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  • MP: पटवारियों पर सरकार का बड़ा एक्शन…. 27 की सेवाएं समाप्त… कइयों को थमाए नोटिस

    MP: पटवारियों पर सरकार का बड़ा एक्शन…. 27 की सेवाएं समाप्त… कइयों को थमाए नोटिस


    भोपाल।
    मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) में स्वामित्व योजना (SVAMITVA Scheme) के तहत ग्रामीण आबादी की संपत्तियों की रजिस्ट्री को लेकर सरकार (Government) और पटवारियों (Patwaris) के बीच टकराव बढ़ गया है। सरकार ने कार्रवाई तेज करते हुए देवास और आगर-मालवा (Dewas and Agar-Malwa) में 27 प्रोबेशनरी पटवारियों की सेवाएं समाप्त कर दी हैं। वहीं, अलग-अलग जिलों में कई पटवारियों को सेवा समाप्ति से पहले कारण बताओ नोटिस दिए गए हैं। ग्वालियर में भी बड़ी संख्या में पटवारियों को नोटिस मिलने की जानकारी सामने आई है। गुना में चार पटवारियों को सेवा समाप्ति के नोटिस दिए गए हैं, जबकि पटवारी संघ के जिलाध्यक्ष समेत चार पटवारियों के निलंबन की कार्रवाई की गई है। इसको लेकर अब पटवारी संघ ने भी नोटिस वापस नहीं लेने पर काम बंद करने की चेतावनी दी हैं।


    रजिस्ट्री में अड़ंगेबाजी का आरोप

    सरकार की कार्रवाई को स्वामित्व योजना के तहत संपत्तियों की रजिस्ट्री के काम में कथित देरी और अड़ंगेबाजी से जोड़कर देखा जा रहा है। सरकार की ओर से हालांकि कार्रवाई की वजह काम में लापरवाही और अनियमितता बताई जा रही है। कार्रवाई के विरोध में मध्यप्रदेश पटवारी संघ ने मोर्चा खोल दिया है। बुधवार को प्रदेशभर में पटवारियों ने जिला मुख्यालयों पर ज्ञापन सौंपकर नोटिस और कार्रवाई वापस लेने की मांग की। संघ ने चेतावनी दी है कि कार्रवाई नहीं रुकी तो ऑनलाइन राजस्व कार्य से दूरी बनाकर आंदोलन को अनिश्चितकाल तक बढ़ाया जा सकता है।


    नामांतरण के लिए 8 हजार मांगने वाले पटवारी पर मुकदमे की मंजूरी

    इधर, सीहोर जिले की जावर तहसील में पदस्थ पटवारी धर्मेंद्र सिंह राठौर के खिलाफ भी अभियोजन चलाने की मंजूरी दी गई है। उन पर भूमि नामांतरण के बदले रिश्वत मांगने का आरोप है। लोकायुक्त में शिकायत के अनुसार पटवारी ने नामांतरण के लिए 10 हजार रुपए की मांग की थी। शिकायत के सत्यापन के दौरान हुई बातचीत डिजिटल वॉयस रिकॉर्डर में दर्ज की गई, जिसमें 8 हजार रुपए में बात तय होने की जानकारी सामने आई। इसके बाद पंच साक्षियों की मौजूदगी में रिकॉर्डिंग का पंचनामा तैयार कर ट्रैप की कार्रवाई की गई। एफएसएल जांच में रिकॉर्ड की गई आवाज पटवारी धर्मेंद्र सिंह राठौर की होने की पुष्टि हुई। इन तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर सीहोर कलेक्टर बालागुरु के. ने अभियोजन की मंजूरी दी है।


    भोपाल में भी रिश्वत के आरोपी पटवारी पर कार्रवाई

    भोपाल में पटवारी मंगलेश खंडेलवाल के खिलाफ भी अभियोजन की स्वीकृति जारी की गई है। उन पर कोलार क्षेत्र में मकान के फर्जी नामांतरण और लीज रिन्यू कराने के बदले 8 हजार रुपए रिश्वत लेने का आरोप है। लोकायुक्त पुलिस ने उन्हें रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा था। एसडीएम के प्रतिवेदन और संबंधित दस्तावेजों की जांच के बाद भोपाल कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी प्रियंक मिश्रा ने पटवारी के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी दी है।

  • MP: सागर के बंड़ा में जहरीली शराब से 11 मौतों के बाद बड़ा एक्शन, 5 अधिकारी निलंबित

    MP: सागर के बंड़ा में जहरीली शराब से 11 मौतों के बाद बड़ा एक्शन, 5 अधिकारी निलंबित


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के सागर जिले (Sagar district) की बंडा तहसील में जहरीली शराब (Spurious liquor) पीने से हुई मौतों के मामले में मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) ने सख्त रुख अपनाया है. रविवार सुबह ही मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया था कि घटना के लिए जिम्मेदार किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा. इसके बाद प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 3 आबकारी और दो पुलिस अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया, जबकि एक सीनियर अफसर को जिले से हटाकर मुख्यालय अटैच कर दिया गया है।

    घटना बंडा तहसील के गोगरा खुर्द, नौरोज और पाटन गांवों में सामने आई है. शुरुआती प्रशासनिक जानकारी के अनुसार जहरीली शराब पीने से 10 लोगों की मौत हुई है, जबकि स्थानीय बीजेपी विधायक ने मृतकों की संख्या 11 बताई है. कई अन्य लोगों के बीमार होने की भी जानकारी सामने आई है।


    3 अधिकारी सस्पेंड, 1 मुख्यालय अटैच

    मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश पर प्रथम दृष्टया जिम्मेदार माने जाने पर सागर की सहायक आबकारी आयुक्त कीर्ति दुबे, सहायक जिला आबकारी अधिकारी दिलीप खंडाते और बंडा वृत्त की आबकारी उप-निरीक्षक प्रोशनी उरेती को सस्पेंड कर दिया गया है. वहीं, मामले में समान रूप से जिम्मेदार माने जाने पर उपायुक्त और संभागीय फ्लाइंग स्क्वाड प्रभारी नीरजा श्रीवास्तव को जिले से हटाकर ग्वालियर मुख्यालय अटैच किया गया है. यानी जहरीली शराब से हुई मौतों के मामले में कुल 4 अधिकारियों पर कार्रवाई की गई है।

