Tag: Makar Sankranti

  • ससुराल वालों ने जमाई राजा का भव्य स्वागत किया, 1374 व्यंजन और 12 तोहफों के साथ वीडियो वायरल

    ससुराल वालों ने जमाई राजा का भव्य स्वागत किया, 1374 व्यंजन और 12 तोहफों के साथ वीडियो वायरल

    नई दिल्ली। भारत में दामाद का पहली बार ससुराल आना हमेशा एक उत्सव जैसा माना जाता है। पूरे परिवार को जमाई के स्वागत की तैयारी में जुटा देखा जा सकता है। लेकिन आंध्र प्रदेश के कोनसीमा जिले के एक गांव में हाल ही में हुई तैयारियां अपनी हदें पार कर गईं। यहां एक परिवार ने अपनी बेटी कीर्तिश्री और दामाद बोड्डू साई शरथ के पहले ससुराल आगमन पर 1374 व्यंजन तैयार किए। यह आयोजन न केवल परिवार के लिए यादगार था बल्कि सोशल मीडिया पर भी वायरल हो गया।परिवार ने मकर संक्रांति के अवसर पर इस आयोजन की योजना बनाई। पूरे कार्यक्रम को पारंपरिक और भव्य तरीके से सजाया गया। स्वागत स्थल पर सजे बोर्ड और संदेशों ने इसे और व्यक्तिगत और भावनात्मक रूप दिया। यह आयोजन गोदावरी डेल्टा की समृद्ध भोजन संस्कृति को भी दर्शाता है जो अपने उदार भोजन और त्योहारों की रसोई के लिए मशहूर है।

    सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो में नवविवाहित जोड़े को भोजन के बीच बैठे हुए देखा जा सकता है। कैमरा धीरे-धीरे टेबलों पर सजी व्यंजन कतारों पर घूमता है। इस विशाल भोज में बिरयानी बर्गर तले हुए स्नैक्स छाछ ताजे जूस मिठाइयां फल और घर के बने नाश्ते शामिल थे। कुछ खास डिशेज आसपास के अलग-अलग इलाकों से मंगाई गई थीं।भोजन के अलावा परिवार ने 12 तोहफे भी दिए जो साल के 12 महीनों का प्रतीक थे। इन तोहफों के जरिए नवदंपति के वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की गई। इस भव्य आयोजन ने दामाद और बेटी को खास महसूस कराना सुनिश्चित किया।

    जैसे ही वीडियो वायरल हुआ सोशल मीडिया यूजर्स ने इस पर अपने-अपने विचार व्यक्त किए। एक यूजर ने लिखा इसका क्या फायदा… कम से कम कुछ मिठाइयां गरीब बच्चों में बांट देते। दूसरे ने टिप्पणी की मैं देखना चाहता हूं कि वो इतना सब कैसे खत्म करेगा। कुछ ने इसे दहेज और दिखावे से जोड़कर भी देखा। एक यूजर ने लिखा गोदावरी जिलों में हर साल ऐसा दिखावा आम है। समझ नहीं आता समाज को क्या संदेश देते हैं। वहीं एक अन्य ने कहा काश बहुओं को भी कभी ऐसा सम्मान मिले।यह आयोजन न केवल परिवार के लिए यादगार रहा बल्कि सोशल मीडिया पर इसे देखकर लोग इसकी भव्यता और अलग अंदाज की तारीफ कर रहे हैं। 1374 व्यंजन और 12 प्रतीकात्मक तोहफों के साथ इस स्वागत का वीडियो आने वाले समय में और भी चर्चा में रहेगा।

  • पतंग, तिल-गुड़ और खिचड़ी की खुशबू से महका भोपाल, भोजपाल पतंग महोत्सव ने रचा इतिहास

    पतंग, तिल-गुड़ और खिचड़ी की खुशबू से महका भोपाल, भोजपाल पतंग महोत्सव ने रचा इतिहास


    भोपाल। मकर संक्रांति के पावन अवसर पर इस वर्ष भोपाल में एक नया और यादगार अध्याय जुड़ गया जब शहर में पहली बार भोजपाल पतंग महोत्सव का आयोजन किया गया। भेल स्थित जम्बूरी मैदान में आयोजित इस भव्य आयोजन ने पूरे शहर को पारंपरिक उल्लास और सामूहिक आनंद से भर दिया। बुधवार को हुए इस महोत्सव में 10 हजार से अधिक लोग अपने परिवार बच्चों और मित्रों के साथ शामिल हुए और खुले आसमान के नीचे रंग-बिरंगी पतंगों के साथ पर्व की खुशियां मनाईं।सुबह 10 बजे से शुरू हुआ यह पतंग महोत्सव शाम 5 बजे तक पूरे उत्साह और उमंग के साथ चला। जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया आसमान में उड़ती सैकड़ों पतंगों ने जम्बूरी मैदान को एक जीवंत कैनवास में बदल दिया। बच्चों की किलकारियां युवाओं का जोश महिलाओं की मुस्कान और बुजुर्गों की उत्सुक भागीदारी ने इस आयोजन को एक पारिवारिक उत्सव का रूप दे दिया।

