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  • ईरान के सुप्रीम लीडर का अमेरिका को लेकर बड़ा बयान…., बोले- दुश्मन को जल्द अरब सागर से निकाल देंगे

    ईरान के सुप्रीम लीडर का अमेरिका को लेकर बड़ा बयान…., बोले- दुश्मन को जल्द अरब सागर से निकाल देंगे


    तेहरान।
    ईरान (Iran) के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई (Supreme Leader Mojtaba Khamenei) ने सोमवार को बिना अमेरिका (America) का नाम लिए बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि दुश्मन ताकतों को जल्द अरब सागर से निकाल दिया जाएगा। उनके मुताबिक, हमलावर ताकतें अब खुद लड़ाई जारी रखने की बजाय युद्ध खत्म करने की अपील कर रही हैं। यह बयान ऐसे समय आया है जब क्षेत्र में तनाव पहले से काफी बढ़ा हुआ माना जा रहा है। खामेनेई ने यह बात ईरान-इराक युद्ध (Iran-Iraq War) की बरसी और हिजबुल्लाह नेता हसन नसरल्लाह (Hezbollah leader Hassan Nasrallah) की बरसी पर जारी संदेश में कही। नसरल्लाह की 2024 में हत्या कर दी गई थी। इन दोनों मौकों का जिक्र कर उन्होंने ईरान की सैन्य ताकत, क्षेत्रीय स्थिति और दुश्मन ताकतों के दबाव का भी जिक्र किया।

    उन्होंने कहा कि ‘सिस्टम ऑफ डोमिनेशन’ यानी दबदबा बनाने वाली ताकतों के हमलों के शुरुआती दिनों में ईरान की स्थिति बहुत कमजोर थी। उस समय देश को पिछली सरकार से कई खतरे विरासत में मिले थे। उनके शब्दों में, तब देश लगभग खाली हाथ था और अपने बचाव के लिए तैयारियां पर्याप्त नहीं थीं। खामेनेई का दावा है कि उसके बाद ईरान ने अपनी सैन्य क्षमता को तेजी से बढ़ाया। अब स्थिति इतनी बदल गई है कि हमलावर ताकतें खुद ईरानी सेना के हमलों से बचने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने कहा कि सच्चाई और खुदा की मदद से देश अब उस मुकाम पर पहुंच गया है जहां बहुत सी हमलावर ताकतें खुद, सिर्फ उनके साथी नहीं, इस्लामी गणराज्य के लड़ाकों के हमलों से बचने के लिए पनाह मांग रही हैं और युद्ध खत्म करने की गुहार लगा रही हैं।

    इस दौरान खामेनेई ने समुद्री मोर्चे का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि ईरानी सेना ने दक्षिणी ईरान के पानी से दुश्मन को पीछे धकेल दिया है और उसे अरब सागर की ओर हटना पड़ा है। उनके अनुसार, होर्मुज की सुरक्षा करने वाले ईरानी लड़ाकों ने दुश्मन को बड़ा नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि हमारे बहादुर लड़ाकों और होर्मुज के रखवालों से दर्दनाक चोटें खाने के बाद वे अरब सागर से आगे जाने की हिम्मत नहीं करते। खामेनेई ने आगे कहा कि जब भी दुश्मन ताकतों ने आगे बढ़ने की कोशिश की, नुकसान उन्हें ही हुआ। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि वह समय तेजी से आ रहा है जब अरब सागर भी उनकी मौजूदगी से साफ हो जाएगा।

    इस दौरान उन्होंने ईरान की अंदरूनी एकता पर भी जोर दिया। खामेनेई ने कहा कि देश के अलग-अलग वर्गों में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन जब बात देश की सुरक्षा और सही मांगों की आती है, तो सब एक साथ खड़े हैं। इसमें सबसे अहम मुद्दा होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण बनाए रखना है। यह जलमार्ग दुनिया के तेल व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए इस पर कब्जा या दबाव बनाए रखना ईरान की रणनीति का बड़ा हिस्सा है।

  • विदेश मंत्री जयशंकर का बड़ा बयान, बोले- बदलती परिस्थितियों में और गहरे हुए भारत-रूस के संबंध

    विदेश मंत्री जयशंकर का बड़ा बयान, बोले- बदलती परिस्थितियों में और गहरे हुए भारत-रूस के संबंध