    पुलिस विभाग ने भी इस प्रकरण में बंडा थाना प्रभारी श्री राजेंद्र सिंह कुशवाहा और गुगरा चौकी प्रभारी एसआई श्री पूरन लाल लड़िया को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रविवार, 6 सितंबर की सुबह ही स्पष्ट रूप से कह दिया था कि इस घटना के लिए दोषी किसी भी शख्स को बख्शा नहीं जाएगा।


    CM मोहन यादव ने कहा- दोषी किसी भी कीमत पर नहीं बचेंगे

    मुख्यमंत्री मोहन यादव ने घटना को बेहद संवेदनशील बताते हुए अधिकारियों को तत्काल जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री के मुताबिक, नई दिल्ली प्रवास के दौरान जैसे ही उन्हें सागर की घटना की जानकारी मिली, उन्होंने सागर जिले के प्रभारी मंत्री और संबंधित अधिकारियों को तत्काल जांच करने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि इस मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने प्रभावित क्षेत्र में तत्काल जांच के साथ-साथ पीड़ित परिवारों को राहत और बीमार लोगों के लिए समुचित उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा।


    मौके पर पहुंचा सीनियर अफसरों का दल

    मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद सागर संभाग के कमिश्नर, आईजी, कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक समेत वरिष्ठ अधिकारी प्रभावित इलाकों में पहुंचे. अधिकारी दल ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर घटना की जानकारी ली. इसके साथ ही अस्पतालों में भर्ती मरीजों के इलाज और चिकित्सा व्यवस्थाओं का जायजा लिया गया। प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्र में लगातार स्क्रीनिंग भी कराई जा रही है, ताकि शराब पीने के बाद बीमार हुए लोगों की पहचान कर उन्हें समय पर इलाज उपलब्ध कराया जा सके।


    10 मौतों की प्रशासनिक पुष्टि, विधायक ने बताया आंकड़ा 11

    सागर कलेक्टर प्रतिभा पाल के अनुसार, जिला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दूर बंडा तहसील के प्रभावित गांवों में अवैध जहरीली शराब पीने से 10 लोगों की मौत हुई है. हालांकि, स्थानीय बीजेपी विधायक वीरेंद्र लोधी ने मृतकों की संख्या 11 बताई है. उन्होंने बताया कि बंडा सिविल अस्पताल से करीब 25 लोगों को बेहतर इलाज के लिए दूसरे अस्पतालों में भेजा गया है।

    कलेक्टर ने बताया कि बुखार और सिरदर्द जैसी शिकायत वाले लोगों की स्क्रीनिंग की जा रही है. ऐसे तीन लोगों को बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (BMCH) भेजे जाने की जानकारी भी दी गई है. उनके मुताबिक, इन मरीजों की हालत गंभीर नहीं है। मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका को लेकर कलेक्टर ने फिलहाल कोई टिप्पणी नहीं की है. शुरुआती पोस्टमार्टम रिपोर्ट का भी इंतजार किया जा रहा है।


    ललितपुर से जहरीली शराब की सप्लाई का शक

    घटना की जांच में शराब के संभावित स्रोत को लेकर भी बड़ा खुलासा सामने आया है. शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि संदिग्ध शराब की सप्लाई उत्तर प्रदेश के ललितपुर से हुई थी।

    कलेक्टर प्रतिभा पाल के अनुसार, शुरुआती जांच में ललितपुर से इस तरह की जहरीली शराब की सप्लाई करने वाले एक गिरोह की जानकारी सामने आई है. चूंकि सागर का यह इलाका उत्तर प्रदेश की सीमा के नजदीक है, इसलिए इस एंगल की भी जांच की जा रही है. हालांकि, शराब की वास्तविक सप्लाई चेन और घटना के लिए जिम्मेदार लोगों की भूमिका की जांच अभी जारी है।


    प्रभावित इलाके की 7 शराब दुकानें सील

    घटना के बाद जिला प्रशासन ने एहतियाती कदम भी उठाए हैं. प्रभावित क्षेत्र में सात शराब दुकानों को सील कर दिया गया है और शराब के सैंपल लेने के निर्देश दिए गए हैं. प्रशासन ने अधिकारियों को अवैध शराब के कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए हैं।


    शराब पीने वालों से प्रशासन की अपील

    प्रशासन ने उन लोगों से तत्काल स्वास्थ्य जांच कराने की अपील की है, जिन्होंने हाल के दिनों में शराब का सेवन किया था और अब उन्हें उल्टी, सिरदर्द, बुखार या अन्य स्वास्थ्य संबंधी परेशानी महसूस हो रही है. अधिकारियों ने लोगों से कहा है कि ऐसे लक्षणों को नजरअंदाज न करें और तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल पहुंचकर मेडिकल जांच कराएं।


    कांग्रेस ने न्यायिक जांच की मांग की

    घटना को लेकर मध्य प्रदेश कांग्रेस ने भी राज्य सरकार पर हमला बोला है. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मामले की न्यायिक जांच की मांग की है। ग्वालियर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान पटवारी ने आरोप लगाया कि राज्य में शराब माफिया बेखौफ होकर लोगों की जान ले रहे हैं।

    वहीं, बंडा के पूर्व कांग्रेस विधायक तरवर लोधी ने दावा किया कि बंडा विकासखंड के कई गांवों में शनिवार रात लोगों ने शराब पी थी, जिसके बाद अचानक उनकी तबीयत बिगड़ने लगी. उन्होंने बताया कि कई लोगों को बंडा के सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहां कुछ लोगों को मृत घोषित कर दिया गया, जबकि अन्य को सागर रेफर किया गया।


    गुजरात की घटना के बाद MP में जहरीली शराब से मौतों ने बढ़ाई चिंता

    मध्य प्रदेश में यह घटना ऐसे समय हुई है, जब कुछ दिन पहले गुजरात के भावनगर जिले में जहरीली शराब पीने से 13 लोगों की मौत की घटना सामने आई थी। सागर की घटना के बाद अब प्रशासन की नजर अवैध शराब के नेटवर्क और इसके संभावित सप्लाई स्रोत पर है. फिलहाल पोस्टमार्टम रिपोर्ट, शराब के सैंपल और जांच के आधार पर यह स्पष्ट होने का इंतजार है कि मौतों की वास्तविक वजह क्या थी और जहरीली शराब की सप्लाई में कौन-कौन लोग शामिल थे। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पहले ही साफ कर दिया है कि जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

  • US वीजा पर बड़े एक्शन की तैयारी….. 2 लाख लोगों पर लटकी देश निकाला की तलवार!