    इस आयोजन का श्रेय भोजपाल महोत्सव मेला समिति को जाता है जिसने शहर की सांस्कृतिक परंपराओं को सहेजने और सामूहिक उत्सव की भावना को मजबूत करने के उद्देश्य से इस पहल की। समिति की ओर से लगभग 2000 पतंगें और माझा नि:शुल्क वितरित किया गया ताकि हर वर्ग के लोग बिना किसी आर्थिक या अन्य बाधा के इस पर्व का आनंद ले सकें। पतंगबाजी के साथ-साथ महाप्रसादी के रूप में दो क्विंटल तिल-गुड़ के लड्डू और करीब 10 हजार लोगों के लिए खिचड़ी की व्यवस्था की गई जिसने मकर संक्रांति की मिठास और भी बढ़ा दी।

    कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि सांसद आलोक शर्मा और विशिष्ट अतिथि भोपाल भाजपा जिला अध्यक्ष रविंद्र यति की गरिमामयी उपस्थिति में हुआ। आयोजन समिति के अध्यक्ष सुनील यादव संयोजक विकास वीरानी महामंत्री हरीश कुमार राम सहित समिति के अन्य पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने पूजा-अर्चना और दीप प्रज्वलन कर महोत्सव की औपचारिक शुरुआत की। इसके बाद अतिथियों ने स्वयं लोगों को पतंग और माझा वितरित कर आयोजन का उत्साह दोगुना कर दिया।सुरक्षा को लेकर आयोजन में विशेष सावधानी बरती गई। चाइनीज मांझे के उपयोग पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया था। आयोजन समिति के अध्यक्ष सुनील यादव ने स्पष्ट किया कि केवल सूती और सुरक्षित धागे की ही अनुमति दी गई ताकि किसी भी प्रकार की दुर्घटना से बचा जा सके। नियमों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए आयोजन स्थल पर समिति के सदस्य और पुलिस टीम लगातार तैनात रही।

    आयोजन समिति के सदस्यों के अनुसार भोजपाल पतंग महोत्सव केवल पतंग उड़ाने का कार्यक्रम नहीं था बल्कि यह पारिवारिक मेल-जोल सामाजिक सौहार्द और पारंपरिक पर्वों की सामूहिक खुशी को साझा करने का एक मंच बना। बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति ने यह साबित कर दिया कि शहरवासियों ने इस पहल को पूरे दिल से अपनाया है।समिति ने भविष्य में भी इस तरह के सांस्कृतिक और पारंपरिक आयोजनों को निरंतर आयोजित करने का संकल्प जताया है ताकि भोपाल की पहचान एक ऐसे शहर के रूप में और मजबूत हो सके जहां परंपरा उत्सव और सामाजिक सहभागिता एक साथ जीवंत रहती है।

  • MP में मकर संक्रांति पर पतंगबाजी की घटनाओं में दो बच्चों की मौत, चीनी मांझे से 7 घायल

    MP में मकर संक्रांति पर पतंगबाजी की घटनाओं में दो बच्चों की मौत, चीनी मांझे से 7 घायल


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में पतंगबाजी (Kite flying) के कारण हुए हादसों में 2 बच्चों (2 Children) की मौत हो गई जबकि 7 लोग गंभीर रूप से घायल (7 People seriously injured) हो गए। रीवा में हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने और पन्ना में चट्टान से गिरने के कारण 2 किशोरों की जान चली गई। इंदौर, उज्जैन और इटारसी में चाइनीज मांझे की चपेट में आने से कई लोगों के गले और पैर कट गए, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ड्रोन कैमरों से निगरानी कर रही है और मांझा बेचने वालों पर सख्ती बरत रही है, फिर भी लोग इसका उपयोग कर रहे हैं।

    उज्जैन में चार मामले
    उज्जैन में 4 दुर्घटनाएं हुईं। इन हादसों में दो लोगों को हल्की चोटें आईं जबकि एक युवक का गला कट गया और एक महिला के पैरों में गंभीर घाव हो गए। दोनों घायलों को इलाज के लिए सरकारी चरक भवन अस्पताल में भर्ती कराया गया है। ईंट भट्टे पर काम करने वाले एक शख्स के गले में बाइक चलाते समय मांझा फंस गया जिससे आठ टांके लगाने पड़े। वहीं सब्जी खरीदने निकलीं सीमा के पैरों में मांझा उलझने से गहरा कट लगा और उन्हें सात टांके लगाने पड़े।


    उज्जैन में दो की हालत गंभीर

    उज्जैन के शासकीय चरक भवन के ईएनटी सर्जन डॉ. विश्राम रत्नाकर ने बताया कि बुधवार को दोपहर तक चाइनीज मांझे से घायल होने के कुल चार मामले सामने आए। इनमें से दो को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई जबकि दो गंभीर घायल थे जिनका इलाज चल रहा है।


    रीवा में पतंगबाजी ने ली एक की जान

    रीवा जिले में बिछिया थाना क्षेत्र की चौरसिया कॉलोनी में 15 साल का कुश चौरसिया छत पर पतंग उड़ाते वक्त 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइन की चपेट में आ गया। उसकी पतंग कटकर बिजली की लाइन में फंस गई थी जिसे निकालने के लिए उसने लोहे की रॉड का इस्तेमाल किया। जैसे ही रॉड बिजली के तारों से टच हुई उसे जोरदार करंट लगा। इससे वह बुरी तरह झुलस गया। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। हादसे के वक्त परिवार मेला देखने गया था।


