामले में लागू कानूनी प्रावधान और न्यायालय के आदेश के आधार पर परिणाम अलग हो सकते हैं।

    मुस्लिम तलाकशुदा महिलाओं के मामलों में भी पुनर्विवाह का पहले पति से मिलने वाले भरण-पोषण पर प्रभाव पड़ता है। हालांकि, व्यक्तिगत कानून और मामले की परिस्थितियों के कारण कानूनी स्थिति को हमेशा संबंधित प्रावधानों और न्यायिक आदेशों के संदर्भ में समझना चाहिए।

    सबसे महत्वपूर्ण बात बच्चों के भरण-पोषण को लेकर है। यदि तलाकशुदा पत्नी ने दूसरी शादी कर ली है, लेकिन पहले पति से उसके बच्चे हैं, तो बच्चों की जिम्मेदारी केवल मां की दूसरी शादी के कारण खत्म नहीं होती। बच्चों के पालन-पोषण, शिक्षा और आवश्यक खर्चों की जिम्मेदारी उनके जैविक पिता पर बनी रह सकती है।

    इसलिए पत्नी की दूसरी शादी और बच्चों के अधिकार को अलग-अलग कानूनी मुद्दों के रूप में देखा जाता है। पूर्व पत्नी को मिलने वाली एलिमनी पर पुनर्विवाह का प्रभाव पड़ सकता है, लेकिन बच्चों के भरण-पोषण का अधिकार स्वतंत्र विषय है।

    एलिमनी से जुड़े मामलों में आय, आर्थिक स्थिति, अदालत का पूर्व आदेश, पुनर्विवाह की स्थिति और बच्चों की जिम्मेदारी जैसे कई तथ्य महत्वपूर्ण हो सकते हैं। इसलिए किसी भी मामले में केवल सामान्य नियम के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय संबंधित अदालत के आदेश और लागू कानून को देखना जरूरी है। यही वजह है कि एलिमनी बंद करने या बदलने से पहले कानूनी प्रक्रिया का पालन करना अधिक सुरक्षित माना जाता है।

  • वॉशिंग मशीन में ज्यादा डिटर्जेंट डालना कपड़ों की सफाई नहीं बढ़ाता, मशीन के ड्रम और ड्रेनेज सिस्टम को पहुंचा सकता है नुकसान

    वॉशिंग मशीन में ज्यादा डिटर्जेंट डालना कपड़ों की सफाई नहीं बढ़ाता, मशीन के ड्रम और ड्रेनेज सिस्टम को पहुंचा सकता है नुकसान

    नई दिल्ली । वॉशिंग मशीन ने कपड़े धोने का काम काफी आसान कर दिया है, लेकिन मशीन का सही इस्तेमाल न किया जाए तो सुविधा देने वाला यह उपकरण धीरे-धीरे खराब भी हो सकता है। ऐसी ही एक आम गलती जरूरत से ज्यादा डिटर्जेंट डालना है। कई लोगों को लगता है कि अधिक डिटर्जेंट से कपड़े ज्यादा साफ और चमकदार होंगे, जबकि वास्तविकता में ज्यादा डिटर्जेंट सफाई बढ़ाने के बजाय कपड़ों और मशीन दोनों के लिए परेशानी पैदा कर सकता है।

    वॉशिंग मशीन में आवश्यकता से अधिक डिटर्जेंट डालने पर सामान्य से ज्यादा झाग बन सकता है। यह झाग कपड़ों के रेशों के बीच फंस सकता है और कई बार पूरी तरह पानी के साथ बाहर नहीं निकल पाता। इसका असर कपड़ों पर सफेद अवशेष, कड़ापन या अजीब गंध के रूप में दिखाई दे सकता है। खासकर गहरे रंग के कपड़ों पर डिटर्जेंट के निशान आसानी से नजर आ सकते हैं।