    US वीजा पर बड़े एक्शन की तैयारी….. 2 लाख लोगों पर लटकी देश निकाला की तलवार!


    वाशिंगटन।
    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) का प्रशासन देश में शरण पाने के लिए आवेदन कर चुके या फिलहाल आवेदन की प्रक्रिया में शामिल दो लाख तक विदेशी नागरिकों के कारोबारी और पर्यटन वीजा (Tourist Visa) रद्द करने की तैयारी कर रहा है। यदि ऐसा होता है, तो यह अमेरिकी इतिहास (American History) में एक साथ इतनी बड़ी संख्या में वीजा रद्द किए जाने की सबसे बड़ी कार्रवाई होगी और इसे लेकर कानूनी चुनौतियां सामने आने की संभावना है।

    अमेरिकी विदेश विभाग के दस्तावेजों और दो अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यदि इस फैसले को चुनौती नहीं दी गई या इसमें बदलाव नहीं किया गया, तो विदेश विभाग आने वाले हफ्तों में 2016 से 2026 के बीच जारी किए गए बी1 और बी2 वीजा रद्द करने की घोषणा कर सकता है। इसमें ऐसे वीजा धारक शामिल होंगे, जिन्होंने अमेरिका में शरण के लिए आवेदन किया है या वर्तमान में शरण मांग रहे हैं। यह कार्रवाई गृह सुरक्षा विभाग (डीएचएस) के समन्वय से की जाएगी।


    क्या है बी1 और बी2 वीजा

    बी1 वीजा आम तौर पर कारोबारी यात्राओं के लिए जारी किए जाते हैं, जबकि बी2 वीजा पर्यटन, परिवार से मिलने या चिकित्सा उपचार के लिए जारी किए जाते हैं। विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने कहा, ‘हम डीएचएस के साथ समन्वय कर ऐसे विदेशी नागरिकों की पहचान करने और उनके गैर-आप्रवासी वीजा रद्द करने का काम कर रहे हैं, जो अमेरिका में अल्पकालिक आगंतुक के रूप में आए थे, लेकिन बाद में यहां स्थायी रूप से रहने के लिए शरण का आवेदन दाखिल कर देते हैं।’

    उन्होंने वीजा रद्द किए जाने की संभावित संख्या पर टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा, ‘चूंकि यह प्रक्रिया जारी रहेगी, इसलिए रद्द किए जाने वाले वीजा की संख्या लगातार बदलती रहेगी और यह कार्रवाई चरणबद्ध तरीके से की जाएगी।’


    क्या तुरंत देश से निकाल दिए जाएंगे 2 लाख लोग

    अधिकारियों ने कहा कि वीजा रद्द होने का मतलब यह जरूरी नहीं है कि संबंधित लोगों को तुरंत अमेरिका से निर्वासित कर दिया जाएगा। अधिकारियों ने नाम न उजागर करने की शर्त पर बताया कि फिलहाल जिन लोगों के शरण संबंधी मामले लंबित हैं, उनमें से अधिकांश की श्रेणी बदली जा सकती है, लेकिन वे कारोबारी या पर्यटन यात्री के रूप में अपना वीजा दर्जा खो देंगे।


    वीजा पर जारी हैं पाबंदियां

    राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पिछले साल दूसरी बार कार्यभार संभालने के बाद से उनके प्रशासन ने वीजा आवेदकों पर लगातार पाबंदियां कड़ी की हैं। इनमें आवेदकों से उनके सोशल मीडिया इतिहास के बारे में अधिक जानकारी मांगना, वीजा प्रक्रिया के लिए महंगे बॉन्ड जमा करने की अनिवार्यता और कुछ देशों के नागरिकों को वीजा जारी करने पर पूरी तरह रोक लगाना शामिल है।

    उप विदेश मंत्री क्रिस्टोफर लैंडौ ने सोमवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में ऐसे लोगों को निशाने पर लिया, जिनके बारे में उनका कहना था कि वे अमेरिका में प्रवेश करने के लिए पर्यटक और कारोबारी वीजा का इस्तेमाल करते हैं और फिर शरण के लिए आवेदन कर देते हैं।

    वर्तमान में बी1 और बी2 वीजा के लिए आवेदन करने वाले लोगों से यह पुष्टि करने को कहा जाता है कि वे अमेरिका में शरण के लिए आवेदन नहीं करेंगे। साथ ही, उन्हें यह भी साबित करना होता है कि वे अपने देश लौटने का इरादा रखते हैं।


    करीब 2 लाख हो चुके हैं रद्द

    पिछले 18 महीनों में विदेश विभाग करीब 1.75 लाख वीजा रद्द कर चुका है। इनमें ऐसे लोग शामिल हैं जिन्हें नशे में वाहन चलाने से लेकर दुष्कर्म और लूट जैसे अपराधों के लिए दोषी ठहराया गया है या जिन पर ऐसे अपराधों के आरोप हैं। इसके अलावा अमेरिका की नीतियों, खासकर पश्चिम एशिया से जुड़ी नीतियों के खिलाफ सार्वजनिक रूप से बोलने वाले कुछ लोगों के वीजा भी रद्द किए गए हैं।

