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  • राजस्थान HC विवाद…. कॉलेजियम का बड़ा फैसला…. चीफ जस्टिस के लिए की नए नाम की सिफारिश

    राजस्थान HC विवाद…. कॉलेजियम का बड़ा फैसला…. चीफ जस्टिस के लिए की नए नाम की सिफारिश


    नई दिल्ली।
    राजस्थान हाईकोर्ट (Rajasthan High Court) के कार्यवाहक चीफ जस्टिस (Acting Chief Justice) संजीव प्रकाश शर्मा (Sanjeev Prakash Sharma) को लेकर चल रहे विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम (Supreme Court Collegium) ने सोमवार शाम बड़ा फैसला लिया। कॉलेजियम ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जज संजय कुमार अग्रवाल को राजस्थान हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस नियुक्त करने की सिफारिश की है। इस बीच जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा छुट्टी पर चले गए हैं। यह सिफारिश ऐसे समय हुई है जब राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा के खिलाफ वकीलों का विरोध तेज हो गया है। इसी दिन जस्टिस शर्मा ने न्यायिक कार्य से खुद को अलग कर लिया।


    जस्टिस शर्मा के खिलाफ क्या आरोप लगे?

    सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस संदीप मेहता ने 2, 10 और 17 अगस्त को CJI सूर्यकांत को पत्र लिखे थे। इन पत्रों में उन्होंने जस्टिस शर्मा पर ‘पावर के दुरुपयोग’ का आरोप लगाया और कहा कि उन्हें ऐसी कई शिकायतें मिली हैं, जिनसे कार्यवाहक चीफ जस्टिस की ईमानदारी पर सवाल उठते हैं।

    जस्टिस मेहता ने यह भी मांग की थी कि जस्टिस शर्मा को किसी दूसरे हाईकोर्ट में ट्रांसफर किया जाए और राजस्थान हाईकोर्ट में नया चीफ जस्टिस नियुक्त किया जाए। कॉलेजियम की बैठक में इन आरोपों पर भी चर्चा हुई। रिपोर्ट के मुताबिक, कॉलेजियम इन आरोपों की जांच कर सकता है। शिकायत में कथित तौर पर जिन कुछ आदेशों पर सवाल उठाए गए हैं, उन्हें भी जांच के दायरे में लाया जा सकता है। हालांकि, जस्टिस शर्मा 26 सितंबर को रिटायर होने वाले हैं, इसलिए कॉलेजियम इस मामले में सावधानी से आगे बढ़ने के पक्ष में है।


    1 से 5 सितंबर तक नहीं बैठेंगे जस्टिस शर्मा

    राजस्थान हाईकोर्ट के अपडेटेड रोस्टर के मुताबिक, जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा 1 सितंबर से 5 सितंबर तक किसी बेंच में नहीं बैठेंगे। उनकी बेंच के मामलों को दूसरी बेंचों को सौंप दिया गया है। जस्टिस शर्मा को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट में वकीलों का विरोध भी तेज हो गया है।

    जयपुर में कुछ वकील कार्यवाहक चीफ जस्टिस की अदालत के बाहर बैठ गए और नारेबाजी की। जोधपुर में दोनों वकील संगठनों ने रविवार तक हड़ताल का ऐलान किया। उनकी मांग है कि जस्टिस शर्मा को न्यायिक और प्रशासनिक जिम्मेदारियों से मुक्त किया जाए। वकील संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को मजबूत प्रतिनिधित्व भेजने का भी फैसला किया है।


    सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने और किन नामों की सिफारिश की?

    राजस्थान हाईकोर्ट के लिए संजय कुमार अग्रवाल के अलावा कॉलेजियम ने जस्टिस पुष्पेंद्र भाटी को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बनाने की सिफारिश की है। जस्टिस भाटी राजस्थान हाईकोर्ट के दूसरे सबसे वरिष्ठ जज हैं। वहीं गुजरात हाईकोर्ट के जज अल्पेश यशवंत कोगजे को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बनाने की सिफारिश की गई है। इन तीन सिफारिशों के बाद चीफ जस्टिस की नियुक्ति से जुड़ी कुल सात सिफारिशें सरकार के पास लंबित होंगी।


    कॉलेजियम ने कहा- आरोपों को निष्कर्ष नहीं माना जा सकता

    जस्टिस शर्मा के खिलाफ आरोपों को लेकर CJI सूर्यकांत ने 26 अगस्त को एक बयान में कहा था कि उन्होंने और कॉलेजियम के अन्य सदस्यों ने जस्टिस संदीप मेहता की चिंताओं पर ध्यान दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी मौजूदा जज के खिलाफ लगाए गए आरोपों से स्थापित संस्थागत प्रक्रिया के तहत निपटा जाना चाहिए। संबंधित जज को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाना जरूरी है और सिर्फ आरोप लगाए जाने से उन्हें निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। CJI ने यह भी कहा था कि कॉलेजियम पहले से ही बाकी हाईकोर्ट में नियमित चीफ जस्टिस की नियुक्ति की प्रक्रिया पर काम कर रहा था।


