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  • माघ मेला की रंगीन तस्वीरें: मकर संक्रांति स्नान के लिए दूर-दूर से आए लोग

    माघ मेला की रंगीन तस्वीरें: मकर संक्रांति स्नान के लिए दूर-दूर से आए लोग

    नई दिल्ली। प्रयागराज के त्रिवेणी संगम में माघ मेला अपने पूरे वैभव के साथ चल रहा है। मकर संक्रांति के पवित्र स्नान के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु बड़ी संख्या में संगम पहुंच रहे हैं। कल्पवास, स्नान-दान और पूजा-अर्चना के लिए उमड़ी भीड़ ने मेला क्षेत्र को श्रद्धा और उत्साह से भर दिया है।

    सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

    सुरक्षा को दृष्टिगत रखते हुए प्रशासन ने आठ स्तरीय सुरक्षा घेरा स्थापित किया है। बाहरी सुरक्षा घेरों में पुलिस बल तैनात हैं, जबकि आंतरिक सुरक्षा में पीएसी, आरएएफ और एटीएस के जवान मुस्तैदी से नजर रख रहे हैं। प्रवेश द्वारों पर श्रद्धालुओं की गहन तलाशी और सत्यापन के बाद ही मेला क्षेत्र में प्रवेश दिया जा रहा है। घाटों पर घुड़सवार पुलिस बल तैनात हैं ताकि किसी भी अप्रत्याशित घटना से तुरंत निपटा जा सके।

    साधु-संत और भंडारे

    माघ मेले में देशभर से साधु-संत संगम में पहुंचे हैं। महावीर मार्ग पर संत शिविर के बाहर अन्न क्षेत्र में साधु-संतों को प्रसाद ग्रहण कराया जा रहा है। श्रद्धालुओं के लिए भी भंडारे आयोजित किए गए हैं, जिससे सभी को भोजन की सुविधा मिल सके।

    मौनी बाबा का त्रिशूल आकर्षण का केंद्र

    संगम अपर मार्ग पर मौनी बाबा का त्रिशूल विशेष आकर्षण बना हुआ है। श्रद्धालु इसे देखने और फोटो खींचने के लिए बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। यह धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से माघ मेले का एक महत्वपूर्ण आकर्षण है।

    पंडाल और सांस्कृतिक कार्यक्रम

    माघ मेला क्षेत्र में कई पंडाल पहले से तैयार हैं। इन पंडालों में साधु-संत और श्रद्धालुओं का आगमन लगातार जारी है। इसके अलावा, मेला क्षेत्र में विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें देशभर के कलाकार हिस्सा ले रहे हैं।

    पवित्र संगम में पूजा और आरती

    श्रद्धालु पवित्र संगम में मां गंगा की आरती करते हुए चुनरी चढ़ा रहे हैं। वे अपने परिवार और समाज की सुख-समृद्धि की कामना कर रहे हैं। सुबह की धूप और बदलते मौसम के बीच श्रद्धालुओं की श्रद्धा और उत्साह देखने लायक है।

    प्रयागराज माघ मेला इस साल भी अपने ऐतिहासिक वैभव और धार्मिक महत्व के साथ आयोजित हो रहा है। श्रद्धालुओं की भीड़, पंडाल, साधु-संतों की उपस्थिति, भंडारे और सुरक्षा व्यवस्था इसे देश का एक प्रमुख धार्मिक आयोजन बनाते हैं। मकर संक्रांति स्नान और संगम की पवित्रता में शामिल होने के लिए लोग दूर-दूर से पहुंच रहे हैं, जिससे मेला क्षेत्र में श्रद्धा और उत्सव का माहौल बना हुआ है।
  • Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति से जुड़े 7 जरूरी काम जो पुण्य की प्राप्ति के लिए हर किसी को करने चाहिए

    Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति से जुड़े 7 जरूरी काम जो पुण्य की प्राप्ति के लिए हर किसी को करने चाहिए

    नई दिल्ली| Makar Sankranti 2026 Puja Ke Upay: सनातन परंपरा में हर साल 14 या 15 जनवरी को मकर संक्रांति का महापर्व मनाया जाता है. हिंदू मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान सूर्य धनु राशि से निकलकर अपने पुत्र शनिदेव की राशि मकर में प्रवेश करते हैं. इस दिन स्नान, ध्यान और दान करने का बहुत ज्यादा महत्व होता है. मान्यता है कि इस दिन व्यक्ति सूर्य रश्मियों के पुण्य प्रभाव से पूरे साल सुख, सौभाग्य और आरोग्य को प्राप्त करता है. अलग-अलग प्रां​तों में अलग-अलग नाम से मनाए जाने वाले इस पावन पर्व को उत्तर भारत में खिचड़ी के नाम से जाना जाता है. आइए जानते हैं कि मकर संक्रांति के दिन व्यक्ति को पुण्य की प्राप्ति के लिए कौन से 7 काम जरूर करने चाहिए.

