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  • यमन में हूती विद्रोहियों का बड़ा हमला … अदन एयरपोर्ट पर दागीं दो मिसाइलें

    यमन में हूती विद्रोहियों का बड़ा हमला … अदन एयरपोर्ट पर दागीं दो मिसाइलें


    सना।
    यमन (Yemen) के बंदरगाह शहर अदन ( Port City Aden) के एयरपोर्ट (Airport) पर शुक्रवार रात दो मिसाइलों से हमला हुआ. स्थानीय पुलिस ने इसके लिए ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों (Houthi rebels) को जिम्मेदार ठहराया है. अधिकारियों का कहना है कि हमले में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है. दस दिन से भी कम समय में एयरपोर्ट पर यह दूसरा हमला बताया गया है।


    विमान से करीब 500 मीटर दूर गिरीं मिसाइलें

    यमन सरकार के सूचना मंत्री ने बताया कि मिसाइलें यमनिया एयरवेज के एक प्लेन से करीब 500 मीटर दूर गिरीं. यह विमान उड़ान भरने की तैयारी कर रहा था. एक सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि विमान में सवार यात्रियों को तुरंत बाहर निकाल लिया गया।

    हूती विद्रोहियों के नियंत्रण वाली समाचार एजेंसी सबा ने एक सैन्य अधिकारी के हवाले से बताया कि समूह ने एयरपोर्ट के पास स्थित एक सैन्य ठिकाने को निशाना बनाया था. अधिकारी के मुताबिक, इस ठिकाने पर सऊदी नेतृत्व वाली सेना का कमांड सेंटर और हथियारों का भंडार है।


    दो दिन में अदन में दूसरा बड़ा हमला

    अदन में दो दिन के अंदर यह दूसरा बड़ा हमला है. इससे पहले गुरुवार को हूती विद्रोहियों ने राष्ट्रपति भवन के परिसर पर हमला किया था. यह परिसर यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का केंद्र है. उस हमले में पांच लोगों की मौत हुई थी. अधिकारियों के मुताबिक, 7 अक्टूबर को भी अदन एयरपोर्ट पर दो मिसाइलें दागी गई थीं. उस हमले में भी किसी के घायल होने की सूचना नहीं थी।

    यमन के परिवहन मंत्रालय ने हमले को जरूरी बुनियादी ढांचे और सरकारी संपत्तियों को निशाना बनाने की सुनियोजित कोशिश बताया. मंत्रालय ने आरोप लगाया कि हूती विद्रोहियों की कार्रवाई से आम नागरिकों की सुरक्षा खतरे में पड़ रही है।

    दरअसल, यमन में हाल के महीनों में लड़ाई फिर तेज हुई है. यह संघर्ष व्यापक ईरान युद्ध से जुड़े तनाव के बीच बढ़ा है. हूती विद्रोहियों ने पड़ोसी सऊदी अरब के एयरपोर्ट, तेल ठिकानों और सैन्य सुविधाओं को भी निशाना बनाया है.


    लाल सागर और बाब अल मंदेब स्ट्रेट पर भी तनाव

    हूती विद्रोहियों ने लाल सागर के तटीय इलाकों में बाब अल मंदेब स्ट्रेट के पास भी अपनी पकड़ बढ़ाई है. यह समुद्री रास्ता अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए अहम है और होर्मुज स्ट्रेट के विकल्पों में गिना जाता है.

    हूती विद्रोहियों को इस इलाके से हटाने और खोया हुआ क्षेत्र वापस लेने के लिए सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने इसी महीने बड़ा सैन्य अभियान शुरू किया है. इस बीच यमन के ताइज जैसे शहरों में आम नागरिकों को भी संघर्ष का सामना करना पड़ रहा है. बढ़ती लड़ाई ने क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक बाजारों को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।

