Tag: major achievement

  • टी20 फार्मेट में टीम इंडिया की बड़ी उपलब्धि….. 200 मैच जीतने वाली दुनिया की पहली टीम बनी

    टी20 फार्मेट में टीम इंडिया की बड़ी उपलब्धि….. 200 मैच जीतने वाली दुनिया की पहली टीम बनी


    नई दिल्ली।
    सर्वाधिक बार टी20 विश्व कप (Most T20 World Cup Wins) अपने नाम कर चुकी भारतीय टीम (Indian Team) का खेल के सबसे छोटे प्रारूप में दबदबा है। भारत पाकिस्तान (Pakistan) के बाद महज दूसरी टीम है जिसने टी20 में 300 मैच खेले हैं। भारतीय टीम फिलहाल न्यूजीलैंड दौरे (New Zealand tour) पर है जहां उसे तीनों प्रारूप की सीरीज खेलनी है। भारत ने पांच मैचों की टी20 सीरीज के शुरुआती दो मुकाबले जीतकर बढ़त बना ली है। क्राइस्टचर्च में खेला गया दूसरा टी20 तो भारत के लिए कई मायनों में यादगार रहा है। आइए जानते हैं न्यूजीलैंड के खिलाफ दूसरे टेस्ट में जीत के साथ ही भारत ने टी20 में ऐसा कौन सा मुकाम हासिल कर लिया जो अब तक दुनिया की कोई अन्य टीम नहीं कर सकी है।


    भारत के लिए क्यों खास रही क्राइस्टचर्च की जीत

    भारत का यह टी20 में 300वां मुकाबला था और टीम ने इसमें रोमांचक जीत दर्ज की। मुकाबले में भारत ने 181 रन के लक्ष्य को 19.5 ओवर में छह विकेट खोकर हासिल कर लिया। तिलक वर्मा ने नाबाद अर्धशतकीय पारी खेलकर टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई, जबकि नमन धीर और नीतीश कुमार रेड्डी ने भी उपयोगी पारियां खेलीं। इसके साथ ही टीम इंडिया ने टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट में अपनी 200वीं जीत भी दर्ज कर ली। इस आंकड़े में केवल सामान्य जीत यानी निर्धारित खेल के आधार पर मिली जीत शामिल हैं। भारत इस प्रारूप में 200 मैच जीतने वाली दुनिया की पहली टीम बन गई है। भारत से पहले टी20 में अब तक कोई ऐसा नहीं कर सका है। भारत की उपलब्धि इसलिए भी खास है, क्योंकि टीम ने सामान्य जीत के अलावा सुपर ओवर में पांच मुकाबले जीते हैं। इसके अलावा 2007 में पाकिस्तान के खिलाफ बॉल-आउट के जरिए भी भारत को जीत मिली थी। नवंबर 2022 में न्यूजीलैंड के खिलाफ एक मुकाबला बारिश के कारण टाई रहा था।

    भारत ने 2006 से 2026 के बीच अब तक 300 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले हैं, जिनमें टीम को 200 मैचों में जीत मिली है। इस सूची में पाकिस्तान दूसरे स्थान पर है। पाकिस्तान ने 304 मुकाबलों में 176 जीत दर्ज की हैं। न्यूजीलैंड 135 जीत के साथ तीसरे स्थान पर है, जबकि दक्षिण अफ्रीका और इंग्लैंड क्रमशः 129 और 128 जीत के साथ चौथे और पांचवें स्थान पर हैं। पाकिस्तान ने भले ही भारत के मुकाबले ज्यादा टी20 मैच खेले हैं, लेकिन सर्वाधिक जीत भारत ने ही दर्ज की है।