    1. तिल के तेल से करें मालिश

    हिंदू मान्यता के अनुसार मकर संक्रांति के पर्व पर तिल का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है. मान्यता है कि संक्रांति के दिन व्यक्ति द्वारा तिल के तेल से मालिश करने से शुभता सूर्य की कृपा प्राप्त होती है. मान्यता है कि सूर्य देव की कृपा से पूरे साल व्यक्ति स्वस्थ रहता है.

    2. तिल का उबटन लगाएं

    हिंदू मान्यता के अनुसार मकर संक्रांति के दिन गुडलक को पाने के लिए न सिर्फ तिल का तेल बल्कि तिल का उबटन भी लगाना चाहिए. मान्यता है कि तिल का उबटन लगाने से व्यक्ति कांतिवान बनता है.

    3. गंगा स्नान

    हिंदू मान्यता के अनुसार मकर संक्रांति के दिन गंगा स्नान का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है. मान्यता कि संक्रांति के दिन पुण्यदायिनी मां गंगा के अमृतजल में लगाई गई तीन डुबकी अनंत पुण्य प्रदान करने वाली होती है.

    4. तिलयुक्त जल से करें स्नान

    हिंदू मान्यता के अनुसार यदि आप तिल के तेल से मालिश या उससे बना उबटन न लगा पाएं तो कम से कम अपने नहाने के पानी में तिल डालकर स्नान करें. मान्यता है​ कि ​मकर संक्रांति पर तिलयुक्त जल से स्नान करने पर व्यक्ति को सुख-सौभाग्य की प्राप्ति होती है.

    5. पूजा में तिल से करें हवन

    हिंदू मान्यता के अनुसार मकर संक्रांति के दिन स्नान-ध्यान के बाद हवन करने पर विशेष फल की प्राप्ति होती है. मकर संक्रांति के दिन आपके द्वारा की जाने वाली साधना-आराधना का पुण्यफल तब और बढ़ जाता है जब आप हवन सामग्री में तिल मिलाकर देवताओं के लिए विशेष रूप से हवन करते हैं. मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन तिल से हवन करने पर व्यक्ति पर लक्ष्मी और नारायण दोनों की कृपा बरसती है.

    6. जरूरतमंद लोगों को करें तिल का दान

    मकर संक्रांति के पावन पर्व पर स्नान के साथ दान का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है. मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन काले तिल के साथ गुड़ का दान करने पर न सिर्फ भगवान सूर्य बल्कि शनिदेव की कृपा भी अवश्य प्राप्त होती है.

    7. जरूर करें तिल से बना भोजन

    मकर संक्रांति पर पूजा के तमाम उपायों की तरह तिल से बना भोजन भी शुभ फल प्रदान करता है. ऐसे में आप इस दिन तिल से बने लड्डू, गजक, रेवड़ी आदि का सेवन अवश्य करें. मान्यता है कि प्रसाद स्वरूप तिल से बनी चीजों का सेवन करने पर सूर्य देव की विशेष कृपा बरसती है.

  • Makar Sankranti 2026: गुजरात से प्रयागराज तक, मकर संक्रांति की 5 सबसे रंगीन जगह

    Makar Sankranti 2026: गुजरात से प्रयागराज तक, मकर संक्रांति की 5 सबसे रंगीन जगह

    नई दिल्ली। Makar Sankranti 2026 Places to Visit: सूर्य के उत्तरायण होते ही उत्सवों का मौसम शुरू हो जाता है। शुरुआत मकर संक्रांति के पावन पर्व से होती है जो 14 या 15 जनवरी 2026 को ंमनाई जाएगी। मकर संक्रांति पूरे देश में मनाई जाती है, लेकिन अलग-अलग नामों और तरीकों से। मकर संक्रांति का पर्व अंधकार से प्रकाश की ओर और शीत से ऊर्जा की ओर बढ़ने का समय है।

    यह वही दिन है जब सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते हैं और दक्षिणायन से उत्तरायण की यात्रा शुरू होती है। भारतीय परंपरा में इसे अत्यंत शुभ माना गया है। खेतों में नई फसल की खुशी, घरों में तिल-गुड़ की मिठास और आसमान में रंग-बिरंगी पतंगें, मकर संक्रांति हर रूप में उल्लास रचती है।

    लेकिन यह पर्व पूरे भारत में एक जैसा नहीं मनाया जाता। हर क्षेत्र इसे अपने रंग, नाम और संस्कार के साथ जीता है। आइए जानते हैं उन जगहों के बारे में, जहां मकर संक्रांति की धूम देखते ही बनती है।

    गुजरात
    गुजरात में मकर संक्रांति केवल त्योहार नहीं, बल्कि जन-उत्सव है। अहमदाबाद, सूरत और वडोदरा में अंतर्राष्ट्रीय पतंग फेस्टिवल का आयोजन होता है। छतों पर लोग “काई पो चे” के नारों के साथ पतंगबाजी करते हैं। ऊंधियू, जलेबी और चिक्की यहां की पहचान हैं। रात में टुक्कल (लैंप पतंग) आसमान को जादुई बना देते हैं।