  • रूस ने यूक्रेन पर फिर किया बड़ा हमला… एक साथ दागे कई ड्रोन और मिलाइलें

    रूस ने यूक्रेन पर फिर किया बड़ा हमला… एक साथ दागे कई ड्रोन और मिलाइलें


    नई दिल्ली।
    रूस (Russia) ने यूक्रेन (Ukraine) के कई शहरों पर एक साथ कई तरह की मिसाइलों और ड्रोनों से हमला (Missiles and Drones Attack) किया. इस हमले में ओनिक्स-एम, जिरकॉन और इस्कंदर-एम जैसी मिसाइलों का इस्तेमाल बताया गया है. साथ ही सैकड़ों ड्रोन भी दागे गए. हमला 10 क्षेत्रों में हुआ जिसमें कीव, द्निप्रो और क्रिवी रीह शामिल हैं।

    यूक्रेनी बलों ने ज्यादातर खतरों को रोक लिया लेकिन कुछ हमले लक्ष्य तक पहुंच गए. इससे आग लगी, कारखाने क्षतिग्रस्त हुए और चेर्निहिव में 1 लाख लोगों को बिजली कटौती का सामना करना पड़ा. द्निप्रो में तीन या चार लोगों की मौत हुई और कई घायल हुए।

    रूस ने इस हमले को मास्को के पास यूक्रेनी हमलों का जवाब बताया. दोनों पक्ष ऊर्जा और औद्योगिक ठिकानों पर हमले बढ़ा रहे हैं. यह घटना लंबे संघर्ष के बीच तनाव को और बढ़ाने वाली साबित हुई है. हमले में विभिन्न प्रकार की मिसाइलों का मिश्रण इस्तेमाल हुआ. ओनिक्स-एम सुपरसोनिक एंटी-शिप क्रूज मिसाइल है लेकिन जमीन के ठिकानों पर भी लगाई जा सकती है.

    जिरकॉन हाइपरसोनिक मिसाइल है जो तेज गति से लक्ष्य पर हमला करती है. इस्कंदर-एम बैलिस्टिक मिसाइल है जो सटीक निशाना लगाने में सक्षम है. इनके अलावा कुछ क्रूज मिसाइलें भी दागी गईं. ड्रोन की संख्या सैकड़ों में बताई गई है जो विभिन्न दिशाओं से आए।

    यूक्रेनी वायु रक्षा ने इनमें से अधिकांश को मार गिराया. कुल 186 खतरों को रोकने का दावा किया गया. बावजूद इसके कुछ मिसाइल और ड्रोन लक्ष्य तक पहुंच गए. कीव और अन्य शहरों में विस्फोट की आवाजें सुनाई दीं. औद्योगिक क्षेत्रों और ऊर्जा सुविधाओं को निशाना बनाया गया जिससे बिजली व्यवस्था प्रभावित हुई।


    नुकसान और नागरिक प्रभाव

    द्निप्रो में सबसे ज्यादा नुकसान की खबरें आईं. वहां मौतें हुईं और कई लोग घायल हुए. चेर्निहिव में बिजली कटौती से एक लाख लोग प्रभावित हुए. आग बुझाने और मलबा हटाने का काम जारी रहा. कारखानों को नुकसान पहुंचने से स्थानीय अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है. नागरिक इलाकों में भी हमले की खबरों ने लोगों में भय पैदा किया।

    यूक्रेनी अधिकारियों ने नागरिक ठिकानों पर हमले की निंदा की. रूस ने सैन्य और ऊर्जा लक्ष्यों को निशाना बनाने का दावा किया. दोनों पक्षों के बयान अलग-अलग हैं लेकिन जमीनी हकीकत में नुकसान साफ दिख रहा है. यह हमला यूक्रेन द्वारा मास्को के आसपास किए गए हमलों के जवाब में बताया जा रहा है।

    दोनों देश एक-दूसरे के ऊर्जा और औद्योगिक ढांचे को निशाना बना रहे हैं. ड्रोन और मिसाइल हमलों की संख्या बढ़ने से वायु रक्षा प्रणाली पर दबाव बढ़ गया है. सर्दियों के करीब आने के साथ ऊर्जा सुविधाओं पर हमले नागरिकों के लिए और मुश्किलें पैदा कर सकते हैं।

    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस हमले की निंदा हुई है. संघर्ष के लंबे होते जाने से दोनों पक्ष नई रणनीति अपना रहे हैं. हाइपरसोनिक और सुपरसोनिक मिसाइलों का इस्तेमाल युद्ध की प्रकृति को बदल रहा है. बचाव और पुनर्निर्माण का काम चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