    अतिरिक्त डिटर्जेंट का असर केवल कपड़ों तक सीमित नहीं रहता। लंबे समय तक ज्यादा डिटर्जेंट इस्तेमाल करने पर इसके अवशेष मशीन के ड्रम, पाइप, फिल्टर और ड्रेनेज सिस्टम के कुछ हिस्सों में जमा हो सकते हैं। इससे पानी की निकासी प्रभावित हो सकती है और मशीन को अपना सामान्य चक्र पूरा करने में परेशानी हो सकती है।

    मशीन के अंदर लगातार नमी और डिटर्जेंट के अवशेष जमा होने से रबर गैसकेट और दूसरे हिस्सों के आसपास गंदगी तथा सूक्ष्मजीवों की वृद्धि के लिए अनुकूल वातावरण भी बन सकता है। इसका एक संकेत मशीन के अंदर से आने वाली बदबू हो सकता है। खासकर फ्रंट लोड मशीन में दरवाजे के आसपास मौजूद रबर सील की नियमित सफाई नहीं करने पर यह समस्या अधिक महसूस हो सकती है।

    डिटर्जेंट की सही मात्रा हर स्थिति में एक जैसी नहीं होती। यह मशीन के प्रकार, कपड़ों की संख्या, पानी की गुणवत्ता और कपड़ों पर मौजूद गंदगी की मात्रा पर निर्भर करती है। इसलिए डिटर्जेंट के पैकेट पर दिए गए निर्देश और वॉशिंग मशीन के निर्माता की सलाह को प्राथमिकता देना बेहतर होता है।

    फ्रंट लोड मशीनें सामान्यतः कम पानी का इस्तेमाल करती हैं। इसलिए इनमें अत्यधिक डिटर्जेंट डालने से झाग बनने की समस्या ज्यादा हो सकती है। दूसरी ओर टॉप लोड मशीनों में पानी की मात्रा अलग होती है, इसलिए डिटर्जेंट की जरूरत भी मशीन और उसके वॉश प्रोग्राम के अनुसार बदल सकती है।

    अगर कपड़े बहुत ज्यादा गंदे हैं तो केवल डिटर्जेंट की मात्रा बढ़ाना सही तरीका नहीं है। कपड़ों को उपयुक्त तरीके से पहले भिगोना या मशीन में सही वॉश प्रोग्राम चुनना बेहतर विकल्प हो सकता है। इससे कम डिटर्जेंट में भी प्रभावी सफाई मिल सकती है।

    मशीन की बेहतर कार्यक्षमता बनाए रखने के लिए डिटर्जेंट डालने वाले ड्रॉअर, फिल्टर और रबर सील की समय-समय पर सफाई करना भी जरूरी है। वॉशिंग साइकल पूरा होने के बाद मशीन का दरवाजा कुछ समय खुला रखने से अंदर की नमी कम होने में मदद मिल सकती है।

    इसलिए अगली बार कपड़े ज्यादा साफ करने के इरादे से डिटर्जेंट की मात्रा बढ़ाने से पहले मशीन और डिटर्जेंट के निर्देश जरूर देखें। सही मात्रा में डिटर्जेंट का इस्तेमाल न केवल कपड़ों पर अवशेष और बदबू की समस्या कम कर सकता है, बल्कि मशीन की सफाई व्यवस्था और लंबे समय तक उसकी कार्यक्षमता बनाए रखने में भी मदद कर सकता है।

  • EPFO का ई-ऑफिस सिस्टम होगा अपग्रेड, शाम 6 से 9:30 बजे तक कई डिजिटल सेवाएं रहेंगी प्रभावित

    EPFO का ई-ऑफिस सिस्टम होगा अपग्रेड, शाम 6 से 9:30 बजे तक कई डिजिटल सेवाएं रहेंगी प्रभावित

