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  • राज्यसभा चुनाव में NDA का दबदबा, 27 में 19 सीटें जीतकर ऊपरी सदन में बढ़ाई ताकत; INDIA गठबंधन को बड़ा राजनीतिक झटका

    राज्यसभा चुनाव में NDA का दबदबा, 27 में 19 सीटें जीतकर ऊपरी सदन में बढ़ाई ताकत; INDIA गठबंधन को बड़ा राजनीतिक झटका


    नई दिल्ली ।
    10 राज्यों की 27 राज्यसभा सीटों पर हुए चुनाव के नतीजों ने देश की संसदीय राजनीति में नया समीकरण खड़ा कर दिया है। चुनाव परिणामों में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने प्रभावशाली प्रदर्शन करते हुए 19 सीटों पर जीत दर्ज की है, जबकि विपक्षी INDIA गठबंधन को अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी। इन नतीजों ने संसद के उच्च सदन में सत्तारूढ़ गठबंधन की स्थिति को और अधिक मजबूत कर दिया है।

    राज्यसभा चुनाव के परिणामों को राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इनके जरिए आगामी विधायी और राजनीतिक रणनीतियों की दिशा तय होने की संभावना है। चुनाव परिणामों के बाद 245 सदस्यीय राज्यसभा में NDA की संख्या बढ़कर 152 तक पहुंच गई है। यह आंकड़ा गठबंधन को पहले की तुलना में अधिक प्रभावशाली स्थिति प्रदान करता है और महत्वपूर्ण विधेयकों पर उसकी रणनीतिक क्षमता को मजबूत बनाता है।

    विपक्षी INDIA गठबंधन को इस चुनाव में केवल पांच सीटों पर सफलता मिली। चुनाव से पहले विपक्ष को कुछ राज्यों में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद थी, लेकिन अंतिम परिणाम उसके पक्ष में नहीं रहे। कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह परिणाम विपक्षी एकजुटता और चुनावी प्रबंधन के लिए एक चुनौती के रूप में देखा जाएगा।

    चुनाव के सबसे चर्चित परिणामों में झारखंड का नाम प्रमुखता से सामने आया। यहां राज्यसभा की दोनों सीटों पर मुकाबला राजनीतिक हलकों में विशेष चर्चा का विषय बना रहा। एक सीट पर झारखंड मुक्ति मोर्चा के उम्मीदवार ने जीत दर्ज की, जबकि दूसरी सीट पर NDA समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार ने विपक्षी खेमे को बड़ा झटका देते हुए विजय हासिल की। इस परिणाम ने राज्य की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दिया है और विपक्षी दलों के भीतर भी रणनीतिक समीक्षा की जरूरत महसूस की जा रही है।

    झारखंड का परिणाम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि विधानसभा में संख्याबल को देखते हुए विपक्षी गठबंधन को बेहतर स्थिति में माना जा रहा था। इसके बावजूद चुनावी गणित और समर्थन जुटाने की रणनीति ने अंतिम परिणाम को प्रभावित किया। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार इस जीत ने यह संकेत दिया है कि राज्यसभा चुनावों में केवल संख्याबल ही नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रबंधन भी निर्णायक भूमिका निभाता है।

    मध्य प्रदेश में भी एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम देखने को मिला। यहां संभावित मुकाबले की चर्चा के बीच विपक्षी उम्मीदवार की उम्मीदवारी निरस्त हो जाने के बाद एक सीट पर सत्तारूढ़ दल को निर्विरोध लाभ मिला। इससे NDA के कुल प्रदर्शन को अतिरिक्त मजबूती मिली और राज्यसभा में उसकी संख्या बढ़ाने में सहायता मिली।

    चुनाव परिणामों के बाद अब राजनीतिक चर्चा इस बात पर केंद्रित है कि उच्च सदन में सत्तारूढ़ गठबंधन की बढ़ती ताकत का असर आगामी संसदीय सत्रों पर किस प्रकार पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि NDA को कुछ क्षेत्रीय और तटस्थ दलों का समर्थन मिलता रहा तो कई महत्वपूर्ण विधेयकों और नीतिगत प्रस्तावों को पारित कराने की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक आसान हो सकती है।

    राजनीतिक दृष्टि से यह चुनाव केवल सीटों की संख्या तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आगामी राष्ट्रीय राजनीति के संकेत भी देता है। राज्यसभा में मजबूत स्थिति किसी भी सरकार के लिए विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में हालिया परिणामों को सत्तारूढ़ गठबंधन के लिए रणनीतिक बढ़त के रूप में देखा जा रहा है।

    विश्लेषकों का मानना है कि इन नतीजों के बाद विपक्षी दलों को अपने संगठनात्मक ढांचे, समन्वय और चुनावी रणनीति पर नए सिरे से विचार करना पड़ सकता है। वहीं NDA के लिए यह परिणाम राजनीतिक आत्मविश्वास बढ़ाने वाला साबित हुआ है, जिसने उच्च सदन में उसकी स्थिति को पहले से अधिक मजबूत कर दिया है।

  • बदलेगा संसद का स्वरूप…! लोकसभा में महिलाओं के लिए 273 सीटें बढ़ाने की तैयारी… 409 होगा बहुमत का आंकड़ा?