    पन्ना में भी एक ने गंवाई जान

    वहीं पन्ना जिले के धरमपुर थाना क्षेत्र के इचोलिया में मकर संक्रांति मेले के दौरान एक हादसा हो गया। पतंग उड़ाते समय चट्टान से गिरने से 15 साल के विभव सिंह की मौत हो गई। मृतक खोरा गांव का रहने वाला बताया जा रहा है। पतंग उड़ाते समय चट्टान के किनारे संतुलन बिगड़ने से वह नीचे गिर गया जिससे सिर में चोट आने से उसकी मौके पर मौत हो गई।


    इंदौर में 4 जख्मी

    इंदौर में चाइनीज मांझे से चार लोग घायल हुए। पहला हादसा भंवरकुआं क्षेत्र में हुआ जहां बाइक से जा रहे हेमराज चौरसिया का गला कट गया। नंदानगर निवासी महेश सोनी भी चीनी मांझे की चपेट में आकर घायल हुए। जूनी इंदौर में दूध बांटने जा रहे प्रेम भंडारी के गले में मांझा फंसने से 8 टांके आए हैं। चौथी घटना रामानंद नगर में हुई जहां पतंग लेने जा रहे घनश्याम वसुनिया की दाढ़ी पूरी तरह कट गई जिसके कारण उन्हें 10 टांके लगाने पड़े।


    नर्मदापुरम में एक घायल

    नर्मदापुरम जिले के इटारसी में शाम साढ़े चार बजे के करीब चीनी मांझे से बाइक सवार का गला कट गया। गंभीर रूप से घायल हालत में युवक को इटारसी के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। शुभम मोटरसाइकिल से बुधवार को शाम साढ़े चार बजे घर से लाइब्रेरी जा रहा था। इसी दौरान रास्ते में उसके गले में चाइनीज मांझा फंस गया। मांझे से युवक का गला 3 इंच तक कट गया।

  • श्रीमहाकालेश्वर मंदिर में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सपत्नीक मकर संक्रांति पर्व पर की पूजा

    उज्‍जैन। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सपत्नीक मकर संक्रांति पर्व पर उज्जैन स्थित प्रसिद्ध श्रीमहाकालेश्वर मंदिर में सपत्नीक पूजा-अर्चना की। उन्होंने भगवान श्रीमहाकाल के दरबार में भक्ति भाव से पूजा कर प्रदेश और देश की सुख-समृद्धि की प्रार्थना कर प्रदेश के विकास, शांति एवं समृद्धि की कामना की। इस दौरान मंदिर के पुजारियों ने विधि-विधान के साथ पूजा सम्पन्न कराई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंदिर में भक्तों को मकर संक्रांति की शुभकामनाएँ दीं।

    इस अवसर पर प्रभारी मंत्री श्री गौतम टेटवाल, राज्यसभा सांसद श्री बालयोगी उमेशनाथ महाराज, विधायक श्री अनिल जैन कालूहेड़ा, जन-प्रतिनिधि और श्रद्धालु उपस्थित रहे।

  • मकर संक्रांति पर देसी खिचड़ी बनाम मॉडर्न डिटॉक्स: सेहत के लिए क्यों बेहतर है पारंपरिक स्वाद, जानें डॉक्टर की राय

    मकर संक्रांति पर देसी खिचड़ी बनाम मॉडर्न डिटॉक्स: सेहत के लिए क्यों बेहतर है पारंपरिक स्वाद, जानें डॉक्टर की राय


    नई दिल्ली।उत्तर भारत के घरों में मकर संक्रांति आते ही रसोई की खुशबू कुछ खास हो जाती है। सर्दियों की ठंड में गाजर मटर गोभी और अलग-अलग दालों के मेल से बनी गरमागरम खिचड़ी न सिर्फ स्वाद देती है बल्कि शरीर और मन को भी सुकून पहुंचाती है। यह व्यंजन केवल परंपरा या पर्व से जुड़ा नहीं है बल्कि इसके पीछे गहरी स्वास्थ्य समझ भी छिपी हुई है जिसे आज आधुनिक चिकित्सा भी स्वीकार करती है।जनवरी का महीना आमतौर पर ऐसा समय होता है जब लोग शादी-पार्टियों त्योहारों और भारी भोजन के बाद अपने शरीर को दोबारा संतुलन में लाने की कोशिश करते हैं। ऐसे में शरीर अपने-आप हल्के सादे और आसानी से पचने वाले भोजन की मांग करता है। शायद यही कारण है कि इस मौसम में खिचड़ी सबसे ज्यादा पसंद की जाती है और यह हमें अंदर से ग्राउंडेड महसूस कराती है।

    इस विषय पर भंगेल सीएचसी की सीनियर मेडिकल ऑफिसर और गायनेकोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. मीरा पाठक ने आईएएनएस से बातचीत में खिचड़ी के स्वास्थ्य लाभों को सरल शब्दों में समझाया। उनका कहना है कि आजकल यह गलत धारणा बन गई है कि खिचड़ी सिर्फ बीमार लोगों या कमजोरी के समय खाई जाती है जबकि सच्चाई इसके बिल्कुल उलट है।डॉ. मीरा पाठक के अनुसार खिचड़ी एक टाइम-टेस्टेड आयुर्वेदिक डाइट है और इसे संपूर्ण आहार माना जाता है। इसमें कार्बोहाइड्रेट प्रोटीन और जरूरी अमीनो एसिड्स का संतुलन होता है। दाल में मौजूद लाइसीन और चावल में पाए जाने वाले मिथिओनीन अमीनो एसिड मिलकर एक कंप्लीट प्रोटीन बनाते हैं जो शरीर की मरम्मत और ऊर्जा के लिए बेहद जरूरी है।