    प्रयागराज
    उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में संगम में आस्था की डुबकी लगाकर मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है। यूपी में मकर संक्रांति का अर्थ है पवित्र स्नान। प्रयागराज के संगम पर लाखों श्रद्धालु गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम में डुबकी लगाते हैं। दान-पुण्य, खिचड़ी, तिल और वस्त्र दान का विशेष महत्व है। यह दिन आध्यात्मिक शुद्धि का प्रतीक माना जाता है।

    तमिलनाडु
    तमिलनाडु में पोंगल के रूप में चार दिन का उत्सव मनाया जाता है। दक्षिण भारत में मकर संक्रांति को पोंगल कहा जाता है। यह चार दिन तक चलने वाला पर्व है, भोगी, थाई पोंगल, मट्टू पोंगल और कानुम पोंगल। नई फसल से बना मीठा पोंगल, गाय-बैलों की पूजा और घरों के सामने रंगोली, यह त्योहार किसानों के सम्मान का उत्सव है।

    राजस्थान
    यहां पतंगबाजी और लोक-संस्कृति का संगम है। जयपुर और अन्य शहरों में मकर संक्रांति पर पतंगबाजी प्रतियोगिताएं, लोकगीत और पारंपरिक व्यंजन त्योहार को खास बना देते हैं। महिलाएं पारंपरिक परिधान पहनकर सूर्य को अर्घ्य देती हैं।

    महाराष्ट्र
    महाराष्ट्र में मकर संक्रांति सामाजिक सौहार्द का पर्व है। लोग एक-दूसरे को तिलगुल देकर कहते हैं, “तिलगुल घ्या, गोड गोड बोला।” यह संदेश है कि जैसे तिल और गुड़ मिलकर मिठास देते हैं, वैसे ही जीवन में भी कटुता छोड़कर मधुरता अपनाई जाए।

  • Makar Sankranti 2026 : मकर संक्रांति पर कैसे पकेगी खिचड़ी, षट्तिला एकादशी ने चावल दान पर भी फंसाया पेंच, अब मकर संक्रांति पर क्या करें?

    Makar Sankranti 2026 : मकर संक्रांति पर कैसे पकेगी खिचड़ी, षट्तिला एकादशी ने चावल दान पर भी फंसाया पेंच, अब मकर संक्रांति पर क्या करें?


    नई दिल्ली। मकर संक्रांति इस बार 14 जनवरी को मनाया जाएगा। हालांकि, इस बार की मकर संक्रांति बेहद ही खास होने वाली है। क्योंकि,मकर संक्रांति पर इस बार एकादशी तिथि का संयोग बन गया है। ऐसे में मकर संक्रांति पर सूर्यदेव के साथ भगवान विष्णु की कृपा का लाभ भी मिलने वाला है। लेकिन इससे मकर संक्रांति पर एक दुविधा की स्थिति भी बन गई है जिसको लेकर लोगों में उलझन की स्थिति बनी हुई है। दरअसल मकर संक्रांति पर खिचड़ी खाने और दान करने का विशेष महत्व बताया गया है। लेकिन, एकादशी तिथि होने के कारण अब सवाल यह उठता है कि, क्या इस बार मकर संक्रांति पर भगवान को खिचड़ी का भोग लगाना,खिचड़ी खाना और दान करना शुभ रहेगा या नहीं। आपके इन्हीं सवालों के जवाब यहां हम आपको बताने जा रहे हैं कि अबकी बार मकर संक्रांति पर एकादशी तिथि के संयोग में खिचड़ी खाने, दान करने और भगवान को भोग लगाने के संबंध में आप क्या कर सकते हैं।

    क्या मकर संक्रांति 2026 पर कर सकते हैं चावल और खिचड़ी का दान ?
    सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं तो मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है। सूर्य इस दिन अपने पुत्र शनि की राशि मकर में प्रवेश करते हें। इस दिन से सूर्य उत्तरायण होते हैं और देवताओं का दिन भी शुरू होता है। श्रीमद्भागवत गीता में भी मकर संक्रांति के दिन का बड़ा महत्व बताया गया है, इस दिन से देवलोक में दिन आरंभ होता और सूर्यदेव अपने दिए हुए वरदान के अनुसार मकर राशि में आकर धन समृद्धि और सुख लाते हैं। इसलिए भी इस दिन का विशेष महत्व है। और परंपराओं से चल मान्यता चली आ रही है कि मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी का भोग लगता है और खिचड़ी एवं चावल का दान भी किया जाता है। लेकिन अबकी बार मकर संक्रांति के साथ षटतिला एकादशी का संयोग होने से दुविधा की स्थिति बन गई है।

