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  • भारत में बनेगी देश की पहली बुलेट ट्रेन: मिडिल क्लास के लिए किफायती किराया, जल्द तय होगा नाम

    भारत में बनेगी देश की पहली बुलेट ट्रेन: मिडिल क्लास के लिए किफायती किराया, जल्द तय होगा नाम


    नई दिल्ली।  भारत में हाई-स्पीड रेल नेटवर्क को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। सरकार अब देश में ही बुलेट ट्रेन निर्माण को बढ़ावा देने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। इस परियोजना का उद्देश्य न सिर्फ तकनीकी आत्मनिर्भरता हासिल करना है, बल्कि आम लोगों, खासकर मिडिल क्लास यात्रियों के लिए तेज और किफायती यात्रा विकल्प उपलब्ध कराना भी है।

    इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत भविष्य में देश की पहली बुलेट ट्रेन पूरी तरह से भारत में ही तैयार की जाएगी। इसमें इंजन से लेकर कोच तक अधिकतर हिस्से स्वदेशी तकनीक और निर्माण क्षमता पर आधारित होंगे। माना जा रहा है कि इससे देश की रेलवे निर्माण क्षमता को नई मजबूती मिलेगी।

    सरकारी योजना के अनुसार, किराया ऐसा रखा जाएगा जिससे मध्यम वर्ग के लोग भी आसानी से इसका उपयोग कर सकें। अभी तक हाई-स्पीड ट्रेनों को आमतौर पर महंगा माना जाता था, लेकिन नई नीति में इसे अधिक सुलभ बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

    परियोजना के तहत ट्रेन की रफ्तार और सुरक्षा मानकों पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। आधुनिक तकनीक से लैस यह बुलेट ट्रेन देश के प्रमुख शहरों को तेज गति से जोड़ने में सक्षम होगी, जिससे यात्रा समय में बड़ी कमी आएगी।

    इसके अलावा, सरकार इस ट्रेन के लिए एक नया और आकर्षक नाम भी तय करने की प्रक्रिया में है, जो भारतीय पहचान और आधुनिकता दोनों को दर्शाएगा। नाम को लेकर सुझाव और विचार-विमर्श जारी है।

    इस परियोजना को देश के रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है, जो भविष्य में परिवहन व्यवस्था को पूरी तरह बदल सकता है।

  • 'मेक इन इंडिया' को मिलेगा नया बढ़ावा, भारतीय ऑटो इंडस्ट्री में बड़ी खुशखबरी!

    'मेक इन इंडिया' को मिलेगा नया बढ़ावा, भारतीय ऑटो इंडस्ट्री में बड़ी खुशखबरी!


    नई दिल्ली। स्कोडा ऑटो फॉक्सवैगन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (एसएवीडब्ल्यूआईपीएल) ने मंगलवार को पुणे स्थित अपने मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में अपडेटेड फॉक्सवैगन टाइगुन का उत्पादन शुरू करने की घोषणा की। कंपनी का कहना है कि यह कदम उनकी ‘मेक इन इंडिया, फॉर इंडिया एंड द वर्ल्ड’ रणनीति को मजबूती प्रदान करेगा और भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में उनकी प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति को और मजबूत करेगा।

    नया डिजाइन और प्रीमियम फीचर्स

    एसएवीडब्ल्यूआईपीएल के अनुसार, अपडेटेड टाइगुन में नया डिजाइन और बेहतर प्रीमियम फीचर्स शामिल हैं। इसे भारतीय ड्राइविंग परिस्थितियों के अनुरूप तैयार किया गया है, जबकि यूरोपीय ड्राइविंग डायनामिक्स, आराम और सुरक्षा मानकों पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। इससे भारतीय ग्राहक उच्च गुणवत्ता और सुरक्षा के साथ आरामदायक अनुभव का लाभ उठा सकेंगे।