    डिटॉक्स डाइट की बात करें तो खिचड़ी सबसे सुरक्षित और भरोसेमंद विकल्पों में से एक है। डॉ. मीरा बताती हैं कि खिचड़ी पचाने में बेहद हल्की होती है और शरीर व दिमाग को एक तरह का सॉफ्ट रीसेट देती है। कुछ दिनों तक सिंपल और हल्का भोजन करने से आंतों लिवर और नर्वस सिस्टम को आराम मिलता है जिससे शरीर खुद को रिपेयर कर पाता है।खिचड़ी की एक और खासियत यह है कि यह धीरे-धीरे ऊर्जा रिलीज करती है। इससे ब्लड शुगर लेवल में अचानक उछाल नहीं आता जो आजकल की जूस डाइट या ट्रेंडी डिटॉक्स ड्रिंक्स में आम समस्या है। डॉ. मीरा के मुताबिक जूस कोम्बुचा या प्रोबायोटिक सप्लीमेंट्स की तुलना में खिचड़ी कहीं ज्यादा संतुलित और पोषण से भरपूर विकल्प है।

    इसके अलावा खिचड़ी में हाइड्रेटिंग और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण भी होते हैं जो शरीर की सूजन थकान और अंदरूनी टूट-फूट को ठीक करने में मदद करते हैं। यही कारण है कि इसे रिकवरी और बीमारी के समय दिया जाता है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि यह सिर्फ बीमारों का खाना है।खिचड़ी की सबसे बड़ी खूबी इसकी वर्सटाइल प्रकृति है। इसमें चावल की जगह मिलेट्स अलग-अलग दालें मौसमी सब्जियां पनीर या शुद्ध घी मिलाकर इसे और भी पौष्टिक बनाया जा सकता है। यह हमारी पारंपरिक भारतीय समझ का प्रतीक है जिसे आज मॉडर्न साइंस भी पूरी तरह समर्थन देता है।

  • मकर संक्रांति पर नर्मदापुरम के सेठानी घाट पर श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी ठंड में ,हर हर नर्मदे,के जयकारे

    मकर संक्रांति पर नर्मदापुरम के सेठानी घाट पर श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी ठंड में ,हर हर नर्मदे,के जयकारे


    नर्मदापुरम । मकर संक्रांति का पर्व हर वर्ष सनातन संस्कृति में विशेष महत्व रखता है। यह पर्व सूर्य देव के मकर राशि में प्रवेश के साथ मनाया जाता है और इसी दिन सूर्य उत्तरायण होते हैं। मकर संक्रांति का पर्व प्रकृति सूर्य उपासना और मानव जीवन के संतुलन का प्रतीक है। इस दिन से खरमास का अंत होता है और शुभ कार्यों की शुरुआत होती है। इस दिन को लेकर नर्मदापुरम बैतूल छिंदवाड़ा भोपाल जैसे बड़े शहरों से श्रद्धालु नर्मदा तट पर आस्था की डुबकी लगाने पहुंचे।

    नर्मदापुरम के प्रसिद्ध सेठानी घाट पर सुबह 4:00 बजे से ही श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो गया था। कड़कड़ाती ठंड में भी श्रद्धालु “हर हर नर्मदे” के जयकारे लगाते हुए नर्मदा नदी में स्नान करने पहुंचे। मकर संक्रांति के दिन विशेष रूप से तिल और खिचड़ी का दान करना पवित्र माना जाता है और श्रद्धालु यहां आकर सत्यनारायण भगवान की पूजा के बाद इन दानों को नर्मदा नदी में अर्पित कर रहे हैं। दरिद्र नारायण को कंबल और अन्य वस्तुएं भेंट करने की भी परंपरा है जिसे श्रद्धालु बड़ी श्रद्धा से निभा रहे हैं।

    मकर संक्रांति के पर्व पर नेमावर के पेढ़ी घाट सिद्धनाथ घाट और नागर घाट पर भी श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा। यहां देवास हरदा और सीहोर जिले से बड़ी संख्या में भक्त पहुंचे। ठंड में भी श्रद्धालुओं ने नर्मदा नदी में आस्था की डुबकी लगाई और नर्मदे हर के उद्घोष के साथ सूर्योदय का स्वागत किया। मकर संक्रांति के दिन स्नान दान और सूर्य उपासना का विशेष धार्मिक महत्व है। यहां श्रद्धालुओं ने अनाज कपड़े तिल खिचड़ी और अन्य सामग्री का दान किया।

    सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन और पुलिस ने घाटों पर पुख्ता इंतजाम किए थे ताकि श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। शास्त्रों में मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव को विशेष वस्तुएं अर्पित करने का विधान है जिनमें लाल वस्त्र गेहूं गुड़ मसूर दाल तांबा स्वर्ण सुपारी नारियल और दक्षिणा शामिल हैं। इन धार्मिक क्रियाओं के साथ श्रद्धालु अपने जीवन में सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। कुल मिलाकर मकर संक्रांति का यह पर्व नर्मदा तट पर श्रद्धा और आस्था का अद्भुत संगम बनकर उभरा जहां लाखों श्रद्धालुओं ने एक साथ आकर इस पवित्र दिन का लाभ उठाया।

  • Makar Sankranti 2026 : मकर संक्रांति पर कैसे पकेगी खिचड़ी, षट्तिला एकादशी ने चावल दान पर भी फंसाया पेंच, अब मकर संक्रांति पर क्या करें?