    यूक्रेन अपनी वायु रक्षा को मजबूत करने की कोशिश में लगा है. रूस लगातार हमलों से दबाव बनाए रखना चाहता है. आम नागरिकों की सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं की बहाली सबसे बड़ी जरूरत है. यह हमला दिखाता है कि संघर्ष अभी भी तीव्र चरण में है और शांति की संभावनाएं फिलहाल कमजोर दिख रही हैं. दोनों पक्षों को संयम बरतने और राजनयिक समाधान तलाशने की सलाह दी जा रही है लेकिन मैदान में तनाव जारी है।

  • रूस का यूक्रेन पर बड़ा हमला…. राजधानी कीव पर दांगी बैलिस्टिक मिसाइलें

    रूस का यूक्रेन पर बड़ा हमला…. राजधानी कीव पर दांगी बैलिस्टिक मिसाइलें


    कीव।
    रूस (Russia) ने गुरुवार तड़के एक बार फिर यूक्रेन (Ukraine) की राजधानी कीव (Kyiv) को निशाना बनाते हुए बैलिस्टिक मिसाइलों (Ballistic Missiles) से बड़ा हमला किया. यूक्रेनी अधिकारियों के मुताबिक, हमले के दौरान कई धमाकों की आवाजें सुनी गईं, जबकि एयर डिफेंस सिस्टम (Air Defense System) लगातार मिसाइलों को रोकने में जुटे रहे. यूक्रेनी वायुसेना ने चेतावनी दी है कि राजधानी पर और मिसाइल हमले हो सकते हैं, इसलिए लोगों से सुरक्षित बंकरों में रहने की अपील की गई है।

    कीव के मेयर विताली क्लिट्स्को ने बताया कि शहर के पश्चिमी बाहरी इलाके में एक गोदाम मिसाइल हमले की चपेट में आ गया. वहीं, इंटरसेप्ट की गई मिसाइलों का मलबा ड्नीप्रो नदी के पूर्वी किनारे स्थित इलाके में गिरा. शुरुआती जानकारी के मुताबिक, कम से कम आठ बैलिस्टिक मिसाइलें कीव की ओर दागी गई थीं।

    यूक्रेन की वायुसेना ने टेलीग्राम पर जारी संदेश में कहा कि बैलिस्टिक मिसाइलों के अलावा रूस ने शाहेद ड्रोन भी कई शहरों की ओर भेजे हैं. उत्तर-पूर्वी शहर खारकीव में भी ड्रोन हमलों के बाद कई विस्फोटों की खबरें सामने आई हैं. इसके अलावा विनित्सिया समेत कई अन्य क्षेत्रों में भी एयर रेड अलर्ट जारी किया गया.


    यूक्रेन के रक्षा मंत्री को पद से हटाने के बाद हमला

    यह हमला ऐसे समय हुआ है जब यूक्रेन में रक्षा मंत्री मायखाइलो फेदोरोव को पद से हटाए जाने को लेकर राजनीतिक हलचल बनी हुई है. उनके हटने के कुछ ही समय बाद रूस ने राजधानी पर नया हमला कर दिया।


    यूक्रेन पर रूस लगातार कर रहा घातक हमले

    जुलाई में रूस की तरफ से कीव पर यह सातवां बड़ा हमला बताया जा रहा है. इससे पहले 14 जुलाई की रात रूस ने मिसाइलों और ड्रोन के जरिए बड़े पैमाने पर हमला किया था, जिसमें कम से कम सात लोगों की मौत हुई थी और 78 लोग घायल हुए थे. उस हमले में राजधानी के 16 स्थानों को नुकसान पहुंचा था, जिनमें एक स्कूल और एक नागरिक औद्योगिक प्रतिष्ठान भी शामिल था।

    इससे पहले 2 जुलाई को हुए हमले में 30 से अधिक लोगों की मौत और 100 से ज्यादा लोग घायल हुए थे. वहीं, 6 जुलाई के हमले में कम से कम 26 लोगों की जान गई थी. लगातार हो रहे इन हमलों ने कीव में आम लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