    ट्रंप प्रशासन ने गर्भवती महिलाओं द्वारा अमेरिका आकर यहां बच्चे को जन्म देकर उसे यहां की नागरिकता दिलाने के उद्देश्य वाले विदेशियों के ‘बर्थ टूरिज्म’ (जन्म पर्यटन) पर भी कार्रवाई तेज कर दी है।

  • मप्रः दतिया उपचुनाव में हार के बाद भाजपा की बड़ी कार्रवाई, जिला-मंडल से बूथ तक की कार्यकारिणी भंग

    मप्रः दतिया उपचुनाव में हार के बाद भाजपा की बड़ी कार्रवाई, जिला-मंडल से बूथ तक की कार्यकारिणी भंग


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर उप चुनाव में मिली हार के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बड़ी कार्रवाई की है। पार्टी नेतृत्व ने जिला कार्यकारिणी समेत दतिया के सभी मंडल, मोर्चा, प्रकोष्ठ, प्रकल्प और विभागों की इकाइयों को भंग कर दिया है।

    पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने मंगलवार की रात दतिया उपचुनाव में हार की समीक्षा के लिए बनाई गई विशेष समिति की अनुशंसा यह कार्रवाई की है। दरअसल, मंगलवार दोपहर करीब 12 बजे मुख्यमंत्री निवास पर मुख्यमंत्री मोहन यादव एवं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल सहित वरिष्ठ नेताओं की उच्च स्तरीय बैठक हुई थी। बैठक के बाद दतिया उप चुनाव के परिणाम की समीक्षा के लिए दो सदस्यीय समिति का गठन किया गया था।

    समिति गठन के छह घंटे बाद ही भाजपा संगठन ने दतिया जिलाध्यक्ष रघुवीर सिंह कुशवाह सहित जिला पदाधिकारियों, जिला कार्य समिति, मंडल मोर्चा, प्रकोष्ठ, प्रकल्प एवं विभागों की समस्त वर्तमान संगठनात्मक इकाइयां तत्काल प्रभार से पदमुक्त कर दीं। समिति की जांच रिपोर्ट से पार्टी संगठन ने केंद्रीय नेतृत्व को भी अवगत कराया और इसके बाद मंगलवार देर रात कार्रवाई की गई।

    गौरतलब है कि दतिया उपचुनाव में भाजपा ने पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा की जगह आशुतोष तिवारी को टिकट दिया था। जिसके बाद पार्टी कार्यकर्ताओं ने तीखे विरोध प्रदर्शन किए। कई कार्यकर्ताओं पर केस दर्ज किए गए थे। इसके बाद नरोत्तम मिश्रा को खुद सामने आकर समर्थकों से तिवारी का समर्थन करने की अपील करनी पड़ी थी। दतिया में नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने के बाद जिला अध्यक्ष रघुवीर शरण कुशवाह समेत कई पार्टी पदाधिकारियों ने इस्तीफे दे दिए थे। इस पर संगठन ने कहा था कि कोई भी इस्तीफा स्वीकार नहीं किया जाएगा। लेकिन अब उपचुनाव हारने के बाद जिले की पूरी टीम को हटा दिया गया है।

    भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी ने बैठक में दिए भितरघात के प्रमाण

    मुख्यमंत्री आवास पर हार के कारणों की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष, उपचुनाव प्रभारी और सांसद भारत सिंह कुशवाह, कई मंत्री और संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों की उपस्थिति में पार्टी प्रत्याशी आशुतोष तिवारी शिकायतों की आडियो रिकार्डिंग लेकर पहुंचे थे। उन्होंने भावुक होते हुए अपनी बात रखी और चुनाव के दौरान भितरघात संबंधी वाट्सएप चैट के स्क्रीनशाट भी दिखाए। बैठक में हार के कारणों, संगठन की भूमिका, भितरघात की शिकायतों पर चर्चा के बाद परिणाम की समीक्षा करने के लिए दो सदस्यीय समिति बनाने का निर्णय लिया गया था। इसमें प्रदेश महामंत्री गौरव रणदिवे एवं वरिष्ठ नेता अंबाराम कराड़ा को सदस्य बनाया गया।

    पार्टी ने हार का ठीकरा सबसे पहले नरोत्तम समर्थकों की टीम मानी जाने वाली भाजपा कार्यकारिणी पर ही फोड़ा। इस कार्यकारिणी में जिलाध्यक्ष रघुवीरसिंह कुशवाह, नरोत्तम मिश्रा के ही समर्थक माने जाते हैं। इसके अलावा कार्यकारिणी में महामंत्री से लेकर उपाध्यक्ष व सभी मंडल अध्यक्ष, मोर्चा प्रभारी भी नरोत्तम टीम के ही बताए जाते हैं। यही कारण रहा कि जब पार्टी आलाकमान ने पूर्व गृहमंत्री डॉ. मिश्रा का टिकट बदला तो यह पूरी कार्यकारिणी सामूहिक तौर पर इस्तीफा देने को खड़ी हो गई।

    इतना ही नहीं भाजपा के जिला कार्यालय को ही समर्थकों ने अपने उपद्रव का अखाड़ा बनाया था। यहां पर मात्र डॉ. मिश्रा की एक मात्र कार्यकर्ता बैठक के अलावा कोई भी चुनावी गतिविधि नहीं हुई। पूरे चुनाव में वहां सन्नाटा पसरा रहा।

    हालांकि उपचुनाव सिर पर देख प्रदेश आलाकमान ने इतने बड़े विरोध को शांत करने के लिए उस समय इस्तीफे स्वीकार नहीं किए जाने की रणनीति अपनाई थी, ताकि पार्टी का डैमेज कंट्रोल किसी तरह रोका जा सके। यही कारण रहा कि प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल सहित मुख्यमंत्री मोहन यादव व प्रदेश प्रभारी महेंद्र सिंह ने दतिया में ही लगातार आकर चुनावी कमान पर निगरानी बनाए रखी। जिसके चलते ही भाजपा की हार का आंकड़ा चार अंकों में रह पाया।