    Makar Sankranti 2026 : मकर संक्रांति पर कैसे पकेगी खिचड़ी, षट्तिला एकादशी ने चावल दान पर भी फंसाया पेंच, अब मकर संक्रांति पर क्या करें?


    नई दिल्ली। मकर संक्रांति इस बार 14 जनवरी को मनाया जाएगा। हालांकि, इस बार की मकर संक्रांति बेहद ही खास होने वाली है। क्योंकि,मकर संक्रांति पर इस बार एकादशी तिथि का संयोग बन गया है। ऐसे में मकर संक्रांति पर सूर्यदेव के साथ भगवान विष्णु की कृपा का लाभ भी मिलने वाला है। लेकिन इससे मकर संक्रांति पर एक दुविधा की स्थिति भी बन गई है जिसको लेकर लोगों में उलझन की स्थिति बनी हुई है। दरअसल मकर संक्रांति पर खिचड़ी खाने और दान करने का विशेष महत्व बताया गया है। लेकिन, एकादशी तिथि होने के कारण अब सवाल यह उठता है कि, क्या इस बार मकर संक्रांति पर भगवान को खिचड़ी का भोग लगाना,खिचड़ी खाना और दान करना शुभ रहेगा या नहीं। आपके इन्हीं सवालों के जवाब यहां हम आपको बताने जा रहे हैं कि अबकी बार मकर संक्रांति पर एकादशी तिथि के संयोग में खिचड़ी खाने, दान करने और भगवान को भोग लगाने के संबंध में आप क्या कर सकते हैं।

    क्या मकर संक्रांति 2026 पर कर सकते हैं चावल और खिचड़ी का दान ?
    सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं तो मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है। सूर्य इस दिन अपने पुत्र शनि की राशि मकर में प्रवेश करते हें। इस दिन से सूर्य उत्तरायण होते हैं और देवताओं का दिन भी शुरू होता है। श्रीमद्भागवत गीता में भी मकर संक्रांति के दिन का बड़ा महत्व बताया गया है, इस दिन से देवलोक में दिन आरंभ होता और सूर्यदेव अपने दिए हुए वरदान के अनुसार मकर राशि में आकर धन समृद्धि और सुख लाते हैं। इसलिए भी इस दिन का विशेष महत्व है। और परंपराओं से चल मान्यता चली आ रही है कि मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी का भोग लगता है और खिचड़ी एवं चावल का दान भी किया जाता है। लेकिन अबकी बार मकर संक्रांति के साथ षटतिला एकादशी का संयोग होने से दुविधा की स्थिति बन गई है।

    शास्त्रों के अनुसार, एकादशी तिथि पर अन्न का सेवन और अन्न दान करना वर्जित माना गया है। खास तौर पर चावल खाने और दान करने की मनाही है। ऐसे में मकर संक्रांति पर इस बार आप तिल, गुड़ और मूंगफली आदि का दान कर सकते हैं। इस दिन आप चावल और खिचड़ी का बाकी सामान दान के निमित्त अलग से निकालकर घर के मंदिर में रख दें।
    मकर संक्रांति 14 जनवरी बुधवार के दिन और उससे अगले दिन 15 जनवरी को गुरुवार है। शास्त्रों में गुरुवार के दिन खिचड़ी का सेवन वर्जित बताया गया है। ऐसे में आप उस दिन भी खिचड़ी नहीं बना सकते हैं तो ऐसे में शनिवार का दिन यानी 17 जनवरी को आप खिचड़ी बना सकते हैं और इसी दिन आप चावल का दान भी कर सकते हैं। बता दें कि 17 जनवरी शनिवार के दिन सप्तमी उपरांत अष्टमी तिथि रहेगी जो शनि से संबंधित है और सूर्य जब तक मकर राशि में गोचर करते रहेंगे तब तक माघ मास में दान पुण्य का संयोग बना रहेगा। ऐसे में इस दिन जो भी आप चावल आदि का दान करेंगे उसका आपको उत्तम फल मिलेगा। आप 17 जनवरी को खिचड़ी का सेवन भी करेंगे तो यह शुभ रहेगा और आपके ग्रह दोष कटेंगे।

    मकर संक्रांति 2026 पर क्या दान करें ?
    मकर संक्रांति पर इस बार आप चाहें तो गुड़, तिल, तिल से बनी चीजें जैसे लड्डू आदि का दान करें। इस दिन तिल का दान करने से पापों का नाश होता है। साथ ही तिल का दान करने से सूर्य देव प्रसन्न होते हैं। इस दिन दान पुण्य करने से सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है।

  • Magh Mela 2026: मकर संक्रांति पर शुभ स्नान का महासंयोग! नोट करें शुभ समय और महत्व