    विरोधी टीमों के खिलाफ कैसा है भारत का रिकॉर्ड

    टी20 अंतरराष्ट्रीय में भारत का रिकॉर्ड लगभग हर टीम के खिलाफ मजबूत रहा है। ऑस्ट्रेलिया, वेस्टइंडीज और श्रीलंका के खिलाफ भारतीय टीम ने 22-22 मुकाबलों में जीत हासिल की है। वहीं, न्यूजीलैंड के खिलाफ भारत ने 33 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले हैं, जिनमें 19 में जीत मिली है और 11 में हार का सामना करना पड़ा है। न्यूजीलैंड के खिलाफ भारत ने सुपर ओवर में भी दो जीत दर्ज की हैं। भारत दुनिया की ऐसी टीम है, जिसका टी20 अंतरराष्ट्रीय में अब तक सामना की गई हर टीम के खिलाफ जीत-हार का रिकॉर्ड सकारात्मक है। बांग्लादेश के खिलाफ भारत ने 18 में से 17 मैच जीते हैं, जबकि अफगानिस्तान के खिलाफ 12 मुकाबलों में उसे एक भी हार नहीं मिली है।


    इस साल टी20 में कैसा रहा प्रदर्शन?

    मौजूदा कैलेंडर वर्ष 2026 में भारतीय टीम ने अब तक 37 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले हैं, जिनमें 25 मैचों में जीत हासिल की है। भारत के लिए मौजूदा साल यादगार रहा है क्योंकि इस साल की शुरुआत में ही भारत ने टी20 विश्व कप के खिताब का सफलतापूर्वक बचाव किया था। साल के अंत तक भारतीय टीम को छह और टी20 मुकाबले खेलने हैं। इनमें न्यूजीलैंड के खिलाफ उसकी सरजमीं पर पांच मैचों की टी20 सीरीज के शेष तीन मैच और श्रीलंका के खिलाफ घरेलू मैदान पर तीन मैच शामिल हैं। ऐसे में भारतीय टीम के पास अपनी जीत की संख्या और बढ़ाने का मौका होगा। न्यूजीलैंड के खिलाफ लगातार दो जीत के साथ सीरीज अपने नाम करने के करीब पहुंची टीम इंडिया अब मंगलवार को होने वाले तीसरे मुकाबले में भी जीत दर्ज कर क्लीन स्वीप करने के इरादे से उतरेगी।


  • Aus vs SA: कगिसो रबाड़ा के नाम बड़ी उपलब्धि… घरेलू मैदानों पर मात्र 7017 गेंदों पर झटक लिए 200 विकेट

    Aus vs SA: कगिसो रबाड़ा के नाम बड़ी उपलब्धि… घरेलू मैदानों पर मात्र 7017 गेंदों पर झटक लिए 200 विकेट


    गकेबरहा।
    साउथ अफ्रीकी तेज गेंदबाज (South African Fast Bowler) कगिसो रबाडा (Kagiso Rabada) ने टेस्ट क्रिकेट (Test cricket) में एक बड़ी उपलब्धि अपने नाम कर ली है. वह घरेलू मैदानों पर 200 टेस्ट विकेट लेने वाले साउथ अफ्रीका (South Africa) के चौथे गेंदबाज बन गए हैं. ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ गकेबरहा टेस्ट में निक मैडिनसन और मिचेल स्टार्क को आउट करके रबाडा ने यह मुकाम हासिल किया. खास बात यह है कि उन्होंने महज 7017 गेंदों में 200 विकेट पूरे कर लिए, जो इस उपलब्धि तक पहुंचने के लिए किसी भी गेंदबाज द्वारा ली गई सबसे कम गेंदें हैं।

    कगिसो रबाडा ने अपने घरेलू मैदानों पर अब तक 38 टेस्ट मैचों में 202 विकेट हासिल किए हैं. इस दौरान उनका औसत 19.99 रहा है. उन्होंने 10 बार एक पारी में पांच विकेट और चार बार मैच में 10 विकेट लेने का कारनामा किया है. उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 112 रन देकर सात विकेट है. साउथ अफ्रीका के लिए घरेलू टेस्ट में सबसे ज्यादा विकेट लेने वालों में डेल स्टेन 261 विकेट के साथ पहले स्थान पर हैं. मखाया एंटिनी ने 249 और शॉन पोलॉक ने 235 विकेट लिए हैं. रबाडा अब इस सूची में चौथे गेंदबाज हैं।