  • 24 घंटे में दूसरी बार अमेरिका की ईरान पर एयर स्ट्राइक, सैन्य ठिकानों और ड्रोन केंद्रों को बनाया निशाना

    24 घंटे में दूसरी बार अमेरिका की ईरान पर एयर स्ट्राइक, सैन्य ठिकानों और ड्रोन केंद्रों को बनाया निशाना


    वॉशिंगटन। अमेरिका ने 24 घंटे के भीतर दूसरी बार ईरान में बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई करते हुए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास स्थित कई अहम ठिकानों पर एयर स्ट्राइक की है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर की गई इस कार्रवाई में ईरान के सैन्य निगरानी तंत्र, संचार प्रणाली, एयर डिफेंस साइट्स, ड्रोन भंडारण केंद्रों और समुद्री बारूदी सुरंग (माइन) बिछाने की क्षमताओं को निशाना बनाया गया।

    सिरिक के पास सुने गए धमाके

    ईरान के सरकारी मीडिया IRIB ने सैन्य सूत्रों के हवाले से बताया कि दक्षिणी शहर सिरिक के नजदीक विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं। रिपोर्ट के मुताबिक कई प्रोजेक्टाइल एक दूरसंचार टावर से टकराए, हालांकि घटना से जुड़ी विस्तृत जानकारी तत्काल साझा नहीं की गई।

    युद्धविराम के बाद फिर बढ़ा तनाव

    अमेरिका ने शुक्रवार को भी ईरान के भीतर कई सैन्य ठिकानों पर हमला किया था। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब हाल ही में वॉशिंगटन और तेहरान के बीच युद्धविराम पर सहमति बनी थी। लगातार दूसरे दिन हुई अमेरिकी एयर स्ट्राइक के बाद दोनों देशों के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है।

    तेल टैंकर पर ड्रोन हमले का दिया जवाब

    अमेरिका का आरोप है कि ईरान ने शनिवार तड़के वन-वे अटैक ड्रोन से पनामा के झंडे वाले तेल टैंकर M/T Kiku को निशाना बनाया, जिससे युद्धविराम का उल्लंघन हुआ। CENTCOM के मुताबिक, यह टैंकर 20 लाख से अधिक बैरल कच्चा तेल लेकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजर रहा था, तभी उस पर हमला किया गया।

    अमेरिकी सेना का कहना है कि शुक्रवार की कार्रवाई के बाद ईरान को युद्धविराम का पालन करने और तनाव कम करने का अवसर दिया गया था, लेकिन ताजा ड्रोन हमले के बाद जवाबी कार्रवाई करना आवश्यक हो गया।

    अमेरिका ने दी सतर्क रहने की चेतावनी

    CENTCOM ने अपने बयान में कहा कि होर्मुज से वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही सामान्य रूप से जारी है और अमेरिकी सेना क्षेत्र में पूरी तरह सतर्क तथा किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए तैयार है।

    इससे पहले शुक्रवार को अमेरिकी सेना ने ईरान के मिसाइल और ड्रोन भंडारण केंद्रों के साथ रडार ठिकानों को भी निशाना बनाया था। वॉशिंगटन का कहना है कि वह कार्रवाई 25 जून को सिंगापुर के झंडे वाले मालवाहक जहाज M/V Ever Lovely पर हुए कथित ईरानी ड्रोन हमले के जवाब में की गई थी।

    उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की चेतावनी

    बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान को आगे किसी भी सैन्य कार्रवाई से बचने की चेतावनी दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि ईरान ने युद्धविराम समझौते पर हस्ताक्षर किए थे और अमेरिका ने उसका पालन किया। यदि समझौते को लेकर कोई मतभेद है तो उसे बातचीत के जरिए सुलझाया जा सकता है, लेकिन हिंसा का जवाब हिंसा से दिया जाएगा।

