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  • Maldives में खसरे का प्रकोप….. मुसीबत में फिर संकटमोचक बना भारत…. वैक्सीन-दवाएं भेजी

    Maldives में खसरे का प्रकोप….. मुसीबत में फिर संकटमोचक बना भारत…. वैक्सीन-दवाएं भेजी


    माले।
    भारत (India) ने अपनी ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति (‘Neighbourhood First’ policy) को दोहराते हुए, मालदीव (Maldives) में फैले खसरे (Measles) के प्रकोप से निपटने के लिए उसे बड़ी मात्रा में चिकित्सा सहायता (Medical Assistance) भेजी है। भारत ने मालदीव में खसरे के बढ़ते मामलों से निपटने और वहां टीकाकरण को मजबूत करने में मदद के लिए खसरे के टीके की 20,000 खुराक और लगभग तीन टन मेडिकल आपूर्ति भेजी है।

    विदेश मंत्रालय (MEA) के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर इस बात की पुष्टि की है कि भारत सरकार सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा और टीकाकरण को मजबूत करने के लिए मालदीव की मदद कर रही है। भेजी गई सहायता में शामिल हैं:

    – 20,000 एमआर (Measles-Rubella) वैक्सीन की खुराकें: ताकि बीमारी के प्रसार को तुरंत रोका जा सके।
    – 3 टन का मेडिकल कंसाइनमेंट: इसमें आवश्यक दवाइयां, सिरिंज, डायग्नोस्टिक किट और अन्य महत्वपूर्ण चिकित्सा सामग्री शामिल हैं।
    – विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, यह समय पर दी गई सहायता मालदीव सरकार को खसरे के बढ़ते मामलों को नियंत्रित करने और उनकी प्रतिक्रिया क्षमताओं को बढ़ाने में काफी मदद करेगी।


    कूटनीतिक संबंध और ‘विजन महासागर’

    मालदीव का भारत की ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति और ‘विजन महासागर’ में एक विशेष और महत्वपूर्ण स्थान है। दोनों देशों के लोगों के आपसी लाभ और साझा प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने के लिए भारत, मालदीव सरकार के साथ मिलकर काम करने के लिए हमेशा तत्पर रहा है। संकट के समय में सबसे पहले मदद का हाथ बढ़ाना भारत की इसी विदेश नीति का एक अहम हिस्सा है।


    मालदीव में खसरे की वापसी: एक चिंता का विषय

    विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने वर्ष 2021 में इस बात की पुष्टि की थी कि मालदीव ने खसरे का पूरी तरह से उन्मूलन कर दिया है। एक बार बीमारी को खत्म करने के बाद, देश में इस नए प्रकोप का सामने आना एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता है, जिससे निपटने के लिए अब तेजी से कदम उठाए जा रहे हैं।


    खसरा क्या है और इसके लक्षण क्या हैं?

    खसरा एक बेहद संक्रामक वायरल बीमारी है, जो मुख्य रूप से बच्चों को अपना शिकार बनाती है। यह संक्रमित व्यक्ति की नाक, मुंह या गले से निकलने वाली बूंदों के जरिए हवा में फैलता है। संक्रमण के 10-12 दिन बाद इसके लक्षण दिखाई देते हैं। इनमें तेज बुखार, नाक बहना, आंखें लाल होना और मुंह के अंदर छोटे सफेद धब्बे पड़ना शामिल हैं। कुछ दिनों के बाद शरीर पर लाल दाने उभरने लगते हैं, जो चेहरे और ऊपरी गर्दन से शुरू होकर धीरे-धीरे पूरे शरीर में नीचे की ओर फैल जाते हैं।


    खसरा उन्मूलन का वैश्विक महत्व

    WHO और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, खसरे के उन्मूलन से व्यापक स्तर पर जीवन रक्षक प्रभाव पड़ते हैं। इस क्षेत्र में उन्मूलन रणनीतियों से हर साल खसरे के कम से कम 11 लाख मामलों को रोका जा सकता है। रोके गए हर एक मामले से व्यक्ति के लगभग 2 सप्ताह के ‘विकलांगता-समायोजित जीवन वर्ष’ (DALYs) को बचाया जा सकता है।


