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  • मलेरिया कब बन सकता है जानलेवा? बुखार से लेकर बेहोशी तक इन संकेतों को पहचानें, डॉक्टर ने बताई जरूरी सावधानियां

    मलेरिया कब बन सकता है जानलेवा? बुखार से लेकर बेहोशी तक इन संकेतों को पहचानें, डॉक्टर ने बताई जरूरी सावधानियां


    नई दिल्ली । मानसून के मौसम में मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ जाता है और इनमें मलेरिया एक ऐसी बीमारी है जिसे नजरअंदाज करना कई बार गंभीर पड़ सकता है। तेज बुखार ठंड लगना कंपकंपी सिरदर्द और कमजोरी जैसे लक्षण अक्सर सामान्य वायरल संक्रमण जैसे लगते हैं लेकिन यही संकेत मलेरिया की शुरुआत भी हो सकते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बुखार के साथ ठंड और कंपकंपी महसूस हो रही है तो इसे हल्के में लेने के बजाय डॉक्टर की सलाह लेकर समय पर जांच करानी चाहिए।

    मलेरिया संक्रमित मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से फैलने वाला परजीवी संक्रमण है। इसकी शुरुआत कई बार सामान्य बुखार की तरह होती है जिसके कारण लोग इसे वायरल फीवर समझकर घर पर ही इलाज शुरू कर देते हैं। डॉक्टरों के अनुसार तेज बुखार के साथ सिरदर्द ठंड लगना कंपकंपी कमजोरी मतली या उल्टी जैसे लक्षण दिखाई दें तो सतर्क हो जाना चाहिए। केवल लक्षणों के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि व्यक्ति को मलेरिया है या नहीं इसलिए समय पर जांच कराना सबसे जरूरी कदम माना जाता है।

    विशेषज्ञों की सलाह है कि मलेरिया का संदेह होने पर खुद से एंटी मलेरियल दवा शुरू नहीं करनी चाहिए। बिना जांच और डॉक्टर की सलाह के दवा लेने से सही बीमारी की पहचान में देरी हो सकती है और स्वास्थ्य संबंधी दूसरी समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं। डॉक्टर जांच के परिणाम और मरीज की स्थिति के आधार पर बीमारी का प्रकार तथा सही इलाज तय करते हैं। समय रहते मलेरिया की पहचान हो जाए और उचित उपचार शुरू कर दिया जाए तो गंभीर जटिलताओं के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

    इलाज शुरू होने के बाद भी मरीजों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है। कई बार दवा लेने के बाद बुखार या कमजोरी कम होने लगती है और मरीज खुद को ठीक मानकर दवा बीच में ही बंद कर देते हैं। ऐसा करना खतरनाक हो सकता है। डॉक्टर की सलाह के बिना दवा की मात्रा कम या ज्यादा करना और इलाज की अवधि बदलना भी उचित नहीं है। मलेरिया का उपचार मरीज की स्थिति और संक्रमण के प्रकार के अनुसार तय किया जाता है इसलिए पूरी दवा और डॉक्टर की सलाह का पालन करना जरूरी है।

    कुछ लक्षण ऐसे हैं जिन्हें मलेरिया की गंभीर स्थिति का संकेत माना जा सकता है। अत्यधिक कमजोरी बार बार उल्टी होना सांस लेने में परेशानी पेशाब की मात्रा बहुत कम हो जाना असामान्य रक्तस्राव चेतना या व्यवहार में बदलाव भ्रम बेहोशी और दौरे पड़ना जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत अस्पताल जाना चाहिए। गंभीर मामलों में शरीर के कई अंगों पर असर पड़ सकता है इसलिए ऐसे संकेतों को बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

    छोटे बच्चों विशेषकर पांच साल से कम उम्र के बच्चों और गर्भवती महिलाओं में मलेरिया को लेकर अधिक सतर्क रहने की जरूरत होती है। कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों में भी संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है। इसलिए बुखार लंबे समय तक बना रहे या अचानक हालत बिगड़ने लगे तो घरेलू उपचार पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर से संपर्क करना बेहतर है।