    नई दिल्ली । कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने अपने सभी सदस्यों, नियोक्ताओं और संबंधित अधिकारियों के लिए महत्वपूर्ण सूचना जारी की है। संगठन का ई-ऑफिस सिस्टम 5 अगस्त की शाम 6:00 बजे से रात 9:30 बजे तक निर्धारित तकनीकी अपग्रेडेशन के कारण अस्थायी रूप से उपलब्ध नहीं रहेगा। इस दौरान ई-ऑफिस से जुड़ी कई आंतरिक डिजिटल सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। इसलिए उपयोगकर्ताओं को सलाह दी गई है कि जिन कार्यों की समय-सीमा निकट है, उन्हें निर्धारित समय से पहले पूरा कर लें।

    यह तकनीकी कार्य राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) द्वारा किया जाएगा। अपग्रेडेशन के तहत ई-ऑफिस पोर्टल के मौजूदा संस्करण को नए और अधिक उन्नत संस्करण में बदला जाएगा। इसके साथ ही ई-फाइल सिस्टम का नया संस्करण भी लागू किया जाएगा, जिससे डिजिटल फाइल प्रबंधन और सिस्टम की कार्यक्षमता में सुधार होने की उम्मीद है। पूरे अपग्रेडेशन की अवधि लगभग साढ़े तीन घंटे निर्धारित की गई है।

    रखरखाव के दौरान ई-ऑफिस प्लेटफॉर्म पर आंतरिक फाइल प्रोसेसिंग, डिजिटल दस्तावेजों की आवाजाही और कार्यालयी कार्य अस्थायी रूप से रुक सकते हैं। इसका असर कुछ ऑनलाइन सेवाओं और भविष्य निधि से जुड़े कार्यों पर भी पड़ सकता है। विशेष रूप से पीएफ क्लेम की प्रोसेसिंग में मामूली देरी संभव है। इसके अलावा उमंग (UMANG) ऐप के माध्यम से उपलब्ध कुछ संबंधित सेवाओं के संचालन पर भी अस्थायी प्रभाव पड़ सकता है।

    ईपीएफओ ने उपयोगकर्ताओं से अनुरोध किया है कि वे इस निर्धारित समय से पहले अपने आवश्यक ऑनलाइन कार्य, दस्तावेजों की प्रक्रिया और अन्य समयबद्ध गतिविधियां पूरी कर लें। इससे अपग्रेडेशन के दौरान किसी प्रकार की असुविधा से बचा जा सकेगा। संगठन ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह अस्थायी व्यवधान केवल सिस्टम को अधिक सक्षम और सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से किया जा रहा है।

    तकनीकी उन्नयन के बाद ई-ऑफिस प्लेटफॉर्म की कार्यक्षमता पहले की तुलना में बेहतर होने की उम्मीद है। नए संस्करण के लागू होने से सिस्टम की गति बढ़ेगी, फाइलों की प्रोसेसिंग अधिक तेज होगी और डिजिटल सेवाओं की दक्षता में सुधार आएगा। साथ ही डेटा सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा स्तर भी जोड़े जाएंगे, जिससे उपयोगकर्ताओं की वित्तीय और व्यक्तिगत जानकारी की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

    विशेषज्ञों का मानना है कि समय-समय पर होने वाले ऐसे तकनीकी अपग्रेडेशन से डिजिटल सेवाओं की गुणवत्ता और विश्वसनीयता बढ़ती है। इससे भविष्य में सिस्टम के धीमा होने, अचानक बंद होने या तकनीकी बाधाओं की संभावना कम होती है। ईपीएफओ ने भरोसा दिलाया है कि निर्धारित रखरखाव कार्य पूरा होने के बाद सभी सेवाएं सामान्य रूप से पुनः शुरू कर दी जाएंगी और उपयोगकर्ताओं को पहले से अधिक बेहतर डिजिटल अनुभव मिलेगा।

  • कड़ाही में बचे हुए इस्तेमाल शुदा तेल को फेंकने की न करें भूल, सेहत के लिए नुकसानदायक कुकिंग ऑयल घर के इन 4 कामों के लिए साबित होगा 'वरदान