    मैचों के लिहाज से डेल स्टेन ने 37 टेस्ट में 200 घरेलू विकेट पूरे किए थे, जबकि कगिसो रबाडा को एक मैच ज्यादा लगा. हालांकि, गेंदों के मामले में रबाडा ने स्टेन को पीछे छोड़ दिया. स्टेन ने इस आंकड़े तक पहुंचने के लिए 7751 गेंदें फेंकी थीं. रबाडा की उपलब्धि ऐसे समय आई, जब साउथ अफ्रीका ने दूसरे टेस्ट में शानदार वापसी की।

    मेजबान टीम ने ऑस्ट्रेलिया को पहली पारी में महज 99 रन पर समेटकर फॉलोऑन खेलने पर मजबूर कर दिया. रबाडा ने 12 ओवर्स में 33 रन देकर दो विकेट लिए. मार्को जानसेन ने 33 रन देकर पांच विकेट चटकाए, जबकि वियान मुल्डर को दो सफलता मिलीं. ऑस्ट्रेलिया की ओर से स्टीव स्मिथ ने सबसे ज्यादा 28 रन बनाए. उन्होंने 88 गेंदों का सामना किया, लेकिन बाकी बल्लेबाज साउथ अफ्रीकी गेंदबाजों के सामने टिक नहीं सके।


    बावुमा का यादगार शतक

    इससे पहले साउथ अफ्रीका की बल्लेबाजी भी लड़खड़ा गई थी और टीम ने 110 रनों के स्कोर तक छह विकेट गंवा दिए थे. कप्तान टेम्बा बावुमा ने 334 गेंदों पर 179 रन बनाकर पारी को संभाला. मार्को जानसेन ने 85 रनों की पारी खेली और बावुमा के साथ सातवें विकेट के लिए 132 रन जोड़े. जानसेन के आउट होने के बाद साइमन हार्मर ने कप्तान का साथ दिया. दोनों के बीच आठवें विकेट के लिए 183 रनों की साझेदारी हुई. हार्मर ने 82 रन बनाए और साउथ अफ्रीका का स्कोर 425/9 तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई. ऑस्ट्रेलिया के लिए स्कॉट बोलैंड ने 81 रन देकर पांच विकेट लिए थे।

    ऑस्ट्रेलियाई टीम तीन मैचों की सीरीज में 1-0 से आगे है. दूसरे टेस्ट में एक दिन का खेल बाकी रहते साउथ अफ्रीका के पास जीत दर्ज कर सीरीज बराबर करने का मौका है. कगिसो रबाडा की रिकॉर्ड उपलब्धि और गेंदबाजों के दमदार प्रदर्शन ने मेजबान टीम की उम्मीदों को मजबूत किया है।

  • MP की बड़ी उपलब्धि…. यूनेस्को की टेंटेटिव सूची में शामिल हुए चार और नए ऐतिहासिक स्थल

    MP की बड़ी उपलब्धि…. यूनेस्को की टेंटेटिव सूची में शामिल हुए चार और नए ऐतिहासिक स्थल


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत (Rich Historical and Cultural Heritage) को अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक और ऐतिहासिक सफलता मिली है. प्रदेश के चार ऐतिहासिक स्थलों को UNESCO की Tentative List में शामिल किया गया है. इनमें धार की बाघ गुफाओं के भित्ति चित्र, सीहोर की गिन्नौरगढ़ किला, मुरैना के बटेश्वर-पदावली-ककरामठ मंदिर समूह और विदिशा की उदयगिरि गुफाएं शामिल हैं।

    UNESCO के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक इन चारों स्थलों को 8 जुलाई 2026 को भारत की ओर से Tentative List के लिए प्रस्तुत किया गया. भारत की Tentative List में फिलहाल 78 स्थल दर्ज हैं. हालांकि, Tentative List में शामिल होना अभी UNESCO की World Heritage List में शामिल होने के बराबर नहीं है. यह किसी स्थल के संभावित विश्व धरोहर नामांकन की दिशा में एक महत्वपूर्ण शुरुआती चरण है।


    चारों धरोहरों में क्या है खास?