    इधर पार्टी सूत्रों की मानें तो इस उपचुनाव में भीतरघाती इस स्तर पर सक्रिय थे कि वह हार का आंकड़ा 20 हजार तक पहुंचाने के लिए ताकत लगा रहे थे। कांग्रेस की दतिया में जीत का यही सबसे बड़ा कारण भी रहा। वहीं चुनाव परिणाम आने के बाद जहां कांग्रेस खेमे में जश्न का माहौल है, वहीं भाजपा के कई स्थानीय खेमों में सन्नाटा पसरा हुआ है।

    पार्टी ने हार के कारणों की समीक्षा के लिए दो सदस्यीय समिति गठित कर संगठनात्मक मंथन का दौर जारी है। इस बीच जिला कार्यकारिणी भंग होने और भीतरघात के आरोपों ने दतिया के राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है।

    भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक हेमंत खंडेलवाल ने प्रदेश महामंत्री गौरव रणदिवे और वरिष्ठ नेता अंबाराम कराड़ा को समीक्षा समिति में शामिल किया है। समिति चुनाव से जुड़े पदाधिकारियों, वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं से दतिया में चर्चा कर यह पता लगाएगी कि किन कारणों से पार्टी उपचुनाव में अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर सकी।

  • FSSAI की बड़ी कार्रवाई… डाबर के कई उत्पादों की बिक्री पर 100% प्योर वाले दावों के साथ रोक

    FSSAI की बड़ी कार्रवाई… डाबर के कई उत्पादों की बिक्री पर 100% प्योर वाले दावों के साथ रोक


    नई दिल्ली।
    भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (Food Safety and Standards Authority of India- FSSAI) ने डाबर इंडिया लिमिटेड (Dabur India Limited) के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है. FSSAI ने डाबर के कई प्रोडक्ट्स पर ‘100 प्रतिशत’ वाले भ्रामक दावों (Misleading claims) के साथ बिक्री करने पर रोक लगा दी है.

    FSSAI ने जांच में पाया कि वेबसाइट पर प्रोडक्ट्स के लिए ‘100% नेचुरल’, ‘100% प्योर’, ‘100% प्योरिटी गारंटेड’, ‘100% ऑर्गेनिक’ और ‘100% टेंडर कोकोनट वॉटर’ जैसे दावों का खुलकर इस्तेमाल किया जा रहा था।

    ऑथोरिटी ने बताया कि इस तरह के दावे फूड सिक्योरिटी लॉ का उल्लंघन करते हैं. ऐसे दावे ‘खाद्य सुरक्षा एवं मानक (विज्ञापन और दावे) विनियम, 2018’ के खिलाफ हैं. ये दावे अस्पष्ट और असत्यापित हैं, जो सीधे तौर पर ग्राहकों को गुमराह करते हैं।
    .

    किन प्रोडक्ट्स पर लगा ये बैन?

    FSSAI ने सोशल मीडिया पर बताया कि ‘100 प्रतिशत’ वाले भ्रामक दावों के साथ बिक्री करने वाले इस रोक के दायरे में डाबर का शहद, गाय का घी, सेब का सिरका, वर्जिन कोकोनट ऑयल, तिल का तेल, नारियल पानी और नारियल दूध जैसे प्रोडक्ट्स शामिल हैं. इसके अलावा, ‘डाबर हिमालयन ऑर्गेनिक एप्पल साइडर विनेगर’ और ‘डाबर ऑर्गेनिक हनी’ पर बिना वैध अनुमति के ‘जैविक भारत’ लोगो लगाया गया था।

    वहीं ‘डाबर होममेड कोकोनट मिल्क’ पर ‘100% शुद्धता’ का दावा किया गया था, जो कंपाउंड फूड्स के लिए नियम के मुताबिक पूरी तरह बैन है.


    15 दिनों के भीतर मांगी रिपोर्ट

    FSSAI ने बताया कि उसने डाबर को पहले भी नोटिस जारी कर इन भ्रामक दावों को हटाने का निर्देश दिया था. लेकिन कंपनी की ओर से कोई ठोस सुधार नहीं किया गया. अब FSSAI ने डाबर इंडिया को इन सभी प्रोडक्ट्स की बिक्री तुरंत रोकने के आदेश दिए हैं. साथ ही, कंपनी को 15 दिनों के भीतर अपनी एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) सौंपने को कहा है।

    बता दें कि FSSAI फूड सिक्योरिटी को लेकर काफी सख्ती बरत रहा है. ऐसे में कई बड़ी कंपनियां उसके रडार पर हैं।

  • मप्रः दतिया उपचुनाव के नतीजों से पहले कांग्रेस की बड़ी कार्रवाई, पूर्व विधायक राजेंद्र भारती 6 साल के लिए निष्कासित

    मप्रः दतिया उपचुनाव के नतीजों से पहले कांग्रेस की बड़ी कार्रवाई, पूर्व विधायक राजेंद्र भारती 6 साल के लिए निष्कासित


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश में दतिया विधानसभा उपचुनाव के नतीजों से ठीक पहले कांग्रेस आलाकमान ने बड़ा संगठनात्मक फैसला लेते हुए पूर्व विधायक राजेंद्र भारती को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से छह वर्ष के लिए निष्कासित कर दिया है। इस संबंध में रविवार को कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवं मध्य प्रदेश के प्रभारी हरीश चौधरी द्वारा आधिकारिक आदेश जारी किया गया है।

    उपचुनाव के नतीजों के ठीक मुहाने पर पूर्व विधायक पर की गई इस अनुशासनात्मक कार्रवाई से पार्टी के आंतरिक घटनाक्रम और स्थानीय समीकरणों को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। दतिया उपचुनाव के लिए मतों की गिनती 3 अगस्त को होगी। मतगणना से ठीक 24 घंटे पहले पार्टी द्वारा अपने ही वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक को बाहर का रास्ता दिखाने के इस फैसले को राजनीतिक दृष्टि से काफी संवेदनशील और महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    दरअसल, कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह लगातार राजेंद्र भारती पर चुनाव में भीतरघात और पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप लगा रहे थे। हाल के दिनों में दोनों नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप खुले तौर पर सामने आए थे।