    10 महीने से कार्यवाहक चीफ जस्टिस थे शर्मा

    जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा करीब 10 महीने से राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस के तौर पर काम कर रहे थे। सितंबर 2025 में जस्टिस एस. श्रीराम के चीफ जस्टिस पद से रिटायर होने के बाद उन्होंने यह जिम्मेदारी संभाली थी। अब कॉलेजियम ने उनकी जगह छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जज संजय कुमार अग्रवाल को राजस्थान हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बनाने की सिफारिश की है।

  • ईरान युद्ध के बीच ट्रंप ने पश्चिमी प्रशांत से हटाया एयरक्राफ्ट कैरियर, चीन खुश

    ईरान युद्ध के बीच ट्रंप ने पश्चिमी प्रशांत से हटाया एयरक्राफ्ट कैरियर, चीन खुश


    नई दिल्ली। ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान के बीच अमेरिका ने पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र से अपना आखिरी विमानवाहक पोत यूएसएस जॉर्ज वाशिंगटन हटा लिया है। इसे मिडिल ईस्ट में लंबे समय से तैनात यूएसएस अब्राहम लिंकन की जगह भेजा जा रहा है। अमेरिका के इस फैसले से जापान और फिलीपींस जैसे सहयोगियों की चिंता बढ़ी है, जबकि चीन को पश्चिमी प्रशांत में अपनी सैन्य मौजूदगी और प्रभाव बढ़ाने का मौका मिल गया है।

    मिडिल ईस्ट में बढ़ा अमेरिकी नौसेना पर दबाव

    यूएसएस जॉर्ज वाशिंगटन को मिडिल ईस्ट भेजने का मुख्य उद्देश्य यूएसएस अब्राहम लिंकन को राहत देना है। लिंकन की वापसी मई में तय थी, लेकिन ईरान के खिलाफ अमेरिकी अभियानों के कारण उसकी तैनाती बढ़ा दी गई। यह पोत 240 से ज्यादा दिन लगातार समुद्र में रह चुका है। लंबी तैनाती के कारण अमेरिकी नौसैनिकों के तनाव और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

    प्रशांत से अमेरिकी पोत हटने पर सहयोगी चिंतित

    पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में अमेरिकी विमानवाहक पोत की गैरमौजूदगी से जापान और फिलीपींस जैसे सहयोगियों में बेचैनी बढ़ी है। रणनीतिक विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिका का यह कदम उसके उस रुख से अलग दिखाई देता है, जिसमें वह एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी बनाए रखने की बात करता रहा है। हालांकि, अमेरिकी नौसेना आने वाले महीनों में किसी अन्य विमानवाहक पोत को इस क्षेत्र में तैनात कर सकती है।

    चीन को मिला ताकत दिखाने का मौका

    अमेरिकी पोत के हटने से चीन को पश्चिमी प्रशांत में अपना प्रभाव बढ़ाने का अवसर मिला है। विशेषज्ञों के अनुसार, बीजिंग यह संदेश देने की कोशिश कर सकता है कि इस क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी कमजोर हो रही है और वॉशिंगटन अपने सहयोगियों को पहले जैसी सुरक्षा गारंटी देने की स्थिति में नहीं है।

    इसी बीच चीन ने इंडोनेशिया के साथ नौसैनिक अभ्यास किया है। दक्षिण चीन सागर में स्कारबोरो शोल के पास भी चीनी सैन्य गतिविधियां बढ़ी हैं। जापान के आसपास भी चीनी नौसेना की गतिविधियों को लेकर तनाव बना हुआ है।

    लगातार तैनाती से अमेरिकी नौसेना पर बढ़ रहा दबाव

    अमेरिकी नौसेना के पास कुल 11 विमानवाहक पोत हैं और सामान्य तौर पर इनमें से दो या तीन ही एक समय में तैनात रहते हैं। लगातार लंबी तैनाती के कारण जहाजों के रखरखाव और मरम्मत पर भी दबाव बढ़ रहा है। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि सीमित शिपयार्ड क्षमता के कारण आने वाले समय में यह चुनौती और गंभीर हो सकती है।