    मध्य प्रदेश के इन चारों स्थलों की खासियत अलग-अलग है. कहीं हजारों साल पुरानी कला और धार्मिक परंपराओं के प्रमाण मिलते हैं तो कहीं मध्यकालीन मंदिर वास्तुकला और गोंड शासन की स्थापत्य विरासत दिखाई देती है.


    1. बाघ गुफाएं: पत्थरों पर दर्ज बौद्ध कला की कहानी

    धार जिले में बाघ नदी के किनारे विंध्य क्षेत्र की पहाड़ियों में स्थित बाघ गुफाएं नौ रॉक-कट बौद्ध गुफाओं का समूह हैं. UNESCO के अनुसार इनका विकास लगभग चौथी से छठी शताब्दी ईस्वी के बीच हुआ. इन गुफाओं की सबसे बड़ी पहचान यहां मौजूद भित्ति चित्र हैं. खासतौर पर गुफा संख्या-4, जिसे रंग महल के नाम से जाना जाता है, अपने म्यूरल्स के लिए प्रसिद्ध है.

    इन चित्रों में तत्कालीन जीवन, धार्मिक विषयों, संगीत, नृत्य और सामाजिक गतिविधियों की झलक मिलती है. UNESCO के रिकॉर्ड के अनुसार यहां बड़ी संख्या में प्राचीन अभिलेख भी मिले हैं, जो गुप्तकालीन राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियों से इसके संबंध की ओर संकेत करते हैं.


    2. गिन्नौरगढ़ किला: गोंड विरासत की मजबूत पहचान

    सीहोर जिले में रातापानी क्षेत्र के वन परिदृश्य के बीच स्थित गिन्नौरगढ़ किला मध्य प्रदेश की गोंड विरासत से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थल है. यह किला केवल सैन्य सुरक्षा के लिहाज से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि इसके आसपास की प्राकृतिक भौगोलिक संरचना और जल प्रबंधन व्यवस्था भी इसे खास बनाती है. किले की संरचना और आसपास के ऐतिहासिक अवशेष मध्य भारत में गोंड शासन की राजनीतिक व्यवस्था, वास्तुकला और जल प्रबंधन की परंपराओं को समझने में महत्वपूर्ण माने जाते हैं. UNESCO की Tentative List में गिन्नौरगढ़ किले की प्रविष्टि भी 8 जुलाई 2026 की है।


    3. बटेश्वर-पदावली-ककरामठ: एक जगह तीन ऐतिहासिक मंदिर समूह

    मुरैना जिले के चंबल क्षेत्र में स्थित बटेश्वर, पदावली और ककरामठ मंदिर समूह को एक संयुक्त विरासत स्थल के रूप में Tentative List में शामिल किया गया है. UNESCO के मुताबिक ये मंदिर मुख्य रूप से 8वीं से 11वीं शताब्दी के बीच विकसित हुए और मध्य भारत में प्रारंभिक मध्यकालीन नागर मंदिर वास्तुकला के विकास को दर्शाते हैं। बटेश्वर अपने बड़े मंदिर समूह के लिए जाना जाता है, जबकि पदावली की नक्काशी और ककरामठ की स्थापत्य विशेषताएं इस पूरे क्षेत्र की मंदिर निर्माण परंपरा को समझने में मदद करती हैं।

    UNESCO के अनुसार इन तीनों स्थलों को एक साथ देखने पर चंबल घाटी में विकसित क्षेत्रीय मंदिर स्थापत्य और कलात्मक परंपरा की तस्वीर सामने आती है.