    शास्त्रों के अनुसार, एकादशी तिथि पर अन्न का सेवन और अन्न दान करना वर्जित माना गया है। खास तौर पर चावल खाने और दान करने की मनाही है। ऐसे में मकर संक्रांति पर इस बार आप तिल, गुड़ और मूंगफली आदि का दान कर सकते हैं। इस दिन आप चावल और खिचड़ी का बाकी सामान दान के निमित्त अलग से निकालकर घर के मंदिर में रख दें।
    मकर संक्रांति 14 जनवरी बुधवार के दिन और उससे अगले दिन 15 जनवरी को गुरुवार है। शास्त्रों में गुरुवार के दिन खिचड़ी का सेवन वर्जित बताया गया है। ऐसे में आप उस दिन भी खिचड़ी नहीं बना सकते हैं तो ऐसे में शनिवार का दिन यानी 17 जनवरी को आप खिचड़ी बना सकते हैं और इसी दिन आप चावल का दान भी कर सकते हैं। बता दें कि 17 जनवरी शनिवार के दिन सप्तमी उपरांत अष्टमी तिथि रहेगी जो शनि से संबंधित है और सूर्य जब तक मकर राशि में गोचर करते रहेंगे तब तक माघ मास में दान पुण्य का संयोग बना रहेगा। ऐसे में इस दिन जो भी आप चावल आदि का दान करेंगे उसका आपको उत्तम फल मिलेगा। आप 17 जनवरी को खिचड़ी का सेवन भी करेंगे तो यह शुभ रहेगा और आपके ग्रह दोष कटेंगे।

    मकर संक्रांति 2026 पर क्या दान करें ?
    मकर संक्रांति पर इस बार आप चाहें तो गुड़, तिल, तिल से बनी चीजें जैसे लड्डू आदि का दान करें। इस दिन तिल का दान करने से पापों का नाश होता है। साथ ही तिल का दान करने से सूर्य देव प्रसन्न होते हैं। इस दिन दान पुण्य करने से सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है।

  • मकर संक्रांति 2026: सूर्य के मकर गोचर से बदलेगा भाग्य का चक्र, 12 महीने बाद नए अवसरों की शुरुआत

    मकर संक्रांति 2026: सूर्य के मकर गोचर से बदलेगा भाग्य का चक्र, 12 महीने बाद नए अवसरों की शुरुआत


    नई दिल्ली ।मकर संक्रांति के पावन अवसर पर 14 जनवरी 2026 को सूर्य देव शनि की राशि मकर में प्रवेश करने जा रहे हैं। यह खगोलीय घटना करीब 12 महीने बाद घटित हो रही है जिसे धार्मिक सामाजिक और ज्योतिषीय-तीनों ही दृष्टियों से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सूर्य के उत्तरायण होने के साथ ही जहां मकर संक्रांति का पर्व पूरे देश में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा वहीं खरमास की समाप्ति के बाद विवाह गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्यों की भी पुनः शुरुआत होगी। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार सूर्य का यह गोचर कई राशियों के जीवन में करियर धन और मान-सम्मान के नए द्वार खोल सकता है।

    ज्योतिष शास्त्र में सूर्य और शनि को स्वभाव से विपरीत ग्रह माना गया है लेकिन पिता-पुत्र के संबंध के कारण सूर्य का शनि की राशि मकर में प्रवेश विशेष फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि इस दौरान किए गए परिश्रम अनुशासन और निरंतर प्रयासों का फल अवश्य मिलता है। यह गोचर उन लोगों के लिए खास साबित हो सकता है जो लंबे समय से अपने लक्ष्य को पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

    मेष राशि के जातकों के लिए सूर्य का यह गोचर दशम भाव में होगा जो कर्म और करियर का सबसे महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। इस अवधि में नौकरीपेशा लोगों को नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं और पदोन्नति के योग भी बन सकते हैं। जो लोग नौकरी बदलने की योजना बना रहे हैं उनके लिए यह समय अनुकूल साबित हो सकता है। नेतृत्व क्षमता में वृद्धि होगी और वरिष्ठ अधिकारियों से प्रशंसा मिल सकती है।वृषभ राशि वालों के लिए सूर्य नवम भाव में गोचर करेंगे जिसे भाग्य और धर्म का भाव कहा जाता है। इस दौरान भाग्य का पूरा साथ मिलने के संकेत हैं। उच्च शिक्षा विदेश यात्रा और धार्मिक गतिविधियों में रुचि बढ़ सकती है। अचल संपत्ति या दीर्घकालिक निवेश से लाभ के योग बन रहे हैं। कार्यक्षेत्र में वरिष्ठों का सहयोग और सम्मान प्राप्त हो सकता है।

    वृश्चिक राशि के जातकों के लिए सूर्य का गोचर तीसरे भाव में होगा जो पराक्रम और साहस का प्रतीक है। इस दौरान आत्मविश्वास बढ़ेगा और नए काम शुरू करने की प्रेरणा मिलेगी। आर्थिक स्थिति में सुधार के संकेत हैं हालांकि व्यापार या निवेश में जल्दबाजी से बचने की सलाह दी जा रही है। पारिवारिक जीवन में भाई-बहनों के साथ तालमेल बनाए रखना जरूरी होगा।मकर राशि के लिए यह गोचर सबसे अधिक प्रभावशाली माना जा रहा है क्योंकि सूर्य लग्न भाव में प्रवेश करेंगे। इससे व्यक्तित्व में निखार आएगा सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी और करियर में उन्नति के मजबूत योग बनेंगे। संपत्ति और सरकारी मामलों में सफलता मिल सकती है लेकिन स्वास्थ्य को लेकर लापरवाही भारी पड़ सकती है इसलिए संतुलन जरूरी है।