    बड़े एयरक्राफ्ट कैरियर की उपयोगिता पर भी सवाल

    आधुनिक युद्ध में ड्रोन और लंबी दूरी की मिसाइलों के बढ़ते इस्तेमाल ने बड़े विमानवाहक पोतों की सुरक्षा और उपयोगिता पर भी सवाल खड़े किए हैं। कुछ रक्षा विशेषज्ञ छोटे युद्धपोतों और पनडुब्बियों के इस्तेमाल को बढ़ाने की वकालत कर रहे हैं। अमेरिकी नौसेना के संचालन प्रमुख भी बड़े विमानवाहक पोतों पर अत्यधिक निर्भरता कम करने और छोटे युद्धपोतों के इस्तेमाल की जरूरत जता चुके हैं।

  • कैबिनेट का बड़ा फैसला… किसानों को 2031 तक मिलती रहेगी सम्मान निधि… सूर्य सरोवर योजना भी स्वीकृति

    कैबिनेट का बड़ा फैसला… किसानों को 2031 तक मिलती रहेगी सम्मान निधि… सूर्य सरोवर योजना भी स्वीकृति


    नई दिल्ली।
    केंद्र सरकार (Central Government) ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान-Pradhan Mantri Kisan Samman Nidhi) योजना को वित्त वर्ष 2030-31 तक बढ़ाने का निर्णय लिया है। इस योजना के लिए 3.15 लाख करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnaw) ने कहा कि किसानों की समृद्धि ही देश की समृद्धि की आधारशिला है और इसी उद्देश्य से पात्र किसान परिवारों को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) प्रणाली के माध्यम से सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। यह योजना फरवरी, 2019 में शुरू की गई थी, जिसके तहत पात्र भू-स्वामी किसान परिवारों को प्रति वर्ष 6,000 रुपये की वित्तीय सहायता तीन समान किस्तों में दी जाती है।

    योजना के तहत अब तक 23 किस्तों में किसानों के खातों में 4.47 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि भेजी जा चुकी है। सरकार ने कहा कि योजना को वर्ष 2030-31 तक जारी रखने से कृषि निवेश, उत्पादकता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और मजबूती मिलेगी। विकसित भारत की यात्रा में करोड़ों किसानों की भूमिका और सशक्त होगी।


    पानी पर तैरेंगे सोलर प्लांट

    पीएम सूर्य घर योजना के बाद अब सरकार ने प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना को मंजूरी दी है। इसके तहत बांध, जलाशय और पोखर में बिजली उत्पादन के लिए सोलर पैनल लगाए जाएंगे। पांच वर्ष तक चलने वाली इस योजना पर करीब 5,070 करोड़ रुपये खर्च होंगे। केंद्रीय मंत्री अश्वनी वैष्णव ने कहा, देश में जलाशयों के जरिये 102.18 गीगावाट बिजली उत्पादन की क्षमता है। बिजली की अधिकतम मांग को पूरा करने के लिए दो घंटे का स्टोरेज भी रखा जाएगा।


    ‘खेलो इंडिया’ पर 36 हजार करोड़ खर्च होंगे

    केंद्रीय मंत्रिमंडल ने खेलो इंडिया योजना के विस्तारित स्वरूप और राष्ट्रीय खेल महासंघों (एएनएसएफ) को मिलने वाली वित्तीय सहायता को मंजूरी दे दी है। सरकार वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक के लिए कुल 36,441 करोड़ रुपये खर्च करेगी। सरकार ने पहली बार खेलो इंडिया फीडर स्कूल और खेलो इंडिया उत्कृष्ट विद्यालय शुरू करने का फैसला किया है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि नई खेलो इंडिया योजना का बजट करीब आठ गुना बढ़ाया गया है। इसके लिए 29,054 करोड़ रुपये खर्च करने की मंजूरी दी है। राष्ट्रीय खेल महासंघ सहायता योजना के लिए 7,387 करोड़ को मंजूरी दी है। इससे भारत में 2030 में राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी और ओलंपिक की दावेदारी को मजबूती मिलेगी।


    सभी केंद्रों को एकीकृत करने की योजना

    सरकार ने कहा कि राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र (एनसीओई), खेलो इंडिया उत्कृष्टता केंद्र, साई प्रशिक्षण केंद्र, खेलो इंडिया मान्यता प्राप्त अकादमी, खेलो इंडिया केंद्र और सशस्त्र बलों की युवा खेल कंपनियों को एकीकृत किया जाएगा। इन सभी संस्थानों में खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय कोचिंग, खेल विज्ञान की सुविधा मिलेगी।

  • बिहार सरकार का बड़ा फैसला: छात्र आंदोलन से जुड़े सभी मामले वापस होंगे, गृह विभाग ने जारी की अधिसूचना

    बिहार सरकार का बड़ा फैसला: छात्र आंदोलन से जुड़े सभी मामले वापस होंगे, गृह विभाग ने जारी की अधिसूचना