    बदलेगा संसद का स्वरूप…! लोकसभा में महिलाओं के लिए 273 सीटें बढ़ाने की तैयारी… 409 होगा बहुमत का आंकड़ा?


    नई दिल्ली।
    सरकार (Government) संसद (Parliament) के मौजूदा सत्र में महिला आरक्षण (Women’s Reservation) को लागू करने के लिए कम से कम दो विधेयक (Bills) (संविधान संशोधन सहित) पेश करने की तैयारी कर रही है। इसके तहत अगले लोकसभा (Lok Sabha) और उसके बाद होने वाले विधानसभा चुनावों में महिलाओं के लिए एक-तिहाई (33%) सीटें आरक्षित की जाएंगी। इस कदम से देश का राजनीतिक परिदृश्य पूरी तरह से बदलने की उम्मीद है।


    लोकसभा की सीटों में 50% का इजाफा

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार की योजना के अनुसार लोकसभा की कुल सीटें मौजूदा 543 से बढ़ाकर 816 की जा सकती हैं। यानी 273 नई सीटें जोड़ी जाएंगी, जिनमें से अधिकांश महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। इससे संसद में बहुमत का आंकड़ा भी बढ़कर 409 हो जाएगा।

    यह वृद्धि पिछले पांच दशकों में पहली बार होगी। इससे मौजूदा पुरुष सांसदों की राजनीतिक स्थिति पर कोई खतरा नहीं मंडराएगा। राज्यसभा और राज्यों की विधान परिषदों की सदस्य संख्या पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।


    परिसीमन और 2011 की जनगणना का इस्तेमाल

    2023 में पारित ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ में महिला आरक्षण को नई जनगणना के बाद होने वाले परिसीमन से जोड़ा गया था। अब सरकार इस प्रावधान को अलग कर रही है। नई जनगणना के आंकड़ों में समय लग सकता है, इसलिए सरकार 2011 की जनगणना के आधार पर ही नया परिसीमन कराने पर विचार कर रही है ताकि 31 मार्च 2029 के बाद होने वाले चुनावों में यह कोटा लागू किया जा सके।


    राज्यों और SC/ST सीटों पर असर

    दक्षिण भारतीय राज्यों की यह चिंता थी कि जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन के कारण संसद में उनका प्रतिनिधित्व घट सकता है। सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि हर राज्य की सीटों में 50% की वृद्धि होगी, जिससे उनका आनुपातिक प्रतिनिधित्व बरकरार रहेगा।
    उत्तर प्रदेश: सीटें 80 से बढ़कर 120 हो जाएंगी।
    बिहार: सीटें 40 से बढ़कर 60 हो जाएंगी।
    केरल: सीटें 20 से बढ़कर 30 हो जाएंगी।

    इसी अनुपात में अनुसूचित जाति (SC) की सीटें 84 से बढ़कर 126 और अनुसूचित जनजाति (ST) की सीटें 47 से बढ़कर 70 हो जाने का अनुमान है। छोटे राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों (जहां केवल 1 या 2 सीटें हैं) में हर तीसरे चुनाव में महिलाओं के लिए रोटेशन के आधार पर सीट आरक्षित की जाएगी।


    राजनीतिक सरगर्मी और आगे की राह

    सरकार 4 अप्रैल को समाप्त हो रहे बजट सत्र में ही इन विधेयकों को पारित कराने की इच्छुक है। यदि सहमति बनाने में कुछ और दिन लगते हैं, तो बजट सत्र को बढ़ाया जा सकता है या महिलाओं के कोटे के लिए एक विशेष छोटा सत्र भी बुलाया जा सकता है।


    अमित शाह की बैठकें

    संविधान संशोधन के लिए दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है, जो NDA के पास अकेले नहीं है। इसलिए गृह मंत्री अमित शाह समर्थन जुटाने के लिए बैठकें कर रहे हैं। उन्होंने NDA के सहयोगियों के साथ-साथ सपा, शिवसेना (UBT), बीजेडी और YSR कांग्रेस जैसे विपक्षी और गैर-गठबंधन दलों के साथ भी चर्चा की है।

    कांग्रेस और वामपंथी दलों ने इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने अमित शाह की बैठक से किनारा कर लिया। वहीं, कांग्रेस और सपा जैसी पार्टियां महिला कोटे के भीतर अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए अलग से आरक्षण की मांग कर रही हैं।