    4. उदयगिरि गुफाएं: गुप्तकाल की धार्मिक और राजनीतिक विरासत

    विदिशा के पास स्थित उदयगिरि गुफाएं गुप्तकालीन भारत की धार्मिक और राजनीतिक अभिव्यक्ति के महत्वपूर्ण प्रमाणों में शामिल हैं. यहां चट्टानों को काटकर बनाई गई गुफाएं, मूर्तियां और अभिलेख प्राचीन धार्मिक परंपराओं के साथ तत्कालीन राजसत्ता के संबंध को भी सामने रखते हैं. उदयगिरि की सबसे चर्चित प्रतिमाओं में विशाल वराह प्रतिमा शामिल है. यह वैष्णव परंपरा और गुप्तकालीन राजकीय विचारधारा के अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है. UNESCO की एक अलग 2025 की Tentative List प्रविष्टि में उदयगिरि की गुफा संख्या-1 को उत्तर भारत के गुप्तकालीन मंदिरों की एक Serial Nomination का हिस्सा भी बनाया गया है।


    मध्य प्रदेश में अब 19 Tentative List entries?

    मध्य प्रदेश की ये चार नई प्रविष्टियां राज्य की विरासत को UNESCO के मंच पर और विस्तार देती हैं. UNESCO के आधिकारिक रिकॉर्ड में राज्य से जुड़ी कई अन्य प्रविष्टियां भी दर्ज हैं, जिनमें ग्वालियर किला, भोजेश्वर महादेव मंदिर, ओरछा का ऐतिहासिक समूह, धामनार का ऐतिहासिक समूह, खूनी भंडारा और रामनगर के गोंड स्मारक जैसी धरोहरें शामिल हैं। प्रदेश की विरासत सूची में प्राकृतिक और सांस्कृतिक दोनों तरह के स्थल शामिल हैं. भेड़ाघाट-लामेताघाट और सतपुड़ा टाइगर रिजर्व भी UNESCO की Tentative List में दर्ज हैं।


    Tentative List में शामिल होने का क्या मतलब है?

    किसी स्थल का UNESCO की Tentative List में शामिल होना यह बताता है कि संबंधित देश उसे भविष्य में World Heritage List के लिए नामांकित करने पर विचार कर रहा है. इसके बाद नामांकन, मूल्यांकन और UNESCO की निर्धारित प्रक्रियाओं के तहत आगे की कार्रवाई होती है. इसलिए इन चारों स्थलों का Tentative List में आना विश्व धरोहर का अंतिम दर्जा मिलना नहीं, बल्कि उस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

    मध्य प्रदेश की विरासत को मिलेगा नया मंच
    बाघ की भित्ति चित्रकारी से लेकर गिन्नौरगढ़ की गोंड स्थापत्य विरासत, चंबल के मंदिर समूह और उदयगिरि की गुप्तकालीन गुफाओं तक इन चार स्थलों की विशेषताएं मध्य प्रदेश के इतिहास की अलग-अलग परतों को सामने लाती हैं। UNESCO की आधिकारिक सूची में चारों स्थलों का शामिल होना प्रदेश की पुरातात्विक और सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

  • भारतवंशी अनिल मेनन की बड़ी उपलब्धि, पहला स्पेसवॉक सफल, ISS को मिलेगी ज्यादा ताकत

    भारतवंशी अनिल मेनन की बड़ी उपलब्धि, पहला स्पेसवॉक सफल, ISS को मिलेगी ज्यादा ताकत


    नई दिल्ली। भारतवंशी नासा अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन ने अपने करियर का पहला स्पेसवॉक सफलतापूर्वक पूरा कर अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) के पावर सिस्टम को मजबूत करने की दिशा में अहम काम किया। उनके साथ अंतरिक्ष यात्री जेसिका मेयर भी स्पेसवॉक पर थीं। दोनों ने स्टेशन के 3B पावर चैनल में मॉडिफिकेशन किट स्थापित की, जिससे भविष्य में नए रोल-आउट सोलर एरे (IROSA) लगाए जा सकेंगे।