    पटना।
    बिहार सरकार ने हाल में हुए छात्र आंदोलन से जुड़े मामलों में बड़ा निर्णय लेते हुए प्रदर्शन के दौरान दर्ज सभी प्राथमिकी (एफआईआर), परिवाद और कानूनी नोटिस वापस लेने का आदेश जारी किया है। गृह विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, आंदोलन के सिलसिले में गिरफ्तार किए गए छात्रों की रिहाई की प्रक्रिया भी तत्काल शुरू कर दी गई है।

    सरकार के निर्देश के मुताबिक, 26 जुलाई शाम 6 बजे तक आंदोलन और प्रदर्शन से संबंधित दर्ज सभी एफआईआर, परिवाद तथा जारी किए गए कानूनी नोटिस निरस्त किए जाएंगे। इसके साथ ही प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि इस अवधि से पहले गिरफ्तार या हिरासत में लिए गए छात्रों को आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर शीघ्र रिहा किया जाए।

    छात्रों के भविष्य को देखते हुए लिया गया फैसला

    गृह विभाग की अधिसूचना में कहा गया है कि यह निर्णय छात्रों के शैक्षणिक और व्यावसायिक भविष्य को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि केवल आंदोलन या प्रदर्शन में भाग लेने के आधार पर किसी भी छात्र के खिलाफ आगे कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।

    प्रशासन को दिए गए स्पष्ट निर्देश

    सरकार ने संबंधित अधिकारियों को आदेश दिया है कि अधिसूचना का तत्काल पालन सुनिश्चित किया जाए और सभी लंबित मामलों को निर्धारित समयसीमा के भीतर वापस लेने की कार्रवाई पूरी की जाए। साथ ही, हिरासत में मौजूद छात्रों की रिहाई में अनावश्यक देरी न हो।

    छात्र संगठनों ने जताई राहत

    सरकार के इस फैसले के बाद छात्र संगठनों और अभिभावकों ने राहत व्यक्त की है। प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि यह कदम छात्रों और सरकार के बीच विश्वास बहाल करने तथा आंदोलन के बाद बने तनावपूर्ण माहौल को सामान्य करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। फिलहाल राज्यभर में आंदोलन से जुड़े मामलों को वापस लेने और छात्रों की रिहाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

  • ट्रंप का बड़ा फैसला…. जेनेरिक दवाओं पर 200% तक टैरिफ लगाएगा अमेरिका

    ट्रंप का बड़ा फैसला…. जेनेरिक दवाओं पर 200% तक टैरिफ लगाएगा अमेरिका


    वाशिंगटन।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने बुधवार को घोषणा की कि अमेरिका (America) अगस्त 2028 से विदेश से आयात होने वाली जेनेरिक दवाओं (Generic medicines) पर भारी आयात शुल्क (टैरिफ) (Hefty Import Duties- Tariffs) लगाएगा। उन्होंने कहा कि इस कदम का मकसद जेनेरिक दवाओं का उत्पादन अमेरिका के भीतर कराना है। इस फैसले का असर भारत पर पड़ सकता है, क्योंकि भारत अमेरिका को जेनेरिक दवाओं का सबसे बड़ा निर्यातक है।

    ट्रंप ने ट्रथु सोशल प्लेटफॉर्म पर कहा कि 1 अगस्त 2026 से अमेरिका में आने वाली सभी जेनेरिक दवाओं पर अगले दो साल तक टैरिफ शून्य फीसदी रहेगा। इसके बाद एक साल के लिए इसे 100 फीसदी कर दिया जाएगा। उसके बाद यह बढ़ाकर 200 फीसदी कर दिया जाएगा।


    ट्रंप ने क्या कहा?

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने कहा कि 1 अगस्त 2026 से अमेरिका में लाई जाने वाली सभी जेनेरिक दवाओं पर अगले दो साल तक शून्य फीसदी आयात शुल्क रहेगा। इसके बाद एक साल के लिए यह 100 फीसदी होगा और उसके बाद 200 फीसदी कर दिया जाएगा।

    उन्होंने कहा कि यह फैसला इसलिए लिया गया है, ताकि जेनेरिक दवाओं का उत्पादन फिर से अमेरिका में शुरू हो। उन्होंने कहा कि जो कंपनियां तय समय के भीतर अमेरिका में कारखाने और जरूरी उपकरण नहीं लगाएंगे, उन्हें इस नीति के तहत दंड का सामना करना पड़ेगा।


    नई नीति में क्या बदलेगा?

    राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि इस नीति का मकसद अमेरिका के लोगों के हितों की रक्षा करना है। उन्होंने यह भी कहा कि पेटेंट वाली, ब्रांडेड और नई दवाओं से जुड़ी मौजूदा नीति में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा और वह पहले की तरह जारी रहेगी।

    भारत का अमेरिका को दवाओं का कितना निर्यात है?
    ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) की एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में भारत ने अमेरिका को 9.7 अरब अमेरिकी डॉलर की दवाओं का निर्यात किया। यह भारत के कुल वैश्विक दवा निर्यात 25.8 अरब अमेरिकी डॉलर का 36 प्रतिशत था।


    जेनेरिक दवाओं का इस्तेमाल कहां होता है?

    भारत में बनी जेनेरिक दवाएं उच्च रक्तचाप, मधुमेह, कैंसर, संक्रामक रोगों और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी बीमारियों के इलाज में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल की जाती हैं।

  • नेपाल सरकार का बड़ा फैसला…. 2006 के बाद सार्वजनिक पदों पर रहे लोगों की संपत्ति की होगी जांच… 7 पूर्व PM भी दायरे में

    नेपाल सरकार का बड़ा फैसला…. 2006 के बाद सार्वजनिक पदों पर रहे लोगों की संपत्ति की होगी जांच… 7 पूर्व PM भी दायरे में


    काठमांडू।
    नेपाल (Nepal) की सरकार ने बुधवार को अपनी कैबिनेट बैठक (Cabinet meeting.) में एक ऐतिहासिक निर्णय लिया। नए नवेले प्रधानमंत्री बालेन शाह (Prime Minister Balen Shah.) की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में सरकार ने 2006 के बाद से सार्वजनिक पद पर रहे लोगों की संपत्ति की जांच के लिए एक पैनल का गठन किया। इस जांच के दायरे में नेपाल के सात पूर्व प्रधानमंत्री भी आएंगे। इसके अलावा सैकड़ों ऐसे मंत्रियों के भी नाम इस लिस्ट में शामिल होंगे, जो कि 2006 के बाद नेपाल सरकार में काम कर चुके हैं।

    सरकार के प्रवक्ता और शिक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी के साथ-साथ युवा और खेल मंत्री सस्मित पोखरेल ने बुधवार को कैबिनेट बैठक के बाद बताया कि सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश राजेंद्र कुमार भंडारी की अगुवाई में इस पांच सदस्यीय संपत्ति जांच आयोग का गठन किया जाएगा। जांच पैनल के सदस्यों में दो पूर्व जज चंडी राज ढकाल और पुरुषोत्तम पराजुली को भी शामिल किया गया है। इसके अलावा नेपाल पुलिस के पूर्व उप महानिरीक्षक गणेश केसी और चार्टर्ड अकाउंटेंट प्रकाश लमसाल भी इस आयोग के सदस्य होंगे।


    जांच के दायरे में 7 पूर्व PM

    बालेन शाह की सरकार के इस फैसले के बाद में नेपाल के सात पूर्व प्रधानमंत्री आ गए हैं। उनमें पुष्प कमल दहल (प्रचंड), शेर बहादुर देउबा, केपी शर्मा ओली, सुशील कोइराला, बाबूराम भट्टाराई, झाला नाथ खनाल और माधव कुमार नेपाल जैसे दिग्गजों के नाम शामिल हैं। पूर्व प्रधानमंत्री गिरिजा कोइराला के परिवार की भी संपत्ति जांच की जा सकती है।

    आयोग को 2006 में नेपाल में हुए जन आंदोलन-द्वितीय से लेकर वर्तमान वित्त वर्ष 2025-26 तक प्रमुख राजनीतिक पदाधिकारियों और उच्च अधिकारियों की संपत्ति घोषणाओं को एकत्र करने और उनकी जांच करने का दायित्व सौंपा गया है।

    Gen-Z आंदोलन पर भी पैनल का गठन
    इसके अलावा नेपाल सरकार ने पिछले वर्ष हुए ‘जेन-G’ प्रदर्शनों की जांच रिपोर्ट के क्रियान्वयन के दौरान सुरक्षा तंत्र की भूमिका का अध्ययन करने के लिए बुधवार को तीन सदस्यीय एक पैनल का गठन किया है। एक अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी। सरकार के प्रवक्ता और शिक्षा मंत्री सस्मित पोखरेल के अनुसार, इस संबंध में बुधवार को हुई कैबिनेट की बैठक में पूर्व उच्च न्यायालय न्यायाधीश प्रेम राज कार्की की अध्यक्षता में एक पैनल गठित करने का निर्णय लिया गया।

    इस पैनल में सशस्त्र पुलिस बल के पूर्व अतिरिक्त महानिरीक्षक सुबोध अधिकारी और नेपाल पुलिस के पूर्व अतिरिक्त महानिरीक्षक टेक प्रसाद राय को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। पैनल को गौरी बहादुर कार्की के नेतृत्व वाले जांच आयोग द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट को लागू करने के दौरान सुरक्षा संबंधी मामलों का अध्ययन करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। बता दें कि पिछले साल आठ और नौ सितंबर को हुए इन प्रदर्शनों के दौरान 76 लोगों की मौत हो गई थी।

  • LPG संकट के बीच UP सरकार का बड़ा फैसला… गौशालाओं में लगेंगे गोबर गैस प्लांट..