  • इजराइली सेना का लेबनान में बड़ा हमला…. हिजबुल्लाह के 200 ठिकानों पर की बमबारी

    इजराइली सेना का लेबनान में बड़ा हमला…. हिजबुल्लाह के 200 ठिकानों पर की बमबारी


    येरुशलम।
    इजरायली सेना (Israeli army.) ने 24 घंटे के भीतर लेबनान (Lebanon) में हिजबुल्लाह (Hezbollah.) के 200 से अधिक ठिकानों पर हमले का दावा किया है। सेना के मुताबिक, उसके वायुसेना के विमानों ने दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह के अड्डों को निशाना बनाया। एक्स पर जारी आधिकारिक पोस्ट में इजरायली रक्षा बल (Israeli Defense Forces.-IDF) ने कहा कि यह ऑपरेशन जारी रहेगा। आईडीएफ ने दावा किया कि इन हमलों से हिजबुल्लाह की सैन्य क्षमता को भारी नुकसान पहुंचा है। इस बीच क्षेत्र में तनाव जारी है, क्योंकि इजरायल हिजबुल्लाह को कमजोर करने के लिए निरंतर कार्रवाई कर रहा है।

    इन घटनाओं के बीच ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि लेबनान में युद्धविराम अमेरिका के साथ हुई बातचीत का हिस्सा था। पाकिस्तानी पक्ष ने भी इसकी पुष्टि की है। ईरानी प्रतिनिधिमंडल हिजबुल्लाह के संपर्क में है और स्थिति पर जरूरी फैसले ले रहा है। ईरानी मीडिया प्रेस टीवी के अनुसार, यह जानकारी ईरान-पाकिस्तान-अमेरिका के बीच त्रिपक्षीय वार्ता के शुरू होने के साथ आई है।


    पाकिस्तानी राजधानी में एक अहम बैठक

    इस्लामाबाद में हो रही ये बातचीत 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद अमेरिका और ईरान के बीच उच्चतम स्तर की चर्चा मानी जा रही है। ईरानी टीम ने औपचारिक वार्ता से पहले पाकिस्तानी राजधानी में रणनीतिक बैठक की। इस्लामाबाद के सेरेना होटल में ये बातचीत हो रही है, जहां कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच अमेरिकी और ईरानी प्रतिनिधि पहुंचे हैं। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाकात की।

    ईरानी संसद स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने भी प्रधानमंत्री से मुलाकात की। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने इन वार्ताओं को मेक-ऑर-ब्रेक यानी निर्णायक बताया है। 8 अप्रैल को घोषित युद्धविराम को स्थिर करने और क्षेत्रीय सुरक्षा के भविष्य पर चर्चा का लक्ष्य है। होटल के बाहर सुरक्षा के कड़े इंतजाम और गतिविधियां दिख रही हैं। ईरान के उपराष्ट्रपति मोहम्मद रेजा आरेफ ने एक्स पर लिखा कि बातचीत का नतीजा अमेरिकी रुख पर निर्भर करेगा। अगर अमेरिका फर्स्ट की सोच वाले प्रतिनिधि मिले तो दोनों पक्षों और दुनिया के लिए फायदेमंद समझौता संभव है।

  • ISI ने रची थी दिल्ली में होली पर बड़े हमले की साजिश… पकड़े गए आतंकियों की जांच में हुए चौकाने वाले खुलासे

    ISI ने रची थी दिल्ली में होली पर बड़े हमले की साजिश… पकड़े गए आतंकियों की जांच में हुए चौकाने वाले खुलासे


    नई दिल्ली।
    दिल्ली (Delhi) में पकड़े गए लश्कर-ए-तैयबा (Lashkar-e-Taiba) के संदिग्ध मॉड्यूल की जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के मुताबिक पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (Pakistan’s Intelligence Agency ISI) की साजिश के तहत बांग्लादेशी मूल के युवकों का नेटवर्क तैयार किया गया। इस नेटवर्क का संचालन बांग्लादेश में बैठा लश्कर का एक कमांडर कर रहा था, जिसने वहीं बैठक कर हमलों की पूरी रूपरेखा बनाई।

    जांच में सामने आया है कि मॉड्यूल के निशाने पर देश के बड़े मेट्रो शहर दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई थे। सूत्रों के मुताबिक कुछ स्थानों की रेकी भी कर ली गई थी और होली के मौके पर हमले की तैयारी थी। खुफिया इनपुट के बाद स्पेशल सेल ने कार्रवाई तेज की और मॉड्यूल का भंडाफोड़ कर दिया।