    कड़ाही में बचे हुए इस्तेमाल शुदा तेल को फेंकने की न करें भूल, सेहत के लिए नुकसानदायक कुकिंग ऑयल घर के इन 4 कामों के लिए साबित होगा 'वरदान


    नई दिल्ली ।
    मानसून के इस खुशनुमा मौसम में अक्सर हर घर के भीतर पूड़ी, पकौड़े, समोसे और पापड़ जैसी तली-भुनी चीजें बड़े चाव से बनाई जाती हैं। इन सभी पकवानों को तलने के बाद कड़ाही में अक्सर थोड़ा-बहुत तेल बच जाता है, जो एक बेहद सामान्य बात है। ज्यादातर लोग इस बचे हुए तेल को दोबारा खाना पकाने में इस्तेमाल करने से कतराते हैं, क्योंकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार तेल को बार-बार गर्म करके खाना सेहत के लिए बेहद हानिकारक माना जाता है। ऐसे में अधिकतर लोग इस इस्तेमाल किए गए तेल को बेकार समझकर सिंक या नाली में बहा देते हैं, जो कि बिल्कुल भी समझदारी भरा फैसला नहीं है।

    रसोई के जानकारों और घरेलू विशेषज्ञों के मुताबिक, कड़ाही में बचा हुआ यह तेल खाने के योग्य भले ही न बचा हो, लेकिन यह घर के कई छोटे-मोटे और मुश्किल कामों को मिनटों में आसान बना सकता है। अगर अब तक आप भी इस बचे हुए कुकिंग ऑयल को कचरा समझकर फेंकते आ रहे थे, तो इसके कुछ बेहद असरदार और जबरदस्त फायदों के बारे में जानना बेहद जरूरी है। इस तेल का सही तरीकों से उपयोग करके आप न केवल पैसों की बचत कर सकते हैं, बल्कि अपने घर की कई कीमती चीजों को खराब होने से भी बचा सकते हैं।

    इस तेल का सबसे पहला और बेहतरीन इस्तेमाल बर्तनों या अन्य सतहों से जिद्दी स्टिकर और गोंद हटाने के लिए किया जा सकता है। अक्सर नई कांच की बोतलों, प्लास्टिक के डिब्बों या नए बर्तनों पर लगे स्टिकर को निकालने के बाद वहां एक चिपचिपी गोंद की परत रह जाती है, जो आसानी से साफ नहीं होती। ऐसे में उस चिपचिपी जगह पर थोड़ा सा बचा हुआ तेल लगाकर करीब 10 मिनट के लिए छोड़ देना चाहिए। इसके बाद किसी कपड़े या स्पंज की मदद से हल्के हाथों से रगड़कर साफ करने पर वह जिद्दी गोंद बेहद आसानी से बिना किसी निशान के बाहर निकल जाता है।

    इसके अलावा, घर में रखे पुराने लकड़ी के फर्नीचर जैसे टेबल, कुर्सी, अलमारी या दरवाजों की खोई हुई चमक को वापस लाने में भी यह तेल बेहद मददगार साबित होता है। जब भी लकड़ी के फर्नीचर की चमक फीकी पड़ने लगे, तो एक साफ और मुलायम कपड़े पर इस इस्तेमाल किए गए तेल की कुछ बूंदें लें और उसे लकड़ी की सतह पर हल्के हाथों से रगड़ें। इसके बाद एक दूसरे सूखे और साफ कपड़े से अतिरिक्त तेल को अच्छी तरह पोंछ लें। ऐसा करने से लकड़ी का पुराना फर्नीचर एक बार फिर से बिल्कुल नए जैसा साफ और चमकदार दिखाई देने लगता है।