    LPG संकट के बीच UP सरकार का बड़ा फैसला… गौशालाओं में लगेंगे गोबर गैस प्लांट..


    लखनऊ।
    खाड़ी युद्ध के कारण पेट्रोलियम उत्पादों (Petroleum Products) की आपूर्ति पर मंडराते संकट के मद्देनजर यूपी सरकार (UP Government) बड़े पैमाने पर इसकी वैकल्पिक व्यवस्था करने जा रही है। इसके लिए उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में गोबर गैस प्लांट (Gobar Gas Plant) स्थापित करने की योजना है। शुरुआत में प्रदेश में संचालित 7527 गौशालाओं (Cowsheds) से इसकी शुरुआत करने की योजना है। बाद में पशुपालकों को भी इस योजना की परिधि में लाया जाएगा।

    वर्तमान में प्रदेश के 80 बड़े गौशालाओं में गोबर गैस प्लांट की स्थापना की गई है जो पूरी तरह से क्रियाशील है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य एलपीजी रसोई गैस का विकल्प तैयार करना है ताकि अधिक से अधिक लोगों को राहत मिल सके। साथ ही पर्यावरण का भी संरक्षण किया जा सके। यूपी में छोटी-बड़ी कुल 7527 गौशालाएं अथवा गो आश्रय स्थल है, जिनमें 12.39 लाख गोवंशीय पशुओं को पाला-पोसा जा रहा है। इन गोशालाओं से प्राप्त होने वाले दूध की उपयोगिता तो है ही अब इनके अपशिष्ट विशेष कर एक-एक ग्राम गोबर के सदुपयोग की तैयारी की जा रही है।

    इन गोबर का उपयोग सिर्फ कम्पोस्ट या खाद के लिए ही न करके वर्तमान में ईरान-अमेरिका एवं इजरायल युद्ध के कारण रसोई गैस के सम्भावित संकट से निपटने के लिए भी करने की तैयारी है। इसके लिए रणनीति तैयार की गई है जो कम से कम ग्रामीण क्षेत्रों में राहत जरूर पहुंचाएगी। उत्तर प्रदेश गो-सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता की माने तो संकट की इस घड़ी में सस्ते गोबर गैस की व्यवस्था लोगों को भारी राहत देने वाला होगा। बकौल श्री गुप्ता, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस कार्य को मिशन मोड पर शुरू करने के आदेश दिए हैं ताकि अधिक से अधिक लोगों को इसका लाभ मिल सके।


    यूपी में गोवंशों एवं गोशालाओं की स्थिति

    प्रदेश में इस समय 7,527 गो-आश्रय स्थल है जो सरकार द्वारा संचालित एवं संरक्षित हैं। इनमें 12.39 लाख से अधिक गोवंश हैं। इनमें 6,433 अस्थायी स्थलों में 9.89 लाख गोवंश और 518 वृहद गो-संरक्षण केंद्रों में 1.58 लाख गोवंश पले हुए हैं। इसके अलावा 323 कान्हा गो-आश्रयों में 77,925 और 253 कांजी हाउस में 13,576 गोवंश पाले-पोसे जा रहे हैं। दूसरी तरफ मुख्यमंत्री सहभागिता योजना के तहत 1.14 लाख गौ पालकों को 1.83 लाख गोवंश सुपुर्द किए गए हैं।


    गोरक्ष पीठ में भी लगा हुआ गोबर गैस संयंत्र

    आयोग के अध्यक्ष कहते हैं कि सीएम योगी के गोरक्ष पीठ में स्थित गोबर का उपयोग वहां लगे गोबर गैस प्लांट में किया जाता है, जिसके गैस से लोगों के भोजन की व्यवस्था होती है। साथ ही पीठ के खेतों में गोबर की खाद यूरिया व अन्य पोषक तत्त्वों की जरूरतों को पूरी कर रही है। गुप्ता की मानें तो इस योजना के क्रियान्वयन से प्रदेश में बड़ी संख्या में गोबर गैस प्लांट स्थापित किए जाएंगे जो पर्यावरण संरक्षण में सहयोग करेंगे।

  • OBC आरक्षण पर SC का बड़ा फैसला… कहा- सिर्फ आय के आधार पर तय नहीं कर सकते क्रीमी लेयर