    नई दिल्ली।
    विदेश मंत्री एस जयशंकर (External Affairs Minister S Jaishankar) ने भारत और रूस के संबंधों (India-Russia relations) को लेकर सोमवार को बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा, ‘आज की बदलती परिस्थितियों में हमारी भागीदारी और गहरी होती जा रही है।’ जयशंकर ने कहा कि 2030 तक दोनों देशों के बीच वार्षिक व्यापार को 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक बढ़ाने के लिए गैर-टैरिफ बाधाओं को दूर करने की जरूरत है। उन्होंने रूस के साथ दीर्घकालिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए भारत की अटूट प्रतिबद्धता की पुष्टि की। विदेश मंत्री ‘भारत और रूस: एक नए द्विपक्षीय एजेंडे की ओर’ शीर्षक वाले ऑनलाइन सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।

    वहीं, रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भारत की स्वतंत्र विदेश नीति की सराहना की। उन्होंने कहा कि रूस इस वर्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे का स्वागत करने के लिए उत्सुक है। एस जयशंकर ने कहा कि विकसित हो रही बहुध्रुवीय व्यवस्था के लिए भारत और रूस के बीच अधिक सहयोग की आवश्यकता है, जिसमें ब्रिक्स, शंघाई सहयोग संगठन (SCO), जी20 और संयुक्त राष्ट्र के माध्यम से सहयोग शामिल है। उन्होंने कहा कि भारत, रूस के साथ मिलकर साझा चुनौतियों का संतुलित और समावेशी तरीके से समाधान करने के लिए तत्पर है।


    भारत-रूस के मजबूत होते रिश्ते

    जयशंकर ने कहा, ‘भारत और रूस के बीच विश्वास और आपसी सम्मान पर आधारित एक विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी है। दशकों से हमारे पारस्परिक रूप से लाभकारी सहयोग ने क्षेत्रीय और वैश्विक शांति, स्थिरता और प्रगति को आगे बढ़ाया है।’ विदेश मंत्री ने पिछले वर्ष दिसंबर में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की नई दिल्ली यात्रा से निकले नतीजों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, ‘दोनों पक्ष वर्तमान वार्षिक व्यापार को 68.7 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़ाकर 2030 तक 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक संतुलित और सतत तरीके से पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।’

    विदेश मंत्री ने कहा, ‘हमें भारत-यूरेशियन आर्थिक संघ मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने और गैर-टैरिफ बाधाओं व विनियामक अड़चनों को दूर करने की जरूरत है। साथ ही, कुशल भारतीय कार्यबल का उपयोग करने के प्रयासों को जारी रखना चाहिए।’ पश्चिम एशिया में जारी संकट के मद्देनजर विदेश मंत्री की ये टिप्पणियां अहम हैं। दिसंबर में पीएम मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच हुई वार्ता के बाद भारत और रूस ने कई उपायों की घोषणा की, जिनमें एक मजबूत आर्थिक साझेदारी बनाने व 2030 तक वार्षिक व्यापार को 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक बढ़ाने के लिए 5 वर्षीय खाका शामिल है।


    रूस की ओर से क्या कहा गया

    जयशंकर ने रूस को नागरिक परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में भारत का सर्वोत्तम भागीदार बताया। उन्होंने कहा, ‘चूंकि भारत का लक्ष्य 2047 तक अपनी परमाणु ऊर्जा उत्पादन क्षमता को 100 गीगावॉट तक बढ़ाना है, मुझे विश्वास है कि परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग के लिए रूस में उसे एक विश्वसनीय भागीदार मिलेगा।’ लावरोव ने कहा कि रूस-भारत की समय-परीक्षित मित्रता आपसी विश्वास और सम्मान पर आधारित अंतरदेशीय संबंधों का आदर्श उदाहरण है। उन्होंने कहा, ‘रणनीतिक स्वायत्तता की दिशा में अपनी राह के तहत स्वतंत्र विदेश नीति अपनाने और राष्ट्रीय हितों को लगातार प्राथमिकता देने के लिए भारत अत्यंत सम्मान का पात्र है। रूस और भारत की सदियों पुरानी मित्रता इस बात का आदर्श उदाहरण है कि समानता, आपसी विश्वास, सम्मान और एक-दूसरे के हितों का ध्यान रखते हुए अंतरराज्यीय संबंध कैसे बनाए जा सकते हैं और बनाए जाने चाहिए।’