    उत्पादन शुरू होने पर कंपनी की प्रतिक्रिया

    कंपनी के प्रबंध निदेशक और सीईओ पीयूष अरोरा ने कहा, “नई फॉक्सवैगन टाइगुन का उत्पादन शुरू होना भारत में हमारे मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम की परिपक्वता को दर्शाता है। हमारी भारत स्थित इकाइयां अब वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी वाहनों का उच्च स्तरीय स्थानीयकरण करने के लिए तैयार हैं। यह घरेलू और निर्यात दोनों बाजारों की जरूरतों को कुशलतापूर्वक पूरा करने में मदद करेगा।

    एसयूवी पोर्टफोलियो में मजबूती

    ब्रांड निदेशक नितिन कोहली ने कहा कि टाइगुन लॉन्च के बाद से ही कंपनी की एसयूवी रणनीति का केंद्र रही है और इसने कंपनी के पोर्टफोलियो को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि चाकन प्लांट में उत्पादन भारतीय ग्राहकों के प्रति कंपनी की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

    बाजार में टाइगुन का प्रदर्शन

    2021 में लॉन्च हुई टाइगुन ने प्रदर्शन, आराम और सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करते हुए बाजार में अपनी मजबूत पकड़ बनाई है। कंपनी के अनुसार, अब तक 1.43 लाख से अधिक यूनिट्स का उत्पादन हो चुका है, जिनमें से लगभग 30 प्रतिशत का निर्यात वैश्विक बाजारों में किया गया है।

    पुणे प्लांट और कंपनी की स्थिति

    पुणे स्थित यह कंपनी ऑडी, पोर्श, लैम्बोर्गिनी और बेंटले सहित फॉक्सवैगन समूह के छह ब्रांडों का भारत में संचालन करती है। कंपनी ने 25 वर्ष पूर्व भारत में परिचालन शुरू किया था और वर्तमान में चाकन और छत्रपति संभाजीनगर में दो विनिर्माण संयंत्र संचालित करती है, जिनकी संयुक्त वार्षिक उत्पादन क्षमता 3.15 लाख यूनिट्स है।

    कर्मचारियों और ग्राहक सेवा नेटवर्क

    वर्तमान में कंपनी के लगभग 700 ग्राहक संपर्क केंद्र हैं और लगभग 5,000 कर्मचारी कार्यरत हैं। इससे यह स्पष्ट है कि फॉक्सवैगन ने न केवल उत्पादन बढ़ाया है, बल्कि ग्राहक सेवा और रोजगार के अवसरों को भी मजबूती प्रदान की है।

  • PM मोदी का विनिर्माताओं से आव्‍हान, कहा- भारत के लिए खुले हैं अवसरों के द्वार, क्वालिटी को बनाएं महामंत्र

    PM मोदी का विनिर्माताओं से आव्‍हान, कहा- भारत के लिए खुले हैं अवसरों के द्वार, क्वालिटी को बनाएं महामंत्र

    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने भारतीय उद्योग जगत से ‘गुणवत्ता’ को अपना महामंत्र बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में दुनिया विनिर्माण के क्षेत्र में विश्वसनीय और मजबूत भागीदारों की तलाश कर रही है, और यह भारत के लिए एक बड़ा अवसर है। उन्होंने कहा कि हाल में विभिन्न देशों के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) से भारतीय उद्यमियों और निर्यातकों के लिए अवसरों के नए द्वार खुले हैं, लेकिन इनका लाभ तभी उठाया जा सकता है जब भारतीय उत्पाद गुणवत्ता के उच्चतम मानकों पर खरे उतरें।

    प्रधानमंत्री मंगलवार को बजट 2026-27 पर आयोजित दूसरे वेबिनार का उद्घाटन कर रहे थे। इस दिनभर चलने वाले वेबिनार का विषय “आर्थिक वृद्धि को निरंतर संभालना और सशक्त करना” रखा गया है, जिसमें चार अलग-अलग सत्र आयोजित किए जा रहे हैं।

    एफटीए से खुले नए अवसर, आत्मविश्वास से बढ़ें उद्योग
    प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने कई देशों के साथ एफटीए किए हैं और इससे देश के लिए बड़े अवसर पैदा हुए हैं। ऐसे में उद्योग जगत की जिम्मेदारी है कि वह गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता न करे। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “आपका एक ही महामंत्र होना चाहिए—क्वालिटी, क्वालिटी और अधिक क्वालिटी।”