    मृत्यु दर में कमी

    2020-2023 के दौरान विभिन्न रणनीतियों के संयोजन से खसरे के कारण होने वाली लगभग 11 लाख मौतों को टाला गया है। प्रति मृत्यु को टालने के लिए औसत खर्च मात्र 1,373 अमेरिकी डॉलर आंका गया है, जो इस बीमारी के खिलाफ टीकाकरण को सबसे प्रभावी और जरूरी स्वास्थ्य निवेश बनाता है।

  • वैश्विक नेताओं की शुभकामनाओं पर पीएम मोदी का आभार, भारत-मालदीव समेत कई देशों के साथ संबंध मजबूत करने की दोहराई प्रतिबद्धता

    वैश्विक नेताओं की शुभकामनाओं पर पीएम मोदी का आभार, भारत-मालदीव समेत कई देशों के साथ संबंध मजबूत करने की दोहराई प्रतिबद्धता

    नई दिल्ली । भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देश के सबसे लंबे समय तक लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्हें मिल रही शुभकामनाओं का सिलसिला लगातार जारी है। विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्षों, प्रधानमंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर उन्हें बधाई संदेश भेजे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने भी इन संदेशों का जवाब देते हुए वैश्विक साझेदारी, आपसी सहयोग और मजबूत द्विपक्षीय संबंधों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया है।

    प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद का धन्यवाद करते हुए कहा कि भारत और मालदीव के बीच संबंध केवल कूटनीतिक साझेदारी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दोनों देशों के बीच हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, समृद्धि और सतत विकास को लेकर साझा दृष्टिकोण भी मौजूद है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत भविष्य में भी दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध रहेगा।

    भारत और मालदीव के संबंध पिछले कुछ वर्षों में क्षेत्रीय रणनीतिक महत्व के कारण लगातार चर्चा में रहे हैं। ऐसे समय में प्रधानमंत्री की यह टिप्पणी दोनों देशों के बीच सहयोग और विश्वास को आगे बढ़ाने के संकेत के रूप में देखी जा रही है। हिंद महासागर क्षेत्र में स्थिरता और विकास को लेकर भारत की नीति में मालदीव महत्वपूर्ण भागीदार माना जाता है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने ऑस्ट्रिया के फेडरल चांसलर क्रिश्चन स्टॉकर की शुभकामनाओं का भी आभार व्यक्त किया। उन्होंने हाल में हुई मुलाकातों और संवादों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत और ऑस्ट्रिया के बीच सहयोग के नए अवसरों पर मिलकर काम करने की दिशा में दोनों देश आगे बढ़ेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि द्विपक्षीय संबंधों को और सुदृढ़ करने की संभावनाएं मौजूद हैं।

    फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब को धन्यवाद देते हुए प्रधानमंत्री ने हालिया कूटनीतिक संपर्कों और रायसीना डायलॉग में उनकी भागीदारी को याद किया। उन्होंने कहा कि भारत और फिनलैंड के बीच सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए दोनों देश प्रतिबद्ध हैं। प्रौद्योगिकी, नवाचार और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग की संभावनाओं को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने भी प्रधानमंत्री मोदी को बधाई देते हुए दोनों देशों के बीच आर्थिक और व्यापारिक सहयोग को मजबूत बनाने की इच्छा व्यक्त की। विशेष रूप से मुक्त व्यापार समझौते की दिशा में जारी प्रयासों का उल्लेख करते हुए उन्होंने भविष्य में संबंधों के और विस्तार की उम्मीद जताई। इसे भारत और न्यूजीलैंड के बीच बढ़ते आर्थिक संबंधों का सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

    ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते ने प्रधानमंत्री मोदी की उपलब्धि को भारतीय लोकतंत्र में जनता के विश्वास का प्रतीक बताया। उन्होंने भारत के साथ साझेदारी को और मजबूत करने की इच्छा व्यक्त की। वहीं जापान के पूर्व प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा ने भी प्रधानमंत्री मोदी को लंबे और सफल कार्यकाल के लिए बधाई देते हुए भविष्य में फिर मुलाकात की उम्मीद जताई।

    विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक नेताओं की ओर से मिल रही ये शुभकामनाएं केवल व्यक्तिगत सम्मान का प्रतीक नहीं हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका और प्रभाव को भी दर्शाती हैं। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा दिए गए जवाबों में भी यही संदेश दिखाई देता है कि भारत आने वाले समय में अपने रणनीतिक, आर्थिक और कूटनीतिक साझेदारों के साथ सहयोग को और गहरा करने की दिशा में सक्रिय रूप से आगे बढ़ता रहेगा।

  • कर्ज के दबाव में मालदीव, अब भारत से फिर उम्मीद; करेंसी स्वैप बढ़ाने की गुहार

    कर्ज के दबाव में मालदीव, अब भारत से फिर उम्मीद; करेंसी स्वैप बढ़ाने की गुहार


    नई दिल्ली। आर्थिक संकट से जूझ रहे मालदीव ने एक बार फिर भारत की ओर रुख किया है। बढ़ते कर्ज और घटते विदेशी मुद्रा भंडार के बीच राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की सरकार ने भारत से करेंसी स्वैप सुविधा को आगे बढ़ाने की अपील की है। हालांकि, भारत के लिए मौजूदा नियमों और शर्तों के चलते इस मांग पर फैसला लेना आसान नहीं माना जा रहा।
    दरअसल, मालदीव इस समय गंभीर वित्तीय दबाव में है। अंतरराष्ट्रीय कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा है, जबकि विदेशी मुद्रा भंडार तेजी से घट रहा है। ऊपर से पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले पर्यटन सेक्टर को झटका दिया है। ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी ने संकट को और गहरा कर दिया है।

    नियम बने बड़ी बाधा

    सूत्रों के अनुसार, मालदीव ने भारत से करेंसी स्वैप सुविधा के विस्तार की मांग की है, लेकिन भारतीय व्यवस्था में दो बार निकासी के बीच ‘कूलिंग-ऑफ पीरियड’ अनिवार्य होता है। इसके अलावा कर्ज को आगे बढ़ाने (रोल-ओवर) की भी सीमाएं तय हैं। ऐसे में तकनीकी कारणों से भारत के लिए तुरंत राहत देना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। यदि इस बार मदद नहीं मिलती, तो मालदीव की आर्थिक हालत और बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है।

    भारत पहले भी दे चुका है सहारा

    भारत पहले भी कई बार मालदीव की मदद करता रहा है। अक्टूबर 2024 में 400 मिलियन डॉलर की करेंसी स्वैप सुविधा दी गई थी, जिसे दो बार बढ़ाया गया। इसके अलावा 2025 में 50-50 मिलियन डॉलर के ब्याज मुक्त ट्रेजरी बिलों की अवधि भी बढ़ाई गई।

    जुलाई 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मालदीव यात्रा के दौरान 565 मिलियन डॉलर की लाइन ऑफ क्रेडिट देने और कर्ज चुकाने की शर्तों में राहत का ऐलान भी किया गया था।

    रेटिंग एजेंसियों की चेतावनी

    वैश्विक एजेंसियों ने भी मालदीव की स्थिति को चिंताजनक बताया है। Fitch Ratings ने देश की रेटिंग ‘CC’ पर रखी है, जो डिफॉल्ट के उच्च खतरे का संकेत देती है, जबकि Moody’s ने ‘CAA2’ रेटिंग बरकरार रखी है।

    कर्ज चुकाने से खाली हुआ खजाना

    अप्रैल 2026 में मालदीव पर करीब 1 अरब डॉलर चुकाने का दबाव था। इसमें 500 मिलियन डॉलर का सुकुक बॉन्ड शामिल था, जिसे सरकार ने अपने सॉवरेन डेवलपमेंट फंड से चुका दिया। हालांकि, इससे विदेशी मुद्रा भंडार में बड़ी कमी आ गई।

    पर्यटन पर टिकी अर्थव्यवस्था

    मालदीव की अर्थव्यवस्था काफी हद तक पर्यटन पर निर्भर है। लेकिन मिडिल ईस्ट संकट के चलते पर्यटकों की संख्या घटी है और ईंधन महंगा हुआ है। ऐसे हालात में नए कर्ज जुटाना भी मुश्किल होता जा रहा है।