    हाफिज सईद और लखवी से सीधा संपर्क

    जांच से जुड़े अधिकारियों का दावा है कि बांग्लादेशी हैंडलर शब्बीर अहमद लोन सीधे लश्कर प्रमुख हाफिज सईद और आतंकी सरगना जैकी उर रहमान लखवी के संपर्क में था।पुलिस का कहना है कि आईएसआई भारत में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों के जरिए लोकल मॉड्यूल खड़ा कर रही थी। इसके लिए फंडिंग भी की जा रही थी, ताकि बड़े शहरों में समन्वित हमले किए जा सकें। शब्बीर इस नेटवर्क में आईएसआई और बांग्लादेशी मूल के आतंकी सैदुल इस्लाम के बीच कड़ी का काम कर रहा था। सैदुल संदिग्धों को निर्देश देता था और उन्हें टारगेट तय करने में मदद करता था।


    2007 में पकड़ा गया, 2018 में फिर सक्रिय

    स्पेशल सेल के अनुसार शब्बीर अहमद लोन 2007 में आत्मघाती हमले की साजिश में एके-47 और हैंड ग्रेनेड के साथ पकड़ा गया था। सजा पूरी करने के बाद 2018 में जेल से बाहर आया और दोबारा लश्कर से जुड़ गया। उसने अपना बेस बांग्लादेश में बनाया, जबकि कनेक्शन पाकिस्तान से बनाए रखे।

    अधिकारियों का कहना है कि जेल से रिहाई के बाद उसने पुराने नेटवर्क को फिर सक्रिय किया और सोशल मीडिया के जरिए युवकों को जोड़ना शुरू किया। जांच एजेंसियों को उसके डिजिटल ट्रेल से कई अहम सुराग मिले हैं।


    सोशल मीडिया से जोड़ा गया मॉड्यूल

    पुलिस के मुताबिक पकड़े गए संदिग्धों को पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए संपर्क में लाया गया। इसके बाद उन्हें बांग्लादेश बुलाकर बैठक की गई। कोलकाता से पकड़े गए उमर फारूक को संवेदनशील स्थानों की रेकी का जिम्मा दिया गया था। संदिग्धों को किराए पर अपार्टमेंट लेने और सुरक्षित ठिकाने बनाने के निर्देश भी दिए गए। मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच में हथियार जुटाने की कोशिशों से जुड़े वीडियो और चैट सामने आए हैं। सुरक्षा एजेंसियों को पहले ही इनपुट मिला था कि लश्कर होली के दौरान बड़ी वारदात की फिराक में है।


    ऑपरेशन जारी, कई राज्यों में छापे

    दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल का ऑपरेशन अभी जारी है। कुछ संदिग्धों के फरार होने की आशंका में कई राज्यों में छापेमारी की जा रही है। सभी आरोपियों को दिल्ली लाकर पूछताछ की जाएगी। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि समय रहते साजिश नाकाम कर दी गई, लेकिन नेटवर्क के बाकी सिरों तक पहुंचना अभी बाकी है।

    सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं और देश के बड़े शहरों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। स्पेशल सेल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह मॉड्यूल लंबी योजना का हिस्सा था। अगर समय पर कार्रवाई नहीं होती तो होली के मौके पर बड़ा नुकसान हो सकता था।


    विवादित पोस्टर से खुला मॉड्यूल का राज

    स्पेशल सेल के हत्थे चढ़े आठ संदिग्धों में से चार दिल्ली में ‘फ्री कश्मीर’ जैसे विवादित पोस्टर लगाकर तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल लौट गए थे। जांच यहीं से आगे बढ़ी और नेटवर्क का सिरा हाथ लगा। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टरबाजी महज ट्रायल रन थी, असली मकसद बड़े हमले की तैयारी था। खुफिया एजेंसियों ने पहले अलर्ट जारी किया था कि आईएसआई समर्थित लश्कर लोकल मॉड्यूल तैयार कर रहा है। एक अन्य इनपुट में लाल किले के आसपास हमले की आशंका जताई गई थी। सुरक्षा एजेंसियों को पहले ही इनपुट मिला था कि लश्कर होली के दौरान बड़ी वारदात की फिराक में है।