    कुंभ राशि के जातकों के लिए सूर्य द्वादश भाव में गोचर करेंगे। इस दौरान विदेश यात्रा विदेशी कंपनियों से जुड़े काम और आय के नए स्रोत बन सकते हैं। हालांकि खर्चों में वृद्धि संभव है और पारिवारिक जीवन में संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण रह सकता है।ज्योतिष विशेषज्ञों का मानना है कि सूर्य का मकर गोचर मेहनत अनुशासन और धैर्य का महत्व सिखाता है। यह समय उन्हीं लोगों को विशेष फल देगा जो लक्ष्य के प्रति समर्पित रहकर लगातार प्रयास करते हैं। कुल मिलाकर मकर संक्रांति 2026 कई राशियों के लिए बदलाव और उन्नति का संकेत लेकर आ रही है।

  • Makar Sankranti पर सूर्य देव की कृपा पाने के लिए करें ये काम, होगी सुख-समृद्धि की बरसात

    Makar Sankranti पर सूर्य देव की कृपा पाने के लिए करें ये काम, होगी सुख-समृद्धि की बरसात

    नई दिल्ली। हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, मकर संक्रांति पर स्नान-दान से पुण्य फल मिलते हैं। इस दिन सूर्य देव की उपासना करने से साधक को सुख-समृद्धि की प्राप्ति हो सकती है। ऐसे में आप इस दिन पर कुछ विशेष कार्यों द्वारा सूर्य देव की कृपा के पात्र बन सकते हैं।

    ऐसा माना गया है कि मकर संक्रांति (Makar Sankranti 2026) के दिन किए गए स्नान-दान और पूजा-पाठ करने से साधक को कई गुना फल मिलता है। इस साल मकर संक्रांति बुधवार, 14 जनवरी को है। मकर संक्रांति पर खरमास का समापन भी होता है, जिससे विवाह आदि जैसे शुभ कार्य दोबारा शुरू हो जाते हैं।

    जरूर करें ये काम
    मकर संक्रांति के दिन (Makar Sankranti 2025 Upay) सुबह जल्दी उठकर किसी पवित्र नदी खासकर गंगा में स्नान जरूर करें। अगर आपके लिए ऐसा करना संभव न हो, तो आप घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर भी स्नान कर सकते हैं। इससे साधक के लिए सुख-समृद्धि के योग बनते हैं।

    शनि दोष से मिलेगी राहत
    शनि दोष से राहत पाने के लिए मकर संक्रांति (Makar Sankranti 2025) के दिन गंगाजल में काले तिल मिलाकर शिव जी का अभिषेक करें। ऐसा करने से आपको अपनी स्थिति में लाभ देखने को मिल सकता है। इसके साथ ही आप मकर संक्रांति पर गंगा स्नान के बाद बहती जलधारा में काले तिल प्रवाहित कर सकते हैं, जिससे शनि दोष में राहत मिलती है।
    इस तरह करें सूर्य देव को प्रसन्न
    मकर संक्रांति के दिन स्नान-ध्यान के बाद सूर्य देव को जल अर्पित करना चाहिए। इससे जातक के मान-सम्मान में वृद्धि होती है। इस दिन सूर्य देव को जल अर्पित करने के लिए सबसे पहले जल में लाल फूल, अक्षत (चावल) और रोली मिलाएं और इसके बाद सूर्य को अर्घ्य दें। इस दौरान ॐ सूर्याय नम: मंत्र का जप करते रहें।

    अंत में सूर्य देव को नमस्कार करते हुए सुख-समृद्धि की कामना करें। साथ ही इस दिन पर सूर्य देव की कृपा के लिए अपनी क्षमता के अनुसार, अन्न, तिल, गुड़, कपड़े, कंबल और धन आदि का दान (Makar Sankranti Daan) करें व गरीब और जरूरतमंद लोगों को भोजन कराएं।