    उन्होंने उद्योगों से अपील की कि वे इन अवसरों का लाभ उठाने के लिए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें, नई प्रौद्योगिकियों को अपनाएं और अनुसंधान एवं विकास पर खर्च बढ़ाएं। उनका कहना था कि अनुसंधान पर कंजूसी करने के बजाय निवेश बढ़ाना समय की मांग है।

    विश्वस्तरीय से भी बेहतर उत्पाद देने की जरूरत
    प्रधानमंत्री ने भारतीय विनिर्माताओं से विश्वस्तर से भी बेहतर गुणवत्ता के उत्पाद प्रस्तुत करने का आह्वान करते हुए कहा कि गुणवत्ता पर सबसे अधिक समय, साधन और बुद्धि खर्च की जानी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि उद्योग जगत विश्व बाजार की जरूरतों का गहन अध्ययन और विश्लेषण करे तथा उसी अनुरूप अपनी विनिर्माण क्षमता विकसित करे।

    उन्होंने कहा कि आज वैश्विक अर्थव्यवस्था में बड़ा परिवर्तन हो रहा है और बाजार अब केवल लागत को नहीं देखते, बल्कि टिकाऊ और स्वस्थ उपायों को भी महत्व देते हैं। भारत इस बदलते परिदृश्य में एक विश्वसनीय विनिर्माण केंद्र के रूप में उभर सकता है।

    वेबिनार में चार अहम सत्र
    इस वेबिनार में चार प्रमुख सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। पहला सत्र विनिर्माण और उद्योगों के स्तर को उन्नत करने तथा रणनीतिक क्षेत्रों पर केंद्रित है। दूसरा सत्र सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों के लिए ऋण और बाजार सुविधाओं पर आधारित है। तीसरा सत्र नगरों के आर्थिक इलाकों की योजना से जुड़ा है, जबकि चौथा सत्र अवसंरचना विकास, लॉजिस्टिक्स और किराया जैसे विषयों पर केंद्रित है। उद्घाटन सत्र में प्रधानमंत्री ने बजट में सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्यमों, अवसंरचना, बायोफार्म, मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स तथा कार्बन कैप्चर एवं स्टोरेज के विकास के लिए की गई पहलों का विशेष उल्लेख किया।

    विकसित भारत के लिए साझेदारी जरूरी
    प्रधानमंत्री ने विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों, उद्योग जगत और संस्थानों के बीच पूर्ण तालमेल पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह लक्ष्य केवल साझेदारी के माध्यम से ही हासिल किया जा सकता है और सभी हितधारकों को मिलकर काम करना होगा।

  • कैट ने खुदरा व्यापारियों के लिए सस्ते ऋण ई-कॉमर्स पर नियंत्रण की मांग की

    कैट ने खुदरा व्यापारियों के लिए सस्ते ऋण ई-कॉमर्स पर नियंत्रण की मांग की


    नई दिल्ली । अखिल भारतीय व्यापारी परिसंघ कैट ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में खुदरा व्यापारियों के हितों का विशेष ध्यान रखने की अपील की है। कैट का कहना है कि बजट में खुदरा व्यापारियों के लिए सस्ते ऋण की सुविधा प्रदान की जाए और साथ ही ई-कॉमर्स पर नियंत्रण की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए ताकि व्यापारियों को अनुचित प्रतिस्पर्धा का सामना न करना पड़े।
    कैट के राष्ट्रीय महामंत्री और चांदनी चौक सीट से लोकसभा सांसद प्रवीन खंडेलवाल ने मंगलवार को बताया कि संगठन ने वित्त मंत्री के समक्ष कुछ प्रमुख सुझाव रखे हैं। इन सुझावों में व्यापार के लिए सम्मान सरलता सुरक्षा और समान अवसर प्रदान करने की बात की गई है। खंडेलवाल ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने कई महत्वपूर्ण पहलों की शुरुआत की है जिनमें “आत्मनिर्भर भारत” “मेक इन इंडिया” “डिजिटल इंडिया” और “लोकल के लिए वोकल” जैसे अभियानों ने देश के व्यापारिक वातावरण को एक नई दिशा दी है। उन्होंने कहा कि अब आगामी बजट में इन पहलों को और भी मजबूत बनाने की आवश्यकता है ताकि व्यापारियों को और अधिक प्रोत्साहन मिल सके।