    मलेरिया से बचाव के लिए मच्छरों से सुरक्षा भी बेहद जरूरी है। घर और आसपास पानी जमा न होने दें मच्छरदानी का इस्तेमाल करें और खासकर शाम तथा रात के समय मच्छरों के काटने से बचाव करें। याद रखें तेज बुखार और कंपकंपी को सामान्य समझकर टालना सही नहीं है। समय पर जांच सही इलाज और गंभीर लक्षणों पर तुरंत अस्पताल पहुंचना ही मलेरिया से होने वाले बड़े खतरे को कम करने का सबसे सुरक्षित तरीका है

  • मलेरिया से बचना है तो आज से बदलें ये आदतें, मच्छरों की रोकथाम से लेकर बचाव तक जानें जरूरी बातें

    मलेरिया से बचना है तो आज से बदलें ये आदतें, मच्छरों की रोकथाम से लेकर बचाव तक जानें जरूरी बातें


    नई दिल्ली। बारिश का मौसम आते ही मच्छरों से होने वाली बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इनमें मलेरिया भी एक प्रमुख बीमारी है जो संक्रमित मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से फैलती है। मलेरिया से बचाव के लिए सबसे जरूरी है कि मच्छरों की संख्या को नियंत्रित किया जाए और उनके काटने से खुद को सुरक्षित रखा जाए। खासकर बरसात में घर के आसपास जमा पानी पर नजर रखना जरूरी है क्योंकि ठहरा हुआ पानी मच्छरों के पनपने की जगह बन सकता है। थोड़ी सी सावधानी अपनाकर मलेरिया के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

    मलेरिया से बचने का सबसे प्रभावी तरीका मच्छरों के काटने से बचाव करना है। शाम और रात के समय जब मच्छरों की गतिविधि बढ़ सकती है तब पूरी बांह के कपड़े पहनना बेहतर रहता है। घर में खिड़कियों और दरवाजों पर मच्छररोधी जाली लगाई जा सकती है। सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल भी उपयोगी है। जरूरत के अनुसार मच्छर भगाने वाली क्रीम या अन्य मच्छररोधी साधनों का इस्तेमाल किया जा सकता है। बच्चों को मच्छरों से बचाने के लिए विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

    घर और आसपास पानी जमा न होने देना मलेरिया की रोकथाम का दूसरा महत्वपूर्ण तरीका है। गमलों की प्लेटों कूलर की टंकियों बाल्टियों पुराने टायरों छतों और अन्य स्थानों पर जमा पानी को नियमित रूप से खाली करें। पानी की टंकियों और ऐसे सभी बर्तनों को ढककर रखें जिनमें पानी जमा रहता है। कूलर का पानी भी नियमित रूप से बदलें और उसकी सफाई करें। अगर आसपास किसी जगह लंबे समय से पानी जमा है तो उसे हटाने या संबंधित स्थानीय निकाय को इसकी सूचना देने की कोशिश करें।

    मलेरिया के शुरुआती लक्षणों को पहचानना भी जरूरी है। बुखार ठंड लगना सिरदर्द शरीर में कमजोरी पसीना आना और बदन दर्द जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। कुछ मामलों में मतली या उल्टी जैसी परेशानी भी हो सकती है। हालांकि केवल लक्षणों के आधार पर मलेरिया की पुष्टि नहीं की जा सकती। ऐसे लक्षण होने पर स्वास्थ्य केंद्र या डॉक्टर से संपर्क करके आवश्यक जांच करानी चाहिए।

    मलेरिया के इलाज में देरी करना नुकसानदायक हो सकता है। खासकर तेज बुखार लगातार कमजोरी बेहोशी सांस लेने में परेशानी दौरे या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है। बच्चों गर्भवती महिलाओं बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों में बीमारी गंभीर रूप ले सकती है इसलिए इनके मामले में लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

    मलेरिया से बचाव केवल व्यक्तिगत सावधानी तक सीमित नहीं है। पूरे समुदाय को मिलकर मच्छरों के प्रजनन स्थल कम करने होंगे। घर के आसपास सफाई रखना नालियों में पानी जमा न होने देना और लंबे समय तक खुले में पानी न छोड़ना सामूहिक रूप से बीमारी के खतरे को कम कर सकता है। बारिश के मौसम में साफ सफाई और मच्छर नियंत्रण को लेकर जागरूकता सबसे जरूरी हथियार है।