    Magh Mela 2026: मकर संक्रांति पर शुभ स्नान का महासंयोग! नोट करें शुभ समय और महत्व

    Magh Mela 2026 Snan: माघ मेले का दूसरा प्रमुख स्नान 14 जनवरी को मकर संक्रांति के अवसर पर किया जाएगा. मकर संक्रांति साल की सभी संक्रांतियों में खास स्थान रखती है, क्योंकि इस दिन सूर्य उत्तरायण होते हैं और इसे देवताओं का समय, अत्यंत शुभ और मंगलकारी काल माना जाता है. इस दिन प्रयागराज के माघ मेले के दौरान गंगा में स्नान करना बेहद पुण्यकारी माना जाता है और इसे हजारों यज्ञ करने के समान फल मिलता है. मकर संक्रांति के इस शुभ और महापुण्य काल में दान, त्याग और साधना करने का फल भी अत्यधिक बढ़ जाता है. यही कारण है कि माघ मेले में मकर संक्रांति का स्नान और दान लोगों के लिए विशेष महत्व रखते हैं.

    माघ मेले का दूसरा स्नान

    प्रयागराज का माघ मेला इस बार 45 दिनों तक चलेगा. मकर संक्रांति इस वर्ष 14 जनवरी को है, और इसी दिन षटतिला एकादशी भी है, जिससे स्नान का पुण्य और दोगुना हो जाता है. रिपोर्ट्स के अनुसार, पौष पूर्णिमा पर संगम में 31 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने स्नान किया था. मकर संक्रांति पर लगभग 1 करोड़ श्रद्धालु स्नान करने का अनुमान है.मकर संक्रांति उत्तरायण सूर्य के आगमन का प्रतीक है और इसे अत्यंत शुभ और पुण्यकारी माना जाता है. इस दिन गंगा में स्नान और दान करने से आत्मा की शुद्धि, मानसिक शांति और जीवन में सुख-समृद्धि प्राप्त होती है.

    मकर संक्रांति स्नान का शुभ मुहूर्त

    इस वर्ष मकर संक्रांति पर विशेष पुण्यकाल दोपहर 3:13 बजे से शुरू होकर शाम 5:20 बजे तक रहेगा. इसी समय को महापुण्यकाल भी माना गया है, जब किए गए धार्मिक कर्म और दान अत्यधिक फलदायी माने जाते हैं.
    ब्रह्म मुहूर्त स्नान

    शास्त्रों के अनुसार माघ मेले के दौरान ब्रह्म मुहूर्त में गंगा स्नान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है. इस बार मकर संक्रांति पर ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:51 बजे से लेकर 5:44 बजे तक रहेगा, जो भक्तों के लिए स्नान और ध्यान का सर्वोत्तम समय है.

    माघ मेले में मकर संक्रांति स्नान का महत्व

    मकर संक्रांति का स्नान आत्मा, आध्यात्म और गहरी आस्था का अद्वितीय महासंगम माना जाता है. इस दिन सूर्य अपने उत्तरायण पथ पर निकलता है. माघ मेले में गंगा में स्नान करने वाले श्रद्धालु भी अपने जीवन के अंधकार जैसे पाप, अशांति और बाधाओं को दूर करने की कामना करते हैं.

    स्नान के साथ दान, पूजा और भजन-कीर्तन भी पुण्य को बढ़ाते हैं. मकर संक्रांति पर माघ मेले में डुबकी लगाने से न केवल आत्मिक शुद्धि होती है, बल्कि मानसिक शांति, जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक ऊर्जा मिलती है. यही कारण है कि माघ मेले का मकर संक्रांति स्नान लाखों श्रद्धालुओं के लिए जीवन में नए आरंभ और आध्यात्मिक पुनर्जन्म का प्रतीक बन जाता है.

    माघ मेंले में होते हैं ये स्नान

    1. पौष पूर्णिमा स्नान

    तिथि: 3 जनवरी 2026

    माघ मेले की शुरुआत इसी दिन होती है. संगम में स्नान किया जाता है . इससे पूर्वजों को तृप्ति मिलती है.
    2. माघी पूर्णिमा स्नान

    तिथि: 17 जनवरी 2026

    इस दिन स्नान करने से पापों का नाश होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है.

    3. मकर संक्रांति स्नान

    तिथि: 15 जनवरी 2026

    मकर संक्रांति के दिन सूर्य का उत्तरायण में प्रवेश होता है. इस दिन संगम में स्नान करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है .

    4. मौनी अमावस्या स्नान

    तिथि: 18 जनवरी 2026

    मौनी अमावस्या माघ मेले का सबसे पवित्र दिन माना जाता है. मौन व्रत रखने और संगम में स्नान करने से आत्मिक शांति मिलती है.

    5. महाशिवरात्रि स्नान

    तिथि: 15 फरवरी 2026

    माघ मेले का समापन महाशिवरात्रि के दिन होता है. इस दिन संगम में स्नान करने से सभी पाप समाप्त होते हैं . इस स्नान से मोक्ष की प्राप्ति होती है.