    राजेंद्र भारती दतिया की राजनीति का बड़ा चेहरा रहे हैं। वे तीन बार विधायक रह चुके हैं और वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में तत्कालीन गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को हराकर पूरे प्रदेश की राजनीति में चर्चा का केंद्र बन गए थे। उनके पिता स्वर्गीय श्याम सुंदर श्याम भी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधायक रहे थे, जिससे दतिया में भारती परिवार का मजबूत राजनीतिक आधार माना जाता है।

    हालांकि, इसी वर्ष एक पुराने सहकारी बैंक धोखाधड़ी मामले में विशेष अदालत से तीन वर्ष की सजा मिलने के बाद उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त हो गई थी। इसी कारण दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव कराया गया। बाद में दोषसिद्धि पर रोक पाने की उनकी कोशिशों के बीच मामला उच्च न्यायालय तक पहुंचा, लेकिन वे चुनाव नहीं लड़ सके।

    उपचुनाव में कांग्रेस ने पूर्व विधायक घनश्याम सिंह को उम्मीदवार बनाया। मतदान के बाद घनश्याम सिंह ने राजेंद्र भारती पर भाजपा के साथ मिलकर भीतरघात करने और कांग्रेस प्रत्याशी को हराने की कोशिश करने जैसे गंभीर आरोप लगाए। इन आरोपों के बाद पार्टी में अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग तेज हो गई थी। अब मतगणना से पहले कांग्रेस ने राजेंद्र भारती को छह साल के लिए निष्कासित कर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है।

  • साइबर अटैक मामले में सेबी का सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज पर बड़ा एक्शन… ठोका ₹1 करोड़ का जुर्माना

    साइबर अटैक मामले में सेबी का सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज पर बड़ा एक्शन… ठोका ₹1 करोड़ का जुर्माना


    नई दिल्ली।
    देश के शेयर बाजार (Stock Market) से जुड़ी सबसे बड़ी संस्थाओं में से एक सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज (Central Depository Services- CDSL) पर SEBI ने बड़ा एक्शन लिया है। सेबी (SEBI) ने कंपनी पर 1 करोड़ रुपये का जुर्माना (A fine of ₹1 crore) लगाया है। यह कार्रवाई नवंबर 2022 में हुए एक बड़े मैलवेयर (Malware) साइबर अटैक से जुड़ी सुरक्षा खामियों के कारण की गई है। उस समय इस साइबर हमले की वजह से CDSL की कई महत्वपूर्ण सेवाएं प्रभावित हुई थीं और शेयर बाजार के सेटलमेंट (Settlement) में भी देरी हुई थी। आइए इसको जरा विस्तार से समझते हैं।

    SEBI के आदेश के मुताबिक, CDSL अपनी साइबर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत रखने में कई स्तरों पर विफल रही। नियामक का कहना है कि अगर कंपनी ने समय रहते जरूरी सुरक्षा उपाय अपनाए होते, तो इस तरह का हमला टाला जा सकता था। इसी कारण सेबी ने 90 लाख रुपये का जुर्माना SEBI एक्ट के तहत और 10 लाख रुपये डिपॉजिटरीज़ एक्ट (Depositories Act) के तहत लगाया है। कंपनी को आदेश मिलने के 45 दिनों के अंदर यह राशि जमा करनी होगी।


    क्या और कब का है मामला?

    यह मामला 18 नवंबर 2022 का है। उस दिन सुबह करीब 3 बजे, जब दिनभर के सभी ऑपरेशन पूरे हो चुके थे, CDSL ने पाया कि उसके कुछ सर्वर और कर्मचारियों के कंप्यूटर अचानक काम करना बंद कर चुके हैं। जांच में पता चला कि कंपनी के सिस्टम पर एक मैलवेयर अटैक हुआ है। इसके बाद CDSL ने तुरंत अपने नेटवर्क को डिस्कनेक्ट किया, प्रभावित सर्वर अलग किए और वायरस के फैलाव को रोकने के लिए कई कदम उठाए।


    सिस्टम करीब 54 घंटे तक प्रभावित

    हालांकि, कंपनी ने अगले दिन तक सिस्टम को काफी हद तक रिकवर कर लिया, लेकिन इस दौरान कई महत्वपूर्ण सेवाएं बाधित रहीं। सेबी के अनुसार, सेटलमेंट सिस्टम लगभग 46 घंटे और इंटर-डिपॉजिटरी ट्रांसफर सिस्टम करीब 54 घंटे तक प्रभावित रहा। इसका असर केवल CDSL तक सीमित नहीं था, बल्कि पूरे शेयर बाजार के सेटलमेंट सिस्टम पर भी पड़ा।

    जांच में सबसे बड़ी लापरवाही ADFS (Active Directory Federation Services) सर्वर को लेकर सामने आई। यह इंटरनेट से जुड़ा हुआ सर्वर था, लेकिन CDSL ने इसे “क्रिटिकल एसेट” नहीं माना। इसका मतलब यह हुआ कि इस सर्वर की नियमित सुरक्षा जांच, VAPT (Vulnerability Assessment and Penetration Testing) नहीं कराई गई। यही सर्वर साइबर अपराधियों के लिए कंपनी के नेटवर्क में घुसने का मुख्य रास्ता बन गया।

    SEBI ने कहा कि CDSL का यह तर्क स्वीकार नहीं किया जा सकता कि इस सर्वर पर निवेशकों का डेटा नहीं था, इसलिए इसे महत्वपूर्ण नहीं माना गया। नियामक ने साफ कहा कि इंटरनेट से जुड़े सभी सर्वर अपने आप में संवेदनशील होते हैं और उन्हें सर्वोच्च स्तर की सुरक्षा मिलनी चाहिए।

    इतना ही नहीं, जांच में यह भी सामने आया कि एक डोमेन एडमिन अकाउंट का पासवर्ड बेहद कमजोर था, जिसे आसानी से “ब्रूट फोर्स” तकनीक से तोड़ा जा सकता था। इसके अलावा इस अकाउंट का पासवर्ड “Never Expire” पर सेट था, यानी वह कभी समाप्त नहीं होता था। इससे साइबर हमलावर लंबे समय तक सिस्टम में बिना पकड़े सक्रिय रह सके।