    कुल मिलाकर, मालदीव इस समय आर्थिक मोर्चे पर नाजुक दौर से गुजर रहा है और उसकी नजरें एक बार फिर भारत की मदद पर टिकी हैं।

  • मॉरीशस ने मालदीव के साथ तोड़े सभी राजनयिक रिश्ते, चागोस द्वीप विवाद बना वजह

    मॉरीशस ने मालदीव के साथ तोड़े सभी राजनयिक रिश्ते, चागोस द्वीप विवाद बना वजह


    नई दिल्ली/माले। मॉरीशस सरकार ने शुक्रवार 27 फरवरी को एक बड़ा कूटनीतिक फैसला लिया और मालदीव के साथ अपने सभी राजनयिक संबंधों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। यह कदम मालदीव के चागोस द्वीप समूह की संप्रभुता को लेकर बदलते रुख के बाद उठाया गया। ध्यान दें कि दोनों देश भारत के मित्र हैं।

    विवाद का कारण

    मॉरीशस के विदेश मंत्रालय के अनुसार मालदीव ने हाल ही में चागोस द्वीप समूह पर मॉरीशस की संप्रभुता को मान्यता देना बंद कर दिया है। साथ ही मालदीव ने मॉरीशस और ब्रिटेन के बीच चागोस को लेकर हुए हालिया समझौते पर आपत्ति जताई। मॉरीशस की कैबिनेट ने इस कदम को राष्ट्रीय हितों की रक्षा और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के पालन के लिए आवश्यक बताया।

    मालदीव का रुख

    मालदीव के राष्ट्रपति इब्राहिम मुइज्जू ने 5 फरवरी को स्टेट ऑफ द नेशन संबोधन में कहा कि चागोस पर मालदीव का दावा मॉरीशस या किसी अन्य देश से अधिक मजबूत है। उन्होंने 2022 में मालदीव की पिछली सरकार द्वारा मॉरीशस की मान्यता को औपचारिक रूप से वापस ले लिया और इसे समुद्री हितों की सुरक्षा के लिए जरूरी बताया।

    चागोस द्वीप समूह: विवाद की पृष्ठभूमि

    चागोस द्वीप समूह हिंद महासागर में स्थित 60 से अधिक छोटे द्वीपों का समूह है जिसमें सबसे बड़ा डिएगो गार्सिया है। रणनीतिक रूप से इसका महत्व बहुत अधिक है क्योंकि यहां से मध्य पूर्व दक्षिण एशिया और अफ्रीका पर सैन्य और सुरक्षा निगरानी आसान है।

    1965 में ब्रिटेन ने मॉरीशस से चागोस को अलग कर दिया और इसे ब्रिटिश-हिंद महासागर क्षेत्र का हिस्सा बना दिया। डिएगो गार्सिया पर अमेरिका ने 1966 में 50 साल के पट्टे पर सैन्य अड्डा बनाया जो आज भी अमेरिकी रणनीतिक हितों के लिए महत्वपूर्ण है। इसके लिए ब्रिटेन ने 1967-1973 के बीच द्वीप के 1,500–2,000 मूल निवासियों को मॉरीशस और सेशेल्स में विस्थापित कर दिया।

    अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप

    मॉरीशस ने दशकों तक चागोस पर अपनी संप्रभुता के लिए कानूनी लड़ाई लड़ी। 2019 में ICJ ने ब्रिटेन को द्वीप को मॉरीशस को सौंपने की सलाह दी। UN महासभा ने भी ब्रिटेन से मॉरीशस को चागोस सौंपने का प्रस्ताव पारित किया।

    हालिया ब्रिटेन-मॉरीशस समझौता

    ब्रिटेन और मॉरीशस ने समझौता किया जिसमें मॉरीशस की संप्रभुता को मान्यता दी गई लेकिन डिएगो गार्सिया पर अमेरिकी सैन्य बेस लंबे पट्टे (99 साल) के तहत संचालित होता रहेगा।

    मालदीव का विवाद
    मालदीव ने अब चागोस पर मॉरीशस की संप्रभुता और ब्रिटेन के साथ हुए समझौते पर आपत्ति जताई। इससे मॉरीशस ने मालदीव के साथ सभी राजनयिक संबंध तोड़ दिए।