  • मोक्ष के द्वार खोलेंगी ये 5 डुबकियां नोट करें साल 2026 में गंगा स्नान के महायोग

    मोक्ष के द्वार खोलेंगी ये 5 डुबकियां नोट करें साल 2026 में गंगा स्नान के महायोग


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में पवित्र नदियों में स्नान करना न केवल शरीर के शुद्धिकरण का तरीका है बल्कि यह आत्मा के उद्धार का मार्ग भी माना जाता है। शास्त्रों में उल्लेख है कि विशेष तिथियों पर इन नदियों के जल में अमृत’ तत्व का संचार होता है और उस समय स्नान करने से व्यक्ति को जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिलती है। साल 2026 में भी कुछ ऐसे खास अवसर आ रहे हैं जब गंगा यमुना और अन्य पवित्र नदियों में स्नान करने से अधिक पुण्य प्राप्त होता है। आइए जानते हैं उन पांच प्रमुख तिथियों के बारे में जब गंगा स्नान से आपके जीवन के सभी कष्ट दूर हो सकते हैं और मोक्ष के द्वार खुल सकते हैं।

    मकर संक्रांति 14 जनवरी 2026

    साल का पहला बड़ा स्नान सूर्य के उत्तरायण होने पर होता है। इस दिन विशेष रूप से प्रयागराज और हरिद्वार में गंगा स्नान का महत्व है। मान्यता है कि मकर संक्रांति पर तिल का दान और गंगा स्नान करने से अक्षय पुण्य मिलता है और व्यक्ति के पाप नष्ट होते हैं। इस दिन विशेष रूप से गंगा में स्नान करके दान-पुण्य करने से जीवन में सुख-शांति का वास होता है।

    मौनी अमावस्या 18 जनवरी 2026

    माघ महीने की यह अमावस्या वर्ष की सबसे बड़ी अमावस्या मानी जाती है। इस दिन खासकर मौन रहकर जप और गंगा स्नान करने से मुनि पद की प्राप्ति होती है। इस तिथि को पितृ दोष से मुक्ति और आत्म-चिंतन के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। यह दिन आपके जीवन की समस्याओं को हल करने और आत्मा के शुद्धिकरण के लिए बेहद शुभ है।

    माघी पूर्णिमा 1 फरवरी 2026

    माघी पूर्णिमा पर गंगा में स्नान करना विशेष फलदायी माना जाता है। इस दिन स्नान करने से भगवान विष्णु की असीम कृपा प्राप्त होती है और माघ स्नान के संकल्प से भक्त अपने व्रत का समापन करते हैं। यह समय स्वर्ग लोक की प्राप्ति के लिए अनुकूल होता है। माघी पूर्णिमा के दिन किए गए दान और पुण्य का फल लंबी अवधि तक मिलता है।
    गंगा दशहरा 25 मई 2026 गंगा दशहरा वह पर्व है जब मां गंगा के पृथ्वी पर अवतरण की कथा सुनाई जाती है। इस दिन विशेष रूप से गंगा स्नान करने से व्यक्ति के दस प्रकार के पाप कायिक वाचिक और मानसिक का नाश होता है।

    गंगा दशहरा के दिन गंगा स्नान करने से न केवल शारीरिक शुद्धता मिलती है बल्कि यह पवित्रता भी प्रदान करता है जिससे जीवन में एक नवीनीकरण और आंतरिक शांति का अहसास होता है।कार्तिक पूर्णिमा 24 नवंबर 2026 कार्तिक पूर्णिमा को ‘देव दीपावली’ और ‘त्रिपुरी पूर्णिमा’ भी कहा जाता है। इस दिन पवित्र गंगा में स्नान और दीपदान करने से जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। माना जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु की कृपा से घर में लक्ष्मी का स्थाई वास होता है। साथ ही इस दिन का स्नान व्यक्ति के पापों को नष्ट करता है और पुण्य की प्राप्ति होती है।

    दान का महत्व

    इन विशेष तिथियों पर गंगा स्नान के बाद अपनी सामर्थ्य के अनुसार अनाज वस्त्र तिल या अन्य सामग्री का दान जरूर करें। शास्त्रों के अनुसार बिना दान के स्नान का पुण्य फल स्थिर नहीं माना जाता है। दान से स्नान के पुण्य में वृद्धि होती है और यह आपके जीवन में समृद्धि और शांति का कारण बनता है।इन प्रमुख तिथियों पर गंगा स्नान के साथ-साथ दान-पुण्य करने से न केवल आत्मा का शुद्धिकरण होता है बल्कि जीवन की सारी बाधाएं दूर होती हैं। इन अवसरों का सही लाभ उठाकर आप अपने जीवन को पुण्य और मोक्ष के मार्ग पर अग्रसर कर सकते हैं।

  • संक्रांति के बाद BJP संगठन में बड़े बदलाव के आसार… राष्ट्रीय अध्यक्ष बन सकते हैं नितिन नबीन

    संक्रांति के बाद BJP संगठन में बड़े बदलाव के आसार… राष्ट्रीय अध्यक्ष बन सकते हैं नितिन नबीन


    नई दिल्ली।
    भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party- BJP) में परिवर्तन की प्रक्रिया जोरों पर है। दिसंबर 2025 में बिहार के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री नितिन नबीन (Nitin Nabin) (45 वर्ष) को पार्टी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष (National Executive Chairman) नियुक्त किया गया है। वे भाजपा के इतिहास में सबसे युवा नेता हैं जो इस शीर्ष संगठनात्मक पद तक पहुंचे हैं। नितिन नबीन बिहार की राजधानी पटना के बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र से पांच बार के विधायक हैं और नीतीश कुमार सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। वे पार्टी के युवा मोर्चा में लंबे समय तक सक्रिय रहे तथा छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में संगठनात्मक जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा जनवरी 2020 से इस पद पर हैं। अब जनवरी 2026 के मध्य तक नितिन नबीन को औपचारिक रूप से भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने की संभावना है।