    SEBI ने यह भी पाया कि CDSL ने अपने SIEM (Security Information and Event Management) सिस्टम में ADFS सर्वर को जोड़ा ही नहीं था। इसका नतीजा यह हुआ कि संदिग्ध गतिविधियों से जुड़े कई अलर्ट कभी रिकॉर्ड ही नहीं हुए। कुछ मामलों में जहां अलर्ट मिले भी, उन्हें समय पर देखा या स्वीकार नहीं किया गया। इससे हमलावरों को सिस्टम के अंदर बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ने का मौका मिल गया।

    दिलचस्प बात यह है कि इस मामले में उस समय के CISO (Chief Information Security Officer) राजेश नाडकर्णी और CTO (Chief Technology Officer) अमित महाजन को भी नोटिस भेजा गया था। हालांकि, सेबी ने दोनों अधिकारियों के खिलाफ जांच पूरी करने के बाद उन पर कोई आर्थिक जुर्माना नहीं लगाया और कार्यवाही समाप्त कर दी।

    यह मामला पूरे फाइनेंशियल सेक्टर के लिए एक बड़ा सबक है। आज जब शेयर बाजार पूरी तरह डिजिटल हो चुका है और करोड़ों निवेशकों का डेटा ऑनलाइन मौजूद है, तब साइबर सुरक्षा में छोटी-सी चूक भी बड़े फाइनेंशियल और ऑपरेशन नुकसान का कारण बन सकती है। SEBI का यह फैसला साफ संकेत देता है कि अब बाजार से जुड़ी संस्थाओं को साइबर सुरक्षा के नियमों का सख्ती से पालन करना होगा। मजबूत सुरक्षा व्यवस्था केवल कंपनियों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि निवेशकों के भरोसे की भी सबसे बड़ी गारंटी है।

  • US की H-1B वीजा फर्जीवाड़े पर बड़ी कार्रवाई….. भारतीय दिग्गज IT समेत कई बड़ी कंपनियां रडार पर

    US की H-1B वीजा फर्जीवाड़े पर बड़ी कार्रवाई….. भारतीय दिग्गज IT समेत कई बड़ी कंपनियां रडार पर


    वाशिंगटन।
    अमेरिका (America) ने H-1B और पर्म (PERM) वर्क वीजा में चल रही कथित धोखाधड़ी के खिलाफ एक बड़ा जांच अभियान छेड़ दिया है। अमेरिकी श्रम विभाग के एक शीर्ष अधिकारी ने बताया कि इस बड़े फर्जीवाड़े की जांच के रडार पर दिग्गज भारतीय आईटी कंपनी ‘कॉग्निजेंट’ (Leading Indian IT company ‘Cognizant’) समेत कई बड़ी कंपनियां शामिल हैं।


    उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व में हुआ एक्शन

    वीजा से जुड़े इस बड़े गोरखधंधे के खिलाफ यह सख्त कदम अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (US Vice President JD Vance) के नेतृत्व वाली ‘टास्क फोर्स टू एलिमिनेट फ्रॉड’ के तहत उठाया गया है।


    कैसे खुला फर्जीवाड़े का राज?

    श्रम विभाग के तहत काम करने वाले ‘ऑफिस ऑफ द इंस्पेक्टर जनरल’ (OIG) ने बड़े स्तर पर चल रहे इस फर्जीवाड़े का पर्दाफाश किया है। OIG के आधिकारिक बयान में जांच से जुड़ी कई अहम बातें सामने आई हैं।

    कई नियोक्ताओं और लेबर ब्रोकर्स ने मिलकर वीजा के लिए फर्जी आवेदन जमा किए। विदेशी कामगारों का शोषण किया गया, उनसे जबरन कम वेतन पर काम कराया गया और उनके पैसों में अवैध कटौती की गई। कम मजदूरी वाले विदेशी कर्मचारियों से बाजार को भर दिया गया, जिसका सीधा नुकसान अमेरिकी कामगारों को हुआ और उनकी नौकरियां छिन गईं।


    ‘दर्जनों कंपनियों को जारी किए गए समन’

    बुधवार को फॉक्स बिजनेस से बातचीत के दौरान श्रम विभाग के इंस्पेक्टर जनरल एंथोनी डी एस्पोसिटो ने इस कार्रवाई को लेकर खुलकर बात की। उन्होंने कहा, “हमने इस मामले में पहले ही दर्जनों समन जारी कर दिए हैं। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि हम जांच में मिले हर एक सुराग की तह तक जाएं।”

    आईटी दिग्गज कॉग्निजेंट का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया, “हमारे पास ऐसे व्हिसलब्लोअर्स मौजूद हैं जो ‘कॉग्निजेंट’ जैसी कुछ सबसे बड़ी कंपनियों के बारे में जानकारी दे रहे हैं। ये कंपनियां पर्म और H-1B वीजा से जुड़े मुद्दों में पहले से ही काफी चर्चा में रही हैं।”


    अमेरिकी नागरिकों की नौकरियों से समझौता नहीं

    OIG ने अपने बयान में स्पष्ट किया है कि ऐसे जालसाज उन श्रम कार्यक्रमों की साख को नुकसान पहुंचाते हैं, जिन्हें देश में श्रमिकों की वास्तविक कमी को दूर करने के लिए बनाया गया है। इन कार्यक्रमों का मकसद अमेरिकी नागरिकों की नौकरियों की कीमत पर भ्रष्ट लोगों की जेब भरना बिल्कुल नहीं है।

    जांच एजेंसी ने कहा कि वह विदेशी गेस्ट वर्कर वीजा सिस्टम का गलत इस्तेमाल करने वाले मानव तस्करी और जबरन मजदूरी कराने वाले पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। संस्था का साफ कहना है कि वह उन सभी साजिशों को जड़ से खत्म करेगी जो मजबूर मजदूरों का शोषण करते हैं और अमेरिकी नागरिकों के हक की नौकरियां छीनते हैं।