    यह ISS के इतिहास का 281वां स्पेसवॉक था। जेसिका मेयर के लिए यह छठा स्पेसवॉक रहा, जबकि अनिल मेनन ने पहली बार स्टेशन के बाहर निकलकर यह उपलब्धि हासिल की।

    6 घंटे 27 मिनट तक चला स्पेसवॉक
    यह स्पेसवॉक गुरुवार सुबह 8:33 बजे EDT (भारतीय समयानुसार शाम 6:03 बजे) शुरू हुआ और करीब 6 घंटे 27 मिनट बाद 3:00 बजे EDT (भारतीय समयानुसार शुक्रवार तड़के 12:30 बजे) समाप्त हुआ। दोनों अंतरिक्ष यात्री क्वेस्ट एयरलॉक से बाहर निकले और ISS के बाहरी हिस्से में कई तकनीकी कार्य पूरे किए। मिशन का सबसे अहम हिस्सा स्टारबोर्ड-6 ट्रस पर मौजूद 3B पावर चैनल में माउंटिंग हार्डवेयर लगाना था।

    ISS को मिलेगी अतिरिक्त बिजली
    नासा के मुताबिक, इस काम के बाद स्टेशन पर भविष्य में नए IROSA सोलर एरे लगाए जा सकेंगे। ये सोलर एरे ISS को अतिरिक्त बिजली उपलब्ध कराएंगे, जिससे उसके महत्वपूर्ण सिस्टम बेहतर तरीके से काम कर सकेंगे। इन अतिरिक्त सोलर एरे की मदद से स्टेशन की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के साथ भविष्य में उसके सुरक्षित और नियंत्रित डीऑर्बिट मिशन में भी सहायता मिलेगी।

    IROSA के छह एरे पहले ही लगाए जा चुके
    नासा के अनुसार, 2021 से अब तक अंतरिक्ष यात्रियों ने अलग-अलग स्पेसवॉक के जरिए IROSA की छह असेंबली सफलतापूर्वक स्थापित की हैं। अब दो और सोलर एरे लगाए जाने बाकी हैं, जिन्हें इसी साल के अंत तक ISS तक पहुंचाने की योजना है।

    अनिल मेनन ने किए कई तकनीकी काम
    स्पेसवॉक के दौरान अनिल मेनन को आर्टिकुलेटिंग पोर्टेबल फुट रेस्ट्रेंट की मदद से ट्रस पर स्थिर स्थिति में रखा गया। इसके बाद दोनों अंतरिक्ष यात्रियों ने भविष्य में लगाए जाने वाले IROSA और 3B पावर चैनल के बीच बिजली पहुंचाने के लिए जरूरी केबलें बिछाईं। इसके अलावा ट्रस के एक हिस्से को मल्टी-लेयर इंसुलेशन से कवर किया गया। इसका उद्देश्य अंतरिक्ष के अत्यधिक तापमान से स्टेशन की संरचना को सुरक्षित रखना है।

    चांद को देखकर हुई दिलचस्प बातचीत
    स्पेसवॉक के दौरान जेसिका मेयर ने अनिल मेनन को चांद दिखाई देने की बात कही। मेयर ने उनसे कहा कि वे चांद देख सकते हैं। इस पर मेनन ने जवाब दिया कि चांद उनकी दाईं ओर है और वह उसे देख रहे हैं। मेनन ने मजाकिया अंदाज में वहां भविष्य के चंद्र आधार (मून बेस) की कल्पना भी की। इस बातचीत ने मिशन के तकनीकी काम के बीच एक दिलचस्प पल जोड़ दिया।

    13 और 25 अगस्त को भी होंगे स्पेसवॉक
    यह एक्सपीडिशन-75 के तहत अगस्त में होने वाले तीन स्पेसवॉक में पहला था। अगला स्पेसवॉक 13 अगस्त को होगा। इसमें अंतरिक्ष यात्री ISS के स्पेस-टू-ग्राउंड एंटीना को बदलेंगे। यह एंटीना स्टेशन और ह्यूस्टन स्थित मिशन कंट्रोल सेंटर के बीच तेज डेटा ट्रांसफर और संचार के लिए महत्वपूर्ण है।