    घर की साफ-सफाई और मरम्मत के अलावा, यह बचा हुआ तेल एक बेहतरीन लुब्रिकेंट के रूप में भी काम करता है। घरों में अक्सर पुराने स्क्रू, नट या बोल्ट पर जंग लग जाता है, जिसके कारण उन्हें टूल्स की मदद से भी खोलना बेहद मुश्किल या नामुमकिन हो जाता है। ऐसी स्थिति में जंग लगे हिस्सों पर थोड़ा सा बचा हुआ तेल डालकर कुछ समय के लिए छोड़ देना चाहिए। तेल के लुब्रिकेशन के प्रभाव से जंग ढीला पड़ जाता है और स्क्रू बिना किसी मशक्कत के आसानी से खुल जाते हैं।

    चमड़े से बनी कीमती चीजों जैसे बेल्ट, बैग, जैकेट या जूतों की देखभाल के लिए भी इस तेल का उपयोग किया जा सकता है। जब चमड़े के उत्पादों की चमक कम होने लगे या उनमें सूखापन आने लगे, तो बेहद कम मात्रा में तेल को सूती कपड़े पर लेकर चमड़े की सतह को पोंछना चाहिए, जिससे उनकी चमक लौट आती है। हालांकि, इन सभी प्रयोगों के दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है कि यदि तेल पूरी तरह जल चुका हो या उसमें से तेज दुर्गंध आ रही हो, तो उसे तुरंत नष्ट कर देना चाहिए और भूलकर भी दोबारा भोजन बनाने में इसका प्रयोग नहीं करना चाहिए।

  • सोलर पैनल की उम्र और बिजली उत्पादन बढ़ाना है तो अपनाएं सही सफाई तरीका, एक्सपर्ट्स ने दी महत्वपूर्ण सलाह

    सोलर पैनल की उम्र और बिजली उत्पादन बढ़ाना है तो अपनाएं सही सफाई तरीका, एक्सपर्ट्स ने दी महत्वपूर्ण सलाह

    नई दिल्ली । घरों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और कृषि क्षेत्रों में सोलर पैनलों का उपयोग लगातार बढ़ रहा है। बढ़ती बिजली लागत के बीच सौर ऊर्जा एक किफायती और पर्यावरण अनुकूल विकल्प बनकर उभरी है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि बेहतर बिजली उत्पादन और लंबे समय तक पैनलों की कार्यक्षमता बनाए रखने के लिए उनकी नियमित एवं सही तरीके से सफाई करना बेहद जरूरी है। सफाई के दौरान की गई छोटी सी लापरवाही भी पैनलों को नुकसान पहुंचा सकती है और उनकी कार्यक्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है।

    विशेषज्ञों के अनुसार सोलर पैनलों की सतह पर समय के साथ धूल, मिट्टी, प्रदूषण के कण, सूखे पत्ते, परागकण और पक्षियों की बीट जमा हो जाती है। इससे सूर्य की किरणें सीधे पैनल तक नहीं पहुंच पातीं और बिजली उत्पादन में 20 से 30 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। इसलिए समय-समय पर पैनलों की सफाई करना आवश्यक माना जाता है।

    सफाई के लिए सबसे उपयुक्त समय सुबह का शुरुआती समय या सूर्यास्त के बाद का होता है। दोपहर के समय तेज धूप में सोलर पैनल का तापमान काफी अधिक हो जाता है। ऐसे में गर्म पैनल पर अचानक ठंडा पानी डालने से थर्मल शॉक की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, जिससे पैनल का ग्लास चटकने या उसमें दरार आने का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा गर्म सतह पर पानी तेजी से सूखने के कारण दाग भी पड़ सकते हैं, जो प्रकाश के अवशोषण को प्रभावित कर सकते हैं।

    विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि सफाई शुरू करने से पहले पूरे सोलर सिस्टम को सुरक्षित तरीके से बंद कर देना चाहिए। सबसे पहले इनवर्टर और उसके बाद एसी तथा डीसी डिस्कनेक्ट स्विच बंद किए जाएं। इससे सफाई के दौरान बिजली के झटके या अन्य तकनीकी जोखिमों की संभावना काफी कम हो जाती है। सफाई पूरी होने के बाद सभी स्विच निर्धारित क्रम में दोबारा चालू किए जाने चाहिए।

    सोलर पैनलों की ऊपरी सतह पर विशेष सुरक्षात्मक कोटिंग होती है, जो सूर्य की रोशनी को प्रभावी ढंग से अवशोषित करने में मदद करती है। इसलिए सफाई के दौरान कठोर ब्रश, स्टील स्क्रबर, झाड़ू या खुरदरे कपड़े का उपयोग नहीं करना चाहिए। ऐसे उपकरणों से सतह पर खरोंच आ सकती है, जिससे पैनल की क्षमता और आयु दोनों प्रभावित हो सकती हैं। सफाई के लिए माइक्रोफाइबर कपड़ा, मुलायम स्पंज या सॉफ्ट कपड़े का उपयोग सबसे सुरक्षित माना जाता है।

    सोलर पैनलों की सफाई करते समय हाई प्रेशर वाटर जेट या तेज दबाव वाले पाइप का इस्तेमाल भी नहीं करना चाहिए। अधिक दबाव से पानी डालने पर पैनल की सीलिंग कमजोर पड़ सकती है और नमी अंदर प्रवेश कर सकती है, जिससे तकनीकी खराबी का जोखिम बढ़ जाता है। इसी प्रकार तेज रासायनिक क्लीनर, एसिड, फिनायल या अन्य कठोर केमिकल का प्रयोग भी नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे पैनल की सुरक्षात्मक परत को नुकसान पहुंच सकता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि सामान्य साफ पानी अधिकांश परिस्थितियों में पर्याप्त होता है। यदि अधिक गंदगी जमी हो तो हल्के साबुन के घोल का सीमित मात्रा में उपयोग किया जा सकता है। नियमित अंतराल पर सही तरीके से की गई सफाई न केवल सोलर पैनलों की कार्यक्षमता बनाए रखती है, बल्कि उनकी उम्र बढ़ाने और अधिकतम बिजली उत्पादन सुनिश्चित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

  • DNA टेस्ट में पिता नहीं निकले तो नहीं देना होगा गुजारा, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

    DNA टेस्ट में पिता नहीं निकले तो नहीं देना होगा गुजारा, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला


    अहमदाबाद। सुप्रीम कोर्ट ने गुजारा भत्ता (मेंटेनेंस) से जुड़े एक अहम मामले में स्पष्ट किया है कि यदि डीएनए जांच से यह साबित हो जाए कि कोई व्यक्ति बच्चे का जैविक पिता नहीं है, तो उसे बच्चे के पालन-पोषण के लिए गुजारा देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता—even अगर बच्चे का जन्म विवाह के दौरान ही क्यों न हुआ हो।

    क्या है मामला?

    यह फैसला जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने सुनाया।

    अदालत महिला की उस अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उसने दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी।

    कोर्ट ने क्या कहा?

    सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि:

    डीएनए टेस्ट से यदि पितृत्व खारिज हो जाता है, तो गुजारा देने का आदेश नहीं दिया जा सकता
    वैज्ञानिक साक्ष्य (DNA) को कानूनी अनुमान से अधिक महत्व मिलेगा
    संबंधित व्यक्ति ने खुद टेस्ट के लिए सहमति दी थी और रिपोर्ट पर कोई आपत्ति नहीं उठाई
    पुराने फैसलों का भी जिक्र

    अदालत ने अपने फैसले में कई महत्वपूर्ण मामलों का हवाला दिया, जैसे:

    अपर्णा अजिंक्य फिरोदिया बनाम अजिंक्य अरुण फिरोदिया
    इवान रतिनम बनाम मिलान जोसेफ
    नंदलाल बडवाइक बनाम लता बडवाइक