    ध्यान रखें कि मलेरिया से बचने का सबसे अच्छा तरीका मच्छरों के काटने से सुरक्षा और मच्छरों के प्रजनन को रोकना है। यदि बुखार या मलेरिया से जुड़े लक्षण दिखाई दें तो खुद से दवा लेने के बजाय चिकित्सकीय सलाह और जांच कराना बेहतर है। सही समय पर पहचान और इलाज से गंभीर जटिलताओं के खतरे को कम किया जा सकता है।

  • मलेरिया से बचाव के लिए जानिए जरूरी सावधानियां और घरेलू सुरक्षा उपाय जो रखेंगे पूरे परिवार को सुरक्षित

    मलेरिया से बचाव के लिए जानिए जरूरी सावधानियां और घरेलू सुरक्षा उपाय जो रखेंगे पूरे परिवार को सुरक्षित


    नई दिल्ली । मानसून का मौसम जहां गर्मी से राहत लेकर आता है वहीं कई संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ा देता है। इनमें मलेरिया सबसे प्रमुख बीमारियों में शामिल है। यह बीमारी संक्रमित मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से फैलती है। यदि समय पर इलाज न मिले तो यह गंभीर रूप भी ले सकती है। ऐसे में बरसात के मौसम में कुछ जरूरी सावधानियां अपनाकर मलेरिया से बचाव किया जा सकता है।

    मलेरिया से बचने का सबसे प्रभावी तरीका मच्छरों को पनपने से रोकना है। घर के आसपास कहीं भी पानी जमा न होने दें क्योंकि रुका हुआ पानी मच्छरों के प्रजनन का सबसे बड़ा कारण होता है। कूलर गमले टायर बाल्टी और छत पर रखे बर्तनों का पानी नियमित रूप से बदलें। यदि कहीं लंबे समय तक पानी जमा रहता है तो उसे तुरंत साफ करें।

    घर के दरवाजों और खिड़कियों पर जाली लगाना भी मच्छरों को अंदर आने से रोकने का अच्छा उपाय है। रात में सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करें। बच्चों बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को विशेष रूप से मच्छरों से बचाकर रखना चाहिए क्योंकि इनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता अपेक्षाकृत कमजोर हो सकती है।

    शाम के समय पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनना भी लाभदायक माना जाता है। हल्के रंग के पूरे बाजू के कपड़े और लंबे पायजामे पहनने से मच्छरों के काटने की संभावना कम हो जाती है। आवश्यकता होने पर डॉक्टर की सलाह के अनुसार मच्छर भगाने वाली क्रीम या रिपेलेंट का भी उपयोग किया जा सकता है।

    घर और आसपास की साफ सफाई का विशेष ध्यान रखें। नालियों की नियमित सफाई करें और कचरा खुले में जमा न होने दें। स्वच्छ वातावरण न केवल मलेरिया बल्कि डेंगू चिकनगुनिया जैसी कई बीमारियों के खतरे को भी कम करता है।

    स्वस्थ शरीर संक्रमण से लड़ने में अधिक सक्षम होता है। इसलिए संतुलित आहार लें पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं और ताजे फल तथा हरी सब्जियों का सेवन करें। पर्याप्त नींद और नियमित व्यायाम भी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में मदद करते हैं।

    यदि किसी व्यक्ति को तेज बुखार ठंड लगना सिरदर्द शरीर में दर्द अत्यधिक पसीना या कमजोरी महसूस हो तो इसे सामान्य वायरल बुखार समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या डॉक्टर से संपर्क करें और जांच कराएं। समय पर उपचार मिलने से बीमारी को गंभीर होने से रोका जा सकता है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि स्वयं दवा लेने के बजाय चिकित्सकीय सलाह के अनुसार ही इलाज कराना चाहिए। अधूरा उपचार बीमारी को जटिल बना सकता है। साथ ही यदि परिवार के किसी सदस्य को मलेरिया हो जाए तो घर के अन्य लोगों को भी मच्छरों से बचाव के उपाय और अधिक सावधानी से अपनाने चाहिए।

    बरसात के मौसम में थोड़ी सी सतर्कता और नियमित स्वच्छता की आदत मलेरिया जैसी गंभीर बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है। यदि हर व्यक्ति अपने घर और आसपास सफाई बनाए रखे तथा मच्छरों को पनपने का अवसर न दे तो मलेरिया के मामलों में काफी कमी लाई जा सकती है।