    वहीं 25 अगस्त के स्पेसवॉक में पावर चैनल की केबलों और डेटा रिले सिस्टम को जोड़ा जाएगा। इसके साथ ही हार्मनी मॉड्यूल के फॉरवर्ड पोर्ट पर मौजूद डॉकिंग से जुड़े नेविगेशन उपकरण को भी बदला जाएगा। इन सभी कामों का उद्देश्य ISS के नियमित रखरखाव के साथ-साथ उसके भविष्य के डीऑर्बिट मिशन के लिए तैयारी करना है।

  • सफदरजंग अस्पताल की बड़ी उपलब्धि: सीने की हड्डी काटे बिना बदला दिल का वॉल्व, बना विश्व रिकॉर्ड

    सफदरजंग अस्पताल की बड़ी उपलब्धि: सीने की हड्डी काटे बिना बदला दिल का वॉल्व, बना विश्व रिकॉर्ड


    नई दिल्ली। दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल के डॉक्टरों ने रोबोटिक तकनीक की मदद से एक दुर्लभ और जटिल हृदय सर्जरी सफलतापूर्वक कर चिकित्सा क्षेत्र में नई उपलब्धि हासिल की है। डॉक्टरों ने बिना सीने की हड्डी (स्टर्नम) काटे मरीज के खराब हृदय वाल्व को बदल दिया। अस्पताल का दावा है कि इस तरह की सर्जरी दुनिया में पहली बार इस तकनीक और प्रक्रिया से की गई है।

    दाईं ओर था मरीज का दिल
    मरीज जन्म से एक दुर्लभ हृदय विकार से पीड़ित था। उसका दिल सामान्य स्थिति के विपरीत सीने के दाईं ओर था। साथ ही, हृदय की प्रमुख धमनियां भी अपनी सामान्य संरचना से अलग थीं। इस असामान्य बनावट के कारण हृदय का एक वाल्व गंभीर रूप से लीक कर रहा था, जिससे दिल पर लगातार अतिरिक्त दबाव पड़ रहा था और मरीज की हालत बिगड़ती जा रही थी।

    रोबोटिक तकनीक से हुई जटिल सर्जरी
    डॉ. अनुभव गुप्ता और उनकी टीम ने इस चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन को अंजाम दिया। पारंपरिक ओपन हार्ट सर्जरी की तरह सीने की हड्डी काटने के बजाय डॉक्टरों ने सीने में छोटे-छोटे चीरे लगाए। इसके बाद रोबोटिक आर्म्स और हाई-रिजॉल्यूशन 3D कैमरे की सहायता से खराब वाल्व को बदल दिया गया। ऑपरेशन से पहले डॉक्टरों ने मरीज के हृदय का 3D मॉडल तैयार किया, जिससे दिल की असामान्य संरचना को समझने और सर्जरी की सटीक योजना बनाने में मदद मिली।

    अस्पताल का विश्व रिकॉर्ड का दावा
    सफदरजंग अस्पताल के अनुसार, इस तरह की दुर्लभ हृदय संरचना वाले मरीज में बाईं ओर से रोबोटिक तकनीक के जरिए वाल्व रिप्लेसमेंट करने का यह दुनिया का पहला मामला है। अस्पताल ने इसे चिकित्सा विज्ञान में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है।

    रोबोटिक सर्जरी के फायदे
    डॉक्टरों के मुताबिक, इस तकनीक से ऑपरेशन के दौरान खून की कमी बहुत कम होती है। संक्रमण का खतरा घट जाता है, मरीज को कम दर्द होता है और वह अपेक्षाकृत कम समय में स्वस्थ होकर अस्पताल से छुट्टी पा सकता है।