    पार्टी सूत्रों के अनुसार, नितिन नबीन के चुनाव को भाजपा की राष्ट्रीय परिषद की बैठक में अनुमोदित किया जाएगा, जो इस महीने के अंत तक होने की उम्मीद है। सूत्रों के अनुसार, भाजपा अध्यक्ष का पदभार संभालने के बाद नितिन नबीन द्वारा अपनी नई टीम बनाने के लिए संगठनात्मक फेरबदल किए जाने की उम्मीद है, जो एक ‘समावेशी’ प्रक्रिया होगी। भाजपा के एक अंदरूनी सूत्र ने कहा कि नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की टीम भाजपा और संघ परिवार के बीच तालमेल और समन्वय को दर्शाएगी।


    मोदी मंत्रिमंडल में फेरबदल होने की उम्मीद

    एक रिपोर्ट के अनुसार, भाजपा के संगठनात्मक स्तरों में व्यापक फेरबदल से जुड़ी इस प्रक्रिया के कारण केंद्रीय मंत्रिमंडल में भी फेरबदल हो सकता है। पार्टी के एक अंदरूनी सूत्र ने यह भी बताया कि जून 2024 में इसके गठन के बाद से इसमें कोई फेरबदल नहीं हुआ है। भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों के कामकाज की समीक्षा कर रही है। जल्द ही मंत्रिमंडल में फेरबदल होने की उम्मीद है, जिसमें युवा नेतृत्व के साथ-साथ जाट समुदाय के चेहरों को भी शामिल किए जाने की संभावना है। सरकार और संगठन दोनों में जाट समुदाय का घटता प्रतिनिधित्व भी हमारे उच्च कमान के विचार-विमर्श के बिंदुओं में से एक है।


    सरकार और संगठन में आएंगे संघ परिवार से जुड़े लोग

    पार्टी सूत्रों ने कहा कि नबीन ने भाजपा और उसके वैचारिक मार्गदर्शक आरएसएस के बीच संबंधों और समन्वय को बेहतर बनाने के लिए पहले ही कदम उठाए हैं, इससे यह भी अपेक्षा की जाती है कि वे केंद्र सरकार और पार्टी के नेतृत्व वाली राज्य सरकारों के बीच ‘सक्रिय समन्वय’ सुनिश्चित करेंगे। सूत्रों के मुताबिक, भाजपा और आरएसएस पार्टी के नेतृत्व वाली राज्य सरकारों के कामकाज की समीक्षा करने जा रहे हैं और संगठन तथा सरकारी या अर्ध-सरकारी निकायों, जिनमें विभिन्न आयोग भी शामिल हैं, में कई नई नियुक्तियों पर चर्चा करेंगे। एक पार्टी नेता ने कहा कि इससे राज्य के कई वरिष्ठ भाजपा नेताओं के लिए केंद्रीय स्तर पर संगठनात्मक या सरकारी भूमिकाएं निभाने का रास्ता खुल जाएगा, खासकर उन लोगों के लिए जो लंबे समय से संघ परिवार से जुड़े हुए हैं।

    भाजपा नेता ने कहा कि ऐसे कई नेताओं को समायोजित किए जाने की संभावना है, जिनमें वे नेता भी शामिल हैं जो अपने पूरे सार्वजनिक जीवन में पार्टी के साथ रहे हैं। ये नेता बिहार जैसे राज्यों के साथ-साथ उन राज्यों से भी होंगे जहां आने वाले महीनों में चुनाव होने हैं, जिनमें पश्चिम बंगाल, असम, केरल और तमिलनाडु शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार, भाजपा और आरएसएस की हालिया समन्वय बैठकों के दौरान, आरएसएस ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे नेताओं की पहचान की जानी चाहिए जो तीन-चार दशकों से संघ परिवार से जुड़े हुए हैं लेकिन संगठन, सरकार या किसी अन्य सार्वजनिक संस्था में उन्हें स्थान नहीं मिला है। नितिन नबीन उन वरिष्ठ भाजपा नेताओं के समूह में शामिल हैं जो इस प्रक्रिया का समन्वय कर रहे हैं।


    मकर संक्रांति के बाद फेरबदल की संभावना

    भाजपा सूत्रों ने बताया कि हमारा ध्यान उन लोगों को महत्वपूर्ण भूमिकाएं देने पर है जिन्होंने अपना पूरा जीवन भाजपा और संघ के लिए समर्पित कर दिया है। यह प्रक्रिया जारी है, लेकिन घोषणाओं के लिए सीमित अवसर ही उपलब्ध होंगे। सूत्रों ने बताया कि अधिकांश महत्वपूर्ण नियुक्तियां मकर संक्रांति के बाद से लेकर बजट सत्र के प्रारंभ होने तक होने की उम्मीद है, जो फरवरी की शुरुआत से शुरू होगा। इस प्रक्रिया के लिए एक और समयसीमा आगामी राज्य चुनावों की घोषणा से पहले होने की संभावना है।