    सस्ते ऋण की आवश्यकता
    कैट ने यह स्पष्ट किया है कि खुदरा व्यापारियों के लिए सस्ते ऋण की उपलब्धता व्यापार के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। वर्तमान में व्यापारियों को उच्च ब्याज दरों पर ऋण मिलता है जिससे उनके लिए व्यापार में वृद्धि करना और नई चुनौतियों का सामना करना मुश्किल हो जाता है। अगर सस्ते ऋण की सुविधा प्रदान की जाती है तो छोटे और मंझले व्यापारी अपनी व्यापारिक गतिविधियों को बेहतर तरीके से चला सकते हैं जिससे रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं। इसके अलावा व्यापारियों को ऋण के लिए कागजी प्रक्रिया में भी सरलता की आवश्यकता है। कैट ने वित्त मंत्री से यह भी अनुरोध किया है कि ऋण लेने की प्रक्रिया को और अधिक सरल और पारदर्शी बनाया जाए ताकि व्यापारी समय और श्रम की बचत कर सकें और अपने व्यापार को गति दे सकें।
    ई-कॉमर्स पर नियंत्रण की आवश्यकता
    कैट ने यह भी कहा कि ई-कॉमर्स प्लेटफार्मों पर बेईमानी से प्रतिस्पर्धा की वजह से खुदरा व्यापारियों को भारी नुकसान हो रहा है। कई बार ई-कॉमर्स कंपनियां बड़े पैमाने पर डिस्काउंट और भारी प्रमोशन करती हैं जिनका छोटे व्यापारियों से मुकाबला करना मुश्किल हो जाता है। कैट ने वित्त मंत्री से यह अनुरोध किया कि ई-कॉमर्स के नियमों को सख्त किया जाए और सुनिश्चित किया जाए कि यह प्लेटफॉर्म्स खुदरा व्यापारियों के लिए एक समान अवसर प्रदान करें न कि उन्हें नुकसान पहुँचाए। कैट का कहना है कि इन अनुचित प्रतिस्पर्धाओं के कारण खुदरा व्यापारियों को न केवल आर्थिक नुकसान हो रहा है बल्कि उनका सम्मान भी प्रभावित हो रहा है। यदि ई-कॉमर्स कंपनियों को नियंत्रित किया जाता है तो पारदर्शिता और समता को बढ़ावा मिलेगा जिससे सभी व्यापारी एक समान तरीके से व्यापार कर सकेंगे।

    सरकारी पहलों का महत्व
    प्रवीन खंडेलवाल ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में व्यापारिक वातावरण को बेहतर बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। आत्मनिर्भर भारत” अभियान के तहत छोटे और मंझले व्यापारियों को अपना व्यवसाय बढ़ाने के लिए कई अवसर दिए गए हैं। वहीं मेक इन इंडिया” और “डिजिटल इंडिया” जैसे अभियानों ने भारतीय व्यापारियों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में काम किया है। हालांकि उन्होंने कहा कि इन पहलों को और भी मजबूत किया जाना चाहिए ताकि व्यापारियों को अधिक प्रोत्साहन मिले और वे वैश्विक बाजार में बेहतर तरीके से प्रतिस्पर्धा कर सकें।
    कैट का यह सुझाव है कि आगामी बजट में छोटे और मंझले खुदरा व्यापारियों को ध्यान में रखते हुए सस्ते ऋण की सुविधा प्रदान की जाए साथ ही ई-कॉमर्स पर नियंत्रण भी सुनिश्चित किया जाए। यह कदम न केवल व्यापारियों के लिए अवसर पैदा करेगा बल्कि भारत के समग्र व्यापारिक वातावरण को भी एक नई दिशा दे सकता है। सरकार द्वारा उठाए गए कदमों को और भी सशक्त किया जाए ताकि देश की अर्थव्यवस्था और व्यापार क्षेत्र में संतुलन बना रहे और छोटे व्यापारियों को भी समान अवसर प्राप्त हो सकें।