    सरकारी अस्पताल के लिए बड़ी उपलब्धि
    अस्पताल की निदेशक डॉ. कविता शर्मा ने कहा कि यह सफलता सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की तकनीकी क्षमता को दर्शाती है। उनके अनुसार, अत्याधुनिक रोबोटिक तकनीक के माध्यम से अब सरकारी अस्पतालों में भी जटिल से जटिल हृदय रोगों का प्रभावी उपचार संभव हो रहा है।

  • MP के वन विभाग की बड़ी उपलब्धि… वन विहार से उड़ा गिद्ध को पाकिस्तान में मिली नई जिंदगी

    MP के वन विभाग की बड़ी उपलब्धि… वन विहार से उड़ा गिद्ध को पाकिस्तान में मिली नई जिंदगी


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के वन विभाग (Forest Department) ने वन्यजीव संरक्षण में टेक्नोलॉजी और इंटरनेशनल कॉर्डिनेशन (Technology and International Coordination in Conservation) का एक बेहतरीन उदाहरण पेश किया है. 2 साल की एक मादा सिनेरेयस गिद्ध जिसे भोपाल वन विहार में इलाज के बाद रिहा किया गया था, अब पाकिस्तानी सहयोग के चलते सुरक्षित है।

    इस गिद्ध को इसी साल 22 जनवरी को शाजापुर के सुसनेर से घायल अवस्था में रेस्क्यू किया गया था. वन विहार नेशनल पार्क के वल्चर कंजर्वेशन ब्रीडिंग सेंटर (VCBC) में इसका इलाज हुआ.

    इसे ‘फिट फॉर रिलीज’ घोषित करने के बाद माइक्रोचिप और GPS-GSM टेलीमेट्री डिवाइस से लैस किया गया. 25 मार्च को इसे रायसेन के हलाली डैम क्षेत्र में छोड़ा गया, जिससे इसकी रीयल-टाइम निगरानी संभव हो सकी. यह काम WWF-इंडिया और बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी (BNHS) के सहयोग से किया गया।


    पाकिस्तान में रेस्क्यू

    रिहाई के बाद निगरानी में पाया गया कि यह मादा गिद्ध राजस्थान होते हुए इंटरनेशनल बॉर्डर पार कर 6 अप्रैल तक पाकिस्तान पहुंच गई. 7 अप्रैल को सिग्नल नहीं मिले तो WWF-इंडिया ने तत्परता दिखाते हुए WWF-पाकिस्तान से संपर्क किया. पाकिस्तान वन विभाग और WWF-पाकिस्तान के सहयोग से इस गिद्ध को खानेवाल जिले में स्थानीय निवासियों से सुरक्षित बरामद कर लिया गया।

    मादा गिद्ध 7 अप्रैल को खानेवाल और मुल्तान क्षेत्रों में आए भीषण ओलावृष्टि तूफान के कारण उड़ान भरने में असमर्थ हो गई और जमीन पर पाई गई। वन्यजीव अधिकारियों ने इसे रेस्क्यू कर प्राथमिक इलाज दिया. WWF-पाकिस्तान की देखरेख में इसे स्थानीय वल्चर कैप्टिव ब्रीडिंग सेंटर में शिफ्ट किया गया. गिद्ध को हल्की चोटें आई थीं और अब वह स्वस्थ हो रहा है।

    वन विहार, WWF-इंडिया के माध्यम से WWF-पाकिस्तान के साथ लगातार संपर्क में है और गिद्ध के स्वास्थ्य की निगरानी की जा रही है. पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद इसे दोबारा प्राकृतिक आवास में छोड़ा जाएगा।


    भोपाल की मादा गिद्ध को पाकिस्तान के खानेवाल जिले में मिली नई जिंदगी.

    इससे पहले, साल 2025 में एक यूरेशियन ग्रिफॉन गिद्ध कजाकिस्तान तक 4300 किमी की यात्रा कर वापस भारत लौटा था. 23 फरवरी 2026 को भी 5 गिद्धों का सफल पुनर्वास और टैगिंग की गई।