    इन मामलों में कोर्ट ने पहले भी कहा था कि डीएनए टेस्ट का आदेश बहुत सावधानी से दिया जाना चाहिए।

    हालांकि, मौजूदा केस में टेस्ट पहले ही हो चुका था और उसकी रिपोर्ट को चुनौती नहीं दी गई थी, इसलिए इसे निर्णायक माना गया।

    कानून बनाम विज्ञान

    अदालत ने माना कि जब वैज्ञानिक प्रमाण और कानूनी अनुमान (जैसे विवाह के दौरान जन्मे बच्चे का पिता पति माना जाना) के बीच टकराव हो, तो विज्ञान को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

    महिला को क्या राहत मिली?

    हालांकि महिला की अपील खारिज कर दी गई, लेकिन कोर्ट ने संबंधित विभाग को निर्देश दिया कि बच्चे की स्थिति का आकलन किया जाए और जरूरत पड़ने पर सहायता उपलब्ध कराई जाए।

    पूरा मामला समझिए
    दंपति की शादी 2016 में हुई
    विवाद के बाद महिला ने बच्चे के लिए गुजारा भत्ता मांगा
    पति ने डीएनए टेस्ट की मांग की
    रिपोर्ट में वह बच्चे का जैविक पिता नहीं निकला
    ट्रायल कोर्ट और हाई कोर्ट दोनों ने गुजारा देने से इनकार किया

    सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला पारिवारिक कानून में एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है। इससे साफ संदेश गया है कि पितृत्व से जुड़े मामलों में वैज्ञानिक साक्ष्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।

  • भोपाल में कल बिजली कटौती, 25 इलाकों में असर: विनीतकुंज, बंजारी-बर्रई में सप्लाई बाधित

    भोपाल में कल बिजली कटौती, 25 इलाकों में असर: विनीतकुंज, बंजारी-बर्रई में सप्लाई बाधित



    नई दिल्ली। होली की छुट्टियों के बाद राजधानी में शुक्रवार से बिजली लाइनों का मेंटेनेंस शुरू होगा। इसके चलते लगभग 25 इलाकों में 1 से 6 घंटे तक बिजली कटौती रहेगी। विभाग ने लोगों से जरूरी काम पहले निपटाने और बिजली के विकल्प सुनिश्चित करने की अपील की है।

    असर वाले इलाके और समय
    सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक: विनीतकुंज ए सेक्टर, सीआई हाइट्स, आइना बंगलो, राजहर्ष कॉलोनी, बंजारी डी सेक्टर और आसपास।
    सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक: बरेलागांव, आदर्श नगर, नई बस्ती, मीरपुर, जाट एरिया, कैम्प नंबर-12, सत्यम नगर, मथाई नगर, नंदा नगर और आसपास।
    सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक: वल्लभ भवन, एमएलए रेस्ट हाउस, मालवीय नगर, एमएलए क्वार्टर, देवकी नगर, गैस राहत, हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी और आसपास।
    दोपहर 2.30 से 3.30 बजे तक: बर्रई, कस्तूरी होम्स कॉलोनी और आसपास के क्षेत्र।

    जानकारी और सुझाव
    बिजली कटौती मेंटेनेंस के चलते की जा रही है।
    लोग अपने जरूरी काम, घरेलू उपकरण और बिजली पर निर्भर सेवाओं को पहले से संभाल लें।
    विभाग ने कहा कि कटौती के दौरान बिजली आपातकालीन सेवाओं के लिए उपलब्ध रहेगी।
    भोपाल में कल 25 इलाकों में मेंटेनेंस के कारण 1 से 6 घंटे तक बिजली कटौती रहेगी। विनीतकुंज, बंजारी, बर्रई, मालवीय नगर और आसपास के क्षेत्र प्रभावित होंगे।