  • भारत-जर्मनी 8 अरब डॉलर की मेगा डील: 6 साइलेंट किलर AIP पनडुब्बियों का निर्माण होगा भारत में

    भारत-जर्मनी 8 अरब डॉलर की मेगा डील: 6 साइलेंट किलर AIP पनडुब्बियों का निर्माण होगा भारत में


    नई दिल्ली। भारत और जर्मनी ने भारतीय नौसेना की ताकत और समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के लिए 8 अरब डॉलर की मेगा डील पर सहमति जताई है। इस डील के तहत भारत में 6 अत्याधुनिक स्टील्थ पारंपरिक पनडुब्बियों का निर्माण किया जाएगा। यह परियोजना प्रोजेक्ट 75I के अंतर्गत मझगांव डॉकयार्ड लिमिटेड MDL और जर्मनी की थिसेन क्रुप मरीन सिस्टम्स TKMS के बीच सहयोग से पूरी होगी।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस डील को भारत-जर्मनी के करीबी सहयोग का प्रतीक बताया और कहा कि देश में 2000 से अधिक जर्मन कंपनियां सक्रिय हैं जो दोनों देशों के मजबूत आर्थिक और तकनीकी रिश्तों को दर्शाती हैं। उन्होंने बताया कि इस समझौते से मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत पहल को भी बड़ा बल मिलेगा।

    इन 6 पनडुब्बियों की सबसे बड़ी खासियत उनकी एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन AIP तकनीक होगी। यह तकनीक पारंपरिक डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों की सबसे बड़ी कमी को दूर करती है। सामान्य पनडुब्बियों को बैटरी चार्ज करने के लिए सतह पर आना पड़ता है या स्नॉर्कल का उपयोग करना पड़ता है जिससे उनका लोकेशन दुश्मनों के लिए पता चल सकता है। AIP तकनीक से लैस पनडुब्बियां हफ्तों तक पानी के भीतर रह सकती हैं कम शोर करती हैं और दुश्मन की नजर से लंबी अवधि तक छिपी रह सकती हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार इन पनडुब्बियों के शामिल होने से हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री निगरानी सुरक्षा और रणनीतिक संतुलन और मजबूत होगा। AIP पनडुब्बियां टॉरपीडो एंटी-शिप मिसाइल क्रूज़ मिसाइल और समुद्री माइन जैसे पारंपरिक हथियारों से लैस होंगी जो उन्हें बेहद खतरनाक और प्रभावी बनाती हैं।प्रधानमंत्री मोदी और जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की हालिया बैठक में दोनों नेताओं ने कहा कि भारत-जर्मनी हर क्षेत्र में मिलकर काम कर रहे हैं और यह परियोजना इसके नए अध्याय की शुरुआत है। यह समझौता भारतीय नौसेना की क्षमता को नए स्तर पर ले जाएगा और भारतीय रक्षा उद्योग को तकनीकी रूप से मजबूत बनाएगा।

    मझगांव डॉकयार्ड में इन पनडुब्बियों का निर्माण न केवल भारत की नौसेना की ताकत बढ़ाएगा बल्कि देश के रक्षा क्षेत्र में स्थानीय उत्पादन रोजगार और तकनीकी विशेषज्ञता को भी बढ़ावा देगा। यह परियोजना देश के आत्मनिर्भर भारत मिशन के तहत महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।इस डील को भारतीय नौसेना के इतिहास की सबसे बड़ी पनडुब्बी परियोजनाओं में से एक माना जा रहा है। रणनीतिक दृष्टि से देखें तो AIP तकनीक वाली पनडुब्बियों की मौजूदा वैश्विक नौसैनिक युद्ध में अहम भूमिका है। इससे भारत की समुद्री ताकत और क्षेत्रीय प्रभुत्व दोनों मजबूत होंगे।