    OBC आरक्षण पर SC का बड़ा फैसला… कहा- सिर्फ आय के आधार पर तय नहीं कर सकते क्रीमी लेयर

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    नई दिल्ली।
    सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने गुरुवार को अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के आरक्षण (OBC Reservation) को लेकर एक बड़ा फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि किसी उम्मीदवार के क्रीमी लेयर (Creamy Layer) में होने या न होने का निर्धारण केवल उसकी पारिवारिक आय के आधार पर नहीं किया जा सकता है। पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा, “पदों की श्रेणियों और स्टेटस मापदंडों का संदर्भ लिए बिना, केवल आय के आधार पर क्रीमी लेयर का दर्जा तय करना कानून की दृष्टि से टिकाऊ नहीं है।” अदालत का मानना है कि आय के साथ-साथ व्यक्ति के सामाजिक और व्यावसायिक पद को भी ध्यान में रखा जाना अनिवार्य है।


    क्या है क्रीमी लेयर की अवधारणा?

    क्रीमी लेयर शब्द का प्रयोग ओबीसी समुदाय के उन लोगों के लिए किया जाता है जो आर्थिक और सामाजिक रूप से काफी समृद्ध हो चुके हैं। आरक्षण का लाभ इस वर्ग को न मिलकर समुदाय के उन गरीब और पिछड़े लोगों तक पहुंचे, जिन्हें इसकी वास्तव में आवश्यकता है। इस अवधारणा की शुरुआत 1992 के प्रसिद्ध इंद्रा सहनी बनाम भारत सरकार मामले के बाद हुई थी। तब सुप्रीम कोर्ट ने ओबीसी आरक्षण को तो बरकरार रखा था, लेकिन संपन्न तबके को इससे बाहर रखने का आदेश दिया था। इसके बाद 1993 में सरकार ने इसे लागू करने के नियम बनाए थे।

    वर्तमान नियमों के अनुसार, यदि किसी ओबीसी परिवार की वार्षिक आय 8 लाख रुपये से अधिक है तो उसे क्रीमी लेयर में माना जाता है। ऐसे उम्मीदवार सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण के हकदार नहीं होते। आय की यह सीमा आखिरी बार 2017 में 6 लाख रुपये से बढ़ाकर 8 लाख रुपये की गई थी।

    आय के अलावा उच्च संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्तियों, वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, सशस्त्र बलों के उच्च अधिकारियों और बड़े व्यवसायियों के बच्चों को भी क्रीमी लेयर की श्रेणी में रखा जाता है।

    सुप्रीम कोर्ट के इस नए फैसले से सरकार पर क्रीमी लेयर की पहचान करने वाले 1993 के नियमों की समीक्षा करने का दबाव बढ़ सकता है। अदालत ने संकेत दिया है कि केवल पैसे को पैमाना मान लेना सामाजिक न्याय के व्यापक उद्देश्यों के खिलाफ हो सकता है। उदाहरण के लिए एक कम वेतन पाने वाला व्यक्ति भी अगर ऊंचे प्रशासनिक पद पर है तो उसकी सामाजिक स्थिति एक अमीर व्यापारी से भिन्न हो सकती है।

  • पश्चिम बंगाल चुनाव को लेकर EC का बड़ा फैसला…. पहली बार रिटर्निंग अफसर तैनात

    पश्चिम बंगाल चुनाव को लेकर EC का बड़ा फैसला…. पहली बार रिटर्निंग अफसर तैनात


    नई दिल्ली।
    चुनाव आयोग (Election Commission) ने पश्चिम बंगाल (West Bengal) में पहली बार देश के अन्य हिस्सों की तरह 152 चुनाव क्षेत्रों में SDM या उसके बराबर या उससे ऊंचे लेवल के अधिकारियों को को रिटर्निंग ऑफिसर्स (Returning Officers) यानी निर्वाचन अधिकारी के पद पर अपग्रेड कर तैनाती को मंजूरी दी है। चुनाव आयोग की तरफ से आज (गुरुवार, 12 मार्च को) जारी एक नोटिफिकेशन में राज्य के सभी 294 विधानसभा क्षेत्रों में SDM या उसके बराबर या उससे ऊंचे लेवल के रिटर्निंग ऑफिसर्स की लिस्ट जारी किए गए हैं।

    अधिकारियों के अनुसार, यह कदम तब उठाया गया, जब चुनाव आयोग ने इस बात पर जोर दिया कि राज्य सरकार निर्वाचन अधिकारी के रूप में कार्य करने के लिए उचित रैंक के अधिकारियों को नामित करे, जो चुनाव कराने के लिए एक अनिवार्य शर्त है। इसके बाद, राज्य प्रशासन ने पात्र अधिकारियों की एक संशोधित सूची सौंपी, जिससे आयोग के लिए इन नियुक्तियों का रास्ता साफ हो गया।


    निर्वाचन अधिकारी के क्या काम?