  • मकर संक्रांति 2026 पुण्यकाल 16 घंटे का. 15 जनवरी को मनाएं मकर संक्रांति

    मकर संक्रांति 2026 पुण्यकाल 16 घंटे का. 15 जनवरी को मनाएं मकर संक्रांति


    नई दिल्ली । मकर संक्रांति 2026 के दिन सूर्य का मकर राशि में प्रवेश 14 जनवरी की रात 9:19 बजे होगा, लेकिन शास्त्रों के अनुसार पुण्यकाल 16 घंटे तक रहेगा, जो 15 जनवरी तक जारी रहेगा। इस दिन विशेष रूप से स्नान, सूर्य पूजा और दान का महत्व है। हिंदू धर्म में मकर संक्रांति को विशेष दिन माना जाता है क्योंकि इस दिन सूर्य उत्तरायण की दिशा में प्रवेश करते हैं, जिससे पृथ्वी पर दिन-ब-दिन तापमान बढ़ता है और ऋतु परिवर्तन की शुरुआत होती है। इसे देवताओं का दिन भी कहा जाता है, क्योंकि सूर्यदेव का उत्तरायण में प्रवेश शुभ होता है।कर्मकांडी अमरेंद्र कुमार शास्त्री और ज्योतिषाचार्य पंडित नरोत्तम द्विवेदी के अनुसार, मकर संक्रांति का त्योहार 15 जनवरी को मनाया जाएगा।
    इस दिन, स्नान, सूर्यदेव की उपासना और तिल का दान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।मकर संक्रांति से जुड़ी एक पुरानी कथा भी है, जिसके अनुसार भगवान सूर्य, अपने पुत्र भगवान शनि से मिलने मकर राशि में प्रवेश करते हैं। इसी दिन से सूर्य उत्तर पथगामी होते हैं और पृथ्वी की ओर उनका रुख बदलता है।मकर संक्रांति के दिन विशेष रूप से स्नान का महत्व है, खासकर गंगा या अन्य पवित्र नदियों में। इस दिन को पुण्यकाल माना गया है, और इस दौरान दान करने से व्यक्ति के जीवन में शुभता आती है।
    धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इस दिन सूर्यदेव, भगवान गणेश, माता लक्ष्मी और भगवान शिव की पूजा करने से जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं।मकर संक्रांति के दिन विशेष रूप से नया अन्न, तिल, कम्बल, घी और धार्मिक पुस्तकों का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन भोजन में खासतौर पर तिल और खिचड़ी बनाई जाती है, जो प्राचीन परंपराओं के अनुसार भगवान को अर्पित की जाती है, फिर इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है।

    धार्मिक आचार्यों का मानना है कि इस दिन तिल का दान करने से शनि से संबंधित सभी कष्ट समाप्त होते हैं। इसके अलावा, गरीबों को बर्तन, तिल और अन्य सामान दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती हैमौसम को लेकर भी मकर संक्रांति विशेष महत्व रखता है। हालांकि, इस समय कड़ाके की ठंड पड़ रही है, लेकिन अगर मौसम अनुकूल रहा तो गंगा स्नान के लिए श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या गंगा घाटों पर पहुंच सकती है। विशेष रूप से उत्तर भारत के कई इलाकों से लोग इस दिन गंगा स्नान के लिए पहुंचते हैं।

    इसके अलावा, मकर संक्रांति के बाद खरमास का समय समाप्त हो जाएगा, जिसके चलते मांगलिक कार्यों की शुरुआत होगी। 18 जनवरी को मौनी अमावस्या और 4 फरवरी को पहला वैवाहिक लग्न मुहूर्त भी शुरू होगा। 2026 में मकर संक्रांति का दिन धार्मिक आस्थाओं और परंपराओं से भरपूर रहेगा। यह दिन सूर्य की उपासना, तिल दान, और अन्य शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त रहेगा। विशेष रूप से इस दिन की महत्वता को समझते हुए श्रद्धालु इसे श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाएंगे।

  • संगम स्नान से लेकर कल्पवास तक,जाने माघ मेले से जुड़ी हर जरूरी बात, प्रमुख तिथियां और धार्मिक मान्यताएं

    संगम स्नान से लेकर कल्पवास तक,जाने माघ मेले से जुड़ी हर जरूरी बात, प्रमुख तिथियां और धार्मिक मान्यताएं


    नई दिल्ली।माघ मेला के बारे में अक्सर लोगों के मन में ढ़ेरो सवाल होते हैं- जैसे कि माघ मेले में स्नान करने के फायदे, स्नान की महत्वपूर्ण तारीखें, और कल्पवास क्या है और यह कितने समय तक चलता है. तो आइए इन्हीं सारे सावालों का जवाब जानते हैं.
    माघ मेला 2026 प्रयागराज
    मेला शुरू – 3 जनवरी, 2026शनिवार
    मेला समाप्त – 15 फरवरी, 2026रविवार
    माघ मेला कितने दिनों तक रहता है – 44 दिन
    माघ मेला कहा लगता है – त्रिवेणी संगम, प्रयागराज
    माघ मेला और कुंभ मेला में क्या अंतर है?
    माघ मेला हर साल प्रयागराज में आयोजित होता है,
    जबकि कुंभ मेला हर 12 साल में एक बार और अर्ध कुंभ मेला
    हर 6 साल में एक बार आयोजित होता है.

    संगम स्नान का सबसे अच्छा समय क्या है?