  • MP: इस नेता ने PM मोदी की अपील के विरुद्ध निकाली 200 गाड़ियों की रैली, CM का बड़ा एक्शन… नियुक्ति निरस्त

    MP: इस नेता ने PM मोदी की अपील के विरुद्ध निकाली 200 गाड़ियों की रैली, CM का बड़ा एक्शन… नियुक्ति निरस्त


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) ने गुरुवार को मध्य प्रदेश टेक्स्ट बुक कॉर्पोरेशन (Madhya Pradesh Text Book Corporation) के नवनियुक्त अध्यक्ष सौभाग्य सिंह (Saubhagya Singh) को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। यह नोटिस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से सादगी बरतने की अपील के बावजूद 200 गाड़ियों की एक जश्न वाली रैली निकालने के लिए दिया गया है।

    अधिकारियों ने बताया कि नोटिस का जवाब मिलने तक सौभाग्य सिंह पर अपने ऑफिस में प्रवेश, सरकारी वाहनों और अन्य सुविधाओं का इस्तेमाल करने पर रोक लगा दी गई है। उन्होंने आगे बताया कि जांच पूरी होने तक उन्हें सौंपी गई सभी प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियां तत्काल प्रभाव से खत्म कर दी गई हैं।

    उन्होंने कहा, ”मुख्यमंत्री कार्यालय ने मितव्ययिता उपायों के घोर उल्लंघन का संज्ञान लिया है। सरकार ने वाहन रैली को अनावश्यक और सरकार की सादगी की नीति के खिलाफ माना है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि दिखावा और अनुशासनहीनता बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”


    भाजपा नेता ने सैकड़ों गाड़ियों संग रैली निकाली, पार्टी ने पद से हटाया

    ऐसे ही एक मामले में सैकड़ों गाड़ियों के साथ रैली निकालने के आरोप में भाजपा ने मध्य प्रदेश के भिंड जिले के किसान मोर्चा अध्यक्ष को पद से हटा दिया है। पार्टी पदाधिकारियों के अनुसार, हाल ही में इस पद पर नियुक्त किए गए सज्जन सिंह यादव को मध्य प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के आदेश पर पद से हटाया गया है। बताया गया कि सज्जन सिंह यादव के किसान मोर्चा अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभालने के अवसर पर बुधवार को भिंड शहर में एक रैली आयोजित की गई थी, जिसमें सैकड़ों वाहन शामिल हुए थे। भिंड शहर भोपाल से लगभग 500 किलोमीटर दूर है।

    भाजपा ने यादव को जारी पत्र में कहा कि उनका यह आचरण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचाओ अपील के विपरीत है और गंभीर अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है।


    नियुक्ति निरस्त की गई

    भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा, “यादव की नियुक्ति अनुशासनहीनता और ईंधन बचत एवं मितव्ययिता के उपायों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बार-बार की गई अपील का पालन नहीं करने के कारण निरस्त कर दी गई है।”

    गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को पेट्रोल और डीजल की खपत को कम करने, शहरों में अधिक से अधिक मेट्रो रेल सेवाओं का उपयोग करने, कारपूलिंग, इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने, पार्सल आवाजाही के लिए रेलवे सेवाओं का उपयोग करने और विदेशी मुद्रा बचाने के लिए ‘वर्क फ्रॉम होम’ करने जैसे उपायों को प्रोत्साहित करने की अपील की थी।

  • Rajasthan: 900 करोड़ के जल जीवv मिशन घोटाले में ACB की बड़ी कार्रवाई, पूर्व मंत्री महेश जोशी गिरफ्तार

    Rajasthan: 900 करोड़ के जल जीवv मिशन घोटाले में ACB की बड़ी कार्रवाई, पूर्व मंत्री महेश जोशी गिरफ्तार


    जयपुर।
    राजस्थान (Rajasthan) में जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission- JJM) घोटाले की जांच में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व जलदाय मंत्री महेश जोशी (Mahesh Joshi) को गिरफ्तार कर लिया है। करीब 900 करोड़ रुपए के कथित घोटाले में यह कार्रवाई की गई है। आरोप है कि मंत्री पद पर रहते हुए उन्होंने टेंडर प्रक्रिया में भ्रष्टाचार कर रिश्वत ली थी।

    इससे पहले अप्रैल 2025 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी महेश जोशी को इसी मामले में गिरफ्तार किया था। उस समय उन्होंने खुद पर लगे आरोपों को गलत बताते हुए कहा था कि उन्होंने कोई गड़बड़ी नहीं की और न ही कोई पैसा लिया। सुप्रीम कोर्ट से उन्हें 3 दिसंबर 2025 को जमानत मिली थी।


    22 अधिकारियों समेत दर्ज हुई थी FIR

    ACB ने इस मामले में पूर्व मंत्री महेश जोशी सहित 22 अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज की थी। इनमें जल जीवन मिशन से जुड़े कई वरिष्ठ अधिकारी और इंजीनियर शामिल हैं। जांच एजेंसी का आरोप है कि फर्जी सर्टिफिकेट के आधार पर टेंडर जारी कर करोड़ों रुपए का भ्रष्टाचार किया गया।


    ईमेल आईडी से मिला बड़ा सुराग

    ACB को जांच के दौरान कुछ संदिग्ध ईमेल आईडी से महत्वपूर्ण लीड मिली थी। इन्हीं के आधार पर अधिकारियों और ठेकेदारों की कथित मिलीभगत का खुलासा हुआ। अब तक इस मामले में 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि 3 आरोपी अभी फरार बताए जा रहे हैं।


    सुबोध अग्रवाल से पूछताछ के बाद कार्रवाई

    इससे पहले 9 अप्रैल को जलदाय विभाग के पूर्व ACS सुबोध अग्रवाल को भी ACB ने गिरफ्तार किया था। जांच के दौरान महेश जोशी की भूमिका को लेकर उनसे पूछताछ की गई थी। अब ACB ने कार्रवाई का दायरा बढ़ाते हुए पूर्व मंत्री तक पहुंच बनाई है।