    निर्वाचन अधिकारी चुनाव प्रक्रिया में मुख्य भूमिका निभाते हैं। अपने निर्वाचन क्षेत्रों में नामांकन प्रक्रिया की निगरानी, उम्मीदवारों के दस्तावेजों की जांच, मतदान की व्यवस्था, वोटों की गिनती और परिणामों की घोषणा जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निर्वाचन अधिकारी के कंधों पर ही होती हैं। चुनाव नियमों के तहत, चुनावी प्रक्रिया में निष्पक्षता और कुशल प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए आमतौर पर इन अधिकारियों को वरिष्ठ प्रशासनिक संवर्गों से चुना जाता है।


    आयोग ने अधिकारियों की लिस्ट पर जताई थी चिंता

    अधिकारियों ने बताया कि आयोग ने पहले राज्य सरकार के प्रस्तावित अधिकारियों की वरिष्ठता के स्तर पर चिंता जताई थी और निर्धारित मानदंडों को पूरा करने वाले अधिकारियों की मांग की थी। राज्य के इस आवश्यकता को पूरा करने और उचित रैंक के अधिकारी उपलब्ध कराने के बाद ही आयोग ने निर्वाचन अधिकारियों की नियुक्ति की औपचारिक अधिसूचना जारी की।


    चुनाव से पहले की तैयारी

    यह कदम पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की तैयारियों में एक महत्वपूर्ण चरण है, जहां चुनाव आयोग संविधान के तहत अपनी देखरेख में राज्य प्रशासन के साथ तालमेल बिठाकर चुनाव कराता है। चुनाव की औपचारिक तारीखों की घोषणा से पहले निर्वाचन अधिकारियों की नियुक्ति शुरुआती प्रशासनिक उपायों में से एक है, ताकि नामांकन, मतदान और मतगणना के प्रबंधन के लिए आवश्यक ढांचा चुनाव से काफी पहले तैयार हो सके।

  • SC का बड़ा फैसला…. ससुर की संपत्ति पर विधवा बहू का भी अधिकार

    SC का बड़ा फैसला…. ससुर की संपत्ति पर विधवा बहू का भी अधिकार


    नई दिल्ली।
    विधवा महिलाओं (Widowed women) के हक में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने बड़ा फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कहा कि हिंदू दत्तक ग्रहण एवं भरण पोषण अधिनियम 1956 (Hindu Adoption and Maintenance Act, 1956) के तहत ससुर की मौत के बाद विधवा बहू भी उनकी संपत्ति से मेंटिनेंस का दावा कर सकती है। जस्टिस पंकज मिथल और जस्टिस एसवीएन भट्टी की बेंच ने दीवानी अपीलों को खारिज करते हुए कहा कि इस ऐक्ट की धारा 21 (VII) में विधवा बहू को भी शामिल किया गया है। पति की मौत ससुर की मौत से पहले हुई हो या बाद में, विधवा बहू उनकी संपत्ति से भरण-पोषण की हकदार है।


    क्या है पूरा मामला

    यह मामला डॉ. महेंद्र प्रसाद के वारिसों के बीच का था जिनकी दिसंबर 2021 को मौत हो गई थी। डॉ. महेंद्र प्रसाद की बहू गीता शर्मा उनकी संपत्ति से भरण पोषण की मांग कर रही थी। उनके पति की मौत 2023 में हो गई थी। फैमिली कोर्ट ने यह कहते हुए मेंटनिनेंस दिलाने से इनकार कर दिया था कि ससुर की मौत के समय उनके पति जीवित थे। हालांकि हाई कोर्ट ने फैमिली कोर्ट को आदेश दिया कि उनकी जरूरत के हिसाब से मेंटिनेंस का निर्देश दे। हाई कोर्ट के आदेश को परिवार के बाकी सदस्यों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। इन सदस्यों में डॉ. प्रसाद के दूसरे बेटे की विधवा बहू और लंबे समय तक लिवइन पार्टनर के रूप में रहने का दावा करने वाली महिला भी शामिल है।

    इस कानून के सेक्शन 21 में डिपेंडेंट्स के बारे में बताया गया है। इसके सब सेक्शन VIII में कहा गया है कि किसी शख्स के बेटे की विधवा भी उसकी संपत्ति से मेंटिनें की हकदार है, जब तक कि वह दूसरा विवाह नहीं करती है। इसके लिए शर्त है कि वह पति की संपत्ति या अपने पुत्र या पुत्री की संपत्ति से भरण पोषण प्राप्त करने में असमर्थ होनी चाहिए।