    संगम स्नान के लिए सबसे अच्छा समय ब्रह्म मुहूर्त माना जाता है. 2026 में महा माघ मेले के आस-पास घूमने की कुछ जगहें कौन सी हैं? संगम में स्नान करने के बाद, आप अक्षय वट, पातालपुरी मंदिर, हनुमान मंदिर और द्वादश माधव मंदिरों में जा सकते हैं.कल्पवास कितने दिनों तक चलता है?  आमतौर पर कल्पवास 30 दिनों तक चलता है, पौष पूर्णिमा से माघी पूर्णिमा तक. क्या माघ मेला में कल्पवास सबके लिए अनिवार्य होता है? नहीं, कल्पवास सभी के लिए अनिवार्य नहीं होता है.

    माघ मेला 2026 स्नान की महत्वपूर्ण तारीखें
    पौष पूर्णिमा स्नान – 3 जनवरी, 2026
    मकर संक्रांति स्नान – 14 जनवरी, 2026
    मौनी अमावस्या स्नान – 18 जनवरी, 2026
    बसंत पंचमी स्नान – 23 जनवरी, 2026
    माघी पूर्णिमा स्नान – 1 फरवरी, 2026
    महाशिवरात्रि स्नान – 15 फरवरी, 2026

    माघ मेले में स्नान करने से क्या फायदा होता है?
    ऐसा माना जाता है कि माघ मेले में स्नान करने से हजारों यज्ञों के बराबर पुण्य मिलता है.यह पवित्र स्नान पापों से मुक्ति दिलाता है और आत्मा को शुद्ध करता है.संगम में स्नान करने से तनाव से राहत मिलती है.माघ मेले में स्नान करना स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद माना जाता है. माघ स्नान और दान से ग्रहों के कष्टों से भी मुक्ति मिलती है.
    कल्पवास क्या होता है? What is Kalpavas?
    कल्पवास एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक अनुष्ठान और अभ्यास है. इस दौरान, भक्त एक महीने तक संगम के किनारे रहते हैं और नियमित रूप से पवित्र स्नान करते हैं. ये स्नान सिर्फ एक बार नहीं, बल्कि दिन में तीन बार किए जाते हैं. इस दौरान केवल शुद्ध और सात्विक भोजन किया जाता है, और वह भी दिन में सिर्फ एक बार. कल्पवास के दौरान स्नान, ध्यान, पूजा और जप अनिवार्य हैं. कल्पवास के दौरान, भक्त केवल जमीन पर सोते हैं, जिसका मतलब है कि वे सांसारिक सुख-सुविधाओं से दूरी बनाते हैं. ऐसा माना जाता है कि जो व्यक्ति कल्पवास करता है, उसके सभी पाप धुल जाते हैं.

     

  • हिंदू पंचांग 2026: मकर संक्रांति से दिवाली तक, जानें सालभर के प्रमुख पर्व और व्रत

    हिंदू पंचांग 2026: मकर संक्रांति से दिवाली तक, जानें सालभर के प्रमुख पर्व और व्रत


    नई दिल्ली।साल 2026 की शुरुआत के साथ ही लोगों में व्रत और त्योहारों की तारीखों को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है। हिंदू धर्म में व्रत और पर्व न केवल धार्मिक अनुष्ठानों का हिस्सा हैं, बल्कि ये सामाजिक और सांस्कृतिक एकता के प्रतीक भी माने जाते हैं। मकर संक्रांति, होली, दिवाली जैसी प्रमुख खुशियों से जुड़ी तिथियों का जानना इसलिए जरूरी होता है, ताकि पारिवारिक आयोजनों और धार्मिक अनुष्ठानों की योजना पहले से बनाई जा सके।हिंदू पंचांग के अनुसार अधिकांश त्योहार सूर्य और चंद्रमा की गति पर आधारित होते हैं। इसी वजह से हर साल इनकी तिथियों में बदलाव होता है।

    मकर संक्रांति 2026

    साल 2026 में मकर संक्रांति 14 जनवरी, बुधवार को मनाई जाएगी। इस दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है। मकर संक्रांति को विशेष रूप से दान-पुण्य और उत्सव के रूप में माना जाता है। इसी दिन पोंगल, उत्तरायण और षटतिला एकादशी भी पड़ रही हैं। यह पर्व किसानों और सूर्य के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर होता है।

    होली 2026

    फाल्गुन मास की पूर्णिमा पर मनाई जाने वाली होली इस साल 4 मार्च, बुधवार को है। होली से एक दिन पहले, 3 मार्च को होलिका दहन होगा। यह पर्व रंगों का उत्सव और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। पूरे देश में इस दिन लोग एक-दूसरे को रंग लगाकर और मिठाई बांटकर भाईचारे और प्रेम का संदेश देते हैं।

    दिवाली 2026

    दीपों का त्योहार दिवाली इस साल 8 नवंबर को है। इसके अगले दिन 9 नवंबर को दिवाली अमावस्या पड़ रही है। दिवाली से जुड़ी अन्य प्रमुख तिथियां इस प्रकार हैं: 6 नवंबर – धनत्रयोदशी, 10 नवंबर – बलिपद्यमी। यह त्योहार अंधकार पर प्रकाश की जीत और घर में खुशहाली लाने का प्रतीक माना जाता है।

    नवरात्रि और राम नवमी

    चैत्र नवरात्रि 2026 की शुरुआत 19 मार्च से होगी। इसी दिन घटस्थापना, उगाड़ी और गुड़ी पड़वा भी मनाए जाएंगे। 26 मार्च को राम नवमी और 27 मार्च को नवरात्रि पारणा होगी। वहीं शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर से शुरू होकर 20 अक्टूबर को दशहरा के साथ समाप्त होगी।

    महाशिवरात्रि और अन्य प्रमुख व्रत

    साल 2026 में महाशिवरात्रि 15 फरवरी को मनाई जाएगी। इसके अलावा पूरे साल नियमित रूप से एकादशी, प्रदोष व्रत, संकष्टी चतुर्थी और पूर्णिमा-अमावस्या पड़ेंगे। ये व्रत न केवल धार्मिक जीवन में महत्वपूर्ण हैं, बल्कि परिवार और समाज में पारंपरिक और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने में मददगार हैं।धार्मिक विशेषज्ञों के अनुसार व्रत और त्योहार हमारे जीवन में आस्था, अनुशासन और सामाजिक संबंधों को बनाए रखने का मार्ग दिखाते हैं। इसलिए साल 2026 की व्रत-त्योहार सूची हर परिवार के लिए बेहद उपयोगी साबित होगी।
  • 14 जनवरी 2026मकर संक्रांति के साथ कई बड़े त्योहारों का महासंयोग जानें शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व

    14 जनवरी 2026मकर संक्रांति के साथ कई बड़े त्योहारों का महासंयोग जानें शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व


    नई दिल्ली । 14 जनवरी 2026मकर संक्रांति और अन्य प्रमुख त्योहारों का महासंयोग 14 जनवरी 2026 एक विशेष दिन साबित होने वाला है क्योंकि इस दिन न केवल मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा बल्कि कई अन्य महत्वपूर्ण व्रत और पर्व भी एक साथ पड़ रहे हैं। भारतीय पंचांग के अनुसार यह दिन धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्व रखता है। इस दिन सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करेंगे और साथ ही षटतिला एकादशी पोंगल और माघ बिहू जैसे प्रमुख त्योहारों का संगम भी होगा।

    मकर संक्रांति का महत्व और शुभ मुहूर्त

    मकर संक्रांति का पर्व खासतौर पर सूर्य देव की पूजा दान और पुण्य के लिए प्रसिद्ध है। 14 जनवरी 2026 को सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे और यह दिन विशेष रूप से स्नान दान और पूजा के लिए उत्तम रहेगा। दान और पुण्य का समयदोपहर 0307 बजे से शाम 0602 बजे तक रहेगा।
    शुभ कार्यइस अवधि में तिल गुड़ अन्न और वस्त्र दान करना विशेष फलदायी माना जाता है। इसके अलावा मकर संक्रांति के दिन पवित्र नदियों में स्नान करना तिल और गुड़ का दान करना तथा पितरों के लिए तर्पण करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है।

    षटतिला एकादशी

    माघ माह के कृष्ण पक्ष की षटतिला एकादशी भी 14 जनवरी को पड़ रही है जो भगवान विष्णु को समर्पित मानी जाती है। इस दिन विशेष रूप से तिल का सेवन और तिल से संबंधित धार्मिक कार्य जैसे तिल का उबटन स्नान हवन और दान का महत्व है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से उनके आशीर्वाद की प्राप्ति होती है और यह संयोग मकर संक्रांति के साथ बहुत लाभकारी माना जाता है।

    पोंगल और माघ बिहू

    14 जनवरी से पोंगल और माघ बिहू जैसे कृषि पर्वों का भी आरंभ होगा। ये पर्व भारत के विभिन्न हिस्सों में बड़े धूमधाम से मनाए जाते हैं। पोंगल तमिलनाडु यह चार दिनों तक चलने वाला एक प्रमुख कृषि पर्व है जिसमें सूर्य देव और इंद्र देव की पूजा की जाती है।माघ बिहू असम असम में यह पर्व अग्नि देव की पूजा और नई फसल के स्वागत के रूप में मनाया जाता है।

    इस महासंयोग पर क्या करें

    इस दिन के धार्मिक महत्व को देखते हुए इन कार्यों को करना विशेष लाभकारी माना जाता हैमहा-दानतिल गुड़ खिचड़ी अन्न और गर्म कपड़ों का दान करें। यह आपके पुण्य को बढ़ाता है और पुराने पापों से मुक्ति दिलाने में सहायक होता है।पवित्र स्नान गंगा या किसी अन्य पवित्र नदी में स्नान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। यदि संभव न हो तो घर में गंगाजल और तिल डालकर स्नान करें। तर्पणपितरों की शांति के लिए तिल से तर्पण करना भी अत्यधिक लाभकारी माना जाता है। यह आपके परिवार के लिए आशीर्वाद का कारण बनता है।